तेलंगाना की सभी 119 सीटों पर वोटिंग आज

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तेलंगाना की सभी 119 विधानसभा सीटों पर आज वोट डाले जाएंगे। नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे. चुनाव आयोग की तरफ से बताया गया कि वोटिंग सुबह 7 बजे शुरू होगी और शाम 5 बजे तक जारी रहेगी. राज्य में बहुमत का आंकड़ा 60 है। तेलंगाना विधानसभा का इतिहास काफी नया है और यहां यह तीसरा चुनाव है।

साल 2014 में आंध्रप्रदेश से अलग होकर बने तेलंगाना में पिछले 2 बार से BRS का कब्जा और तब से के. चंद्रशेखर रॉव राज्य के मुख्यमंत्री हैं। इस बार यह देखना अहम होगा कि क्या लगातार तीसरी बार भारत राष्ट्र समिति बाजी मारती है या फिर जनता का फैसला कुछ और होगा। इस बार तेलंगाना के सीएम केसीआर के लिए बड़ी चुनौती यह भी है कि अपनी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति का नाम BRS करने के बाद वह पहली बार जनता के सामने आए हैं।

राज्य भर में 35,655 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और यहां कुल 3.26 करोड़ रजिस्टर्ड मतदाता हैं। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि 106 निर्वाचन क्षेत्रों में सुबह 7 बजे से शाम पांच बजे तक और 13 वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित निर्वाचन क्षेत्रों में सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी। 2,290 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव, उनके मंत्री-बेटे केटी रामाराव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी और BJP के लोकसभा सदस्य बी. संजय कुमार और डी अरविंद शामिल हैं।

मणिपुर के उग्रवादी समूह ने अपने हथियार डाल कर सरेंडर किया : शाह

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मणिपुर के सबसे पुराने उग्रवादी समूह ने बुधवार का शाम अपने हथियार छोड़ दिए हैं। मणिपुर के यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर को लेकर बड़ी जानकारी शेयर की है। बता दें कि मणिपुर पिछले कई महीनों से अशांत रहा है, जहाँ महिलाओं को नग्न कर उनका जुलूस निकाले जाने और उनके सामूहिक बलात्कार तक के मामला सामने आए थे। आगजनी की तो कई घटनाएँ सामने आई थीं। अब अमित शाह ने बताया है कि मणिपुर में बड़ी संख्या में उग्रवादियों ने हिंसा का रास्ता त्याग कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।

शाह ने सभी का लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वागत किया है साथ ही शांति एवं विकास के रास्ते पर उनकी उन्नति की कामना की है। एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें UNLF के सभी उग्रवादी अपनी-अपनी बंदूकें सौंप रहे हैं। तस्वीरों में कई उग्रवादियों को पंक्ति में खड़े देखा जा सकता है।

जबकि उनके हथियारों को भी जमीन पर रखा गया है। पिछले 59 वर्षों से मणिपुर में सक्रिय UNLF अलगाववादी विचारधारा वाला संगठन रहा है, जिसकी स्थापना 24 नवंबर, 1964 को हुई थी।

रेस्क्यू के बाद जश्न का माहौल, कई परिवारों ने मनाई दिवाली

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उत्तराखंड में सिलक्यारा सुरंग में पिछले 16 दिन से फंसे सभी 41 श्रमिकों को मंगलवार को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। आज जैसे ही श्रमिकों के परिवारों में यह खबर पहुंची तो वहां जश्न छा गया। टनल में फंसे मजदूरों के रेस्क्यू के बाद जश्न का माहौल हो गया। कई परिवारों ने मंगलवार को रात में दिवाली मनाई और मिठाईयां बांटी। अलग अलग राज्यों से श्रमिकों के परिवारों में जश्न के वीडियो और फोटो सामने आए हैं।

उत्तराखंड में सिलक्यारा सुरंग में पिछले 16 दिन से फंसे सभी 41 श्रमिकों को मंगलवार को सकुशल एक-एक करके 800 मिमी के उन पाइपों के जरिए बाहर निकाला गया। मलबे में ड्रिल करके अंदर डालकर एक रास्ता बनाया गया था। चारधाम यात्रा मार्ग पर निर्माणाधीन साढ़े चार किलोमीटर लंबी सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग का 12 नवंबर को एक हिस्सा ढहने से उसमें फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चला रहे बचावकर्मियों को 17वें दिन यह सफलता मिली।

इस दौरान विज्ञान के साथ ही आस्था का भी सहारा लिया गया। सिलक्यारा के आसपास के ग्रामीणों और श्रमिकों के परिजनों ने ईश्वर से अपनों के सकुशल बाहर आने की प्रार्थना की। इसके साथ ही मुख्यमंत्री धामी, केंद्रीय मंत्री सिंह और बचाव कार्यों में सहयोग के लिए बुलाए गए ‘इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन’ के अध्यक्ष अर्नोल्ड डिक्स ने भी सुरंग के बाहर बने स्थानीय देवता बौखनाग मंदिर में सिर झुकाकर श्रमिकों की सकुशल निकासी के लिए ईश्वर से आशीर्वाद मांगा।

सुरंग में 17 दिन से फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया

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राष्‍ट्र ने उत्तराखंड उत्तरकाशी जिले के सिलक्यारा सुरंग में 17 दिन से फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने पर एजेंसियों को सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की है। सभी श्रमिक सिल्‍कयारा सुरंग के भीतर फंसे हुए थे। सिल्‍क्‍यारा से बरकोट के बीच निर्माणाधीन सुरंग का एक भाग 12 नवंबर को ढह जाने के कारण सभी श्रमिक सुरंग में फंसे रह गए।

राज्‍य सरकार और केंद्र सरकार की सभी एजेंसियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने बचाव मिशन को सफल बनाने के लिए युद्धस्‍तर पर काम किया। फंसे हुए श्रमिकों को भोजन, ऑक्‍सीजन और एक पाइप लाइन के जरिए संपर्क के लिए फोन दिए गए थे। श्रमिकों और उनके परिवारजनों ने सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाले जाने पर केंद्र और राज्‍य सरकार के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया है।

नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखंड में सिलक्यारा सुरंग से 17 दिन बाद निकाले गए श्रमिकों से टेलीफोन पर बात की। श्रमिकों को निकाले जाने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने श्रमिकों को सफलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से बाहर निकालने के लिए बचाव टीमों के प्रयासों की सराहना की।

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