Chhattisgarh CM meets Union Home Minister on issue of development and security of Chhattisgarh

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CM Vishnu Deo Sai discusses Chhattisgarh Vision @ 2047 with Union Home Minister Amit Shah

New Delhi, July 17, 2024:* Chhattisgarh Chief Minister Vishnu Deo Sai today met Union Home Minister Amit Shah and discussed in detail the Chhattisgarh Vision @ 2047 created for the long-term development of Chhattisgarh.

During this important meeting held at his residence in New Delhi, the Chief Minister informed the Union minister that the state government has identified eight different areas towards developed Chhattisgarh. He added that a working committee has been formed to accelerate development in these areas, which is regularly discussing with the common people and experts and preparing an effective action plan.

Chief Minister Sai also apprised the Union Home Minister about the effective action being taken against the supply and funding network of Maoists in the state. He informed that the state government has taken strict steps to curb the activities of Maoists and dismantle their financial network.

The Chief Minister also informed the Home Minister about Naxal operations and development works in Maoist-affected areas. He added that infrastructure is being expanded rapidly in Maoist areas, and the state government has conducted special campaigns for education and health services in these areas.

During the meeting, Home Minister Amit Shah appreciated the efforts of the Chhattisgarh Government and assured full support of the Central Government to maintain peace and stability in the state.

छत्तीसगढ़ की चार प्रमुख रेल परियोजना जल्द होगी शुरू

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रेल मंत्री ने परियोजनाओं पर तेजी से कार्य का दिया आश्वासन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय रेल मंत्री से रेल परियोजनाओं पर चर्चा

नई दिल्ली, 17 जुलाई 2024- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर राज्य की विभिन्न नई रेल परियोजनाओं पर चर्चा की। रेल भवन में हुई बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए रेल नेटवर्क के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस दौरान उन्होंने राज्य की चार प्रमुख रेल परियोजना धर्मजयगढ़-पत्थलगांव, लोहरदगा नई लाइन परियोजना, अंबिकापुर-बरवाडीह नई लाइन परियोजना, खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा नई रेल लाइन परियोजना और रावघाट-जगदलपुर नई रेल लाइन परियोजना के जल्द शुरू करने का आग्रह किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी उपस्थित रहे।

धर्मजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई लाइन परियोजना (240 किमी):
मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि यह परियोजना क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। यह पत्थलगाँव, कुनकुरी, जशपुर नगर, गुमला आदि महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ती है। यह उत्तरी छत्तीसगढ़ क्षेत्र को झारखंड से जोड़ेगी और कोरबा-धर्मजयगढ़ परियोजना के कार्य प्रगति पर है। इस परियोजना के माध्यम से औद्योगिक (कोरबा) क्षेत्र को लोहरदगा से जोड़ने की योजना है। इसके अतिरिक्त, यह क्षेत्र को पूर्व में कोरबा और रांची के होकर मध्य भारत से जोड़ेगी। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 16,000 करोड़ रुपये है।

अंबिकापुर-बरवाडीह नई लाइन परियोजना (200 किमी):
इस परियोजना की मांग आजादी से पहले 1925 में की गई थी। हालांकि, 1948 में मंजूरी मिलने के बावजूद यह परियोजना अब तक अधूरी रही। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना अंबिकापुर (उत्तरी छत्तीसगढ़) को बरवाडीह (झारखंड) से जोड़ेगी और परसा, राजपुर, चंदनपुर आदि महत्वपूर्ण शहरों को कनेक्ट करेगी। इस परियोजना के माध्यम से देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्से में कोयला और अन्य खनिजों के परिवहन के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 9000 करोड़ रुपये है।

खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा नई रेल लाइन परियोजना (277 किमी):
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना देश के पश्चिमी क्षेत्र में कोयला क्षेत्र, एसईसीएल और एमसीएल कोयला क्षेत्रों की निकासी के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करती है। यह बिलासपुर और रायपुर स्टेशनों को बायपास करते हुए बलौदाबाजार के समेत समृद्ध क्षेत्र को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 8000 करोड़ रुपये है।

रावघाट-जगदलपुर नई रेल लाइन परियोजना (140 किमी):
रेलवे पहले से ही दल्ली-राजहरा-रावघाट 95 किमी नई रेलवे लाइन का निर्माण कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने सुझाव दिया कि इस लाइन को जगदलपुर तक बढ़ाया जाए, ताकि आदिवासी क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक विकास किया जा सके। यह परियोजना छत्तीसगढ़ के खनिज समृद्ध क्षेत्र से इस्पात उद्योगों तक लौह अयस्क की निकासी के कुशल और पर्यावरण अनुकूल साधन प्रदान करेगी। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 3500 करोड़ रुपये है।

बैठक के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं की संभावनाओं और लाभों को स्वीकार किया और इन पर तेजी से काम करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएँ राज्य के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं और रेलवे मंत्रालय इन्हें प्राथमिकता देगा।

विश्व हिंदी साहित्य परिषद के कार्यालय में मित्रो बैठकबाजी

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आशीष कंधवे

बैठक की शुरुआत सामान्य अभिवादन और पुराने किस्सों से हुई। जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ी, विभिन्न विषयों पर चर्चा होने लगी

नई दिल्ली/रविवार/ 14 जुलाई 2024 : लगभग एक से डेढ़ वर्ष के बाद के बाद, विश्व हिंदी साहित्य परिषद के कार्यालय में पुराने मित्रों की एक लंबी बैठकबाजी चली। विश्व हिंदी साहित्य परिषद का कार्यालय अर्थात मेरा निजी कार्यालय साहित्यिक बैठकों के लिए हमेशा चर्चा में रहता है। इसी परंपरा को बचाए रखने के लिए आज परिषद के कार्यालय में अमेरिका से आए सुप्रसिद्ध समाजसेवी हिंदी से भी उद्योगपति इंद्रजीत शर्मा, विख्यात हास्य कवि शंभू शिखर, हंसराज महाविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ विजय मिश्रा, और सुप्रसिद्ध राष्ट्रवादी पत्रकार एवं चिंतक आशीष “अंशु” उपस्थित थे। इस बैठक में मैं आशीष कंधवे, भी शामिल था।

बैठक की शुरुआत सामान्य अभिवादन और पुराने किस्सों से हुई। जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ी, विभिन्न विषयों पर चर्चा होने लगी। देश की वर्तमान राजनीतिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक स्थिति पर गंभीर चर्चाएं हुईं। इन चर्चाओं ने बैठक को गहनता और गंभीरता प्रदान की।

डॉ विजय मिश्रा, जो मेरे छोटे भाई जैसे हैं, ने शैक्षणिक स्थितियों पर अपने विचार से अपनी बात शुरू की और बातों के प्रवाह में अनेक विषयों पर टिप्पणी करते हुए समोसे पर आकर रुक गए। इंद्रजीत शर्मा ने अमेरिका में भारतीय साहित्य के प्रचार-प्रसार पर अपने अनुभव साझा साझा करते हुए हाल ही में संपन्न कवि सम्मेलन पर चर्चा की। भाई आशीष अंशु ने राष्ट्रवाद और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी जानकारी और अनुभवों का आदान-प्रदान करते हुए सामाजिक सांस्कृतिक और राजनीतिक स्थिति का सटीक विश्लेषण किया। हम कह सकते हैं कि सभी ने अपने-अपने दृष्टिकोण से वर्तमान स्थिति पर विचार व्यक्त किए।

इस दौरान, छोले-भटूरे, समोसे, लड्डू और चाय की मेजबानी ने चर्चा को और भी रोचक बना दिया। इन स्वादिष्ट व्यंजनों ने माहौल को और भी जीवंत और चटपटा बना दिया।

जैसे-जैसे चर्चा अपने चरम पर पहुंची, गंभीरता का आवरण हटाने का समय आ गया। विख्यात हास्य कवि और मेरे प्रिय भाई शंभू शिखर ने अपनी हास्य कविताओं और चुटकुलों से माहौल को हल्का और हंसी-खुशी से भर दिया। उनकी कविताएं और चुटकुले सभी को हंसी-मजाक और आनंद की ओर ले गए, जिससे सभी तनाव और गंभीरता कुछ देर के लिए छूमंतर हो गए।

बैठक का अंत सभी मित्रों के हृदय में गर्मजोशी और एकता की भावना के साथ हुआ। इस प्रकार की बैठकों से न केवल मित्रता और भाईचारे की भावना प्रबल होती है, बल्कि साहित्य, संस्कृति, और समाज के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श का भी अवसर मिलता है।

कुल मिलाकर, यह बैठक एक सफल और आनंदमयी अनुभव रही। सभी मित्रों के साथ बिताए गए ये पल हमेशा स्मरणीय रहेंगे, और भविष्य में भी इस प्रकार की और भी सार्थक चर्चाओं की आशा है।

यह और बात है कि इस चर्चा पर चर्चा के समापन के 10 मिनट के बाद देश के सुप्रसिद्ध गज़लकार भाई सुशील ठाकुर भी कार्यालय में पहुंचे । हंसी ठाकुर का एक और दूर चला परंतु समय की बाध्यता के कारण उनकी गजलों का आनंद आज हम नहीं ले पाए।

देखिए अपना कब ऐसे बैठक का अवसर मिलता है तब तक के लिए सभी मित्रों का आभार नमस्कार।

क्या बिहार के ‘यादव’ तेजस्वी को ‘यादव’ मानने को तैयार नहीं

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जिस तरह बिहार का राजनीतिक परिदृश्य बदल रहा है। राष्ट्रीय जनता दल के सारे समीकरण असफल हो रहे हैं और पार्टी का हिन्दू विरोधी एजेन्डा एक्सपोज हुआ है। उसके बाद से तेजप्रताप यादव को लेकर पार्टी को एक बार गंभीरता से सोचना चाहिए क्योंकि तेजस्वी को दबी जुबान में यादव समाज के अंदर ही, समाज से बाहर जाकर शादी करने के लिए ‘हाफ यादव’ कहा जाने लगा है।

लालू यादव जब मुख्यमंत्री हुआ करते थे, राष्ट्रीय जनता दल में तेजप्रताप यादव के मामाओं का जलवा चलता था। अब हो सकता है कि बड़े भाई तेजप्रताप यादव की जगह तेजस्वी बड़े नेता बन गए हों लेकिन अभी भी वे पूरे बिहार के यादवों के नेता नहीं बन पाएं हैं।

यह तेज प्रताप यादव के सगे मामा साधु यादव का बयान है कि ”तेजस्वी यादव ने पूरे बिहार का नहीं पूरे यादव कुल को ही कलंकित कर दिया है। तेजस्वी यादव को हक नहीं है कि वह बिहार के 13 करोड़ जनता का नेता बने।
यह सब सगे मामा क्यों कह रहे थे, इसलिए क्योंकि उन्हें यह बात पसंद नहीं आई कि उनका भांजा तेजस्वी ईसाई परिवार में शादी करे।

ईसाई परिवार में शादी करने के बाद तेजस्वी यादव बिहार के यादवों से दूर हुए हैं। उनकी पार्टी में ऐसे नेताओं को प्रोत्साहन मिलना शुरू हुआ है जो हिन्दू धर्म के अपमान की बात करें। रामचरितमानस को लेकर पार्टी के परिष्ठ नेताओं ने अनर्गल बयान दिए हैं।

इस संयोग पर भी बिहार में चर्चा हो रही है कि ईसाई पत्नी आने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा परिवार के साथ तेजस्वी की नजदीकी बढ़ी है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ उनकी नजदीकी भी खबरों में रही। उन्होंने तमिलनाडु से रिश्ता खराब करने के षडयंत्र का हवाला देकर यू ट्यूबर मनीष कश्यप की गिरफ्तारी तक करा दी। जबकि तेजस्वी खुद गुजरात के लिए अनाप शनाप बोलते रहते हैं। उन्होंने पेरियार इरोड वेंकटप्पा रामासामी (Periyar Erode Venkatappa Ramasamy) के संबंध में जब टवीट किया तो साफ हो गया कि उन्हें नियंत्रण कहीं और से किया जा रहा है। लालू प्रसाद यादव की राजनीति में कम से कम हिन्दू समाज के लिए घृणा नहीं थी। राहुल और तेजस्वी दोनों की राजनीति में यह साफ दिखता है।

राहुल गांधी के दादा पारसी थे और मां क्रिश्चियन हैं। राहुल गांधी खुद के ब्राम्हण होने का दावा करते हैं। ब्राम्हण उनके पिताजी के नाना थे। जिनका सरनेम नेहरू हुआ करता था। महात्मा गांधी की जाति के संबंध में बताया जाता है कि वे वैश्य जाति से आते थेे। गांधीजी के अपने चार बेटे थे, हीरालाल गांधी, मणिलाल गांधी, रामदास गांधी, देवदास गांधी। इनमें से कोई दत्तात्रेय गोत्र का ब्राम्हण नहीं है।

राहुल गांधी, एमके स्टालिन और तेजस्वी यादव के बीच बेहतर हुए रिश्ते के पिछे इनका चर्च कनेक्शन बताया जाता है।

आरोप यह भी है कि तेजस्वी जब बिहार में जदयू के साथ सत्ता में आए, प्रदेश के अंदर कन्वर्जन गैंग सक्रिय हो गया था।

बिहार तेजस्वी यादव पर यादव समाज का संदेह बढ़ रहा है, उसे देखकर यही लगता है कि आने वाले समय में तेजप्रताप यादव बिहार में राजद की गद्दी संभाल लें तो बड़े आश्चर्य की बात नहीं मानी जानी चाहिए। वैसे भी उन्होंने अपने व्यवहार से बिहारियों का दिल जीत कर रखा है।

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