संघ किसी के विरोध में नहीं बना,संगठित होना समाज की स्वाभाविक अवस्थाः डा.मोहनराव भागवत

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नई दिल्ली। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के प्रथम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है। संघ कार्य की प्रेरणा संघ प्रार्थना के अंत में कहे जाने वाले ‘भारत माता की जय’ से मिलती है। संघ के उत्थान की प्रक्रिया धीमी और लंबी रही है, जो आज भी निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि संघ भले हिन्दू शब्द का उपयोग करता है, लेकिन उसका मर्म ‘वसुधैव कुटुंबकम’ है। इसी क्रमिक विकास के तहत गांव, समाज और राष्ट्र को संघ अपना मानता है। संघ कार्य पूरी तरह स्वयंसेवकों द्वारा संचालित होता है। कार्यकर्ता स्वयं नए कार्यकर्ता तैयार करते हैं।

दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘100 वर्ष की संघ यात्रा – नए क्षितिज’ विषय पर तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया है।

व्याख्यानमाला के उद्देश्य पर मोहन भागवत जी ने कहा कि संगठन ने विचार किया कि समाज में संघ के बारे में सत्य और सही जानकारी पहुंचनी चाहिए। वर्ष 2018 में भी इसी प्रकार का आयोजन हुआ था। इस बार चार स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों तक संघ का सही स्वरूप पहुँच सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की परिभाषा सत्ता पर आधारित नहीं है। हम परतंत्र थे, तब भी राष्ट्र था। अंग्रेजी का ‘नेशन’ शब्द ‘स्टेट’ से जुड़ा है, जबकि भारतीय राष्ट्र की अवधारणा सत्ता से जुड़ी नहीं है।

स्वतंत्रता संग्राम और उसके बाद देश में उपजी विचारधाराओं का विकास पर कहा कि 1857 में स्वतंत्रता का पहला प्रयास असफल रहा, लेकिन उससे नई चेतना जागी। उसके बाद आंदोलन खड़ा हुआ कि आखिर कुछ मुट्ठीभर लोग हमें कैसे हरा सके। एक विचार यह भी उभरा कि भारतीयों में राजनीतिक समझ की कमी है। इसी आवश्यकता से कांग्रेस का उदय हुआ, लेकिन स्वतंत्रता के बाद वह वैचारिक प्रबोधन का कार्य सही प्रकार से नहीं कर सकी। यह दोषारोपण नहीं, बल्कि तथ्य है। आजादी के बाद एक धारा ने सामाजिक कुरीतियों को मिटाने पर जोर दिया, वहीं दूसरी धारा ने अपने मूल की ओर लौटने की बात रखी। स्वामी दयानंद सरस्वती और स्वामी विवेकानंद ने इस विचार को आगे बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और अन्य महापुरुषों का मानना था कि समाज के दुर्गुणों को दूर किए बिना सब प्रयास अधूरे रहेंगे। बार-बार गुलामी का शिकार होना इस बात का संकेत है कि समाज में गहरे दोष हैं। हेडगेवार जी ने ठाना कि जब दूसरों के पास समय नहीं है, तो वे स्वयं इस दिशा में काम करेंगे। 1925 में संघ की स्थापना कर उन्होंने संपूर्ण हिन्दू समाज के संगठन का उद्देश्य सामने रखा।

हिन्दू नाम का मर्म समझाते हुए सरसंघचालक जी ने स्पष्ट किया कि ‘हिन्दू’ शब्द का अर्थ केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव है। यह नाम दूसरों ने दिया, पर हम अपने को हमेशा मानव शास्त्रीय दृष्टि से देखते आये हैं। हम मानते हैं कि मनुष्य, मानवता और सृष्टि आपस में जुड़े हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। हिन्दू का अर्थ है समावेश और समावेश की कोई सीमा नहीं होती। सरसंघचालक जी ने कहा कि हिन्दू यानी क्या – जो इसमें विश्वास करता है, अपने अपने रास्ते पर चलो, दूसरों को बदलो मत। दूसरे की श्रद्धा का भी सम्मान करो, अपमान मत करो, ये परंपरा जिनकी है, संस्कृति जिनकी है, वो हिन्दू हैं। हमें संपूर्ण हिन्दू समाज का संगठन करना है। हिन्दू कहने से यह अर्थ नहीं है कि हिन्दू वर्सेस ऑल, ऐसा बिल्कुल नहीं है। ‘हिन्दू’ का अर्थ है समावेशी।

उन्होंने कहा कि भारत का स्वभाव समन्वय का है, संघर्ष का नहीं है। भारत की एकता का रहस्य उसके भूगोल, संसाधनों और आत्मचिंतन की परंपरा में है। हमने बाहर देखने के बजाय भीतर झाँककर सत्य को तलाशा। इसी दृष्टि ने हमें सिखाया कि सबमें एक ही तत्व है, भले ही वह अलग-अलग रूपों में दिखता हो। यही कारण है कि भारत माता और पूर्वज हमारे लिए पूजनीय हैं।

मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत माता और अपने पूर्वजों को मानने वाला ही सच्चा हिन्दू है। कुछ लोग खुद को हिन्दू मानते हैं, कुछ भारतीय या सनातनी कहते हैं। शब्द बदल सकते हैं, लेकिन इनके पीछे भक्ति और श्रद्धा की भावना निहित है। भारत की परंपरा और डीएनए सभी को जोड़ता है। विविधता में एकता ही भारत की पहचान है। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे वे लोग भी स्वयं को हिन्दू कहने लगे हैं, जो पहले इससे दूरी रखते थे। क्योंकि जब जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है तो लोग मूल की ओर लौटते हैं। हम लोग ऐसा नहीं कहते कि आप हिन्दू ही कहो। आप हिन्दू हो, ये हम बताते हैं। इन शब्दों के पीछे शब्दार्थ नहीं है, कंटेंट है, उस कंटेंट में भारत माता की भक्ति है, पूर्वजों की परंपरा है। 40 हजार वर्ष पूर्व से भारत के लोगों का डीएनए एक है। उन्होंने कहा कि जो अपने आपको हिन्दू कह रहे हैं, उनका जीवन अच्छा बनाओ। जो नहीं कहते वो भी कहने लगेंगे। जो किसी कारण भूल गये, उनको भी याद आयेगा। लेकिन करना क्या है, संपूर्ण हिन्दू समाज का संगठन। जब हम हिन्दू राष्ट्र कहते हैं तो किसी को छोड़ रहे हैं, ऐसा नहीं है। संघ किसी विरोध में और प्रतिक्रिया के लिए नहीं निकला है। हिन्दू राष्ट्र का सत्ता से कोई लेना देना नहीं है।

उन्होंने संघ कार्य पद्धति के बारे में कहा कि समाज उत्थान के लिए संघ दो मार्ग अपनाता है – पहला, मनुष्यों का विकास करना और दूसरा उन्हीं से आगे समाज कार्य कराना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन है। संगठन का कार्य मनुष्य निर्माण का कार्य करना है। संघ के स्वयंसेवक विविध क्षेत्रों में काम करते हैं, लेकिन संगठन उन्हें नियंत्रित नहीं करता। उन्होंने कहा कि संघ को लेकर विरोध भी हुआ और उपेक्षा भी रही। लेकिन संघ ने समाज को अपना ही माना।

व्यक्तिगत समर्पण से चलता है संघ

संघ की विशेषता है कि यह बाहरी स्रोतों पर निर्भर नहीं, बल्कि स्वयंसेवकों के व्यक्तिगत समर्पण पर चलता है। ‘गुरु दक्षिणा’ संघ की कार्यपद्धति का अभिन्न हिस्सा है, जिसके माध्यम से प्रत्येक स्वयंसेवक संगठन के प्रति अपनी आस्था और प्रतिबद्धता प्रकट करता है। यह प्रक्रिया निरंतर जारी है। हमारा प्रयास होता है कि विचार, संस्कार और आचार ठीक रहे। इतनी हमें स्वयंसवेक की चिंता करनी है, संगठन की चिंता वो करते हैं। हम सबको मिलकर भारत में गुट नहीं बनाना है। सबको संगठित करना है।

इस दौरान संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, उत्तर क्षेत्र संघचालक पवन जिंदल और दिल्ली प्रांत के संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल मंच पर उपस्थित रहे।

इस तीन दिवसीय आयोजन के प्रथम दिन सेवानिवृत न्यायाधीश, पूर्व राजनयिक, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न देशों के राजनयिक, मीडिया संस्थानों के प्रमुख, पूर्व सेनाधिकारी और खेल व कला क्षेत्र से जुड़ी हस्तियां उपस्थित रहीं।

सीआईएसएफ ने शुरू की पहली ऑल-वुमन कमांडो टीम की ट्रेनिंग, बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी

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दिल्ली। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पहली बार, सीआईएसएफ ने एक ऑल-वुमन कमांडो टीम गठित की है, जिसकी ट्रेनिंग मध्य प्रदेश के बरवाहा स्थित क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र में शुरू हो चुकी है। इस आठ सप्ताह के गहन कमांडो प्रशिक्षण में 100 महिला कर्मियों को शामिल किया गया है, जो वर्तमान में देशभर के हवाई अड्डों पर विमानन सुरक्षा समूह (एएसजी) का हिस्सा हैं।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शारीरिक फिटनेस, हथियार प्रशिक्षण, तनावपूर्ण परिस्थितियों में लाइव-फायर ड्रिल, रैपलिंग, जंगल में जीवित रहने के कौशल और 48 घंटे की आत्मविश्वास-निर्माण गतिविधियों पर केंद्रित है। पहला बैच, जिसमें 30 महिलाएं शामिल हैं, 11 अगस्त से 4 अक्टूबर तक प्रशिक्षण ले रहा है, जबकि दूसरा बैच 6 अक्टूबर से शुरू होगा। ये कमांडो क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) में तैनात होंगी, जो हवाई अड्डों और अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।

सीआईएसएफ में वर्तमान में 12,491 महिला कर्मी हैं, जो कुल बल का 8% हैं। गृह मंत्रालय के 10% प्रतिनिधित्व लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2026 में 2,400 और महिलाओं की भर्ती की जाएगी। यह पहल न केवल लैंगिक समानता को बढ़ावा देती है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करती है।

3700 करोड़ रुपये लागत से 95 एकड़ में बनेंगे राजस्थान मण्डपम और जीसीसी

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जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में प्रदेश की आर्थिक समृद्धि, सतत् विकास एवं समावेशी प्रगति के विजन डॉक्यूमेंट ‘विकसित राजस्थान/2047’ एवं 2 नीतियों को मजूंरी दी गई। इसके साथ ही, आगामी विधानसभा सत्र को देखते हुए 3 विधेयकों के प्रारूप के अनुमोदन, परवन बांध डूब क्षेत्र के विस्थापितों को विशेष अनुग्रह राशि स्वीकृत करने तथा युवाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन देने से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले किए गए।

संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ तथा जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी ने पत्रकार वार्ता में बताया कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप राज्य सरकार के ‘विकसित राजस्थान/2047’ विजन डॉक्यूमेंट का मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य को आर्थिक समृद्धि, सतत् विकास एवं समावेशी प्रगति की दिशा में सशक्त, आत्मनिर्भर एवं विकसित बनाने का रोडमैप है। विजन डॉक्यूमेंट के अनुरूप संबंधित विभाग विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे तथा वित्तीय आवश्यकताओं का वर्षवार आकलन कर उपलब्ध संसाधनों के अनुसार इसकी क्रियान्विति करेंगे।

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि इस विजन डॉक्यूमेंट में राजस्थान को वर्ष 2030 तक 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और वर्ष 2047 तक 4.3 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें जनकल्याण एवं सामाजिक सशक्तीकरण, तीव्र विकास एवं रोजगार सृजन, भविष्य उन्मुख राजस्थान के लिए भौतिक अवसंरचना और सतत विकास तथा सहायक आधार नीति, वित्त एवं शासन थीम्स को शामिल किया गया है। इस दस्तावेज में शत-प्रतिशत साक्षरता, छात्र-केंद्रित और कौशल आधारित शिक्षा प्रणाली, युवाओं और महिलाओं का सशक्तीकरण, सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, सतत् जल प्रबंधन, स्मार्ट शहरीकरण, किफायती आवास, आधुनिक परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के लिए विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को स्वावलंबी बनाने एवं रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करने के उद्देश्य से विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना को मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी प्रदान की गई। इस योजना के तहत 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को वित्तीय संस्थानों के माध्यम से मार्जिन मनी एवं कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे स्वयं का उद्यम स्थापित कर सकेंगे या पहले से स्थापित उद्यम का विस्तार, विविधीकरण अथवा आधुनिकीकरण कर सकेंगे। योजना में अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर 8 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान दिया जाएगा। महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग श्रेणी के उद्यमियों, ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित उद्यम, कार्ड धारक बुनकर एवं शिल्पकारों को 1 करोड़ से अधिक और 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर 1 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान मिलेगा। साथ ही, वित्तीय संस्थान द्वारा दिए गए ऋण पर 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम 5 लाख रुपये तक मार्जिन मनी अनुदान भी प्रदान किया जाएगा।

रिम्स की स्थापना के लिए आएगा विधेयक

संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने कहा कि वर्ष 2024-25 की बजट घोषणा की अनुपालना में राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज का उन्नयन कर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स), जयपुर की स्थापना के लिए विधेयक के प्रारूप पर कैबिनेट में सहमति प्रदान की गई। एम्स, नई दिल्ली की तर्ज पर यह संस्थान राज्य का एकमात्र पीजी स्तर का चिकित्सा संस्थान होगा। इसके माध्यम से सुपर-स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं को नया आयाम मिलेगा तथा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति होगी।

श्री पटेल ने कहा कि सवाई मानसिंह चिकित्सा महाविद्यालय के अधीन संचालित राज्य कैंसर संस्थान भी रिम्स में शामिल होगा। आरयूएचएस में कार्यरत सभी वर्तमान फैकल्टी, कर्मचारी और स्टाफ के पास सरकार में शामिल होने या आरयूएचएस के कर्मचारी के रूप में बने रहने का विकल्प होगा। राज्य के मुख्य सचिव रिम्स के अध्यक्ष होंगे। रिम्स में प्रमुख का दायित्व निभाने के लिए निदेशक की नियुक्ति की जाएगी।

नगरीय क्षेत्रों के लिए भूमि आवंटन नीति-2025 को मंजूरी

संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि राज्य में सार्वजनिक, सामाजिक, धार्मिक एवं चैरिटेबल संस्थाओं, ट्रस्ट, निजी निवेशकों, कम्पनियों तथा विभिन्न विभागों द्वारा शैक्षणिक, चिकित्सकीय, औद्योगिक, व्यावसायिक और पर्यटन इकाइयों आदि के लिए भूमि आवंटन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी, एकरूप बनाने के उद्देश्य से ‘नगरीय क्षेत्रों में विभिन्न उद्देश्यों के लिए भूमि आवंटन नीति-2025’ लाई जा रही है। इस नीति में विभिन्न सामाजिक उपयोगों हेतु भूमि आवंटन आरक्षित/डी.एल.सी. दर की 40 प्रतिशत दर पर किया जाएगा। रीको एवं आवासन मंडल को अविकसित भूमि कृषि डी.एल.सी. दर पर आवंटित की जा सकेगी। राजकीय विभागों को उनकी गतिविधियों हेतु निर्धारित सीमा तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी। साथ ही पर्यटन, आई.टी. उद्योग जैसी विशिष्ट नीतियों के तहत भी राज्य सरकार की स्वीकृति से भूमि आवंटन किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यह नीति भूमि आवंटन नीति-2015 को प्रतिस्थापित करेगी। इस नीति के अंतर्गत आवासीय परियोजना, वाणिज्यिक परिसर, रिटेल फ्यूल स्टेशन, गैस वितरण प्रोजेक्ट, गैस गोदाम, रेड कैटेगरी उद्योग आदि को भूमि आवंटन नहीं किया जाएगा।

एयरो स्पोर्ट्स गतिविधियों हेतु हवाई पट्टियों की भूमि लीज आवंटन नीति

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि राज्य में एयरो स्पोर्ट्स गतिविधियों को बढ़ावा देने, वर्तमान में कम उपयोग में आ रही हवाई पट्टियों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने और एडवेंचर ट्यूरिज्म को प्रोत्साहन देने के लिए “एयरो स्पोर्ट्स गतिविधियों हेतु हवाई पट्टियों की भूमि लीज आवंटन नीति“ को मंजूरी दी गई है। इस नीति से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हांगे, साथ ही राज्य के राजस्व तथा जीडीपी में भी अभिवृद्धि होगी। इस नीति के तहत भूमि का लीज शुल्क 100 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष तथा कंसेशन शुल्क 6 लाख रुपये प्रति एयरस्ट्रिप प्रति वर्ष होगा। पहले 5 वर्षों तक दरों में 5 प्रतिशत एवं 6वें से 20वें वर्ष तक 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि की जाएगी। लीज अवधि अधिकतम 20 वर्ष की होगी तथा अधिकतम 2000 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की जा सकेगी।

एनबीसीसी करेगी राजस्थान मण्डपम, जीसीसी टावर का निर्माण
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने बताया कि बी-2 बाईपास, जयपुर स्थित रीको की 95 एकड़ भूमि पर राजस्थान मण्डपम, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी टावर का निर्माण राजस्व सृजन सह विकास मॉडल के आधार पर एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के माध्यम से कराये जाने के प्रस्ताव का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन किया गया। इस भूमि पर राजस्थान मण्डपम, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर/आईटी टावर, 5-स्टार होटल, 4-स्टार होटल, आवासीय एवं वाणिज्यिक टावरों का विकास किया जाएगा। परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 3700 करोड़ रुपए है, जिसमें 635 करोड़ रुपये की भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। परियोजना पूर्ण होने की अनुमानित अवधि 30 माह है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान मण्डपम लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में कन्वेंशन सेंटर के रूप में 2200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जायेगा, जिसकी क्षमता 7000 से 7500 व्यक्तियों की होगी। इस 95 एकड़ भूमि में से 15 हजार वर्गमीटर भूमि पर यूनिटी मॉल का निर्माण भी कार्यकारी एजेन्सी रीको के माध्यम से करवाया जा रहा है, जो लगभग डेढ़ साल में पूरा होने की सम्भावना है।

राजस्थान राज्य राजमार्ग शुल्क नियम में एक्सप्रेसवे की दरों में संशोधन

कर्नल राठौड़ ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 की बजट घोषणा के अनुसार एक्सप्रेसवे की 7 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार करवाई जा रही है। अब तक 4 एक्सप्रेसवे परियोजनाओं कोटपूतली-किशनगढ़, जयपुर-भीलवाड़ा, ब्यावर-भरतपुर, जयपुर-फलौदी की रिपोर्ट डीपीआर सलाहकार द्वारा प्रस्तुत की गई है जबकि शेष 3 परियोजनाओं जालोर-झालावाड़, अजमेर-बांसवाड़ा एवं श्रीगंगानगर की रिपोर्ट का कार्य अभी प्रगति पर है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान राज्य राजमार्ग शुल्क नियम, 2015 के अनुसार एक्सप्रेसवे पर शुल्क की दरें वर्तमान में राज्य राजमार्गों की निर्धारित दर से दोगुनी हैं, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग एक्सप्रेसवे पर यह दर 1.25 गुणा है। राज्य राजमार्ग एक्सप्रेसवे के लिए भी दरें भारत सरकार की अधिसूचना के अनुरूप करने के लिए नियमों में संशोधन की स्वीकृति दी गई।

कारखाना (राजस्थान संशोधन) विधेयक – 2025

उन्होंने कहा कि कारखाना अधिनियम, 1948 (केन्द्रीय अधिनियम) में संशोधन करने के लिए कारखाना (राजस्थान संशोधन) विधेयक- 2025 के प्रारूप का अनुमोदन भी किया गया। इस प्रस्तावित संशोधन से कारखाना श्रमिकों के साप्ताहिक कार्यसमय 48 घंटों में उनकी दैनिक कार्य अवधि अधिकतम 9 घंटे से बढ़ा कर 10 घंटे तथा विश्राम से पूर्व कार्य की अधिकतम अवधि 5 घंटे से बढ़ा कर 6 घंटे की जाएगी। कार्य समय एवं विश्राम अवधि सहित कारखाना श्रमिकों के कार्यस्थल पर अधिकतम समय की सीमा साढ़े दस घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे की जाएगी। तिमाही में ओवरटाइम की अधिकतम सीमा 144 घंटे की जाएगी। इसके लिए श्रमिक की सहमति आवश्यक होगी। महिला श्रमिकों को सुरक्षा शर्तों एवं लिखित सहमति से रात्रिकालीन पारी (सायं 7 बजे के बाद एवं प्रातः 6 बजे से पूर्व) कार्य की अनुमति दी जा सकेगी।

राजस्थान मत्स्य (संशोधन) विधेयक-2025

श्री पटेल ने बताया कि राजस्थान मत्स्य अधिनियम, 1953 में संशोधन के लिए मंत्रिमंडल द्वारा राजस्थान मत्स्य (संशोधन) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। इस विधेयक में मत्स्य अपराधों के लिए जुर्माने की राशि बढ़ाकर पच्चीस हजार रुपये, पुनः अपराध की स्थिति में पचास हजार रुपये तक करना प्रस्तावित किया गया है। अपराधों के शमन हेतु निर्धारित राशि को सौ रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है। यह संशोधन इसलिए आवश्यक थे क्योंकि मत्स्य अपराधों को रोकने के लिए वर्तमान में निर्धारित जुर्माना राशि अत्यंत कम है।

विभिन्न सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी

श्री पटेल ने बताया कि विधानसभा में अतिरिक्त मार्शल के पद पर पदोन्नति हेतु उप मार्शल का 2 वर्ष का अनुभव सहित 10 वर्ष के अनुभव का प्रावधान किया जा रहा है। उप मार्शल के पद के 2 वर्ष के अनुभव का एक-बारीय शिथिलन भी दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राजस्थान तकनीकी शिक्षा अधीनस्थ सेवा में प्रतियोगी परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान करने के साथ ही न्यूनतम योग्यता अंक 40 प्रतिशत निर्धारित किए जाएंगे। एससी-एसटी अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान शिक्षा सेवा (महाविद्यालय शाखा) में भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में प्रत्येक प्रश्नपत्र में न्यूनतम 36 प्रतिशत अंक तथा औसत 40 प्रतिशत अंक अनिवार्य होंगे। एससी-एसटी अभ्यर्थियों को उपरोक्त में 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसके लिए संबंधित नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई।

अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन

उन्होंने बताया कि नए सोलर प्रोजेक्ट्स की स्थापना और पहले से चल रहे सोलर प्रोजेक्ट्स के विस्तार के लिए मंत्रिमंडल की बैठक में 10 प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया। 1283 हेक्टेयर भूमि पर लगने वाली इन परियोजनाओं से प्रदेश में 2 हजार 400 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता का सृजन होगा।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान

जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी ने बताया कि राज्य के सभी 3 डिस्कॉम में आरडीएसएस के अंतर्गत धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का आरडीएसएस योजना के अंतर्गत क्रियान्वयन किया जाएगा। इसका उद्देश्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आजीविका संबंधी अंतराल को दूर कर उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। इस योजना में ऐसे गांवों को शामिल किया गया है जिनकी जनसंख्या 500 या उससे अधिक है और जिनमें कम से कम 50 प्रतिशत आदिवासी निवासी हैं, साथ ही आकांक्षी जिलों के वे गांव भी सम्मिलित किए गए हैं जहां आदिवासी जनसंख्या 50 प्रतिशत या उससे अधिक है।

श्री खराड़ी ने बताया कि परवन बांध डूब क्षेत्र में आ रहे मकानों के परिवारों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए अलग-अलग प्रकरणों में कुल 52 करोड़ रुपये से अधिक की विशेष अनुग्रह राशि देने का निर्णय किया गया है।

मंत्रिपरिषद् की बैठक में वन स्टेट-वन इलेक्शन को लेकर चर्चा

कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री महोदय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की गई। संसदीय कार्य मंत्री श्री पटेल ने बताया कि राज्य सरकार वन स्टेट, वन इलेक्शन को लागू करने की दिशा में निरंतर जरूरी कदम उठा रही है। पंचायतीराज एवं शहरी निकायों के परिसीमन, पुनर्गठन इत्यादि के संबंध में गठित मंत्रिगणों की कमेटियों द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट को मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य ओबीसी आयोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना करते हुए पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय निकायों के निर्वाचन में अन्य पिछड़ा वर्ग के सम्बन्ध में आरक्षण के बारे में सर्वे पूरा होने के बाद आगामी तीन माह में अनुशंषा देगा।

सुप्रिया श्रीनेत: गोदी पत्रकारिता की ‘पहली चरण-चुंबक’

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दिल्ली। सुप्रिया श्रीनेत, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तेज-तर्रार प्रवक्ता, जिनका नाम आजकल राजनीति और पत्रकारिता के गलियारों में खूब चर्चा में है। कभी टेलीविजन की चकाचौंध में खबरें परोसने वाली सुप्रिया ने पत्रकारिता से राजनीति का रास्ता चुना, लेकिन उनकी यह यात्रा ‘गोदी पत्रकारिता’ के पहले पायदान के रूप में याद की जाती है। आखिर, कैसे बनीं सुप्रिया इस ‘प्रतिष्ठित’ खिताब की हकदार?

सुप्रिया का जन्म एक कांग्रेसी परिवार में हुआ। उनके पिता हर्षवर्धन, महाराजगंज से दो बार सांसद रहे, जिन्होंने जनता दल और कांग्रेस के टिकट पर अपनी सियासी पारी खेली। लखनऊ के लोरेटो कॉन्वेंट और दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने वाली सुप्रिया ने पत्रकारिता में 18 साल बिताए। इंडिया टुडे, एनडीटीवी, और ईटी नाउ में कार्यकारी संपादक के रूप में उन्होंने खूब नाम कमाया। लेकिन 2019 में, जब कांग्रेस ने उन्हें महाराजगंज से लोकसभा टिकट दिया, तो पत्रकारिता का यह सितारा सियासत की कक्षा में आ गया। हार के बावजूद, सुप्रिया ने कांग्रेस की सोशल मीडिया रणनीति और प्रवक्ता की भूमिका में अपनी जगह बनाई।

पर सवाल यह है कि सुप्रिया को ‘पहली गोदी एंकर’ का तमगा कैसे मिला? दरअसल, उनकी पत्रकारिता की शैली में वह तीखापन और पक्षपात था, जो बाद में उनकी राजनीतिक भूमिका में और निखर गया। खबरों को ‘कांग्रेसमय’ रंग देने की उनकी कला ने उन्हें इस ‘गोदी’ खिताब का हकदार बनाया। राहुल गांधी के प्रति उनकी भक्ति इतनी प्रबल है कि माना जाता है कि वह उनके चरणों की छाया तक को चूमने को तैयार रहती हैं। एक बार तो राहुल के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धकियाया भी, लेकिन सुप्रिया का जुनून अडिग रहा।

आज सुप्रिया सोशल मीडिया पर ‘चरण-चुंबक’ जैसे तंज कसती हैं, लेकिन खुद उसी गोदी की गोद में बैठकर कांग्रेस का भोंपू बजाती नजर आती हैं। उनकी यह यात्रा पत्रकारिता से सियासत तक, और सियासत से ‘गोदी’ तक, एक व्यंग्यात्मक सबक है कि सत्ता की निकटता कैसे तटस्थता को निगल जाती है।

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