रेपो दर में कमी के साथ ही भारत में ब्याज दरों के नीचे जाने का चक्र प्रारम्भ

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भोपाल। भारतीय रिजर्व बैंक के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री संजय मल्होत्रा ने अपने कार्यकाल की प्रथम मुद्रानीति दिनांक 7 फरवरी 2025 को घोषित की। अभी तक प्रत्येक दो माह के अंतराल पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा घोषित की गई मुद्रा नीति के माध्यम से लिए गए निर्णयों का देश में मुद्रा स्फीति को नियंत्रण में रखने में विशेष योगदान रहा है। हालांकि पिछले लगभग 5 वर्षों में रेपो दर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। मई 2020 में अंतिम बार रेपो दर में वृद्धि की घोषणा की गई थी। इसके बाद घोषित की गई 29 मुद्रा नीतियों में रेपो दर को स्थिर रखा गया है और यह अभी भी 6.5 प्रतिशत के स्तर पर कायम है। परंतु,अब फरवरी 2025 माह में घोषित की गई मुद्रा नीति में रेपो दर में 25 आधार बिंदुओं की कमी करते हुए इसे 6.50 प्रतिशत से 6.25 प्रतिशत पर लाया गया है। केंद्र सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक को देश में मुद्रा स्फीति की दर को नियंत्रण में रखने हेतु मेंडेट दिया गया है और इस मेंडेट पर ध्यान रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में मुद्रा स्फीति को नियंत्रण में रखने में सफलता भी पाई है। परंतु, वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रथम एवं द्वितीय तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर घटकर 5.2 प्रतिशत एवं 5.4 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत की रही थी। अतः देश में आर्थिक विकास की दर पर भी अब विशेष ध्यान देने की आवश्यकता प्रतिपादित हो रही थी, इसीलिए भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 25 आधार बिंदुओं में कमी की घोषणा की है। रेपो दर में कमी करने का उक्त निर्णय मुद्रानीति समिति के समस्त सदस्यों ने एकमत से लिया है।
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकलन के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-45 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 6.4% की रहेगी और वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 6.7 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगी। इस वर्ष खरीफ की फसल बहुत अच्छे स्तर पर आई है एवं आगे आने वाली रबी की फसल भी ठीक रहेगी क्योंकि मानसून की बारिश अच्छी रही थी और देश के जलाशयों में, क्षमता के अनुसार, पर्याप्त पानी इन जलाशयों में उपलब्ध है, जिसे कृषि सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जा रहा है और जो अंततः कृषि की पैदावार को बढ़ाने में सहायक होगा। इससे ग्रामीण इलाकों में उत्पादों की मांग में वृद्धि देखी गई है। हालांकि शहरी इलाकों में उत्पादों की मांग में अभी भी सुधार दिखाई नहीं दिया है। परंतु हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा मध्यमवर्गीय करदाताओं को आय कर में दी गई जबरदस्त छूट के चलते आगे आने वाले समय में शहरी क्षेत्रों में भी उत्पादों की मांग में वृद्धि दर्ज होगी और विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत औद्योगिक इकाईयों की उत्पादन वृद्धि दर तेज होगी। सेवा क्षेत्र तो लगातार अच्छा प्रदर्शन कर ही रहा है। प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ मेले में धार्मिक पर्यटन के चलते देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त योगदान होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। इस प्रकार, भारत की आर्थिक विकास दर के वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग 7 प्रतिशत एवं वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 8 प्रतिशत रहने के प्रबल सम्भावना बनती है। भारतीय रिजर्व बैंक का आंकलन उक्त संदर्भ में कम ही कहा जाना चाहिए।
इसी प्रकार मुद्रा स्फीति के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4.8 प्रतिशत एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में घटकर 4.2 प्रतिशत रह सकती है। भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों के महंगे होने के चलते ही बढ़ती है, जिसे ब्याज दरों को बढ़ाकर नियंत्रण में नहीं लाया जा सकता है। हेडलाइन मुद्रा स्फीति की दर अक्टूबर 2024 में अपने उच्चत्तम स्तर पर पहुंच गई थी परंतु उसके बाद से लगातार नीचे ही आती रही है। इसी प्रकार, कोर मुद्रा स्फीति की दर भी लगातार नियंत्रण में बनी रही है। केवल खाद्य पदार्थों में के महंगे होने के चलते उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई पर दबाव जरूर बना रहा है। इस प्रकार महंगाई दर के नियंत्रण में आने से अब भारत में ब्याज दरों में कमी का दौर प्रारम्भ हो गया है। आगे आने वाले समय में भी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में कमी की घोषणा की जाती रहेगी ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है और दिसम्बर 2025 तक रेपो दर में लगभग 100 आधार बिंदुओं की कमी की जा सकती है और रेपो दर घटकर 5.25 प्रतिशत तक नीचे आ सकती है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि देश में आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर रेपो दर में परिवर्तन के बारे में समय समय पर विचार किया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने नीति उद्देश्य को भी निष्पक्ष रखा है परंतु चूंकि ब्याज दरों में अब कमी करने का चक्र प्रारम्भ हो चुका है अतः इसे उदार रखा जा सकता था। इसका आश्य यह है कि आगे आने वाले समय में भी रेपो दर में कमी की सम्भावना बनी रहेगी।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में की गई कमी की घोषणा के बाद अब विभिन्न बैकों को ऋणराशि पर ब्याज दरों को कम करते हुए ऋणदाताओं को लाभ पहुंचाने के बारे में शीघ्रता से विचार करना चाहिए जिससे आम नागरिकों द्वारा बैकों को अदा की जाने वाली किश्तों एवं ब्याज राशि में कुछ राहत महसूस हो सके। इससे अर्थव्यवस्था में भी कुछ गति आने की सम्भावना बढ़ेगी।
दिसम्बर 2024 माह में देश में तरलता में कुछ कमी महसूस की जा रही थी और बैकों के पास ऋण प्रदान करने योग्य फंड्ज की कमी महसूस की जा रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने तुरंत निर्णय लेते हुए आरक्षित नकदी अनुपात (CRR) को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया था, जिससे बैकों की तरलता की स्थिति में कुछ सुधार दृष्टिगोचर हुआ था। बैकों के लिए इसे अधिक सरल बनाने की दृष्टि से जनवरी 2025 में भी भारतीय रिजर्व बैंक ने लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए बांड्ज विभिन्न बैकों से खरीदे थे ताकि इन बैकों की तरलता की स्थिति में और अधिक सुधार किया जा सके और बैकिंग सिस्टम में तरलता की वृद्धि की जा सके। उक्त वर्णित उपायों का परिणाम यह है कि आज भारतीय बैकों का ऋण:जमा अनुपात 80.8 प्रतिशत के स्तर पर बना हुआ है और बैकों की लाभप्रदता में भी लगातार सुधार होता दिखाई दे रहा है। विभिन्न बैकों द्वारा अभी तक घोषित किए गए परिणामों के अनुसार, बैकों ने लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए का लाभ घोषित किया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जरूर परिस्थितियां अभी भी अस्थिर बनी हुई हैं और वैश्विक स्तर पर रुपए पर दबाव बना हुआ है। अभी हाल ही में डॉलर इंडेक्स 109 के स्तर तक पहुंच गया था और 10 वर्षीय यू एस बांड यील्ड भी 4.75 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, इससे अन्य देशों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है और आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले में रुपए की कीमत अपने निचले स्तर 87.66 पर पहुंच गई थी। परंतु, आगे आने वाले समय में अमेरिका में भी यदि ब्याज दरों में कमी की घोषणा होती है तो भारत में भी ब्याज दरों में कमी का चक्र और भी तेज हो सकता है। ब्रिटेन एवं कुछ अन्य यूरोपीयन देशों ने भी हाल ही के समय में ब्याज दरों में कमी की घोषणा की है। चूंकि अब कई देशों में मुद्रा स्फीति नियंत्रण में आ चुकी है अतः अब लगभग समस्त देश ब्याज दरों में कमी की घोषणा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे अब आने वाले समय में इन देशों में आर्थिक विकास दर में कुछ तेजी आते हुए भी दिखाई देगी। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के चलते अमेरिका के शेयर बाजार में केवल जनवरी 2025 माह में ही 15,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि निवेशकों द्वारा डाली गई है, जबकि भारत के शेयर बाजार से 2.50 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा निकाली गई है, इससे भी भारतीय रुपए पर दबाव बना हुआ है। परंतु भारतीय रिजर्व बैंक को शायद आभास है कि यह समस्या अस्थायी है एवं भारतीय कम्पनियों की लाभप्रदता में सुधार होते ही विदेशी संस्थागत निवेशक पुनः भारतीय शेयर बाजार में अपने निवेश को बढ़ाएंगे। अमेरिका एवं चीन के बीच छिड़े व्यापार युद्ध का प्रभाव भी भारत पर सकारात्मक रहने की सम्भावना है क्योंकि इससे यदि चीन से अमेरिका को निर्यात कम होते हैं तो सम्भव हैं कि भारत से अमेरिका को निर्यात बढ़ें। भारत से निर्यात बढ़ने पर भारतीय रुपए पर दबाव कम होने लगेगा, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक को भारत में रेपो दर को कम करने में और अधिक आसानी होगी।

ऐतिहसिक आँदोलन इन्हीं नेतृत्व में हुआ था : धर्मसंघ और रामराज्य परिषद के संस्थापक थे

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धर्म सम्राट करपात्रीजी महाराज एक महान सन्त, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनका पूरा जीवन भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की प्रतिष्ठापना और स्वत्व जागरण के लिये समर्पित रहा । इतिहास प्रसिद्ध गौरक्षा आँदोलन उन्हीं के आव्हान पर हुआ था । वे उतना ही भोजन ग्रहण करते थे जितना हाथों में आ जाये । इसलिये “करपात्री महाराज के नाम से प्रसिद्ध हुये ।
संन्यास के पहले उनका नाम हरि नारायण ओझा था। दीक्षा लेकर दसनामी परम्परा के संन्यासी बने तब उनका उनका नाम ” हरिहरानन्द सरस्वती” हुआ । उनमें अद्वितीय विद्वत क्षमता और स्मरण शक्ति थी । वेद, पुराण, अरण्यक ग्रंथ, संहिताएँ, गीता रामायण आदि ऐसा कोई धर्मशास्त्र नहीं जिनका अध्ययन उन्होंने न किया हो । सबके उदाहरण उनके प्रवचनों में होते थे। उनकी इस अद्वितीय विद्वता के कारण उन्हें ‘धर्मसम्राट’ की उपाधि से संबोधित किया गया । भारत के ऐसी विलक्षण विभूति संत स्वामी करपात्री जी महाराज का जन्म श्रावण मास शुक्ल पक्ष द्वितीया संवत् 1964 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिला अंतर्गत ग्राम भटनी में हुआ था । उस वर्ष यह 11 अगस्त 1907 को थी । पिता श्री रामनिधि ओझा परम् धार्मिक और वैदिक विद्वान थे । उनकी शिक्षा काशी में हुई थी । और माता शिवरानी देवी भी धार्मिक एवं संस्कारों के प्रति समर्पित गृहणी थीं। जन्म के समय उनका नाम ‘हरि नारायण’ रखा गया। पिता उन्हें भी काशी भेजकर वैदिक विद्वान बनाना चाहते थे । सात वर्ष की आयु में यज्ञोपवीत संस्कार और 9 वर्ष की आयु में विवाह हो गया । पत्नि महादेवी भी संस्कारित परिवार की थीं। गौना पन्द्रह वर्ष की आयु में हुआ । पर उनका मन घर गृहस्थी में न लगा । वे सोलह वर्ष की आयु में गृहत्याग कर सत्य की खोज में चल दिये और ज्योतिर्मठ पहुँचे। वहाँ शंकराचार्य स्वामी श्री ब्रह्मानंद सरस्वती जी से दीक्षा ली और हरि नारायण से ‘ हरिहर चैतन्य ‘ बने। उनकी स्मरण शक्ति इतनी विलक्षण थी कि एक बार पढ़ लेने के वर्षों बाद भी पुस्तक और पृष्ठ का विवरण दे सकते थे।
  काशी में रहकर नैष्ठिक ब्रम्हचर्य श्री जीवन दत्त महाराज से संस्कृत, षड्दर्शनाचार्य स्वामी श्री विश्वेश्वराश्रम महाराज से व्याकरण शास्त्र, दर्शन शास्त्र, भागवत, न्यायशास्त्र और वेदांत अध्ययन, श्री अचुत्मुनी महाराज से अध्ययन ग्रहण किया। अध्ययन के साथ तपस्वी जीवन शैली अपनाई और साधना से आत्मशक्ति जागरण का अभ्यास किया । चौबीस वर्ष की आयु में दंड धारणकर स्वयं अपना आश्रम स्थापित कर “परमहंस परिब्राजकाचार्य 1008 श्री स्वामी हरिहरानंद सरस्वती श्री करपात्री जी महाराज” कहलाए। 1942 के भारत छोड़ो आँदोलन में संतों की टोली बनाकर शोभा यात्रा निकाली और गिरफ्तार हुये । उस समय की राजनीति में स्वामी जी ने  दो बातें अनुभव कीं । एक तो भारत विभाजन के वातावरण की तीव्रता और दूसरे राजनीति में नैतिकता, साँस्कृतिक वोध और राष्ट्रभाव का अभाव । स्वामी ने समाज में इन दोनों बातों पर जाग्रति लाने के लिये देशव्यापी यात्रा की । संत और समाज सम्मेलन किये लेखन भी किया । उनके संबोधनों और साहित्य में एक ओर राष्ट्रचेतना और गौरव का भान होता और दूसरी ओर धार्मिक कुरीतियों का निवारण भी । स्वामी ने सनातन धर्म को विकृत करने वाले किस्से कहानियों का तर्क और प्रमाण सहित खंडन किया । इन दोनों उद्देश्य पूर्ति के लिये दो संस्थाओं का गठन किया । पहली अखिल भारतीय धर्म संघ और दूसरी रामराज्य परिषद । आखिल भारतीय धर्मसंघ का गठन 1940  में किया जिसका दायरा व्यापक बनाया । इसका उद्देश्य केवल मनुष्य या हिन्दु समाज ही नहीं  प्राणी मात्र में सुख शांति स्थापित करना था ।। उनकी दृष्टि में समस्त जगत और उसके प्राणी सर्वेश्वर, भगवान के अंश हैं और रूप हैं । मनुष्य यदि स्वयं शांत और सुखी रहना चाहता है तो औरों को भी शांत और सुखी बनाने का प्रयत्न  होगा। आज धार्मिक आयोजनों के समापन पर “धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो” यह उद्घोष करने की परंपरा स्वामी करपात्री महाराज ने ही आरंभ की थी ।
 राजनैतिक शुचिता के साथ भारत राष्ट्र  का निर्माण करने के लिये दूसरा संघठन राजनैतिक दल “अखिल भारतीय रामराज्य परिषद” की स्थापना की । इसका गठन 1948 में किया था और 1952 के प्रथम लोकसभा चुनाव में 3 सीटें जीतीं । 1952 के अतिरिक्त 1957 एवम् 1962 के विधानसभा चुनावों में भी इस दल की प्रभावी उपस्थिति रही ।
 गोरक्षा आन्दोलन
स्वामी जी ने देश भर में पदयात्रा की थी वे जहाँ कहीं जाते वे गौरक्षा, गौपालन और गौसेवा पर जोर देते थे । और चाहते थे कि भारत में गौहत्या प्रतिबंधित हो । उन्हें तत्कालीन सरकारों से आश्वासन तो मिले पर निर्णय न हो सका । यह भी कहा जाता है कि इंदिराजी जब सूचना प्रसारण मंत्री थीं तब स्वामी जी से मिलने आईं थीं। उन्होने स्वामी जी को गौहत्या रोकने का आश्वासन भी दे दिया था । पर जब इंदिराजी प्रधानमंत्री बनीं तब यह निर्णय न हो सका । अंत में स्वामी जी ने आँदोलन की घोषणा कर दी । स्वामी जी संतों के प्रतिनिधि मंडल के साथ इंदिराजी से मिलने भी गये । स्वामी जी चाहते थे कि सविधान में संशोधन करके गौ वंश की हत्या पर पूर्ण पाबन्दी लगे । जब बात न बनी तब स्वामी करपात्री जी महाराज के नेतृत्व संतों ने 7 नवम्बर 1966 को संसद भवन के सामने धरना शुरू कर दिया । पंचांग के अनुसार वह दिन विक्रमी संवत 2012 कार्तिक शुक्लपक्ष की अष्टमी थी । जिसे “गोपाष्टमी” भी कहा जाता है .इस धरने में चारों पीठाधीश्वर शंकराचार्य एवं भारत की समस्त संत परंपरा के संत सम्मलित हुये। इनमें जैन, बौद्ध, सिक्ख आदि सभी थे । इस आन्दोलन में आर्यसमाज के लाला रामगोपाल शालवाले और हिन्दू महासभा के प्रधान प्रो॰ रामसिंह जी भी बहुत सक्रिय थे। श्री संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी तथा पुरी के जगद्‍गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी निरंजनदेव तीर्थ तथा महात्मा रामचन्द्र वीर के आमरण अनशन ने आन्दोलन में प्राण फूंक दिये थे । उनदिनों श्रीमती इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं। स्वामी करपात्रीजी को आशा थी कि गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लग जायेगा । पर उनकी उम्मीद के विपरीत निहत्ते संतों पर पुलिस का गोली चालन हो गया । जिसमें अनेक संतों का बलिदान हुआ । पुलिस ने पूज्य शंकराचार्य तक पर लाठियाँ चलाईं। इस ह्त्याकांड से क्षुब्ध होकर तत्कालीन गृहमंत्री ” गुलजारी लाल नंदा ” ने खेद व्यक्त किया और स्वयं को जिम्मेदार माना । उनके खेद व्यक्त करने के बाद भी  संत ” रामचन्द्र वीर ” अनशन पर अडिग रहे । स्वामी रामचन्द्र वीर का अनशन 166 दिन चला । इतना लंबा अनशन दुनियाँ की पहली घटना थी ।
गौरक्षा आँदोलन में संतों के बलिदान ने स्वामी करपात्री जी महाराज को बहुत क्षुब्ध किया । इसके बाद उन्होंने अपना अधिकांश समय बनारस स्थित अपने आश्रम में ही बिताया। और माघ शुक्ल चतुर्दशी संवत 2038 को केदारघाट वाराणसी में शरीर त्यागा। यह 7 फरवरी 1982 की तारीख थी । स्वामी जी की इच्छानुसार उनकी नश्वर देह को गंगाजी के केदारघाट में ही जल समाधि दी गई|
 उनके द्वारा रचित प्रमुख ग्रंथों में वेदार्थ पारिजात, रामायण मीमांसा, विचार पीयूष, मार्क्सवाद और रामराज्य आदि हैं। उन्होंने अपने ग्रंथो में भारतीय परंपरा, संस्कृति की व्यापकता और प्राचीनता को का बहुत प्रभावी और प्रामाणिक ढंगसे प्रस्तुत किया है । वर्तमान पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी उनके ही शिष्य हैं।

IFFCO cautions farmers against unauthorized sale of its Products via E-Commerce Platforms.

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World’s biggest fertiliser cooperative, IFFCO is informing all farmers, cooperatives, buyers and retailers, that Indian Farmers Fertiliser Cooperative Limited (IFFCO), has not granted permission to any of the e-commerce platforms to sell its products. Purchases made from these online platforms are entirely at the buyer’s own risk and liability. These unauthorised platforms are misleading buyers, charging unfair rates and selling discarded products.
IFFCO, serving farmers for over five decades, is committed to safeguarding its farmers, retailers and the integrity of the agricultural sector. As per regulations governing online fertilizer sales, IFFCO will initiate legal action against those involved in the unauthorized sale of its products without an FCO license or the required ‘O’ Form from IFFCO.
Only authorized retailers of IFFCO can sell IFFCO products through its approved channels. The official prices for all IFFCO products, including Nanofertilisers, are available on our official website: www.iffco.in.
We at IFFCO strongly advise and caution everyone to beware of such fraudulent activities, including those offering fake IFFCO franchises or soliciting money in the name of IFFCO. To ensure that end user is purchasing genuine IFFCO products, always check with our authorized stores or directly through IFFCO’s website.

नहीं रहे सुरिंदर तलवार

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मुकेश कुमार
हमारे लाजपत नगर के वरिष्ठ स्वयंसेवक सुरिंदर जी तलवार हमारे बीच नहीं रहे। 84 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।  जिले में अपने सुरीले कंठ के लिए वे प्रसिद्ध थे। संघ के ढेर सारे गीत, कविता उन्हें कंठस्थ थे। खूब मजाक किया करते थे। शाखा में जब भी वे गाते थे तो पूरी व्यवस्था के साथ गाया करते थे। वे ढपली, स्टैंड और उँगली में पहनने वाली घुँघरू के साथ जब गाते थे तो समां बांध दिया करते थे। क्या अनुभव होता था वह, उसका बयान कर पाना मुश्किल है। पूर्णतः मोहित कर देने वाला दृश्य हुआ करता था । अब वह गीत, वह संगीत हमें नहीं सुनाई देगा। उनकी शाखा में जब भी किसी का जन्मदिन होता था तो उनकी शाखा ने यह नियम बनाया हुआ था कि वे ढपली बजाते हुए गीत, गाते हुए अपने स्वयंसेवक के घर जाएंगे और उसे फूल माला पहनाकर अपने स्वयंसेवक का अभिवादन करेंगे।
उसके विशेष दिन पर उसे विशिष्ट अनुभव कराएंगे। सुरिंदर जी शाखा के नियमित स्वयंसेवकों में से एक थे। हम सबका उनसे मिलना अक्सर एकत्रीकरण में होता था। अक्सर हसंते-मुस्कुराते रहते थे। उनकी हँसी , उनकी मुस्कान बहुत सुंदर थी। वो लाजपत नगर के पुराने स्वयंसेवकों में से एक थे।  पिछले 20 वर्षों में हमने लाजपत नगर के एक से एक बेहतरीन स्वयंसेवकों को खोया है। दिल्ली प्रांत में जहाँ संघ का सबसे अच्छा काम रहा है उसमें से एक लाजपत नगर भी  है। उसकी नींव में तलवार जी जैसे स्वयंसेवक रहे हैं। वे प्रौढ़ अवस्था में भी शाखा आते रहे। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद भी इस अवस्था में भी शाखा आते रहना  हम जैसे स्वयंसेवकों  के लिए प्रेरणा स्रोत का काम करता है। उनकी जिजीविषा अतुल्य थी। तलवार जी जैसे कार्यकर्ता संघ को जीते हैं।
उनका एक गीत मैंनें youtube पर अपलोड किया था। आप लोग उनको सुनिए। 80 की आयु में भी वह बेहतरीन  गाते थे। युवा अवस्था में तो जबरदस्त माहौल बना दिया करते होंगे। जो संघ के स्वयं सेवक हैं ज्यादा कनेक्ट कर पाएंगे।
प्रभु श्री राम उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
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