पत्रकारों के हत्यारों को सजा दिलाने को लेकर गंभीर नहीं सरकारें

पत्रकारों पर दुनिया भर में हमले बढ़ रहे हैं और चौंकाने वाली बात ये है कि दोषियों को सजा दिलाने को लेकर सरकारें भी गंभीर नहीं हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगठन ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (CPJ)’  ने पिछले एक दशक के आंकड़ों के आधार पर उन 13 देशों की एक सूची तैयार की है, जहां पत्रकारों की हत्या से जुड़े मामले अभी भी अनसुलझे हैं या फिर कमजोर जांच के चलते आरोपित आजाद हो गए। गौर करने वाली बात ये है कि इस सूची में भारत को भी शामिल किया गया है, हालांकि पिछले 12 सालों में भारत की स्थिति में यदि सुधार नहीं हुआ, तो बद से बदतर भी नहीं हुई है।

CPJ के मुताबिक, पत्रकारों के हत्यारों पर मुकदमा चलाने के मामले में सोमालिया की स्थिति बेहद खराब है। यह लगातार पांचवें साल दुनिया का सबसे खराब देश बना है। यानी कहां, पत्रकारों के हत्यारों को अदालत तक लाया तो जाता है, लेकिन पुलिस की कमजोर तैयारी के चलते वो आजाद हो जाते हैं। फिलहाल सोमालिया में पत्रकारों की हत्या से जुड़े 25 मामले अनसुलझे पड़े हैं। वैसे अनसुलझे केस के मामले में फिलीपींस पहले स्थान पर है। यहां पत्रकारों की हत्या के करीब 41 मामले अपने अंजाम तक नहीं पहुंच सके हैं। इसके बाद, मैक्सिको (30), सीरिया (22), इराक (22), भारत (17), पाकिस्तान (16), अफगानिस्तान (11), ब्राजील (15), बांग्लादेश (7), रूस (6), नाइजीरिया (5) और दक्षिण सूडान (5) का नंबर है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 1992 से लेकर 2019 तक 35 पत्रकारों को मौत के घाट उतारा गया। जिसमें से सितंबर 2009 से लेकर अगस्त 2019 के बीच के 17 मामले अनसुलझे हैं। गौरी लंकेश और सुजात बुखारी हत्याकांड इसमें सबसे प्रमुख हैं।  
     
पिछले 10 सालों के आंकड़ों के आधार पर ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट’ ने यह लिस्ट तैयार की है। CPJ का कहना है कि पिछले एक दशक में आतंकी संगठनों द्वारा पत्रकारों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया है, लेकिन स्थानीय आपराधिक गिरोह पत्रकारों के लिए फ़िलहाल सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं। पत्रकारों को अपने काम के चलते जान गंवानी पड़ रही है।  प्रेस की आजादी के मामले में रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने भारत को 180 देशों में से 140 स्थान दिया था। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया था कि सांप्रदायिकता के खिलाफ बोलने वाले पत्रकारों को कई तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके विरुद्ध सोशल मीडिया अभियानों में भी तेजी आई है।  

 CPJ के मुताबिक, 31 अगस्त, 2019 को समाप्त हुए 10-वर्षीय सूचकांक की अवधि के दौरान, दुनिया भर में 318 पत्रकारों की उनके काम के लिए हत्या कर दी गई और 86% मामलों में किसी भी आरोपी पर सफलतापूर्वक मुकदमा नहीं चलाया गया। CPJ की इस बार की सूची में शामिल भारत सहित सभी देश हर साल इसका हिस्सा बनते रहे हैं। CPJ का इंपुनिटी इंडेक्स प्रत्येक देश की आबादी के प्रतिशत के रूप में पत्रकारों की हत्या के अनसुलझे मामलों की संख्या की गणना करता है। इस सूचकांक के लिए, CPJ ने एक सितंबर, 2009 और 31 अगस्त, 2019 के बीच हुई पत्रकारों की हत्या और अनसुलझे मामलों का डेटा जमा किया। केवल उन देशों को इस सूची में शामिल किया गया, जहां पांच या उससे अधिक केस अनसुलझे हैं। CPJ किसी पत्रकार की हत्या को उसके काम के चलते जानबूझकर की गई हत्या के रूप में परिभाषित करता है। इस सूचकांक में उन पत्रकारों को शामिल नहीं किया गया है, जिनकी मौत युद्ध या खतरनाक असाइनमेंट जैसे विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान हुई।

‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ का कहना है कि पिछले एक दशक में आतंकी संगठनों द्वारा पत्रकारों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया है, लेकिन स्थानीय आपराधिक गिरोह पत्रकारों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं। यही कारण है कि पत्रकारों को अपने काम के चलते जान गंवानी पड़ रही है।

गौरतलब है कि इस साल अप्रैल में प्रेस की आजादी के मामले में रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने भारत को 180 देशों में से 140वां स्थान दिया था। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया था कि सांप्रदायिकता के खिलाफ बोलने वाले पत्रकारों को कई तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके विरुद्ध सोशल मीडिया अभियानों में भी तेजी आई है। हालांकि, भारत में मीडिया की आजादी दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर है, लेकिन पत्रकारों पर लगातार बढ़ते हमले चिंता का विषय जरूर है।

सरकारी योजना का लाभ अब टीवी और वेब पत्रकारों को भी मिलेगा

111.jpg

केंद्र सरकार ने पत्रकारों को खास ‘तोहफा’ दिया है। दरअसल, ‘पत्रकार वेलफेयर स्कीम’ में सरकार द्वारा संशोधन कर दिया है। इसके बाद अब यह देशभर के सभी पत्रकारों के लिए लागू हो गई है। इस योजना का लाभ यह है कि यदि किसी पत्रकार का निधन हो जाता है अथवा किसी कारण से वह दिव्यांग हो जाता है तो सरकार की ओर से उस पत्रकार के आश्रितों को पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, इलाज के लिए भी पत्रकार को सरकार पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता देगी।

नए संशोधन के तहत अब इस योजना में केंद्र या राज्य सरकार से अधिस्वीकृत पत्रकार होने का कोई बंधन नहीं है। वहीं, वेब और टीवी पत्रकारों को भी इस योजना के तहत लाभ मिलेगा। सभी अखबारों के संपादक, उप संपादक, रिपोर्टर, फोटोग्राफर, कैमरामैन, फोटो पत्रकार, फ्रीलांस जर्नलिस्ट, अंशकालिक संवाददाता और उन पर आश्रित परिजनों को भी इस योजना के दायरे में रखा गया है। इसका लाभ उन्हीं पत्रकारों को मिलेगा, जिन्होंने कम से कम पांच साल तक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दी होंगी।

ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने फरवरी 2013 में इस योजना को लागू किया था, लेकिन अब इसमें संशोधन किया गया है। इस योजना की पात्रता के लिए एक समिति भी गठित की गई है। इस समिति के संरक्षक केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री होंगे। विभाग के सचिव अध्यक्ष होंगे और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के उप सचिव अथवा निदेशक सदस्य इसके संयोजक होंगे। यह समिति पीड़ित पत्रकार या फिर उनके परिजनों के आवेदन पर विचार करेगी और उसके बाद आर्थिक सहायता देने का फैसला लेगी।

उदगम म्यूज़िक फेस्टिवल सम्पन्न

गुजरात के गांधीनगर टाउन हॉल  में राष्ट्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित  तबलानवाज़ पद्म श्री उस्ताद अलारखान के १००वे जन्मजयंती वर्ष के उपलक्ष्य में उदगम चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा गुजरात राज्य संगीत नाटक अकादमी और  नितिन चैरिटेबल ट्रस्ट सहयोग से दो दिवसीय दूसरे उदगम म्यूज़िक फेस्टिवल का आयोजन किया गया।

उदगम चेरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. मयूर जोशी ने उदगम  म्यूजिक फेस्टिवल में स्वागत भाषण दिया। समारोहमें मुख्य अतिथि डॉ। जयंती एस. रवि, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, गुजरात राज्य और विशेष अतिथि  डॉ, नितिन सुमंत शाह, मेनेजिंग ट्रस्टी, नितिन चैरिटेबल ट्रस्ट, अहमदाबाद एवं उदगम के ट्रस्टी ध्रुवभाई जोशी उपस्थित रहे। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ। जयंती एस रवि ने शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने के लिए उदगम ट्रस्ट के प्रयासों की सहराहना करते हुए डॉ. मयूर जोशही को सुन्दर आयोजन के लिए बधाई दी। उदगम कला सम्म्मान से डॉ, नितिन सुमंत शाह, मेनेजिंग ट्रस्टी, नितिन चैरिटेबल ट्रस्ट, अहमदाबाद और गांधीनगर के कलारक्षक दंपति जयराज सिंह और आशा सरवैया को सम्मानित किया गया।

पहले दिन उदगम म्यूज़िक फेस्टिवल की पहली बैठकमें पंडित सिद्धार्थ बनर्जी और उनके साथ संगत की पंडिता अनुराधा पालजीने अपनी प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया।

दूसरी बैठक की शुरुआत  नवाज़ पद्मश्री उस्ताद अल्लखन साहब के पोते,अज़ान कुरैशीने पियानो बजाते हुए की और उनके बाद उस्ताद अलारखान के पुत्र उस्ताद फ़ज़ल कुरैशी और रवि चारी की, साथ ही उस्ताद अलारखान इंस्टीटूट के स्टूडनेटस के साथ शास्त्रीय और फ्यूज़न की प्रतुती कर प्रेक्षको को आफरीन कर दिया था l

दूसरे दिन पंडित सिद्धार्थ बनर्जी ने शास्त्रीय संगीत के छात्रों के लिए की गयी कार्यशालाओं में विभिन्न रागी रागिनियों और लय पर चर्चा की और रियाज़ का महत्व समझाया और कैसे करना है इसका मार्गदर्शन दिया। मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. मयूर जोशी को अगले साल बड़ी संख्या में तीसरे उद्घाटन संगीत समारोह में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया ।

मीडिया इंडस्ट्री के लिए फायदे का सौदा होगा ये सरकारी कदम

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कारपोरेट टैक्स में कटौती किए जाने की घोषणा का फायदा मीडिया जगत को भी मिलने वाला है। दरअसल, सरकार ने बेसिक कॉरपोरेट 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया है। घरेलू कंपनियों पर बिना किसी छूट के इनकम टैक्स 22 फीसदी होगा, जबकि सरचार्ज और सेस जोड़कर प्रभावी दर 25.17 फीसदी हो जाएगी। मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में कमी का सामना कर रहे अखबार, टीवी और मीडिया के अन्य सेगमेंट्स के लिए यह काफी अच्छी खबर है।

इस बारे में ‘डेलायट इंडिया’ (Deloitte India) के पार्टनर जेहिल ठक्कर का कहना है, ‘सरकार के इस फैसले से मीडिया इंडस्ट्री को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से फायदा होगा। डायरेक्टली फायदा इस तरह होगा कि टैक्स में कमी आने से संकट के इस दौर में इंडस्ट्री में कैश का ज्यादा फ्लो होगा। इनडायरेक्टली फायदा ये होगा कि नए प्रॉडक्ट लॉन्च हो सकते हैं अथवा नई कंपनी शुरू हो सकती हैं, जो आने वाले समय में विज्ञापन में बढ़ोतरी का कारण बन सकती हैं।’

ऑडिट एवं परामर्श देने वाली कंपनी केपीएमजी (KPMG) ने पिछले दिनों मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (M&E) से जुड़ी जो रिपोर्ट जारी की थी, उसके अनुसार कुल एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में प्रिंट मीडिया का जो शेयर वित्तीय वर्ष 2018 (FY18) में 35 प्रतिशत था, वह वर्ष 2019 में घटकर 32 प्रतिशत रह गया है। वहीं, ‘फिक्की-ईवाई’ (FICCI-EY) की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजपेपर्स का एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू एक प्रतिशत बढ़ा है, जबकि मैगजींस के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में आठ प्रतिशत की गिरावट हुई है।

जनवरी की शुरुआत में, सूचना प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्यूनिकेशन द्वारा प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले विज्ञापनों की दरों में 25 प्रतिशत की वृद्धि कर दी थी। इसके बाद प्राइवेट टीवी चैनल्स के लिए एडवर्टाइजिंग की दरों में 11 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई थी।   

अब कॉरपोरेट टैक्स में कटौती किए जाने की सरकार की घोषणा के बारे में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (Zee Entertainment Enterprises Ltd) के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका का कहना है, ‘कॉरपोरेट टैक्स में 25 प्रतिशत की कमी किया जाना वास्तव में काफी अच्छा कदम है। इससे भारतीय कंपनियों को काफी फायदा होगा।’

वहीं, ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) समूह के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है, ‘टैक्स में कमी किए जाने से प्रॉफिट बढ़ेगा और बिजनेसमैन के हाथों में पैसा आएगा, जिससे वे आगे निवेश करेंगे। इसका आर्थिक विकास पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।’

scroll to top