प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: क्यों कहलाते हैं ‘प्रधानसेवक

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17 सितंबर, 2025 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 वर्ष के हो जाएंगे। यह अवसर उनकी उपलब्धियों, नेतृत्व शैली और जनसेवा के प्रति समर्पण पर चर्चा करने का एक उपयुक्त मौका है। नरेंद्र मोदी की पहचान न केवल एक राजनेता के रूप में, बल्कि ‘प्रधानसेवक’ के रूप में भी रही है-एक ऐसा शब्द जो उन्होंने स्वयं अपनाया और जिसे उनकी नीतियों, कार्यशैली और जनता के प्रति जवाबदेही ने सार्थक किया। आखिर, नरेंद्र मोदी को ‘प्रधानसेवक’ क्यों कहा जाता है? यह सवाल उनके कार्यों, नीतियों, जनसंपर्क और संकटकाल में नेतृत्व की गहन पड़ताल से समझा जा सकता है।

सेवक की भावना: जनता के लिए समर्पण

2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपने पहले भाषण में कहा था, “मैं आपका सेवक हूं, न कि शासक।” यह कथन केवल सांकेतिक नहीं था, बल्कि उनकी कार्यशैली का आधार बना। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने 13 वर्षों के कार्यकाल (2001-2014) से लेकर केंद्र में 11 वर्षों के नेतृत्व तक, उनकी नीतियां जनता की बुनियादी आवश्यकताओं को संबोधित करती रही हैं। उनकी सोच ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे में परिलक्षित होती है, जिसने समावेशी विकास को नया आयाम दिया। बाद में इसे ‘सबका विश्वास’ और ‘सबका प्रयास’ के साथ और विस्तार दिया गया, जो सामाजिक समरसता और जनभागीदारी पर जोर देता है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना (2014) इसका एक ठोस उदाहरण है। इस योजना के तहत 53 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए, जिसने लाखों गरीब परिवारों को वित्तीय समावेशन का अवसर दिया। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वित्तीय समावेशन का स्तर 2014 के 50% से बढ़कर 2021 तक 80% हो गया। इसी तरह, आयुष्मान भारत योजना (2018) ने 50 करोड़ से अधिक लोगों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया, जिससे गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हुईं। ये योजनाएं उनकी उस सोच को दर्शाती हैं, जिसमें जनता की सेवा सर्वोपरि है।

जनता से सीधा संवाद

नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का एक प्रमुख कारण उनकी जनता से सीधे संवाद करने की असाधारण क्षमता है। ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम, जो 2014 से शुरू हुआ, इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सितंबर 2025 तक इसके 113 से अधिक एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं। इस कार्यक्रम में मोदी न केवल सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाते हैं, बल्कि समाज के गुमनाम नायकों की कहानियों को उजागर करते हैं, जो सामाजिक जागरूकता और प्रेरणा का स्रोत बनता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 70% से अधिक श्रोता इस कार्यक्रम को प्रेरणादायक और सूचनात्मक मानते हैं।

सोशल मीडिया, विशेष रूप से X प्लेटफॉर्म, पर उनकी सक्रिय उपस्थिति उनकी पारदर्शी और जवाबदेह कार्यशैली को दर्शाती है। 2025 तक उनके X हैंडल (@narendramodi) पर 100 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं, जो उन्हें विश्व के सबसे अधिक फॉलो किए जाने वाले नेताओं में से एक बनाता है। यह जनता के साथ उनकी निरंतर संलग्नता और उनकी नीतियों को साझा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नीतियों में सेवा की भावना

मोदी की नीतियां उनकी सेवक भावना का आधार हैं। स्वच्छ भारत अभियान (2014) ने स्वच्छता को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया। इस अभियान के तहत 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 2019 तक भारत को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अनुमान लगाया कि इससे 300,000 से अधिक बच्चों की जान बची। यह अभियान केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी को बढ़ावा दिया।

इसी तरह, ‘मेक इन इंडिया’ (2014) और ‘डिजिटल इंडिया’ (2015) ने भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत किया। मेक इन इंडिया के तहत भारत में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान बढ़ा, और 2025 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। डिजिटल इंडिया ने इंटरनेट कनेक्टिविटी को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया, जिससे डिजिटल भुगतान में 400% की वृद्धि हुई। ये पहलें युवाओं को रोजगार और तकनीकी सशक्तीकरण का अवसर प्रदान करती हैं।

संकट में नेतृत्व

संकटकाल में नेतृत्व ही एक सच्चे सेवक की असली पहचान होती है। कोविड-19 महामारी (2020-2022) के दौरान नरेंद्र मोदी ने जिस तरह देश को एकजुट किया, वह उनकी सेवक भावना का प्रतीक है। ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया गया, जिसने संकट के समय भुखमरी को रोका। भारत ने 200 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज वितरित कीं, और ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत 100 से अधिक देशों को मुफ्त वैक्सीन प्रदान की, जिसने भारत को वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व में अग्रणी बनाया।

सामाजिक समावेश और सशक्तीकरण

मोदी की नीतियों में सामाजिक समावेश और सशक्तीकरण का विशेष स्थान है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ (2015) ने लिंगानुपात में सुधार किया, और 2023 तक 1,020 लिंगानुपात (प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाएं) दर्ज किया गया। ‘उज्ज्वला योजना’ (2016) के तहत 10 करोड़ से अधिक गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए गए, जिसने उनकी स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को बेहतर किया। ये योजनाएं समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

चुनौतियां और आलोचनाएं

कोई भी नेतृत्व आलोचनाओं से अछूता नहीं रहता। नोटबंदी (2016) और जीएसटी (2017) जैसे कदमों ने शुरुआत में आर्थिक चुनौतियां पैदा कीं। उदाहरण के लिए, नोटबंदी के कारण असंगठित क्षेत्र में अस्थायी रोजगार की हानि हुई। हालांकि, लंबे समय में इन कदमों ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया और कर प्रणाली को पारदर्शी बनाया। कुछ आलोचक उनकी नीतियों को प्रचार-प्रधान मानते हैं, लेकिन उनके कार्यों का प्रभाव, जैसे स्वच्छता, स्वास्थ्य और वित्तीय समावेशन में प्रगति, इन आलोचनाओं को कमजोर करता है।

नरेंद्र मोदी को ‘प्रधानसेवक’ कहना केवल एक शब्द का प्रयोग नहीं, बल्कि उनकी कार्यशैली, नीतियों और जनता के प्रति जवाबदेही का प्रतीक है। चाहे वह स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार या वैश्विक मंच पर भारत की पहचान हो, उन्होंने हर क्षेत्र में जनता की सेवा को प्राथमिकता दी। उनकी सादगी, जनता से सीधा संवाद और संकट में नेतृत्व की क्षमता ने उन्हें न केवल भारत, बल्कि विश्व स्तर पर एक लोकप्रिय नेता बनाया। 75वें जन्मदिन पर यह कहना उचित होगा कि नरेंद्र मोदी ने ‘प्रधानसेवक’ की भूमिका को न केवल अपनाया, बल्कि उसे जीया भी है। उनकी यह यात्रा देशवासियों के लिए प्रेरणा है कि सच्ची सेवा ही सच्चा नेतृत्व है।

कृष्णमयी मीरा : एकल की भव्य संगीतमय संध्या

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दिल्ली । भारत लोक शिक्षा परिषद् के राष्ट्रीय महिला विभाग के सौजन्य से 14 सितम्बर 2025 को ओ.पी. जिंदल ऑडिटोरियम, दिल्ली में ‘कृष्णमयी मीरा’ नृत्य-नाटिका का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। यह अवसर केवल एक सांस्कृतिक संध्या नहीं था, बल्कि एक पावन प्रयास था लोगों को एकल अभियान से जोड़ने, उसके उद्देश्य से परिचित कराने और ग्रामीण अंचलों के नन्हे-मुन्ने बच्चों के सपनों को साकार करने की दिशा में सहयोग जुटाने का।

संगीत और नृत्य की इस अनुपम संध्या में पद्मश्री एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित विदुषी नलिनी-कमलिनी जी ने ‘कृष्णमयी मीरा’ का ऐसा सजीव मंचन प्रस्तुत किया कि पूरा सभागार मीरा की भक्ति और कृष्णमयी रसधारा में डूब गया। दर्शक भाव-विभोर होकर बार-बार तालियों से सभागार गुंजायमान करते रहे।

इस आयोजन को सफल बनाने में राष्ट्रीय महिला विभाग की संरक्षक श्रीमती सुलोचना गोयल, श्रीमती कुमकुम गुप्ता, श्रीमती मंजू अग्रवाल, श्रीमती अनुभा जैन, राष्ट्रीय चेयरपर्सन श्रीमती सोनल रासीवासिया, राष्ट्रीय प्रधान श्रीमती सीमा गुप्ता, राष्ट्रीय कार्यकारी प्रधान श्रीमती अनु गुप्ता, राष्ट्रीय उपप्रधान श्रीमती माधुरी अग्रवाल, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्रीमती स्नेह बंसल तथा दिल्ली के सभी चैप्टर की प्रधान बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

श्रीमती सोनल रासीवासिया ने एकल अभियान की गतिविधियों पर प्रेरणादायी प्रजेंटेशन प्रस्तुत कर उपस्थित जनों को अभियान के उद्देश्य और उसकी उपलब्धियों से अवगत कराया।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही एकल झोपड़ी, जहाँ प्रत्यक्ष रूप से एकल विद्यालय का संचालन दिखाया गया। बच्चों के पाठ, खेल और शिक्षण की झलक देखकर दर्शक भावुक हो उठे और इस पहल की सराहना की।

इस पावन अवसर पर श्री लक्ष्मी नारायण गोयल (चेयरमैन, ट्रस्ट बोर्ड, BLSP) की गरिमामयी उपस्थिति रही तथा परम पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर आनंद पीठाधीश्वर स्वामी श्री बालकानंद जी महाराज का आशीर्वचन सभी को प्राप्त हुआ।

गौरवपूर्ण उपस्थिति और संदेश

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में लेफ्टिनेंट कर्नल सुश्री कमलप्रीत, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तैराक डॉ. मीनाक्षी पाहुजा और M3M फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुश्री पायल कनोडिया उपस्थित रहीं। समाज के कई गणमान्य लोग भी इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने पहुँचे।

स्वामी श्री बालकानंद जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि एकल द्वारा शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के लिए जो कार्य किया जा रहा है, उससे बड़ी सेवा कोई नहीं हो सकती। यह केवल शिक्षा नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और साधना का मार्ग है, जो भारत की नई पीढ़ी को सशक्त बना रहा है।

श्री लक्ष्मी नारायण गोयल ने कहा कि एकल केवल एक संस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त अभियान है। यह न केवल शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में विद्यालय चलाकर राष्ट्र की सुरक्षा में भी योगदान दे रहा है।

लेफ्टिनेंट कर्नल सुश्री कमलप्रीत ने कहा कि जैसे सैनिक सीमा पर देश की रक्षा करते हैं, वैसे ही एकल अभियान आंतरिक सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, क्योंकि यह बच्चों को संस्कार और शिक्षा दोनों प्रदान कर उन्हें जिम्मेदार नागरिक बना रहा है।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस आयोजन में एकल अभियान के केन्द्रीय अभियान प्रमुख श्री ललन शर्मा, सह अभियान प्रमुख श्री दीप कुमार और श्री खेमानन्द सापकोटा, BLSP ट्रस्ट बोर्ड के ट्रस्टी श्री सुरेन्द्र कुमार जिंदल, श्री नरेश कुमार, श्री विनीत कुमार, श्री सुभाष सी अग्रवाल, राष्ट्रीय प्रधान श्री अखिल गुप्ता, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री विजय गुप्ता, राष्ट्रीय संयुक्त कोषाध्यक्ष श्री बृजमोहन अग्रवाल तथा विभिन्न चैप्टरों के पदाधिकारी शामिल हुए।

कार्यक्रम का संचालन अत्यंत प्रभावशाली ढंग से BLSP सोनीपत चैप्टर की चेयरपर्सन सुश्री स्मृति कुच्छल और एकल अभियान के प्रचार-प्रसार प्रभारी श्री सिद्धार्थ शंकर गौतम ने किया।

यह संध्या केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह एक संदेश था कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज और राष्ट्र का उत्थान संभव है। कृष्णमयी मीरा का यह भव्य आयोजन उपस्थित हर व्यक्ति के हृदय में एकल अभियान के प्रति समर्पण और सहयोग का भाव जागृत कर गया।

75 वर्षों की उम्र, 75 उपलब्धियों की कहानी: प्रधानमंत्री मोदी का स्वर्णिम सफर

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दिल्ली। भारत के आकाश में एक सूर्य उग रहा है, जिसकी किरणें न केवल देश को रोशन कर रही हैं, बल्कि विश्व को भी प्रेरित कर रही हैं। 17 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 वर्ष के हो जाएंगे। यह मात्र एक जन्मदिन नहीं, बल्कि एक युग का उत्सव है – एक ऐसे नेता का, जिसने चाय बेचने वाले एक साधारण लड़के से विश्व गुरु बनाने की दिशा में भारत को ले जाने का संकल्प लिया। उनके जीवन की 75 वर्षों की यात्रा को जोड़ते हुए, उनके नेतृत्व में हासिल 75 प्रमुख उपलब्धियों की यह कहानी एक प्रेरणा है, जो गरीबी से समृद्धि, अंधेरे से उजाले तक का सफर बयां करती है। यह कहानी है दृढ़ इच्छाशक्ति की, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र से गढ़ी गई है।कल्पना कीजिए, 1950 का वह छोटा सा कस्बा वडनगर, गुजरात। दमोदरदास मोदी और हीराबेन के घर जन्मे नरेंद्र का बचपन संघर्षों से भरा था। चाय की दुकान पर काम करते हुए उन्होंने सपने देखे – देश को मजबूत बनाने के। RSS की शाखाओं से जुड़कर उन्होंने सेवा का पाठ सीखा। गुजरात के मुख्यमंत्री बनने तक का सफर (2001-2014) विकास की मिसाल था, जहां राज्य ने आर्थिक चमत्कार दिखाया। 2014 में दिल्ली की सत्ता संभालते ही मोदी ने एक नई क्रांति की शुरुआत की। आज, 75 वर्ष की दहलीज पर खड़े होकर, वे भारत को वैश्विक पटल पर चमका रहे हैं। आइए, उनके जीवन की 75 उपलब्धियों को एक कथा के रूप में बुने, जहां प्रत्येक उपलब्धि एक मोती है, जो राष्ट्र निर्माण की माला को सजाती है।

उपलब्धि 1: 2014 में लोकसभा चुनाव में BJP को पूर्ण बहुमत दिलाना – भारत की राजनीति में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार को इतना मजबूत जनादेश।

उपलब्धि 2: स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत – 2014 में लॉन्च, जिसने 11 करोड़ से अधिक शौचालय बनवाए, भारत को खुले में शौच से मुक्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

उपलब्धि 3: प्रधानमंत्री जन धन योजना – 50 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले, गरीबों को वित्तीय समावेशन प्रदान किया।

उपलब्धि 4: मेक इन इंडिया – विनिर्माण को बढ़ावा, FDI में 150% वृद्धि, भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का सपना।

उपलब्धि 5: डिजिटल इंडिया – इंटरनेट क्रांति, 80 करोड़ से अधिक ब्रॉडबैंड कनेक्शन, UPI ने डिजिटल पेमेंट्स को दुनिया का सबसे बड़ा बनाया।

उपलब्धि 6: गुड गवर्नेंस डे – 25 दिसंबर को मनाया जाता है, जिसमें पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस पर जोर।

उपलब्धि 7: 2016 में नोटबंदी – काले धन पर प्रहार, डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति दी।

उपलब्धि 8: GST का कार्यान्वयन – 1 जुलाई 2017, एक राष्ट्र-एक कर व्यवस्था, व्यापार को सरल बनाया।

उपलब्धि 9: कौशल भारत अभियान – 1 करोड़ से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार योग्यता बढ़ाई।

उपलब्धि 10: स्टार्टअप इंडिया – 1 लाख से अधिक स्टार्टअप्स, भारत को तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाया।

उपलब्धि 11: 2019 में दूसरी बार पूर्ण बहुमति – राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास पर जनता का भरोसा।

उपलब्धि 12: अनुच्छेद 370 का निरसकरण – जम्मू-कश्मीर का पूर्ण एकीकरण, शांति और विकास की नई सुबह।

उपलब्धि 13: राम मंदिर का भूमिपूजन – 5 अगस्त 2020, सांस्कृतिक विरासत की पुनर्स्थापना।

उपलब्धि 14: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण – हिंदू-मुस्लिम सद्भाव का प्रतीक।

उपलब्धि 15: सीएए-एनआरसी – शरणार्थियों को न्याय, नागरिकता संरक्षण।

उपलब्धि 16: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना – 10 करोड़ से अधिक गरीब महिलाओं को मुफ्त LPG कनेक्शन।

उपलब्धि 17: आयुष्मान भारत – 50 करोड़ लोगों को 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा, दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य कार्यक्रम।

उपलब्धि 18: प्रधानमंत्री आवास योजना – 4 करोड़ से अधिक पक्के घर, गरीबी से मुक्ति का माध्यम।

उपलब्धि 19: जल जीवन मिशन – 2024 तक हर घर नल जल, ग्रामीण महिलाओं का जीवन आसान।

उपलब्धि 20: किसान सम्मान निधि – 12 करोड़ किसानों को 6 हजार रुपये सालाना, कृषि को मजबूत।यह कहानी जारी है। मोदी के नेतृत्व में कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने वैश्विक स्तर पर टीके का निर्यात किया।

उपलब्धि 21: कोविन ऐप – दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल वैक्सीनेशन प्लेटफॉर्म, 200 करोड़ से अधिक डोज।

उपलब्धि 22: वैक्सीन मैत्री – 100 से अधिक देशों को मेड इन इंडिया वैक्सीन, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का उदाहरण।

उपलब्धि 23: आत्मनिर्भर भारत – महामारी में आर्थिक पैकेज, MSMEs को सहारा।

उपलब्धि 24: पीएम स्वानिधि – स्ट्रीट वेंडर्स को ऋण, लघु व्यापार को पुनर्जीवित।

उपलब्धि 25: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 – भारतीय ज्ञान प्रणाली पर जोर, शिक्षा क्रांति।

उपलब्धि 26: नई शिक्षा नीति में मातृभाषा शिक्षा – सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव।

उपलब्धि 27: डिजिटल लर्निंग – DIKSHA प्लेटफॉर्म, महामारी में शिक्षा निरंतर।

उपलब्धि 28: ट्रिपल तलाक विधेयक – महिलाओं को न्याय, लिंग समानता।

उपलब्धि 29: महिला आरक्षण विधेयक – संसद में 33% महिला आरक्षण।

उपलब्धि 30: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ – लिंग अनुपात में सुधार, NFHS-5 में 1020 का आंकड़ा।रक्षा क्षेत्र में मोदी का योगदान अमिट है।

उपलब्धि 31: राफेल डील – आधुनिक लड़ाकू विमान, वायुसेना मजबूत।

उपलब्धि 32: सर्जिकल स्ट्राइक – 2016, उरी हमले का जवाब, आतंकवाद पर कड़ा रुख।

उपलब्धि 33: बालाकोट एयरस्ट्राइक – 2019, पुलवामा का बदला, राष्ट्रीय गौरव।

उपलब्धि 34: रक्षा निर्यात – 2014 से 21,000 करोड़ तक, आत्मनिर्भर रक्षा।

उपलब्धि 35: अग्निपथ योजना – युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण, आधुनिक सेना।बुनियादी ढांचे का जाल बिछाया गया।

उपलब्धि 36: भारतमाला परियोजना – 35,000 किमी हाईवे, कनेक्टिविटी क्रांति।

उपलब्धि 37: सागरमाला – बंदरगाह विकास, व्यापार गति।

उपलब्धि 38: गति शक्ति – मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स में सुधार।

उपलब्धि 39: रेलवे विद्युतीकरण – 90% ट्रैक इलेक्ट्रिफाइड, हरित ऊर्जा।

उपलब्धि 40: वंदे भारत ट्रेनें – 50 से अधिक, हाई-स्पीड यात्रा।पर्यावरण संरक्षण में योगदान।

उपलब्धि 41: इंटरनेशनल सोलर अलायंस – 100+ देश, सौर ऊर्जा क्रांति।

उपलब्धि 42: उज्ज्वला 2.0 – हरित ईंधन, प्रदूषण कम।

उपलब्धि 43: रामसर साइट्स – 75 वेटलैंड्स, जैव विविधता संरक्षण।

उपलब्धि 44: नमामि गंगे – गंगा सफाई, 150 करोड़ का निवेश।

उपलब्धि 45: ग्रीन हाइड्रोजन मिशन – स्वच्छ ऊर्जा का भविष्य।कृषि सुधारों ने किसानों को नई दिशा दी।

उपलब्धि 46: पीएम किसान सम्मान निधि – 3.7 लाख करोड़ वितरित।

उपलब्धि 47: फसल बीमा योजना – 1.75 लाख करोड़ क्लेम सेटल।

उपलब्धि 48: मृदा स्वास्थ्य कार्ड – 25 करोड़ वितरित, वैज्ञानिक खेती।

उपलब्धि 49: ई-नाम – डिजिटल कृषि बाजार, किसानों को लाभ।

उपलब्धि 50: कृषि बजट – 5 गुना वृद्धि, किसान कल्याण।महिलाओं और युवाओं का सशक्तिकरण।

उपलब्धि 51: जन धन में महिलाओं के 55% खाते – आर्थिक स्वावलंबन।

उपलब्धि 52: मुद्रा योजना – 70% ऋण महिलाओं को, उद्यमिता।

उपलब्धि 53: स्टैंड अप इंडिया – SC/ST और महिलाओं के लिए ऋण।

उपलब्धि 54: युवा क्लीनिक्स – स्वास्थ्य जागरूकता।

उपलब्धि 55: फिट इंडिया मूवमेंट – स्वास्थ्य क्रांति।विदेश नीति में नई ऊंचाइयां।

उपलब्धि 56: G20 प्रेसिडेंसी 2023 – ‘वन अर्थ, वन फैमिली’ का संदेश।

उपलब्धि 57: क्वाड मजबूती – इंडो-पैसिफिक में शांति।

उपलब्धि 58: यूक्रेन-रूस मध्यस्थता – शांति दूत की भूमिका।

उपलब्धि 59: अफ्रीका के साथ साझेदारी – वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व।

उपलब्धि 60: 30+ विदेशी सम्मान – मोदी की कूटनीति का प्रमाण।आर्थिक चमत्कार।

उपलब्धि 61: जीडीपी ग्रोथ – 2014 से 3 गुना, 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था।

उपलब्धि 62: गरीबी उन्मूलन – 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर।

उपलब्धि 63: डीबीटी – 10 लाख करोड़ की बचत, भ्रष्टाचार मुक्त।

उपलब्धि 64: इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश – 100 लाख करोड़, नई नींव।

उपलब्धि 65: स्टॉक मार्केट कैप – दुनिया का 5वां सबसे बड़ा।सांस्कृतिक पुनरुत्थान।

उपलब्धि 66: कुंभ मेला का सफल आयोजन – 2021, विश्व धरोहर।

उपलब्धि 67: प्राचीन विरासत की वापसी – 251 दुर्लभ कलाकृतियां।

उपलब्धि 68: योग दिवस – 21 जून, वैश्विक मान्यता।

उपलब्धि 69: आयुर्वेद को बढ़ावा – वैश्विक स्तर पर।

उपलब्धि 70: सांस्कृतिक पर्यटन – रामायण सर्किट।2024 में तीसरी बार सरकार।

उपलब्धि 71: एनडीए की जीत – गठबंधन मजबूत, स्थिरता।

उपलब्धि 72: 3 करोड़ अतिरिक्त आवास – गरीबों का सपना।

उपलब्धि 73: वंदे भारत मिशन – प्रवासियों का घर वापसी।

उपलब्धि 74: चंद्रयान-3 – चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरना।

उपलब्धि 75: विकसित भारत @2047

– 100 वर्ष स्वतंत्रता का विजन, मोदी का अंतिम संकल्प।यह कहानी समाप्त नहीं होती। 75 वर्ष की इस उम्र में प्रधानमंत्री मोदी एक प्रेरणा हैं – जिन्होंने भारत को न केवल मजबूत किया, बल्कि विश्व को एक नई दिशा दी। 17 सितंबर को उनका जन्मदिन मनाते हुए, हम कहते हैं: ‘मोदी जी, आपके 75 वर्षों का सफर भारत के 140 करोड़ लोगों का गौरव है।’ यह अवसर हमें याद दिलाता है कि एक व्यक्ति की दृढ़ता से राष्ट्र का निर्माण संभव है। जन्मदिन मुबारक, भारत माता की जय!

(लेखिका पत्रकार एवं स्तंभकार हैं)

16 सितम्बर 1904 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी महावीर सिंह राठौर का जेल की प्रताड़ना से हुआ था बलिदान

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कासगंज (उप्र) : कोई कल्पना कर सकता है ऐसे मानसिक दृढ़ संकल्प की कि पुलिस की हजार प्रताड़नाओं के बाद भले प्राण चले जायें पर संकल्प टस से मस न हो । ऐसे ही संकल्पवान क्राँतिकारी थे महावीर सिंह राठौर । जिनसे क्राँतिकारियों का विवरण पूछने के लिये प्रताड़ित किया गया और तब उन्होंने क्राँतिकारियों को प्रताड़ित किये जाने के विरुद्ध अनशन किया फिर भी प्रताड़ना बंद न हुई और अंततः 29 वर्ष की आयु में सेलुलर जेल में उनका बलिदान हो गया ।

वे किशोर वय से स्वतंत्रता संग्राम में सहभागी बने थे । 1021 में जब असहयोग आँदोलन आरंभ हुआ तब वे सत्रह साल के भी पूरे नहीं हुये थे । उन्होंने अपनी आयु के किशोरों और बच्चों को एकत्र कर प्रभात फेरी निकाली। झंडा लेकर जुलूस निकाला अंग्रेजों के विरुद्ध नारे लगाये । पुलिस ने पकड़कर दस बेतों की सजा दी और छोड़ दिया था । पर बेंत प्रहार से उनका संकल्प और मजबूत हुआ। वे स्वाधीनता संग्राम की राह पर चल निकले ।

ऐसे दृढ़ निश्चयी संकल्पवान क्राँतिकारी महावीर सिंह राठौर का जन्म 16 सितम्बर 1904 को

को उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले की शाहपुर तहसील के अंतर्गत ग्राम तहला में हुआ था । पिता पिता देवी सिंह एक संपन्न और प्रभावशाली परिवार से थे । उनके पूर्वजों की जमींदारी भी रही थी । परिवार आर्य समाज से जुड़ा हुआ था । पढ़ाई के लाये आर्य समाज से संबंधित डीएवी कॉलेज भेज दिया था । और यहीं उनके विचारों में ओज एवं दृढ़ता आई । 1921 के असहयोग आँदोलन में सहभागी होने से वे काफी चर्चित हो गये थे इसलिए पढ़ाई के दौरान ही उनका संपर्क क्राँतिकारी गतिविधियों से उनका संपर्क सहज ही बन गया । वे नौजवान भारत सभा के सदस्य बन गये ।

इस संस्था के माध्यम से वे लाहौर के क्राँतिकारियों के भी संपर्क में आये । इनमें सरदार भगतसिंह और दुर्गा भाभी भी शामिल थीं।1922 की एक घटना है । तब वे मुश्किल से अठारह वर्ष के थे । असहयोग आँदोलन से निबटने के लिये अंग्रेज जगह जगह बैठकें कर रहे थे । कासगंज में अंग्रेज कलेक्टर ने अपने विश्वस्त लोगों की बैठक बुलाई। इसमें सभी कर्मचारी और अधिकारियों के परिवारों को राजभक्ति प्रदर्शित करने केलिये बुलाई गई थी । इस बैठक में महावीर सिंह और उनका परिवार भी था । योजना पूर्वक वक्ता अंग्रेजी शासन की प्रशंसा कर रहे थे । इसी बीच महावीर सिंह ने उठकर वंदेमातरम और महात्मा गाँधी की जय का नारा लगा दिया । कलेक्टर नाराज हुआ । बंदी बनाये गये । परिवार जनों की प्रार्थना के बाद मुक्त किये गये ।

1929 में दिल्ली की असेंबली बम काँड और सांडर्स वध काँड मामलों में सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी सिंह, राजगुरु सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त के साथ इन्हें भी सह आरोपी बनाया गया। मुकदमे की सुनवाई लाहौर में हुई। महावीर सिंह को आजीवन कारावास का दंड मिला । पहले उन्हें पंजाब की जेल में रखा। 1933 में अंडमान की सेल्यूलर जेल में भेजा गया । यह जेल बंदियों को यातना देने के लिये “काला पानी” के नाम से कुख्यात थी । इस जेल में राजनैतिक बंदियों के साथ हो रहे अत्याचार के विरुद्ध महावीर सिंह ने भूख हड़ताल की। जेलर ने भूख हड़ताल तुड़वाने के लिये उनकी प्रताड़ना आरंभ की । उनके मुंह में बल पूर्वक दूध डालने का भी प्रयास हुआ । पर महावीर सिंह अडिग रहे । वह 17 मई 1933 का दिन था । अनशन और प्रताड़ना के चलते । उनके प्राणों ने शरीर छोड़ दिया । उनका बलिदान हुआ तो उनका निर्जीव शरीर समुद्र में फेक दिया गया । इस प्रकार क्राँतिकारी महावीर सिंह के प्राणों का 28 वर्ष की आयु में बलिदान हुआ । इस घटना के विरोध में सेलुलर जेल के तीस अन्य राजनैतिक बंदियों ने भूख हड़ताल की । इसमें मोहित मोइत्रा और मोहन किशोर नामदास का भी बलिदान हुआ । उनके सम्मान में सेललुर जेल के सामने एक मूर्ति स्थापित की गई।

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