We believe in an independent state of London

2-10.jpeg

मनोज श्रीवास्तव

ये आक्सफोर्ड यूनियन सोसायटी जिस तरह से We believe in an Independent State of Kashmir पर डिबेट कराता है, उस तरह से भारत के छात्र संगठन कभी We believe in an Independent State of London पर बहस कभी क्यों नहीं कराते? अब तो वहाँ लंदन में मेयर भी मुस्लिम है। या नहीं तो We believe in an Independent State of Bradford कर दें जहाँ मुस्लिम ही मुस्लिम हैं।

कौन-सी दुनिया में रहते हैं ये हमारे ABVP, ये हमारे NSUI? इन्हें एक दूसरे को हराना ही अपने अस्तित्व की चरम चरितार्थता लगती है।

वे 49 विश्वविद्यालय मिलकर Dismantling Hindutva पर सेमिनार कर लेते हैं। और हमारे विश्वविद्यालयों से एक बार भी उसी तर्ज पर Dismantling Christianism जैसा कोई आयोजन नहीं होता। जैसे वे कहते हैं कि हम Hinduism की बात नहीं कर रहे, Hindutva की बात कर रहे थे, वैसे ही आप भी कहें न कि आप Christianity की बात नहीं करना चाह रहे, Christianism पर बात करना चाह रहे हैं।

वे Hindutva पर विमर्श के नाम पर भारत के आंतरिक मामलों में अपनी नाक घुसा सकते हैं, तो इसका इसी तरह का प्रत्युत्तर आपकी नाक का सवाल क्यों नहीं बनता।

उनकी यूनियन डिबेट कर लेती है कि We do not believe in Modi Government तो कभी आपसे क्यों नहीं बनता कि We do not believe in Biden Government पर वाद विवाद प्रतियोगिता आयोजित कराते?

आप ही उनकी गेज़ के शिकार रहोगे हमेशा? भगवान ने आपको आँखें नहीं दीं? बटन दिये?

आपको नहीं समझ आता कि जब तक इन्हें इन्हीं के सिक्कों में दाम नहीं चुकाये जायेंगे ये बाज नहीं आएँगे?

और आप तरुणाई के प्रतिनिधित्व का दावा करते हो?

(सोशल मीडिया से)

कब होगी मणिपुर में हिंदुओं की बात

129628882_gettyimages-1252657928.jpg

अमिय भूषण

जहाँ भी साधु संत गुरुजन और शुभेच्छु संगठन एवं उसके संगठक तथा सहयोगी मंत्री एवं अन्यन्य शुभचिंतक सब लोग स्वार्थ अथवा भय से सत्य से परहेज करे और उचित सुझाव नही दे तो सर्वविध नाश ही होता है।केवल प्रशासन अव्यवस्था को भेंट नही चढ़ता अपितु यह शासनकर्ता एवं राज्य के लिए भी आपदा लाता है।यही नही अंततः यह सभी सहायक संगठन एवं व्यवस्थाओं को भी निगल लेता है।वही प्रजा राष्ट्र और धर्म का भी शीघ्रता शीघ्र पूर्णतया नाश होता है।इसलिए रामचरितमानस मे कहा गया है-
“सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस।राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास”॥

अगर हिन्दू जनमानस के साथ यही सब कुछ होता रहा तो न ही मोदी न मोदी राज न ही भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विचार परिवार और ना ही कोई द्वारा अखाड़ा,महंत श्रीमहंत,मंडलेश्वर महामंडलेश्वर,जगतगुरु या कोई सदगुरू बचेंगे।यहाँ तक की कोई भी आध्यात्मिक संस्था,चेतना और दर्शन एवं विचार नही रह पाएगा।यहाँ तक की ज्ञान के अपौरुषेय स्रोत वेद भी इसकी भेंट चढ़ जाएंगे।अतः आइये हम सभी अपने कर्तव्यों का पालन करें।विपक्ष एवं वैचारिक विरोधियों से सवाल और सत्ता एवं व्यवस्थाओं पर दवाब बनाये।अन्यथा यही होगा की-

“जगत बिदित तुम्हारि प्रभुताई।सुत परिजन बल बरनि न जाई॥
राम बिमुख अस हाल तुम्हारा।रहा न कोउ कुल रोवन हारा”॥

बाकी मणिपुर के वर्तमान हालात की ये कहानी है।जहां एक हिंदू पुजारी की हत्या कर दी गई है। मंदिर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है और लगातार हिंदूओं पर ड्रोन बम से हमला किया जा रहा है। ये जानकारी मणिपुर के एक अभागे हिंदू ने भेजी है, जहाँ विगत एक वर्ष से हिंसा जारी है।हिंदू धर्मांतरण के नाते साढ़े बारह लाख से अब दस लाख हो चला है।वही अब पलायन और सामूहिक नरसंहार अथवा धर्म परिवर्तन की बारी है।

बात अगर विदेशी आक्रांत बर्बर एवं धर्मान्तरित ईसाई कुकी समुदाय की करे तो इनकी आबादी वृद्वि दर दो सौ प्रतिशत है।वही यहाँ से होकर चलने वाला ड्रग्स कारोबार लगभग पूरा का पूरा इनके हाथों में है।यह कारोबार मणिपुर राज्य के कुल बजट से भी कही बड़ा है।

इसके साथ इन्हें अबतक केवल भारतीय नागरिकता ही नही मिलती आई है बल्कि अल्पसंख्यक एवं अनुसूचित जनजाति होने का दोनों शासकीय लाभ भी लगातार मिलता रहा है।इसके अलावे शासकीय दृष्टिकोण से पूर्वोत्तर भारत के जनजातीय पहचान वाले राज्य के निवासी और जनजातीय समुदाय से होने के नाते ये सभी प्रकार के कर(tax) से भी वंचित है भले ही इनकी आमदनी करोड़ों में हो।इन सब तथ्यों के प्रमाण हेतु आप मणिपुर पर विभिन्न अखबार एवं पत्रिकाओं के लिए लिखे मेरे आलेखों को भी देख सकते है।वही सूचना के अधिकार या फिर सरकारी वेबसाईट पर उपलब्ध आंकड़ों पर भी नजर मार सकते है।

बाकी अगर इन चित्रों की व्यथा कथा कहूँ तो इसे मणिपुर के किसी अभागे हिंदू ने भेजा है।यह दुखद घटना विष्णुपुर जिले के मोइरांग मे कल यानी 6 सितंबर के दोपहर 2 बजे हुई है।मणिपुर का यह क्षेत्र कभी शिव पार्वती की क्रीड़ा स्थली रही है जिसका प्रमाण विश्व प्रसिद्ध लोकटक झील है।वही इस जगह का इतिहास नेताजी सुभाषचंद्र बोस और आजाद हिन्द फौज से जुड़ाव का रहा है उनकी स्मृतियाँ यहाँ अब भी मौजूद है।जबकि यहाँ के राजा ने बर्मा विजय के उपलक्ष्य में भगवान विष्णु का एक मंदिर बनाते हुए इस सम्पूर्ण भूमि को भगवान विष्णु के नाम कर दिया था।यह घटना सन् 1467 की है तब से इसका नाम विष्णुपुर है।

व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक जाग्रति और सक्षम नेतृत्व का संदेश है गणेशोत्सव में

650x_2017082510511609.jpg

शिवाजी महाराज से लेकर लोकमान्य तिलक तक सामाजिक जाग्रति के लिये गणेशोत्सव सबसे बड़ा माध्यम रहा है । उनके जन्म की कथा से गणनायक बनने तक प्रत्येक घटना व्यक्तित्व निर्माण, समाज सशक्तीकरण और कुटुम्ब समन्वय का अद्भुत संदेश है ।
गणपति जी के जन्म और उनके स्वरूप को लेकर कथा है कि गणेशजी ने भगवान शिव को द्वार पर रोका और शिवजी ने उनका सिरच्छेद कर दिया। माता पार्वती के विलाप करने के बाद एक हथिनी के बच्चे का शीश लाकर पुनर्जीवित किया । इसलिए उनका स्वरूप ऐसा है । प्रश्न है कि इस कथा का संदेश क्या है ? भगवान शिव देवाधिदेव हैं, त्रिकालदर्शी हैं। क्या वे नहीं जान सकते थे कि यह बालक कौन है? किसके आदेश से द्वार पर है और फिर भला सृष्टि में कौन सा द्वार है जो उन्हें रोक सकता है ? यदि भगवान शिव ने सिरच्छेद कर भी दिया तो वे पल भर में नया शीश सृजित कर सकते थे। लेकिन शीश के लिये ऐसे माता-पुत्र खोजे गये जो एक दूसरे की ओर पीठ किये हुये हैं । इस कथा में लोक कल्याण और लोक संचालन के अनेक संदेश हैं। सबसे पहला संदेश उन द्वारपालों के लिये है जो द्वार पर अपनी बुद्धि विवेक का प्रयोग नहीं करते । द्वारपाल को यह बुद्धि अवश्य लगानी चाहिए कि आगंतुक कौन है और उसके साथ क्या व्यवहार करना चाहिए। आगन्तुक को परखकर उसके अनुरूप व्यवहार करना चाहिए। आधुनिक संदर्भ में तो यह विवेकशीलता अति आवश्यक हो गई है । दूसरा संदेश माता और पुत्र केलिये है । कथा में जिस हथिनी के बच्चे का शीश काटकर लाया गया वह अपनी माँ से विमुख होकर सो रहा था और माता की पीठ भी बच्चे की ओर थी । अर्थात दोनों एक दूसरे के विपरीत। वैदिक काल से लेकर आधुनिक विज्ञान के निष्कर्ष तक यह स्पष्ट हो चुका है कि व्यक्तित्व का निर्माण माता करती है । न केवल शरीर की पुष्टता और विकास अपितु शिक्षा और संस्कार भी । संसार में माता के साँचे में ढले बच्चे ही आसमान की ऊँचाई छूते है । भला उस बच्चे का भविष्य कैसे सुरक्षित रह सकेगा, जो माता से विपरीत दिशा में बढ़ रहा है और माता ने भी मुँह फेर लिया है । यह कथा इन दोनों प्रकार की मानसिकता को चेतावनी है । जो माताएँ पुत्र पर ध्यान न देतीं उनको भी और जो पुत्र माता का सम्मान नहीं करते या माता से विमुख हैं उनको भी ।

अंगो का विश्लेषण

गणेश जी गणनायक हैं। नायक अर्थात मुखिया, नेतृत्व करने वाला। जब भी किसी वस्तु को बहुत ध्यान से देखते हैं या एकाग्रता से देखते हैं तब हमारी आँखे सिकुड़ती हैं। यदि आँखे फैलाकर देखेंगे तो वस्तु का आकार थोड़ा धुँधला सा दीखता है । गणपति जी आँखे छोटी हैं। अर्थात नेतृत्व कर्ता को हर वस्तु हर बात, और हर घटना को एकाग्रता से समझनी चाहिए। एकदम पैनी नजर से । यह संदेश आँखों के छोटी होने का है ।
गणेश जी सूँढ अर्थात नाक लंबी है । नेतृत्व कर्ता की सूंघने की शक्ति तीक्ष्ण होनी चाहिए। अपने परिवार में,समाज में या राष्ट्र में कहाँ क्या कुछ घट रहा, यह सब नेतृत्व कर्ता को दूर से ही सूंघ लेना चाहिए। गणेश जी के कान लंबे हैं। यनि नेतृत्वकर्ता का सूचना तंत्र तगड़ा हो और हर बात को सुनने क क्षमता होनी चाहिए। उनका पेट बड़ा है अर्थात जो भी अधिक से अधिक बात सुनी है उसे अपने पेट में डाल लेनी चाहिए। पचाने की क्षमता होनी चाहिए। ऐसा न हो कि इधर सुना और उधर सुनाया। एक सफल नेतृत्वकर्ता वही जो अपने प्रभाव सीमा की ह घटना हर व्यक्ति प पैनी नजर रखे। कहाँ क्या घट रहा उसे सूंघ ले, हर बात को सुने और अपने भीतर छिपा कर रखे । माथा चौड़ा यनि उसकी छवि प्रभावकारी होनी चाहिए।
उनका वाहन चूहा है । चूहा छोटे से छोटे रास्ते पर चल सकता है । पत्थरों के बीच भी मार्ग बना सकता है । अर्थात नेतृत्वकर्ता का वह तंत्र जिसके माध्यम से वह अपना प्रशासन चला रहा है, वह इतना सक्षम होना चाहिए कि वह नये मार्ग बना सके कठिन से कठिन रास्तों को भी आसान बना सकें।

नेतृत्वकर्ता को समन्वय की सीख

गणपति जी शिव परिवार के समन्वयक हैं। शिव परिवार विविधता से भरा है । शिवजी का वाहन नंदी है । नंदी अर्थात बैल । और देवी पार्वती का वाहन सिंह। सिंह का आहार होता है बैल । कुमार कार्तिकेय के वाहन मयूर, जिनका आहार नाग है । भगवान शिव का श्रृंगार हैं नागदेव । गणेश जी का वाहन मूषक। शिवजी सिंह चर्म पर समाधि लगाते हैं। मूषकराज का वश चले तो आसन कुतर दें। फिर भी इस परिवार में टकराहट का कोई प्रसंग किसी कथा में नहीं मिलता । शिव परिवार में यह अद्भुत समन्वय गणपति जी के कारण है । वे इससे यह संदेश मिलता है कि जो समन्वयक हैं, नेतृत्वकर्ता हैं उनमें क्षमता होनी चाहिए कि वे विषम और विपरीत स्वभाव वाले लोगों के बीच भी समन्वय कर सकें। जिससे परिवार, समाज या देश के आदर्श स्वरूप में निखार हो।
नायक या नेतृत्वकर्ता की शैली, व्यक्तित्व और व्यवहार कैसा हो यह भी गणेशजी के माध्यम से समझाया गया है । गणेशजी को लड्डुओं का भोग लगाया जाता है । लड्डू में बनाने में बहुत श्रम, साधन और समय लगता है । पहले दूध से मावा बने फिर लड्डू बनें अथवा पहले चने की दाल से बेसन बने, बेसन की बूंदी बने, उसमें शकर या गूड़ डालकर लड्डू बनाये जाते हैं । लड्डू खाने में जितने स्वादिष्ठ होते हैं उन्हें बनाने में उतना ही श्रम और समय लगता है । लड्डू कितना नाजुक है कि यदि वह नीचे गिर जाये तो विखर जाता है । बेसन का एक एक कण मिलकर बूंदी बनती है फिर बूंदी को संगठित करके लड्डू। अर्थात एक एक व्यक्ति को जोड़कर युग्म बनाना। नेतृत्व कर्ता को वही प्रिय जो समाज और समूह संगठित रहता है परस्पर जुड़कर चलने का प्रयत्न करता है । जैसे लड्डू में बूंदी या बेसन के कण कण परस्पर संगठित रहने का प्रयत्न करते हैं। लड्डू जितना पुराना होता है उतना कठोर बनता है । अर्थात समय के साथ परिवार और समाज संगठन का स्वरूप सघन होते रहना चाहिए। जो लोग इस मन मानस के होते हैं वे सदैव संगठित रहते हैं बिल्कुल लड्डू की भाँति और संगठन भाव के प्रति ऐसे सकारात्मक व्यवहार के लोग ही नेतृत्वकर्ता को पसंद होते हैं बिल्कुल गणेश जी भाँति। चूँकि विकास और समृद्धि के लिये संगठन का यह भाव रखने वाले समूह से और इस भाव को पसंद करने वाले नेतृत्वकर्ताओं से ही संभव होता है ।

अब उनकी पसंद दूब को समझें। दूव पैरों तले रहती है न केवल इंसान के बल्कि जानवरों के पैरों तले भी। फिर भी गणपति जी को दूब पसंद है । सामान्य जन के अपने नायक के पास कुछ भेंट लेकर जाने की परंपरा है । पुराने समय में भी लोग राजाओं के, ऋषियों के, आचार्यों और गुरु के पास खाली हाथ नहीं जाते थे कुछ न कुछ लेकर ही जाते थे । तब संदेश दिया गया कि आप नायक हैं और भेंट लेने के अधिकारी हैं तो आप ऐसे बनें कि सामान्य जन यदि कोई सस्ती से सस्ती वस्तु लेकर आये उसे भी ऐसे स्वीकार करो जैसे वही आपको सबसे प्रिय है । दूव से सस्ता क्या होगा । वह भी कोई लेकर आये तो उसे भी सर्व प्रिय वस्तुओं की भांति स्वीकार करो । यदि नेतृत्व कर्ता इतनी साधारण वस्तु को भी अपनी सर्वाधिक प्रिय बताता है तब इसका संदेश जन साधारण पर भी पड़ता है । वह भी दिखावट सजावट से दूर सरल जीवन शैली की ओर प्रवत्त होता है । यह दूब गणपति जी को बहुत श्रृद्धा से अर्पित की जाती है । इसका संदेश है कि वरिष्ट जनों को दी जाने वाली भेंट का मूल्य महत्वपूर्ण नहीं होता । भाव महत्वपूर्ण होता है । हमारी रिश्तेदारी में किसी अवसर विशेष पर यदि कोई सामान्य वस्तु की भेंट लेकर करता है तब भी उसमें स्नेह देखना चाहिए न कि उसका मूल्य । यही संदेश है दूव का और लड्डुओं का है ।

इस प्रकार गणेशजी के जन्मकथा से लेकर उनके स्वरूप, शैली और भोग प्रत्येक आयाम नया संदेश देता है । गणेशोत्सव पर गणेश जी के पूजन के साथ उनके स्वरूप और शैली से संदेश लेने की आवश्यकता है ।

Agra Drowns in Monsoon Misery: Ineffective Solutions frustrate Citizens

up-monsoon-forecast-up-news-up-weather-up-rain-updates-up-weather-news-052248902-16x9.jpg.webp

Agra, a city steeped in history and culture, finds itself grappling with a recurring nightmare – waterlogging and inundation during the monsoon season. The recent spell of heavy rains has once again exposed the city’s vulnerability, leaving citizens frustrated and the local body facing criticism. Despite assurances from municipal commissioner Ankit khandelwal the promised solutions have not been effective, and the city continues to struggle with this annual problem.

The root causes of this issue are multifaceted. Environmentalist Dr Devashish Bhattacharya says “Encroachment of public spaces and unplanned urban growth are major reasons for the worsening situation. The lack of effective drainage systems and inadequate maintenance of existing infrastructure have further exacerbated the problem. It is disheartening to see that this annual problem continues to plague Agra, with civic agencies struggling to address the challenge effectively.”

To alleviate the woes of Agra citizens and ensure a smoother monsoon experience in the future, several steps need to be taken.
According to River Connect Campaign activists Rahul Raj and Deepak Rajput, “encroachment of public spaces and illegal construction must be tackled through strict enforcement of regulations and regular monitoring of construction activities. This will help prevent further encroachment and ensure that public spaces are used for their intended purpose.”

Social activist Padmini Iyer says “investments need to be made in upgrading and maintaining the city’s drainage infrastructure. This includes regular cleaning of drains and sewers, installation of more efficient drainage systems, and use of modern technology such as sensors to monitor water levels. This will help in early detection of potential flooding areas and enable prompt action to be taken.”

At the same time “Public awareness and participation are also crucial in mitigating the impact of heavy rains. Citizens should be educated about proper waste disposal and the importance of maintaining cleanliness in public spaces. Community initiatives for regular clean-up drives can contribute significantly to reducing waterlogging issues,” according to Civil Society of Agra members.

Furthermore, urban planning and development in Agra need to be more strategic and sustainable to prevent future inundation problems. The authorities should focus on creating green spaces, implementing sustainable water management practices, and adopting eco-friendly construction techniques. This will help reduce the city’s vulnerability to flooding and make it more resilient, suggests Lok Swar president Rajiv Gupta.

Senior citizen and director of Sri Nath ji Sewa, BL Maheshwari says “Transparency and accountability from municipal authorities are essential in building the trust of citizens. Regular updates on drainage maintenance activities, timely responses to complaints related to waterlogging, and effective communication during emergency situations can help alleviate the frustration and concerns of residents.”

Therefore, while the monsoon woes in Agra may be a longstanding challenge, proactive measures and a collective effort from both authorities and citizens can make a significant difference in addressing these issues. By targeting the root causes of waterlogging, investing in infrastructure upgrades, promoting public participation, and adopting sustainable urban planning practices, Agra can gradually free its citizens from the traumatic experiences of the rainy season and pave the way for a more resilient and livable city.

scroll to top