इस्ररायल और हमास के बीच जारी युद्ध के बीच बडी संख्‍या में लोग मिस्र में दाखिल हुए

Screenshot-2023-11-01-at-10.05.55 PM.png

इस्ररायल और हमास के बीच जारी युद्ध के बीच बुधवार को बडी संख्‍या में लोग रफा सीमा को पार करते हुए गजा से मिस्र में दाखिल हुए। युद्ध शुरु होने के बाद यह पहली बार है जब विदेशी नागरिकों को गजा से बाहर निकलने की अनुमति दी गई है। फिलिस्तीनी अधिकारियों ने बताया कि चार सौ से अधिक विदेशी पासपोर्ट धारकों को गजा छोड़ने की अनुमति दी जाएगी। मिस्र के सरकारी मीडिया से मिली खबरों के अनुसार 80 से अधिक घायल फिलिस्तीनियों को भी चिकित्सा उपचार के लिए गजा से मिस्र लाया जाएगा। ।

गजा में टेलीकाम सेवा देने वाली प्रमुख कंपनी पालटेल के अनुसार, पांच दिनों से बाधित संचार और इंटरनेट सेवाएं धीरे-धीरे बहाल की जा रही हैं। इस बीच मानवीय सहायता पहुंचा रही एजेंसियों ने कहा है कि गजा में संचार सेवाएं बाधित होने से उनके लिए मुश्किल और बढ गई हैं। हमास के सूत्रों के अनुसार, इस्ररायलके साथ युद्ध में अबतक आठ हजार पांच सौ 25 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिक मारे जा चुके हैं।

दूसरी ओर इज़राइल में एक हजार चार सौ से अधिक लोगो ने जान गंवाई है। इसरायली सेना ने कहा है कि हमास के हमले के दौरान दो सौ 40 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसमें से चार को रिहा कर दिया गया है जबकि एक महिला सैनिक को छुडा लिया गया है।

दक्षिण अफ्रीका ने न्यूजीलैंड को 190 रन से हराया

Screenshot-2023-11-01-at-10.08.09 PM.png

दक्षिण अफ्रीका ने आईसीसी वनडे विश्व कप 2023 के 32वें मुकाबले में न्यूजीलैंड को 190 के बड़े अंतर से हराकर अंक तालिका में पहले स्थान पर जगह बनाई। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीका ने 50 ओवरों में क्विंटन डी कॉक और रासी वैन डेर डुसेन की शतकीय पारियों के दम पर 4 विकेट के नुकसान पर 357 रन बनाए और न्यूजीलैंड को जीत के लिए 358 रनों का लक्ष्य दिया।

दक्षिण अफ्रीका से मिले पहाड़ से लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी इस मैच में लड़खड़ा गई और टीम 167 रनों पर ऑल-आउट हो गई। न्यूजीलैंड की टीम मैच में पूरे 50 ओवर नहीं खेल पाई और 35.3 ओवरों में ऑल-आउट हो गई।

न्यूजीलैंड के लिए मैच में सबसे अधिक रन ग्लेन फिलिप्स ने बनाए। ग्लेन फिलिप्स ने 60 रनों की पारी खेली. वहीं दक्षिण अफ्रीका के लिए केशव महाराज ने 4 विकेट झटके. अफ्रीकी टीम की इस जीत का फायदा पाकिस्तान समेत चार टीमों को हुआ है।

 

इजरायल-हमास युद्ध के बीच मध्य-पूर्व में मोदी सरकार की कूटनीतिक अग्निपरीक्षा

modi-netanyahu_650x400_51515921973.jpg.webp

भारत की मेजबानी में जी-20 की सफलता के बाद से ही अचानक भारतीय विदेश नीति की वैश्विक अग्निपरीक्षा का काल आरंभ हो गया है। जिसके तत्काल के बाद जहां मोदी सरकार ने एक ओर खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह की हत्या को लेकर कनाडा को नए भारत की कूटनीति का पाठ पढ़ा दिया। तो दूसरी ओर कतर सरकार द्वारा 8 पूर्व नौसैनिकों को मृत्युदंड देकर मध्य-पूर्व से नई चुनौती दे दी गई है। कुल मिलाकर देखा जाए तो यह कोई साधारण घटनाक्रम प्रतीत होता, अपितु भारतीय राजनीतिक परिपेक्ष्य से देखा जाए तो इसके पीछे एक सुनियोजित वैश्विक षडयंत्र प्रतीत हो रहा है। जिसमें कई वैश्विक शक्तियां एक साथ सम्मिलित हैं। 

जानें क्या है पूरा मामला 

बता दें जब पूरा विश्व रूस-यूक्रेन युद्ध तथा अब इजरायल-हमास युद्ध पर नजर बनाए रखे हुए है तभी अचानक कतर की सरकार के द्वारा विगत एक वर्ष से कैद में रखे गए 8 पूर्व नौसैनिकों को मृत्यूदंड सुना दिया गया। जिसके बारे कतर सरकार ने आज तक भारत सरकार को आधिकारिक रूप से दंड के पीछे के कारकों और उनके ठोस साक्ष्यों को उपलब्ध नहीं कराया गया। मध्यपूर्व में घटी इस घटना ने भारत सरकार के सामने एक और नई कूटनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। अनाधिकारिक रूप से कहा जा रहा है कि कतर सरकार ने भारत के इन 9 पूर्व नौसैनिकों को इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में दंड दिया गया है। वहीं भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में कतर के द्वारा लिए गए निर्णय के पीछे 7अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल में किए गए नरसंहार को आतंकी कार्रवाई बताने और पहले ही दिन इजरायल को दिए गए खुले समर्थन को बताया जा रहा है। चूंकि कतर हमास को आर्थिक,राजनीतिक समर्थन करता है अतः भारत के पर दबाव बनाने के लिए कतर ने इस समय को चुना है।   भारत में मोदी सरकार के इस निर्णय का कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियां भी विरोध कर रहीं है। जब कि भारत सरकार स्पष्ट कर दिया है कि उसका फिलिस्तीन नीति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है,किन्तु आतंकवाद के किसी भी रूप को वह बिल्कुल सहन नहीं करेगी। इसी के तहत भारत ने गाजा में मानवीय सहायता भेजने में भी कोई विलंब नहीं किया। 

कतर ने भी कर दी कनाडा वाली गलती

बता दें कतर ने भी भारत सरकार को बिना सबूत दिए उसके 8 पूर्व नौसैनिकों को अचानक मृत्युदंड सुनाकर कनाडा वाली कूटनीतिक गलती कर दी है। यद्यपि भारत सरकार के आग्रह पर कतर सरकार ने कुछ माह पूर्व इन 8 पूर्व नौसैनिकों को काउंलर एक्सेस उपलब्ध कराया था। इससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भी जी-20 समिट से वापस लौटते ही भारत को बिना साक्ष्य दिए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की एजेंसियों का हाथ होने का आरोप लगा दिया था। जिसके बाद भारत सरकार ने कठोर कूटनीतिक जबावी कार्रवाई करते हुए अपने 1 राजनयिक के निष्कासन के बदले उसके 41 राजनयिकों को तत्काल देश छोड़ देने का आदेश सुना दिया था। जस्टिन ट्रूडो ने अपने ये आरोप वहां की संसद में खड़े होकर लगा दिए थे। जिसके बाद भी अपने आरोपों के संबंध में भारत सरकार को कोई साक्ष्य आज तक उपलब्ध नहीं करा सके। 

इजरायलहमास युद्ध के पीछे चीनईरान का हाथ!

जहां तक मेरा व्यक्तिगत आंकलन है मध्यपू्र्व में अचानक इजरायल पर हुए हमास के हमले के पीछे चीन के छिपे हित तथा ईरान का हाथ है। चूंकि जी-20 में हुए भारत-मध्यपूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा बनाने के निर्णय के कारण सीधे-सीधे चीन की महत्वाकांक्षी बीआरआई परियोजना को चुनौती देती है। जिस पर पिछले 10 वर्षों से वह अरबों डॉलर पानी की तरह बहा रहा है। उसको ज्ञात है कि यदि भारत-यूरोप को जोड़ने वाले अपने इस उद्देश्य को पाने में सफल हो जाता है, तो यह चीन के आर्थिक वर्चस्व पर करारा प्रहार होगा। इसके साथ ही ईरान की इजरायल से कट्टर शत्रुता तथा चीन के साथ अमेरिका के शत्रु का शत्रु अपना मित्र वाली मित्रता है। ऐसे में दोनों के मध्यपूर्व में साझे रणनीतिक हित होने के नाते इस समूचे संकट के पीछे दोनों शक्तियों के छिपे षड़यंत्र हैं। इसलिए मध्यपूर्व के अशांत रहने से एक तरफ भारत-मध्यपूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा जितना टलेगा चीन के हित सधेंगे। तो वहीं दूसरी ओर ईरान की छवि इस्लामिक देशों का अगुवा बनने की महत्वकांक्षा पूर्ति होगी। इससे पहले पाकिस्तान का सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर भी कुछ दिन पूर्व कतर की यात्रा करके आया है। इसलिए इसके पीछे पाकिस्तान के षडयंत्र की भी बू आ रही है।

कुछ इस कारण से चुनी हमला करने रणनीति

फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास द्वारा भारत में सफल जी-20 आयोजन के तत्काल बाद अकारण ही इजरायल पर एक साथ हजारों राकेट बरसाकर निर्दोष इजरायली नागरिकों का दिनदहाड़े नरसंहार कर दिया गया। तो इसके पीछे उस जी-20 समिट के दौरान भारत सरकार द्वारा लिए गए वो 2 निर्णय हैं, जो भारत के उन शत्रुराष्ट्रों के हितों पर करारा प्रहार करने वाले हैं। जिसमें प्रथम है भारत का मह्त्वाकांक्षी भारत-मध्यपूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा तथा दूसरा ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस बनाने की घोषणा करना। इन दो निर्णयों ने शत्रुराष्ट्रों के अंदर बेचैनी पैदा कर दी। जिसका मुख्य आधार था अमेरिका के नेतृत्व में मध्यपूर्व के राष्ट्रों के मध्य अब्राहम अकार्ड के माध्यम से स्थायी शांति स्थापित करना। जिसके माध्यम से यहूदी राष्ट्र इजरायल को वैश्विक मान्यता दिलवाने के साथ ही इस्लामिक देशों के बीच उसके विकास प्रगति को साझा करने के उद्देश्यों को प्राप्त करना। 

कतर के पर कैसे कतरेगा भारत!

ऐसी स्थिति में भारत सरकार के पास कतर के पर कतरने के लिए कई विकल्प हैं। जैसे कि भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने कतर के दुस्साहस से निबटने के लिए इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर अपने हाथों में ले लिया है। इसके साथ ही उन्होंने इस संकट से निबटने के लिए अपने सभी विकल्प आजमाने का संकेत भी कतर को भेज दिया है। जैसा कि भारत के कतर से पूर्व में अच्छे संबंध ही रहे हैं किन्तु विगत कुछ वर्षों से कतर ने नुपुर शर्मा का मामला हो अथवा वर्तमान संकट संबंधों की मर्यादा को ताक पर रख दिया है। तो ऐसे भारत के पास प्रथम विकल्प तो कतर की उच्च न्यायालय में अपील करने का है, किंतु राजशाही के कारण वहां की न्यायिक व्यवस्था संदिग्ध है। द्वितीय विकल्प के रुप में भारत अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में विषय को लेकर जाए। जो कि लंबी और थकाऊ प्रक्रिया है। तो तीसरे विकल्प के रुप में अपनी कूटनीतिक शक्ति का उपयोग करना ही सबसे श्रेयस्कर कदम हितकर होगा। जिसमें मध्यपूर्व के अपने मित्र देशों यूएई,बहरीन तथा सउदी अरब जैसों से संबंधों के माध्यम से कतर के पर कतरने का दबाव बनाएगा। चूंकि कतर ने अभी तक अपने लिए गए निर्णय की कॉपी भारत सरकार को उपलब्ध नहीं कराई है, और न ही आधिकारिक रूप से उन 8 नौसैनिकों पर क्या आरोप हैं उनसे अवगत कराया है। तो इस दंड पर अमल करना कतर के लिए इतना सुलभ नहीं होने वाला है। वह भी तब जब भारत के तेजतर्रार विदेश मंत्री सक्रिय हो चुके हों। 

मध्यप्रदेश को बीमारु राज्य की श्रेणी से बाहर निकाला है प्रदेश के किसानों ने

20amit-shah.jpg

– प्रहलाद सबनानी

भारत में लगभग 60 प्रतिशत आबादी आज भी ग्रामीण इलाकों में निवास करती है एवं इसमें से बहुत बड़ा भाग अपनी आजीविका के लिए कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। यदि ग्रामीण इलाकों में निवास कर रहे नागरिकों की आय में वृद्धि होने लगे तो भारत के आर्थिक विकास की दर को चार चांद लगाते हुए इसे प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत से भी अधिक किया जा सकता है। इसी दृष्टि से केंद्र सरकार लगातार यह प्रयास करती रही है कि किसानों की आय को किस प्रकार दुगुना किया जाय। इस संदर्भ में कई नीतियों एवं सुधार कार्यक्रमों को लागू करते हुए किसानों की आय को दुगुना किये जाने के भरसक प्रयास किए गए हैं। अप्रेल 2016 में इस सम्बंध में एक मंत्रालय समिति का गठन भी केंद्र सरकार द्वारा किया गया था एवं किसानों की आय बढ़ाने के लिए सात स्त्रोतों की पहचान की गई थी, इनमे शामिल हैं, फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करना, पशुधन की उत्पादकता में वृद्धि करना, संसाधन के उपयोग में दक्षता हासिल करते हुए कृषि गतिविधियों की उत्पादन लागत में कमी करना, फसल की सघनता में वृद्धि करना, किसान को उच्च मूल्य वाली खेती के लिए प्रोत्साहित करना (खेती का विविधीकरण), किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना एवं अधिशेष श्रमबल को कृषि क्षेत्र से हटाकर गैर कृषि क्षेत्र के पेशों में लगाना। उक्त सभी क्षेत्रों में केंद्र सरकार द्वारा किए गए कई उपायों के अब सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं एवं कई प्रदेशों में किसानों के जीवन स्तर में सुधार दिखाई दे रहा है, किसानों की खर्च करने की क्षमता बढ़ी है एवं कुल मिलाकर अब देश के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है। इस संदर्भ में मध्यप्रदेश में किसानों ने भी आगे बढ़कर प्रदेश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने का भरपूर प्रयास किया है।

आज से कुछ वर्ष पूर्व तक मध्यप्रदेश की गिनती देश के बीमारु राज्यों की श्रेणी में की जाती थी। बीमारु राज्यों की श्रेणी में मध्यप्रदेश के अलावा तीन अन्य राज्य भी शामिल थे, यथा, बिहार, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश। इन राज्यों को बीमारु राज्य इसलिए कहा गया था क्योंकि इन राज्यों में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर बहुत कम थी एवं औसत प्रति व्यक्ति आय बहुत कम होने के चलते गरीबी से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों की संख्या भी बहुत अधिक थी। इसके कारण, इन प्रदेशों में अशिक्षा की दर अधिक थी, ग्रामों में चिकित्सा सहित अन्य सुविधाओं का नितांत अभाव था तथा इन प्रदेशों में जनसंख्या वृद्धि दर भी तुलनात्मक रूप से अधिक थी। कुल मिलाकर, ये प्रदेश कुछ ऐसी विपरीत परिस्थितियों में फसें हुए थे कि इन प्रदेशों में विकास की दर को बढ़ाना बहुत ही मुश्किलों भरा कार्य था, इसलिए इन्हें बीमारु राज्य बोला जाता था।

मध्यप्रदेश की आर्थिक व्यवस्था भी मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र पर आधारित है। प्रदेश में लगभग दो तिहाई आबादी ग्रामों में निवास करती है एवं यहां लगभग 54 प्रतिशत जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। वर्ष 2005-06 से 2014-15 के दौरान मध्य प्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में औसतन 9.7 प्रतिशत की वृद्धि दर अर्जित की है। इसके बाद के 5 वर्षों के दौरान तो कृषि क्षेत्र में औसत विकास दर बढ़कर 14.2 प्रतिशत प्रतिवर्ष की रही है। यह पूरे देश में सभी राज्यों के बीच कृषि क्षेत्र में अर्जित की गई सबसे अधिक विकास दर है।

आज मध्य प्रदेश कई उत्पादों की पैदावार में देश में प्रथम स्थान पर आ गया है। उदाहरण के तौर पर, संतरा (देश के कुल उत्पादन में मध्य प्रदेश का हिस्सा लगभग 30 प्रतिशत है), चना (लगभग 45 प्रतिशत), सोयाबीन (लगभग 57 प्रतिशत), लहसुन (लगभग 32 प्रतिशत) एवं टमाटर (लगभग 16 प्रतिशत) के उत्पादन में मध्य प्रदेश, पूरे देश में, प्रथम स्थान पर आ गया है। दलहन और तिलहन उत्पादन में भी क्रमशः 24 प्रतिशत एवं 25 प्रतिशत के योगदान के साथ मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है।

इसी प्रकार, गेहूं (लगभग 19 प्रतिशत), प्याज (लगभग 15 प्रतिशत), हरा मटर (लगभग 20 प्रतिशत), अमरूद (लगभग 14 प्रतिशत) एवं मक्का (लगभग 12 प्रतिशत) के उत्पादन में मध्य प्रदेश, पूरे देश में द्वितीय, स्थान पर आ गया है। साथ ही, धनिया (लगभग 19 प्रतिशत), लाल मिर्ची (लगभग 7 प्रतिशत), सरसों एवं दूध के उत्पादन में मध्य प्रदेश, पूरे देश में, तीसरे स्थान पर आ गया है। कुल मिलाकर भारत के कुल खाद्यान उत्पादन में मध्यप्रदेश लगभग 7.7 प्रतिशत का योगदान देता है। खाद्य पदार्थों के उत्पादन के मामले में उत्तरप्रदेश के बाद आज मध्यप्रदेश पूरे देश में दूसरे नम्बर पर है।

मध्यप्रदेश सरकार ने दरअसल ग्रामीण क्षेत्रों में कई प्रकार की सुविधाएं किसानों को उपलब्ध करायीं हैं जिसके कारण कृषि के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने चहुंमुखी विकास किया है। सबसे पहिले तो सिंचाई की सुविधाओं को वृहद्द स्तर पर गावों में उपलब्ध कराया गया है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2000-01 में सिंचाई सुविधाओं का औसत 24 प्रतिशत था, जो कि राष्ट्रीय स्तर के औसत 41.2 प्रतिशत से बहुत ही कम था। परंतु मध्यप्रदेश की सरकार के इस क्षेत्र में मिशन मोड में काम करने के कारण सिंचाई सुविधाओं का औसत स्तर वर्ष 2014-15 में बढ़कर 42.8 प्रतिशत हो गया जो राष्ट्रीय औसत के 47.8 प्रतिशत के काफी करीब पहुंच गया। आज तो यह औसत और भी अधिक आगे आ गया है और प्रदेश में सिंचाई क्षमता 47 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गई है। साथ ही, किसानों के फसल की बुआई एवं कटाई करते समय जब जब बिजली की आवश्यकता होती है, उसे प्राथमिकता के आधार पर सही समय पर उपलब्ध कराई जाती है। आज तो मध्यप्रदेश के अधिकतर गावों में लगभग 24 घंटे बिजली उपलब्ध है। इन सबके ऊपर, प्रदेश के सारे गावों को सभी मौसमों में 24 घंटे उपलब्ध रोड के साथ जोड़ दिया गया है। मध्यप्रदेश में आज सड़कों की लम्बाई 5 लाख किलोमीटर से अधिक हो गई है। साथ ही साथ, गेहूं की खरीद पर प्रदेश सरकार की ओर से विशेष बोनस किसानों को उपलब्ध कराया गया है, जिसके चलते किसान गेहूं की फसल को बोने की ओर प्रेरित हुए हैं एवं गेहूं के उत्पादन में मध्यप्रदेश पूरे देश में द्वितीय स्थान पर आ गया है। कृषि उत्पादों की भंडारण क्षमता में भी मध्यप्रदेश ने अभूतपूर्व प्रगति की है, जिसके चलते इन उत्पादों के नुकसान में काफी कमी देखने में आई है।

मध्यप्रदेश में विभिन्न कृषि उत्पादों की फसल बढ़ाने के उद्देश्य से जिला स्तर पर उत्पाद विशेष के समूह विकसित किये गए हैं, जिसके चलते उस उत्पाद विशेष का उत्पादन इन जिलों में बहुत तेजी से बढ़ने लगा है। जैसे, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, शाजापुर, देवास, सिहोर आदि जिलों में संतरे की खेती को प्रोत्साहन दिया गया है। अमरूद की खेती बढ़ाने के उद्देश्य से मुरेना, श्योपुर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, सिहोर, सागर, विदिशा, आदि जिलों में समूह विकसित किए गए हैं। इसी प्रकार, केला के उत्पादन के लिए, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वाह, खंडवा, हरदा, धार, आदि जिले विकसित किए गए हैं। आलू के उत्पादन हेतु मुरेना, ग्वालियर, शिवपुरी, राजगढ़, शाजापुर, उज्जैन, इंदौर, देवास आदि जिलों में समूह बनाए गए हैं। हरे मटर का उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से ग्वालियर, दतिया, सागर, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा आदि जिलों में समूहों का गठन किया गया है। इसी प्रकार, लाल मिर्ची, धनिया, लहसुन, आम, अनार, प्याज, टमाटर, आदि उत्पादों हेतु भी प्रदेश के विभिन्न जिलों को उस फसल के समूह के तौर पर विकसित किया गया है। इस पद्धति के चलते भी प्रदेश में इन फलों, सब्जियों आदि का उत्पादन बहुत तेज गति से आगे बढ़ा है।

मध्यप्रदेश न केवल उत्पादन के मामले में बल्कि कृषि उत्पादों के निर्यात के मामले में भी चहुमुखी तरक्की की है। मध्यप्रदेश में उत्पादित शरबती गेहूं तो आज पूरे विश्व में अपनी धाक जमा चुका है। इसी प्रकार, मध्यप्रदेश में उत्पादित फलों एवं सब्जियों यथा, संतरे, आम, अमरूद, केला, अनार, प्याज, टमाटर, आलू, मटर, लहसुन, लाल मिर्ची, धनिया, सोयाबीन, चना, आदि की मांग अब वैश्विक स्तर पर होने लगी है। मध्यप्रदेश से समस्त उत्पादों का निर्यात 65,000 करोड़ रुपए के स्तर को पार कर गया है।

विश्व में मुख्यतः पश्चिमी राष्ट्रों ने सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर तेज करने के लिए औद्योगिक विकास का सहारा लिया है। अर्थशास्त्र में ऐसा कहा भी जाता है कि कृषि क्षेत्र के विकसित अवस्था में आने के बाद औद्योगिक विकास एवं सेवा क्षेत्र के सहारे ही सकल घरेलू उत्पाद में तेज वृद्धि दर्ज की जा सकती है। परंतु, मध्यप्रदेश राज्य ने एक अलग ही राह दिखाई है एवं कोरोना महामारी के पूर्व के खंडकाल में लगातार 5 वर्षों के दौरान कृषि क्षेत्र में 14 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर अर्जित कर अपने सकल घरेलू उत्पाद में तेज गति से वृद्धि दर्ज करने में सफलता पाई है। मुख्यतः कृषि क्षेत्र में की गई प्रगति के सहारे ही मध्यप्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2019-20 में बढ़कर 9.37 लाख करोड़ रुपए का हो गया है। प्रति व्यक्ति आय भी अब बढ़कर 140,000 प्रति वर्ष हो गई है। मध्यप्रदेश की सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर विगत 10 वर्षों के दौरान राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर से अधिक ही रही है।

कुल मिलाकर मध्यप्रदेश ने कृषि क्षेत्र में अतुलनीय विकास के लिए आधारभूत ढांचा खड़ा किया है, जिससे किसानों को अपनी फसल को उगाने से लेकर बाजार में बिक्री करने तक, बहुत आसानी हो रही है। मध्यप्रदेश राज्य का पूंजीगत खर्च वर्ष 2007 में केवल 6,832 करोड़ रुपए का रहा था जो इस वर्ष बढ़कर 56,000 करोड़ रुपए का होने जा रहा है।

scroll to top