मीडिया इंडस्ट्री के लिए फायदे का सौदा होगा ये सरकारी कदम

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कारपोरेट टैक्स में कटौती किए जाने की घोषणा का फायदा मीडिया जगत को भी मिलने वाला है। दरअसल, सरकार ने बेसिक कॉरपोरेट 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया है। घरेलू कंपनियों पर बिना किसी छूट के इनकम टैक्स 22 फीसदी होगा, जबकि सरचार्ज और सेस जोड़कर प्रभावी दर 25.17 फीसदी हो जाएगी। मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में कमी का सामना कर रहे अखबार, टीवी और मीडिया के अन्य सेगमेंट्स के लिए यह काफी अच्छी खबर है।

इस बारे में ‘डेलायट इंडिया’ (Deloitte India) के पार्टनर जेहिल ठक्कर का कहना है, ‘सरकार के इस फैसले से मीडिया इंडस्ट्री को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से फायदा होगा। डायरेक्टली फायदा इस तरह होगा कि टैक्स में कमी आने से संकट के इस दौर में इंडस्ट्री में कैश का ज्यादा फ्लो होगा। इनडायरेक्टली फायदा ये होगा कि नए प्रॉडक्ट लॉन्च हो सकते हैं अथवा नई कंपनी शुरू हो सकती हैं, जो आने वाले समय में विज्ञापन में बढ़ोतरी का कारण बन सकती हैं।’

ऑडिट एवं परामर्श देने वाली कंपनी केपीएमजी (KPMG) ने पिछले दिनों मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (M&E) से जुड़ी जो रिपोर्ट जारी की थी, उसके अनुसार कुल एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में प्रिंट मीडिया का जो शेयर वित्तीय वर्ष 2018 (FY18) में 35 प्रतिशत था, वह वर्ष 2019 में घटकर 32 प्रतिशत रह गया है। वहीं, ‘फिक्की-ईवाई’ (FICCI-EY) की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजपेपर्स का एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू एक प्रतिशत बढ़ा है, जबकि मैगजींस के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में आठ प्रतिशत की गिरावट हुई है।

जनवरी की शुरुआत में, सूचना प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्यूनिकेशन द्वारा प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले विज्ञापनों की दरों में 25 प्रतिशत की वृद्धि कर दी थी। इसके बाद प्राइवेट टीवी चैनल्स के लिए एडवर्टाइजिंग की दरों में 11 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई थी।   

अब कॉरपोरेट टैक्स में कटौती किए जाने की सरकार की घोषणा के बारे में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (Zee Entertainment Enterprises Ltd) के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका का कहना है, ‘कॉरपोरेट टैक्स में 25 प्रतिशत की कमी किया जाना वास्तव में काफी अच्छा कदम है। इससे भारतीय कंपनियों को काफी फायदा होगा।’

वहीं, ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) समूह के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है, ‘टैक्स में कमी किए जाने से प्रॉफिट बढ़ेगा और बिजनेसमैन के हाथों में पैसा आएगा, जिससे वे आगे निवेश करेंगे। इसका आर्थिक विकास पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।’

पत्रकारों की नौकरी पर कैंची

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अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट ‘स्क्रॉल डाट इन’ के संपादकीय विभाग में कार्यरत 16 लोगों की नौकरी पर कैंची चल गई है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। संपादकीय के अलावा प्रॉडक्शन, टेक्नोलॉजी, मार्केटिंग टीम से भी कुछ लोगों को नौकरी से हटाया गया है। कुल 20 लोगों की नौकरी पर तलवार चली है। बताया जाता है कि यहां संपादकीय विभाग में 40 पत्रकार कार्यरत थे, जिनमें अब 24 बचे हैं। इसमें फील्ड में काम करने वाले रिपोर्टर और स्क्रॉल की हिंदी न्यूज वेबसाइट ‘सत्याग्रह’ में काम करने वाले पत्रकार शामिल नहीं हैं।

 कर्मचारियों को बताया गया था कि कुछ बिजनेस कारणों से कंपनी में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं और 31 मई से कुछ पदों का पुनर्मूल्यांकन करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। कर्मचारियों को तीन जून तक अपना इस्तीफा सौंपने के लिए कहा गया था। इसके बाद कर्मचारियों को जून-जुलाई का वेतन दिया जाएगा। हालांकि, नौकरी से निकाले गए अपने कर्मचारियों को वेबसाइट ने आश्वासन दिया है कि वह दूसरी नौकरी तलाशने में उनकी मदद करेगी।

इसके अलावा इस वेबसाइट ने विडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘हॉटस्टार’ पर प्रसारित होने वाले अपने अवॉर्ड विनिंग विडियो शो ‘Your Morning Fix’ को भी रोक दिया है। इस बारे में ‘स्क्रॉल’ के एडिटर नरेश फर्नांडिस का कहना है, ‘पिछले पांच सालों में ग्राउंड रिपोर्टिंग के मामले में हमने अच्छी पकड़ बनाई है। इस दौरान हमारा काफी विस्तार हुआ। हालांकि, अपना रेवेन्यू जुटाने के लिए भी हमने काफी प्रयास किए, लेकिन वर्तमान आर्थिक स्थिति में हमें इतने बड़े आकार में संस्थान को चलाने में दिक्कत हो रही है। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमें अपने टैलेंटेड साथियों को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया अपनानी पड़ी है।’

हिंदी अखबार के ‘संपादक’ को कोर्ट ने सुनाई 6 महीने की सजा

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स्थानीय पत्रिका अखबार के तत्कालीन संपादक गिरिराज शर्मा और कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह को मानहानि के मामले में छत्तीसगढ़ की रायपुर कोर्ट ने छह-छह महीने की सजा सुनाई है। अखबार पर छत्तीसगढ़ के तत्कालीन नौकरशाह अमन सिंह के दुबई भागने और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने संबंधी खबर छापने का आरोप है। इस खबर में अमन सिंह पर पत्नी को अनुचित लाभ पहुंचाने और  पत्नी के नाम पर संपत्ति खरीदने जैसे कई अन्य आरोप लगाए गए थे। इस मामले में अमन सिंह ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

बताया जाता है कि जस्टिस विनय प्रधान की कोर्ट ने दोनों को 6-6 महीने की सजा के अलावा 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। दरअसल, ये पूरा मामला 30 अक्टूबर 2013 का है। उस वक्त कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह की तरफ से मीडिया को इस बारे में खबर की गयी थी, जिस पर अखबार ने खबर छापी थी। अब इस फैसले के खिलाफ अपील के लिए दोनों को 15-15 दिन का वक्त दिया जायेगा, अगर इस दौरान ऊपरी अदालत में अपील करने पर इस फैसले पर रोक लगा दी जाती है, तो इनकी गिरफ्तारी नहीं होगी।

सुरक्षा बलों ने किया कवरेज के लिए गए पत्रकार को गिरफ्तार

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पाकिस्तान में एक पत्रकार को कवरेज के दौरान गिरफ्तार किया गया है। पश्तूनों और सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष को कवर करने के सिलसिले में गए निजी टीवी चैनल ‘खैबर न्यूज’ में संवाददाता के रूप में काम करने वाले गौहर वजीर को गिरफ्तार किया गया। उन पर पाकिस्तान के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय पश्तूनों के आंदोलन में शामिल होने का आरोप है। पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट  में हिस्सा लेने को आधार बनाकर की गई पत्रकार की गिरफ्तारी का विरोध भी शुरू हो गया है। न्यूयॉर्क स्थित पत्रकारों की कमिटी समेत कई संगठनों ने गौहर वजीर को रिहा करने की मांग की है।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा घायल हो गए थे। स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट के आंदोलन के दौरान नेताओं को मंच तक पहुंचने से रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना ने वहां बैरियर लगा दिए थे। जब प्रदर्शनकारियों ने इन बैरियर को तोड़ने का प्रयास किया तो सेना ने उन पर गोलीबारी कर दी थी।

इसके बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए गौहर वजीर को भी गिरफ्तार कर लिया था। अपनी गिरफ्तारी से कुछ समय पूर्व ही गौहर ने पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट के प्रमुख नेता मोहसिन डावर का इंटरव्यू लिया था, जिन्हें पिछले साल पाकिस्तान नेशनल असेंबली के लिए चुना गया था। वज़ीर और अन्य लोगों को मैंटेनेंस ऑफ़ पब्लिक आर्डर आर्डिनेंस के तहत गिरफ्तार किया गया है।

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