विकसित भारत 2047: वैश्विक संकटों के बीच राष्ट्र प्रथम का नया आह्वान

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गौहर आसिफ

दिल्ली । भारत आज एक ऐसे निर्णायक दौर में खड़ा है, जहाँ वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच राष्ट्रीय एकता और जिम्मेदारी की भावना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। Viksit Bharat 2047 केवल एक दीर्घकालिक विकास योजना नहीं, बल्कि एक ऐसा राष्ट्रीय संकल्प है जो नागरिकों की जीवनशैली, आर्थिक व्यवहार और सामूहिक सोच से जुड़ा हुआ है। हाल के वैश्विक संकट—महामारी, युद्ध, ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता—ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकसित राष्ट्र बनने के लिए सरकार की नीतियों के साथ-साथ जनता की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।

इसी संदर्भ में Narendra Modi द्वारा हाल में की गई “राष्ट्र प्रथम” अपील को समझना आवश्यक है। यह अपील केवल संकट से निपटने के लिए अस्थायी उपाय नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 की दिशा में सामूहिक राष्ट्र निर्माण का संदेश है। जब प्रधानमंत्री नागरिकों से कुछ जीवनशैली आधारित कदम अपनाने का आग्रह करते हैं, तो उसका उद्देश्य केवल तात्कालिक बचत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों को मजबूत करना और आत्मनिर्भरता की संस्कृति विकसित करना है।

प्रधानमंत्री की अपील में सबसे प्रमुख सुझावों में एक था—जहाँ संभव हो, वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता देना। यह कदम केवल व्यक्तिगत सुविधा के लिए नहीं है। इससे ईंधन की खपत घटती है, यातायात पर दबाव कम होता है और ऊर्जा संरक्षण होता है। वैश्विक तेल कीमतों की अस्थिरता के समय यह एक व्यावहारिक आर्थिक रणनीति भी है। यदि लाखों लोग रोज़ाना कम यात्रा करते हैं, तो विदेशी तेल आयात पर दबाव घटता है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है।

दूसरा महत्वपूर्ण आह्वान था—अगले एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचना। भारत दुनिया में सोने का बड़ा आयातक है, और सोने की खरीद से विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव पड़ता है। वैश्विक संकट के समय जब विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार संतुलन महत्वपूर्ण होते हैं, तब सोने की खरीद में कमी देश की आर्थिक स्थिरता को मजबूत कर सकती है। यह एक ऐसा उदाहरण है जहाँ व्यक्तिगत निवेश का निर्णय भी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालता है।

इसी तरह पेट्रोल और डीज़ल की खपत कम करने तथा सार्वजनिक परिवहन—मेट्रो, बस और अन्य सामूहिक साधनों—का उपयोग बढ़ाने की अपील सीधे ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग केवल पर्यावरणीय दृष्टि से नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी राष्ट्रहित में है। जब नागरिक निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन चुनते हैं, तो यह राष्ट्रीय संसाधनों की बचत का हिस्सा बन जाता है।

प्रधानमंत्री द्वारा खाद्य तेल (खाद तेल) के सीमित उपयोग की बात भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा है। भारत खाद्य तेल का बड़ा आयातक है। यदि नागरिक अनावश्यक खपत कम करें, तो आयात बिल घट सकता है। यह स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभकारी कदम है। राष्ट्र निर्माण कभी-कभी ऐसे छोटे दिखने वाले निर्णयों से भी जुड़ता है, जो करोड़ों लोगों के स्तर पर बड़ा प्रभाव डालते हैं।

एक और महत्वपूर्ण संदेश था—विदेशी ब्रांडों का कम उपयोग और स्वदेशी उत्पादों को अपनाना। यह आत्मनिर्भर भारत की मूल भावना है। जब भारतीय उपभोक्ता स्थानीय उत्पादों और निर्माताओं को प्राथमिकता देते हैं, तो घरेलू उद्योग मजबूत होते हैं, रोजगार बढ़ता है और पूंजी देश के भीतर ही रहती है। स्वदेशी केवल भावनात्मक नारा नहीं; यह आर्थिक राष्ट्रवाद का व्यावहारिक मॉडल है। विकसित भारत 2047 की दिशा में यह अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मजबूत घरेलू उत्पादन क्षमता ही विकसित अर्थव्यवस्था की आधारशिला है।

इसी क्रम में विदेश यात्राओं से बचने की अपील भी वैश्विक आर्थिक परिस्थिति से जुड़ी है। विदेश यात्रा पर होने वाला खर्च, विदेशी मुद्रा का बहिर्वाह बढ़ाता है। यदि नागरिक घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता दें, तो यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है बल्कि स्थानीय रोजगार और सेवा क्षेत्र को भी गति देता है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में घरेलू पर्यटन स्वयं में आर्थिक विकास का बड़ा स्रोत है।

इन सभी अपीलों का मूल संदेश यही है कि संकट के समय राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं हो सकता। सरकार नीतियाँ बनाती है, लेकिन उनकी सफलता नागरिकों की भागीदारी पर निर्भर करती है। वैश्विक संकटों के बीच भारत सरकार ने स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा प्रबंधन, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी ढाँचे पर तेज़ी से काम किया है। लेकिन विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा जब नागरिक भी अपने दैनिक व्यवहार में राष्ट्रहित को स्थान देंगे।

आज भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि नहीं है। यह एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण है जो आत्मनिर्भर हो, वैश्विक नेतृत्व करे और संकटों के समय स्थिरता का उदाहरण बने। G20 New Delhi Summit ने दिखाया कि भारत अब वैश्विक मंच पर नीति-निर्माता के रूप में उभर रहा है। लेकिन इस नेतृत्व की असली शक्ति घरेलू अनुशासन और राष्ट्रीय एकता से आती है।

विकसित भारत 2047 की यात्रा में सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है—आत्मनिर्भरता, समावेशी विकास और नागरिक भागीदारी। प्रधानमंत्री की हालिया अपील इसी दृष्टि का सामाजिक विस्तार है। जब नागरिक वर्क फ्रॉम होम अपनाते हैं, सोना खरीद कम करते हैं, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाते हैं, खाद्य तेल की बचत करते हैं, स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं और विदेशी यात्राओं से बचते हैं, तब वे केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं ले रहे होते—वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभा रहे होते हैं।

विकसित भारत 2047 केवल सरकारी परियोजनाओं का परिणाम नहीं होगा। यह तब साकार होगा जब हर भारतीय अपने जीवन में “राष्ट्र प्रथम” को व्यवहार में उतारे। प्रधानमंत्री की अपील इसी सामूहिक चेतना का आह्वान है—जहाँ छोटे व्यक्तिगत कदम मिलकर एक बड़े राष्ट्रीय भविष्य का निर्माण करते हैं।

भाजपा समग्र हिंदुत्व पर ही लड़ेगी उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई

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दिल्ली । पश्चिम बंगाल की विजय से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी तैयारियां प्रांरभ कर दी हैं। बंगाल से स्पष्ट जनादेश आ जाने के बाद भाजपा की स्थिति मजबूत हो गई है। समाजवादी पार्टी एसआईआर, चुनाव आयोग व ईवीएम के खिलाफ वातावरण बनाने में लग गई है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बंगाल में टीएमसी की हार के बाद यूपी में विरोधी दल अभी से पराजय का बहाना खेाज रहे हैं जबकि भारतीय जनता पार्टी फ्रंटफुट पर आकर बल्लेबाजी कर रही है। भाजपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय किया है और संगठन को उसी के अनुसार तैयार किया जा रहा है। बंगाल की की ही तरह भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपनी रणनीति को धार देना आरम्भ कर दिया है।
बंगाल के चुनाव प्रचार में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ की जनसभाओं में भारी भीड़ आ रही थी तथा उनका स्ट्राइक रेट 90 प्रतिशत रहा है। यही कारण है कि भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने उन्हें आगामी विधान सभा चुनावों के लिए भाजपा का चेहरा घोषित कर दिया है।
बंगाल में नयी सरकार के शपथ ग्रहण के बाद ही प्रदेश में बहुप्रतिक्षित मंत्रिपिरिषद का विस्तार हो गया है। भाजपा ने इस मंत्रिमंडल विस्तार के सहारे जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया है। सपा की पीडीए की धार को कुंद करने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार में पिछड़े और दलित समाज के प्रतिनिधियों को कहीं अधिक प्रतिनिधित्व दिया है। भाजपा ने ओबीसी समाज से तीन और मंत्री बनाने के साथ ही दो को प्रोन्नत भी किया गया है। दलित समाज से भी दो मंत्री बनाए गए हैं। पूरब से पश्चिम तक को साधा गया है। मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित 60 मंत्री हो गए हैं। जिसमें 60 प्रतिशत ओबीसी व दलित समाज है। क्षत्रिय व वैश्य समाज की भगीदारी यथावत है । यूजीसी के कारण सवर्ण समाज की नाराजगी को दूर करने के लिए मनोज पांडेय को मंत्री बनाया है वह सपा से भाजपा में आए थे। मंत्रिपरिषद मे पहली बार वाल्मीकि और पासी समाज के सदस्यों को प्रतिनिधित्व दिया गया है, सपा और बसपा दोनो की ही नजर इस वोट बैंक पर रहती है।
भाजपा ने इस मंत्रिपरिषद विस्तार के माध्यम से समग्र हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने का प्रयास किया है। बिना कोई बड़ा बदलाव किए जिस प्रकार मंत्रिमंडल विस्तार हुआ है और जिन चेहरों को शामिल किया गया है वह बताता है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में भरोसे और एकजुटता के संदेश के साथ आगे बढ़ने का निर्णय कर लिया है। मंत्रिमंडल विस्वार में निष्ठा को पुरस्कार व हिंदू एकता का फार्मूला दिखाई पड़ रहा है। भाजपा ने यह संदेश देने का स्पष्ट प्रयास किया है कि भाजपा ही पूरे हिंदू समाज का प्रतिनिधित्व करती है। लोकसभा चुनाव मे विपक्ष ने भले ही संविधान बदलने और आरक्षण पर भ्रम फैलाकर बढ़त बना ली हो किंतु अब भजपा खुद को ऐसी पार्टी के रूप मे प्रस्तुत कर रही है जो विभिन्न जातियों की भागीदारी के साथ व्यापक हिंदू एकता के भाव से आगे बढ़ रही है।
मंत्री परिषद व संगठन विस्तार के साथ ही अब प्रदेश सरकार अनेक योजनाओं के शिलान्यास व लोकार्पण व्यापक सिलसिला आरम्भ करने जा रही है, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर अनेक केंद्रीय मंत्री तक शामिल होंगे। अगर बंगाल की ही तरह यूपी का हिंदू एकजूट हो गया तो सपा का पीडीए ध्वस्त हो जाएगा अतः आने वाले समय में सपा हिन्दू समाज को तोड़ने वाले मसले उभार सकती है।

चंद्रनाथ की हत्या की गुत्थी 

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कल्पेश पटेल
कोलकाता । शुभेंदु अधिकारी जी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या की गुत्थियां अब सुलझती नजर आ रही हैं …
एक बात तो साफ हो गई कि इस ह.. त्या का बंगाल के चुनावी नतीजे या भवानीपुर में वोट काउंटिंग के दौरान ममता बनर्जी से जो नोक झोंक हुई उससे इसका कोई लेना-देना नहीं था, क्योंकि उनको मा.. रने की सुपारी चुनाव से दो महीने पहले ही दी जा चुकी थी, नतीजे चाहे जो आते लेकिन उन्हें मा.. रने का प्रोग्राम पहले ही तय हो चुका था …

हत्.. या में इस्तेमाल हुई कार निशान माईक्रा जो कि लावारिस बरामद हुई थी, जिस पर नकली नंबर प्लेट लगा था, वो जांच में सिलिगुड़ी के एक व्यक्ति की निकली,
फिर जब पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने बताया वो कार उसने दो महीने पहले यूपी के बलिया जिले के एक व्यक्ति को ऑनलाइन प्लेटफार्म के जरिए बेची थी, वो व्यक्ति था राज सिंह “चंदन”

फिर पुलिस ने उसका एड्रेस निकाला और यूपी जाकर उसके साथ उसके दो और साथियों को भी गिरफ्तार किया और पकड़कर बंगाल ले आई !
अब पूछताछ चालू है, सस्पेंस बस इतना भर रह गया है कि इनको सुपारी दी किसने थी ??

हालांकि नाम सामने आना बस वक्त की बात है लेकिन जिस तरह से यह कांड हुआ, गाड़ी खरीदकर घटना के बाद उसे लावारिस छोड़ा गया, हत्या में बेहद मंहगी पिस्तौल का इस्तेमाल हुआ जो कि भारत में मिलती भी नहीं है।
ये सब चीजें साफ इशारा करती हैं कि सुपारी की रकम कोई छोटी मोटी रकम तो नहीं थी और उसे देने वाला भी कोई सामान्य आदमी तो नहीं ही था !
निश्चित रूप से यह राजनैतिक ह.. त्या है और शक की सूईयां अभिषेक बनर्जी की ओर ही इशारा कर रही हैं।

नीचे तस्वीर में हैं बलिया से गिरफ्तार राज सिंह “चंदन”

राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट!

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कल्पेश पटेल

रायपुर । कल यूट्यूब पर Curly Tales की “मकान देखो” श्रृंखला में कुमार विश्वास का नोएडा स्थित “साधारण” घर देखा। वीडियो लंबा था, पर दस मिनट में ही समझ आ गया कि अगर यह साधारण है तो बाकी जनता शायद अब तक तंबुओं में ही रह रही है।

कुमार विश्वास बड़े विनम्र भाव से मेजबान को अपने “साधारण” घर में बुलाते हैं। अब घर में साठ फुट लंबी पेंटिंग हो, जिसे कोई नामचीन कलाकार आकर बनाए, घर के भीतर सैलून हो, दीवारों पर गीता के श्लोक हों, एक तरफ राम दरबार, दूसरी तरफ बुद्ध प्रतिमा, और बाहर पुलिस चौकी प्रहरी की तरह खड़ी हो,तो इसे साधारण कहने के लिए या तो अद्भुत आत्मविश्वास चाहिए या फिर जनता की स्मृति पर अटूट भरोसा।

घर देखकर ऐसा लग रहा था मानो आध्यात्म, ऐश्वर्य और आर्ट गैलरी ने मिलकर कोई गठबंधन सरकार बना ली हो। राम नाम भी अंकित है, हनुमान जी भी विराजमान हैं, बुद्ध भी मुस्कुरा रहे हैं। बस कबीर कहीं कोने में बैठे यह सोच रहे होंगे-
“साईं इतना दीजिए…”

कुमार विश्वास वाकपटु हैं, इसमें कोई संशय नहीं। शब्दों को मोड़ना, तुक में लपेटना और भावनाओं को पैक करके बेच देना उनकी पुरानी कला है। किंतु जब वे इतने वैभवशाली भवन को “साधारण” कहते हैं तो ऐसा लगता है जैसे कोई उद्योगपति अपनी प्राइवेट जेट को “छोटी सी गाड़ी” बता रहा हो।

संदेश साफ़ है:
“देखो, मैं जमीन से जुड़ा हूँ… बस जमीन थोड़ी ज़्यादा महंगी है।”

धन कमाना अपराध नहीं है। एक कवि, लेखक या वक्ता यदि प्रतिभा से वैभव अर्जित करे तो उसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। समस्या तब शुरू होती है जब मंच पर वैराग्य का प्रवचन हो और बैकग्राउंड में इटैलियन मार्बल चमक रहा हो।

एक पुराना वीडियो याद आया जिसमें कुमार विश्वास कहते थे कि इबादत करते हुए लोग उन्हें सम्मोहित करते हैं, उन्हें बड़ा चैन मिलता है। अफ़सोस, वह चैन शायद घर के नक्शे में फिट नहीं बैठा। अगर आलीशान मंदिर की जगह कोई “शांतिगाह” बनवा लेते, जहाँ सामूहिक इबादत होती, तो भक्तिरस का ROI और बेहतर आता।

ख़ुद को असफल नेता बताते हुए वे कहते हैं:” मैं सफल कवि हूँ, असफल नेता।”

बिल्कुल। सफल नेता तो आप तब होते जब मित्र वादा निभाकर राज्यसभा भेज देते। असफलता का यह दुख भी बड़ा विलक्षण है कि जनता ने नहीं हराया, बस दोस्ती की डिलीवरी लेट हो गई।

और हाँ, “भक्त” शब्द को राजनीतिक गाली में बदलने का श्रेय भी आपको जाना चाहिए । आपने ही मोदीजी को चाहने वालों को “भक्त” कहकर ऐसा नया संदर्भ दिया कि “अंधभक्त” लोकतंत्र का सबसे लोकप्रिय विशेषण बन गया। शब्दों की केमिस्ट्री में आपका कोई मुकाबला नहीं। आप भावनाओं को ऐसे डिस्टिल करते हैं कि श्रोता ताली भी बजाए और बाद में सोचे भी: “अरे, अभी हुआ क्या था?”

“कोई दीवाना कहता है…” से शुरू हुई यात्रा अब “जय श्रीराम” के भव्य इंटीरियर तक पहुँच चुकी है। प्रेमरस से भक्तिरस की यह तीर्थयात्रा बड़ी लाभकारी सिद्ध हुई है। सच पूछिए तो इस घर की असली नींव सीमेंट पर नहीं, समय की हवा पहचानने की कला पर रखी गई है। आपसे बढ़िया समय भांपने वाला मौजूदा हस्ती और कोई नहीं है ना आगे होगी!

फिर भी, घर शानदार है। आलीशान है। मेहनत और नेटवर्क, दोनों का असर साफ़ दिखता है। इसे साधारण कहकर अपने वैभव का अपमान मत कीजिए। गर्व से कहिए कि आपने कविता, राजनीति, टीवी डिबेट, रामकथा और रिश्तों, सबको मिलाकर ऐसा मुकाम पाया है जहाँ “वैराग्य” भी imported lighting में चमकता है।

रही बात राजनीति की,उसके दरवाज़े कभी बंद नहीं होते। दिल्ली में विचारधारा से ज़्यादा ज़रूरी बस सही ड्रॉइंग रूम होता है।

ख़ास आपके लिए अर्ज़ है:

राम नाम दीवार पर, भीतर सत्ता-प्यास,
साधु जैसी वाणी रखे, जीवन पूरा खास।
भक्त कहे जो कल तलक, आज वही श्रीराम
मौसम जैसा धर्म हो, उसका क्या ईमान!
Mann Jee

सही कहा मन्न जी ये कुमार विश्वास मौसम विज्ञानी है , राजनीतिक हवा ,बारिश ,अकाल सबका रुख पहचान लेते है , समय के साथ कवि सम्मेलनों की लोकप्रियता को भुनाने के साथ केजरीवाल के साथ अन्ना आंदोलन में लगे तो 2018,19तक मौके की राह में केजरी के साथ लगे रहे जबकि केजरी अपनी धूर्तता ,भ्रष्ट स्वरूप ,झूठ बोलने की कला सब दिखा चुके थे 2014से ही , उसके बाद केजरी से राज्यसभा की मलाई न मिली तो उसे छोड़ हवा के रुख के साथ राम भक्त बन गए और राम कथा वाचक बन गए , किसी भी राज्य में सत्ता बदलती है तो हर नए हर पार्टी के मुख्यमंत्री के सामने सरकारी समारोह में ये मंच पर दिख जाते है , छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने इनसे राम कथा करवाई तो सत्ता बदलते ही कुछ माह में भाजपा मुख्यमंत्री के सामने ये दिख गए सरकारी आमंत्रण पर !
09 मई को ही पश्चिम बंगाल में पहुंच चुके है सुनील बंसल और अन्य भाजपा नेताओं के सामने राम कथा भी हो चुकी !

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