अंततः अखंड भारत का सपना होगा साकार

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ग्वालियर : प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी 15 अगस्त 2024 को पूरे भारतवर्ष में 77वां स्वतंत्रता दिवस बहुत ही धूम धाम से मनाया गया। दरअसल, भारतीय नागरिक 15 अगस्त 1947 के पूर्व अंग्रेजों के शासन के अंतर्गत पराधीन थे  एवं 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों के शासन से मुक्त होकर भारतीय नागरिक स्वाधीन हुए। इसलिए इस पर्व को स्वाधीनता दिवस कहना अधिक तर्कसंगत होगा। स्वतंत्र शब्द दो शब्दों से मिलाकर बना है (1) स्व; एवं (2) तंत्र। अर्थात स्वयं का तंत्र, इसलिए स्वतंत्रता दिवस कहना तो तभी न्यायोचित होगा जब स्वयं का तंत्र स्थापित हो। भारत के नागरिकों में आज “स्व” के भाव के प्रति जागृति तो दिखाई देने लगी है और वे “भारत के हित सर्वोपरि हैं” की चर्चा करने लगे हैं। परंतु, भारत में तंत्र अभी भी मां भारती के प्रति समर्पित भाव से कार्य करता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे कभी कभी असामाजिक तत्व अपने भारत विरोधी एजेंडा पर कार्य करते हुए दिखाई दे जाते हैं और भारत के विभिन्न समाजों में अशांति फैलाने में सफल हो जाते हैं। स्व के तंत्र के स्थापित होने से आश्य यह है कि देश में हिंदू सनातन संस्कृति का अनुपालन सुनिश्चित हो।
प्राचीन काल में भारत विश्व गुरु था। आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक क्षेत्रों सहित लगभग समस्त क्षेत्रों में भारतीय सनातन संस्कृति का दबदबा था। भारत को उस खंडकाल में सोने की चिड़िया कहा जाता था। भारत के विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से पूरे विश्व से विद्यार्थी भारत में आते थे। भारत पर शक, हूण, कुषाण एवं यवन के आक्रमण हुए, परंतु भारत पर उनके कुछ समय के शासन के पश्चात वे भारतीय सनातन संस्कृति में ही रच बस गए एवं भारत का हिस्सा बन गए। परंतु, अरब के देशों से मुसलमान एवं ब्रिटेन से अंग्रेजों के भारत पर चले शासन के दौरान उन्होंने भारतीय नागरिकों का बलात धर्म परिवर्तन करवाया, स्थानीय नागरिकों पर अकल्पनीय अत्याचार किए। भारत के बड़े बड़े प्रतिष्ठानों, मंदिरों एवं ज्ञान के स्थानों को नष्ट किया। अंग्रेजों ने तो भारतीय नागरिकों के साथ छल कपट करते हुए यह भ्रम फैलाया कि अंग्रेजों ने ही भारतीय नागरिकों को जीना सिखाया है अन्यथा भारतीय समाज तो असभ्य, अनपढ़ गंवार था। उन्होंने भारतीय सनातन संस्कृति पर गहरी चोट की। वे भारतीयों में हीन भावना भरने में सफल रहे। भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति को नष्ट किया। गुरुकुल नष्ट किए। अंग्रेजों को नौकर चाहिए थे अतः तात्कालिक शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन किए। इसी प्रकार की शिक्षा प्रणाली देश में आज भी चल रही है, जिसके अंतर्गत शिक्षित भारतीय केवल नौकरी करने के लिए ही उतावाले नजर आते हैं। वे अपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने के प्रति रुचि ही प्रकट नहीं करते हैं। भारत में उद्योगपति अपने परिवार की विरासत से ही निकले हैं।
भारत को आक्रांताओं एवं अंग्रेजों के शासन से मुक्त कराने के उद्देश्य से समय समय पर भारत के तत्कालीन राज्यों के शासकों ने युद्ध भी लड़े एवं अपने स्तर पर उस खंडकाल में सफलता भी अर्जित की। जैसे, शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, राणा सांगा आदि के नाम मुख्य रूप से लिए जा सकते हैं। इसी प्रकार, अंगेजों के विरुद्ध लड़ाई लड़ने वाले वीर क्रांतिकारियों में रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद के नाम सहज रूप से लिए जा सकते हैं। स्वाधीनता प्राप्ति के उद्देश्य को लेकर मशाल आगे लेकर चलने वाले कई योद्धाओं में महात्मा गांधी, सरदार पटेल एवं सुभाषचंद्र बोस भी शामिल रहे हैं। इसी समय में विवेकानंद एवं डॉक्टर हेडगेवार ने भी सांस्कृतिक चिंतक के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन सफलतापूर्वक किया था। इस प्रकार, अंततः भारत को 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों के शासन से मुक्ति मिली एवं भारतीय नागरिकों को स्वाधीनता प्राप्त हुई। भारत के लिए यह एक नई सुबह तो थी परंतु यह साथ में विभाजन की त्रासदी भी लेकर आई थी। पूर्व एवं पश्चिमी पाकिस्तान के रूप में एक नए देश ने भी जन्म लिया और इस दौरान करोड़ों नागरिकों ने अपनी जान गवाईं थी।
आखिर भारत का विभाजन हुआ क्यों? यदि इस विषय पर विचार किया जाय तो ध्यान में आता है कि दरअसल अंग्रेजों ने यह भ्रम फैलाया कि भारत में आर्य बाहर से आए हैं और इस प्रकार वे भारतीय नागरिकों में मतभेद पैदा करने में सफल हुए। साथ ही, उन्हें भारतीय नागरिकों में यह भाव पैदा करने में भी सफलता मिली कि भारत एक भौगोलिक इकाई है एवं यह कई राज्यों को मिलाकर एक देश बना है जबकि राष्ट्र एक सांस्कृतिक इकाई होती है न कि भौगोलिक इकाई। उस खंडकाल विशेष में अंग्रेजों द्वारा भारत में किया गया मुस्लिम तुष्टिकरण भी भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार है। राष्ट्रवादी मुसलमानों की उपेक्षा की गई थी एवं उस समय की जनभावना को बिलकुल ही नकार दिया गया था, इसके उदाहरण के रूप में ‘वन्दे मातरम’ कहने पर अंकुश लगाना एवं राष्ट्रीय ध्वज के रूप में भगवा ध्वज को स्वीकार नहीं करना, का वर्णन किया जा सकता है। और फिर, उस समय विशेष पर भारत का नेतृत्व भी मजबूत हाथों में नहीं था। उक्त कई कारणों के चलते भारत को विभाजन की विभीषिका को झेलना पड़ा था और करोड़ों नागरिक इससे बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुए थे।
वैसे तो भारत को पूर्व में भी खंडित किया जाता रहा है परंतु वर्ष 1947 में हुआ विभाजन सबसे अधिक वीभत्स रहा है। वर्ष 1937 में म्यांमार भारत से अलग हुआ था, वर्ष 1914 में तिब्बत को भारत से अलग कर दिया गया था, वर्ष 1906 में भूटान एवं वर्ष 1904 में नेपाल को भारत से अलग कर दो नए देश बना दिये गए थे एवं वर्ष 1876 में अफगानिस्तान ने नए देश के रूप में जन्म लिया था। यह सभी विभाजन भारत को पावन भूमि को विखंडित करते हुए सम्पन्न हुए थे। यह सिलसिला वर्ष 1947 में स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात भी रुका नहीं एवं वर्ष 1948 में भारत के भूभाग को विखंडित कर श्रीलंका के रूप में नए देश का जन्म हुआ। वर्ष 1948 में ही पाकिस्तान के कुछ कबीलों ने भारत के कश्मीर क्षेत्र पर आक्रमण कर कश्मीर के एक हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया था, जिसे आज ‘पाक आकुपाईड कश्मीर’ कहा जाता है। वर्ष 1962 में आक्साई चिन भी भारत से विखंडित हो गया था।
उक्त विखंडित हुए भूभाग से भारत का नाता आज भी बना हुआ है। जैसे, अफगानिस्तान में बामियान बुद्ध की मूर्तियां स्थापित रही हैं, जिन्हें बाद के खंडकाल में तालिबान ने खंडित कर दिया है। महाभारत काल में गांधारी आज के अफगानिस्तान राज्य की निवासी रही है। अफगानिस्तान शिव उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसी प्रकार पाकिस्तान में तो तक्षशिला विश्वविद्यालय रहा है, जिसमें विश्व के अन्य देशों से विद्यार्थी अधय्यन के लिए आते थे। हिंगलाज माता का मंदिर है, भगवान झूलेलाल का अवतरण इस धरा पर हुआ था, साधु बेला, संत कंवरराम, ऋषि पिंगल, ऋषि पाणिनि भी इसी धरा पर रहे हैं। भगत सिंह, लाला लाजपत राय एवं आचार्य कृपलानी जैसे देशभक्तों ने भी इसी धरा पर जन्म लिया था। बंगला देश में भी आज ढाकेश्वरी मंदिर स्थित है जिसके नाम पर ही बांग्लादेश की राजधानी को ढाका कहा जाता है। जगदीश चंद्र बोस एवं विपिन चंद्र पाल जैसे महान देशभक्तों ने भी इसी धरा पर जन्म लिया है। नेपाल तो अभी हाल ही के समय तक हिंदू राष्ट्र ही रहा है एवं यहां पर कैलाश मानसरोवर, पशुपति नाथ मंदिर, जनकपुर जहां माता सीता का जन्म हुआ था एवं विश्व प्रसिद्ध लुम्बिनी, आदि नेपाल में ही स्थित हैं। इस दृष्टि से यह ध्यान में आता है कि भारत को एक बार पुनः अखंड क्यों नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि भारत से अलग हुए इन सभी देशों की सांस्कृतिक विरासत तो एक ही दिखाई देती हैं।
महर्षि अरविंद तो कहते ही थे कि भारत अखंड होगा क्योंकि यह ईश्वर की इच्छा है। स्वामी विवेकानंद जी को भरोसा था कि भारत एक सनातन राष्ट्र के रूप में अखंड होगा ही। आज हम सभी भारतवासियों को यह विश्वास अपने मन में जगाना होगा कि भारत एक अखंड राष्ट्र होगा ही इसके लिए मेहनत की पराकाष्ठा जरूर करनी होगी। हिंदू एक संस्कृति है न कि पूजा पद्धति, इस प्रकार का व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा। अखंड भारत में समस्त मत पंथों को मानने वाले नागरिकों को अपनी पूजा पद्धति के लिए छूट होगी ही। इस संदर्भ में विघटनकारी सोच की राजनैतिक पराजय अति आवश्यक है। भविष्य में केवल भारत ही अखंड होगा, ऐसा भी नहीं है। इसके पूर्व एवं पश्चिमी जर्मनी एक हो चुके हैं, वियतमान में भी इसी संदर्भ में बाहरी षड्यंत्र विफल हो चुके हैं। इजराईल देश भी तो अनवरत साधना से ही बन पाया है, फिर भारत क्यों नहीं अखंड हो सकता।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर “कला संकुल” में ध्वजारोहण कार्यक्रम संपन्न

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बृजेश भट्ट
नई दिल्ली 15 अगस्त 2024: आज स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर “कला संकुल” में एक भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संस्कार भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री अभिजीत गोखले जी ने ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर उन्होंने अमृत काल में स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर बढ़ने का आह्वान किया और देश की प्रगति में कला और संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला।
ध्वजारोहण कार्यक्रम में मुख्यालय प्रभारी श्री अशोक तिवारी, वरिष्ठ चित्रकार श्री धमेंद्र राठौर, साहित्य एवं नाटककार श्री शैलेश श्रीवास्तव, वरिष्ठ नाटककार श्री श्याम कुमार, कथक नर्तक श्री विश्वदीप कुमार, तबला वादक श्री प्रदीप पाठक, नाट्य समीक्षक गरिमा रानी, गृह मंत्रालय के अधिकारी श्री सोमेन जी, कला संकुल व्यवस्था प्रभारी श्री दिग्विजय पांडेय सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता और कलाकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों और कलाकारों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने का संकल्प लिया।

ग्यारह सालों में लालकिले के प्राचीर से कही गई महत्वपूर्ण बातें

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प्रस्तुत है, बीते ग्यारह सालों में प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से कही गई महत्वपूर्ण बातों से प्रमुख अंश :

2024 

  • प्रधानमंत्री ने इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेकुलर सीविल कोड का जिक्र करते हुए कहा, हमारे देश में सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार UCC को लेकर चर्चा की है, अनेक बार आदेश दिए हैं। अब देश की मांग है कि देश में secular civil code हो। अपने लाल किले के भाषण में युवाओं के रोजगार, शिक्षा और महिला सुरक्षा पर भी जोर दिया।
  • कृषि का जिक्र करते हुए श्री मोदी ने कहा — हमारी कृषि व्यवस्था को transform करना समय की मांग है और ये बहुत जरूरी भी है। हमारे किसानों को इसके लिए हम मदद भी दे रहे हैं।किसानों को आसान ऋण दे रहे हैं, टेक्नोलॉजी की मदद दे रहे हैं, किसान जो पैदावार करता है उसके value addition का काम भी हम कर रहे हैं।
  •  देशवासियों को प्रधानमंत्री ने विश्वास दिलाया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी जंग जारी रहेगी, चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत चुकानी पड़े। इसके लिए वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा— राष्ट्र से बड़ी मेरी प्रतिष्ठा नहीं हो सकती और राष्ट्र के सपनों से बड़ा मेरा सपना नहीं।

2023

  • प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कहा था कि उन्हें विश्वास है कि 2047 में जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा तो यह एक विकसित राष्ट्र होगा।
  • उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मोदी की गारंटी है कि भारत अगले पांच वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उन्होंनेइस दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का आह्वान करते हुए कहा था कि इसने भारत की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते रहना उनकी जीवन भर की प्रतिबद्धता है।
  • पीएम ने दावा किया कि पांच साल में 13.5 करोड़ से अधिक गरीब लोग गरीबी से बाहर आकर मध्यम वर्ग का हिस्सा बन गए।

2022

  • केंद्र सरकार ने 2022 में आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आजादी का अमृत महोत्सव मनाने का फैसला किया था। इसे लेकर पीएम मोदी ने लाल किले से दिए अपने भाषण में कहा था कि हर जिले में 75 अमृत सरोवर बनाने के अभियान के साथ आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है।
  • उन्होंने कहा, ‘हर गांव से लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लोग अपने प्रयासों से अपने-अपने गांवों में जल संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चला रहे हैं।’

2021

  • स्वतंत्रता दिवस 2021 के मौके पर पीएम मोदी ने बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
  • उन्होंने इस दौरान जल्द ही राष्ट्रीय मास्टर प्लान या गति शक्ति लॉन्च करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक की इस योजना से लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर उपलब्ध होंगे।

2020

  • 2020 में स्वतंत्रता दिवस के वक्त पूरी दुनिया समेत भारत भी कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहा था। इस दौरान पीएम ने अपने भाषण में कहा था कि हम एक असाधारण स्थिति से गुजर रहे हैं। आज बच्चे , भारत का उज्ज्वल भविष्य, मेरे सामने नहीं हैं। क्यों?
  • ऐसा इसलिए है क्योंकि कोरोना ने सभी को रोक दिया है। पीएम ने कहा था कि कोरोना के इस काल में वह लाखों डॉक्टरों, नर्सें, सफाई कर्मचारी, एम्बुलेंस ड्राइवर और अनय कोरोना योद्धाओं को सलाम करते हैं। साथ ही पीएम ने लाल किले से एलान किया था कि उनकी सरकार ने 1000 दिन के अंदर गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने का काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

2019

  • लोकसभा चुनाव 2019 में दोबारा सत्ता में चुनकर आने के बाद दूसरे कार्यकाल का यह पीएम मोदी का पहला भाषण था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि नई सरकार को अभी 10 सप्ताह भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन इतने कम समय में हमने हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पीएम मोदी ने दूसरी बार पीएम बनने के बाद अपने पहले भाषण में कहा कि अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाया जाना सरदार पटेल के सपने को साकार करने की दिशा में एक कदम है।
  • साथ ही पीएम ने भाषण में तीन तलाक खत्म होने की जरूरत पर भी जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर हम सती प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और दहेज के खिलाफ कदम उठा सकते हैं तो तीन तलाक के खिलाफ क्यों नहीं। तीन तलाक खत्म होने से मुस्लिम महिलाओं को बेहतर जीवन जीने में मदद मिलेगी।
  • 2019 के भाषण में पीएम ने जनसंख्या विस्फोट पर भी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि एक मुद्दा है जिसे वह आज उजागर करना चाहते हैं, वह है जनसंख्या विस्फोट। उन्होंने कहा कि हमें सोचने की जरूरत है कि क्या हम अपने बच्चों की आकांक्षाओं के साथ न्याय कर सकते हैं? पीएम ने कहा कि जनसंख्या विस्फोट पर अधिक चर्चा और जागरूकता की जरूरत है।

2018

2018 के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने जीएसटी की शुरूआत की सराहना करते हुए कहा था कि 70 वर्षों की अवधि के लिए अप्रत्यक्ष कर अधिकारी 70 लाख राजस्व जुटाने में सक्षम थे, लेकिन जीएसटी लागू करके हम एक साल के अंदर 16 लाख का राजस्व जुटाया है।

पीएम ने लाल किले की प्राचीर से बताया था कि 2013 तक प्रत्यक्ष कर दाता केवल 4 करोड़ लोग थे, जिसकी संख्या दोगुनी होकर 7.25 करोड़ हो गई है।

2017

  • पीएम मोदी ने 2017 के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर काला धन के खिलाफ सरकार की कार्रवाई के बारे में बताते करते हुए कहा था कि वर्षों से बेनामी संपत्ति रखने वालों के लिए कोई कानून पारित नहीं किया गया था, लेकिन हाल ही में बेनामी अधिनियम पारित होने के बाद बहुत कम समय के भीतर सरकार ने 800 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति जब्त कर ली है।
  • साथ ही पीएम मोदी ने कहा था कि लोग स्थापना के पीछे प्रेरक शक्ति होंगे, न कि इसके विपरीत। उन्होंने कहा था, ‘तंत्र से लोक नहीं, लोक से तंत्र चलेगा।’ उन्होंने देश भर में बढ़ते डिजिटल लेनदेन पर बात की और नागरिकों से कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने का आह्वान किया था

2016

  • पीएम मोदी ने 2016 के भाषण में घोषणा की कि सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों के लिए पेंशन 20 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया है।
  • साथ ही पीएम ने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए सरकार प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक का खर्च वहन करेगी, ताकि उनकी स्वास्थ्य देखभाल की जरूरतों का ध्यान रखा जा सके।

2015

  • पीएम ने 2015 में अपने दूसरे स्वतंत्रता दिवस के भाषण में कई इलाकों में बिजली न होने की बात कही थी और कहा कि उनकी सरकार अगले 1000 दिनों में उन 18,500 गांवों में बिजली पहुंचाएगी, जहां बिजली नहीं है।
  • साथ ही पीएम ने बताया था कि काले धन और विदेशी संपत्ति कानून की अनुपालन खिड़की के तहत 6500 करोड़ रुपये का खुलासा किया गया था।

2014

  • साल 2014 में पहली बार प्रधान मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद स्वतंत्रता दिवस के अपने पहले संबोधन में पीएम मोदी ने खुद को देश का प्रधान सेवक बताया था।
  • उन्होंने कहा था कि देश का हर व्यक्ति अगर एक कदम आगे बढ़ाएगा तो पूरा देश मिलकर 140 करोड़ कदम आगे बढ़ाएगा।
  • पीएम ने अपने पहले ही भाषण में जन-धन योजना शुरू करने की घोषणा की थी, जिसके तहत प्रत्येक नागरिकों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए उनके बैंक खाते खुलवाए जाने थे।

परीक्षाओं में अंक हासिल करने की जानलेवा होड़ के बीच सरकारी स्कूल का समाधान को लेकर अनूठा पोस्टर

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जालोर के रेवत की राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल की अभिनव पहल बनी अभिभावकों और शिक्षा जगत में चर्चा का विषय

जालोर (राजस्थान) : ”हमारा यह नवाचार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की दिशा में एक कदम है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बालकों के सर्वांगीण विकास को लक्ष्य माना है एवं 360 डिग्री मूल्यांकन की भी बात कही है। हमारे प्राचीन गुरुकुलों में छात्रों को सिर्फ पुस्तक नहीं पढ़ाई जाती थी बल्कि उसके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास किया जाता था। हर विद्यार्थी महत्वपूर्ण एवं प्रतिभावान हैं। उनकी प्रतिभाओं को महत्व देना एवं फलने फूलने का अवसर देना, समाज एवं शिक्षक दोनों की जिम्मेदारी है।”

ऐसा कहना है, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, रेवत, जालोर(राजस्थान) के शिक्षक संदीप जोशी का। प्रदेश में नामी-गिरामी शिक्षण संस्थानों के बीच जहां हर वर्ष नए शैक्षणिक सत्र में एडमिशन के लिए लुभाने के लिए उच्च प्राप्तांको वाली मार्कशीट को दर्शाते होर्डिंग – पोस्टर का वार दिखाई देता है, वहीं जालोर के एक सरकारी स्कूल ने बच्चों पर प्राप्तांको के मानसिक तनाव को कम करने वाली अभिनव पहल की है जो अभिभावकों और शिक्षा क्षेत्र में बहुत सराही जा रही है।

असल में प्रतिभाएं आमतौर पर सिर्फ प्राप्तांको (%) के आधार पर ही तय होती हैं लेकिन जालोर जिले के रेवत ग्राम स्थित इस विद्यालय में प्राप्तांको के अलावा विविध क्षेत्र की अपनी प्रतिभाओं का भी परिचय दिया है। नतीजे इस स्कूल के भी बहुत अच्छे हैं लेकिन साथ-साथ विद्यालय ने अपने प्रवेशोत्सव पोस्टर नृत्य प्रतिभाएं, खेल प्रतिभाएं, सुंदर लेखन प्रतिभाएं, चित्रकला प्रतिभाएं, गायन कला प्रतिभा, सिलाई कला प्रतिभा, काव्य प्रतिभा और क्राफ्ट प्रतिभा के अलावा सोशल मीडिया प्रतिभा तक का परिचय दिया है।

इस सरकारी विद्यालय ने श्रेष्ठ अंकों वाले विद्यार्थियों के साथ ही विभिन्न बहुआयामी प्रतिभाओं के होर्डिंग और पोस्टर लगाकर नई मार्केटिंग और ब्रांडिंग कर करने की पहल की है। जिसमें अंकों की मेरिट के साथ ही स्पोर्टस, डांस, सिंगिंग, पेंटिंग्स, बेस्ट राईटिंग, पॉइम्म, स्पीच आदि गतिविधियों को भी शामिल कर विविध टेलेंटेड प्रतिभाओं के होर्डिंग्स और पोस्टर लगवाकर सर्वांगीण विकास का मैसेज दिया है। होर्डिंग्स में बच्चों के फोटो पर लिखा है , एक नई शुरुआत है।

विद्यालय के प्राचार्य छगनपुरी गोस्वामी ने बताया कि व्याख्याता संदीप जोशी ने साथी शिक्षकों के साथ मिलकर रेवत स्कूल में यह नई पहल की है। शिक्षक जोशी के मुताबिक कोचिंग एवं ट्यूशन के दबाव, अंको की जानलेवा प्रतिस्पर्धा, सफलता का प्रेशर और असफलता का डर आदि से बच्चे और अभिभावक भारी तनाव में जी रहे हैं। इस माहौल के परिणाम अत्यंत भयावह एवं चिंतनीय बाल आत्महत्याओं के रूप में हमारे सामने आने लगे है। अंको का दबाव विद्यार्थियों ही नही अभिभावकों और शिक्षण संस्थान पर भी होता है और वहीँ प्रेशर बच्चों पर भी आता है। संदीप जोशी के अनुसार इस सब वातावरण से मुक्ति का एक बड़ा मार्ग है बालकों की पढ़ाई के साथ ही अन्य विविध प्रतिभाओं को भी स्वीकारना, समान महत्व देना और उन्हें उभारना। परीक्षा में बहुत अच्छे अंक प्राप्त करना एक सफलता है, और सभी की यह इच्छा भी रहती है। इसके साथ ही प्रतिभाओं के अन्य भी बहुत सारे क्षेत्र हैं। परीक्षा में अंक प्राप्त करने की होड़ के समानांतर एक लाइन बहुआयामी प्रतिभाओं की भी खड़ी करनी होगी। ज्यादा अच्छा है कि यह दूसरी लाइन और भी बड़ी हो।

समस्या से समाधान की ओर :-रेवत के सरकारी स्कूल ने इस दिशा में एक कदम बढ़ाया है। समस्या से समाधान की ओर। इस बार प्रवेश उत्सव के दौरान 12वीं बोर्ड कक्षा में सर्वोच्च 95.20% अंक प्राप्त करने वाली विद्यार्थी के साथ-साथ विद्यालय की अन्य विभिन्न प्रकार की प्रतिभाओं के भी चित्र होर्डिंग्स, पोस्टर इत्यादि पर लगाए है। जिनमे खेल प्रतिभा, पेंटिंग प्रतिभा,नृत्य प्रतिभा, सुंदर हैंडराइटिंग वाले विद्यार्थी, अच्छा क्राफ्ट करने वाले विद्यार्थी, गायन प्रतिभा, सुंदर कविता पाठ करने वाले विद्यार्थी के भी नाम और फोटो प्रकाशित किए हैं।
देश विदेश के शिक्षाविदों ने सराहना की। विद्यालय की इस पहल की अभिभावकों और शिक्षकों द्वारा सराहना हुई ही, साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविदों ने भी इस पहल को अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अनुकरणीय बताया है।

एनसीईआरटी के संयुक्त निदेशक प्रो श्रीधर श्रीवास्तव ने विद्यालय को शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि यह बहुत सुंदर विचार है। हर तरह की प्रतिभाओं को स्थान एवं सम्मान मिलना चाहिए। यह NEP 2020 के प्रथम सिद्धांत का परिपालन है। विद्यालय को बधाई।

अमरीका में कार्यरत भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ तेज पारीक ने विद्यालय के इस नवाचार की प्रशंसा करते हुए लिखा कि अमेरिका के विद्यालयों में लगभग यही व्यवस्था है। यहाँ विद्यार्थियों की सर्वांगीण प्रतिभाओं का आकलन कर उन्हें समान रूप से प्रोत्साहित किया जाता है ना की विभेदित। अंतर सिर्फ़ इतना है कि यहाँ के समाज में आगे चलकर इन बहुमुखी प्रतिभाओं के सदुपयोग की व्यवस्था भी है। वर्तमान भारतीय समाज में इस और अधिक काम किये जाने की प्रचुर सम्भावनाएँ हैं। आपका ये भागीरथी प्रयास इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो और यह शैक्षणिक नीति का अभिन्न हिस्सा बने यही शुभकामना है।

इसी प्रकार एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक प्रोफेसर जे एस राजपूत, विख्यात प्रबंध गुरु एन रघुरामन, देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार से जुड़े गुजरात निवासी एवं वर्तमान में अमेरिका निवासी शिक्षाविद चेलाराम जोशी सहित अनेक शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पहल की सराहना की है।

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