पत्रकारों की नौकरी पर कैंची

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अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट ‘स्क्रॉल डाट इन’ के संपादकीय विभाग में कार्यरत 16 लोगों की नौकरी पर कैंची चल गई है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। संपादकीय के अलावा प्रॉडक्शन, टेक्नोलॉजी, मार्केटिंग टीम से भी कुछ लोगों को नौकरी से हटाया गया है। कुल 20 लोगों की नौकरी पर तलवार चली है। बताया जाता है कि यहां संपादकीय विभाग में 40 पत्रकार कार्यरत थे, जिनमें अब 24 बचे हैं। इसमें फील्ड में काम करने वाले रिपोर्टर और स्क्रॉल की हिंदी न्यूज वेबसाइट ‘सत्याग्रह’ में काम करने वाले पत्रकार शामिल नहीं हैं।

 कर्मचारियों को बताया गया था कि कुछ बिजनेस कारणों से कंपनी में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं और 31 मई से कुछ पदों का पुनर्मूल्यांकन करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। कर्मचारियों को तीन जून तक अपना इस्तीफा सौंपने के लिए कहा गया था। इसके बाद कर्मचारियों को जून-जुलाई का वेतन दिया जाएगा। हालांकि, नौकरी से निकाले गए अपने कर्मचारियों को वेबसाइट ने आश्वासन दिया है कि वह दूसरी नौकरी तलाशने में उनकी मदद करेगी।

इसके अलावा इस वेबसाइट ने विडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘हॉटस्टार’ पर प्रसारित होने वाले अपने अवॉर्ड विनिंग विडियो शो ‘Your Morning Fix’ को भी रोक दिया है। इस बारे में ‘स्क्रॉल’ के एडिटर नरेश फर्नांडिस का कहना है, ‘पिछले पांच सालों में ग्राउंड रिपोर्टिंग के मामले में हमने अच्छी पकड़ बनाई है। इस दौरान हमारा काफी विस्तार हुआ। हालांकि, अपना रेवेन्यू जुटाने के लिए भी हमने काफी प्रयास किए, लेकिन वर्तमान आर्थिक स्थिति में हमें इतने बड़े आकार में संस्थान को चलाने में दिक्कत हो रही है। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमें अपने टैलेंटेड साथियों को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया अपनानी पड़ी है।’

हिंदी अखबार के ‘संपादक’ को कोर्ट ने सुनाई 6 महीने की सजा

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स्थानीय पत्रिका अखबार के तत्कालीन संपादक गिरिराज शर्मा और कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह को मानहानि के मामले में छत्तीसगढ़ की रायपुर कोर्ट ने छह-छह महीने की सजा सुनाई है। अखबार पर छत्तीसगढ़ के तत्कालीन नौकरशाह अमन सिंह के दुबई भागने और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने संबंधी खबर छापने का आरोप है। इस खबर में अमन सिंह पर पत्नी को अनुचित लाभ पहुंचाने और  पत्नी के नाम पर संपत्ति खरीदने जैसे कई अन्य आरोप लगाए गए थे। इस मामले में अमन सिंह ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

बताया जाता है कि जस्टिस विनय प्रधान की कोर्ट ने दोनों को 6-6 महीने की सजा के अलावा 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। दरअसल, ये पूरा मामला 30 अक्टूबर 2013 का है। उस वक्त कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह की तरफ से मीडिया को इस बारे में खबर की गयी थी, जिस पर अखबार ने खबर छापी थी। अब इस फैसले के खिलाफ अपील के लिए दोनों को 15-15 दिन का वक्त दिया जायेगा, अगर इस दौरान ऊपरी अदालत में अपील करने पर इस फैसले पर रोक लगा दी जाती है, तो इनकी गिरफ्तारी नहीं होगी।

सुरक्षा बलों ने किया कवरेज के लिए गए पत्रकार को गिरफ्तार

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पाकिस्तान में एक पत्रकार को कवरेज के दौरान गिरफ्तार किया गया है। पश्तूनों और सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष को कवर करने के सिलसिले में गए निजी टीवी चैनल ‘खैबर न्यूज’ में संवाददाता के रूप में काम करने वाले गौहर वजीर को गिरफ्तार किया गया। उन पर पाकिस्तान के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय पश्तूनों के आंदोलन में शामिल होने का आरोप है। पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट  में हिस्सा लेने को आधार बनाकर की गई पत्रकार की गिरफ्तारी का विरोध भी शुरू हो गया है। न्यूयॉर्क स्थित पत्रकारों की कमिटी समेत कई संगठनों ने गौहर वजीर को रिहा करने की मांग की है।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा घायल हो गए थे। स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट के आंदोलन के दौरान नेताओं को मंच तक पहुंचने से रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना ने वहां बैरियर लगा दिए थे। जब प्रदर्शनकारियों ने इन बैरियर को तोड़ने का प्रयास किया तो सेना ने उन पर गोलीबारी कर दी थी।

इसके बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए गौहर वजीर को भी गिरफ्तार कर लिया था। अपनी गिरफ्तारी से कुछ समय पूर्व ही गौहर ने पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट के प्रमुख नेता मोहसिन डावर का इंटरव्यू लिया था, जिन्हें पिछले साल पाकिस्तान नेशनल असेंबली के लिए चुना गया था। वज़ीर और अन्य लोगों को मैंटेनेंस ऑफ़ पब्लिक आर्डर आर्डिनेंस के तहत गिरफ्तार किया गया है।

अख़बार के कर्मचारियों पर देवगौड़ा परिवार पर ख़बर हेतु मामला दर्ज

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कन्नड़ अखबार के संपादक और उसके संपादकीय विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद जद (एस) प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के परिवार में सबकुछ ठीक नहीं होने के बारे में खबर प्रकाशित करने पर  मामला दर्ज कराया गया है।

जनता दल (सेक्यूलर) के प्रदेश सचिव एसपी प्रदीप कुमार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक अखबार ‘विश्ववाणी’ ने शनिवार को एक ‘झूठी खबर’ प्रकाशित की जिससे ऐसे छवि बनी कि देवगौड़ा के पोतों के बीच में हंगामे और भ्रम की स्थिति है।

पुलिस ने सोमवार को कहा कि रविवार को संपादक विश्वेश्वर भट और संपादकीय कर्मचारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 420 और 499 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

 एफआईआर के अनुसार, विश्ववाणी ने अपने 25 मई के संस्करण में एक अपमानजनक लेख प्रकाशित किया जिसकी हेडलाइन ‘टरमॉयल ऑफ द गौड़ा ग्रैंड किड्स’ थी। लेख में आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के बेटे निखिल कुमारस्वामी ने नशे की हालत में कथित तौर पर अपने दादा (एचडी देवगौड़ा) को गाली दी थी और मांड्या में हार के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया था।  ऐसी किसी घटना के न होने के बावजूद अखबार ने निखिल कुमारस्वामी के राजनीतिक जीवन को खराब करने के उद्देश्य से मनमाने तरीके से इसे रिपोर्ट किया।

वहीं अखबार ने ‘निखिल कुमार्स नाइट टाइम रेज’ की सब-हेडलाइन से सूत्रों के आधार पर एक अन्य लेख में लिखा था कि 23 मई की रात चुनाव परिणामों के बाद मैसूर के रेडिसन ब्लू होटल में निखिल अपना गुस्सा निकाल रहे थे।

 ‘एंगर अगेंस्ट देवगौड़ा’ कैप्शन से लिखे गए एक अन्य हिस्से में लेख में कहा गया कि निखिल कुमारस्वामी अपने दादा पर भी चीख पड़े थे। खबर में आरोप लगाया था कि निखिल ने अपने दादा पर इस बात के लिए गुस्सा जाहिर किया कि उन्होंने मांड्या में उन्हें समर्थन देने के लिए कांग्रेस नेताओं को समझाने के लिए हस्तक्षेप नहीं किया, जैसे कि उन्होंने दूसरे पोते प्रजवल रेवन्ना के लिए किया था। रेवन्ना गौड़ा खानदान के गढ़ हसन से लड़े थे जिसे गौड़ा ने छोड़ा था और उन्होंने वहां से जीत हासिल की।

ज्ञात हो कि निखिल भारतीय जनता पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुमालता अंबरीश से एक लाख से ज्यादा मतों से हार गए थे।

25 मई को खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा था कि यह खबर झूठी और दुर्भावनापूर्ण है। निखिल की इस चरित्र हत्या के कारण एक पिता के रूप में मुझे पीड़ा हुई है और इससे संपादक को अवगत कराया गया है। मीडिया से मेरा अनुरोध है कि इस तरह की झूठी खबरों से लोगों की भावनाओं के साथ खेलने से बचना चाहिए।

कन्नड़ अखबार के संपादक विश्वेश्वर भट ने प्राथमिकी पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि खबर सूत्रों पर आधारित थी और अगर किसी को कोई आपत्ति है तो वे स्पष्टीकरण जारी कर सकते थे, जैसा कि अखबार पूर्व में भी जरूरत पड़ने पर तत्परता पूर्वक करता रहा है। उन्होंने कहा, ‘मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि हम किस जगह रह रहे हैं। मैं 19 सालों से संपादक हूं और ऐसी घटना कभी नहीं हुई।’ भट ने कहा, ‘बहुत अधिक तो मानहानि का मामला दायर किया जा सकता था लेकिन प्राथमिकी दर्ज कराना एक नई परिपाटी शुरू करने जैसा है। मैं निश्चित रूप से अदालत में इसे चुनौती दूंगा।

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