वित्तीय वर्ष 2025-26 का अग्रणी, पथप्रदर्शक एवं अतुलनीय बजट

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दिनांक 1 फरवरी 2025 को केंद्र सरकार की वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लोकसभा में बजट पेश किया। श्रीमती सीतारमन ने एक महिला वित्तमंत्री के रूप में लगातार 8वां बजट लोकसभा में पेश कर एक रिकार्ड बनाया है। वित्तमंत्री द्वारा लोक सभा में पेश किया गया बजट अपने आप में पथप्रदर्शक, अग्रणी एवं अतुलनीय बजट कहा जा रहा है क्योंकि इस बजट के माध्यम से किसानों, युवाओं, महिलाओं, गरीब वर्ग एवं मध्यम वर्ग का विशेष ध्यान रखा गया है। पिछले कुछ समय से देश की अर्थव्यस्था में विकास की गति कुछ धीमी पड़ती हुई दिखाई दे रही थी अतः विशेष रूप से मध्यम वर्ग एवं गरीब वर्ग के हाथों में अधिक धनराशि शेष बच सके ताकि वे विभिन्न उत्पादों को खरीदकर अर्थव्यवस्था में इनकी मांग बढ़ा सकें, ऐसा प्रयास इस बजट के माध्यम से किया गया है। साथ ही, भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से रोजगार उन्मुख क्षेत्रों यथा कृषि क्षेत्र, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, निवेश, निर्यात एवं समावेशी विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि इन्हें विकास के इंजिन के रूप में विकसित किया जा सके।
भारत में मध्यमवर्गीय परिवार देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता आया हैं। हाल ही के समय में प्रत्यक्ष कर संग्रहण में व्यक्तिगत आयकर की भागीदारी कारपोरेट क्षेत्र से आयकर की भागीदारी से भी अधिक हो गई है। अतः मोदी सरकार से अब यह अपेक्षा की जा रही थी कि मध्यमवर्गीय परिवारों को बजट के माध्यम से कुछ राहत दी जाय। और फिर, मुद्रा स्फीति की सबसे अधिक मार भी गरीब वर्ग के परिवारों एवं मध्यमवर्गीय परिवारों पर ही पड़ती दिखाई देती है। केंद्रीय वित्तमंत्री ने मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से आयकर की वर्तमान सीमा को 7 लाख रुपए से बढ़ाकर 12 लाख रुपए कर दिया है। अर्थात अब 12 लाख रुपए तक की आय अर्जित करने वाले नागरिकों पर किसी भी प्रकार का आयकर नहीं लगेगा। वेतन एवं पेंशन पाने वाले नागरिकों को 75,000 रुपए की स्टैंडर्ड कटौती की राहत इसके अतिरिक्त प्राप्त होगी। इस वर्ग के करदाताओं को 12.75 लाख रुपए तक की वार्षिक आय पर कोई आयकर नहीं चुकाना होगा। इसके साथ ही, आय कर की दरों में भी परिवर्तन किया गया है। अब 4 लाख रुपए तक की करयोग्य आय पर आयकर की दर शून्य रहेगी। 4 लाख रुपए से 8 लाख रुपए तक की करयोग्य आय पर आयकर की दर 5 प्रतिशत, 8 लाख रुपए से 12 लाख रुपए तक की कर योग्य आय पर आयकर की दर 10 प्रतिशत, 12 लाख रुपए से 16 लाख रुपए तक की कर योग्य आय पर आयकर की दर 15 प्रतिशत, 16 लाख रुपए से 20 लाख रुपए तक की कर योग्य आय पर आयकर की दर 20 प्रतिशत, 20 लाख रुपए से 24 लाख रुपए तक की कर योग्य आय पर आयकर 25 प्रतिशत एवं 24 लाख रुपए से अधिक की कर योग्य आय पर 30 प्रतिशत की दर से आयकर लागू होगा। मध्यमवर्गीय करदाताओं को उक्त सुधारों से लगभग 80,000 रुपए से 1.10 लाख रुपए तक की राशि की बचत होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। इस सुधार से कुल मिलाकर देश के बजट में एक लाख करोड़ रुपए की राशि कम प्राप्त होगी अर्थात मध्यमवर्गीय परिवारों को कुल एक लाख करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि का लाभ होगा। और, यह लाभ लगभग 2 करोड़ करदाताओं को होने की सम्भावना है। इससे देश के मध्यमवर्गीय एवं गरीब परिवारों के हाथों अतिरिक्त राशि उपलब्ध होगी जिसे वे विभिन्न उत्पादों की खरीद पर खर्च करेंगे और देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में सहायक होंगे। मध्यमवर्गीय एवं गरीब परिवारों ने जितना सोचा था शायद उससे भी कहीं अधिक राहत उन्हें इस बजट के मध्यम से दी गई है। इसीलिए ही, इस बजट को अग्रणी, पथप्रदर्शक एवं अतुलनीय बजट की संज्ञा दी जा रही है।
मध्यमवर्गीय एवं गरीब परिवारों को, आयकर में छूट देकर, दी गई राहत देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि इससे बजटीय घाटा में वृद्धि नहीं हो। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बजटीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 5.9 प्रतिशत रहने की सम्भावना पूर्व में की गई थी, परंतु अब संशोधित अनुमान के अनुसार यह बजटीय घाटा कम होकर 5.8 प्रतिशत रहने की सम्भावना है। साथ ही, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजटीय घाटा 5.4 रहने का अनुमान लगाया गया है। अतः देश की वित्तीय व्यवस्था पर किसी भी प्रकार का विपरीत प्रभाव नहीं पड़ने जा रहा है। हां, पूंजीगत खर्चों में जरूर कुछ कमी रही है और वित्तीय वर्ष 2024-25 में 11.11 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत खर्च के अनुमान के विरुद्ध 10.18 लाख करोड़ रुपए का पूंजीगत खर्च होने की सम्भावना व्यक्त की गई है। हालांकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11.12 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत खर्च की व्यवस्था बजट में की गई है। इस राशि को 11.11 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 15 लाख करोड़ रुपए किया जाना चाहिए था क्योंकि पूंजीगत खर्च में वृद्धि से देश में आर्थिक विकास की दर तेज होती है और रोजगार के नए अवसर निर्मित होते हैं। इस संदर्भ में एक रास्ता यह निकाला गया है कि केंद्र सरकार के उपक्रमों एवं निजी क्षेत्र की कम्पनियों से अपेक्षा की गई है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ये संस्थान भी अपने पूंजीगत खर्चों में वृद्धि करें ताकि उनके द्वारा किए गए पूंजीगत खर्चों की राशि को मिलाकर कुल पूंजीगत खर्च को 15 लाख करोड़ रुपए से ऊपर ले जाया जाए।
भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से राज्यों के साथ मिलकर कृषि धन धान्य योजना को 100 जिलों में प्रारम्भ किया जा रहा है, इस योजना के माध्यम से इन जिलों में ली जा रही फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दलहन के उत्पादन में आत्म निर्भरता प्राप्त करने के लिए 6 वर्षीय मिशन चलाया जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा को 5 लाख तक बढ़ाया जा रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ऋण सीमा को 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए एवं स्टार्टअप के लिए ऋण की सीमा को 10 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए किया जा रहा है। लेदर उद्योग में रोजगार के 22 लाख नए अवसर निर्मित किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारत को खिलौना उत्पादन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाया जाएगा। यूरिया उत्पादन के क्षेत्र में भारत को आत्म निर्भर बनाया जाएगा। आज भारत खाद्य तेलों का भारी मात्रा में आयात करता है अतः तलहन के क्षेत्र में भी आत्म निर्भरता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।। भारत में निर्मित विभिन्न उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए बाजारों की तलाश करते हुए विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते सम्पन्न किए जा रहे हैं। देश में बीमा क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति प्रदान की जा रही है। विभिन्न शहरों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए एक  लाख करोड़ रुपए का एक विशेष फंड बनाया जा रहा है।
युवाओं में कौशल विकास के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, आगामी 5 वर्षों में देश के मेडिकल कॉलेजों में 75,000 युवाओं को अतिरिक्त दाखिला दिए जाएंगे। इंडियन इन्स्टिटूट आफ टेक्नॉलजी कॉलेजों में टेक्नलाजिकल रीसर्च के लिए 10,000 पी एम स्कालर्शिप प्रदान की जाएंगी एवं नए आईआईटी केंद्रों की स्थापना भी की जाएगी। आरटीफिशियल इंटेलीजेंस सेंटर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 500 करोड़ रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
श्री अयोध्या धाम, महाकुम्भ क्षेत्र प्रयागराज, काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी, महाकाल मंदिर उज्जैन की तर्ज पर अन्य धार्मिक स्थलों को भी विकसित किया जाएगा ताकि देश में धार्मिक पर्यटन की गतिविधियों को और अधिक आगे बढ़ाया जा सके। देश में 52 नए पर्यटन केंद्र भी विकसित किए जाने की योजना बनाई गई है तथा भगवान बुध सर्किट भी विकसित किया जाएगा।

राजस्थानी खुशबू को देश- दुनिया तक फैलाने में प्रवासी राजस्थानियों का महत्वपूर्ण योगदान। —-मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा

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नई दिल्ली : मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि प्रवासी राजस्थानी लोगों ने अपने सामाजिक सरोकारों से देश में अलग पहचान बनाई है। राजस्थान की खुशबू को दुनिया भर में फैलाने का काम हमारे प्रवासी भाइयों ने किया है, इस पर हमें गर्व है।

श्री शर्मा शनिवार को नई दिल्ली के मोती नगर विधानसभा क्षेत्र में दिल्ली में बीजेपी के राजस्थान प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रवासी राजस्थानीयों के कामों की सराहना करते हुए उन्हें उल्लेखनीय बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले कांग्रेस ने धर्म और जाति के नाम पर राजनीति की थी और अब पिछले 11 साल  इन्होंने दिल्ली का विनाश किया है। अब हमें दिल्ली को आगे बढ़ाना हैं। उन्होंने कहा कि इनके घोषणा पत्र देखो, इन्होंने कितने वादे पूरे किए है, पढ़कर देखो कि ये क्या करते है और क्या बोलते है। मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 2014 ओर 2023 में जो वादे किए वो पूरे किए। हमने राजस्थान में भी संकल्प पत्र के वादे पूरे करने का काम किया है। हमारी सरकार ने शेखावाटी, बांगड़, सिरोही, पाली सहित पूरे राजस्थान के लिए काम किया है। ईआरसीपी के काम को महत्वपूर्ण बताते हुए श्री शर्मा ने कहा कि पहले साल में हमारी सरकार ने पानी के लिए काम किया। रोजगार की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 1 साल में हमने 1 लाख नौकरी देने का काम किया है और 2025 के लिए नौकरी भर्ती कैलेंडर जारी किया है।

हमारी सरकार ने 1 लाख 24 हजार के MoU किए हैं जिससे राजस्थान के विकास को पंख लगने का काम होगा।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में भी हमारी डबल इंजन की सरकार वादे पूरे करेगी। केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि ये महा झूठा आदमी है। इसलिए आपको जेल वाले पर विश्वास नहीं करना हैं। मुख्यमंत्री ने जनसभा में उपस्थित दिल्ली वासी मारवाड़ी समाज कका आव्हान करते हुए कहा कि एक मारवाड़ी 100 के बराबर होता है। मारवाड़ी की गिनती 100 से शुरू होती है। इसलिए दिल्ली के मारवाड़ी समाज को बसंत ऋतु में दिल्ली के अंदर कमल खिलाने का काम करना हैं। इस अवसर पर चितौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी सहित बड़ी संख्या में प्रवासी राजस्थानी मौजूद रहे।
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बसंत में खिलेगा विकास का कमल – मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा

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दिल्ली/जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि दिल्ली देश का दिल है, लेकिन विकास के मामले में यहां के हालात दिए तले अंधेरा जैसे हो रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने अपने 10 साल के कुशासन में भारी भ्रष्टाचार कर दिल्ली की जनता को ठगने और लूटने का काम किया है। उन्होंने कहा कि अब दिल्ली की जनता उनके बहकावे में नहीं आएगी और इस बसंत में दिल्‍ली में विकास का कमल खिलायेगी।

श्री शर्मा शनिवार ने इस दौरान रिठाला विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी श्री कुलवंत राणा तथा मोतीनगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी श्री हरीश खुराना के समर्थन में आयोजित विभिन्न जनसभाओं को संबोधित किया। उन्होंने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए।

*ईमानदारी का दिखावा करने वाले भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे*


मुख्यमंत्री ने रिठाला विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसभा में कहा कि ईमानदारी का दिखावा करने वाले आम आदमी पार्टी के लोग सत्ता में आते ही भ्रष्टाचार में आकंठ डूब गए। उन्होंने 28 हजार करोड़ रुपए का जल बोर्ड में घोटाला, 5 हजार 400 करोड़ रुपए का राशन घोटाला, 4 हजार 500 करोड़ रुपए का डीटीसी बस घोटाला, 1 हजार 300 करोड़ रुपए का क्लासरूम घोटाला, 500 करोड़ रुपए का बसों के पैनिक बटन का घोटाला कर दिल्ली की जनता की खून-पसीने की कमाई को लूटा। पैरों में चप्पल पहनने तथा मारूति में चलकर सादगी का ढोंग करने वाले केजरीवाल ने 52 करोड़ रुपए से अपने लिए शीशमहल बनाया।

श्री शर्मा ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद गरीब कल्याण, देश के विकास, आतंकवाद-नक्सलवाद के खात्मे और दुनिया में भारत के बढ़ते गौरव के रूप में हमने देश में आया परिवर्तन देखा है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में देश और उनके मार्गदर्शन में भाजपा शासित प्रदेशों में तेज गति से विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के पड़ोसी राज्यों- राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में भाजपा की डबल इंजन की सरकारें समर्पित भाव से जनहित के कार्य कर रही है। राजस्थान में हमारी सरकार बने हुए एक वर्ष से कुछ ही अधिक समय हुआ है, मगर हमारे संकल्प पत्र के 50 से 55 फीसदी तक वादे पूरे हो चुके हैं।

मोती नगर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित दो अलग-अलग जनसभाओं में श्री शर्मा ने कहा कि देश और दुनिया में रह रहे हमारे मारवाड़ी भाई-बहनों ने अपनी मेहनत, लगन और समर्पण से राजस्थान का नाम रोशन किया है। ये जहां भी जाते हैं अपनी मृदु वाणी और व्यवहार से एक विशेष पहचान बनाते हैं और वहां की सामाजिक आर्थिक संस्कृति में घुल-मिल जाते हैं। श्री शर्मा ने कहा कि हमारे मारवाड़ी भाई-बहनों में राष्ट्रवाद की भावना कूट-कूट कर भरी होती है। अब दिल्‍ली का मारवाड़ी समाज राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी का साथ देकर यहां से भ्रष्‍ट और झूठी आपदा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए हमारे साथ आ खड़ा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10 साल में केजरीवाल एंड पार्टी ने दिल्‍लीवासियों से केवल थोथे और झूठे वादे किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 70 साल तक केवल घोषणाएं ही की और धरातल पर काम नहीं किया, मगर इस मामले में अरविंद केजरीवाल कांग्रेस से भी ज्यादा झूठे निकले। बड़े आत्मविश्वास के साथ झूठ बोलते हुए उन्हें झिझक महसूस नहीं होती।

श्री शर्मा ने कहा कि हम बाजार से मटकी खरीदकर लाते हैं तो उसे भी ठोक बजाकर परखते हैं। 5 साल के लिए सरकार चुनते समय भी हमें अपने विवेक के साथ सोच समझकर योग्य जनप्रतिनिधि का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि 5 फरवरी को कमल के निशान पर बटन दबाकर दिल्ली को एक नया भविष्य दें।

मुख्यमंत्री ने इन जनसभाओं कहा कि रिठाला से भाजपा के सेवाभावी उम्‍मीदवार श्री कुलवंत राणा तथा मोती नगर से भाजपा प्रत्याशी हरीश खुराना को भारी बहुमत से विजयी बनाकर दिल्‍ली के सर्वांगीण विकास में अपनी भागीदारी निभाएं। इस दौरान भाजपा के स्थानीय पदाधिकारीगण तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
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लघु उद्योगों के प्रति दिल्ली सरकार की उपेक्षा से दिल्ली के उद्यमियों में रोष

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दिल्ली के राजस्व और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले दिल्ली के सूक्ष्म और लघु उद्यमियों के प्रतिनिधियों ने आज अपने प्रति दिल्ली सरकार के उपेक्षापूर्ण और प्रताड़ित करने वाले व्यवहार के विरुद्ध रोष प्रकट करने के लिए दिल्ली के प्रैस क्लब में एक प्रैस कॉन्फ्रेंस की।

उपस्थित उद्योग प्रतिनिधि इस बात से बहुत आक्रोशित थे कि आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजनैतिक पार्टियों के चुनाव घोषणापत्रों में भी उद्यमियों के मुद्दों को स्थान नही दिया गया है।

दिल्ली में देश में *सबसे महंगी औद्योगिक बिजली* के लिए वर्तमान दिल्ली सरकार को दोषी ठहराते हुए उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि दिल्ली में औद्योगिक बिजली के दाम पिछले 10 वर्षों में दोगुने हो गए हैं। बिजली की मूल दर पर मनमाने और अपारदर्शी ढंग से अन्य शुल्क लगाए गए हैं। यँहा तक कि सरकारी कर्मचारियों को पेंशन देने का बोझ भी बिजली के बिलों में शामिल किया गया है।
इसके कारण दिल्ली में औद्योगिक बिजली के बिलों में प्रति युनिट प्रभावी दर सभी पड़ौसी राज्यों की तुलना में दुगुनी हो गई है। इस कारण दिल्ली के छोटे उद्यमी व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से बाहर होकर दिल्ली से पलायन कर रहे हैं या बन्द हो रहे हैं।

दिल्ली की वर्ष 2023-24 की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार दिल्लीमें कुल 3.94 लाख पंजीकृत MSME है जिनमें 93% सूक्ष्म श्रेणी के है। 2011 -12 की तुलना में 2023 -24 में दिल्ली की GDP में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान 33% कम हो गया है।

*न्यूनतम 20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देने और राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले उद्योग दिल्ली सरकार की प्राथमिकता में कहीं नही हैं। यह इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि वर्ष 2023 -24 में दिल्ली सरकार ने इस क्षेत्र पर मात्र 110 करोड़ खर्च किये, जबकि दिल्ली की जेलों पर ही 129 करोड़ रुपये खर्च किये गए।*

दिल्ली के औद्योगिक भूखण्डों को लीज होल्ड से *फ्रीहोल्ड* करने की माँग उद्यमी अनेक वर्षों से कर रहे है। इस हेतु 2005 में लाई गई पॉलिसी राज्य सरकारकी उदासीनता और DDA आदि अन्य केंद्रीय एजेंसियों से समन्वय के अभाव में अभी तक क्रियान्वित नही हो पाई है। अनेक उद्यमियों द्वारा इस हेतु पूरा भुगतान कर दिए जाने के बाद भी फ्रीहोल्ड के अधिकार देने की बजाय उनको अनावश्यक न्यायालयों में उलझा दिया गया है। एक मामले में तो दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उद्यमियों के पक्ष में दिए निर्णय के विरुद्ध DSIIDC सुप्रीम कोर्ट तक चली गई है। *रिलोकेशन स्कीम 1996* के 52000 से अधिक उद्यमियों को 2005 की फ्रीहोल्ड पॉलिसी में अभी तक सम्मिलित नही किया गया है।
उद्यमियों को अपनी भूमि का मालिकाना अधिकार ना मिलना दिल्ली के औद्योगिक विकास को रोक रहा है। यदि दिल्लीकी औद्योगिक सम्पत्तियां फ्री होल्ड हो जाये तो दिल्ली में अनेक प्रकार के नए उद्योग लगने की अपार संभावनाएं है।

*दिल्ली जल बोर्ड* दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नही करा पा रहा परन्तु पानी के कनेक्शन के नाम पर भारी भरकम राशि वसूल रहा है। दिल्ली का छोटा उद्यमी पानी की कमी से जूझ रहा है।
*उल्लेखनीय है कि उद्योगों को पानी की कमी से राहत देने के लिये भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय द्वारा MSME को 10000 लीटर भूजल दोहन की अनुमति दिल्ली सरकार ने अभी तक लागू नही की है।*

आज जब पिछले 10 वर्षों में देश की *ईज ऑफ डूइंग बिजनेस* रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, दिल्ली में ये रैंकिंग निरन्तर गिर रही है। आज उत्तरप्रदेश इस मामले में दिल्ली से कँही आगे है।
इसका कारण दिल्ली में अनेकों प्रकार के अनावश्यक लाइसेंस और अनुमतियां लेने की प्रकिया का पारदर्शी ना होना है। इसका एक उदाहरण नगर निगम का अनावश्यक फैक्ट्री लाइसेंस है जिसे समाप्त करने की सिफारिश 2016 में तत्कालीन तीनों नगर निगमों ने राज्य सरकार को भेज दी थी लेकिन राज्य सरकार आज तक इसे समाप्त करने की पहल नहीं कर सकी।

*औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर* का विकास दिल्ली सरकार की प्राथमिकता में ही नही है। उद्यमियों से लीज रेंट, प्रोपर्टी टैक्स और मेंटेनेन्स चार्ज के नाम पर अलग-अलग राशि वसूलने के बाद भी दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्र मूल भूत सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं, औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर मिलना तो दूर की बात है।
दिल्ली सरकार की उदासीनता को समझने के लिए *आनन्द पर्वत से टीकरी बॉर्डर* तक जाने वाली रोहतक रोड, जिसके दोनों ओर दिल्ली के दर्जनों औद्योगिक क्षेत्र स्तिथ है, की बदहाल स्थिति का एक उदाहरण ही पर्याप्त है। इस पर प्रायः ट्रैफिक जाम रहता है लेकिन राज्य सरकार स्तिथि को सुधारने के लिए कुछ नही कर रही है।

दिल्ली की सड़कों की खराब स्तिथि और अतिक्रमण के कारण बढ़ते प्रदूषण का दुष्परिणाम भी GRAP के रूप में दिल्ली के उद्यमियों को भुगतना पड़ता है। GRAP के समय औद्योगिक -व्यापारिक गतिविधियां ठप्प हो जाती हैं। निर्माण गतिविधियों पर रोक लगने से भी सभी उद्योग प्रभावित होते है।

*उद्योग प्रतिनिधियों ने एक स्वर में दिल्ली में ऐसी सरकार लाने का आह्वान किया, जो दिल्ली के उद्यमियों की समस्याओं को समझकर दिल्ली में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियां बनाकर उन्हें क्रियान्वित करे, बिजली के अतार्किक रूप से महंगे बिलों से राहत दिलाये और औद्योगिक क्षेत्रों सहित पूरी दिल्ली के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाकर बढ़ते प्रदूषण से दिल्ली को राहत दिलाये।

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