दो रंगकर्मियों को दिया जाएगा मैलोरंग ‘नेपथ्य रंगसम्मान’ – 2023.

Screenshot-2023-11-28-at-2.47.05 PM.png
अनिला सिंह खोसला एवं श्रीकांत किशोर ‘मैलोरंग नेपथ्य रंगसम्मान’ से सम्मानित होंगे.
• एक्काबन हजार रुपये की राशि से सम्मानित होंगे दो रंगकर्मी
दिल्ली की प्रमुख नाट्य संस्था ‘मैलोरंग’ के तत्त्वावधान में ‘नेपथ्य रंगसम्मान’ नाम से वार्षिक सम्मान दिया जाता है । इस सम्मान से सम्मानित रंगशीर्ष को प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र, एवं 51,000/- रुपये की राशि प्रदान की जाती है । वर्ष 2023 के लिए चौथे एवं पाँचवें मैलोरंग ‘नेपथ्य रंगसम्मान’-2023 की घोषणा एक साथ किया गया है । प्रथम चयनित रंगकर्मी हैं – रंगसमीक्षा, अनुवाद एवं नाट्य लेखन के क्षेत्र में योगदान देने वाले श्री श्रीकांत किशोर तथा दूसरे चयनित रंगकर्मी हैं – सुप्रसिद्ध परिधान परिकल्पक एवं अभिनेत्री श्रीमती अनिला सिंह खोसला ।
‘नेपथ्य रंगसम्मान’ के लिए स्थायी रूप से एक कार्य समिति का गठन किया गया है, जिसके सदस्य हैं – सर्वश्री संजय सहाय, श्री अमिताभ श्रीवास्तव, श्रीमती प्रीता माथुर ठाकुर, प्रो. सत्यव्रत राउत और प्रो. देवेंद्र राज अंकुर (संयोजक) ।
इस वर्ष सम्मान समारोह 03 दिसम्बर, 2023 को, सायं 5.00 बजे दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय परिसर में स्थित सम्मुख सभागार में आयोजित होगा । इस अवसर पर भारतीय रंगमंच के वरिष्ठ रंग निर्देशक श्री एम. के. रैना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे तथा श्री चितरंजन त्रिपाठी (निदेशक, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय) आयोजन की अध्यक्षता करेंगे । इसके साथ ही आयोजन में प्रत्यक्षदर्शी के लिए सैकड़ों रंगकर्मियों को आमंत्रित किया जाएगा है ।
अभी तक तीन रंगकर्मियों को यह सम्मान दिया जा चुका है । जिसमें प्रथम सम्मान हिंदी रंगमंच के क्षेत्र में किए गए महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ीकरण के उपलक्ष्य में प्रो. महेश आनंद, दूसरा भारतीय रंगमंच में ‘मनो-शारीरिक रंगमंच’ नाम की रंगशैली की स्थापना करने वाले रंगकर्मी श्री शशांक बहुगुणा तथा तीसरा सम्मान नौटंकी रंगशैली में लगातार काम करने वाले श्री आतमजीत सिंह इस सम्मान से सम्मानित किए गये हैं ।

प्रा. यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार 2023 हेतु बिहार के शरद विवेक सागर, मध्य प्रदेश की लहरीबाई पडिया तथा राजस्थान के वैभव भंडारी का हुआ चयन।

fe3ab6be-b4be-45d4-ac89-ff29bd0dc673.jpg
*शिक्षा, समाज, पर्यावरण, विज्ञान जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवाओं को दिया जाता है  ‘प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार’।*
प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार 2023 की चयन समिति ने इस वर्ष पुरस्कार के लिए ‘कम आय एवं वंचित वर्ग के भारतीय युवाओं को वैश्विक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाने हेतु’ श्री शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को, ‘श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु’ सुश्री लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को’ तथा ‘दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिए’ डॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को चयनित किया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अपनी संगठनात्मक यात्रा का ‘अमृत महोत्सव वर्ष’ (75वॉं वर्ष) मना रही है, इस उपलक्ष्य को व्यापक तथा अविस्मरणीय बनाने के लिए चयन समिति ने इस वर्ष तीन युवाओं को यह पुरस्कार देने का निर्णय लिया है। सामान्य वर्ष में यह किसी एक युवा को दिया जाता है। श्री शरद विवेक सागर, सुश्री लहरीबाई पडिया तथा डॉ वैभव भंडारी को यह पुरस्कार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दिल्ली में 7-10 दिसंबर आयोजित हो रहे 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में दिया जाएगा।
यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार कहा जाता है और अभाविप के संगठनात्मक विस्तार, सुदृढ़ीकरण में उनकी भूमिका के लिए याद किया जाता है। अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। यह पुरस्कार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और विद्यार्थी निधि न्यास की एक संयुक्त पहल है, जो छात्रों की उन्नति एवं शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना, उन्हें प्रोत्साहित करना और ऐसे सामाजिक उद्यमियों के प्रति युवाओं का आभार व्यक्त करना तथा युवा भारतीयों को सेवा कार्य के लिए प्रेरित करना है। इस पुरस्कार में ₹ 1,00,000/- की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह समाविष्ट हैं।
प्रा. यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार 2023 के लिए चयनित श्री शरद विवेक सागर मूलतः बिहार के एक छोटे से गाँव जीरादेई से हैं। बाल्यावस्था में ही शरद, श्री रामकृष्ण-विवेकानंद की शिक्षाओं से परिचित व प्रेरित हुए। युवाओं की शिक्षा संबंधी विभिन्न समस्याओं का  निवारण करते हुए शैक्षिक अवसरों और प्रशिक्षण के माध्यम से युवा पीढ़ी को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शरद ने वर्ष 2008 में ‘डेक्सटेरिटी ग्लोबल’ नामक मंच की स्थापना की। ‘डेक्सटेरिटी ग्लोबल’ ने सुदूर भारतीय कस्बों और गांवों के 70 लाख से अधिक युवा नागरिकों को शैक्षिक अवसरों से जोड़ा है, ‘डेक्सटेरिटी ग्लोबल’ के पूर्व छात्रों ने 1,000 से अधिक प्रमुख राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज की है तथा विश्व के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों से ₹175 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति हासिल की है। इनमें से 80% से अधिक छात्र लघु आय एवं वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। ‘डेक्सटेरिटी ग्लोबल’ से जुड़े अनेक छात्र वैश्विक-शैक्षणिक मंचों पर भारत की शान बढ़ाने का काम कर रहे हैं। आप भारतीय युवाओं के जीवन के उत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
प्रा. यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार 2023 के लिए चयनित मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले की सुश्री लहरीबाई  पडिया को अपनी दादी तथा मां से मोटे अनाज की पौष्टिकता तथा महत्व पता चला, जिससे वे बीजों के‌ संरक्षण के लिए प्रेरित हुईं। वे श्रीअन्न (मिलेट्स) प्रजातियों के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं, उनके पास 150 दुर्लभ किस्म के पौष्टिक मोटे अनाज के बीजों का बैंक है । उन्हें ‘मिलेट्स एंबेसडर’ बनाया गया है, बैगा जनजाति से संबंध रखने वाली लहरीबाई ने पूरे देश को अच्छे स्वास्थ्य, प्रकृति संरक्षण, खान-पान का जो संदेश दिया है, वह आज की आवश्कता अनुरूप अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। श्रीअन्न का स्वाद तथा पौष्टिकता आने वाली पीढ़ियों को मिले, इसलिए लहरी बाई सतत् सक्रिय हैं। उनके योगदान के लिए उन्हें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रशंसा भी मिल चुकी है। 12 सितंबर, 2023 को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में लहरीबाई को वर्ष 2021-22 का ‘पादप जीनोम संरक्षक किसान सम्मान’ प्रदान किया था। लहरीबाई ‘मिलेट्स क्वीन’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। पारंपरिक खेती के उत्थान की दिशा में लहरी बाई महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं।
प्रा. यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार 2023 के लिए चयनित डॉ वैभव भंडारी मूलतः पाली राजस्थान के रहने वाले हैं, आपने दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर बनाने के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है। आपकी शिक्षा विधि विषय में पीएचडी तक हुई है। बचपन में ही वैभव भंडारी को मांसपेशिय दुर्विकास (मस्कुलर डिस्ट्राफी) के कारण जीवन-परिवर्तनकारी समस्याओं का सामना करना पड़ा, हालाँकि वैभव इस चुनौती के सामने झुके नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन को प्रेरित करने के लिए अटूट दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। वैभव के कार्यों ने समाज के विभिन्न पहलुओं में ऐसे परिवर्तन किया जिससे दिव्यांगों के लिए रास्ते आसान हो सकें। वैभव भंडारी सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी रहे हैं। 2007 में, राजस्थान सरकार के वन और पर्यावरण मंत्रालय ने श्री वैभव के उत्कृष्ट पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मान्यता दी। वैभव भंडारी को दिव्यांगों के समर्थन में अनुकरणीय कार्य के लिए भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समर्पण, दृढ़ता और सकारात्मक प्रभाव डालने का जुनून वैभव भंडारी की उल्लेखनीय यात्रा को परिभाषित करता है।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रा. राजशरण शाही, राष्ट्रीय महामंत्री श्री याज्ञवल्क्य शुक्ल, राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री आशीष चौहान एवं चयन समिति के संयोजक प्रा. मिलिंद मराठे ने ‘प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार 2023’ के विजेताओं श्री शरद विवेक सागर, सुश्री लहरीबाई पडिया तथा डॉ वैभव भंडारी को बधाई दी और उनके भविष्य के प्रयासों में सफलता की कामना की है।

द रेलवेमैन के बहाने ‘दास्तान – ए – मौत ‘

PHOTO-2023-11-26-22-48-32.jpg
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 3 दिसम्बर 1984 को हुए मौत के क्रूर ताण्डव यानी ‘भोपाल’ गैस त्रासदी की बरसी निकट ही है। इसी बीच 18 नवम्बर को नेटफ्लिक्स में एक वेबसीरीज आई है। जो बहुत कुछ कह रही है बता रही है। हालांकि यह अंतिम सत्य नहीं है बल्कि भोपाल गैस त्रासदी की दिशा में सत्य का एक बहुत छोटा सिरा है। इसके सहारे बहुत दूर तक जाया जा सकता है बशर्ते हम जाना चाहें। यूं कहें तो ‘बात निकली ही है तो दूर तलक जाएगी’।
मैं अक्सर फ़िल्में कम देख पाता हूं उसमें से भी वेबसीरीज तो बहुत ही कम। लेकिन हाल ही में Netflix  पर रिलीज़ हुई  The Railway Men ( The untold story of Bhopal 1984 ) को देखा तो बस एकटक देखता ही रहा आया।
 इसमें प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद  1984 में देश भर में हुए सिख नरसंहार (दंगे ) के दौरान राजीव गांधी का द्वारा दिए गए बयान – “जब भी कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती थोड़ी हिलती है।” के साथ साथ सिख समुदाय के लोगों के नरसंहार की कहानी की झलक भी दिखती है।यानी दो वीभत्स खूनी मंजर एक साथ सिनेमा के एक पर्दे पर।
इस सीरीज को देखने बाद लगा कि –  हमारा सिनेमा जगत इतने वर्षों तक इस विषय पर खामोश क्यों था ?  हालांकि समाज को भूलने की आदत होती है लेकिन क्या 1984 की त्रासदी किसी भी तरह से भुलाने जैसी थी ? फिर भी कूटरचित और प्रायोजित ढंग से इसका नार्मलाईजेशन कर दिया गया। ताकि कोई सच की ओर आंख भी न फेर सके। लेकिन सच तो एक दिन अवश्य ही सामने आता है चाहे कितना भी समय लग जाए।
इसी सन्दर्भ में यह कहना समीचीन है कि लोग मानें या न माने लेकिन इस देश में  नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ये तो जरूर हुआ कि अब लोग खुलकर सत्य कहने और दिखाने लगे हैं। बात चाहे ‘ द काश्मीर फाईल्स की हो याकि द केरला स्टोरी की और अब चाहे द रेलवेमैन की हो। सच अब बड़ी मुखरता के साथ सामने आ रहा है।
ये था कांग्रेस के सत्तानशीं चेहरे का रक्त चरित्र जिसके लिए — जनता के जान की कीमत कुछ भी नहीं थी।  उनके लिए तो जनता कीड़े मकोड़े की तरह मरने के लिए होती है।
इन सबके के बीच खोजी पत्रकार स्व. राजकुमार केसवानी का साहस कांग्रेसी सरकार के सत्तानशीं चेहरे के विरुद्ध – मजबूत दीवार बनकर खड़ा मिलता है। वो सरकार और प्रशासन के दमन के आगे नहीं झुके और
उन्होंने बताया कि पत्रकार और पत्रकारिता क्या होती है।
3 दिसम्बर 1984 मध्यप्रदेश के हिस्से में त्रासदी का इतना भयावह मंजर जिसने भोपाल में हजारों लोगों को मौत का शिकार बना लिया। भोपाल के निरीह लोग कांग्रेस सरकार और एंडरसन के मौत के फरमान के आगे घुटने टेकने को विवश थे। सरकार, कंपनी और प्रशासन के ने जिस तरह से जनता की जान का सौदा कर उन्हें बेमौत  मौत के घाट उतारा था, वह बर्बरता की पराकाष्ठा थी। ऐसे में  इसे आतंक और प्रायोजित हत्या न कहें तो क्या कहें ?
इधर भोपाल के लोग कांग्रेस सरकार और वारेन एंडरसन के गैस त्रासदी के कत्लेआम से मर रहे थे।उधर सरकार अपराधियों को बचाने पर , त्रासदी पर पर्दा डालने पर जुटी हुई थी।  रेलवे से लेकर जितने भी लोग त्रासदी से बचाव के लिए जुटने वाले थे। उन सब पर कांग्रेस की क्रूर सत्ता का प्रहार चल रहा था।
आखिरकार!  वफादारी निभाने वाली कांग्रेस ने यूनियन कार्बाइड के वारेन एंडरसन को बकायदे प्लेन से सुरक्षित भारत से बाहर भिजवाया था। भोपाल गैस त्रासदी हर वर्ष केवल  फौरी तौर पर श्रद्धांजलि और शोक संवेदना का विषय बन चुका है। जबकि इस पर गहन शोध और उस त्रासदी से जुड़े हुए एक एक गवाह और घटनाक्रम का दस्तावेजीकरण, सिनेमैटोग्राफी होनी चाहिए। ताकि वर्तमान और भविष्य देख सके कि – किस तरह से आम जनता को सरकारें अपने स्वार्थों के लिए काल का ग्रास बना देती हैं।
इन्वेस्टगेटिव पत्रकार – स्व.राजकुमार केसवानी  के सहारे इस कहानी ने हर व्यक्ति को फिर से सोचने के लिए विवश कर दिया है। भोपाल वालो – मध्यप्रदेश वालो जरा! कांग्रेस से पू़ंछिए आम जनता का क्या गुनाह था जो उनकी मौत का सौदा किया गया? वारेन एंडरसन जैसे मौत कै सौदागर को अमेरिका भिजवाने का प्रबंध करने वाले क्या मौत के सौदागर नहीं थे ?
~ कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा भगवान बिरसा मुंडा जयंती का आयोजन

PHOTO-2023-11-26-21-29-19.jpg
राजीव रंजन 
26 नवंबर, रविवार को वनवासी कल्याण आश्रम के दक्षिणी विभाग एवं आर. के. पुरम विभाग (दिल्ली प्रान्त) के संयुक्त तत्वावधान में जनजातीय गौरव दिवस एवं भगवान बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसका आयोजन नई दिल्ली के नेहरू नगर स्थित जी.एल.टी. सरस्वती बाल मंदिर सीनियर सेकेंड स्कूल में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली सरकार में प्रशासनिक अधिकारी श्री अनिल वर्मा जी थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व निगम पार्षद एवं समाजसेवी श्री रमेश पहलवान जी ने की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर दिल्ली प्रांत के उपाध्यक्ष श्री तिलक चांदना जी उपस्थित रहे। साथ ही, दिल्ली प्रांत की कार्यकारिणी सदस्य डॉ. नीतू मोनी ककाती भी उपस्थित थीं। दक्षिण विभाग के सचिव श्री सुनील वर्मा ने मंच पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों का परिचय करवाया। मंत्रोच्चार के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर विशिष्ट अतिथियों ने कार्यक्रम की शुरुआत की। रंगारंग कार्यक्रम में एकल गीत के साथ कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, साथ ही मंच पर कई विशिष्ट अतिथियों का सम्मान भी किया गया। इसके साथ ही, भगवान बिरसा मुंडा और अन्य आदिवासी क्रांतिकारियों पर वृत्तचित्र भी दिखाया गया। मंच संचालन डॉ. दीपक कुजूर ने किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में डॉ. सीमा और डॉ. मेखला ने सामुहिक गीत की प्रस्तुति दी। विनोद बोहरा जी ने वनवासी वीरों पर आधारित देशभक्ति गीत गाया। इस बीच दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा यतिका शर्मा ने ओडिशा और ग्लोरी साकिया ने असम का लोक नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों- चिराग एवं साथियों ने दार्जीलिंग का लोकगीत प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता तिलक चांदना जी ने वनवासी और आदिवासी के बीच का अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि ये दोनों शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं है, बल्कि इतिहास में ब्रिटिश शासन के दौरान इतिहास लेखन में हुई त्रुटियों के परिणामस्वरूप इन शब्दों को एक दूसरे का पर्याय मान लिया गया, जबकि ऐसा नहीं है। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि आदिवासी भारत के मूल निवासी हैं। उन्होंने प्राचीनकाल, मध्यकाल और आधुनिक काल में जनजातीय लोगों के गौरवपूर्ण इतिहास पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अध्यक्ष ने कार्यक्रम के आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समाज के लिए उत्तरदायी होना चाहिए और अपने गांव-समाज से जुड़ा रहना चाहिए। उन्होंने भारत के विभिन्न गांव से आए लोगों की सराहना करते हुए कहा कि हर व्यक्ति की जड़ें गांव से जुड़ी हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी की सराहना की। कार्यक्रम में उपस्थित विशेष अतिथियों का सम्मान डॉ. सुमित दहिया, सुरजीत, डॉ. अर्चना, डॉ. एंजेला, डॉ. सीमा, डॉ. मेखला, डॉ. विनोद और बदरपुर जिले के अध्यक्ष श्री मन मोहन जी ने अतिथियों को पटका पहनाकर और जनजातीय गौरव पुस्तक देकर किया। दक्षिणी विभाग के सह सचिव डॉ. नितिन ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी लोगों का बारी-बारी से धन्यवाद ज्ञापन किया। अंत में कार्यक्रम का समापन आर. के. पुरम विभाग के प्रचार प्रमुख श्री नरेन्द्र सिंह जी द्वारा प्रस्तुत वंदे मातरम् गीत के साथ हुआ। इस पूरे कार्यक्रम का सफल आयोजन वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत सह सचिव सीए कैलाश जोशी जी के मार्गदर्शन में हुआ।
scroll to top