बिक्कावोलु विनायक मंदिर

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अशोक श्रीमाल

हैदराबाद । भारत के Andhra Pradesh राज्य के बिक्कावोलु गाँव में स्थित भगवान गणेश का एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र मंदिर है। यह स्थान पूर्वी गोदावरी जिले में आता है और राजामहेंद्रवरम (राजामुंदरी) के पास स्थित है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 1200 वर्ष पुराना माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इसका निर्माण 9वीं-10वीं शताब्दी के आसपास हुआ था, जब इस क्षेत्र पर पूर्वी चालुक्य राजवंश का शासन था। उस समय बिक्कावोलु एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र था, जहाँ कई भव्य मंदिरों का निर्माण हुआ था और उन्हीं में से भगवान गणेश का यह मंदिर सबसे प्रसिद्ध माना जाता है।

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थापित भगवान गणेश की लगभग 7 फीट ऊँची विशाल और अद्भुत प्रतिमा है। भक्तों के बीच यह मान्यता बहुत प्रसिद्ध है कि यह मूर्ति हर वर्ष धीरे-धीरे आकार में बढ़ती रहती है। इसी कारण मंदिर के ऊपर स्थायी छत नहीं बनाई गई है, क्योंकि स्थानीय लोगों का विश्वास है कि गणेश जी की प्रतिमा समय के साथ बढ़ती जा रही है। इस प्रतिमा की शिल्पकला प्राचीन दक्षिण भारतीय मंदिर स्थापत्य का सुंदर उदाहरण मानी जाती है।

मंदिर की एक बहुत ही अनोखी और सुंदर परंपरा भी है। यहाँ आने वाले भक्त भगवान गणेश के पास जाकर उनके कान में धीरे-से अपनी मनोकामना बोलते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि विघ्नहर्ता गणेश स्वयं भक्तों की बात सुनते हैं और सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूरी करते हैं। यही कारण है कि दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाएँ लेकर यहाँ दर्शन करने आते हैं।

मंदिर में विशेष रूप से गणेश चतुर्थी के समय बहुत बड़ा उत्सव मनाया जाता है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं, विशेष पूजा, अभिषेक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और पूरे मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया जाता है।

बिक्कावोलु का यह विनायक मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा, भक्ति और मंदिर स्थापत्य कला का एक अद्भुत उदाहरण भी है। यह पवित्र स्थान हमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सनातन श्रद्धा की याद दिलाता है, जहाँ आज भी भक्त अटूट विश्वास के साथ भगवान गणेश से अपने जीवन के विघ्न दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

Releasing List of Attacks on Hindu Festivals, VHP Warned — Do Not Force Hindus to Respond in the Same way

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New Delhi: The Vishva Hindu Parishad (VHP) has strongly condemned the mob lynching of Tarun Khatik, which it alleges was carried out by a group of attackers on the holy festival of Holi.

VHP Central Joint General Secretary Dr. Surendra Jain stated today that a seven-year-old girl had thrown a water balloon at her uncle during Holi celebrations, and a few drops reportedly fell on the clothes of a Muslim woman passing by. The woman’s relatives and other jihadists assaulted Tarun’s parents and uncle, and Tarun himself was brutally attacked with swords, stones, and sticks in a lane in Uttam Nagar area of the national capital Delhi, leading to his death.

He questioned whether the woman was unaware that Holi is a festival of colors where splashes may fall on anyone. He further alleges that the woman’s presence outside during Holi and the sudden appearance of a group of 25–30 armed attackers cannot be a coincidence. The woman, who is the key conspirator, has not yet been arrested and demands her immediate arrest and interrogation.

Across the country, attackers sometimes put women and minors at the forefront of such attacks, in order to avoid legal action, and he says such tactics must be stopped.

Addressing a press conference in Delhi, Dr. Jain stated that the attacks on Hindu festivals and processions are not isolated incidents. He claimed that during this year’s Holi alone, there were more than 11 attacks and that over the past 10 years more than 42 complaints of attacks during Holi have been recorded. He further alleged that in the last decade there have been more than 240 violent attacks during Hindu festivals, including cases where Hindus were surrounded and killed. A list of such incidents has is being herewith.

He further said that hostility towards Hindus is increasing and that the reaction of the Hindu community in Uttam Nagar reflects rising anger. He added that the community will not remain passive and will wait for legal action. He also referred to comments from the Madras High Court in the Ramaswamy Udayar case, suggesting that if one group obstructs the festivals or processions of another group, it must also consider how it would conduct its own religious events where it is in minority.

The VHP also issued a warning to leaders such as Asaduddin Owaisi and Maulana Arshad Madani, along with other radical leaders or their secular allies and said that they should not force the Hindu community to respond in the same manner.

The statement also criticized political leaders, including Rahul Gandhi, for allegedly remaining silent on Tarun’s killing. It claimed that like Tarun, many victims of such incidents come from Scheduled Caste communities and questioned why those who claim to support these communities remained silent.

The VHP welcomed what it described as swift action against some of the accused in the lynching but said that the action is still pending against several others, including the alleged main conspirator.

The organization demands:

1.Strict punishment for the accused and all conspirators, so that others would think many times before committing such acts.
2.Action against religious leaders accused of inciting violence, and it called for a ban on Madrasas, promotes extremism.
3.Formation of investigation commissions by the governments of Delhi and other states to examine the causes of increasing violence and hatred against Hindus and the reasons why perpetrators escaping punishment in most of the cases.

Dr Jain also said that the organization is committed to protect Hindu society and is prepared to take all constitutionally permissible steps to fulfil this goal.

नेपाल में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन और भारत

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दिल्ली । भारत के अहम पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में युवाओं के व्यापक आंदोलन के बाद संपन्न हुए चुनावों के परिणाम आ चुके हैं। काठमांडू के पूर्व मेयर रैपर बालेन शाह का नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनना निश्चित हो चुका है। नेपाल के इतिहास में पहली बार किसी राजनैतिक दल को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ है अतः अब देश में विकास की धारा बहने की आशा भी बलवती है।

नेपाल विगत दो दशकों से राजनैतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था जिसके कारण वहां भ्रष्टाचार चरम पर पहुँच गया था और जनता त्रस्त थी। नेपाल के चुनाव परिणाम बताते हैं कि देश कोई भी हो जनता राजनैतिक अस्थिरता, परिवारवाद व नेताओं व दलों के मध्य बारंबार होने वाले अनैतिक गठबंधनों को पसंद नहीं करती है, उसको जैसे ही अवसर मिलता है वह परंपरागत दलों को हटाकर नया विकल्प चुन लेती है फिर चाहे यह विकल्प अनुभवहीन ही क्यों न हो। नेपाल को पहली बार ओली और प्रचंड की नूरा कुश्ती से स्वतंत्रता मिली है। नेपाल के वामपंथी दलों ने गठबंधन बनाकर स्वयं को जीवित रखने का प्रयास किया था किंतु नेपाल की जनता ने उन्हें पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखाकर बता दिया कि अब वामपंथ की दुनिया उजड़ रही है।
नेपाल की प्रातिनिधि सभा में 275 सदस्य होते हैं जिसमें 164 सदस्य सीधे मतदान के माध्यम से चुने जाते है। इन चुनावों में बालेन शाह के नेतृत्व वाली राष्टीय स्वतंत्र पार्टी 120 सीटों पर विजय प्राप्त कर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है जबकि दशकों तक राज करने वाली नेपाली कांग्रेस को मतदाताओे के आक्रोश का सामना करना पड़ा और वह मात्र 17 सीटो पर ही सिमट कर रह गई । कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी केवल सात -सात सीटों पर ही सिमट कर रह गईं। नेपाल में चुनाव मतपत्र के माध्यम से कराए जाते हैं और वहां इस बार 60 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग कर ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन किया है।

कौन हैं बालेन शाह – रैपर से काठमांडू के मेयर बने बालेन शाह मधेशी समाज के नेता हैं जो पहली बार देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। दस वर्ष पूर्व तक किसी मधेशी नेता का प्रधानमंत्री बनना अकल्पनीय था। मधेशी लोगों की भाषा ,संस्कृति और रहन -सहन भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों से बहुत मिलता है। ये लोग मुख्य रूप से मधेश या तराई क्षेत्र में रहते हैं जो नेपाल और भारत का सीमावर्ती क्षेत्र है। मधेशी समुदाय में मैथिली, भोजपुरी, अवधी और हिंदी जैसी भाषाएं बोलने वाले लोग हैं। लंबे समय तक नेपाल की राजनीति में इन्हें प्रतिनिधित्व और अधिकारों को लेकर संघर्ष करना पड़ा जिसके कारण कई बार अलग मधेश राज्य बनाने की मांग को लेकर तीव्र आंदोलन हुए। अब पहली बार एक मधेशी नेता को वहां का प्रधानमंत्री बनने का अवसर प्राप्त होने जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान बालेन ने स्वयं को मधेश का बेटा बताया था और उनकी पार्टी ने, “अबकी बार बालेन सरकार” नारे के साथ अभियान प्रारंभ किया था। मधेश प्रांत के आठ जिलों की कुल 32सीटों में अधिकतर पर स्वतंत्र पार्टी को भारी सफलता प्राप्त हुई है।

जेन- जी के व्यापक समर्थन से नेपाल के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे बालेन शाह के समक्ष अनेक चुनौतियां भी हैं। नेपाल में भड़के जन आंदोलन के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा युवाओं के लिए रोजगार की भारी कमी, पलायन का और भ्रष्टाचार का था। स्वाभाविक तौर पर जनता इन समस्याओं का समाधान मांगेगी। नेपाल के नए प्रधानमंत्री को विदेश नीति के अतंर्गत भारत और चीन के मध्य सामंजस्य व संतुलन स्थापित करके चलना होगा। भारत को लेकर बालेन कई बार विवादों में रहे हैं। एक बार बालेन शाह ने अपने कार्यालय में ग्रेटर नेपाल का नक्शा लगा लिया था जिसमें भारत के अनेक क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था बाद में विवाद व आलोचना के कारण बालेन को वह नक्शा हटाना पड़ा था । पूर्व प्रधानमंत्री ओली भी इस प्रकार की नादानियां करते रहे हैं और उन्हें भारत से पंगा लेने का पुरस्कार भी वहां की जनता ने दे दिया है। वह आदिपुरूष फिल्म और माता सीता को नेपाल की बेटी बताकर भी भारत के साथ भिड़ गए थे। बालेन को भारत और नेपाल के रोटी-बेटी सम्बन्ध को समझना होगा।

राजनैतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि बालेन शाह भारत का खुलकर विरोध करने की स्थिति में कतई नहीं हैं क्योंकि नेपाल में जिन- जिन लोगों ने भारत के साथ सामरिक चतुराई दिखाने का प्रयास किया है वो नेपथ्य में चले गए हैं। बालेन शाह ने राष्ट्रवाद के नाम पर कई बार भारत से पंगा लिया है और भारत के खिलाफ नैरेटिव खड़ा करने का प्रयास किया है। यद्यपि बालेन शाह ने भारत में ही अपनी पढ़ाई पूरी की किंतु उनका भारत विरोधी दृष्टिकोण कई बार सामने आ चुका है। नए संसद भवन में बने अखंड भारत के मानचित्र पर उन्होंने घोर आपत्ति जताई थी जबकि बालेन ने नेपाल के नक्शे में यूपी, बिहार से लेकर बंगाल तक के अनेक हिस्सों को नेपाल का बता दिया था। बालेन ने भारत ,अमेरिका और चीन के खिलाफ एक पोस्ट लिखा था जिसमें सबसे बड़ा भाग भारत के खिलाफ था, इस पोस्ट पर राजनैतिक विवाद होने पर उन्होंने यह पोस्ट वापस ले ली थी। आदिपुरूष फिल्म के दौरान हुए विवाद के समय उन्होंने अपनी आपत्ति प्रकट की थी और यहां तक धमकी दे डाली थी कि जब तक उनकी आपत्ति का निराकरण नहीं जाता तब तक वह नेपाल की राजधानी काठमांडू व अन्य शहरों मे भारतीय फिल्मों को नहीं चलने देगे। यही कारण है कि भारत नेपाल के घटनाक्रमों पर बराबर नजर बनाए रखे हुए है और वहां की स्थिति पर काफी संतुलित बयान दे रहा है क्योंकि बालेन शाह के साथ भारत का कोई बहुत अच्छा अनुभव नहीं रहा है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी नेपाल की राजनीति को प्रभावित करने के लिए अपनी गतिविधियां लगातार संचालित कर रही है। चुनावों के दौरान भी भारत के सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में आईएसआई ने दंगे फैलाने की साजिशें रची थीं।

इन सबके बाद भी दशकों बाद नेपाल में पूर्ण बहुमत की सरकार आने से एक नई आशा बंधी है कि अब वहां स्थिर विकास हो सकेगा और युवाओं की अपेक्षाएं पूरी हो सकेंगी। बालेन शाह राष्ट्रवादी और मधेशी ब्राह्मण नेता हैं, भारत अपना रुख उनके प्रति सकारात्मक रखेगा क्योंकि बालेन शाह चाहते है कि यदि उन्हें बराबरी का सम्मान दिया गया तो वह प्रथम दृष्टया भारत के साथ ही जाना पसंद करेंगे। नेपाल की नई सरकार को नेपाल का पुनर्निर्माण करना है और उसमें भी युवाओं की आकांक्षा व सपनो को पूरा करना है इसलिए नये शासक को सभी के साथ मिलकर चलना ही होगा।

भारत से उठी मांग, बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक दिवस घोषित करे संयुक्त राष्ट्र

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प्रियंका 

दिल्ली । दुनिया भर में जारी बाल विवाह की समस्या पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत के प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के विधिवेत्ता भुवन ऋभु ने संयुक्त राष्ट्र से बाल विवाह के उन्मूलन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र के कमीशन ऑन द स्टैटस ऑफ वूमन (सीएसडब्ल्यू) के 70वें सत्र के मौके पर एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत में बाल विवाह में उल्लेखनीय कमी आई है, लेकिन आज भी दुनिया में हर तीन सेकेंड में कहीं न कहीं एक बाल विवाह हो रहा है।

बाल विवाह जो कि बच्चों से बलात्कार है, की रोकथाम के लिए वैश्विक स्तर पर जवाबदेही और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने के वास्ते एक समर्पित दिवस की आवश्यकता पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, “भारत ने दिखाया है कि बाल विवाह का अंत संभव है। रोकथाम, संरक्षण, अभियोजन व बच्चों, समुदायों और धर्मगुरुओं की भागीदारी पर आधारित ‘संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज’ के दृष्टिकोण के साथ हमारा देश 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत में तीन वर्षों से भी कम समय में बाल विवाह की दर 23 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत से नीचे आ गई है। बाल विवाह दरअसल एक बच्चे के साथ होने वाले बलात्कार और यौन शोषण से कम नहीं है, जिसे अक्सर संस्कृति या परंपरा की आड़ में छिपा दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र को ‘बाल विवाह उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ की घोषणा करनी चाहिए, ताकि इसके खिलाफ वैश्विक प्रतिबद्धता व जवाबदेही मजबूत हो और दुनिया भर की सरकारें तथा समाज इस अपराध को समाप्त करने के लिए संगठित हों।” कार्यक्रम में मौजूद सिएरा लियोन की प्रथम महिला डॉ. फातिमा मादा बायो, नेपाल की महिला, बाल एवं वरिष्ठ नागरिक मंत्री श्रद्धा श्रेष्ठ एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने बाल विवाह के खात्मे के लिए एक समर्पित अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग का पुरजोर समर्थन किया।

वर्ल्ड लॉ कांग्रेस 2025 में वर्ल्ड जूरिस्ट एसोसिएशन की ओर से ‘मेडल ऑफ ऑनर’ से सम्मानित होने वाले पहले पहले भारतीय अधिवक्ता भुवन ऋभु ने इस कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित किया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने यह कार्यक्रम सिएरा लियोन की प्रथम महिला तथा ऑर्गनाइजेशन ऑफ अफ्रीकन फर्स्ट लेडीज़ फॉर डेवलपमेंट की अध्यक्ष डॉ. फातिमा मादा बायो के कार्यालय के साथ साझेदारी में आयोजित किया था।

कार्यक्रम में नेपाल सरकार की महिला, बाल एवं वरिष्ठ नागरिक मंत्री शारदा श्रेष्ठ; संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के सहायक महासचिव और कार्यक्रम निदेशक पियो स्मिथ; फ्रांस सरकार की मानवाधिकार राजदूत इसाबेल रोम; जर्मनी के उप स्थायी प्रतिनिधि राजदूत थॉमस जाहनाइजेन; अफ्रीकी संघ की ओर से डॉ. एंजेला मार्टिन्स; डोमिनिकन गणराज्य सरकार के राष्ट्रीय बाल एवं किशोर परिषद की कार्यकारी अध्यक्ष लिजिया जेनेट पेरेज पेना; द डिप्लोमैटिक कूरियर की संस्थापक एवं सीईओ एना रोल्ड; यूएन वूमेन की क्षेत्रीय राजदूत और रीजेनरेटिव हब्स की संस्थापक जहा दुकुरेह; इक्वेलिटी नाउ की एंडिंग जेंडर-बेस्ड वायलेंस निदेशक दिव्या श्रीनिवासन और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की जनरल काउंसिल रचना त्यागी सहित कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां शामिल हुईं।

कार्यक्रम में मौजूद मंत्रियों, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों, विधिवेत्ताओं, नागरिक समाज के नेताओं और भुक्तभोगियों के पैरोकारों ने एक स्वर में सदस्य देशों से ‘बाल विवाह समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस की घोषणा की मांग की। उनका कहना था कि इससे बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही को मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि कई देशों में बाल विवाह के खिलाफ सख्त कानूनी ढांचे पहले से मौजूद हैं लेकिन उनके कमजोर क्रियान्वयन के कारण यह प्रथा अब भी जारी है।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के क्षेत्र में कार्य करने वाले नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है जिसके 250 से भी अधिक सहयोगी संगठन 2030 तक भारत से बाल विवाह के खात्मे के लिए 451 जिलों में जमीन पर काम कर रहे हैं। इस नेटवर्क ने सरकारी एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के सहयोग से पिछले तीन वर्षों में भारत में लगभग 500,000 बाल विवाह रुकवाए हैं।

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