वैगनर ग्रुप के येवगेनी प्रिगोझिन के 1 विमान दुर्घटना में मारे जाने की खबर

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रूस की सेना के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करने वाले वैगनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन के 1 विमान दुर्घटना में मारे जाने की खबर है। रूस के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार कल मॉस्को के उत्तरी क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान में सवार 10 यात्रियों में प्रिगोझिन भी शामिल थे।

मॉस्‍को से सेंटपीर्ट्सबर्ग जा रहा विमान त्‍वेर क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया और 3 पायलट सहित सभी यात्रियों की मौत हो गई। खबरों के अनुसार भाड़े के सैनिकों के ग्रुप वैगनर के कमांडर दमित्री उत्किन भी इस हादसे में मारे गए हैं।

विमान में सवार लोगों के पार्थिव अवशेष मिल गए हैं। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। तकनीकी समस्‍याओं से लेकर विमान में विस्‍फोट तक के कारणों की आशंका व्‍यक्‍त की जा रही है। 2 महीने पहले ही येवगेनी प्रिगोझिन ने रूस की सेना के खिलाफ 1 संक्षिप्‍त विद्रोह का नेतृत्‍व किया था। इसे राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के सत्ता में आने के बाद शासन के खिलाफ सबसे बड़ी चुनौती माना गया था।

सोशल मीडिया यूजर ने कहा कि यह देखने के बाद कि कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि वैगनर समूह के कथित सह-संस्थापक दिमित्री उत्किन भी प्रिगोझिन के साथ विमान में थे, यह कल्पना करना मुश्किल है कि भाड़े के सैनिकों के दोनों नेता खुद को ऐसी स्थिति में रखेंगे कि राष्ट्रपति पुतिन उन्हें मार डालेंगे।

धरती अम्मा, चंदा मामा और रक्षा बंधन

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लगभग पचहत्तर लाख लोग एक साथ देख रहे थे केवल इसरो के यूट्यूब चैनल पर। इतनी बड़ी भीड़ का एक साझे लक्ष्य पर दृष्टि गड़ाना अपने आप में अद्भुत है। मुझे पता है, अंतिम के दस मिनट तक सबकी धड़कने मेरी ही तरह बहुत बढ़ गयी होंगी। और फिर इसरो के उस हॉल में बैठे उन देश के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों की भीड़ जब उछल कर तालियां बजाती हैं, तो लगता है जैसे जग जीत लिया हो।

मैं उछल पड़ा हूँ। मोबाइल फेंक कर चिल्ला उठा हूँ, “हर हर महादेव!” प्रचंड उल्लास के क्षणों में केवल ईश्वर याद आते हैं। रौंगटे खड़े हो गए हैं, गला भर आया है, आंखें बहने लगीं हैं। मैं जानता हूँ, यही दशा सबकी हुई होगी। पूरे देश की… ऐसी उपलब्धियां, ऐसे क्षण एक झटके में पूरे देश को एक सूत्र में बांध देते हैं।

मेरे बच्चे आश्चर्य से मेरा मुँह देख रहे हैं। वे छोटे हैं, इस उपलब्धि का मूल्य नहीं जानते। सावन के महीने में धरती की राखी लेकर भाई के पास पहुँचे उस संवदिया का चंद्रमा पर उतरना उन्हें याद रहे न रहे, अपने पिता का उछल पड़ना सदैव याद रहेगा। बड़े होने पर समझेंगे वे इस क्षण का मूल्य, कि कैसे हजार वर्षों के संघर्ष से मुक्त होने के सत्तर वर्ष बाद ही इस पुण्यभूमि ने अपने गौरवशाली अतीत की चमक दुबारा बिखेरनी शुरू कर दी थी।

चंद्रयान की ओर टकटकी लगा कर देखते लोगों में अधिकांश को विज्ञान की अधिक समझ नहीं है, पर इस उपलब्धि ने सबकी छाती चौड़ी कर दी है। चंद्रयान के चनरमा तक पहुँचने से मिलने वाली जानकारियों का हिसाब किताब वैज्ञानिक देखें, हम तो केवल यह सोच कर उछल पड़े हैं कि देश सफल हुआ है। हम आपस में भाषा, क्षेत्र, रूप या जाति को लेकर भले हजार बार सहमत-असमत होते रहे हों, बात जब राष्ट्र की आती है तो हम एक होते हैं। यही हमारा मूल चरित्र है।

संसार की इस सबसे प्राचीन सभ्यता के ध्वज का चंद्रमा के उस अनजान भाग तक पहुँचना केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक सत्य का नवीनतम प्रमाण है कि इस ब्रम्हाण्ड को सबसे पहले हमने पहचाना था। ग्रहों से सबसे पुराना नाता हमारा है, सितारों का चरित्र सबसे पहले हम समझे थे। वो तो घर में बार बार घुस आते डकैतों से उलझने में देर हो गयी, वरना अपनो से नाता हमसे अधिक कोई क्या ही निभाएगा।

पिछली असफलता के बाद यह सफलता प्रमाण है कि असफलताएं एक सामान्य घटना भर होती हैं। सभ्यता का रथ असफलता के ठोकरों पर नहीं रुकता, वह दौड़ता रहता है। असफलता सफलता को थोड़ी दूर भले कर दें, पर उसके बाद मिलने वाले उल्लास को उतना ही बढ़ा भी देती हैं।

इसरो ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित किया है। उसके सारे वैज्ञानिकों को बधाई। और बधाई इस पुण्यभूमि के हर व्यक्ति को, कि जिनके बच्चों ने आज लपक कर चांद को छू लिया है।

सर्वेश तिवारी श्रीमुख
गोपालगंज, बिहार।

अब चंदा मामा टूर के…

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भारतीय बाल साहित्य में वर्षों से चंदा ‘मामा’ को इसी विशेषण के साथ हम सब ने प्रेम से मामा का स्थान दिया है। इसी रिश्ते को बलवती बनाते हुए सैकड़ो कविताएं रची गई। कभी पूर्णिमा से अमावस की ओर जाते मामा को रूठते हुए मामा कहा गया तो कभी तिथि के अनुसार सिकुड़ते हुए चंदा मामा को बच्चों ने ठंड से ठिठुर कर सिकुड़ते हुए मामा मान लिया।

कोई बच्चा कहानियों में यह कहता नजर आता था की धरती माता अपने नन्हे भैया चंदा के लिए रुई भरकर रजाई तैयार कर रही है।
इन सारे प्यारे प्यारे प्रतिकों के बीच भारत के इसरो द्वारा भेजे गए चंद्रयान ने जैसे ही चंद्रमा पर लैंडिंग की और इस दृश्य को टीवी पर इस देश के करोड़ों बच्चों ने एक साथ देखा तो यूँ लग रहा है मानो बाल साहित्य के सारे प्रतीक और प्रतिमान ही बदल गए हैं। आधुनिक युग की गूगल पीढ़ी को संबोधित करते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जब यह कहा कि अब –

चंदा मामा दूर के नहीं चंदा मामा बस एक टूर के होकर रह गए हैं तो लगा सचमुच बाल साहित्यकर धन्य हो गए। आज देश का शीर्ष नेतृत्व भी बाल साहित्य उद्धृत कर रहे हैं।
मैं भी बाल साहित्य और बाल पत्रकारिता का विद्यार्थी होने के नाते यही कहना चाहूंगा कि-

“चंदा मामा दुर के,
पूए पकाए बुर के।”
नहीं अब भारत के बच्चे गाएंगे –
“चंदा मामा पास के,
पुए पकाएं आस के।”
और यह आस पूरी की हमारे चंद्रयान ने।
धरती माता की राखी लेकर गए यान को भारत के बच्चों की ओर से हृदय से आभार। अमिताभ बच्चन अंकल हमारी ओर से कहिए ना एक बार-“मामा आज खुश तो बहुत होंगें तुम।हँय ssss।”

 

डॉ विकास दवे
निदेशक, साहित्य अकादमी, म.प्र. शासन, भोपाल

भारत आने वाले वर्षों में दुनिया का विकास इंजन बनेगा :मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत आने वाले वर्षों में दुनिया का विकास इंजन बनेगा और जल्द ही पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स बिजनेस फोरम लीडर्स डायलॉग में प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्थिक उथल-पुथल के बावजूद भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सुधारों के बारे में कहा कि भारत सरकार के मिशन मोड  में किए गए सुधारों के कारण व्यापार आसान करने में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी और दिवाला और ऋण अक्षमता कानून लागू होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्रों को पहले प्रतिबंधित माना जाता था लेकिन उन्हें अब निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार विशेष रूप से सार्वजनिक सेवा वितरण और सुशासन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि अब तक लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण-डीबीटी के माध्यम से तीन सौ 60 अरब डॉलर से अधिक की धनराशि अंतरित की जा चुकी है। मोदी ने बताया कि डीबीटी योजना से सेवा वितरण में पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार कम हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल लेनदेन के बारे में कहा कि आज भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस- यूपीआई का इस्तेमाल रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल तक हर स्तर पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सभी देशों में भारत सबसे ज्यादा डिजिटल लेनदेन वाला देश है और संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर और फ्रांस जैसे देश भी इस मंच से जुड़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर किए जा रहे निवेश देश के परिदृश्य को बदल रहे हैं और इस साल के बजट में हमने बुनियादी ढांचे के लिए लगभग एक सौ 20 अरब अमेरिकी डॉलर आवंटित किए हैं।

 

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