अराजक और असभ्य राहुल को संभालने में सबस्टेंटिव मोशन ला कर भाजपा ने अब सही स्टैंड लिया है

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दयानंद पांडेय

लखनऊ : अराजक और असभ्य राहुल गांधी को सबक़ सिखाने के लिए भाजपा ने अब सही स्टैंड लिया है l भाजपा ने लगातार ढील दे कर राहुल गांधी को भस्मासुर बना दिया है l लेकिन आज लोकसभा में सबस्टेंटिव मोशन पेश कर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बड़ा काम किया है l संसदीय राजनीति का जो पतन और पराभव राहुल गांधी के मार्फ़त देश ने देखा है , अति हो गई है l बर्दाश्त से बाहर हो गया है l इस अराजक और असभ्य राहुल गांधी की लोक सभा से सदस्यता छीन लेना बहुत ज़रूरी हो गया है l भविष्य में भी चुनाव न लड़े , यह भी l क्यों कि हर सत्र में संसद को गली के गुंडे की तरह हाईजैक करने वाले राहुल गांधी को संसदीय राजनीति से विदा करना भारतीय लोकतंत्र के हित में है l

यह काम बहुत पहले होना चाहिए था l

दिलचस्प यह कि रोज़ बंदर की तरह इस डाल से उस डाल कूदने वाले राहुल गांधी ने आज फिर गोल बदल लिया l नरवड़े की किताब के बाद , ट्रंप की टैरिफ़ के आगे मोदी का सरेंडर , देश बेच दिया और अब आज शाम घर पहुंचते ही किसान आंदोलन की डाल पर कूद गया यह बंदर l हताशा इतनी बढ़ गई कि मीडिया के सवाल पर आज मीडिया को भाजपाई बता दिया l बौखलाहट की पराकाष्ठा आज देखने लायक़ थी l घर पहुंचते ही , किसान आंदोलन के बाबत वीडियो बना कर रिलीज कर दिया l कहा कि किसानों के लिए लड़ता रहूंगा l

तो अब क्या होगा नरवड़े की किताब का ? क्या होगा मोदी द्वारा ट्रंप के हाथ देश बेच देने की लड़ाई का ?कौन लड़ेगा यह मोर्चे ? क्या पता कल परसों कोई और लड़ाई सामने आ जाए l किसान भी भूल जाए !

कुछ भी हो सकता है l मंकी एफ़र्ट का आनंद ही कुछ और है l जबरिया गले लगना , आंख मारना आदि पुरानी बात हो गई l किसी नई परिघटना का आनंद लेने के लिए प्रतीक्षा कीजिए l

मदारी का बंदर क्या मजा देगा , जो कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत संसद का यह बंदर देता रहता है l जाने क्या खा कर सोनिया गांधी ने इसे पैदा किया है l

सोचिए कि यह राहुल गांधी कल संसद में बजट के विरोध में भाषण देने के लिए खड़ा हुआ l दुनिया भर की बात की l पर बजट पर एक बात नहीं की l यह एक वाक्य भी नहीं बोल पाया कि मैं इस बजट का विरोध करता हूं l मार्शल आर्ट , ट्रंप आदि जाने क्या-क्या l पर बजट की बिजली नहीं जली l

संसद से बाहर निकला तो मीडिया से बात कर रहे रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव और राज्य मंत्री जोशी के साथ लपक कर खड़ा हो गया l यह दोनों लोग बिदक कर जाने लगे तो हाथ पकड़ कर खींचने लगा l कहने लगा मिल कर बात करते हैं l वह लोग इसे हिक़ारत से देखते हुए चले गए l रुके नहीं l राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष बना कर कांग्रेस ने बंदर के हाथ में उस्तरा थमा दिया l संसद इस के लिए वह अदरक है , जिस का स्वाद नहीं जानता यह l पीठासीन अधिकारी क्रमश: जगदंबिका पाल और संध्या राय ने जिस तरह इस राहुल गांधी की हेकड़ी तार-तार की है , इसे डाँट-डपट कर नर्सरी क्लास के बच्चे की तरह ट्रीट किया है , वह खेल नहीं था l सोचिए कि संध्या राय दूसरी बार की सांसद हैं l और उम्र में भी कम हैं l और यह नेता प्रतिपक्ष हो कर भी उन से दब रहा है तो सिर्फ़ इस लिए कि संध्या राय संसदीय परंपरा और गरिमा इस से ज़्यादा जानती हैं l बेहतर जानती हैं l और यह शून्य है l दरिद्र है l

एक अंतिम बात यह कि सबस्टेंटिव मोशन मातलब भस्मासुर का हाथ, भस्मासुर के सिर रखवाने की रणनीति है यह l एक तीर से अनेक निशाने l समझ लीजिए कि राहुल गांधी की अराजकता और असभ्यता का पानी देश ही नहीं , भाजपा और मोदी की नाक से भी ऊपर चला गया है l यह सबस्टेंटिव मोशन कोई रूटीन मोशन नहीं है l मरो या मार दो का मोड़ है यह l

इस सबस्टेंटिव मोशन के लोकसभा में पारित होने पर राहुल गांधी जेल नहीं जाएगा l बस लोकसभा की सदस्यता जाएगी और फिर कभी चुनाव नहीं लड़ सकेगा l पूरी तरह बधिया !

जनता की सहानुभूति भी पाने लायक़ नहीं रह पाएगा l

वैक्सीन मैत्री

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प्रशांत पोळ

अहमदाबाद : कोरोना ने, पूरे विश्व में वैक्सीन का महत्व फिर से अधोरेखित (underline) किया। कोरोना की महामारी को रोकना, वैक्सीन के बगैर संभव ही नहीं था। भारत ने प्रारंभ से ही इस कोरोना महामारी की वैक्सीन विकसित करने का निश्चय प्रकट किया था। लॉकडाउन के दूसरे चरण में ही, प्रधानमंत्री मोदी जी ने, 14 अप्रैल 2020 को भारत के युवा वैज्ञानिकों से वैक्सीन विकसित करने का आवाहन किया था। देश में इसके प्रयास प्रारंभ हो गए थे। कई विकसित देशों ने भारत की इस पहल को गंभीरता से नहीं लिया। कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने इस घोषणा की खिल्ली भी उडाई।

वैसे भारत की, इसके पहले की स्थिति खिल्ली उड़ाने जैसी ही थी। हम मान कर चल रहे थे की वैक्सीन बनाने की हमारी क्षमता ही नहीं हैं।

पोलियो वैक्सीन का ही उदाहरण लेते हैं।

विश्व में पहला सफल पोलियो वैक्सीन बना, 1955 में, Jonas Salk द्वारा। पहली मुंह से दी जाने वाली वैक्सीन, Albert Sabin ने बनाई, 1961 में। उन दिनों भारत ने यह मान लिया था, कि किसी रोग या महामारी पर वैक्सीन खोज कर बनाना तो बहुत दूर की बात, पर दूसरे किसी ने खोजा हुआ वैक्सीन बनाने की भी हमारी क्षमता नहीं हैं। इसलिए हम यह सारे वैक्सीन, अमेरिका या यूरोप से आयात करते थे। विश्व में पोलियो के वैक्सीन की खोज के लगभग 35 वर्षों के बाद, भारत ने इस फार्मूले पर वैक्सीन बनाना प्रारंभ किया था।

आप गूगल में ढूंढेंगे, तो आपको पता चलेगा की वैक्सीन की खोज एडवर्ड जेनर ने वर्ष 1796 में की। किंतु एडवर्ड जेनर को वैक्सीन की कल्पना और प्रेरणा कहां से मिली यह बात सामने नहीं आती। डेविड अर्नाल्ड ने 1993 में एक सुंदर और महत्वपूर्ण पुस्तक लिखी हैं – Colonizing the Body : State, Medicine and Epidemic Disease in Nineteenth Century India. *इस पुस्तक में डेविड अर्नाल्ड ने यह सप्रमाण सिद्ध किया है कि वैक्सीनेशन की पद्धति भारत में सैकड़ो वर्षों से चली आ रही थी। भारतीय समाज के रचयिता पुरखों ने, इस पद्धति को बड़े ही चतुराई से भारत की धार्मिक परंपराओं से जोड़ दिया। ‘शीतला माता व्रत’ यह मूलतः वैक्सीनेशन की पद्धती थी, जो बच्चों में माता (अर्थात चिकन पॉक्स) को रोकती थी। इसी पद्धति को ओलिवर कोल्ट ने पत्रों के माध्यम से, तो डॉक्टर जॉन हॉलवेल ने भाषणों के माध्यम से, इंग्लैंड में पहुंचाया। इसी से प्रेरणा लेकर, एडवर्ड जेनर ने वैक्सीन बनाया।*

अर्थात, किसी जमाने में विश्व में महामारी की रोकथाम के लिए सबसे पहले वैक्सीन बनाने वाले हम, स्वतंत्रता के बाद सब कुछ भूल गए थे। हम हमारी शक्ति को पहचानने से इन्कार करते थे। इस हीन भावना से भारत को बाहर निकाला, कोरोना काल में मोदी सरकार ने।

दिनांक 24 नवंबर 2020 को प्रधानमंत्री मोदी जी ने, देश के आठ सबसे अधिक कोरोना प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। इस बैठक में उन्होंने कोरोना वैक्सीन पर देशव्यापी योजना की बात की। उन्होंने राज्यों से वैक्सीन वितरण पर लॉजिस्टिक के साथ प्लान देने की भी बात की।

इस बीच हमारे वैज्ञानिक चुपचाप काम कर रहे थे। इस वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल्स भी प्रारंभ हुए।

अंततः शनिवार, 16 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत की स्वदेशी वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “हमारे सैकड़ो साथी ऐसे भी हैं, जो कभी घर वापस नहीं लौटे। उन्होंने एक-एक जीवन बचाने के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी। इसलिए आज कोरोना का पहला टीका, स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों को लगाकर, एक तरह से समाज अपना ऋण चुका रहा हैं।”

यह कोवैक्सीन, हैदराबाद की भारत बायोटेक कंपनी ने ‘भारतीय चिकित्सा अनुसंधान संस्थान’ (ICMR) के सहयोग से विकसित किया था। वही पुणे की सिरम इंस्टीट्यूट, एस्ट्रोजेनिका कंपनी की ‘कोविडशील्ड’ वैक्सीन बना रही थी। इन वैक्सीन के भारत में बनने के कारण, भारत में वैक्सीन के टीकाकरण का कार्यक्रम तीव्र गति से चलाया गया। विश्व के पहले कुछ देशों में भारत का यह टीकाकरण अभियान शामिल था।

*भारत, कोरोना के वैक्सीन का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक देश रहा। विश्व के कुल वैक्सीन का 60% उत्पादन भारत में हुआ।*

भारत ने कोविड के इस कठिन समय में, ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की संकल्पना ‘वैक्सीन मैत्री’ अभियान के द्वारा प्रत्यक्ष में उतारी। न केवल अपने नागरिकों के लिए वैक्सीन का निर्माण किया, बल्कि विश्व के 100 से ज्यादा देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई। इसका स्वरूप व्यावसायिक आपूर्ति (Commercial Supply) के रूप में तो था ही, पर छोटे देशों को भारत ने दान (Grant) के रूप में भी वैक्सीन के टीके उपलब्ध कराए।

विश्व में इसका जबरदस्त सकारात्मक परिणाम हुआ। जब अधिकांश विकसित देश अपने लिए वैक्सीन जमा कर रहे थे (vaccine hoarding), तब भारत गरीब और विकासशील देशों की सहायता कर रहा था। भूटान यह भारत से वैक्सीन प्राप्त करने वाला पहला देश था। 20 जनवरी 2021 को भारत ने भूटान को वैक्सीन की पहली खेप भेजी। भूटान के प्रधानमंत्री डॉ. लोटे शेरिंग ने कहा कि, “भारत ने न केवल अपने मित्र भूटान का साथ दिया, वरन् मानवता की मिसाल पेश की। भारत ने भूटान को जीवनदान दिया।”

इसी प्रकार की भावनाएं नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव्स, श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों ने व्यक्त की। मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद्र जगन्नाथ ने वैक्सीन की पहली खेप मिलने पर कहा, “भारत ने केवल दवा नहीं भेजी, बल्कि उम्मीद भेजी हैं…” ब्राजील के राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए जो ट्वीट किया, वह जबरदस्त वायरल हुआ। उन्होंने ट्वीट के साथ, ‘हनुमान जी संजीवनी बूटी ला रहे हैं’ यह चित्र जोड़ा और लिखा, “धन्यवाद भारत, हम इसे वैक्सीन संजीवनी कहते हैं।”

डोमिनिका के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट भावूक होकर बोले, “भारत ने भगवान का काम किया हैं। हमारी छोटी सी आबादी की परवाह कि, जब हमें इसकी सबसे अधिक जरूरत थी।” संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने कहा, “भारत की वैक्सीन उत्पादन क्षमता, विश्व की सबसे बड़ी संपत्ति हैं।” कई अमेरिकी समाचार पत्रों ने भारत को ‘Moral Leadership in the Global South’ कहा।

इसका प्रभाव लंबे समय तक रहा। 21 मई 2023 को प्रधानमंत्री मोदी, ‘भारत प्रशांत द्वीप समूह सहयोग’ (FIPIC) के शिखर सम्मेलन के लिए पापुआ न्यू गिनी पहुंचे। हवाई तल पर उनकी अगवानी करने वहां के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे उपस्थित थे। जैसे ही मोदी जी विमान से उतरे, जेम्स मारापे ने मोदी के पांव छुए। मोदी जी ने उन्हें गले लगा लिया।

*यह अभूतपूर्व घटना थी। विश्व के किसी भी राष्ट्र प्रमुख ने, दूसरे राष्ट्र प्रमुख का पांव छूकर सार्वजनिक रूप से अभिवादन, इससे पहले कभी नहीं किया था। यह सम्मान इसलिए था, कारण भारत ने अत्यंत मैत्रीपूर्ण भाव से, कोरोना के कठिन कालखंड में पापुआ न्यू गिनी की मदद की थी।*

भारत के इस वैक्सीन मैत्री अभियान ने, भारत को विश्व की औषधि शाला (फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड) के रूप में प्रतिष्ठित किया।

*संक्षेप में, भारत को अपनी विस्मृत क्षमता का, विस्मृत शक्ति का पुर्नस्मरण हुआ। अपने अंदर के ऊर्जा की अनुभूति हुई। और फिर भारत ने, मात्र आठ – दस वर्षों में ही ऐसा कर दिखाया, जो हम स्वतंत्रता के बाद, साठ – पैंसठ वर्ष भी नहीं कर सके थे..!*

_(सोमवार, 16 फरवरी को प्रकाशित *‘इंडिया से भारत : एक प्रवास’* इस पुस्तक के अंश। चित्र सौजन्य – टाईम्स ऑफ इंडिया)

योगी सरकार ने प्रस्तुत किया समग्र विकास का बजट

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 2027 में संभावित विधानसभा चुनावों से पूर्व 9 लाख करोड़ रु का अब तक का सबसे बड़ा बजट विधानसभा में प्रस्तुत किया है। सत्तापक्ष, विशेषज्ञ और मीडिया भी इस बजट की सराहना कर रहे हैं। परंपरागत रूप से विपक्ष इसकी आलोचना करते हुए इसे योगी सरकार का अंतिम बजट कह रहा है। योगीराज के इस बजट का आकार भारत के पड़ोसी राष्ट्रों पाकिस्तान ओैर बांग्लादेश के बजट से भी कई गुना बड़ा है। यूपी में योगी बजट की एक और विशेष बात है कि किसी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में लगातार 10वां बजट पेश हुआ हो ऐसा पहली बार हुआ है। अभी तक किसी भी मुख्यमंत्री को लगातार इतने बजट प्रस्तुत करने का सौभाग्य नहीं प्राप्त हुआ है।

यूपी के बजट में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट की छाप दिख रही है। योगी सरकार का चुनावी वर्ष के पूर्व का यह बजट प्रदेश को समस्त क्षेत्र में विकसित बनाने का आश्वासन देने वाला बजट है, समाज को संतुष्टि प्रदान करने वाला बजटहै । बजट में समाज के चार स्तंभों युवा, किसान, गरीब व महिलाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। बजट में सुशिक्षित समाज, स्वस्थ समाज, नारी सशक्तीकरण ,जल सरंक्षण, पर्यावरण संरक्षण पर पर्याप्त धन आबंटित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि यह बजट नारी शक्ति, युवावर्ग, किसान, तथा वंचित वर्ग के उत्थान व खुशहाली को समर्पित है। यह विश्वस्तरीय अवस्थापना सुविधाएं, उत्कृष्ट निवेश का वतावरण, नारी समृद्धि के लिए अभूतपूर्व प्रयास, युवाओं को अद्वितीय अवसर, तकनीक संग रोजगार सृजन वाला बहुआयामी बजट है। योगी सरकार प्रदेश को देश का ग्रोथ इंजन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और यह बजट उसका प्रमाण है।
सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट होने के बाड भी बजट में राजकोषीय अनुशासन पर बल दिया गया है और आधुनिकता पर भी ध्यान दिया गया है। सरकार लगातार बजट का आकार बड़ा करके प्रदेश के आर्थिक उन्नयन के लिए नई रणनीतियों के साथ अपनी व्यूह रचना को आगे बढ़ा रही है। महत्वपूर्ण बात है कि आइटी एवं इलेक्ट्रानिक्स क्षेत्र के बजट में 76 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, कृषि के लिए 20 प्रतिशत सिंचाई एवं जल संसाधन के लिए विगत वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था की गई है। ग्राम पंचायतों के लिए भी सरकार ने खजाना खोल दिया है ओैर इस बार उनके लिए बजट में 67 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पूर्व त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव भी संभावित हैं जिनके कारण सरकार ने नई मांगो के अनुरूप सबसे अधिक 10,695 करोड़ रु की धनराशि पंचायती राज विभाग को आवंटित की है। इस वर्ष के बजट में कई नए क्षेत्रों का सृजन किया गया है व धन आवंटित कर उन्हे पोषित करने का प्रयास किया गया है। एआई तकनीक तथा डाटा सेंटर के साथ औद्योगिक विकास पर बल दिया गया है। एमएसएमई पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। हर बार की तरह एक्सप्रेस वे योजनाओं को भी धन आवंटित कर विकास की गंगा बहाने पर ध्यान दिया गया है। बजट में ”एक जिला एक उत्पाद” व “एक जिला एक व्यंजन” जैसी योजनाओं को प्राथमिकता दी गई हैं। विकास को गति देने के लिए हर जिले व क्षेत्र का ध्यान रखा गया है।

पर्यटन के माध्यम से भी प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने व युवाओं के लिए नये रोजगार सृजन पर बल दिया गया है। बजट को लेकर सरकारी पक्ष का जोरदार दावा है कि नए बजट से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलने जा रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया है। बजट के माध्यम से सरकार ने किसानों को साधने के लिए बजट में बीज से बाजार तक की विस्तृत योजना के साथ धन का खजाना खोल दिया है। सरकार का जोर फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता पर तो है ही साथ ही वो किसानों को उद्यम, प्रसंस्करण और बाजार से भी जोड़ना चाहती है। प्रदेश के बजट में पशुधन एवं दुग्ध विकास को भी स्थान देते हुए निराश्रित गोवंश के लिए व्यवस्था की गई है। प्रदेश में 220 नई दुग्ध समितियां गठित करने की घोषणा की गई है। विकास कार्यों के लिए बजट में 19.5 प्रतिशत पूंजीगत परिव्यय का प्रावधान किया गया है जो आधारभूत ढांचे, औद्योगिक विकास, सड़क, ऊर्जा और शहरी ग्रामीण अधोसंरचना को गति प्रदान करेगा, इससे सम्बंधित 43.5 हजार करोड़ रु की नई योजनाएं बजट में आवंटित की गई हैं।
बजट में बताया गया है कि प्रदेश में हो रहे बदलावों के अनुसार किस प्रकार राजस्व जुटाने में एआई तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, देश में आबकारी निर्यात नीति तैयार करने वाला पहला राज्य बना है । देश के मोबाइल निर्माण सेक्टर में 65 प्रतिशत मोबाइल यूपी में बन रहे हैं। 44.74 हजार करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात से यूपी देश की ताकत बन चुका है। भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार तहसीलों के लिए योजना बनाई गई है ओैर शिक्षा पर खर्च बढ़ाया गया है। योगी सरकार ने इस बजट में भाजपा शासित अन्य राज्यों की कई अच्छी विकास योजनाओं को भी समाहित करने का सफल प्रयास किया है, जिसमें राजस्थान सरकार द्वारा चलाई जा रही स्कूटी योजना एक प्रमुख उदाहरण है।

प्रदेश के लघु उद्यमी बजट से खुश नजर आ रहे हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि बजट में हस्तकरघा और अन्य योजनाओं को काफी धन मिला है। महिलाएं व युवा भी बजट का अपने अपने अनुसार स्वागत कर रहे हैं । बजट से कोई निराश दिख रहा है तो वो विरोधी दल ही हैं।

युवा प्रतिभाओं को मंच देगा – आकाशवाणी – ‘युववाणी’ कार्यक्रम के लिए आवेदन 1 से 28 फरवरी 2026 तक

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संतोष द्विवेदी मनुज

दिल्ली। आकाशवाणी दिल्ली द्वारा युवाओं को प्रसारण क्षेत्र से जोड़ने के उद्देश्य से प्रतिष्ठित कार्यक्रम “युववाणी” के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक एवं योग्य अभ्यर्थी *1 फरवरी से 28 फरवरी* तक आवेदन प्रपत्र भर सकते हैं। आवेदन फॉर्म प्रसारण भवन, कमरा संख्या 37 से प्राप्त किए जा सकते हैं।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आकाशवाणी के मंच पर आवश्यकता अनुसार अपनी प्रस्तुति देने तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करना है, ताकि वे प्रसारण जगत से जुड़कर अपनी प्रतिभा को व्यापक मंच दे सकें।

अर्हता:
अभ्यर्थी 12वीं (इंटरमीडिएट) उत्तीर्ण हो।
आयु 18 वर्ष से कम तथा 30 वर्ष से अधिक न हो।
हिंदी एवं अंग्रेज़ी भाषा का अच्छा ज्ञान हो।
प्रसारण कार्य में अभिरुचि रखता हो।

चयन प्रक्रिया: उम्मीदवारों का चयन ऑडिशन (स्वर परीक्षा) के माध्यम से किया जाएगा। यह स्पष्ट किया जाता है कि यह प्रक्रिया किसी रोजगार हेतु नहीं है। आवश्यकता के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों को जब जैसी आवश्यकता हो के आधार पर असाइनमेंट प्रदान किए जाएंगे।

आकाशवाणी के अन्य कार्यक्रमों की तरह यह पहल भी दिल्ली-एनसीआर के युवाओं के लिए अपनी रचनात्मकता अभिव्यक्त करने का एक सशक्त मंच सिद्ध होगी।

इच्छुक एवं योग्य युवा निर्धारित तिथियों के भीतर आवेदन कर इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं।

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