हिंदुत्व के आत्मबोध से होगी भारत की प्रगति

6-1-4.jpeg

राम हमें द्वेष करना नहीं, द्वेष ख़त्म करना सिखाते है : डॉ. कृष्ण गोपाल

नीरज

नोएडा: प्रेरणा शोध संस्थान न्यास के तत्वाधान में ‘राम मंदिर से राष्ट्र का पुररुद्धार’ विषय पर एक भव्य गोष्ठी आयोजित की गई। इस गोष्ठी के मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ये केवल एक मंदिर नहीं, ये लोगो की आत्मा का संरक्षण है। राम हमें द्वेष करना नही, द्वेष खत्म करना सिखाते है। गोष्ठी के संबोधित करते हुए डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि आगे एक लंबी यात्रा है और उसकी तैयारी हमें करनी होगी। हमारा देश विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता और संस्कृति वाला देश है।

संगोष्ठी के दौरान राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बारे में अपना अनुभव साझा करते हुए कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि एवं लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि अपने बचपन में वो राम मंदिर के निर्माण हेतु चल रहे उस संघर्षों को आँखों देखा है प्रतिकुल समय होने के बावजूद कैसे भारत के उस विश्वास के प्रति समाज का भरोसा बना रहा। मालिनी जी के मुताबिक २२ जनवरी २०२४ राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में जो भी वहां उपस्थित थे उसमें मानो हमारे प्रभु श्री राम की छवि परिलिक्षित हो रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि वो अपने आप को बहुत सौभाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में गीत गाने का अवसर मिला।

सूर्यप्रकाश टोंक जी ने भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के अनुभवों को मंच से साझा किया और कहा कि जो उन्होंने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के समय महसूस कर रहे थे वैसा हर भारतीय ने अपने घर बैठकर भी महसूस कर रहा था और गौरवान्वित महसूस किया।

गोष्ठी के दौरान ही विचार पत्रिका एवं प्रेरणा विमर्श 2023 की स्मारिका का भी विमोचन किया गया ।

इससे पहले पहले सत्र के दौरान प्रेरणा विमर्श अथिति वक्ता मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस अथिति-वक्ता मिलन समारोह में प्रेरणा विमर्श के सभी चार संस्करणों के अतिथियों ने हिस्सा लिया एवं प्रेरणा विमर्श के इन चार सालों में उनकी सहभागिता को लेकर अपने अनुभव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल जी के साथ साझा किए। कार्यक्रम के पहले सत्र के संयोजक डॉ अनिल त्यागी एवं दूसरे सत्र के संयोजक शुभ्रांशु झा जी रहे, जबकि मंच संचालक मोनिका चौहान जी, डॉ. नीलम व डॉ. प्रियंका के द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन भाऊराव देवरस विद्या मंदिर, नोएडा सेक्टर-12 के सभागार में किया गया।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, क्या सभी पत्रकारों का है संगठन

6-12.jpeg

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, पत्रकार-पत्रकार, यू ट्यूबर-यू ट्यूबर में भेद करता है। यह भेद भाव नया नहीं है। दलित दस्तक और बोलता हिंदुस्तान के लिए उसकी करुणा जागृत हुई है। राहुल देव जैसे तमाम प्रगतिशील निष्पक्ष पत्रकार लिख रहे हैं इस संबंध में लेकिन कुछ दिनों पहले दिल्ली के यू ट्यूबर रचित कौशिक को पंजाब पुलिस ने उत्तर प्रदेश से लगभग किडनैप किया। किडनैप इसलिए क्योंकि उन्हें परिवार की आंखों के सामने उठाया गया और उठाने वालों ने यह तक बताना जरूरी नहीं समझा कि वे कौन लोग हैं और क्यों ले जा रहे हैं।

रचित का यू ट्यूब कई कई बार सस्पेंड हुआ। उसकी चर्चा इसलिए नहीं हुई क्योंकि वह किसी हल्ला गिरोह का सदस्य नहीं था। शांति से अपना काम कर रहा था और उसका काम दिल्ली के सर जी को पसंद नहीं आया। इसलिए पंजाब पुलिस के माध्यम से रचित को गिरफ्तार कराया गया।

प्रेस क्लब ने रचित के लिए तो स्टेटमेंट जारी नहीं किया। उसका पत्रकारों और यू ट्यूबर के लिए खड़े होते हुए दिखने का प्रयास, इतना सेलेक्टिव क्यों है?

भारत का सकल घरेलू उत्पाद अगले 50 वर्षों में 52 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का हो जाने की सम्भावना

107235902.jpg.webp

गोल्डमेन सेच्स नामक अंतरराष्ट्रीय निवेश संस्थान ने अपने एक रिसर्च पेपर में बताया है कि आगे आने वाले 50 वर्षों में भारत का सकल घरेलू उत्पाद 52 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का हो जाएगा। इस प्रकार भारत इस संदर्भ में अमेरिका को भी पीछे छोड़ते हुए विश्व में प्रथम स्थान पर आ जाएगा। वर्तमान में भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं विश्व बैंक आदि विभिन्न वित्तीय संस्थानों ने भी आगे आने वाले समय में भारत की आर्थिक वृद्धि दर को 7.2 प्रतिशत रहने की प्रबल संभावनाएं जताईं हैं। जबकि, आज विश्व के कई देश, विशेष रूप से ब्रिटेन, जर्मनी आदि, आर्थिक संकुचन के दौर से गुजर रहे हैं। रूस यूक्रेन युद्ध के चलते कई विकसित देश तो ऊर्जा की कमी के संकट से जूझ रहे हैं। भारत के विदेशमंत्री, डॉक्टर एस जयशंकर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व के लगभग समस्त सशक्त देशों के साथ अच्छे सम्बंध बनाने में सफल रहे हैं। आज रूस को भी भारत की आवश्यकता है तो अमेरिका को भी। रूस, भारत को कच्चे तेल एवं सुरक्षा के लिए भारी मात्रा में शस्त्र उपलब्ध कराता है। वर्ष 2022 में भारत ने रूस से 4,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर का सामान आयात किया था। वर्ष 2023 में यह बढ़कर 5,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर होने की प्रबल सम्भावना है। वहीं अमेरिका, भारत को अपना स्ट्रेटेजिक सहयोगी मानता है। आज विश्व की समस्त बड़ी शक्तियां भारत के साथ सौहार्द पूर्ण सम्बंध चाहती हैं। रूस, अमेरिका, यूरोपीयन देश एवं अरब देश भारत के साथ अपने व्यापार को विस्तार देना चाहते हैं। रूस भी भारत के साथ अच्छे सम्बंध चाहता है तो यूक्रेन भी। उधर इजराईल भी भारत के साथ अच्छे सम्बंध चाहता है तो इरान भी। भारत जी-20 समूह का सदस्य है तो भारत यू2आई2 एवं ब्रिक्स का भी सदस्य है। इस प्रकार कुल मिलाकर भारत का डंका आज पूरे विश्व में बज रहा है। आज भारत के पास विश्व की चौथी सबसे बड़ी फौज है। पश्चिमी बॉर्डर पर चीन से युद्ध की स्थिति में भारत आज इससे निपटने को पूर्णत: तैयार है।

भारत के पास आज युवा जनबल है। भारत की 66 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष की कम आयु की है। 40 प्रतिशत जनसंख्या 13 से 35 वर्ष के बीच में है। भारत के पास 35 वर्ष से कम आयु की जनसंख्या अमेरिका की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। इसके विपरीत चीन, जापान, इटली, फ्रान्स आदि कई देशों की जनसंख्या अब धीमे धीमे कम हो रही है। इन देशों में आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के लिए आज युवाओं की सख्त आवश्यकता है जो पूरे विश्व में केवल भारत ही उपलब्ध करा सकता है। वर्ष 2064 तक भारत की जनसंख्या बढ़ती रहेगी, ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है। इस प्रकार वैश्विक स्तर पर भारत विश्व में विकास के इंजन के रूप में अपनी भूमिका लम्बे समय तक निभाता रहेगा।

उक्त संदर्भ में दूसरा सबसे बड़ा कारण बताया गया है, भारत में हाल ही के समय में किया गया डिजिटलीकरण। इससे देश के ग्रामीण इलाकों में भी नागरिकों की दक्षता एवं उत्पादकता बढ़ गई है। भारत में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की वित्तीय एवं बैंकिंग संस्थानों द्वारा भरपूर आर्थिक सहायता की जा रही है इससे यह उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहे हैं एवं देश में रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित कर रहे हैं। पूर्व में केवल बड़े उद्योगों को ही बैकों द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती रही है परंतु भारत में अब यह ट्रेंड बदला है। कोविड महामारी के बाद से तो इस सम्बंध में बड़ा बदलाव देखने में आया है। डिजिटलीकरण के कारण छोटे छोटे व्यवसाईयों की क्रेडिट हिस्ट्री निर्मित हो रही है जिसके कारण बैकों को इन छोटे छोटे व्यापारियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में आसानी हो रही है। ‘आधार’ ने तो देश के समस्त नागरिकों की एक अलग पहचान ही बना दी है। यूपीआई प्लेटफोर्म ने भी इस संदर्भ में ग्रामीण इलाकों में रोकड़ के उपयोग को कम कर डिजिटल प्लेटफोर्म पर वित्तीय व्यवहारों को हस्तांतरित किया है। छोटे छोटे व्यवसाईयों, किसानों, सामान्य नागरिकों को भी वित्तीय प्लेटफोर्म पर लाने में यह डिजिटलीकरण बहुत सफल रहा है। इससे वित्तीय समावेशन का कार्य भी आसान बन पड़ा है। भारत में डिजिटल व्यवहारों की संख्या आज संयुक्त रूप से अमेरिका, चीन एवं यूरोप से भी अधिक है। जबकि अमेरिका, चीन एवं यूरोप के देश भारत से अधिक विकसित देश हैं। इससे यह झलकता है कि भारत ने डिजिटलीकरण के मामले में पूरे विश्व को पीछे छोड़ दिया है। अब तो भारत का यूपीआई सिस्टम अमेरिका के स्विफ्ट पेमेंट सिस्टम को भी पीछे छोड़कर वैश्विक स्तर पर डिजिटलीकरण के मामले में अपनी धाक जमाने की ओर आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। भारत का यूपीआई सिस्टम सिंगापुर, फ्रान्स, श्रीलंका एवं यूएई में लागू किया जा चुका है। भारत के प्रधानमंत्री ने फ्रान्स में भारतीय यूपीआई सिस्टम का उद्घाटन किया था, ताकि फ्रान्स में जाने वाले पर्यटक यूपीआई सिस्टम के माध्यम से फ्रान्स में वित्तीय व्यवहार कर सकें। न्यूजीलैंड में भी यूपीआई को लागू किए जाने पर विचार किया जा रहा है।

उक्त संदर्भ में तीसरा सबसे बड़ा कारण है चीन के, विस्तरवादी नीतियों के चलते, विश्व के अन्य देशों के साथ लगातार खराब होते सम्बंध। आज विश्व के कई देश चीन के साथ आर्थिक व्यवहार करने से कतराने लगे हैं। यह स्थिति भारत के आर्थिक विकास को गति दे सकती है क्योंकि चीन+1 की नीति का अनुपालन विश्व के कई विकसित देश आज करने लगे हैं एवं ये देश भारत में विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी इकाईयों को स्थापित करते जा रहे हैं। ताईवान आदि देशों पर चीन की नीति की पूरे विश्व में भर्त्सना हो रही है। चीन के अपने बॉर्डर पर लगने वाले लगभग समस्त देशों के साथ चीन के सम्बंध अच्छे नहीं हैं। इन देशों का चीन पर अब भरोसा समाप्त सा होता जा रहा है। ऐपल एवं टेस्ला जैसी कम्पनियां अब भारत में अपनी विनिर्माण इकाईयां स्थापित कर रही हैं। ऐपल ने तो अपने आईफोन-15 का उत्पादन भारत में चालू भी कर दिया है। इससे भारत में न केवल रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित हो रहे हैं बल्कि विदेशी निवेश भी बढ़ रहा है। आज भारत में विदेशी मुद्रा भंडार 65,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के आसपास रिकार्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। साथ ही, आज भारत का पूंजी बाजार (स्टॉक मार्केट) विश्व में चौथे स्थान पर आ गया है।

भारत द्वारा अपने बुनियादी ढांचे को विकसित करने में भारी भरकम राशि खर्च की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 11.11 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि का बजट बुनियादी ढांचे के लिए निर्धारित किया गया है, जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि इस मद पर खर्च की गई थी। अयोध्या, वाराणसी, उज्जैन, हरिद्वार, जम्मू कश्मीर जैसे अन्य कई धार्मिक स्थलों को विकसित किया जा रहा है ताकि धार्मिक पर्यटन को भारत में बढ़ावा दिया जा सके। इन शहरों के बुनियादी ढांचे का अतुलनीय विकास किया जा रहा है। जिससे रोज़गार के लाखों नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। एयरपोर्ट की संख्या पिछले 10 वर्षों में दुगने से भी अधिक होकर 150 तक पहुंच गई है और इसे वर्ष 2025 तक 200 की संख्या तक ले जाया जा रहा है। रेल्वे का विद्युतीकरण किया गया है। रेलगाड़ियों की स्पीड बढ़ाई गई है, जिससे देश में कार्यक्षमता के स्तर में सुधार हो रहा है। भारत के बड़े शहरों में मेट्रो रेल का जाल बिछाया जा रहा है। आज भारत का रोड नेट्वर्क चीन से भी अधिक होकर विश्व में केवल अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर आ गया है। भारत सरकार की वर्ष 2024 से वर्ष 2030 के बीच देश के बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर 2 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि खर्च करने की योजना है। इस प्रकार भारत को वर्ष 2047 तक विकसित देशों की श्रेणी में शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्ष 2027 तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, ऐसी सम्भावना भी व्यक्त की जा रही है।

डूटा के नेतृत्व में सैंकड़ों शिक्षक सड़क पर उतरे

6-11.jpeg

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने दिल्ली सरकार के बारह वित पोषित कॉलेजों में पिछले कई वर्षों से चली आ रहे वित्तीय संकट को हल कराने, मंत्री आतिशी के पत्र को वापस लेने और नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर एवं कर्मचारियों की भर्ती शुरू करने की मांग को लेकर महाराजा अग्रसेन कॉलेज गेट पर धरना दिया जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षकों ने हिस्सेदारी की। गौरतलब है डूटा कई वर्षों से लगातार इन मांगों को लेकर दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल से गुहार लगा रहा है लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है। डूटा का यह चौथा क्लस्टर धरना था जिसमें डा भीमराव अम्बेडकर, महाराजा अग्रसेन, शहीद राजगुरु महर्षि वाल्मीकि, आचार्य नरेद्र देव, पी जी डी ए वी, रामानुजन, देशबंधु ,श्यामलाल कॉलेज , एल आई सी, एम एस सी और विवेकानंद कॉलेज के शिक्षकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

धरने पर मौजूद शिक्षकों ने दिल्ली सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के विरोध में जमकर नारेबाजी की । सैंकड़ों शिक्षक सड़क पर उतरे और जनता और छात्रों को दिल्ली सरकार वित पोषित बारह कॉलेजों में चल रहे वित्तीय संकट और अन्य समस्याओं की जानकारी दी और दिल्ली सरकार द्वारा इन कॉलेजों के अधिग्रहण करने ,स्व वित पोषित करने और अंबेडकर यूनिवर्सिटी में लेने की मंशा से अवगत कराया । शिक्षकों ने बताया कि दिल्ली सरकार इन बारह कॉलेजों की फंडिंग को रोक कर समस्या पैदा कर रही है।

डूटा अध्यक्ष प्री अजय कुमार भागी ने धरने पर बैठे शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के दिल्ली सरकार में आने के बाद से इन कॉलेजों का संकट शुरू हो गया था ।दिल्ली सरकार की नीयत इन कॉलेजों को अपने नियंत्रण में लेकर इनको स्व वित पोषित मॉडल में बदलना है। इसीलिए दिल्ली सरकार इनको दिल्ली यूनिवर्सिटी से डी एफिलिएट करना चाहती है। इसी लिए आतिशी ने केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा था

डूटा अध्यक्ष ने कहा कि डूटा दिल्ली सरकार के निजीकरण और शिक्षा विरोधी नीतियों का लगातार विरोध करता आ रहा है और आगे भी करेगा। डूटा ने बारह कॉलेजों की फंडिंग और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल से भी गुहार को लगाई है। उपराज्यपाल ने इस मामले में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने भी उपराज्यपाल से मिलकर इस संकट के समाधान की मांग की। जिसके बाद शिक्षा सचिव ने तमाम जानकारी मांगी । वित्त सचिव ने भी आश्वासन दिया कि डी यू और यू जी सी के नियमानुसार शिक्षक पदों की संस्तुति दी जाएगी। यद्धपि कई कॉलेजों में मार्च का वेतन और अन्य भत्ते का फंड जारी नहीं किया गया है।

अप्रैल के पहले सप्ताह में उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक में छात्र फीस से वेतन देने की संभावना तलाश करने की बात कही गई थी जो इस बात का प्रमाण है कि स्व वित पोषण का प्रस्तावित पैटर्न ऑफ एसिस्टेंस दिल्ली सरकार बारह कॉलेजों पर लागू करना चाहती है।

डूटा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षक संघ दिल्ली सरकार की शिक्षा विरोधी और निजीकरण की नीतियों का पुरजोर विरोध करेगा और उन्हें लागू नहीं होने देगा। डूटा अध्यक्ष प्रो भागी ने मांग की है कि दिल्ली सरकार बिना शर्त इन कॉलेजों को पूर्ण और नियमित अनुदान जारी करे और इन कॉलेजों में शिक्षक और कर्मचारियों की स्थाई भर्ती की प्रक्रिया जल्द आरंभ करे। स्व वित पोषण के पैटर्न ऑफ एसिस्टेंस को वापस लिया जाए। आतिशी के वितीय अनियमितता और डीएफिलिएशन वाले पत्रों को तुरंत वापस लिया जाए।

अग्रसेन कॉलेज में डूटा धरने को कई शिक्षक नेताओं ने संबोधित किया और एक स्वर से दिल्ली सरकार की आलोचना की ।डूटा अध्यक्ष ने बताया कि जब तक शिक्षकों की मांग नहीं मानी जाती है तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। डूटा अध्यक्ष ने आतिशी के पत्रों की निंदा करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों को स्व वित पोषित संस्थानों में बदलना चाहती है जिसे डूटा कभी नहीं होने देगा। दिल्ली सरकार के छात्रों की फीस से शिक्षकों कर्मचारियों का वेतन देने के प्रयासों का पुरजोर विरोध किया जाएगा। दिल्ली सरकार की मंत्री ने अपने पत्र में 939 शिक्षक पदों को अवैध रूप से सृजित करने की बात की थी जिसके उत्तर में डूटा अध्यक्ष ने कहा कि ऐसा कहना न केवल निराधार है बल्कि इन कॉलेजों के कर्मचारियों और छात्रों की बांह मरोड़ने की कोशिश है।

डूटा अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली सरकार इन कॉलेजों को डिग्री देने वाले स्वायत कॉलेजों में बदलने की मंशा रखती है जिसे डूटा किसी भी सूरत में पूरा नहीं होने देगा। धरने के बाद सैंकड़ों शिक्षकों ने महाराजा अग्रसेन कॉलेज के आसपास स्थानीय इलाके में सड़क पर मार्च किया और दिल्ली सरकार के निजीकरण के प्रयास का विरोध करते हुए बारह कॉलेजों के लिए पूर्ण और नियमित अनुदान जारी करने और शिक्षक पदों की संस्तुति तथा तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की।

scroll to top