महाकुंभ से उठी गूंज – भारत को भारत कहें इंडिया नहीं

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हजारों वर्षों से हमारे देश का नाम ‘भारत’ है। वेदों, पुराणों, रामायण और महाभारत सहित सभी प्राचीन ग्रंथों में हमारे देश का नाम ‘भारत’ वर्णित है। भारत शब्द से गौरव और गरिमा की अनुभूति होती है। लेकिन संविधान निर्माण के समय अनेक सदस्यों के विरोध के बावजूद संविधान में भारत नाम से पहले ‘इंडिया’ नाम जोड़ दिया गया। इंडिया नाम भारत में अंग्रेजों के साथ आया और उनके द्वारा ही प्रचलित किया गया। यह हमारी औपनिवेशिक दासता का प्रतीक है। इंडिया शब्द से भारतवासियों के लिए इंडियन शब्द बना, शब्दकोश में ‘इण्डिया’ शब्द का कोई वास्तविक अर्थ प्राप्त नहीं होता है और जो अर्थ मिलता है, वह अपमानजनक ही है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत में भारतीयता को पुन:स्थापित करने के उद्देश्य से शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने ज्ञान महाकुंभ के अन्तर्गत एक राष्ट्र, एक नाम : भारत विषय पर 1 फरवरी, 2025 को एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। भारत सरकार के सभी कार्यों में देश का नाम इंडिया नहीं भारत ही प्रयोग किया जाये, इस हेतु राष्ट्रपति जी को पत्र एवं इस मुहिम के लिए वृहद स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जायेगा। यह बात शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव डॉ अतुल कोठारी ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही।

डॉ कोठारी ने कहा कि वैश्विक तापमान में प्रतिकूल वृद्धि, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के असंतुलन जैसी पर्यावरण संबंधी समस्याएं मानवता के समक्ष गंभीर चुनौती प्रस्तुत कर रही हैं। औद्योगीकरण, शहरीकरण और उपभोक्तावाद ने वनों की कटाई, कार्बन उत्सर्जन और भूमि, जल व वायु प्रदूषण को बढ़ावा दिया है। इसके दुष्प्रभाव हमारे गांवों, कस्बों और शहरों में भी स्पष्ट दिखाई देते हैं। यह विकट स्थिति मुख्यतः प्रकृति के प्रति हमारे लालचपूर्ण दृष्टिकोण के कारण उत्पन्न हुई है। समकालीन वैश्विक पर्यावरणीय, परिस्थितिकीय तथा जलवायु संबंधित समस्याओं का समाधान भारतीय संस्कृति, विचार, व्यवहार व जीवन शैली में है। भारत का “हरित” पर्यावरण दृष्टिकोण पंचमहाभूतों की शाश्वतता, सम्यकता तथा परस्पर संतुलनता को स्थापित करता है। ज्ञान महाकुंभ श्रृंखला के तहत, 5-6 फरवरी, 2025 को हरित महाकुंभ समावेशी संवाद भारतीय पर्यावरण दृष्टिकोण को अधिक पुष्टता प्रदान करने तथा पर्यावरण संवर्द्धन, संरक्षण की मूल परंपराओं, जीवन शैली को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सोपान है। इस हरित महाकुंभ का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव करेंगे तथा समापन डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे जी करेंगे। यह आयोजन सम्पूर्ण विश्व की पारिस्थितिकी, जलवायु तथा जैव विविधता को समृद्ध बनाने के हमारे नागरिक व संस्थागत कर्तव्यों को भी एक प्रेरणादायी दिशा व संबल प्रदान करेगा।

ज्ञान महाकुंभ के विषय में जानकारी देते हुए डॉ कोठारी ने कहा कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा विगत 10 जनवरी से 10 फरवरी 2025 तक प्रयागराज में पवित्र महाकुंभ के समय ‘ज्ञान महाकुंभ’ का आयोजन किया जा रहा है। इस महाकुंभ में उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, गुजरात आदि राज्यों के शिक्षा मंत्री, 100 से अधिक कुलपति व निदेशक, 4000 से अधिक छात्र एवं सैकड़ों आचार्य, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षा जगत की नियामक संस्थाओं के प्रतिनिधि आदि भारतीयता के आलोक में देश की शिक्षा व्यवस्था पर चिंतन-मंथन कर भारतीय ज्ञान परम्परा के आधार पर भारतीय शिक्षा व्यवस्था का पुनर्स्थापना का संकल्प करेंगे एवं पूरे देश में इसे साकार करने का प्रयत्न करेंगे। इस आयोजन के मुख्य संरक्षक उत्तर प्रदेश माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं अन्य संरक्षक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हैं। यह आयोजन राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के एमडी व सीईओ आशीष चौहान, एआइसीटीई के अध्यक्ष प्रो टी.जी. सीताराम, महर्षि अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, अमेरिका के अध्यक्ष डॉ टोनी नाडर, यूजीसी के उपाध्यक्ष प्रो दीपक श्रीवास्तव की विशेष उपस्थिति व मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा। न्यास की अध्यक्ष डॉ पंकज मित्तल, संजय स्वामी, एमएनआईटी प्रयागराज के निदेशक प्रो रमा शंकर वर्मा, आईआईआईटी प्रयागराज के निदेशक डॉ मुकुल सुतावने, डॉ पूर्णेंदु मिश्र इस ज्ञान महाकुंभ की आयोजन समिति के सदस्य हैं।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा योजनाबद्ध तरीके से अपने कार्यकलापों, विभिन्न विषयों में न्यास द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का प्रदर्शन किया जा रहा है। शिक्षा से आत्मनिर्भरता, महिला कार्य, शैक्षणिक नवाचार, भारतीय भाषाओं के विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग जैसे-अनेक विषयों पर देश के अग्रणी शैक्षिक संस्थान प्रदर्शनी तथा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से इन विषयों को देशभर से पधारे शिक्षाविदों से समक्ष रखेंगे।

ज्ञान महाकुंभ के समन्वयक संजय स्वामी ने कहा कि इस अवसर पर भारतीय शिक्षा की राष्ट्रीय संकल्पना को दृष्टिगत रखते हुए अखिल भारतीय सम्मेलन में विशिष्ट त्रि-दिवसीय आयोजन 7-9 फ़रवरी में किया जाएगा। इसमें 7 फ़रवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह – सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल जी द्वारा उ‌द्घाटन किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि 7 फ़रवरी के दूसरे सत्र में शिक्षा के क्षेत्र में शासन प्रशासन की भूमिका पर भी चर्चा होनी है। 8 फ़रवरी को शिक्षा क्षेत्र में कार्य कर रहे संत महात्मा, उद्योगपति एवं निजी संस्थानों का समागम रहेगा। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में महिलाओं, युवाओं, शिक्षाविद आचार्यों के योगदान पर वृहद् चर्चा की जाएगी। ज्ञान महाकुंभ के तीसरे दिवस 9 फ़रवरी को भारतीय ज्ञान परम्परा, आत्मनिर्भर भारत, भारतीय भाषाएँ को समेकित करते हुए गोष्ठी का आयोजन किया जायेगा। समापन समरोह को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले तथा बिहार के मा. राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान का सानिध्य प्राप्त होगा।

महाकुंभ की दुखद घटना पर विकृत राजनीति

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लखनऊ: प्रयागराज में 144 वर्षों के पश्चात होने वाला महाकुंभ अपने आयोजन के आरंभ के साथ ही सनातन विराधी शक्तियों के निशाने पर है, चाहे वह महाकुंभ में गैर हिंदुओं को दुकानें आवंटित करने का प्रकरण रहा हो या फिर व्यवस्थाओं को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव की बयानबाजी। कुम्भ को लेकर अखिलेश यादव के नेतृत्व में हो रही बयानबाजी के पीछे का प्रमुख कारण सपा नेता का यह डर था कि कुम्भ का सफल आयोजन मुख्यमंत्री के पक्ष में एक लहर उत्पन्न कर देगा और 2027 की उनकी उम्मीदों पर पानी फिर जायेगा।

पौष पूर्णिमा के साथ 13 जनवरी को पूर्ण भव्यता के साथ आरम्भ हुआ कुम्भ प्रतिदिन श्रद्धालुओं की दिन दूनी रात चौगुनी उमड़ती भीड़ और व्यस्थाओं के प्रति उसके संतोष से सभी के आकर्षण का केंद्र बन गया। हर व्यक्ति कुम्भ की बढ़ चला। हर ओर सनातन के साथ साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उनके सक्षम प्रशासन की चर्चा होने लगी। इसके साथ साथ सनातन विरोधियों तथा मोदी योगी के राजनैतिक विरोधियों की ईर्ष्या भी परवान चढ़ने लगी। विरोधी महाकुंभ और उसकी व्यवस्थाओं को बदनाम करने के लिए प्रतिदिन कोई न कोई अफवाह फैलाकर महाकुंभ आने वाले श्रद्धालुओं में उत्साह की कमी करने का प्रयास करने लगे।

सपा मुखिया ने महाकुंभ की छवि खराब करने को अपना राजनैतिक लक्ष्य बना लिया है। पार्टी ने महाकुंभ में हिंदू समाज को चिढ़ाने के लिए रामभक्तों का नरसंहार करने वाले उनके पिता मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा लगवाई और अपने चाचा के अस्थि विसर्जन के समय उनके गंगा स्नान को कुम्भ से जोड़कर प्रसारित किया। हिंदू समाज का दबाव बढ़ने पर अखिलेश यादव गणतंत्र दिवस के दिन महाकुंभ मेले में स्नान करने के लिए पहुंच गये थे और अपने पिता को महान संत कह डाला । सपा मुखिया अखिलेश यादव उस समय महाकुंभ पहुंचे जब मौनी अमावस्या पर स्नान करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा था। स्पष्ट है कि सपा मुखिया अखिलेष यादव अपनी विकृत राजनीति का संदेश देने ही प्रयागराज गये थे।

श्रद्धालुओं के भारी दबाव के कारण संगम तट पर दुखद भगदड़ की स्थिति बनी और 30 श्रद्धालु मौन हो गये। प्रशासन की सतर्कता से स्थिति शीघ्र ही नियंत्रण में आ गई अन्यथा यह त्रासदी और भयावह हो सकती थी। अधिकारियों ने जिस प्रकार से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर घायलों को तत्काल स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाईं तथा संगम घाट पर स्नान अआरम्भ कराया वह अत्यंत प्रशंसनीय है। व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के साथ ही घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोग भी बना दिया गया है क्योंकि घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के बयान किसी षड्यंत्र का संकेत दे रहे हैं।

इस दुर्घटना के बाद न तो सनातनी श्रद्धालुओं की निष्ठा पर कोई असर पड़ा और न ही योगी जी की कर्तव्यनिष्ठा पर उनके विश्वास को ठेस पहुंची किन्तु सपा मुखिया अखिलेश यादव और अन्य विरोधियों को राजनैतिक रोटियां सेंकने का अवसर अवश्य मिल गया । बिल्ली के भाग्य से छींका टूट ही गया । विपक्षी इस दुर्घटना में अपनी राजनीति का आसान रास्ता खोज रहे हैं। इन्हें अपना इतिहास याद करना चाहिए।

जब नेहरू ओैर सपा सरकार में मची थी भगदड़ – 1947 में अंग्रेजों के जाने के बाद भारत का प्रथम पूर्णकुंभ तत्कालीन इलाहाबाद में 1954 में लगा था। उस वर्ष मौनी अमावस्या 3 फरवरी को पड़ी थी। तब बारिश के कारण चारों ओर कीचड़ और फिसलन थी। सुबह लगभग आठ से नौ बजे के मध्य सूचना आई कि प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू स्नान करने के लिए आ रहे हैं, भीड़ उन्हें देखने के लिए टूट पड़ी और भगदड़ मच गई। जिसके कारण कम से कम 1000 लोग मारे गये और अनेकानेक घायल हुए तथा कई लापता हो गये। जो कांग्रेसी आज महकुंभ की दुर्घटना पर सोशल मीडिया में जहर उगल रहे हैं उन्हें अपने कर्म व इतिहास याद रखने चाहिए। जो कांगेस पार्टी आज योगी सरकार से इस्तीफा मांग रही है उस समय राज्य में उसी कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और कांग्रेसी मुख्यमंत्री ने बयान दिया था कि यहां पर कोई दुर्घटना घटी ही नहीं है । उस समय के एक खोजी पत्रकार एन एन मुखर्जी जो उस समय वहां पर उपस्थित थे उन्होंने कुंभ की कुछ तस्वीरें खींच ली थी जो छायाकृति नामक एक हिंदी पत्रिका में प्रकाशित हुयी थीं और सच सामने आया था। उस समय दबाव बढ़ने पर सरकार की ओर से शर्मनाक बयान दिया गया था कि वहां पर कुछ भिखारी ही मरे हैं । उस समय राजभवन में सरकारी पार्टियों का दौर चल रहा था, जिसकी तस्वीरें तत्कालीन समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई थी। उपन्यासकार समरेश बसु ने “अमृत कुंभ की खोज“ उपन्यास में नेहरु जी के कारन कुम्भ में हुयी इस दुर्घटना का हृदयविदारक विवरण लिखा था और यह अमृत बाजार पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। उस समय के नेहरू भक्तों का कहना था कि घटना के समय नेहरू जी वहां पर नहीं थे किंतु बाद में उन्होंने ही इस बात से संसद में पर्दा उठाया था कि वह दुर्घटना के समय वहां पर मौजूद थे और उनका यह बयान आज भी संसद के लाइब्रेरी कक्ष में मौजूद है।

इसके विपरीत आज प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्थिति पर तुरंत नियंत्रण किया गया है, स्वयं मुख्यमंत्री दिन रात वाररूम में स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।

वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी और उस समय कुम्भ में मची भगदड़ में मृतकों को कफन तक नहीं नहीं उपलब्ध हो सका था। अखिलेश यादव ने कुंभ की जिम्मेदारी अपने मुस्लिम मंत्री आजम खां को दी थी । 10 फरवरी 2013, मौनी अमावस्या का दिन था लगभग लोग गंगा की पवित्र डुबकी लगाकर वापस जा रहे थे तभी शाम को प्रयागराज जंक्शन पर चीख पुकार मच उठी। रेल का प्लेटर्म बदलने की घोषणा हो जाने के कारण रेलवे पुल पर बहुत भीड़ हो गई थी और सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार भगदड़ से 36 लोगो की जानें चली गई। उस समय रेलवे कुंभ वार्ड में ताला लगा हुआ था और कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। रुई और पट्टी को छोड़कर कोई चिकित्सा व्यवस्था नहीं थी।

आज की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पीड़ित परिवारों को 25 -25 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा की है जबकि अखिलेश यादव ने तो मात्र एक लाख रुपये की ही सहायता राशि दी थी और पीड़ितों को उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था तक नहीं की थी। योगी सरकार पर सवाल उठाने वालों को अपना इतिहास याद रखना चाहिए।

अभी तक महाकुंभ में हुए किसी भी हादसे की जांच, किसी भी सरकार ने नहीं करवायी है यह योगी सरकार ही है जो महाकुंभ हादसे की दो स्तरीय जांच करवाने जा रही है जिसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। यह बहुत ही गर्व की बात है कि महाकुंभ में दुखद दुर्घटना के बाद भी सनातन हिंदू समाज का उत्साह कम नहीं हुआ है अपितु वहां पर श्रद्धालुओं का सैलाब लगातर उमड़ रहा है और वे उसी भक्ति, श्रद्धा और आस्था से पवित्र दुबकी लगा रहे हैं ।

दिल्ली की शिक्षा नीति: दावे बनाम वास्तविकता

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दिल्ली: दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति और सरकार के दावों के बीच के अंतर को उजागर करने के लिए एक पत्रकार वार्ता का आयोजन मारिगोल्ड हॉल, इंडिया हैबिटेट सेंटर में शाम 5 बजे से 6 बजे तक किया गया। इसमें जेएनयू, दिल्ली विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया के शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के सामाजिक विज्ञान संकाय के सहायक प्रोफेसर, डॉ. शुभ गुप्ता ने एक गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया, जिसमें दिल्ली सरकार की शिक्षा संबंधी नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच गंभीर असमानताएं उजागर हुईं।
अन्यायपूर्ण संसाधन वितरण और बजटीय कटौती

दिल्ली सरकार यह दावा करती है कि उसका 25% बजट शिक्षा के लिए आवंटित किया जाता है, लेकिन अध्ययन में सामने आया कि शिक्षा के लिए दी जाने वाली धनराशि का समान रूप से वितरण नहीं किया जा रहा है।

दक्षिण पश्चिम ए (South West A) जैसे संपन्न जिलों को प्रति छात्र अधिक अनुदान मिलता है, जबकि करोल बाग (अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्र), ओखला और बल्लीमारान (मुस्लिम बहुल क्षेत्र) जैसे वंचित इलाकों में शिक्षा के लिए वित्तीय संकट बना हुआ है।

कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों को अधिक बजट आवंटित किया गया है, जबकि घनी आबादी वाले और हाशिए पर बसे समुदायों के जिलों को अपेक्षाकृत कम वित्तीय सहायता दी जा रही है।

2024-25 के लिए शिक्षा पूंजीगत व्यय में ₹543 करोड़ की कटौती के कारण पिछड़े जिलों में अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) परियोजनाएं ठप पड़ी हैं।

RPVV को SOSE में परिवर्तित करने के प्रभाव

मार्च 2021 में राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालयों (RPVV) को स्कूल ऑफ स्पेशलाइज़्ड एक्सीलेंस (SOSE) में पुनर्गठित किया गया।
इस प्रक्रिया ने सरकारी स्कूलों के छात्रों की तुलना में निजी स्कूलों के छात्रों को अधिक लाभ पहुंचाया।
SOSE स्कूल GFR (जनरल फाइनेंशियल रूल्स) का पालन नहीं करते, जिससे वित्तीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
2022 से 2023 के बीच शिक्षकों के वेतन व्यय में 36% की गिरावट आई, जिससे शिक्षकों की भारी कमी होने की संभावना है।
सुरक्षा और स्वच्छता बजट में कोविड महामारी के दौरान अभूतपूर्व वृद्धि हुई, लेकिन उसके बाद सुरक्षा पर खर्च 26% और स्वच्छता पर 16.3% तक घटा दिया गया।
कोविड के दौरान जब स्कूल बंद थे, तब भी सेनिटाइज़र और मास्क की खरीद के लिए स्वच्छता बजट के अन्य बजटों से धनराशि ली गई, जिससे अनियमितता की संभावना है।
छात्रों की शिक्षा से व्यवस्थित बहिष्करण
2023-24 में कक्षा IX से X तक छात्रों का ड्रॉपआउट दर 44% रहा, जिससे संकेत मिलता है कि कमज़ोर छात्रों को सुनियोजित तरीके से बाहर किया जा रहा है।
कमजोर छात्रों को मुख्य धारा की शिक्षा से पटराचर विद्यालय और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) में स्थानांतरित किया जा रहा है, ताकि X और XII कक्षा की परीक्षा के उत्तीर्ण प्रतिशत को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जा सके।
NIOS में नामांकन पिछले एक दशक में 12.5 गुना बढ़ा है, जो मुख्यधारा की शिक्षा में गहरे संकट को दर्शाता है।
अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों का प्रतिशत 2014 में 16.5% था, जो 2024 में घटकर 12.5% रह गया, जिससे SC छात्रवृत्ति कार्यक्रमों की असफलता उजागर होती है।
मासिक धर्म अनुपस्थिति और बुनियादी सुविधाओं की कमी
कुछ सरकारी स्कूलों में मासिक धर्म के दौरान 40% छात्राएं अनुपस्थित रहती हैं, और जिन स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, वहां अनुपस्थिति दर 65% तक पहुंच जाती है।
यह दर्शाता है कि सरकारी स्कूलों में मूलभूत स्वच्छता सुविधाएं अभी भी अपर्याप्त हैं।
खेल और छात्रवृत्ति योजनाओं में वित्तीय अनियमितता
स्कूलों में खेल के मैदानों का आकार कम किया जा रहा है, जिससे खेल गतिविधियों पर बुरा असर पड़ रहा है और समय – समय पर खेल के मैदान छोटे होने के कारण तनाव की स्थिति पैदा होती रहती है ।
” Cash Incentives to the Outstanding Players/Sportsman and Rajiv Gandhi Sport Award – Rewards” योजना के तहत ₹13-14 करोड़ खर्च होने के बावजूद, खिलाड़ियों को मात्र ₹12 लाख आवंटित किए गए। 2023 में इस योजना का कोड बदल दिया गया, जिससे धन के दुरुपयोग की आशंका और बढ़ जाती है।
दिल्ली सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। इस रिपोर्ट के निष्कर्ष शिक्षा प्रणाली में समावेशिता और गुणवत्ता को बहाल करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता को उजागर करते हैं, विशेष रूप से वंचित समुदायों के छात्रों के लिए।

फिल्म निर्माता नवीन पाठक और गोविन्द गिरी होली बाद 5 फिल्मों की शूटिंग करेंगे शुरू

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मुंबई : कुकी इंटरनेशनल फिल्म्स एंड कैलटेक्स इंटरनेशनल फिल्म्स प्रा.लि. बैनर के तले भोजपुरी फ़िल्म निर्माता नवीन पाठक और गोविन्द गिरी ने होली बाद बैक टू बैक पाँच भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग शुरू करेंगे। अलग-अलग फ़िल्म निर्देशक उक्त पाँचों फिल्मों का निर्देशन करेंगे। उन पाँचों फिल्मों के सह-निर्माता जीवा इंटरटेनमेंट (वैभव राय) हैं। फिल्म की शूटिंग का लोकेशन और कलाकारों के बारे में अति शीघ्र जानकारी दी जाएगी।

गौरतलब है कि फिल्म निर्माता नवीन पाठक और गोविन्द गिरी का उद्देश्य है पूरी भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री को एक साथ लेकर चलना, सबके साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ते रहना और भोजपुरी सिनेमा जगत में अपना अहम योगदान देना। इसी कड़ी में उन्होंने अपने प्रोडक्शन हाउस से लगातार तीन भोजपुरी फिल्म ‘हो हल्ला’, ‘भाड़े की दुल्हन’ और ‘बाबुल का घर प्यारा लगे’ की शूटिंग कंप्लीट करके मिसाल कायम कर दिया है और अब एक साथ पाँच फिल्मों का निर्माण करने की घोषणा करके तहलका मचा दिया है।

गौरतलब है कि भव्य पैमाने पर बनाई जाने वाली पाँचों फ़िल्म का विवरण इस प्रकार है:- भोजपुरी फिल्म ‘केहू केतनो दुलारी बाकी माई ना होई’ का निर्माण कुकी इंटरनेशनल फिल्म्स एंड कैलटेक्स इंटरनेशनल फिल्म्स प्रा.लि. बैनर के तले किया जाएगा, जिसके निर्माता नवीन पाठक व गोविन्द गिरी हैं। सह निर्माता जीवा इंटरटेनमेट (वैभव राय) हैं। निर्देशक नीलमणी सिंह हैं। लेखक मनोज के. कुशवाहा, संगीतकार साजन मिश्रा, डिजाईनर प्रशांत हैं।’

वहीं फिल्म ‘हम ही हैं ठाठ बनारासिया’ का निर्माण कैलटेक्स इंटरनेशनल फिल्म्स व कुकी इंटरनेशनल फिल्म्स प्रा.लि. बैनर के तले होगा, जिसके निर्माता गोविन्द गिरी व नवीन पाठक हैं। सह निर्माता जीवा इंटरटेनमेट (वैभव राय), निर्देशक देव पाण्डेय हैं। कथा, पटकथा व संवाद सभा वर्मा ने लिखा है। संगीतकार साजन मिश्रा, डिजाईनर प्रशांत हैं।

कैलटेक्स इंटरनेशनल फिल्म्स प्रा.लि. व कुकी इंटरनेशनल फिल्म्स बैनर के तले देसी लोटा प्रस्तुत भोजपुरी फिल्म ‘महिमा जितिया माई के’ के निर्माता गोविन्द गिरी व नवीन पाठक हैं। सह निर्माता जीवा इंटरटेनमेट (वैभव राय) हैं। निर्देशक सुनील माँझी हैं। लेखक इन्द्रजीत कुमार, संगीतकार साजन मिश्रा, छायांकन डीके शर्मा, डिजाईनर प्रशांत हैं।

कुकी इंटरनेशनल फिल्म्स एंड कैलटेक्स इंटरनेशनल फिल्म्स प्रा.लि. बैनर के तले बनने वाली भोजपुरी फिल्म ‘प्रोडक्शन नं० 7’ के निर्माता नवीन पाठक व गोविन्द गिरी हैं। निर्देशक संजय कुमार श्रीवास्तव हैं। सह निर्माता जीवा इंटरटेनमेट (वैभव राय) हैं। लेखक सभा वर्मा, संगीतकार साजन मिश्रा, डिजाईनर प्रशांत हैं।

कुकी इंटरनेशनल फिल्म्स एंड कैलटेक्स इंटरनेशनल फिल्म्स प्रा.लि. बैनर के तले ‘प्रोडक्शन नं० 8’ का निर्माण होगा, जिसके निर्माता नवीन पाठक व गोविन्द गिरी हैं। निर्देशक दीपक शंकर सिंह हैं। सह निर्माता जीवा इंटरटेनमेट (वैभव राय) हैं। लेखक सभा वर्मा, संगीतकार साजन मिश्रा, डिजाईनर प्रशांत हैं।

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