उत्तरी दिल्ली निगम शिक्षको को वेतन नहीं मिलने पर हड़ताल पर जाने को मजबूर

नगर निगम शिक्षक संघ ने वेतन समस्या के संदर्भ में संघ की कार्यकारिणी की बैठक में यह कठोर निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ा । संघ के महासचिव रामनिवास सोलंकी के अनुसार लाखों निगम कर्मी एवम पेंशनर परिवार दिल्ली सरकार और निगम शासित सरकार को चेतावनी देते हैं कि हमारे वेतन पर आप दोनों दल राजनीति बंद करें।

लाखों परिवार आप दोनो के इस खेल से बहुत परेशान हो चुके हैं। अब दोनो दल आपसी समन्वय सहमति बनाकर हमे हमारा डीए, एचआरए का बढ़ा हुआ वेतन,पेंशन और दीपावली बोनस जल्द से जल्द भुगतान करें। अन्यथा अब बर्दाश्त नहीं करेंगे और धरना प्रदर्शन एवम् हड़ताल करने पर मजबूर होंगे एवम आगामी नगर निगम चुनाव में सभी निगम कर्मी एवम पेंशनर नोटा का इस्तेमाल करने पर मजबूर होंगे। जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी आप दोनो दलों की होगी ।

इस बैठक में महिपाल मावी, विभा सिंह, जगदीश यादव, मुरारीलाल शर्मा, आशु शर्मा जी बलवान सिंह,ललित यादव,प्रदीप सोलंकी,विवेक भारद्वाज श्री राम सैनी आदि शामिल थे ।

सुनीता नागेंद्र सेवा संस्थान, बाँट रहे बेसहारा बुजुर्गों के जीवन में मुस्कान

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सिन्हा परिवार ने खुद को संभाला और अपने परिवार के दो सबसे मज़बूत सदस्यों को खोने के बाद परिवार ने दोनों की स्मृति में आदारञ्जली स्वरूप ‘सुनीता नागेंद्र सेवा संस्थान’ की नींव रखी

हीरेंद्र झा

‘एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जायेंगे प्यारे तेरे बोल…’ गीतकार शैलेन्द्र का लिखा यह गीत किन रूपों में आज भी लोगों को प्रेरित कर रहा है इसकी मिसाल हाल ही में करुणेश्वर  ओल्ड एज केयर हाउस, महाराष्ट्र में देखने को मिली। दरअसल नागेंद्र कुमार सिन्हा अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन त्याग और सेवा की जो भावना वे अपने बच्चों को सिखा गए हैं वह कई बेसहारा जनों के जीवन में रंग और उम्मीद बनकर आई है।  

एक साल पहले 20 अक्टूबर 2020 को 88 साल की उम्र में नागेंद्र कुमार सिन्हा जी का स्वर्गवास हो गया। अपने पीछे वह  एक भरा पूरा परिवार छोड़ कर गये। लेकिन इनके जाने के जब ठीक 6 महीने के अंदर, कोविड के कारण जब इस परिवार की बड़ी बहू सुनीता सिन्हा का भी निधन हो गया तो पूरा परिवार इस आकस्मिक आघात से हिल गया।  सिन्हा परिवार ने खुद को संभाला और अपने परिवार के दो सबसे मज़बूत सदस्यों को खोने के बाद परिवार ने दोनों की स्मृति में आदारञ्जली स्वरूप ‘सुनीता नागेंद्र सेवा संस्थान’ की नींव रखी। यह एक ऐसा सेवा संस्थान है जो बेसहारा और सच्चे अर्थों में जरुरतमन्द लोगों की मदद के लिए शुरू किया गया है। इसी सिलसिले में 19 अक्टूबर को इस संस्थान के बैनर तले सिन्हा परिवार के कई सदस्य महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के करुणेश्वर ओल्ड एज केयर हाउस पहुंचे।

इस दौरान बुजुर्गों की आवश्यकता के अनुसार उन्हें सामग्री सेवाएं उपलब्ध कराई गईं जैसे कि उनके बीच दो महीने की सभी दवायें, राशन की सभी सामग्री, मिठाई, फल, व्हील चेयर, वैक्यूम क्लीनर इत्यादि का वितरण किया गया।

बता दें कि इस ओल्ड एज केयर हाउस में वैसे बुजुर्ग रहते हैं जिन्हें आश्रय देने वाला कोई नहीं था और जो शारीरिक रूप से असहाय हैं और दूसरों पर निर्भर हैं। ओल्ड एज केयर हाउस के संचालक ईश्वर इन सभी का पूरे जतन से ध्यान रखते हैं। बहरहाल, कार्यक्रम के दिन,

सुनीता नागेंद्र सेवा संस्थान के कई सदस्य दिनभर इन बुजुर्गों के साथ रहे और सबने मिलकर इन बुजुर्गों के लिये अपने हाथों से भोजन बनाने और खिलाने में भी मदद की। स्वर्गीय नागेंद्र कुमार सिन्हा की पत्नी श्रीमती इंदु सिन्हा समेत परिवार के छोटे छोटे बच्चे तक इस नेक काम में पूरे मन से जुटे रहे।

उसके बाद देर तक पुराने सदाबहार फिल्मी गीतों और भजन का सिलसिला चलता रहा।  कई बुज़ुर्गों ने गीत गाये, ताल से ताल मिलाकर खूब तालियाँ  बजाईं। जो न देख सकते थे न बिस्तर से उठ सकते थे, संगीत की धुन पर उनकी उंगलियों को हिलते देखने वाला पल बेहद करुणामयी था। अपनों सा प्यार पाकर सभी बुजुर्ग भावुक हो गये। केयर हाउस के सभी सदस्यों के लिए यह एक यादगार दिन बन गया।

सेवा संस्थान से आयोजक संस्था में मनोज सिन्हा, अनूप कुमार,आलोक कुमार, अमित कुमार, श्रीमती इन्दु सिन्हा, रीना, निमिषा, अर्चना, स्वेता इत्यादि शामिल हैं। इस मौके पर सिन्हा परिवार ने कहा है कि वो आगे भी इस तरह के आयोजन करते रहेंगे जिनसे सच्चे अर्थों में वे उन लोगों तक पहुँच सकें जिन्हें मदद की जरूरत है। यही परम पूज्य पिता जी के लिए हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 20 अक्टूबर को स्वर्गीय नागेंद्र कुमार सिन्हा की पहली पुण्यतिथि भी है। यूँ तो ये काम सिर्फ पैसों से भी हो सकता था जहाँ ज़रूरत के सामानों को खरीद कर इस वृद्धाश्रम पहुंचा दिया जाता। परंतु इन बुज़ुर्गों के लिए सबसे ज़रूरी और सबसे महँगा है आपका समय। शोक के इस पल में सिन्हा परिवार ने इन्हें इनकी ज़रूरत का सामान और वो कीमती समय दिन भर इनके साथ बिता कर जो सेवा भावना दिखाई है, यह औरों के लिए भी एक मिसाल है।

छात्राओं ने अकीला रेस्ट्रॉन्ट में साड़ी पहनकर किया प्रवेश

साड़ी पहने महिला के अपमान के विरुद्ध अभाविप की छात्रा कार्यकर्ताओं ने भारतीय परिधान में किया प्रदर्शन

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भारी संख्या में छात्रा कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली के अक्विला रेस्ट्रॉन्ट में साड़ी पहनकर गई महिला को अंदर जाने से रोकने के विरोध में रेस्ट्रॉन्ट के सामने प्रदर्शन किया।

ज्ञात हो कि 19 सितंबर, 2021 को दिल्ली के खेल गाँव स्थित अकीला रेस्टोरेंट ने एक महिला को साड़ी पहनकर आने के कारण अपने परिसर के भीतर आने की अनुमति नहीं दी गयी थी। उसको रेस्टोरेंट में उपस्थित एक कर्मचारी ने प्रवेश से मना करते हुए कहा की केवल ‘ स्मार्ट कैज़ूअल’ कपड़े पहने हुए ही प्रवेश मिलेगा और साड़ी उसमें नहीं आती है। यह भारतीय परिधान को विदेशी पोशाकों के सामने कम आँकने के साथ-साथ भारतीय परंपरा का भी सीधा अपमान है जिसके विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की छात्रा कार्यकर्ताओं ने आज भारतीय परिधान साड़ी पहनकर रेस्ट्रॉन्ट में जा कर प्रदर्शन किया। 

छात्रा कार्यकर्ताओं का भारतीय परिधान में प्रदर्शन

अभाविप की प्रांत छात्रा प्रमुख वैलेंटीना भ्रम्मा ने कहा “बीते दिनों भारत की राजधानी दिल्ली के अकीला रेस्ट्रॉन्ट में एक महिला को अंदर जाने पे सिर्फ इसीलिये रोका गया कि उसने साड़ी पहन रखी थी ये बहुत ही निंदनीय है तथा अभाविप इस घटना का पुरजोर विरोध करती है एवं साथ ही साथ सरकार से ऐसे रेस्त्रोंतों के खिलाफ कड़ी करवाई करने की मांग करती है जो किसी भी प्रकार से भारतीय संस्कृति, भारतीय परिधान का अपमान करती हो। हमने आज भारतीय परिधान में होटेल में प्रवेश किया और उनकी सोच को तोड़ने का काम किया।”

प्रदर्शन के दौरान उपस्थित अभाविप दिल्ली के प्रांत मंत्री एवं राष्ट्रीय मीडिया संयोजक सिद्धार्थ यादव ने कहा की, “भारत स्वाधीनता के 75वे वर्ष में है परंतु आज भी कुछ लोगों की सोच ग़ुलाम है। हमारी लड़ाई इस ग़ुलाम ‘कलोनीयल मानसिकता’ को हराने की है। साड़ी एक महिला की शान है और देश की राजधानी में ऐसी घटना बहुत निंदनीय है। हम देश के सभी प्रगतिशील विचार के लोगों की आवाज़ बनकर ऐसी संकुचित मानसिकता के लोगों को संदेश देने में सफल हुए हैं।”

प्रदर्शन के बाद रेस्ट्रॉन्ट के मैनेजर द्वारा माफी मांगी गई तथा आगे ऐसी कोई भी घटना जो भारतीय संस्कृति का अपमान करती हो, को ना करने का आश्वासन भी दिया।

ABVP’s student activists protest in Indian attire against the humiliation of saree clad woman

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Female student activists entered Aquila restaurant wearing sarees in protest

Annapurna Chowdhary

Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad along with a large number of student activists demonstrated protest in front of Delhi’s Aquila restaurant against the entry of a woman wearing a saree.

It is to be known that on September 19, 2021, Aquila restaurant in Khel Village, Delhi did not allow a woman inside its premises as she was wearing a saree. She was denied entry by an employee present in the restaurant saying that she will be allowed entry only wearing ‘smart casual’ clothes and saree is not a part of it. This is a direct insult to the Indian tradition as well as undermining the Indian attire in front of the western clothes, in protest against which the student activists of Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad today demonstrated in the restaurant wearing Indian sarees.

ABVP’s State Girls Cordinator, Valentina Brahma said, “In the past, a woman was stopped from entering Aquila Restaurant in Delhi’s capital, just because she was wearing a saree, it is very condemnable and ABVP strongly opposes this incident. And at the same time demands the government to take strict action against such restaurants which in any way insult Indian culture and Indian attire. We entered the hotel today in Indian attire with the intention to bring out the hotel management out of their colonial hangover”

ABVP Delhi’s State Secretary and National Media Convener Sidharth Yadav, who was present during the protest, said, “India is in the 75th year of independence, but even today the thinking of some people is narrow minded. Our fight is to defeat this narrow minded ‘colonial mindset’. Saree is the pride of a woman and such incident in the capital of the country is highly condemnable. We have been successful in giving a message to the people of such narrow mindedness by becoming the voice of all progressive minded people of the country.”

After the demonstration, the manager of the restaurant apologized and further assured not to do any such incident which insults Indian outfits and Indian culture.

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