बांग्लादेश में हिन्दुओं की सुरक्षा हेतु गृह मंत्री से मिले विहिप अध्यक्ष व महामंत्री

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नई दिल्ली। अगस्त 9, 2024। बांगलादेश में हिन्दूओं तथा अन्य अल्पसंख्यकों के ऊपर लगातार हो रहे हमलों व उत्पीड़न की वीभत्स घटनाओं से चिंतित विश्व हिंदू परिषद ने आज भारत के गृह मंत्री श्री अमित शाह से भेंट कर वहाँ उत्पीड़ित समाज की सुरक्षा हेतु शीघ्र आवश्यक कार्यवाही हेतु निवेदन किया। भेंट के बाद परिषद के केन्द्रीय महा-मंत्री श्री बजरंग बागड़ा ने बताया कि आज हमारे अध्यक्ष श्री आलोक कुमार और मैं स्वयं केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से मिले तथा उन्हें बांग्लादेश में हिन्दुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर भारत के हिंदू समाज की व्यथा और चिंता से अवगत कराया तथा माननीय गृह मंत्री से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा हेतु शीघ्र आवश्यक कार्यवाही की मांग की।

श्री बजरंग बागड़ा से बताया कि गृह मंत्री ने उनकी सरकार द्वारा इस दिशा में की गई कार्यवाही से अवगत कराया और कहा कि सरकार इस विषय में पूर्ण संवेदना एवं गंभीरता के साथ आवश्यक कार्यवाही कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने वहाँ गठित अंतरिम सरकार के प्रधान को भेजे अपने शुभकामना संदेश में भी हिन्दुओं की सुरक्षा का विषय उठाया है। विद्यार्थियों सहित समस्त भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है और हिंदू, सिख, बौद्ध एवं ईसाईं अल्पसंख्यकों की और उनके पूजा स्थलों की सुरक्षा पर वहाँ के अधिकारियों के साथ निरंतर सम्पर्क स्थापित कर यथा संभव कार्यवाही की गई है। गृह मंत्री ने आशा जताई है कि जैसे अंतरिम सरकार के प्रधान ने हिन्दू अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की घटनाओं को अस्वीकार नहीँ किया है, वैसे ही वे इन पर तत्काल नियंत्रण स्थापित करने के निमित्त उचित कार्यवाही करेंगे।

इस संबंध में विश्व हिंदू परिषद अपने केन्द्रीय कार्यालय में एक हेल्पलाइन सेवा भी स्थापित करने जा रहा है। जिसका नंबर भी जल्द ही जारी किया जाएगा।

भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुकूल हो भारतीय शिक्षा : डी राम कृष्ण राव

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अयोध्या: मूल्य आधारित शिक्षा से ही श्रेष्ठ समाज का निर्माण संभव है। जीवन निर्माण करने वाली शिक्षा ही आने वाली पीढ़ियों को भारतीय इतिहास ,ज्ञान और भारत बोध कराने के सहायक होगी। शिक्षा एक महा मंत्र है जिसके द्वारा समाज के विकास की गति और प्रगति सुनिश्चित की जाती है ऐसे में राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 पूरे शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तन के लिए अग्रसर है ।

उक्त बातें विधा भारती द्वारा साकेत निलयम – अयोध्या में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय मंत्री समूह की कार्यशाला का उदघाटन करते हुये विधा भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी राम कृष्ण राव ने कही उन्होने कहा की अभी तक भारत में शिक्षा कैसी हो इसपर रणनीति बनती थी लेकिन अब शिक्षा में भारत कैसा हो इसपर कार्य हो रहा है। वर्तमान समय में शिक्षा केवल सूचनाओं का संकलन मात्र नहीं है। बच्चे सूचनाओं के माध्यम से अपने अनुभव के आधार पर नवीन ज्ञान का सृजन करते है । भारत का ज्ञान वैश्विक स्तर पर भारत को ज्ञान गुरु बनाने की ओर अग्रसर है।

उक्त कार्यशाला में देश भर से अनेक शिक्षाविद, चिंतक, विचारक और विधा भारती के क्षेत्र और प्रांत स्तर के सभी मंत्री प्रतिभाग कर रहे है । विशेष रूप से कार्यशाला मे उपस्थित गोविन्द चन्द्र महंत, यतीन्द्र शर्मा , अवनीश भटनागर , श्रीराम अरावकार , हेमचन्द्र सहित अन्य उपस्थित थे।

बंगलादेश में हिन्दुओं की हत्या और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम के मायने

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बंगलादेश में हिंसा और भीड़ की अराजकता कहने केलिये राजनैतिक है । पर निशाने पर राजनेता कम हिन्दु परिवार और उनके मंदिर अधिक हैं। 29 जिलों में चुन चुनकर हिन्दुओं को निशाना बनाया गया है । पहले दिन ही मरने वाले हिन्दुओं की संख्या सौ से अधिक हो गई थी । लेकिन सेना के प्रभावी होने के बाद मरने वालों और घायलों के आकड़े नहीं आ रहे । बंगलादेश के ताजा घटनाक्रम में दूसरा विचारणीय विन्दु मोहम्मद युनुस के हाथों अंतरिम सरकार की कमान सौंपना है ।

बंगलादेश में सत्ता परिवर्तन हो गया है । यह परिवर्तन जनमत के द्वारा नहीं हुआ । पहले अराजक हिंसक भीड़ ने सत्ता पर अधिकार किया और फिर सेना के सहयोग से उद्योगपति मोहम्मद युनुस को अमेरिका से बुलाकर अंतिम सरकार की कमान सौंपी है । सत्ता का यह पहला चरण है । जो बहुत दूरदर्शिता से उठाया है । संभावना है कि अगले चरण में खालिदा जिया अथवा उनके बेटे तारिक के हाथ में सत्ता होगी । बंगलादेश की सत्ता पर बैठने वाले चेहरे चाहे जो हों पर इसके तार पाकिस्तान और चीन से जुड़े होंगे। इसका कारण सत्ता परिवर्तन का तरीका है । बंगलादेश में हिंसा के माध्यम से सत्ता परिवर्तन पहला नहीं है विश्व के जिन देशों में मुस्लिम कट्टरपंथी अथवा माओवादी अति प्रभावी हुये हैं वहाँ ऐसी घटनाएँ घट चुकीं हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान आदि देशों में ऐसा हो चुका है । चीन और रूस के इतिहास में भी ऐसी घटनाएँ घटीं हैं। बंगलादेश की ताजा घटना इस परंपरा की एक और कड़ी है । इसमें माओवादियों और मुस्लिम कट्टरपंथियों की शैली बहुत स्पष्ट है । दोनों का अपना अपना लक्ष्य है। माओवादियों का लक्ष्य सत्ता होती है और कट्टरपंथियों का लक्ष्य सत्ता के साथ विपरीत मतानुयायियों को मारकर उनकी संपत्ति को लूटना। यद्यपि इन दोनों समूहों में कोई वैचारिक साम्य नहीं हैं पर फिर भी अनेक एशियाई देशों में यह गठबंधन काम कर रहा है । श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल और मालदीप आदि देशों में सत्ता परिवर्तन देखकर इसे समझा जा सकता है । ये सभी देश भारत के पड़ौसी हैं। पता नहीं यह केवल दुर्योग है या सच्चाई कि भारत में घटने वाली अनेक घटनाओं की शैली में भी इस गठजोड़ की झलक मिलती है । बंगलादेश के घटनाक्रम में भी यही कहानी है । सत्ता भी बदल गई और हिन्दुओं को निशाना भी बनाया गया । यह सब कोई अचानक नहीं हुआ । योजना बहुत सटीक और गुप्त रही । यह भी विचारणीय है कि शेख हसीना को सुरक्षित निकलने अवसर मिल गया पर हिन्दुओं को ढाका से भी निकलने का अवसर न मिला । आँदोलन आरक्षण विरोध के नाम पर शुरु हुआ था । पर हिन्सा में वे युवा भी मारे गये जो आँदोलन में साथ थे ।

अब घटनाक्रम घट चुका है । एक एक कड़ी हमारे सामने है । यदि सभी कड़ियों को जोड़े तो भयावह तस्वीर बनती है । बहुत स्पष्ट है आरक्षण विरोध तो एक बहाना था । पहले दिन से उद्देश्य सत्ता परिवर्तन रहा होगा । आँदोलन की घोषणा और सत्ता परिवर्तन में कितना कम समय लगा । यह भी शोध का विषय है । और फिर आरक्षण की घोषणा शेख हसीना ने तो नही की थी । आरक्षण देने का आदेश कोर्ट का था । वह भी केवल सात प्रतिशत । लेकिन यह बहाना लेकर भीड़ सड़को पर आ गई । पहले थानों पर हमला हुआ और फिर सत्ता पर । पुलिस या तो हमलावरों के साथ हो गई अथवा किनारे खड़ी रही। सेना का हाथ हिंसकों की पीठ पर था । हिंसा की शैली से ही स्पष्ट है कि यह सुनियोजित थी । इसमें की तैयारी झलक रही थी । भीड़ में कहीं कोई विखराव नहीं था, संगठित स्वरूप में काम हो रहा था । भीड़ के समूह अपनी अपनी निश्चित दिशा में काम कर रहे थे । लगता था संचालन कोई एक केन्द्र है । एक समूह सत्ता पर टूटा और दूसरे ने हिन्दुओं को निशाना बनाया । शेख हसीना के पद और देश छोड़ने के बाद अंतरिम सरकार केलिये नाम के चयन में भी कोई विलंब न हुआ । मोहम्मद यूनुस का चयन हो गया । वे एक बड़े उद्योगपति हैं और अमेरिका में रहते हैं । उन्हें 2006 में नोबल पुरस्कार मिला था । सामान्यता मोहम्मद यूनुस अमेरिकन लाॅवी समर्थक माने जाते हैं। पर वे उन एनजीओ को भी फंडिंग करते हैं जिनपर लेफ्ट का प्रभाव माना जाता है । ऐसे कुछ संगठनों के सर्वेक्षणों में अक्सर भारत की निम्नता बताई जाती है । इस तरह मोहम्मद यूनुस के चयन से दोनों पक्ष साधे गये हैं। अमेरिकन लाॅवी भी तटस्थ रहेगी और लेफ्ट की धारा पर काम भी होगा ।

परिवर्तन की दिशा में अंतरिम सरकार का पहला चरण है । दूसरे चरण में सरकार खालिदा जिया या उनके बेटे तारिक के हाथ में हो सकती है । लेकिन ये सरकारें दिखावटी होंगी । संचालन शक्ति सेना के हाथ में होगी । जैसा पाकिस्तान में होता है । सेना और सरकार दोनों पर कट्टरपंथी और माओवादी प्रभावी होंगे । बंगलादेश में इन दोनों समूहों के अपने अपने छात्र और सामाजिक संगठन हैं। ताजा हिंसक आँदोलन में इन दोनों शक्तियों के बीच अद्भुत समन्वय रहा । यह भी माना जाता है कि बंगलादेश के कुछ छात्र और सामाजिक संगठनों तार पाकिस्तान की खुफिया ऐजेन्सी आईएसआई और चीनी गुप्तचर संस्था एम एस एम से जुड़े हैं। न केवल बंगलादेश अपितु भारत के सभी पड़ौसी देशों में ये दोनों संस्थाएँ मिलकर काम कर रहीं हैं । इसे नेपाल, श्रीलंका, मालदीप और म्यामांर में आईं नयी सत्ताओं के स्वरूप से समझा जा सकता है । अब इसी धारा से बंगलादेश जुड़ गया है ।

बंगलादेश के इस घटनाक्रम में सत्ता परिवर्तन तस्वीर का एक पहलू है । तस्वीर का दूसरा पहलू बंगलादेश में हिन्दुओं के दमन का है । आँदोलन तो आरक्षण विरोध केलिये था । यदि वह सत्ता परिवर्तन की दिशा में मुड़ भी गया तो हिन्दुओं को क्यों निशाना बनाया गया । शेख हसीना और उनकी पार्टी के लोगों पर उतने हमले नहीं हुये जितने हिन्दुओं पर हुये । बंगलादेश के 29 जिलों में हिन्दुओं को चुन चुनकर मारा गया । उनके घरों को लूटा गया, आग लगाई गई, मंदिरों पर हमले हुये और मूर्तियाँ तोड़ीं गईं। हिन्दुओं पर ये हमले सत्ता परिवर्तन के बाद भी नहीं रुके । अंतरिम सरकार के उभर आने के बाद भी बंगलादेश के गाँवों में हिन्दुओं पर हमले नहीं रुके । इस कट्टरपंथी भीड़ ने ऐसे स्थानों को भी निशाना बनाया जो बंगलादेश की पहचान रहे है उनका दोष इतना था कि वे मुसलमान नहीं थे । लेकिन पूरी तरह अपने देश केलिये समर्पित थे । ऐसा एक नाम गायक राहुल आनंद का है । उनके घर में पहले लूटपाट की गई। फिर लूट, तोड़ फोड़ करके आग लगा दी गई। यह घर 140 साल पुराना था । एक प्रकार से संगीत विधा का संग्रहालय जैसा था । इसे देखने केलिये देश विदेश के संगीत प्रेमी आते थे । 2023 में फ्रांस के राष्ट्रपति भी आये थे । इस आगजनी में 3000 म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स और सभी दुर्लभ कृतियाँ जलकर खाक हो गईं । अभी यह स्पष्ट नहीं हो रहा कि गायक राहुल आनंद अपने परिवार सहित कहीं गुप्त स्थान पर जाकर छुप गये या हमलावरों के हाथों मारे गये ।

सेना के प्रभावी होने के बात एक परिवर्तन आया । अब मीडिया की खबरों में हिन्दुओं की हत्याओं के आकड़े नहीं आ रहे । लेकिन हमले निरंतर हो रहे हैं। वे कब रुकेंगे यह कहा नही सकता । चूंकि पाकिस्तान का आकार ही नहीं बंगलादेश का स्वरूप ग्रहण करने के बाद भी बंगलादेश में हिन्दुओं की जनसंख्या निरंतर घट रही है । 1951 की जनगणना में 21 प्रतिशत हिन्दू थे जो अब घटकर 8 प्रतिशत रह गये ।

कथक धरोहर का सफल आयोजन

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शशिप्रभा तिवारी

कथक यात्रा-गुरु कृपा ही केवलम नृत्य समारोह का आयोजन दिल्ली के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित था। इस समारोह का आयोजन कथक धरोहर ने किया था। इस संस्था के संस्थापक कथक नर्तक सदानंद विश्वास हैं।

कथक यात्रा गुरुकृपा ही केवलम में युवा कलाकारों ने शिरकत किया। उनकी मोहक नृत्य और दमदार प्रदर्शन से यह एक बार फिर साबित हुआ कि युवा अपनी मेधा और ऊर्जा का सही दिशा में प्रयोग कर नई मिसाल कायम कर सकते हैं। यह भी अनोखी बात थी कि समारोह में ज्यादातर कलाकार किसी घराने या परिवार से नहीं थे। संयोगवश आयोजक सदानंद भी ऐसे ही हैं।

समारोह की पहली प्रस्तुति कथक नृत्यांगना श्रुति सिन्हा की शिष्याओं की थी। शिष्याओं ने गुरु वंदना-गुरु चरणन में शीश नवाऊं, रचना- बन बन ढूंढन जाऊं और तराने पर नृत्य पेश किया। तराने में शुद्ध नृत का अंश समाहित था।

दूसरी पेशकश कथक नृत्यांगना मानसी मेहता की थी। वह कथक नृत्यांगना गौरी दिवाकर की शिष्या हैं। उन्होंने रचना -छूम छनन छनन बाजत पैंजनियां पर नृत्य किया। उन्होंने अपने नृत्य में छंद राधा संग रमत राधा में राधा और निरतत निरत करत कृष्ण में कृष्ण का चित्रण सरस अंदाज में किया।

कथक नर्तक अभिषेक खींची के शिष्य-मंडली की प्रस्तुति आकर्षक थी। उनके नृत्य में गणेश वंदना और धमार ताल में निबद्ध शुद्ध नृत दमदार थी। टुकड़े, तिहाई, लयकारी को बखूबी पेश किया।

कथक नर्तक अभिषेक यादव ने शिव पर आधारित रचना में शंकर के रौद्र रूप का निरुपण किया। उन्होंने इसके लिए रचना शंकर अति प्रचंड का चयन किया था। कथक नृत्यांगना रीतिका ने गणेश वंदना पेश किया। स्वाती सिन्हा की शिष्या रूचिका ने शिव वंदना और तीन ताल में शुद्ध नृत पेश किया। उनके नृत्य में शिव परण, लयकारी और इक्कीस चक्करों का प्रयोग खास दिखा। कथक नर्तक अमन पांडे ने मोहक नृत्य पेश किया। उन्होंने शिव स्तुति पेश किया। इसमें शिव तांडव स्तोत्र के अंश, शिव अर्धांग उमा विराजे, ध्रुपद शिव शिव शंकर आदि देव को पिरोया गया।

कथक नृत्य युगल निशांत और वंदना गुप्ता की शिष्य मंडली ने विष्णु वंदना से नृत्य आरंभ किया। उन्होंने तीन ताल में शुद्ध नृत पेश किया।

(साभार)

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