शांति की जीत: भारत का युद्धविराम और व्यावहारिकता की शुरुआत

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दिल्ली। भारत और पाकिस्तान की सीमाओं पर हाल ही में हुआ युद्धविराम (सीज़फायर) दक्षिण एशिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण क्षण है, जो शांति, व्यावहारिकता और समझदारी की जीत का प्रतीक है।

यह सफलता अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की व्यावसायिक सूझबूझ से संभव हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस मौके पर अपनी ताकत और उदारता दिखाई, विकास और वैश्विक सम्मान के लिए जरूरी शांति प्रयासों को अपनाया। पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर जोरदार हमला करके भारत ने अपनी सैन्य ताकत साबित की। फिर भी, युद्धविराम स्वीकार कर भारत ने गांधीवादी भावना दिखाई, ताकत की स्थिति से पीछे हटकर दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता दी।

लंबे समय तक युद्ध का खतरा मंडरा रहा था, जिसमें युद्ध-उन्मादी लोग और रिटायर्ड जनरल, अपने सुरक्षित घरों से, तनाव बढ़ाने की वकालत कर रहे थे। उनकी बातों को टीवी एंकर्स, जैसे अर्नब गोस्वामी ने और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, जिससे समाज में बंटवारा और आर्थिक प्रगति को नुकसान हो सकता था। ऐसी तेज़ आवाज़ वाली बकवास ने सच को छिपा दिया: युद्ध दोनों पक्षों को तबाह करता है, अर्थव्यवस्थाओं को बर्बाद करता है और लोगों को कष्ट देता है।

लंबा टकराव चीन को अपनी सैन्य ताकत दिखाने का मौका देता, जिससे उसका क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ता। सबसे डरावना था पाकिस्तान का अंतिम हथियार के रूप में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल, जो पूरे उपमहाद्वीप के लिए खतरा था।

शुक्र है, समझदारी जीती, जिसमें ट्रम्प की व्यावसायिक बुद्धि और मोदी की रणनीतिक दूरदर्शिता की बड़ी भूमिका रही।

शुरू में पाकिस्तान के युद्धविराम प्रस्ताव पर भारत के जवाब से कुछ लोग नाराज़ और निराश थे। लेकिन धीरे-धीरे लोग मोदी के शांति के हाथ मिलाने के फैसले की समझदारी देखने लगे।

यह युद्धविराम न केवल जान-माल की हानि रोकता है, बल्कि भारत की आर्थिक प्रगति को भी सुरक्षित करता है, जो लाखों लोगों को गरीबी और अभाव से मुक्ति दिलाने के लिए जरूरी है। भारत के लोग, जो लंबे समय से अविकास की बेड़ियों में जकड़े हैं, शांति के लाभ—बेहतर स्कूल, अस्पताल और अवसर—के हकदार हैं, न कि युद्ध की तबाही के।

भारतीय नेतृत्व के इस स्थिति को संभालने का तरीका तारीफ के काबिल है। पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नष्ट करके भारत ने साफ संदेश दिया: वह अपनी संप्रभुता (आज़ादी) पर कोई समझौता नहीं करेगा। फिर भी, युद्धविराम स्वीकार कर मोदी ने कूटनीतिक जीत हासिल की, भारत को एक परिपक्व वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया। सोमवार को जब दोनों देशों के सेना प्रमुख मिलेंगे, भारत मजबूत स्थिति में होगा और अपनी शर्तें मनवाने की स्थिति में होगा, जबकि सभी विकल्प खुले रहेंगे। सैन्य ताकत और कूटनीतिक संयम का यह मिश्रण मोदी की टीम की योग्यता को दर्शाता है, जिसके लिए उन्हें पूरे अंक मिलते हैं।

भारत में दिखी एकता इस जीत को और मजबूत करती है। ओवैसी के भाषणों से लेकर चेन्नई में स्टालिन के नेतृत्व में एकता मार्च तक, देश सरकार के प्रयासों के साथ एकजुट हुआ। मुस्लिम समूहों और विपक्षी दलों ने मतभेद भुलाकर समर्थन दिया, जिससे देश में अद्भुत एकता दिखी।
यह युद्धविराम कमजोरी नहीं, बल्कि भारत के सशस्त्र बलों पर भरोसे और शांति के प्रति प्रतिबद्धता का सबूत है। जैसे-जैसे धूल बैठती है, संदेश साफ है: भारत एकजुट और ऊंचा खड़ा है, तैयार है एक ऐसे भविष्य को आकार देने के लिए जहां विकास, न कि विनाश, उसकी पहचान हो।

क्यों भारत से चिढ़ती है पश्चिमी दुनिया!!

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इंडो-पाक तनाव की धधकती पृष्ठभूमि में, पश्चिमी देशों की भारत-विरोधी मानसिकता अब कूटनीतिक मतभेद से कहीं आगे, न्याय और तर्क के साथ सरासर विश्वासघात में तब्दील हो गई है। एक जीवंत लोकतंत्र और दशकों से आतंकवाद का शिकार रहा भारत, को पाकिस्तान जैसे राष्ट्र के समकक्ष खड़ा करना – जिसका इतिहास जिहादी तत्वों को पोषित करने का रहा है – एक घोर अन्याय है। यह तटस्थता नहीं, बल्कि शक्ति, पूर्वाग्रह और भारत के तेजी से बढ़ते कद को लेकर पश्चिम की बेचैनी का स्पष्ट प्रदर्शन है।

ट्रंप प्रशासन के हालिया पैंतरेबाजी इसका ज्वलंत उदाहरण है। एक पल “हमें इस संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं” का राग अलापना, और अगले ही पल दक्षिण एशिया में शांति के स्वघोषित ठेकेदार की तरह हास्यास्पद युद्धविराम प्रस्ताव थोपना – यह कोई संयोग नहीं है। यह एक पुरानी अमेरिकी नीति का हिस्सा है, जिसके तहत हर प्रशासन ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर की सहायता दी है, बावजूद इसके कि वह आतंकवादियों को सुरक्षित आश्रय और प्रशिक्षण अड्डे मुहैया कराता रहा है।

सवाल उठता है, क्यों? क्योंकि पाकिस्तान जैसे सत्तावादी शासन को धमकाना, खरीदना और अपने उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करना आसान है। जबकि भारत, अपनी खुली और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ, सिद्धांतों पर अडिग रहता है और किसी की कठपुतली बनने से इनकार करता है। शायद यही बात पश्चिम को खटकती है।

पश्चिमी मीडिया की भूमिका भी निंदनीय है। प्रिंट हो या इलेक्ट्रॉनिक, अधिकांश रिपोर्टिंग पाकिस्तान की ओर झुकी हुई प्रतीत होती है। पाकिस्तानी डायस्पोरा द्वारा लिखे गए लेख जो अमेरिका के अखबारों में प्रकाशित होते रहते हैं, अक्सर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को अनदेखा करते हुए भारत की आत्मरक्षात्मक कार्रवाइयों को ‘आक्रामकता’ करार देते हैं। यह मात्र लापरवाही नहीं, बल्कि भारत और पाकिस्तान को एक ही तराजू पर तौलने की एक सोची-समझी साजिश लगती है। भारत की छवि धूमिल करने का यह अभियान – चाहे वह झूठे नैरेटिव गढ़ना हो या चयनात्मक प्रतिक्रियाओं को उजागर करना – दर्शाता है कि पश्चिम को एक ऐसे राष्ट्र से परेशानी है जो उनके द्वारा निर्धारित ‘स्क्रिप्ट’ का पालन नहीं करता। हार्वर्ड और कैंब्रिज टाइप यूनिवर्सिटीज पर जेहादियों का कब्जा हो चुका है जो डेली सच्चाई का कत्ल करते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य का प्रश्न विचारणीय है: “क्या इसके पीछे सिर्फ भू-राजनीति ही कारण है? शायद नहीं। पाकिस्तान एक मुस्लिम-बहुल देश है, जबकि भारत हिंदू-बहुल। कहीं न कहीं एक सांस्कृतिक असहजता भी है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है, लेकिन महसूस किया जा सकता है।”

जनविचारक प्रो. पारसनाथ चौधरी इस बात को और विस्तार देते हैं: “हिंदू धर्म, जिसकी नींव बहस, विविधता और योग, ध्यान और शाकाहार जैसी जीवन पद्धतियों पर टिकी है, वह पश्चिम की यहूदी-ईसाई या धर्मनिरपेक्ष सोच में आसानी से फिट नहीं बैठता। यह केवल एक धर्म नहीं, बल्कि एक जीवन जीने का तरीका है, जो लचीला और विचारों से समृद्ध है। भारत की प्राचीन गणित से लेकर आधुनिक आईटी तक की उपलब्धियां, पश्चिम की उस पुरानी धारणा को चुनौती देती हैं जो भारत को मात्र एक रहस्यमय और पिछड़ा देश मानती थी।”

अब भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की बात करते हैं। भारत अपने स्वयं के मिसाइल, लड़ाकू विमान और नौसेना प्रणालियाँ विकसित कर रहा है – जिसने पश्चिमी हथियार लॉबी की नींद उड़ा दी है। लोक स्वर संस्था के अध्यक्ष राजीव गुप्ता का कहना है, “अमेरिका और यूरोप, जो अब तक भारत को एक बड़े खरीदार के रूप में देखते थे, अब एक ऐसे प्रतिद्वंद्वी को देख रहे हैं जो वैश्विक शक्ति के समीकरणों को बदल रहा है।”

एक आत्मनिर्भर भारत न केवल उनके मुनाफे के लिए खतरा है, बल्कि उनके नियंत्रण की मानसिकता के लिए भी एक चुनौती है। मौजूदा संघर्ष में भारत ने अपनी श्रेष्ठता फिर से साबित की है। हमारे स्वदेशी हथियार, मिसाइलें, ब्रह्मोस ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। आज देश में इतना आत्मविश्वास है कि भारत अपने सहयोगी राष्ट्रों के साथ मिलकर दुश्मन को धूल चटा सकता है।

पश्चिम का भारत के साथ यह प्रेम-घृणा का संबंध एक बुनियादी सत्य पर टिका है: भारत की स्वतंत्र सोच – राजनीतिक, सांस्कृतिक और अब सैन्य क्षेत्र में – उस विश्व व्यवस्था को हिला रही है जो स्थापित मानदंडों और प्रभुत्वों पर आधारित है। भारत को पाकिस्तान के बराबर आंकने का प्रयास एक विफल रणनीति है – भारत निर्भीक रूप से हिंदू है, और तेजी से भविष्य की ओर अग्रसर है।

सामाजिक कार्यकर्ता मुक्ता स्पष्ट रूप से कहती हैं, “पश्चिम शायद इस भारत को स्वीकार न कर पाए, लेकिन भारत को अब उनकी स्वीकृति या अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।” अब समय आ गया है कि दुनिया इस वास्तविकता को समझे – और पश्चिम खुद को आइने में देखे।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आज राष्ट्र के नाम संबोधन

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प्रिय देशवासियों,
नमस्कार!

हम सभी ने बीते दिनों में देश का सामर्थ्य और उसका संयम दोनों देखा है। मैं सबसे पहले भारत की पराक्रमी सेनाओं को, सशस्त्र बलों को, हमारी खुफिया एजेंसियों को, हमारे वैज्ञानिकों को, हर भारतवासी की तरफ से सैल्यूट करता हूं। हमारे वीर सैनिकों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए असीम शौर्य का प्रदर्शन किया। मैं उनकी वीरता को, उनके साहस को, उनके पराक्रम को, आज समर्पित करता हूं- हमारे देश की हर माता को, देश की हर बहन को, और देश की हर बेटी को, ये पराक्रम समर्पित करता हूं।

साथियों,
22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों ने जो बर्बरता दिखाई थी, उसने देश और दुनिया को झकझोर दिया था। छुट्टियां मना रहे निर्दोष-मासूम नागरिकों को धर्म पूछकर, उनके परिवार के सामने, उनके बच्चों के सामने, बेरहमी से मार डालना, ये आतंक का बहुत विभत्स चेहरा था, क्रूरता थी। ये देश के सद्भाव को तोड़ने की घिनौनी कोशिश भी थी। मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से ये पीड़ा बहुत बड़ी थी। इस आतंकी हमले के बाद सारा राष्ट्र, हर नागरिक, हर समाज, हर वर्ग, हर राजनीतिक दल, एक स्वर में, आतंक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए उठ खड़ा हुआ। हमने आतंकवादियों को मिट्टी में मिलाने के लिए भारत की सेनाओं को पूरी छूट दे दी। और आज हर आतंकी, आतंक का हर संगठन जान चुका है कि हमारी बहनों-बेटियों के माथे से सिंदूर हटाने का अंजाम क्या होता है।

साथियों,
‘ऑपरेशन सिंदूर’ ये सिर्फ नाम नहीं है, ये देश के कोटि-कोटि लोगों की भावनाओं का प्रतिबिंब है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ न्याय की अखंड प्रतिज्ञा है। 6 मई की देर रात, 7 मई की सुबह, पूरी दुनिया ने इस प्रतिज्ञा को परिणाम में बदलते देखा है। भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान में आतंक के ठिकानों पर, उनके ट्रेनिंग सेंटर्स पर सटीक प्रहार किया। आतंकियों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि भारत इतना बड़ा फैसला ले सकता है। लेकिन जब देश एकजुट होता है, Nation First की भावना से भरा होता है, राष्ट्र सर्वोपरि होता है, तो फौलादी फैसले लिए जाते हैं, परिणाम लाकर दिखाए जाते हैं।

जब पाकिस्तान में आतंक के अड्डों पर भारत की मिसाइलों ने हमला बोला, भारत के ड्रोन्स ने हमला बोला, तो आतंकी संगठनों की इमारतें ही नहीं, बल्कि उनका हौसला भी थर्रा गया। बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकाने, एक प्रकार से ग्लोबल टैररिज्म की यूनिवर्सटीज रही हैं। दुनिया में कहीं पर भी जो बड़े आतंकी हमले हुए हैं, चाहे नाइन इलेवन हो, चाहे लंदन ट्यूब बॉम्बिंग्स हो, या फिर भारत में दशकों में जो बड़े-बड़े आतंकी हमले हुए हैं, उनके तार कहीं ना कहीं आतंक के इन्हीं ठिकानों से जुड़ते रहे हैं। आतंकियों ने हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा था, इसलिए भारत ने आतंक के ये हेडक्वार्ट्स उजाड़ दिए। भारत के इन हमलों में 100 से अधिक खूंखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा गया है। आतंक के बहुत सारे आका, बीते ढाई-तीन दशकों से खुलेआम पाकिस्तान में घूम रहे थे, जो भारत के खिलाफ साजिशें करते थे, उन्हें भारत ने एक झटके में खत्म कर दिया।

साथियों,
भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तान घोर निराशा में घिर गया था, हताशा में घिर गया था, बौखला गया था, और इसी बौखलाहट में उसने एक और दुस्साहस किया। आतंक पर भारत की कार्रवाई का साथ देने के बजाय पाकिस्तान ने भारत पर ही हमला करना शुरू कर दिया। पाकिस्तान ने हमारे स्कूलों-कॉलेजों को, गुरुद्वारों को, मंदिरों को, सामान्य नागरिकों के घरों को निशाना बनाया, पाकिस्तान ने हमारे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन इसमें भी पाकिस्तान खुद बेनकाब हो गया।

दुनिया ने देखा कि कैसे पाकिस्तान के ड्रोन्स और पाकिस्तान की मिसाइलें, भारत के सामने तिनके की तरह बिखर गईं। भारत के सशक्त एयर डिफेंस सिस्टम ने, उन्हें आसमान में ही नष्ट कर दिया। पाकिस्तान की तैयारी सीमा पर वार की थी, लेकिन भारत ने पाकिस्तान के सीने पर वार कर दिया। भारत के ड्रोन्स, भारत की मिसाइलों ने सटीकता के साथ हमला किया। पाकिस्तानी वायुसेना के उन एयरबेस को नुकसान पहुंचाया, जिस पर पाकिस्तान को बहुत घमंड था। भारत ने पहले तीन दिनों में ही पाकिस्तान को इतना तबाह कर दिया, जिसका उसे अंदाजा भी नहीं था।

इसलिए, भारत की आक्रामक कार्रवाई के बाद, पाकिस्तान बचने के रास्ते खोजने लगा। पाकिस्तान, दुनिया भर में तनाव कम करने की गुहार लगा रहा था। और बुरी तरह पिटने के बाद इसी मजबूरी में 10 मई की दोपहर को पाकिस्तानी सेना ने हमारे DGMO को संपर्क किया। तब तक हम आतंकवाद के इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर तबाह कर चुके थे, आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया था, पाकिस्तान के सीने में बसाए गए आतंक के अड्डों को हमने खंडहर बना दिया था, इसलिए, जब पाकिस्तान की तरफ से गुहार लगाई गई, पाकिस्तान की तरफ से जब ये कहा गया, कि उसकी ओर से आगे कोई आतंकी गतिविधि और सैन्य दुस्साहस नहीं दिखाया जाएगा। तो भारत ने भी उस पर विचार किया। और मैं फिर दोहरा रहा हूं, हमने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर अपनी जवाबी कार्रवाई को अभी सिर्फ स्थगित किया है। आने वाले दिनों में, हम पाकिस्तान के हर कदम को इस कसौटी पर मापेंगे, कि वो क्या रवैया अपनाता है।

साथियों,
भारत की तीनों सेनाएं, हमारी एयरफोर्स, हमारी आर्मी, और हमारी नेवी, हमारी बॉर्डर सेक्योरिटी फोर्स- BSF, भारत के अर्धसैनिक बल, लगातार अलर्ट पर हैं। सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद, अब ऑपरेशन सिंदूर आतंक के खिलाफ भारत की नीति है। ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में एक नई लकीर खींच दी है, एक नया पैमाना, न्यू नॉर्मल तय कर दिया है।

पहला- भारत पर आतंकी हमला हुआ तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हम अपने तरीके से, अपनी शर्तों पर जवाब देकर रहेंगे। हर उस जगह जाकर कठोर कार्यवाही करेंगे, जहां से आतंक की जड़ें निकलती हैं। दूसरा- कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत नहीं सहेगा। न्यूक्लियर ब्लैकमेल की आड़ में पनप रहे आतंकी ठिकानों पर भारत सटीक और निर्णायक प्रहार करेगा।

तीसरा- हम आतंक की सरपरस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, दुनिया ने, पाकिस्तान का वो घिनौना सच फिर देखा है, जब मारे गए आतंकियों को विदाई देने, पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े अफसर उमड़ पड़े। स्टेट स्पॉन्सरड टेरेरिज्म का ये बहुत बड़ा सबूत है। हम भारत और अपने नागरिकों को किसी भी खतरे से बचाने के लिए लगातार निर्णायक कदम उठाते रहेंगे।

साथियों,
युद्ध के मैदान पर हमने हर बार पाकिस्तान को धूल चटाई है। और इस बार ऑपरेशन सिंदूर ने नया आयाम जोड़ा है। हमने रेगिस्तानों और पहाड़ों में अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया, और साथ ही, न्यू एज वॉरफेयर में भी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। इस ऑपरेशन के दौरान, हमारे मेड इन इंडिया हथियारों की प्रमाणिकता सिद्ध हुई। आज दुनिया देख रही है, 21वीं सदी के वॉरफेयर में मेड इन इंडिया डिफेंस इक्विपमेंट्स, इसका समय आ चुका है।

साथियों,
हर प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ हम सभी का एकजुट रहना, हमारी एकता, हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। निश्चित तौर पर ये युग युद्ध का नहीं है, लेकिन ये युग आतंकवाद का भी नहीं है। टैररिज्म के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, ये एक बेहतर दुनिया की गारंटी है।

साथियों,
पाकिस्तानी फौज, पाकिस्तान की सरकार, जिस तरह आतंकवाद को खाद-पानी दे रहे है, वो एक दिन पाकिस्तान को ही समाप्त कर देगा। पाकिस्तान को अगर बचना है तो उसे अपने टैरर इंफ्रास्ट्रक्चर का सफाया करना ही होगा। इसके अलावा शांति का कोई रास्ता नहीं है। भारत का मत एकदम स्पष्ट है, टैरर और टॉक, एक साथ नहीं हो सकते, टैरर और ट्रेड, एक साथ नहीं चल सकते। और, पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकता।

मैं आज विश्व समुदाय को भी कहूंगा, हमारी घोषित नीति रही है, अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो टेरेरिज्म पर ही होगी, अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर, PoK उस पर ही होगी।

प्रिय देशवासियों,
आज बुद्ध पूर्णिमा है। भगवान बुद्ध ने हमें शांति का रास्ता दिखाया है। शांति का मार्ग भी शक्ति से होकर जाता है। मानवता, शांति और समृद्धि की तरफ बढ़े, हर भारतीय शांति से जी सके, विकसित भारत के सपने को पूरा कर सके, इसके लिए भारत का शक्तिशाली होना बहुत जरूरी है, और आवश्यकता पड़ने पर इस शक्ति का इस्तेमाल भी जरूरी है। और पिछले कुछ दिनों में, भारत ने यही किया है।

मैं एक बार फिर भारत की सेना और सशस्त्र बलों को सैल्यूट करता हूं। हम भारतवासी के हौसले, हर भारतवासी की एकजुटता का शपथ, संकल्प, मैं उसे नमन करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।
भारत माता की जय !!
भारत माता की जय !!!

भारत माता की जय !!!

प्रधानमंत्री का संबोधन भारत के शक्तिबोध को जागृत करने वाला

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संतोष द्विवेदी मनुज

अमूमन किसी भी पटल पर अब लिखने का बहुत मन नहीं करता, उसके बहुत से कारणों में से एक कारण यह भी है कि कौन जवाब-तलब और ऊल-जुलूल की प्रतिक्रियाओं और नैरेटिव-प्रेरित शब्दजाल सुलझाता फिरे।

तथापि कई बार खुद की अभिव्यक्ति मानो देश की अभिव्यक्ति को प्रतिध्वनित करती है तो उसे सायास रोकना कदापि उचित नही कहा जा सकता। इसे व्यक्त करना ही अवश्यम्भावी हो जाता है।

इसी क्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आज का सम्बोधन राष्ट्र के शक्तिबोध के लिए अवश्यम्भावी था। जिस तरह से डॉनल्ड ट्रम्प ने भारत-पाकिस्तान के मध्य युद्धविराम की घोषणा की थी वो सभी को नागवार गुजरा था। जन-भावना धरी की धरी रह गई थी।

यह जनभावना क्षणिक भी नहीं थी, यह वर्षों-दशकों से सिर्फ कड़ी आलोचना देखने के बाद पहली बार इससे आगे बढ़ी थी।दुश्मन को उसकी भाषा में जवाब दिया जा रहा था। जनता की उम्मीद बढ़ना बेईमानी नहीं थी। लेकिन यह भी समझना होगा कि देश की सुरक्षा के मद्देनज़र हर बात सार्वजनिक नहीं कि जा सकती, ऐसे में किन परिस्थितियों में अचानक युद्धविराम किया गया, नेतृत्व इसे सार्वजनिक भले न करें लेकिन जिस तरह से प्रधानमंत्री जी द्वारा परमाणु-बम के नाम पर ब्लैकमेलिंग को स्पष्ट तौर पर नकार दिया गया और दुनिया को स्पष्ट सन्देश भी दिया गया कि पाकिस्तान से बातचीत के मुद्दे सिर्फ सीमा-पार आतंकवाद और पीओके तक सीमित है। इसमें किसी भी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा।

तय मानिए, जिस तरह से भारत ने PoK से आगे पाकिस्तान की मुख्य-भाग में घुसकर बहावलपुर आदि क्षेत्रों पर आतंकी अड्डों पर अटैक किया है वो ऐतिहासिक और साहसिक है। नए भारत की प्रतिध्वनि है। प्रधानमंत्री जी द्वारा यह भी साफ किया गया कि आगे से किसी भी तरह की आतंकी घटना को ‘एक्ट ऑफ वार’ माना जायेगा। अपने आप में स्पष्ट है भविष्य में हमारी कार्ययोजना कैसी रहने वाली है।

एक बात तो तय है सीजफायर को आतंकिस्तान कितना मानेगा, देखने वाली बात होगी। उसकी नसों में धूर्तता है।
यही धूर्तता ही एकदिन उसके समापन की पटकथा लिखेगा। यह कब होगा वो तो नहीं पता लेकिन होकर रहेगा ये तय है।

यह कोई भविष्यवाणी नहीं है बल्कि देर-सबेर घटित होने वाला सत्य है। निश्चित ही इसकी परिणति भारत के हाथों ही होगी।

और हाँ! जैसी की उम्मीद थी, देश के सामर्थ्य को समवेत स्वर में आरोहित कर, राष्ट्र के शक्तिबोध को जाग्रत बनाये रखने के लिए प्रधानमंत्री Narendra Modi जी का सादर अभिनन्दन।

जय हिंद, जय भारत। 🇮🇳

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