भारतीय आईटी शेयरों में उछाल: इन्फोसिस, कोफोर्ज और एमफैसिस ने दिखाई मजबूती

3545136484.jpg

दिल्ली। 20 अगस्त 2025 को भारतीय आईटी शेयरों में जोरदार उछाल देखा गया, जिसमें निफ्टी आईटी इंडेक्स 3% की बढ़त के साथ मई 2025 के बाद सबसे बड़ी एकदिवसीय वृद्धि दर्ज की गई। इन्फोसिस ने 4% की छलांग लगाकर ₹1,497 का स्तर छुआ, जबकि कोफोर्ज और एमफैसिस क्रमशः 3.3% और 3.2% चढ़े। टीसीएस, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, टेक महिंद्रा, विप्रो, एलटीआईमाइंडट्री और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे अन्य शेयरों में भी 1.5% से 3% की बढ़त देखी गई।

इस रैली के पीछे प्रमुख कारणों में हाल के हफ्तों में शेयरों की बिकवाली के बाद आकर्षक वैल्यूएशन शामिल है, जिसने निवेशकों को कम कीमतों पर खरीदारी का मौका दिया। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर 2025 की बैठक में ब्याज दरों में कटौती की संभावना ने बाजार में उत्साह बढ़ाया। निवेशक फेड चेयर जेरोम पॉवेल के आगामी भाषण पर नजर रखे हुए हैं, जो दर कटौती के संकेत दे सकता है।

हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और कमजोर मांग का दबाव अभी भी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत ऑर्डर बुक और बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में निवेश से चुनिंदा कंपनियों को फायदा मिल सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे टीसीएस, इन्फोसिस और कोफोर्ज जैसे शेयरों पर ध्यान दें, जो आकर्षक वैल्यूएशन और मजबूत फंडामेंटल्स के साथ बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।

(Disclaimer: This story is for educational purposes only. The views and recommendations made above are those of individual analysts or broking companies, and not of Media Scan. We advise investors to check with certified experts before making any investment decisions.)

ठाकरे बंधु मुंबई में मिलकर पहला चुनाव लड़े और हार गए

20_08_2025-uddhav_24018735.webp.jpeg.webp

अनुराग पुनेठा

मुंबई के एक महत्वपूर्ण चुनाव में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे मिलकर चुनाव लड़े और बुरी तरह हार गए.
ये मामला बेस्ट कोआपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी का है.

दोनों भाई मिलकर सोसाइटी की सभी 21 सीटों पर लड़े और सारी हार गए.

इस पावरफुल सोसायटी पर बीजेपी समर्थकों का क़ब्ज़ा था. वो भी सिर्फ़ चार सीटें जीत पाए.

17 सीटें बेस्ट कर्मचारी यूनियन द्वारा खड़े किए गए पैनल ने जीती. इस पैनल को शरद पवार समर्थक माना जाता है.

ये चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ठाकरे बंधु पहली बार मिलकर चुनाव लड़े और बुरी तरह हारे.

इसका असर शीघ्र होने वाले नगर निगम चुनावों पर भी पड़ सकता है.

ये बड़ी असरदार सोसाइटी है. इसके करीब बीस हज़ार सदस्य हैं जो मुंबई शहर के जीवन में ख़ासा असर रखते हैं.

देश के गृह मंत्री अमित शाह की सदन में की गई टिप्पणियों पर प्रकाश

2-36.jpeg

नई दिल्ली:आज संसद में एक तीखी राजनीतिक बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए दो प्रमुख घटनाओं का जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा और विपक्ष के दोहरे चरित्र से जोड़ा। इन घटनाओं में उनकी अपनी गिरफ्तारी और लालू प्रसाद यादव के लिए लाए गए अध्यादेश का मुद्दा शामिल है। आइए इन घटनाओं को विस्तार से समझते हैं और शाह की टिप्पणियों को उनके संदर्भ में देखते हैं।

घटना 1: अमित शाह की गिरफ्तारी और राजनीतिक बदले की कार्रवाई
आज सदन में कांग्रेस के एक नेता ने अमित शाह पर निजी टिप्पणी की, जिसमें दावा किया गया कि जब कांग्रेस ने उन्हें फर्जी मामले में फंसाकर गिरफ्तार कराया, तब उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। इस पर गृह मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा, “मैं कांग्रेस को याद दिलाना चाहता हूँ कि मैंने अरेस्ट होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था और बेल पर बाहर आने के बाद भी, जब तक मैं अदालत से पूरी तरह निर्दोष साबित नहीं हुआ, तब तक मैंने कोई संवैधानिक पद नहीं लिया था। मेरे ऊपर लगाए गए फर्जी केस को अदालत ने यह कहते हुए खारिज किया कि केस राजनीतिक बदले (political vendetta) से प्रेरित था।”

यह घटना 2010 की है, जब अमित शाह, जो उस समय गुजरात के राज्य गृह मंत्री थे, को सीबीआई ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में जुलाई 2010 में गिरफ्तार किया था। कांग्रेस पर आरोप लगाया गया कि यह कार्रवाई राजनीतिक द्वेष के तहत की गई थी। शाह ने गिरफ्तारी से पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और 2014 तक किसी संवैधानिक पद पर नहीं लौटे। दिसंबर 2014 में मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें बरी कर दिया, जिसमें अदालत ने पाया कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था और मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित था। शाह ने आज इस घटना को याद करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एनडीए हमेशा नैतिक मूल्यों के पक्षधर रहे हैं, और लाल कृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं ने भी आरोप लगते ही इस्तीफा दे दिया था, जबकि कांग्रेस ने श्रीमती इंदिरा गांधी के समय से शुरू हुई अनैतिक परंपराओं को आगे बढ़ाया है।

घटना 2: लालू प्रसाद यादव के लिए अध्यादेश और कांग्रेस का दोहरा चरित्र
शाह ने अपनी दूसरी टिप्पणी में कांग्रेस पर लालू प्रसाद यादव को बचाने के लिए अध्यादेश लाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जिस श्री लालू प्रसाद यादव जी को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी अध्यादेश लाई थी, जिसका श्री राहुल गांधी ने विरोध किया था, आज वही राहुल गांधी पटना के गांधी मैदान में लालू जी को गले लगा रहे हैं। विपक्ष का यह दोहरा चरित्र जनता भली-भांति समझ चुकी है।”

यह घटना 2013 की है, जब लालू प्रसाद यादव, जो उस समय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता थे, को चारा घोटाले में दोषी पाया गया था। उन्हें ₹37 करोड़ के घोटाले में पांच साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोषी सांसदों और विधायकों को अयोग्य ठहराने का फैसला दिया था। कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने इस फैसले को पलटने के लिए एक अध्यादेश लाने का प्रयास किया, ताकि यादव जैसे दोषी नेताओं को बचाया जा सके। हालांकि, राहुल गांधी ने इस अध्यादेश का सार्वजनिक रूप से विरोध किया था, जिसके बाद इसे वापस ले लिया गया था। लेकिन हाल ही में, जनवरी 2025 में, राहुल गांधी ने पटना में लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की और उन्हें गले लगाया, जिसे शाह ने विपक्ष के दोहरे चरित्र का प्रमाण बताया। इस मुलाकात के दौरान गांधी ने यादव के घर पर गायों और बकरियों के साथ समय बिताया और मंदिर में प्रार्थना की, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी।

शाह का समग्र बयान और विपक्ष पर हमला

शाह ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आज संसद में पेश किए गए एक बिल पर चर्चा के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने रखा जाना था, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व में पूरा इंडी गठबंधन भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए “शर्म और हया” छोड़कर इसका भद्दे तरीके से विरोध कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि आज विपक्ष जनता के सामने पूरी तरह से उजागर हो गया है।
अमित शाह की आज की टिप्पणियां न केवल उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक यात्रा को रेखांकित करती हैं, बल्कि कांग्रेस और विपक्ष पर गंभीर आरोप भी लगाती हैं। उनकी गिरफ्तारी और लालू प्रसाद यादव के लिए अध्यादेश जैसे मुद्दों को उठाकर उन्होंने नैतिकता और राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा केंद्र में लाने की कोशिश की है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने शाह के बयानों को खारिज करते हुए उनके अतीत के आरोपों को फिर से उठाया है, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। यह बहस आने वाले दिनों में संसद और जनता के बीच चर्चा का केंद्र बिंदु बनी रहेगी।
(स्रोत: अमित शाह का ट्वीट, https://x.com/AmitShah/status/1958141355735007577,)

संजय कुमार के झूठ ने कांग्रेस अभियान को दिया समर्थन, विवाद गहराया

2-2-18.jpeg

नई दिल्ली : सीएसडीएस (सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज) के निदेशक संजय कुमार ने अपने एक झूठे दावे से कांग्रेस के बिहार यात्रा अभियान को समर्थन देकर विवाद को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। 17 अगस्त को राहुल गांधी ने बिहार की यात्रा शुरू की, जिसके साथ ही सोशल मीडिया पर #वोट_चोरी और #राहुल_गांधी_का_पर्दाफाश जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कांग्रेस ने अपने अभियान में विचारक योगेंद्र यादव (@_YogendraYadav) को भी टैग किया। उसी दिन संजय कुमार ने एक पोस्ट में महाराष्ट्र चुनावों के डेटा का गलत विश्लेषण पेश किया, जिसे बाद में उन्होंने झूठ माना और माफी मांगी।

संजय ने दावा किया था कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में भारी कमी आई, जो कांग्रेस के “वोट चोरी” के आरोपों को बल देता था। हालांकि, बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी टीम ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा डेटा में त्रुटि की, जिसके कारण गलत नतीजे निकले। इस गलती के बाद उन्होंने पोस्ट हटा ली और माफी जारी की। फिर भी, इस झूठ ने कांग्रेस के नैरेटिव को शुरूआती बढ़ावा दिया, जिससे चुनाव आयोग (ईसीआई) और भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने इसे कांग्रेस की “झूठी कहानी” करार दिया, जबकि आईसीएसएसआर ने सीएसडीएस को नोटिस जारी कर डेटा हेरफेर की जांच शुरू की। कांग्रेस इसे विपक्ष की रणनीति बता रही है, लेकिन संजय के झूठ स्वीकारने से उनकी और सीएसडीएस की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। यह घटना चुनावी प्रक्रिया पर भरोसे को चुनौती दे रही है।

scroll to top