स्वधर्म, स्वदेशी और स्वराज की ‘स्व’ त्रयी

भारत के विकास की प्रेरणा स्वधर्म, स्वदेशी और स्वराज की ‘स्व’ त्रयी में निहित है, जिसमें समस्त समाज की सहभागिता रहे। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के पावन अवसर पर इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि हमें सुसंगठित, विजयशाली व समृद्ध राष्ट्र बनाने की प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों के लिए मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति, सर्वांगीण विकास के अवसर, तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग एवं पर्यावरणपूरक विकास सहित आधुनिकीकरण की भारतीय संकल्पना के आधार पर नए प्रतिमान खड़े करने जैसी चुनौतियों से पार पाना है

राष्ट्र के नवोत्थान के लिए हमें परिवार संस्था का दृढ़ीकरण, बंधुता पर आधारित समरस समाज का निर्माण तथा स्वदेशी भाव के साथ उद्यमिता का विकास आदि उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए विशेष प्रयास करना है। निश्चित तौर पर इस संकल्प को पूरा करना एक समाज के नाते हम सबके लिए आसान नहीं होगा। इस दृष्टि से समाज के सभी घटकों, विशेषकर युवा वर्ग को समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता होगी। संघर्षकाल में विदेशी शासन से मुक्ति हेतु जिस प्रकार त्याग और बलिदान की आवश्यकता थी; उसी प्रकार वर्तमान समय में उपर्युक्त लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नागरिक कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध तथा औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त समाज जीवन भी खड़ा करने की दिशा में काम करना होगा।

*जम रही है दुनिया में भारत की धाक*

स्वाधीनता प्राप्ति के उपरांत हमने अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। भारतवंशी प्रतिभाशाली युवाओं ने दुनिया भर में भारत के ज्ञान और मेधा का झंडा फहराया है। आज भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभर रही है। भारत के सनातन मूल्यों के आधार पर होने वाले नवोत्थान को पूरी दुनिया स्वीकार कर रही  है। विश्व शांति, विश्व बंधुत्व और मानव कल्याण के लिए भारत अपनी भूमिका निभाने के लिए भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की नीति पर अग्रसर है।

विश्व कल्याण के उदात्त लक्ष्य को मूर्तरूप प्रदान करने हेतु भारत के ‘स्व’ की सुदीर्घ यात्रा हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रही है। जैसाकि हम जानते हैं, सैकड़ों सालों तक चले विदेशी आक्रमणों तथा संघर्ष के काल में भारतीय जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ तथा सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व धार्मिक व्यवस्थाओं को गहरी चोट पहुँची। भारत की यात्रा इस कालखंड में बाधित हुई, बावजूद इसके पूज्य संतों व महापुरुषों के नेतृत्व में संपूर्ण समाज ने अपना संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा और अपने ‘स्व’ को बचाए रखा। यह स्व था, जिसने हमें मिटने नहीं दिया। तमाम कठिनाइयों और विपरित परिस्थितियों में हमें बचाए रखा।

*आसान नहीं है आगे का रास्ता*

जहाँ अनेक देश भारत के प्रति सम्मान और सद्भाव रखते हैं, वहीं भारत के ‘स्व’ आधारित इस पुनरुत्थान को विश्व की कुछ शक्तियाँ स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। हिंदुत्व के विचार का विरोध करने वाली देश के भीतर और बाहर की अनेक शक्तियाँ निहित स्वार्थों और भेदों को उभार कर समाज में परस्पर अविश्वास, राष्ट्र के प्रति अनास्था और अराजकता पैदा करने हेतु नए-नए षड्यंत्र रच रही हैं। हमें इन सबके प्रति जागरूक रहते हुए उनके मंतव्यों को भी विफल करना होगा। यह अमृतकाल हमें भारत को वैश्विक नेतृत्व प्राप्त कराने के लिए सामूहिक उद्यम करने का अवसर प्रदान कर रहा है।

भारत के अंदर और बाहर की ऐसी शक्तियों से भी हमें निश्चित तौर पर टकराना है, जो अलग अलग तरह से भारत के विकास में बाधा उत्पन्न करेंगी। वे शक्तियां भारत को बदनाम करने के लिए कोई भी अवसर नहीं छोड़ेंगी। इसके लिए वह आंदोलन और समाचार माध्यमों का भी सहारा लेंगी। सोशल मीडिया के माध्यम से वह अफवाह को सच की तरह फैलाएंगी। उनकी पहचान करना और उनके षडयंत्रों को सफल नहीं होने देना, आने वाले समय में हम सबके सामने एक बड़ी चुनौती बनने
वाली है। 

*भारत के सामने आंतरिक—बाहरी शक्तियों से सुरक्षा की चुनौती*

संघर्षकाल में विदेशी शासन से मुक्ति हेतु जिस प्रकार त्याग और बलिदान की आवश्यकता थी, उसी प्रकार वर्तमान समय में उपर्युक्त लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नागरिक कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध तथा औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त समाज जीवन भी खड़ा करना होगा। यह सब पढ़ने में आसान लग सकता है, लेकिन व्यवहार में उतारना आसान नहीं होगा। आज जहां दुनिया में भारत की धाक को महसूस किया जा रहा है। भारत के पासपोर्ट को अब दूसरे देशों में सम्मान से देखा जा रहा है। दूसरे देशों में कठीनाई में फंसे नागरिकों को निकालने के लिए दुनिया भर के देश भारत से संपर्क कर रहे हैं। आज जब पूरी दुनिया में भारत ने अपने लिए एक विशेष स्थान बनाया है। वहीं कई देश भारत की इस बढ़ती ताकत को पसंद नहीं कर रहे।

भारत के अंदर भी अर्बन नक्सल शक्तियां, टुकड़े टुकड़े गैंग, एफसीआरए से पैसा लेकर भारत विरोधी गतिविधियों में लगी एनजीओ जैसे कई समूह भारत के खिलाफ अपना एजेन्डा लेकर सक्रिय हैं। यह कभी किसानों के नाम पर, कभी सीएए के नाम पर, कभी एनआरसी के नाम पर दिल्ली में दंगा कराने में सफलता पा जाते हैं तो कभी दिल्ली को चारों तरफ से घेरने की योजना बना लेते हैं। ये ताकतें लाल किले पर चढ़ कर निशान साहब लहराकर देश का साम्प्रदायिक सदभाव बिगाड़ने की कोशिश भी करती हैं। यह हम सबके लिए सावधानी बरतते हुए, ना सिर्फ खुद इन बातों को लेकर जागरूक रहने का बल्कि अपने आस पास के समाज को भी जागरूक करने का समय है। यदि हम ऐसा कर पाते हैं तो इस तरह से भी हम देश के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं।

यह बात हमें भूलनी नहीं है कि अमृतकाल भारत को वैश्विक नेतृत्व प्राप्त कराने के लिए सामूहिक उद्यम करने का हम सबको अवसर प्रदान कर रहा है। आइए, हम सबसे जितना बन पड़ता है, भारत को वैभवशाली देश बनाने में उतना अपना योगदान करें।

राजभाषा एवं खेल पुरस्कार वितरण समारोह में विजेताओं पुरस्कृत किया गया

अखिलेश पाठक

अपने उद्बोधन में संस्थान के निदेशक प्रोफेसर नागेश्वर राव ने कहा कि देश में राजभाषा के प्रति जागरूकता एवं प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस्ड स्टडी) में आज संस्थान के निदेशक प्रोफे़सर नागेश्वर राव ने राजभाषा के प्रचार-प्रसार तथा संस्थान में आयोजित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रशस्ति पत्र तथा पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर संस्थान के अध्येता प्रोफे़सर चुंग्खम यशवंत सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित थे। राजभाषा हिन्दी की विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी की अध्यक्षता में 14-15 सितम्बर, 2022 को सूरत (गुजरात) में हुए हिंदी दिवस तथा द्वितीय अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में भागीदारी के उपरांत हिन्दी पखवाडे़ के किया गया था जिसमें संस्थान के अधिकारियों व कर्मचारियों ने हर्षोल्लास के साथ भाग लिया था जबकि संस्थान की आंतरिक वार्षिक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन गत वर्ष माह अक्तूबर में किया गया था।

                सचिव की निजी सचिव गुरजीत कौर, हिन्दी टंकण तथा आशुभाषण; अमन वर्मा, वाहन चालक ने टिप्पण/प्रारूपण  तथा श्रुतलेख; प्रीतम सिंह, अवर श्रेणी लिपिक निबंध एवं कविता पाठ तथा प्रसाद समूह के प्रतिभागी जनसंपर्क अधिकारी अखिलेश पाठक, अभिषेक दल्वी, अनुभाग अधिकारी उद्यान तथा गोपाल सिंह प्रश्न-मंच प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान पर रहे। इसके अतिरिक्त नरेन्द्र चैहान, अनुभाग अधिकारी (सम्पदा) निबंध; कुलभूषण शर्मा, प्रवर श्रेणी लिपिक टंकण; देवेन्द्र सिंह, कुक कविता पाठ;सुरेन्द्र रमोला, कार्यालय सहायक टिप्पण; दीपक शर्मा, पुस्तकालय परिचर आशुभाषण तथा पंत समूह के प्रतिभागी प्रोमिला, बंदना, रंजना, कार्यालय सहायक, नीरज शर्मा, सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष तथा नवीन हरनोट द्वितीय स्थान पर रहे। इन प्रतियोगिताओं में भूपेंद्र कश्यप एमटीएस, चंद्रकला, प्रवर श्रेणी लिपिक, अशोक भटोईया, अवर श्रेणी लिपिक, केसर सिंह, प्रवर श्रेणी लिपिक, नारायण दास, लिपिक ओम प्रसाद तथा इलैक्ट्रिशन विजय कुमार ने पुरस्कार प्राप्त किए। इसके अतिरिक्त भारत सरकार, गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की नीति की प्रोत्साहन नीति के तहत सरकारी कामकाज मूल-टिप्पण/आलेखन हिन्दी में 10 अधिकारियों/कर्मचारियों को पुरस्कार राशि तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

अक्तूबर 2022 में संस्थान में आयोजित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं संस्थान के अध्येताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा उनके परिवारजनों ने भाग लिया था। इन खेलों में बैडमिंटन, टेबल टेनिस, कैरम, ड्रम तोड़ जैसी खेलों के अलावा बच्चों के लिए जलेबी दौड़, साधारण दौड़, म्यूजिकल चेयर आदि विभिन्न खेलें भी शामिल थीं।

अपने उद्बोधन में संस्थान के निदेशक प्रोफेसर नागेश्वर राव ने कहा कि देश में राजभाषा के प्रति जागरूकता एवं प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। प्रोफेसर राव के पास केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय का भी अतिरिक्त प्रभार है ऐसे में उन्होंने कहा कि हिन्दी निदेशालय तथा राजभाषा विभाग द्वारा मिलकर ’हिन्दी से हिन्दी’ नामक एक ऐसे शब्दकोष का निर्माण किया जा रहा है जो हिन्दी के व्यावहारिक प्रयोग में बहुत कारगर सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा विशेष प्रयास किए जाए रहे हैं कि देश में स्नातक स्तर की शिक्षा मातृभाषा में हो, जिसमें 12 भाषाओं को शामिल किया गया है और लगभग सभी विषयों में पाठ्य पुस्तकें तैयार हैं एवं शिक्षा भी मातृभाषा में हो रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारी परंपरागत खेलों को भी भारत सरकार विश्व पटल पर ले जाने के लिए भी कृतसंकल्प है जिससे हमारे देश को वैश्विक स्तर पर एक पृथक पहचान मिलेगी और खेल प्रेमियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के बेहतर अवसर मिलेंगे।

इस संयुक्त वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में खेल प्रतियोगिताओं से संबंधित मंच संचालन जनसंपर्क अधिकारी अखिलेश पाठक द्वारा किया गया जबकि राजभाषा कार्यक्रम संबंधी मंच संचालन संस्थान के हिन्दी अनुवादक राजेश कुमार द्वारा किया गया।

तीन भारतीय फोटो जर्नलिस्ट्स के छायाचित्रों का चयन आंद्रे स्टेनिन इंटरनेशनल प्रेस फोटो कांटेस्ट प्रदर्शनी के लिए किया गया

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मीडिया स्कैन रिपोर्ट

भारत के तीन फोटो जर्नलिस्ट्स शिबाशीष साहा , चन्दन खन्ना और राजेंद्र मोहन पांडेय के छायाचित्रों का चयन आंद्रे स्टेनिन इंटरनेशनल प्रेस फोटो कांटेस्ट प्रदर्शनी की अलग अलग श्रेणियों में किया गया हैं . इन छायाचित्रों का चयन 54 देशों के लगभग ३००० प्रतिभागियों के बीच से किया गया हैं। 

शिबाशीष साहा बंगाल से आते है और कई वैश्विक स्तर के फोटो कांटेस्ट जीत चुके हैं। उनके छाया चित्र एवरग्रीन स्माइल में बंगाली नववर्ष समारोह के बीच में एक बूढी औरत कैमरा देख शर्मा जाती है और मोर पंख से अपने चेहरे को छुपाने की कोशिश करती हैं। इस उम्र में भी ऐसी अदा दिल को छू जाती हैं।    

इसी प्रकार चन्दन खन्ना जो कि उत्तरी अमेरिका में AFP नाम  की न्यूज़ एजेंसी में काम करते हैं और सयुक्त राज्य अमेरिका के  फ्लोरिडा राज्य के  मियामी शहर में रहते है, ने कोविड महामारी के बाद कैटी टोबीयास नाम की 67 वर्ष की महिला की तस्वीर को खींचा है।   

वह अपने घर के आँगन को देख रही है।  फ्लोरिडा के अन्ना मारिया द्वीप में रहने वाली इस महिला ने अपने घर के आँगन को कोविड महामारी के स्मारक के रूप में तब्दील कर दिया और वह होने वाली हर मौत को श्रद्धांजलि देते हुए एक फीता बाँधा हैं। 

भारत के एक अन्य फोटोग्राफर राजेंद्र मोहन पांडेय, के छायाचित्र ‘क्रैकिंग द आइस’ जो कि कश्मीर के डल झील के जमे पानी को तोड़ने कि कवायत को दिखाता हैं, भी चर्चा का विषय रही। 

विश्व के कई शहरों से होती हुई यह अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी , 23फरवरी तक दिल्ली में प्रदर्शित की जाएगी 

नयी दिल्ली अब उन अंतर्राष्ट्रीय शहरों की सूची में शामिल हैं जहाँ वर्ष २०२२ के आंद्रे स्टेनिन प्रतियोगिता को जीतने वालों के छायाचित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है।  यह अंतराष्ट्रीय स्तर का Exhibition Tour दुनिया के कई शहरों से होता हुआ दिल्ली आया है।   

भारत में नयी दिल्ली से पहले स्टेनिन कांटेस्ट इंटरनेशनल रोड शो  का प्रेटोरिया (दक्षिणी अफ्रीका) और शारजाह (सयुक्त अरब अमीरात) जैसे शहरों में आयोजित किया जा चुका हैं। विश्व के कई और देशों, में भी इस प्रदर्शनी को अंतराष्ट्रीय साझेदारों के सहयोग से आयोजित करने की योजना बनायीं जा रही हैं जिसमें कि मध्य-पूर्व एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया भी शामिल हैं।   

 रूस की जानी मानी न्यूज़ एजेंसी स्पूतनिक द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में भारत के कई युवा फोटो जर्नलिस्ट्स के उत्कृष्ट कार्यों को आल इंडिया फाइन आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स सोसाइटी की आर्ट्स गैलरी में जनता के लिए प्रदर्शित किया गया हैं।  यह प्रदर्शनी, जिसका उद्घाटन रूस के राजदूत श्री डेनिस अलीपोव और श्री अलेक्सांडर श्टोल जो कि इस वैश्विक स्तर की प्रदर्शनी के कार्यकारी निदेशक है, की गणमान्य उपस्तिथि में हुआ।    

रूस के राजदूत श्री डेनिस अलीपोव ने इस अवसर पर कहा कि मुझे आपके बीच आ कर बहुत ख़ुशी का अनुभव हो रहा हैं।  इस अवसर पर मुझे ज़्यादा बोलने की ज़रुरत नहीं है, क्यूंकि यहाँ पर प्रदर्शित हर एक तस्वीर अपने आप में एक लम्बी दास्तान सुनाती सी लगती हैं।  यह छायाचित्र छायाकार या फोटोग्राफर के अपने काम के प्रति समर्पण को दर्शाती हैं। यह तसवीरें हमें रचनात्मक या क्रिएटिव होने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।   

स्वर्गीय रूसी स्पेशल फोटोजोउर्नलिस्ट आंद्रे स्टेनिन, जिन्होंने अपने काम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और उसके लिए अपनी जान भी गवा दी , को श्रद्धांजलि देते हुए रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि उन्होंने फोटोग्राफी सर्वोच्च मानकों को आदर्श मानते हुए काम किया और दुर्भाग्यवश पूर्ण समर्पण के साथ काम करते हुए अपनी जान गवा दी। उन्होंने आगे बताया कि उनको समर्पित इस प्रदर्शनी कि शुरुआत साल 2014 में हुई . 

यह रूस के एकमात्र मंच है जहा से विश्वस्तरीय फोटो जर्नलिस्ट्स का चयन किया जाता है और वैश्विक स्तर पर उभर कर आने और नाम कमाने का मौका दिया जाता हैं. इस प्रदर्शनी में भारत के साथ साथ दुनिया भर के देशों से युवा फोटो जर्नलिस्ट्स हिस्सा लेते हैं।    

रूस के राजदूत ने अपने वह उपस्थित सभा को सम्बोधित करते हुए आगे कहा, कि इस प्रदर्शनी में भारत के अलावा कई और देशों के युवा फोटो जर्नलिस्ट्स के कामों को प्रदर्शित किया गया है और हम उनकी रचनात्मक शैली के द्वारा वह देख पा रहे है जो शायद जो शायद हम आम ज़िन्दगी में न देख पाएं।  ये तसवीरें हमें अंतर्मन की गहराइयों में ले जाती हैं और हमें ज़िदगी की चुनौतियों का सामना करने कि प्रेरणा भी देती हैं, जो कि इस समय की मांग हैं।   

इस प्रदर्शनी में विश्व भर के युवा  छायाकारों ने अपने छाया चित्रों के द्वारा विभिन्न रस जैसे खूबसूरती, प्यार,नफरत, आपदा, मजबूरी, चुनौती इत्यादि को दिखा कर अपनी सोच के साथ जोड़ने की कोशिश की हैं। 

भारतीय फोटोजर्नलिस्ट्स की सराहना करते हुए उन्होंने कहा यहाँ के छायाकारों ने २०२२ में आयोजित इस प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन किया हैं।  *रूस के राजदूत ने विशेष तौर पर  भारत के तीन फोटो जर्नलिस्ट्स शिबाशीष साहा , चन्दन खन्ना और राजेंद्र मोहन पांडेय के छायाचित्रों की सराहना की*.  

साल २०२३ की लिए दिसंबर २२, २०२२, जो कि आंद्रे स्टेनिन का जन्मदिवस भी हैं, से प्रतियोगिता प्रविष्टियां आमंत्रित की गयी हैं। जो भी प्रतियोगी इस प्रतियोगिता में भाग लेना चाहते है, वो इस प्रतियोगिता की वेबसाइट रूसी में, अंग्रेजी में और चीनी में फरवरी 28, 2023 तक रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।   

आंद्रे स्टेनिन इंटरनेशनल प्रेस फोटो कांटेस्ट के बारें में 

आंद्रे स्टेनिन इंटरनेशनल प्रेस फोटो कांटेस्ट का आयोजन रोसिया सेगोदन्या मीडिया ग्रुप द्वारा रुस्सियन कमीशन फॉर UNESCO तववधान में आयोजित कराया जाता हैं।  इस प्रतियोगिता का उद्देश्य युवा फोटोग्राफर्स को प्रोत्साहित करना हैं और इस क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालना हैं।  यह प्रतियोगिता युवा फोटोग्राफर्स के लिए एक मंच हैं जहाँ प्रतिभाशाली युवा फोटोग्राफर्स अपनी खींची गयी तस्वीरों के द्वारा लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करते हैं।   

इस प्रतियोगिता के जनरल इनफार्मेशन पार्टनर्स VGTRK (आल रुस्सियन स्टेट टेलीविज़न एंड रेडियो ब्राडकास्टिंग कंपनी) और STOMRIM ऑनलाइन प्लेटफार्म (रूस), द रशियन कल्चर रशियन स्टेट TV चैनल (रूस), द मास्को 24 TV चैनल (रूस) हैं।    

इस प्रतियोगिता के अंतराष्ट्रीय मीडिया पार्टनर्स स्पुतनिक न्यूज़ एजेंसी और रेडियो इंटरनेशनल , RT इंटरनेशनल , इंडिपेंडेंट मीडिया होल्डिंग (साउथ अफ्रीका), ANA न्यूज़ एजेंसी (साउथ अफ्रीका), शंघाई यूनाइटेड मीडिया ग्रुप (SUMG ) (चीन), चाइना डेली वेबसाइट (चीन ), द पेपर वेबसाइट (China ) और अल मायादीन मीडिया नेटवर्क (लेबनान) हैं।   

इस कम्पटीशन के इंडस्ट्री पार्टनर्स यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स ऑफ़ रूस (रूस), द यंग जर्नलिस्ट्स (रूस), द रशियन फोटो फोटो पोर्टल (रूस) और Photo-study.ru हैं ।

उज्ज्वल भविष्य की राह दिखाता ‘सनातन भारत’ ग्रन्थ

 – मुकेश गुप्ता

सनातन भारत’ ग्रन्थ की प्रमुख विशेषता यह है कि इसे पढ़ने पर हमारी ज्ञान पिपासा बढ़ने लगती है और उत्सुकतावश एक ही बार में पूरा ग्रन्थ पढ़ने को मन लालायित हो उठता है

हिंदी विवेक मासिक पत्रिका द्वारा प्रकाशित ‘सनातन भारत’ ग्रन्थ, ज्ञान-विज्ञान-विवेक का ऐसा त्रिवेणी संगम है, जिसमें जितना गहराई में उतरेंगे उतने ही ज्ञान के मोती की प्राप्ति होगी. सनातन भारत ग्रन्थ के ध्येय वाक्य ‘विश्व कल्याण का विशुध्द दृष्टिकोण’ से ही स्पष्ट हो जाता है कि यह ग्रन्थ केवल भारत के लिए ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के लिए समर्पित एवं प्राणिमात्र हेतु कल्याणकारी है.

भूमिका, अध्यात्म, प्रभाव, प्रगटीकरण, भविष्य और ध्वजवाहक, इन ६ खंडो में देश-विदेश से जुड़े मान्यवर लेखकों के सारगर्भित लेखों को प्रस्तुत किया गया है. कुल ५१ लेख, एक सम्पादकीय और ७ साक्षात्कार से समृद्ध ‘सनातन भारत’ गौरवशाली अतीत के साथ सुनहरे वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य की राह दिखाने वाला प्रेरणादायी, प्रासंगिक एवं संग्रहणीय ग्रन्थ है.

जो लोग यह कहते है कि सनातन तर्क एवं विज्ञान से परे है उनके लिए तथा खासकर युवाओं के लिए सनातन भारत ग्रन्थ तर्क और विज्ञान की कसौटी पर शत प्रतिशत खरा उतरा है. मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह ग्रन्थ अतीत से सिख देकर दूरदृष्टि का परिचय देते हुए वर्तमान एवं भविष्य संवारने में सहायक सिद्ध होगा. हमारी आनेवाली पीढ़ी, खासकर युवा वर्ग सनातन संस्कृति की जड़ों से गहरे जुड़े रहे और सनातन की शाश्वत शक्ति को जाने ताकि कोई विधर्मी गुमराह कर स्वधर्म से विमुख न कर सके. इसलिए सनातन भारत की संस्कृति तथा परम्पराओं को आनेवाली पीढ़ियों तक पहुंचानेवाले युवा ध्वजवाहकों को यह ग्रन्थ समर्पित है.

हिन्दी विवेक का विशेषांक सनातन भारत

अतिथि सम्पादक के रूप में महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरी जी का आशीर्वचन तथा शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी, स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, स्वामी अवधेशानंद गिरी जी, स्वामी यतींद्रानंद गिरी जी, योग गुरु बाबा रामदेव, विख्यात गायक व संगीतकार पद्मश्री कैलाश खैर और पीताम्बरी प्रोडक्ट्स प्रा. लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर रविन्द्र प्रभु देसाई जी के साक्षात्कार में जीवन की सफलता के सूत्र और सनातन भारत का मर्म परिलक्षित होता है.

‘सनातन भारत’ हिंदी विवेक की ग्रन्थ प्रकाशन परम्परा का ही हिस्सा है. इसके पूर्व हिंदी विवेक द्वारा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के जीवनी पर आधारित ‘कर्मयोद्धा’, गृह मंत्री अमित शाह की जीवनी पर ‘महायोद्धा’ और मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवनी पर ‘संन्याशी योद्धा’ ग्रंथ प्रकाशित किया गया था. जिसे देश भर के पाठकों ने अभूतपूर्व प्रतिसाद दिया था.

‘सनातन भारत’ ग्रन्थ की प्रमुख विशेषता यह है कि इसे पढ़ने पर हमारी ज्ञान पिपासा बढ़ने लगती है और उत्सुकतावश एक ही बार में पूरा ग्रन्थ पढ़ने को मन लालायित हो उठता है. लेखकों ने भी सम्पूर्ण मनोयोग एवं समर्पण भाव से ‘गागर में सागर’ समाने वाला लेख लिखा है, जिसके लिए सभी लेखक तथा हिंदी विवेक की सम्पादकीय टीम अभिनंदन की पात्र है.

सनातन विचार, चिंतन एवं दृष्टिकोण को लेख एवं साक्षात्कार के माध्यम से इस तरह से प्रस्तुत किया गया है जो सदैव के लिए प्रासंगिक जान पड़ते है, इसलिए ‘सनातन भारत’ कालजयी ग्रंथ प्रतीत हो रही है. हर समस्या का समाधान, हर चुनौती को अवसर में परिवर्तित करने का सनातनी सूत्र इस ग्रन्थ में सहज ही मिल जाता है.

चाहे आतंकवाद से मुक्ति का मार्ग हो, चाहे विश्व शांति का, ईसाई धर्मांतरण का मायाजाल (षड्यंत्र) हो या इस्लामिक जिहाद, जहरीला वामपंथ, राष्ट्र धर्म विरोधी वैचारिक संघर्ष, रक्षा-सुरक्षा के सनातनी सूत्र, राष्ट्रीय एवं आंतरिक सुरक्षा आदि अनेकानेक विषयों सहित वर्तमान चुनौतियों का भी शाश्वत सनातनी समाधान इस ग्रन्थ में दिया गया है. इसके साथ ही ग्लोबल वार्मिंग से बचने हेतु पर्यावरण चेतना के साथ निसर्ग श्रद्धाभाव एवं पोषण की आवश्यकताओं पर भी बल दिया गया है.

रणनीति, सामरिक नीति, कूटनीति, राजनीति, विदेशनीति, अर्थनीति सहित दुनिया की आर्थिक व सैन्य महाशक्ति तथा भारत को विश्वगुरु बनाने का संकल्प समेत सनातन के ध्वजवाहक मोदी और योगी के योगदान को भी अधोरेखित किया गया है. हिंदी विवेक मासिक पत्रिका, हिन्दुस्थान प्रकाशन संस्था द्वारा ‘सनातन भारत’ ग्रन्थ का प्रकाशन किया गया है, जिसका मूल्य रु. ७०० मात्र है.

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