पंकज कुमार झा की कविता, अरे सुपीरिया झुकना नहीं था…

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अरे सुपीरिया, झुकना न था
अरे सुपीरिया, झुकना न था
पाकी के आगे बिछना न था
किस-किस के आगे झुकोगी
किस-किस के आगे बिछोगी
चंद रूपल्ली सिक्कों खातिर
अपना मान लुटाना न था
अरे सुपीरिया झुकना न था
इस-उस के आगे बिछना न था।
अरे सुपीरिया झुकना न था
लड़की हो लड़ सकती हो तो
आतंकी-पाकी से लड़ती तुम
नक्सल, भ्रष्टाचारी
चोर-लुटेरे, बटमारों से …
लड़-लड़ आगे बढ़ना भी था
अरे सुपीरिया झुकना न था
इस-उस के आगे बिछना न था
अरे सुपीरिया …..
कुछ तो लाज-लिहाज करो तुम
हिन्दुस्थान पे नाज करो तुम
बेटी हो परवाज करो तुम
भारत की आवाज बनो तुम
कांग्रेस का बंटाधार करो तुम
माटी की कीमत पर बिकना न था
अरे सुपीरिया ….
तुम भारत की बेटी थी
वर्धन की श्रीनेती थी
पिता का करती ऊंचा नाम
कुछ तो करती अच्छा काम
देश को न बदनाम करो तुम
आसमान पे थूकना न था
अरे सुपीरिया…
फादर आज जहां भी होंगे
बिटिया पर शर्मिंदा होंगे
स्वर्ग में करते निंदा होंगे
बेबस-लाचार परिंदा होंगे
हरष वहां विषादित होंगे
पालन पर पछताते होंगे
अपने पर सकुचाते होंगे
रोते और खोखियाते होंगे
पीड़ा का पारावार न होगा
सोचा ऐसा बंटाधार न होगा
परवरिश का मान घटाना न था
अरे सुपीरिया ….
भारत जब इतिहास लिखेगा
तब तेरा उपहास लिखेगा
पाकिस्तानी परिहास लिखेगा
करती भोग-विलास लिखेगा
गद्दार तुम्हें सायास लिखेगा
गाली तेरी दर्ज करेगा
काली करतूतों को तेरी
अपने पन्नों में मर्ज करेगा
मीरों-जयचंदों की टोली में
अपना नाम लिखाना न था
अरे सुपीरिया बिकना न था
राहुल के आगे टिकना न था
अरे सुपीरिया
बिकना न था
अरे सुपीरिया
टिकना न था
अरे सुपीरिया
बिछना न था
अरे सुपीरिया मिटना ही था
अरे सुपीरिया …….

पॉलिटिकल GPS हैं छगन भुजबल ! छगन भुजबल से मैं कई बार मिला हूँ

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-डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

छगन भुजबल : जहां धंधा, वहां बंदा

छगन भुजबल बहुत ज़ोरदार शख्स हैं ।

छगन भुजबल की महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में वापसी, फिर मंत्री बने। अजित पवार बेचारे हुए साबित।

एनसीपी, अजित पवार गुट, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ( एनसीपी अजित पवार गुट ) ने 20 मई 2025 को महाराष्ट्र के महायुति सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। यह शपथ समारोह मुंबई के राजभवन में हुआ, जहां राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई।

छगन भुजबल, महाराष्ट्र के विवादास्पद राजनीतिक करियर के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं।

पार्टी बदलने का हुनर :

लोग कहते हैं कि छगन भुजबल ने इतनी बार पार्टियां बदली हैं कि अब तो वो खुद ही एक “पॉलिटिकल GPS” बन गए हैं—हमेशा नई दिशा ढूंढ लेते हैं!

सब्जी से सियासत :

भुजबल जी पहले सब्जी बेचते थे, अब सियासत बेचते हैं। बस फर्क इतना है कि अब दाम करोड़ों में लगते हैं, टमाटर के किलो में नहीं! बेशक, वे बहुत प्रतिभाशाली हैं – संघर्ष के बावजूद उन्होंने इंजीनिरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया।

मंत्री पद का जादू :

भुजबल जी जब मंत्रिमंडल में नहीं होते, तो सियासी हलचल ऐसी होती है जैसे कोई बॉलीवुड फिल्म का क्लाइमेक्स चल रहा हो—ड्रामा, सस्पेंस, और अंत में ट्विस्ट!

नाराजगी का रिकॉर्ड :

कहते हैं, भुजबल जी की नाराजगी का रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज होने वाला है—हर कैबिनेट विस्तार में एक नया अध्याय जुड़ता है!

भुजबल की वापसी एनसीपी नेता धनंजय मुंडे के इस्तीफे के बाद हुई, जिन्होंने मार्च 2025 में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। मुंडे का इस्तीफा उनके करीबी वाल्मीक कराड की बीड सरपंच हत्या मामले में गिरफ्तारी के बाद आया था।

छगन भुजबल पर कई बार भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं।

महाराष्ट्र सदन घोटाला (2016) :

भुजबल पर आरोप था कि 2004-2014 के दौरान, जब वे कांग्रेस-एनसीपी सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री थे, उन्होंने 100 करोड़ रुपये के ठेके गलत तरीके से दिए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में भुजबल, उनके बेटे पंकज भुजबल, और भतीजे समीर भुजबल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। 2016 में ईडी ने छगन भुजबल और समीर को गिरफ्तार किया, और वे आर्थर रोड जेल में रहे।बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2018 में छगन भुजबल को स्वास्थ्य और उम्र के आधार पर जमानत दे दी।

2021 में कोर्ट ने उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी, और ईडी ने 2023 में भुजबल और समीर के खिलाफ याचिकाएं वापस ले लीं।

खारघर जमीन मामला (2015) :

भुजबल के बेटे पंकज और भतीजे समीर की कंपनी, देविशा कंसट्रक्शंस, पर आरोप था कि 2010 में हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए जमीन लेने के बाद, ऐडवांस राशि लेने के बावजूद काम शुरू नहीं किया गया।

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत 160 करोड़ रुपये कीमत का प्लॉट सीज किया। बीजेपी सांसद किरीट सोमैया ने इस मामले में भुजबल के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी।

भुजबल ने दावा किया कि वे कंपनी के मालिक नहीं थे और जांच में सहयोग करने की बात कही।

मुंबई एजुकेशन ट्रस्ट (MET) और नासिक जमीन मामला :

विधानमंडल की लोकलेखा समिति (PAC) की रिपोर्ट के अनुसार, भुजबल की संस्था MET को नासिक में जमीन दी गई, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ।

नासिक जिला सहकारी बैंक ने भुजबल की फर्म को 11 करोड़ रुपये का लोन दिया था, जो चुकाया नहीं गया।

बेनामी संपत्ति मामला (2017) :

आयकर विभाग ने भुजबल, पंकज, और समीर की 300 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की, जिसमें नासिक की गिर्णा शुगर मिल्स, मुंबई में सॉलिटेयर बिल्डिंग, और बांद्रा में हबीब मेनोर और फातिमा मेनोर शामिल थे।

मई 2025 में, भुजबल के निजी सहायक से एक व्यक्ति ने आयकर अधिकारी बनकर 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी, जिके बाद में गिरफ्तार किया गया। ये हैसियत है उनके पीए की!

भुजबल को महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल करने पर विपक्ष ने सवाल उठाए। कुछ में दावा किया गया कि भुजबल पर लगे आरोपों के बावजूद, बीजेपी के साथ गठबंधन के बाद उनकी फाइलें ‘गायब’ हो गईं या केस कमजोर हो गए।

भुजबल को 2021 में कोर्ट से क्लीन चिट मिल चुकी है, और ईडी ने उनकी याचिकाएं वापस ले ली हैं। -प्र.हि.

(मुझे क्रेडिट दिये बिना शेयर नहीं करें)

मुस्लिम महिलाओं की आजादी और सामाजिक अपेक्षाओं का दोहरा मापदंड

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मुजफ्फरपुर की एक साहित्यकार ने हाल ही में एक विचारोत्तेजक घटना साझा की, जो सामाजिक अपेक्षाओं और व्यक्तिगत आजादी के बीच के तनाव को उजागर करती है। उनकी एक मुस्लिम महिला मित्र, जो दिल्ली जैसे महानगर में रहती हैं, वहां पूरी तरह आधुनिक जीवन जीती हैं। वे पर्दा या बुर्का नहीं अपनातीं और अपनी स्वतंत्रता का पूर्ण उपयोग करती हैं। लेकिन जब वे अपने गांव लौटती हैं, तो वे एक ‘टिपिकल’ मुस्लिम महिला की छवि में ढल जाती हैं। वे वहां सामाजिक और सांस्कृतिक अपेक्षाओं के अनुरूप व्यवहार करती हैं, जो उनके शहरी जीवन से बिल्कुल विपरीत है।

यह दोहरा व्यवहार केवल उनकी व्यक्तिगत पसंद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। गांव में उनकी इस छवि को एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। परिवारों की बेटियों और बहुओं को उनके उदाहरण के जरिए यह सिखाया जाता है कि चाहे वे शहर में कितनी भी आजादी क्यों न ले लें, उन्हें अपनी ‘संस्कृति’ और ‘तौर-तरीके’ नहीं भूलने चाहिए। यह उदाहरण न केवल सामाजिक रूढ़ियों को मजबूत करता है, बल्कि गांव की उन लड़कियों पर भी दबाव डालता है, जो अपने लिए बेहतर अवसर और स्वतंत्रता की उम्मीद रखती हैं।

इस स्थिति ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि इस महिला मित्र को अपनी इस दोहरी भूमिका के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। साहित्यकार से मैंने अनुरोध किया कि वे अपनी मित्र से इस विषय पर खुलकर बात करें। उन्हें यह समझाना चाहिए कि यह व्यवहार न केवल उनके व्यक्तित्व की सत्यनिष्ठा को कम करता है, बल्कि उन अनगिनत लड़कियों के लिए भी हानिकारक है, जो उनके उदाहरण से प्रभावित होती हैं। उन्हें यह कहना चाहिए, “आप जैसे शहर में अपनी आजादी का आनंद लेती हैं, वैसे ही गांव में भी रहें। चार दिन के लिए गांव जाकर अपने परिवार और समाज की महिलाओं को जीवन भर की कैद में धकेलना उचित नहीं है। आप जिस गांव से आती हैं, वहां की लड़कियों को आपके उदाहरण के कारण सताया जाता है। यह निश्चित रूप से आप भी नहीं चाहेंगी।”

मुस्लिम समुदाय में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, पुरुष-प्रधान मानसिकता का प्रभाव अभी भी गहरा है। कई परिवारों में लड़कियों को शिक्षा, करियर और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अवसर देने में हिचकिचाहट होती है। जिन लड़कियों को ये अवसर मिलते भी हैं, उन पर कई तरह की पाबंदियां थोपी जाती हैं। यह सच है कि कुछ अपवाद मौजूद हैं, जहां लड़कियों को प्रोत्साहन और समर्थन मिलता है, लेकिन ऐसे उदाहरण दुर्लभ हैं। अधिकांश मामलों में, सामाजिक और पारिवारिक दबाव लड़कियों की आकांक्षाओं को दबा देते हैं।

यदि इस पुरुष-प्रधान मानसिकता को चुनौती दी जाए और लड़कियों को थोड़ी-सी भी आजादी दी जाए, तो ऐसी मुस्लिम लड़कियों की संख्या सामने आएगी, जो बाहर निकलना चाहती हैं, अपनी पहचान बनाना चाहती हैं और अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं। लेकिन वर्तमान में, उन्हें अपनी लैंगिक पहचान के कारण कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है; यह भारतीय समाज के कई हिस्सों में व्याप्त है, जहां लड़कियों को अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

इस दोहरे मापदंड का प्रभाव केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी गहरा है। जब एक महिला शहर में आजादी का आनंद लेती है, लेकिन गांव में रूढ़िगत व्यवहार को अपनाती है, तो वह अनजाने में उन सामाजिक मानदंडों को मजबूत करती है, जो अन्य महिलाओं को बांधे रखते हैं। यह एक दुष्चक्र बन जाता है, जहां स्वतंत्रता केवल कुछ के लिए सुलभ होती है, और दूसरों को उसी पुरानी व्यवस्था में जकड़े रहने के लिए मजबूर किया जाता है।

इस स्थिति को बदलने के लिए हमें व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर प्रयास करने होंगे। हमें उन मुस्लिम महिलाओं को प्रोत्साहित करना होगा, जो अपनी स्वतंत्रता का उपयोग करती हैं, कि वे इसे हर जगह एकसमान रूप से अपनाएं। साथ ही, हमें सामाजिक जागरूकता बढ़ानी होगी ताकि पुरुष-प्रधान मानसिकता को चुनौती दी जा सके। शिक्षा, संवाद और सामुदायिक सहयोग के माध्यम से हम एक ऐसी संस्कृति का निर्माण कर सकते हैं, जहां हर लड़की को अपनी क्षमता को पहचानने और उसे साकार करने का अवसर मिले।

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि आजादी एक ऐसी चीज है, जिसे आधे-अधूरे ढंग से अपनाना किसी के लिए भी उचित नहीं है। यदि हम एक समावेशी और प्रगतिशील समाज का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें अपने व्यवहार और अपेक्षाओं में एकरूपता लानी होगी। केवल तभी हम उन लड़कियों के सपनों को साकार कर पाएंगे, जो अपनी आजादी की राह तलाश रही हैं।

इफको ने ग्रामीण मूल्य श्रृंखला विकास न्यास (एफडीआरवीसी) के साथ मिलाया हाथ

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दिल्ली। ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक संयुक्त पहल, जो पेशेवर रूप से प्रबंधित और उत्पादक-स्वामित्व वाले सामूहिक उद्यमों (पीई) को बढ़ावा देने के लिए एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में स्थापित की गई है।

· इफको एफडीआरवीसी से जुड़े एफपीओ को नवीन नैनो उर्वरक, जैव-उत्तेजक, विशेष उर्वरक और जैविक आदान जैसे जैव-उर्वरक और जैव-अपघटक की आपूर्ति करेगा।
· देश भर में 800 से अधिक एफपीओ और 10 लाख किसानों पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

*नई दिल्ली, 15 मई 2025:*
विश्व की सबसे बड़ी प्रसंस्कृत उर्वरक एवं कृषि-आदान के विनिर्माण और विपणन के क्षेत्र में विश्व की अग्रणी सहकारी संस्था, इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने ग्रामीण मूल्य श्रृंखला विकास न्यास (एफडीआरवीसी) के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। एफडीआरवीसी, ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है, जिसे पेशेवर रूप से प्रबंधित और उत्पादक-स्वामित्व वाले सामूहिक उद्यमों (पीई) को बढ़ावा देने के लिए एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में स्थापित किया गया है। इस साझेदारी का उद्देश्य पूरे भारत में नवीन, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाले कृषि आदान तक किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की पहुँच बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाना है। इसका लाभ देश भर के 800 से अधिक एफपीओ और 10 लाख किसानों को मिलेगा।

समझौता ज्ञापन पर आधिकारिक रूप से इफको के विपणन निदेशक श्री योगेन्द्र कुमार और एफडीआरवीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री बिपिन बिहारी ने हस्ताक्षर किए।

साझेदारी के हिस्से के रूप में, इफको एफडीआरवीसी से जुड़े एफपीओ को अभिनव नैनो उर्वरक, जैव-उत्तेजक, विशेष उर्वरक और जैविक आदान जैसे जैव-उर्वरक और जैव-अपघटक की आपूर्ति करेगा। यह पहल न केवल कृषि उत्पादकता और लाभप्रदता में सुधार करेगी बल्कि सामूहिक खेती के माध्यम से टिकाऊ और जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देने के सरकार के मिशन का भी समर्थन करेगी।

श्री योगेंद्र कुमार ने कहा कि इफको देश के किसानों के लिए प्रतिबद्ध है और उन्नत प्रौद्योगिकियों तथा किसान-केंद्रित समाधानों के माध्यम से भारतीय कृषि में निरंतर क्रांति ला रहा है। यह समझौता ज्ञापन इफको के नैनो उर्वरकों और विशेष उत्पादों की पहुंच देश के सुदूर भागों तक बढ़ाएगा, जिससे स्थानीय एफपीओ के माध्यम से छोटे किसानों तक किफायती कीमतों पर विश्व स्तरीय कृषि-आदानों की पहुंच सुनिश्चित होगी।

एफडीआरवीसी, विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में एफपीओ के अपने विस्तृत नेटवर्क के साथ, समुदाय-नेतृत्व वाले तंत्रों के माध्यम से अंतिम जन तक पहुँच, किसान शिक्षा और इन आदानों को बढ़ावा देने की सुविधा
प्रदान करेगा। यह साझेदारी एफपीओ की संस्थागत क्षमताओं का निर्माण करने और उन्हें आत्मनिर्भर ग्रामीण उद्यम बनने के लिए तैयार करने में भी मदद करेगी।

यह साझेदारी नवाचार को बढ़ावा देने, आदानों की पहुंच में सुधार लाने और छोटे और सीमांत किसानों के बीच लचीलेपन को बढ़ावा देने के माध्यम से भारत के कृषि क्षेत्र में समावेशी विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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