धन धान्य किसान: 2014 के बाद के बजटों ने बोए समृद्ध कृषि भविष्य के बीज अब अंकुरित होने लगे हैं

images-3.jpeg

दिल्ली। भारतीय कृषि क्षेत्र, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है, अब एक नए युग में प्रवेश करने के लिए बेचैन है। केंद्रीय बजट 2025-26 में कृषि को लेकर कई परिवर्तनकारी पहलों की घोषणा की गई है, जो न केवल किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित है, बल्कि कृषि क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का लक्ष्य लिए है।
कुल बजट का 22% हिस्सा कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए आवंटित किया गया है, जो सरकार की इस क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एक दशक से लगातार हो रहे सुधार और प्रयोग अब कृषि क्षेत्र को एक पॉजिटिव दिशा और गति दे रहे हैं। ऑर्गेनिक फॉर्मिंग, खासतौर पर दक्षिण भारत में, लाभ कमाऊ साबित हो रही है। हॉर्टिकल्चर और फ्लोरीकल्चर के साथ दुग्ध उत्पादन ने किसानों को सशक्त किया है, जो साफ दिख रहा है।

17 मिलियन किसानों के लिए नई उम्मीद
इस बजट की सबसे चर्चित पहल ‘पीएम धन धान्य कृषि योजना’ है, जो 100 जिलों के 17 मिलियन किसानों को लाभान्वित करेगी। यह योजना कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और उनकी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसके तहत किसानों को शिक्षा और कौशल विकास के अवसर भी प्रदान किए जाएंगे, ताकि वे आधुनिक कृषि प्रथाओं को अपना सकें।

प्रोफेसर पारस नाथ चौधरी, एक प्रमुख कृषि विशेषज्ञ, कहते हैं, “इस योजना का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचना एक बड़ा कदम है। यह न केवल उत्पादकता बढ़ाएगा, बल्कि कृषि क्षेत्र को अधिक लचीला और समृद्ध बनाएगा। सरकार की योजना निरंतर मूल्यांकन और सुदृढ़ीकरण पर आधारित है, जो इसे और प्रभावी बनाएगी।”

बजट में कृषि के आधुनिकीकरण के लिए अत्याधुनिक तकनीक और बेहतर सिंचाई सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। 1.7 करोड़ किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं प्रदान करने की योजना है, जिससे उनकी उत्पादकता में वृद्धि होगी। इसके अलावा, ड्रोन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का उपयोग करके कृषि प्रक्रियाओं को और अधिक कुशल बनाने की योजना है।

बजट में छह साल के ‘दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन’ की घोषणा की गई है। यह मिशन घरेलू दलहन उत्पादन को बढ़ावा देगा, आयात पर निर्भरता को कम करेगा और कीमतों को स्थिर रखेगा। इससे न केवल उपभोक्ताओं को लाभ होगा, बल्कि दाल उत्पादक किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

फलों और सब्जियों में कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए एक नया व्यापक कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस पहल के तहत आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विस्तार करने और परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी ताज़ा और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद सुलभ होंगे।

छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऋण तक पहुंच एक बड़ी चुनौती रही है। इस समस्या को दूर करने के लिए ‘ग्रामीण क्रेडिट स्कोर’ ढांचा शुरू किया गया है। यह ढांचा स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और ग्रामीण उद्यमियों को किफायती ऋण सुविधा प्रदान करेगा, जिससे वे अपने खेतों और व्यवसायों में निवेश कर सकेंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ‘अभिनव ग्रामीण समृद्धि और लचीलापन कार्यक्रम’ शुरू किया गया है। इसके तहत कौशल विकास, प्रौद्योगिकी अपनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह कार्यक्रम गैर-कृषि रोजगार के अवसर पैदा करेगा, जो कृषि आय के लिए एक महत्वपूर्ण पूरक साबित होगा।

बजट में पीएम-किसान, पीएम फसल बीमा योजना और अन्य मौजूदा योजनाओं को और मजबूत करने का भी प्रावधान है। इन योजनाओं ने पहले से ही कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, और नई पहल इन्हें और प्रभावी बनाएगी।

कृषि विशेषज्ञ सच्चेंद्र कुमार सिंह कहते हैं, “उपज के अंतर को पाटने पर ध्यान केंद्रित करने से न केवल उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में समानता भी सुनिश्चित होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह बजट एक मील का पत्थर साबित होगा।”

रिटायर्ड कृषि वैज्ञानिक टी.एन. सुब्रमनियन का कहना है, “प्रौद्योगिकी, वित्त और नीति सुधारों को एकीकृत करके, यह बजट भारतीय कृषि को वैश्विक स्तर पर एक शक्तिशाली क्षेत्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।”

2025-26 का बजट भारतीय कृषि के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। नवाचार, लचीलापन और समावेशी विकास पर आधारित यह बजट किसानों को सशक्त बनाने, उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान करता है। यह न केवल किसानों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए समृद्धि का संकेत है।

लगातार हार की चिंता में भाषा का संयम भी खो चुके हैं भूपेश बघेल : शिवरतन शर्मा

464194207_1014587960471507_7728090567340280277_n.jpg

रायपुर: प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अशालीन बयानबाजी पर कड़ा एतराज जताया है। श्री शर्मा ने कहा कि लगातार हार और नगरीय निकाय चुनाव में भी पराजय की आशंका से कांग्रेस नेता भूपेश बघेल का मानसिक संतुलन बिगड़ चुका है। श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा के प्रदेश प्रभारी श्री नितिन नबीन के बारे में व्यक्त बघेल के विचार कतई स्वीकार नहीं किए जा सकते। राजनीतिक विमर्श में ऐसी भाषा की कोई जगह नहीं होना चाहिए।

उपाध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा के प्रदेश प्रभारी श्री नबीन का पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता से संपर्क है। प्रदेश के हर कोने तक पहुंच कर उन्होंने संगठन को मज़बूत किया और कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि भूपेशजी लगातार हो रहे पराजय को पचा नहीं पा रहे हैं, इसलिए ऊल-जुलूल बयानबाजी कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री को उनके किए की सजा जनता ने दी है। उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए और बजाय बौखलाहट में आपा खोने के, अपनी भूलों को स्वीकार करते हुए सुधार करना चाहिये।

श्री शर्मा ने कहा कि श्री बघेल न केवल जनता में अलोकप्रिय और अप्रासंगिक हो गये हैं बल्कि अब कांग्रेस के भीतर भी उन्हें कोई सहन करने के लिए तैयार नहीं है। हाल ही में नेता प्रतिपक्ष महंत ने उनके नेतृत्व को खुली चुनौती दी है। अब अपनी राजनीतिक जमीन बुरी तरह खो चुके बघेल को अब राजनीति छोड़ देनी चाहिये।

उपाध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि अपार बहुमत से सत्ता में आने के बावजूद अपनी करनी, अपने भ्रष्टाचार, वादाखिलाफ़ी और अक्षमता के कारण पूर्व मुख्यमंत्री ने जनता का विश्वास खो दिया, उनकी बेजा बयानबाजी ने भी कांग्रेस की लुटिया डुबो दी। ऐसे बयानों से कांग्रेस का रहा-सहा आधार भी समाप्त हो जायेगा। श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता अपने प्रभारी के बारे में अनर्गल और बेजा बयानबाज़ी सहन नहीं करेंगे। उन्होंने कांग्रेस में नेताओं से यह उम्मीद की है कि वे सभी पूर्व मुख्यमंत्री को समझाइश देंगे।

आईटीबीपी में पदोन्नत हुए कमलेश कमल, हिंदी भाषा-विज्ञान पर शोध से राष्ट्रीय पहचान

1-6.jpeg

नई दिल्ली  भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (#ITBP) के वरिष्ठ अधिकारी और हिंदी भाषा-विज्ञान के प्रतिष्ठित विद्वान् कमलेश कमल को सेकंड-इन-कमांड पद पर पदोन्नति मिली है। वे वर्तमान में आईटीबीपी के राष्ट्रीय जनसंपर्क अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और बल के प्रकाशन विभाग की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

आईटीबीपी में अहम भूमिका, हिंदी के प्रति समर्पण :–

बिहार के पूर्णिया जिले के सरसी गांव निवासी कमलेश कमल हिंदी भाषा-विज्ञान और व्याकरण के क्षेत्र में अपने गहन शोध और सटीक प्रयोगों के लिए पूरे देश में विख्यात हैं। उनके पिता श्री लंबोदर झा, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षाविद् हैं और उनकी धर्मपत्नी दीप्ति झा, केंद्रीय विद्यालय में हिंदी शिक्षिका के रूप में हिंदी-सेवा कर रही हैं।

कमलेश कमल भारतीय शिक्षा बोर्ड के भाषा सलाहकार भी हैं और हिंदी के विभिन्न शब्दकोशों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे चुके हैं। उनकी पुस्तकों ‘भाषा संशय-शोधन’, ‘शब्द-संधान’ और ‘ऑपरेशन बस्तर: प्रेम और जंग’ ने राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की है। गृह मंत्रालय ने ‘भाषा संशय-शोधन’ को अपने अधीनस्थ कार्यालयों में उपयोग के लिए अनुशंसित किया है। उनकी नवीनतम कृति ‘शब्द-संधान’ को भी देशभर में अपार सराहना मिल रही है।

ब्यूरोक्रेसी और साहित्य में राष्ट्रीय पहचान :–

यूपीएससी 2007 बैच के अधिकारी कमलेश कमल की साहित्यिक और भाषाई विशेषज्ञता को देखते हुए टायकून इंटरनेशनल ने उन्हें देश के 25 चर्चित ब्यूरोक्रेट्स में शामिल किया था। वे देश के सबसे बड़े समाचार पत्र दैनिक जागरण में ‘भाषा की पाठशाला’ शीर्षक से एक स्थायी स्तंभ लिखते हैं और बीते 15 वर्षों से शब्दों की व्युत्पत्ति एवं शुद्ध-प्रयोग पर शोधपरक लेखन कर रहे हैं।

सम्मान एवं योगदान:–

गोस्वामी तुलसीदास सम्मान (2023)
विष्णु प्रभाकर राष्ट्रीय साहित्य सम्मान (2023)
2000 से अधिक आलेख, कविताएँ, कहानियाँ, संपादकीय, समीक्षाएँ प्रकाशित
देशभर के विश्वविद्यालयों में ‘भाषा संवाद: कमलेश कमल के साथ’ कार्यक्रम का संचालन
यूपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए हिंदी एवं निबंध की निःशुल्क कक्षाओं का संचालन

उनका फेसबुक पेज ‘कमल की कलम’ हर महीने 6-7 लाख पाठकों द्वारा पढ़ा जाता है, जिससे वे भाषा और साहित्य की जागरूकता को निरंतर बढ़ा रहे हैं। आईटीबीपी में उनकी इस उपलब्धि और हिंदी भाषा के प्रति उनके योगदान पर बिहार सहित पूरे देश के हिंदीप्रेमियों में हर्ष है। उनकी इस सफलता ने यह सिद्ध किया है कि वर्दी के साथ केवल बंदूक नहीं, बल्कि कलम का भी सुमेल हो सकता है।

हिंदू और बौद्ध एक ही वटवृक्ष की शाखाएंः सीएम योगी

1-5.jpeg

महाकुम्भनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रयागराज दौरे पर बौद्ध महाकुम्भ यात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी उपासना विधियों का एक मंच पर आना अभिनंदनीय है। हिंदू और बौद्ध एक ही वटवृक्ष की शाखाएं हैं। यदि ये एक ही मंच पर आ जाएं तो यह दुनिया में सबसे शक्तिशाली वटवृक्ष बनेगा जो उन्हें छांव भी देगा और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने बौद्ध संतों और विद्वानों पर पुष्प वर्षा भी की। इससे पहले मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने कहा, भगवान बुद्ध ने दुनिया को करुणा और मैत्री का संदेश दिया। आज यदि भारत रहेगा तो भगवान बुद्ध का संदेश भी रहेगा। कुछ लोग आज भारत को बांटने का षड्यंत्र कर रहे हैं, लेकिन इस तरह के आयोजनों से भारत विरोधी तत्वों की नींद हराम हो चुकी है।

महाकुम्भ में पहली बार पहुंचे कई देशों के बौद्ध भिक्षु,भंते व लामा महाकुम्भ में पहली बार दुनिया के कई देशों के भंते, लामा व बौद्ध भिक्षुओं का आगमन हुआ है। सभी बौद्ध भिक्षु व लामा संगम स्नान करेंगे एवं साधु संतों से भेंटवार्ता करेंगे।

बौद्ध संस्कृति संगम की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम बौद्ध एवं सनातन के बीच राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी समन्वय, समता, समरसता, सद्दभाव एवं करुणा मैत्री विकसित करने में मील का पत्थर साबित होगा। महाकुंभ पहुंचे भंते, लामा व बौद्ध भिक्षुओं का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं जूना अखाड़े के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने अंगवस्त्र एवं माला पहनाकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री के स्वागत से सभी बौद्ध भिक्षु अभिभूत दिखे। महाकुंभ में स्वागत से सभी बौद्ध भिक्षु मुक्त कंठ से मुख्यमंत्री की सराहना कर रहे थे। भारत के अलावा नेपाल, भूटान, श्रीलंका, म्यांमार, तिब्बत, लाओस, थाईलैंड, वियतनाम आदि देशों से बौद्ध भंते शील रतन, धम्मपाल बौद्ध संत, भंते शीलवचन सैकड़ों की संख्या में भंते आए हैं।

बुद्ध के मार्ग से दुनिया को युद्धमुक्त किया जा सकता हैः इन्द्रेश कुमार

महाकुम्भ के सेक्टर 17 में आयोजित बौद्ध भिक्षुओं के स्वागत सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इन्द्रेश कुमार ने कहा कि भारत दुनिया को करूणा व मैत्री का संदेश देगा। उन्होंने कहा कि बुद्ध के मार्ग से दुनिया को युद्धमुक्त किया जा सकता है। बुद्धं शरणं गच्छामि,संघं शरणं गच्छामि,धम्मं शरणं गच्छामि। बौद्ध व सनातनी एक थे, एक हैं,एक रहेंगे। हम सनातन के अंश थे,सनातन के अंश हैं और सनातन के अंश रहेंगे। कुंभ के अंश हैं और रहेंगे। इन्द्रेश कुमार ने कहा कि हिंसा मुक्त,दंगा मुक्त,धर्मान्तरण मुक्त भारत बने। हम सब सुखी रहें। मानवता से परिपूर्ण राष्ट्र बने। हम एक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे और दुनिया को अच्छाई का मार्ग दिखा सकेंगे।

बुद्ध व सनातनी मिलकर विश्व की बड़ी ताकत बनेंगे: स्वामी अवधेशानन्द

जूना अखाड़े के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने कहा कि कुंभ में बौद्ध भिक्षुओं का आगमन भारत के लिए ऐतिहासिक व सौभाग्यशाली क्षण है। उन्होंने कहा कि बुद्ध व सनातनी अगर एक हो जाएं तो हम विश्व की बड़ी ताकत बन जायेंगे। सत्य प्रेम व करूणा का दर्शन पूरे विश्व को समाधान देगा। भारत से एकात्मता का स्वर जाना चाहिए। परस्पर संवाद जरूरी है। भगवान बुद्ध के पवित्र स्थल श्रावस्ती,कुशीनगर व सारनाथ उत्तर प्रदेश में ही है। हम चाहते हैं कि इसकी शुरूआत उत्तर प्रदेश से ही होनी चाहिए।


स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने कहा कि भारत किसी युद्ध में शामिल नहीं है क्योंकि हमारे पास बुद्ध हैं। भारत सबका आदर करता है। प्रत्येक सनातनी प्रतिदिन अपने संकल्प में बुद्ध को याद करता है। 24 अवतारों में बुद्ध को ईश्वरीय सत्ता और भगवान माना है। उन्होंने कहा कि भारत बुद्ध को कभी भूला नहीं है। दुनिया में सर्वाधिक सम्मान बुद्ध का भारत में है। क्योंकि वह इसी भारतभूमि के थे।

महाकुंभ में 05 फरवरी को बौद्ध भिक्षु निकालेंगे यात्रा

धर्म संस्कृति संगम के अरूण सिंह बौद्ध ने बताया कि महाकुम्भ में 5 फरवरी को बौद्ध भिक्षुओं द्वारा संघम शरण गच्छामि,बुद्धं शरणम गच्छामि को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से महाकुंभ क्षेत्र में शोभा यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद 6 फरवरी को बौद्ध भिक्षु संगम स्नान करेंगे। हिंसा नहीं अहिंसा, छुआ छूत नहीं समानता समता, प्रदूषण नहीं पर्यावरण, सभी धर्मों में भाई चारा, यह रोशनी सबको दिखाई दे। इसी विचार को लेकर बौद्ध भिक्षु का पदार्पण महाकुंभ क्षेत्र में हुआ है।

धर्म संस्कृति संगम के राष्ट्रीय महासचिव राजेश लांबा,बौद्ध भिक्षु शील रतन,भंते धम्मपाल,लाओस से आये भंते वेन वत्थान दामोंग,वियतनाम से आये न्युगेन थी सुगुमाई,देवेन्द्र मंचासीन रहे।

इस अवसर पर जगद्गुरू सतुआ बाबा,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य शिवनारायण जी, क्षेत्र प्रचारक अनिल जी,प्रान्त प्रचारक रमेश जी,क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी,सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख मनोजकांत प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

scroll to top