ओली और मेरे बीच समझौता रामेश्वर ने कराया था: अध्यक्ष देउबा

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काठमांडू: नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने कहा है कि यूएमएल और कांग्रेस के बीच समझौता कराने में कैप्टन रामेश्वर थापा की विशेष भूमिका है।

शनिवार को काठमांडू के स्वयंभू में अन्नपूर्णा मीडिया नेटवर्क के अध्यक्ष कैप्टन रामेश्वर थापा की अंग्रेजी पुस्तक ‘इनटू द फायर’ के विमोचन में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देउबा ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री केपी ओली के बीच समझौता कराने में भूमिका निभाई थी। यूएमएल के अध्यक्ष और कैप्टन थापा को भी उन्होंने धन्यवाद दिया।

चेयरमैन देउबा ने कहा कि कैप्टन रामेश्वर थापा ने उन्हें और प्रधानमंत्री ओली को करीब लाने का काम किया। देउबा ने कैप्टन थापा की तारीफ करते हुए उन्हें हर किसी की मदद करने वाला इंसान बताया है।

देउबा ने कहा कि वैसे तो कैप्टन थापा को प्रधानमंत्री ओली के करीबी व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, लेकिन थापा हर किसी की मदद करने वाले व्यक्ति हैं।

चेयरमैन देउबा ने कहा, ‘छिपाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। ओलीजी और मेरे बीच सहमति बनाने की भूमिका में रामेश्वरजी ने बहुत मदद की है। मुझे उनको धन्यवाद कहना है।

पूर्व प्रधान मंत्री देउबा ने यह भी कहा है कि वह कैप्टन थापा को लंबे समय से जानते हैं।

ममता दीदी राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई

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खेमचंद शर्मा

दिल्ली। 1994 के बोम्मई केस में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए दिशा निर्देश तय किए थे, जिसके अनुसार – राज्य में संवैधानिक तंत्र का पूरी तरह से टूटना ज़रूरी है और ऐसी स्थिति तब होती है जब, राज्य का शासन पंगु हो जाता है और सरकार असंवैधानिक तरीके से काम कर रही होती है;या संविधान के मूल सिद्धांतों को बनाए रखने में विफलता, जैसे कि विधानसभा को बुलाने में विफल होना या न्यायिक निर्णयों को लागू करने से मना करना या राज्य सरकार का कोई ऐसा कार्य जो देश की अखंडता और संप्रभुता को खतरे में डालता है। (अर्थात अलग राष्ट्र की घोषणा)

बंगाल में देखा जाए तो संवैधानिक तंत्र पूरी तरह चरमरा गया है और ममता बनर्जी संविधान के अनुसार कार्य नहीं कर रही – यदि वह संवैधानिक तरीके से काम कर रही होती तो खुले आम देश को आग लगाने की बात न करती – उसका कहना कि अगर बंगाल जलेगा तो कई राज्यों का नाम लेकर कहा कि ये भी जलेंगे और आग दिल्ली तक भी पहुंचेगी । ममता ने प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती देते हुए कहा :-

“मोदी बाबू, कोलकाता के रेप-मर्डर केस में अपनी पार्टी का इस्तेमाल करके बंगाल में आग लगवा रहे हैं, अगर आपने बंगाल को जलाया तो असम, नॉर्थ-ईस्ट, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और दिल्ली भी जलेंगे- हम आपकी कुर्सी गिरा देंगे।”

देश के प्रधानमंत्री को एक मुख्यमंत्री की यह धमकी देश की अखंडता और संप्रभुता को खतरे में डालने की सीधी चुनौती है और प्रधानमंत्री की सरकार के साथ साथ देश के खिलाफ बगावत है और यह राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए पर्याप्त कारण है,

कुछ दिन पहले राकेश टिकैत ने ममता बनर्जी की वकालत करते हुए कहा था कि दिल्ली में बांग्लादेश बना देंगे । समूचा विपक्ष बंगाल की घटना पर और ममता की धमकी पर खामोश है ।

विपक्ष की साजिश इस बात से भी सामने नज़र आ रही है कि विदेशी राजनयिक विपक्ष के कुछ घटक दलों के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। विपक्ष के उन राजनयिकों से मिलने वाले ऐसे लोग हैं, जो मोदी सरकार को अस्थिर करने में बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं और उसका इशारा ममता बनर्जी ने साफ़ साफ़ दे दिया।

जिस प्रकार महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने कोलकाता रेप और मर्डर केस पर अपनी पीड़ा व्यक्त की है, उसे देख कर लगता है बंगाल में अब जल्दी ही राष्ट्रपति शासन लग सकता है। कोई जल्दबाजी करने के लिए ‘खटाखट-खटाखट’ अपने विचार व्यक्त न करें, क्योंकि जैसे 370 हटाने के लिए सरकार को बड़े पैमाने पर तैयारी करनी पड़ी थी, बंगाल में राष्ट्रपति शासन के लिए भी तैयारी करनी पड़ेगी। वह भी तब, जब आज ममता ने देश में आग लगाने की धमकी दे दी है और बंगाल एवं असम जब बांग्लादेशियों से भरा पड़ा हैं।

भारत के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अवसर

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आज वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी केवल 2% है। यह अनुमान लगाया गया है कि एक सक्षम वातावरण के साथ, भारतीय अंतरिक्ष उद्योग 2030 तक 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ सकता है, जिससे सीधे तौर पर दो लाख से अधिक नौकरियां पैदा होंगी। 2040 तक वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 3.0 ट्रिलियन डॉलर और भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 100.0 अरब डॉलर होने का अनुमान है।

चंद्रयान-3.0 मिशन की सफलता ने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों की एक नई पीढ़ी को प्रेरित किया, जिससे देश भर में अंतरिक्ष अन्वेषण में रुचि बढ़ी है। चंद्रयान-3.0 ने न केवल चंद्रमा के बारे में हमारे ज्ञान का विस्तार किया बल्कि अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की बढ़ती क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया है। चंद्रयान-3 द्वारा प्रदर्शित सॉफ्ट लैंडिंग क्षमता स्मार्ट स्पेस रोबोट प्रौद्योगिकी तक विस्तारित अनुप्रयोगों के साथ भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखती है, जो अंतरग्रहीय विज्ञान मिशन को सक्षम बनाती है।

1990 के दशक की शुरुआत तक, भारत के अंतरिक्ष उद्योग और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को ISRO द्वारा परिभाषित किया गया था। निजी क्षेत्र की भागीदारी इसरो के डिजाइन और विशिष्टताओं के निर्माण तक सीमित थी। भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 निजी उद्यमों को अंतरिक्ष में उपग्रहों और रॉकेटों को लॉन्च करने से लेकर पृथ्वी स्टेशनों के संचालन तक शुरू से अंत तक की गतिविधियाँ करने की अनुमति देने की सरकार की योजना का खुलासा करती है।

विश्व स्तर पर, स्पेस एक्स (SpaceX), ब्लू ओरिजिन, वर्जिन गैलेक्टिक जैसी कंपनियों ने लागत और टर्नअराउंड समय को कम करके अंतरिक्ष क्षेत्र में क्रांति ला दी है, जबकि भारत में निजी अंतरिक्ष उद्योग के खिलाड़ी सरकार के अंतरिक्ष कार्यक्रम के विक्रेता या आपूर्तिकर्ता बनने तक ही सीमित हैं। सुरक्षा और रक्षा एजेंसियां विदेशी स्रोतों से पृथ्वी अवलोकन डेटा और इमेजरी प्राप्त करने के लिए सालाना लगभग एक अरब डॉलर खर्च करती हैं। विदेशी संस्थाओं पर इतनी निर्भरता भारत की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।

भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने अंतरिक्ष में एक समृद्ध व्यावसायिक उपस्थिति को सक्षम करने, प्रोत्साहित करने और विकसित करने के अपने दृष्टिकोण को परिभाषित किया, जो इस बात को स्वीकार करने का सुझाव देता है कि निजी क्षेत्र अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण हितधारक है। इसरो राष्ट्रीय विशेषाधिकारों को पूरा करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी में अनुसंधान एवं विकास, नई प्रणालियों को साबित करने और अंतरिक्ष वस्तुओं की प्राप्ति पर ध्यान केंद्रित करेगा। इससे ISRO को अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास और दीर्घकालिक परियोजनाओं पर अपनी पूरी ताकत लगाने में मदद मिलेगी।

भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र अंतरिक्ष प्रक्षेपण, लॉन्च पैड स्थापित करने, उपग्रहों को खरीदने और बेचने और अन्य चीजों के बीच उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा का प्रसार करने के लिए एकल खिड़की मंजूरी और प्राधिकरण एजेंसी होगी। यह गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ प्रौद्योगिकियों, उत्पादों, प्रक्रियाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं को भी साझा करेगा और इसमें निजी कंपनियां और सरकारी कंपनियां शामिल होंगी।

अंतरिक्ष से संबंधित प्रौद्योगिकियों के लिए भारत में 190 से अधिक स्टार्ट-अप पहले से ही काम कर रहे हैं और यह इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों के लिए देश और उद्यमियों के मूड को दर्शाता है। सैटेलाइट, ग्राउंड स्टेशन, रिमोट सेंसिंग, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष डेटा विश्लेषण, लॉन्च वाहन, प्रणोदन और संचार प्रणालियों के क्षेत्रों में विशिष्ट डिजाइन आवश्यकताएं और तकनीकी नवाचार भारतीय अर्थव्यवस्था को न केवल ठोस विकास के नजरिए से बल्कि अर्जित अमूर्त ज्ञान के नजरिए से भी बढ़ावा देंगे। इस प्रक्रिया से भारत के तकनीकी परिदृश्य को आकार मिलने की संभावना है और यह दुनिया भर से अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करेगा।

ISRO, उपग्रह प्रौद्योगिकी के माध्यम से ग्रामीण विकास के लिए 473 ग्राम संसाधन केंद्र स्थापित कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी की क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए इसरो ने चयनित गैर सरकारी संगठनों, ट्रस्टों और राज्य सरकार के विभागों के सहयोग से पायलट पैमाने पर ग्राम संसाधन केंद्र (वीआरसी) की स्थापना की। इसरो द्वारा योजना, निगरानी और प्रभाव मूल्यांकन के लिए देश की विकासात्मक प्राथमिकताओं को संबोधित करते हुए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं। एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी), विकेंद्रीकृत योजना (एसआईएसडीपी) के लिए अंतरिक्ष आधारित सूचना समर्थन और मनरेगा (जियोएमजीएनआरईजीए) के जीआईएस कार्यान्वयन की निगरानी जैसे कार्य हो रहे हैं ।

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में एक शक्तिशाली समर्थक बनने की क्षमता है, जो ग्रामीण क्षेत्रों विशेषकर गांवों के समग्र और तेजी से विकास के लिए विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करती है। भारत सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग और संचार में एंड-टू-एंड क्षमता विकसित करने में विश्व के अग्रणी देशो में एक है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने संचार के लिए भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इनसैट) और पृथ्वी अवलोकन के लिए भारतीय रिमोट सेंसिंग (आईआरएस) उपग्रहों जैसे अत्याधुनिक अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे के निर्माण में काफी प्रगति की है। भारत सामाजिक भलाई के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग का प्रदर्शन करने में चैंपियन रहा है।

ग्रामीण समृद्धि फाउंडेशन स्थिरता के लिए अंतरिक्ष से प्राप्त विश्लेषित डेटा का उपयोग करने के लिए काम करने की योजना बना रहा है।

हिन्दुओं के मुद्दे और मुसलमानों का तुष्टीकरण

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डा. चन्द्र प्रकाश सिंह

इतिहास साक्षी है कि हिन्दुओं के वोट पर खड़े हुए दल हिन्दुओं के लिए सबसे अधिक घातक बन जाते हैं। स्वराज के पूर्व भारत का हिन्दू समाज कांग्रेस को अपना मान कर कांग्रेस के साथ खड़ा हुआ, लेकिन इसकी बहुत बड़ी कीमत उसे चुकानी पड़ी, क्योंकि कांग्रेस आत्मकुंठा की शिकार हो गई और उसका यह निरन्तर प्रयत्न रहा कि हिन्दुओं का वोट तो उसे मिलता रहे लेकिन उसकी छवि सेक्युलर बनी रहे।

आज पुनः इतिहास की पुनरावृत्ति हो रही है। हिन्दुओं के वोट से जीतने वाला दल हिन्दुओं की प्रताड़ना पर एकदम संवेदन शून्य हो जाता है। बात चाहे पालघर में संन्यासियों की हत्या की हो या तिरंगा यात्रा निकालने वाले चंदन गुप्ता की हत्या की हो या कन्हैया लाल की हत्या की हो या मणिपुर में मारे जा रहे मैतेयी वैष्णवों की हो या पश्चिम बंगाल में अनवरत चल रहे हिंसा के ताण्डव की सरकार में बैठे लोग कुछ करने के बदले केवल प्रतिक्षा करो और देखो की नीति पर चलना ही अपना कर्त्तव्य समझ लिए हैं।

फिल्म और खेल जगत की छोटी-छोटी बातों पर ट्विट करने वाले सरकार के मुखिया हिन्दू से जुड़े किसी विषय पर ऐसे मौन हो जाते हैं कि मौनमोहन सिंह भी शर्मा जाएं।

हज से लेकर वक्फ बोर्ड तक ऐसी राजनीति की जा रही है जैसे सम्पूर्ण हिन्दू समाज मूर्ख हो। वक्फ़ एक्ट 2013 में संशोधित हुआ और उसके पश्चात उसने छह लाख एकड़ से बढ़ाकर अपनी नौ लाख एकड़ कर लिया लेकिन दस वर्षों तक स्पष्ट बहुमत की सरकार चुप रही, परन्तु जब अल्पमत की सरकार आयी तब संशोधन लाकर विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को दे दिया गया। पिछले डेढ़ वर्षों से हिंसाग्रस्त मणिपुर जाने का समय नहीं मिला, जबकि यह मानव द्वारा उत्पन्न की गई विभीषिका है जिसको रोकना सरकार का दायित्व है, लेकिन वायनाड के प्राकृतिक आपदा में जाने के लिए तुरन्त समय मिल गया।

बांग्लादेश के हिन्दुओं के लिए कोई कठोर कदम उठाने की बात छोड़िए, अपनी ही सीमा में पश्चिम बंगाल में पिछले दस वर्षों से अनवरत हिंसा और बलात्कार के शिकार हिन्दुओं के लिए भी कुछ नहीं किया जा सका।
आज देश की सबसे बड़ी समस्या जनसंख्या नियंत्रण और घुसपैठ की है। पिछले दस वर्षों में महानगरों से लेकर छोटे-छोटे कस्बों तक में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की संख्या निरन्तर बढ़ रही है। इन पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका।

हिन्दुओं के कर से सूफी सर्किट बनाने और सूफिज्म को भारत की पहचान के रूप में प्रतिष्ठित करने का स्वप्न देखने वाले लोगों का इस समय मौन रह कर बचाव करने वाले लोगों से आने वाला भविष्य वैसा ही प्रश्न करेगा जैसा गांधी-नेहरू और कांग्रेस से किया जा रहा है।

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