उत्कृष्टता और उत्साह का संगम : विवेकानंद कॉलेज में NCWEB का वार्षिकोत्सव

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दिल्ली विश्वविद्यालय के विवेकानंद कॉलेज नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड (NCWEB) के द्वारा वार्षिक उत्सव हर्षोल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब Dean Students Welfare (छात्र कल्याण अधिष्ठाता) प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। साथ ही, NCWEB की निदेशक प्रो. गीता भट्ट  ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से मंच को को गौरवान्वित किया।इस.अवसर पर विवेकानंद की प्राचार्या प्रो.पिंकी मौर्या ने माननीय अतिथियों का स्नेहिल स्वागत करते हुए उत्सव को प्रेरक आयाम प्रदान किया।

कार्यक्रम के विशेष क्षण में कॉलेज की वार्षिक पत्रिका ‘प्रबोधिनी’ के नवीन अंक का भी  लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर विवेकानंद NCWEB  की टीचर इंचार्ज डॉ. कामिनी तनेजा ने वर्षभर की उपलब्धियों को समेटते हुए प्रेरणादायक वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा  अपनी फैकल्टी सदस्यों की भूरि-भूरि सराहना की।

मुख्य अतिथि प्रो. त्रिपाठी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा — “यदि राष्ट्र को सशक्त और समृद्ध बनाना है, तो सर्वप्रथम उसकी बेटियों को शिक्षित करना होगा।” स्वामी विवेकानंद के विचारों का स्मरण कर उन्होंने शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का समापन रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और छात्राओं के उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ हुआ। आयोजन ने शिक्षा, संस्कार और सृजनशीलता के अनूठे संगम का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया।

मोदी युद्ध के ज़रिए अर्थव्यवस्था को नष्ट नहीं कर रहे हैं, बल्कि उसे बढ़ावा दे रहे हैं

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– कर्नल मूल भार्गव

मोदी द्वारा यह घोषणा किए जाने के बाद कि भारत कश्मीर में हुए क्रूर आतंकवादी हमले का मुंहतोड़ सैन्य जवाब देगा, बड़ी संख्या में आरामकुर्सी विश्लेषकों ने रोना शुरू कर दिया। ये तथाकथित विश्लेषक रो रहे थे कि यह भारत को अंतहीन युद्ध में उलझाने के लिए “चीन-पाकिस्तान का संयुक्त जाल” है। भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, और अमेरिका, चीन, पाकिस्तान वगैरह वगैरह, जो नहीं चाहते कि भारत आगे बढ़े। इसलिए उन्होंने भारत को युद्ध में फंसाने के लिए यह योजना बनाई। आतंकवाद से इस तरह नहीं निपटा जा सकता – वगैरह, वगैरह। *उन्होंने 1000 कारण बताए कि कैसे पाकिस्तान के खिलाफ़ किसी भी सैन्य अभियान से भारतीय अर्थव्यवस्था नष्ट हो जाएगी।*

लेकिन जैसा कि मैंने कहा, वे सिर्फ़ आरामकुर्सी विश्लेषक हैं। जो मोदी की नफ़रत में अंधे हो गए हैं। वे इस तथ्य को छिपाने की कोशिश करते हैं कि भारत पहले से ही चार दशकों से हज़ारों कटों से अंतहीन युद्ध के जाल में फंसा हुआ है। हमें पूरी ताकत से इससे बाहर निकलने की ज़रूरत है।

युद्ध ज़रूरी नहीं कि अर्थव्यवस्थाओं को नष्ट कर दें।  अगर कोई युद्ध उधार के पैसे और दूसरों के कंधों पर लड़ा जाता है, तो यह निश्चित रूप से अर्थव्यवस्थाओं को नष्ट कर देता है।

लेकिन पूरी लगन, तैयारी और अपनी ताकत से लड़ा गया युद्ध अर्थव्यवस्था को उछाल सकता है। उस युद्ध को आपकी स्वदेशी तकनीकों, विनिर्माण और उत्पादन के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता है। दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएँ प्रमुख युद्धों की पृष्ठभूमि में विकसित हुई हैं, जिनका उपयोग राष्ट्रवादियों ने आविष्कारों, स्थानीय उत्पादन और रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किया था। अब, जरा सोचिए कि मौजूदा भारत-पाक संघर्ष में क्या हो रहा है। भारत ने पिछले एक दशक में अपने स्वदेशी हथियार निर्माण और युद्ध मशीनरी क्षमता को बढ़ाया है। टैंक, बंदूक, मिसाइल से लेकर ड्रोन, सैटेलाइट, एयरक्राफ्ट, गोला-बारूद तक, भारत पिछले दस से पंद्रह वर्षों से लगातार इनके विकास पर काम कर रहा है। भारतीय उद्योग और वैज्ञानिक समुदाय के पास हमेशा से ये क्षमताएँ थीं, *लेकिन पिछली सरकारों की सैन्य क्षमताएँ विकसित करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी*। मोदी ने मेक इन इंडिया के साथ उस रवैये को बदल दिया। भारत ने कई आयातित हथियारों को भी ठेठ “जुगाड़” प्रणाली में प्रभावी ढंग से खरीदा और संशोधित किया है।  एक प्रभावी युद्ध के लिए, हमें निश्चित रूप से अभी भी पूरी तरह से आयातित हथियारों की आवश्यकता है और उनका उपयोग कर रहे हैं, लेकिन उनमें से एक बड़ा हिस्सा स्वदेशी निर्मित हथियारों का है।

अब, चूंकि पाकिस्तान ने भारत पर सैन्य प्रतिक्रिया थोपी है, इसलिए मोदी इस संघर्ष से उत्पन्न होने वाले प्रभावों से पूरी तरह अवगत हैं। तो क्यों न इसका सर्वोत्तम उपयोग किया जाए? हमने पिछले दो दिनों में मिसाइलों और ड्रोन का उपयोग करके सटीक हमलों का एक अद्भुत प्रदर्शन किया है।  सैन्य विश्लेषकों और लॉबी का पूरा ब्रह्मांड भारत द्वारा प्राप्त किए गए हमलों की सटीकता और सीमा से चकित है।

जबकि भारत अभी भी निर्णायक जीत के लिए गंभीर आयातित हथियारों का उपयोग कर रहा है, यह इस विश्व मंच पर स्वदेशी रूप से निर्मित हथियारों और गोला-बारूद का उचित मात्रा में प्रदर्शन करने में सक्षम होगा। *यह लड़ाई स्पष्ट रूप से अप्रमाणित चीनी हथियारों बनाम भारतीय हथियारों, अमेरिका, रूसी और फ्रांसीसी हथियारों के संयोजन की लड़ाई है। यदि चीनी हथियार प्रणालियों को पराजित और नष्ट कर दिया जाता है जैसा कि आज हुआ, तो यह अन्य देशों को ऐसे हथियारों का निर्यात करने की चीनी योजना को एक घातक झटका देगा। दूसरी ओर, भारतीय निर्मित हथियार, उपकरण, ड्रोन, मिसाइल और अन्य हथियार विश्व मंच पर आएँगे और नाटकीय रूप से उनकी मांग को बढ़ा सकते हैं।  *इससे अगले कुछ सालों में भारतीय रक्षा उद्योग और इसकी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

इसलिए उन विलाप करने वाले विश्लेषकों को सफल युद्ध के अर्थशास्त्र को समझने की जरूरत है। वे भूल गए कि मोदी संकट को अवसर में बदलने में सबसे बड़े उस्ताद हैं।* उन्होंने और भारत ने अतीत में दर्जनों बार ऐसा किया है। इसलिए निश्चिंत रहें, परमाणु युद्ध कोई आसान संभावना नहीं है क्योंकि पूरी दुनिया यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार है कि ऐसा कभी न हो। लेकिन एक सीमित लेकिन पारंपरिक युद्ध यह स्थापित कर सकता है कि *भारत वैश्विक दक्षिण में एक शक्तिशाली हथियार विशेषज्ञ है। हम सभी मानते हैं कि युद्ध हमेशा एक महंगा और खतरनाक विकल्प होता है, लेकिन अगर यह आप पर थोपा जाता है और अपरिहार्य हो जाता है, जैसा कि इस मामले में हुआ, तो अपनी पूरी ताकत से लड़ें और बाद में इसका सबसे अच्छा उपयोग करें।

मुझे यकीन है कि आम भारतीय इस तर्क को समझेंगे और सरकार के साथ खड़े होंगे।
जय हिंद। वंदे मातरम।

वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव के साथ खड़े होने का समय

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दिल्ली। Operation sindoor से एक दिन पहले मल्लिकार्जुन खड़गे ने PM पर हमला करते हुए ये कहा था कि मोदी को तीन दिन पहले ही पता था कि कश्मीर में आतंकी हमला होने वाला है, इसलिए मोदी ने अपना कश्मीर दौरा रद्द कर दिया। तो जब पहले पता था तो 26 लोगों की जान क्यों नहीं बचाई गई।

उस दिन रात को अशोक श्रीवास्तव ने अपने शो में सवाल उठाया कि भारत तैयार, पर घर में छुपे कितने गद्दार ?

और स्क्रीन पर खड़गे, इमरान मसूद ( जिसने उसी दिन बालाकोट हमले को लेकर कहा था कि दुनिया भारत पर हंस रही थी) और मदनी ( जिसने  सिंधु का पानी रोकने के भारत के फैसले पर सवाल उठाया था) की फोटो लगी थी।


इस प्रोग्राम के बाद देर रात भारत ने स्ट्राइक कर दी। और सुबह आल पार्टी मीट में कांग्रेस ने कहा कि हम सरकार के साथ खड़े हैं। गौरतलब है कि यह पूरी कहानी एक रात की है। अशोक श्रीवास्तव ने जो शो किया, वह पिछली रात का सच था। रात डेढ़ बजे पाकिस्तान की हुई ठुकाई के बाद, कांग्रेस का स्टैंड सामने आया। फिर खड़गे जी का भी स्टैंड बदला हो लेकिन पाकिस्तान की ठुकाई की पिछली रात का सच तो वही था, जो अशोक श्रीवास्तव ने अपने शो में कहा और दूरदर्शन ने दिखाया।

सच का सामना करना सबके वश की बात नहीं है। कांग्रेस बौखला गई। एक दिन बाद कांग्रेस के नेताओं ने अशोक श्रीवास्तव के प्रोग्राम का एक दिन पहले का स्क्रीन शॉट उठाकर अपना एजेंडा चलाना शुरू कर दिया। उनके ट्रॉल एक्टिवेट हो गए। कांग्रेस कहने लगी कि हम सरकार के साथ खड़े हैं लेकिन सरकारी चैनल का एंकर कांग्रेस के ‘दलित’ अध्यक्ष को गद्दार कह रहा है।

अशोक श्रीवास्तव ने खड़गे जी पर जो टिप्पणी की उनके दलित होने की वजह से नहीं बल्कि कांग्रेस के अध्यक्ष होकर गैर जिम्मेदाराना बयान की वजह से दी। ऐसा बयान दत्तात्रेय गोत्र के ब्राह्मण राहुल गांधी ने भी दिया होता तो उनकी तस्वीर भी शो में शामिल होती। वैसे भी शो में एंकर उन सभी लोगों पर हमलावर थे जो देश के खिलाफ टिप्पणी कर रहे थे। जाने अनजाने में अपने बयानों से पाकिस्तान की मदद ही कर रहे थे।

उल्लेखनीय है कि पूरे प्रोग्राम में किसी व्यक्ति को देश का गद्दार नहीं कहा गया था और सच तो यह है कि ऑपरेशन सिंदूर और ऑल पार्टी मीट के बाद भी कांग्रेस के नेता ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाते रहे, अलका लांबा पीएम का मजाक उड़ाते उन पर ट्वीट कर रही थीं, पीएम को “विषगुरु” वाले ट्वीट रीट्वीट कर रही थीं। उत्तर प्रदेश के एक बड़े कांग्रेसी नेता पर बयान के लिए ही एफआईआर हुई है।

अब कांग्रेस और पूरे इकोसिस्टम ने अशोक श्रीवास्तव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सूचना और प्रसारण मंत्री को टैग करके उन्हें नौकरी से निकालने की मांग की जा रही है। उनके खिलाफ प्रसार भारती अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी जा रही है।

ऐसे समय में उन्हें अकेला छोड़ना सही नहीं है। कम से कम इसको लेकर जहां तक जिसकी आवाज आवाज पहुंचती हो, आवाज उठाना चाहिए।

A Grand Confluence of Excellence and Enthusiasm at Vivekananda College NCWEB Annual Fest

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Delhi: The Annual Festival of NCWEB, Vivekananda College, University of Delhi, was celebrated with great grandeur and joy. The presence of Prof. Ranjan Kumar Tripathi, Dean Students’ Welfare, as Chief Guest, and Prof. Geeta Bhatt, Director, NCWEB, graced the occasion. Principal Prof. Pinki Maurya warmly welcomed the dignitaries and infused the event with a spirit of inspiration.

The latest edition of the college annual magazine ‘Prabodhini’ was also unveiled during the ceremony. Dr. Kamini Taneja, Teacher-in-Charge, presented an inspiring annual report highlighting the year’s achievements and lauded the faculty’s dedication.

Addressing the students, Prof. Tripathi emphasized the importance of educating daughters for a stronger, progressive nation, invoking the ideals of Swami Vivekananda. The event concluded with vibrant cultural performances and enthusiastic student participation, leaving behind memories of a celebration that beautifully blended education, values, and creativity.

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