भारतीय सेना की ऐतिहासिक उपलब्धि – ऑपरेशन सिंदूर आतंकिस्तान अब भी नहीं सुधरा तो रण भीषण होगा

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पहलगाम में विगत 22 अप्रैल 2025 को हुए वीभत्स आतंकी हमले के बाद भारत की सेना ने 6-7 मई की रात को पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने की सफल कार्यवाई की। पाकिस्तान की सेना ने इसमें आतंकियों का साथ देने का निर्णय किया और भारत के नागरिक तथा सैन्य ठिकानों को चोट पहुँचाने के लिए हमले किये। 10 मई 2025 को भारतीय सेना के आक्रामक प्रहार के पश्चात अंततः पाकिस्तान ने युद्ध विराम की गुहार लगाई। भारतीय सेना का आतंकवाद के खिलाफ यह अभियान पूर्णतः सफल रहा जिसमें पाकिस्तान तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को लगभग तबाह कर दिया गया।

भारतीय सेना द्वारा जो जानकारी साझा की गई है उससे स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों सहित वहां के 11 एयर बेस भी पूरी तरह से तबाह हो गये हैं जिसमें रणनीतिक महत्व वाले सरगोधा जैसे अड्डे भी शामिल हैं। माना जाता है कि सरगोधा वही स्थान है जहाँ पाकिस्तान के परमाणु हथियार रखे थे। किराना के हिलने के बाद आतंकिस्तान सहित अमेरिका आदि देशों की नींद उड़ गई और पाकिस्तान को हमेशा की तरह एक बार फिर घुटनों पर आकर युद्ध विराम की मांग करनी पड़ी । जब भारतीय हमले की सीमा में पाकिस्तान का परमाणु जखीरा भी आ गया और उनके परमाणु कमांड सेंटर के पास ब्रह्मोस मिसाइल गिरी तब जाकर पाकिस्तान ने अमेरिका से गुहार लगाई और यह सीजफायर हुआ किंतु यह सीजफायर भी भारत की ही शर्तों पर हुआ है। विश्व के इतिहास में पहली बार किसी देश ने किसी परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के अंदर घुसकर आतंकी कैम्पों पर इस तरह की कार्यवाही की है इसकी तुलना अमेरिका द्वारा एबटाबाद पर हमला करके बिन लादेन से नहीं की जा सकती है। संपूर्ण कार्यवाही के दौरान भारत के कूटनीतिक प्रयास भी उत्कृष्ट रहे। चीन, तुर्किंए और अजरबैजान को छोड़कर दुनिया का कोई भी देश पाकिस्तान के साथ खुलकर खड़ा होने का साहस नही कर पाया।ईरान ने अवश्य कुछ प्रयास किया किन्तु वह भी सफल नहीं हुआ।

भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अगर पाकिस्तान एक भी गोली चलाएगा तो फिर भारत गोला ही दागेगा। अपनी रणनीति को बदलते हुए भारत ने तय किया है कि अब पाक प्रायोजित किसी भी आतंकवादी घटना का इसी प्रकार जवाब दिया जायेगा और किसी भी आतंकी घटना को युद्ध के समान ही माना जायेगा।

ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत आधुनिक रक्षा प्रणालियों का उपयोग करते हुए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर निर्दिष्ट हमले करकर न केवल आतंकी ठिकानों को समाप्त किया गया वरन सौ से अधिक आतंकवादियों को भी मिटटी में मिला दिया गया। सेना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। बहावलपुर स्थित मरकज सुभानअल्लाह जो आतंकियों का सबसे बड़ा मुख्यालय तथा प्रशिक्षण केंद्र था, मुरिदके स्थित मरकज तैयबा और मुजफ्फराबाद स्थित मरकज सैयादानी बिलाल पूरी तरह से तबाह हो गये हैं। इन तीनों ठिकानों की शुरुआत अफगानिस्तान में सोवियत संघ की सेना के खिलाफ युद्ध करने वाले कट्टरपंथियों के जरिये पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई ने करी थी। इन्हें पाक पुलिस व स्थानीय सेना उसी तरह से संरक्षण दे रही थी जिस तरह वह कई वर्षों तक ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को पोषित करती रही थी । सियालकोट में हिजबुल मुजाहिदीन के सरजल और मेहमूना जोया आतंकी कैप को भी बर्बाद कर दिया गया। इसके अलावा पांच आतंकी ठिकाने पीओके में थे जिसमें मुजफ्फाराबाद में लश्कर का सवाईलाना कैंप और जैश का सैयदना बिलाल केपपूरी तरह से तबाह कर दिया गया। इसके अलावा भिंबर में भी बरनाला आतंकी कैंप भी तबाह कर दिया गया है।

आतंक के खिलाफ इस कार्यवाही में 100 से अधिक आतंकी मारे गये हैं। मारे गए ये सभी आतंकी किसी न किसी बड़ी आतंकी घटना में शामिल रहे थे। इनमें कंधार विमान अपहरण कांड का मुख्य आरोपी, पुलवामा घटना को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी तथा पांच प्रमुख आतंकवादी सरगना मारे गए हैं जिससे आतंकी संगठनों का तंत्र पूरी तरह से हिला हुआ है। भारत द्वारा आतंक के खिलाफ छेड़े गए इस युद्ध को पाकिस्तान ने अपने ऊपर ले लिया और भारत पर हमला बोल दिया।

पाकिस्तानी हमले के बाद भारत के पलटवार से पाकिस्तान के 11 एयसरबेस को भारी नुकसान पहुंचा है। नूरखान एयरबेस तबाह होना पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा झटका है क्योंकि पकिस्तानी वायुसेना यहीं से अपने विमानों में ईंधन भरती है। भारत ने इस एयरबेस पर इतना भयानक हमला किया कि यह एयरबेस पूरी तरह से तबाह हो या । इधर भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तानी ड्रोन विमान व मिसाइल को अंदर नहीं घुसने दिया। भारत के पास आज इतनी अच्छी तकनीक है कि यदि कोई मिसाइल, ड्रोन या लड़ाकू विमान इसकी सीमा के अंदर घुसता है तो उसका मार गिराया जाना सुनिश्चित है।

यह स्ट्राइक इतनी सटीक थी कि सभी इसकी प्रशंसा कर रहे हैं। भारत ने अब सिद्ध कर दिया है कि उसने आतंक से लड़ने के निमय बदल दिये हैं। अब भारत की सेना दुश्मन के ठिकानों को उनके घर में घुसकर ठोक रही है। आतंकियों को पाताल से भी खोजकर सजा दी जा रही है । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आतंक का बीज बोकर भारतवासियों को बार -बार रुलाया है, अब बहुत हुआ ।
ऑपरेशन सिंदूर की गहराई को अगर देखा जाये तो पता चलता है कि इस ऑपरेशन की जद में आज तक हुई सभी प्रमुख आतंकी घटनाओं के गुनाहगार आ गए , वे या तो मारे गए हैं या बनकर में छुपे हुए मौत का इंतज़ार कर रहे हैं। भारत ने अपनी रणनीति, संकल्प, संयम सभी की नई परिभाषा गढ़ी है । भारत ने किसी सैन्य बेस को तब तक निशाना नहीं बनाया जब तक पाकिस्तान ने हमला नहीं किया। ऑपरेशन सिंदूर ने एक ऐसी लक्ष्मण रेखा खींच दी है जिसे कोई भी आतंकी अब नजरअंदाज नहीं कर सकता। चीन और तुर्किए के हथियार आत्मनिर्भर भारत के स्वदेशी हथियारों के समक्ष कमजोर साबित हुए हैं। आकाश ब्रह्मोस ने ही पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया।

उधर पाकिस्तानी और भारत के लेफ्ट लिबरल मीडिया ने भारत के विरुद्ध दुष्प्रचार के युद्ध का मोर्चा खोला हुआ था, किन्तु भारतीय सेना उनके एक- एक झूठ को प्रमाण के साथ बेनकाब कर रही थी। भारतीय सेना का सन्देश स्पष्ट है कि, “अब हम अपने लोगों की सुरक्षा के लिए जब चाहें, जहां चाहें घुस कर वार कर सकते हैं। हम पूरी तरह से तैयार व तत्पर है। हमने अगले मिशन के लिए तैयारी पूरी कर ली है।“हमारे पास आज एक से बढ़कर एक अति आधुनिक तकनीक है। आतंक के खिलाफ लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है अगर पाकिस्तान व आतंकी नहीं सुधरे तो रण बहुत भीषण होगा।

शांति की जीत: भारत का युद्धविराम और व्यावहारिकता की शुरुआत

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दिल्ली। भारत और पाकिस्तान की सीमाओं पर हाल ही में हुआ युद्धविराम (सीज़फायर) दक्षिण एशिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण क्षण है, जो शांति, व्यावहारिकता और समझदारी की जीत का प्रतीक है।

यह सफलता अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की व्यावसायिक सूझबूझ से संभव हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस मौके पर अपनी ताकत और उदारता दिखाई, विकास और वैश्विक सम्मान के लिए जरूरी शांति प्रयासों को अपनाया। पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर जोरदार हमला करके भारत ने अपनी सैन्य ताकत साबित की। फिर भी, युद्धविराम स्वीकार कर भारत ने गांधीवादी भावना दिखाई, ताकत की स्थिति से पीछे हटकर दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता दी।

लंबे समय तक युद्ध का खतरा मंडरा रहा था, जिसमें युद्ध-उन्मादी लोग और रिटायर्ड जनरल, अपने सुरक्षित घरों से, तनाव बढ़ाने की वकालत कर रहे थे। उनकी बातों को टीवी एंकर्स, जैसे अर्नब गोस्वामी ने और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, जिससे समाज में बंटवारा और आर्थिक प्रगति को नुकसान हो सकता था। ऐसी तेज़ आवाज़ वाली बकवास ने सच को छिपा दिया: युद्ध दोनों पक्षों को तबाह करता है, अर्थव्यवस्थाओं को बर्बाद करता है और लोगों को कष्ट देता है।

लंबा टकराव चीन को अपनी सैन्य ताकत दिखाने का मौका देता, जिससे उसका क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ता। सबसे डरावना था पाकिस्तान का अंतिम हथियार के रूप में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल, जो पूरे उपमहाद्वीप के लिए खतरा था।

शुक्र है, समझदारी जीती, जिसमें ट्रम्प की व्यावसायिक बुद्धि और मोदी की रणनीतिक दूरदर्शिता की बड़ी भूमिका रही।

शुरू में पाकिस्तान के युद्धविराम प्रस्ताव पर भारत के जवाब से कुछ लोग नाराज़ और निराश थे। लेकिन धीरे-धीरे लोग मोदी के शांति के हाथ मिलाने के फैसले की समझदारी देखने लगे।

यह युद्धविराम न केवल जान-माल की हानि रोकता है, बल्कि भारत की आर्थिक प्रगति को भी सुरक्षित करता है, जो लाखों लोगों को गरीबी और अभाव से मुक्ति दिलाने के लिए जरूरी है। भारत के लोग, जो लंबे समय से अविकास की बेड़ियों में जकड़े हैं, शांति के लाभ—बेहतर स्कूल, अस्पताल और अवसर—के हकदार हैं, न कि युद्ध की तबाही के।

भारतीय नेतृत्व के इस स्थिति को संभालने का तरीका तारीफ के काबिल है। पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नष्ट करके भारत ने साफ संदेश दिया: वह अपनी संप्रभुता (आज़ादी) पर कोई समझौता नहीं करेगा। फिर भी, युद्धविराम स्वीकार कर मोदी ने कूटनीतिक जीत हासिल की, भारत को एक परिपक्व वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया। सोमवार को जब दोनों देशों के सेना प्रमुख मिलेंगे, भारत मजबूत स्थिति में होगा और अपनी शर्तें मनवाने की स्थिति में होगा, जबकि सभी विकल्प खुले रहेंगे। सैन्य ताकत और कूटनीतिक संयम का यह मिश्रण मोदी की टीम की योग्यता को दर्शाता है, जिसके लिए उन्हें पूरे अंक मिलते हैं।

भारत में दिखी एकता इस जीत को और मजबूत करती है। ओवैसी के भाषणों से लेकर चेन्नई में स्टालिन के नेतृत्व में एकता मार्च तक, देश सरकार के प्रयासों के साथ एकजुट हुआ। मुस्लिम समूहों और विपक्षी दलों ने मतभेद भुलाकर समर्थन दिया, जिससे देश में अद्भुत एकता दिखी।
यह युद्धविराम कमजोरी नहीं, बल्कि भारत के सशस्त्र बलों पर भरोसे और शांति के प्रति प्रतिबद्धता का सबूत है। जैसे-जैसे धूल बैठती है, संदेश साफ है: भारत एकजुट और ऊंचा खड़ा है, तैयार है एक ऐसे भविष्य को आकार देने के लिए जहां विकास, न कि विनाश, उसकी पहचान हो।

क्यों भारत से चिढ़ती है पश्चिमी दुनिया!!

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इंडो-पाक तनाव की धधकती पृष्ठभूमि में, पश्चिमी देशों की भारत-विरोधी मानसिकता अब कूटनीतिक मतभेद से कहीं आगे, न्याय और तर्क के साथ सरासर विश्वासघात में तब्दील हो गई है। एक जीवंत लोकतंत्र और दशकों से आतंकवाद का शिकार रहा भारत, को पाकिस्तान जैसे राष्ट्र के समकक्ष खड़ा करना – जिसका इतिहास जिहादी तत्वों को पोषित करने का रहा है – एक घोर अन्याय है। यह तटस्थता नहीं, बल्कि शक्ति, पूर्वाग्रह और भारत के तेजी से बढ़ते कद को लेकर पश्चिम की बेचैनी का स्पष्ट प्रदर्शन है।

ट्रंप प्रशासन के हालिया पैंतरेबाजी इसका ज्वलंत उदाहरण है। एक पल “हमें इस संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं” का राग अलापना, और अगले ही पल दक्षिण एशिया में शांति के स्वघोषित ठेकेदार की तरह हास्यास्पद युद्धविराम प्रस्ताव थोपना – यह कोई संयोग नहीं है। यह एक पुरानी अमेरिकी नीति का हिस्सा है, जिसके तहत हर प्रशासन ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर की सहायता दी है, बावजूद इसके कि वह आतंकवादियों को सुरक्षित आश्रय और प्रशिक्षण अड्डे मुहैया कराता रहा है।

सवाल उठता है, क्यों? क्योंकि पाकिस्तान जैसे सत्तावादी शासन को धमकाना, खरीदना और अपने उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करना आसान है। जबकि भारत, अपनी खुली और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ, सिद्धांतों पर अडिग रहता है और किसी की कठपुतली बनने से इनकार करता है। शायद यही बात पश्चिम को खटकती है।

पश्चिमी मीडिया की भूमिका भी निंदनीय है। प्रिंट हो या इलेक्ट्रॉनिक, अधिकांश रिपोर्टिंग पाकिस्तान की ओर झुकी हुई प्रतीत होती है। पाकिस्तानी डायस्पोरा द्वारा लिखे गए लेख जो अमेरिका के अखबारों में प्रकाशित होते रहते हैं, अक्सर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को अनदेखा करते हुए भारत की आत्मरक्षात्मक कार्रवाइयों को ‘आक्रामकता’ करार देते हैं। यह मात्र लापरवाही नहीं, बल्कि भारत और पाकिस्तान को एक ही तराजू पर तौलने की एक सोची-समझी साजिश लगती है। भारत की छवि धूमिल करने का यह अभियान – चाहे वह झूठे नैरेटिव गढ़ना हो या चयनात्मक प्रतिक्रियाओं को उजागर करना – दर्शाता है कि पश्चिम को एक ऐसे राष्ट्र से परेशानी है जो उनके द्वारा निर्धारित ‘स्क्रिप्ट’ का पालन नहीं करता। हार्वर्ड और कैंब्रिज टाइप यूनिवर्सिटीज पर जेहादियों का कब्जा हो चुका है जो डेली सच्चाई का कत्ल करते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य का प्रश्न विचारणीय है: “क्या इसके पीछे सिर्फ भू-राजनीति ही कारण है? शायद नहीं। पाकिस्तान एक मुस्लिम-बहुल देश है, जबकि भारत हिंदू-बहुल। कहीं न कहीं एक सांस्कृतिक असहजता भी है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है, लेकिन महसूस किया जा सकता है।”

जनविचारक प्रो. पारसनाथ चौधरी इस बात को और विस्तार देते हैं: “हिंदू धर्म, जिसकी नींव बहस, विविधता और योग, ध्यान और शाकाहार जैसी जीवन पद्धतियों पर टिकी है, वह पश्चिम की यहूदी-ईसाई या धर्मनिरपेक्ष सोच में आसानी से फिट नहीं बैठता। यह केवल एक धर्म नहीं, बल्कि एक जीवन जीने का तरीका है, जो लचीला और विचारों से समृद्ध है। भारत की प्राचीन गणित से लेकर आधुनिक आईटी तक की उपलब्धियां, पश्चिम की उस पुरानी धारणा को चुनौती देती हैं जो भारत को मात्र एक रहस्यमय और पिछड़ा देश मानती थी।”

अब भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की बात करते हैं। भारत अपने स्वयं के मिसाइल, लड़ाकू विमान और नौसेना प्रणालियाँ विकसित कर रहा है – जिसने पश्चिमी हथियार लॉबी की नींद उड़ा दी है। लोक स्वर संस्था के अध्यक्ष राजीव गुप्ता का कहना है, “अमेरिका और यूरोप, जो अब तक भारत को एक बड़े खरीदार के रूप में देखते थे, अब एक ऐसे प्रतिद्वंद्वी को देख रहे हैं जो वैश्विक शक्ति के समीकरणों को बदल रहा है।”

एक आत्मनिर्भर भारत न केवल उनके मुनाफे के लिए खतरा है, बल्कि उनके नियंत्रण की मानसिकता के लिए भी एक चुनौती है। मौजूदा संघर्ष में भारत ने अपनी श्रेष्ठता फिर से साबित की है। हमारे स्वदेशी हथियार, मिसाइलें, ब्रह्मोस ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। आज देश में इतना आत्मविश्वास है कि भारत अपने सहयोगी राष्ट्रों के साथ मिलकर दुश्मन को धूल चटा सकता है।

पश्चिम का भारत के साथ यह प्रेम-घृणा का संबंध एक बुनियादी सत्य पर टिका है: भारत की स्वतंत्र सोच – राजनीतिक, सांस्कृतिक और अब सैन्य क्षेत्र में – उस विश्व व्यवस्था को हिला रही है जो स्थापित मानदंडों और प्रभुत्वों पर आधारित है। भारत को पाकिस्तान के बराबर आंकने का प्रयास एक विफल रणनीति है – भारत निर्भीक रूप से हिंदू है, और तेजी से भविष्य की ओर अग्रसर है।

सामाजिक कार्यकर्ता मुक्ता स्पष्ट रूप से कहती हैं, “पश्चिम शायद इस भारत को स्वीकार न कर पाए, लेकिन भारत को अब उनकी स्वीकृति या अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।” अब समय आ गया है कि दुनिया इस वास्तविकता को समझे – और पश्चिम खुद को आइने में देखे।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आज राष्ट्र के नाम संबोधन

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प्रिय देशवासियों,
नमस्कार!

हम सभी ने बीते दिनों में देश का सामर्थ्य और उसका संयम दोनों देखा है। मैं सबसे पहले भारत की पराक्रमी सेनाओं को, सशस्त्र बलों को, हमारी खुफिया एजेंसियों को, हमारे वैज्ञानिकों को, हर भारतवासी की तरफ से सैल्यूट करता हूं। हमारे वीर सैनिकों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए असीम शौर्य का प्रदर्शन किया। मैं उनकी वीरता को, उनके साहस को, उनके पराक्रम को, आज समर्पित करता हूं- हमारे देश की हर माता को, देश की हर बहन को, और देश की हर बेटी को, ये पराक्रम समर्पित करता हूं।

साथियों,
22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों ने जो बर्बरता दिखाई थी, उसने देश और दुनिया को झकझोर दिया था। छुट्टियां मना रहे निर्दोष-मासूम नागरिकों को धर्म पूछकर, उनके परिवार के सामने, उनके बच्चों के सामने, बेरहमी से मार डालना, ये आतंक का बहुत विभत्स चेहरा था, क्रूरता थी। ये देश के सद्भाव को तोड़ने की घिनौनी कोशिश भी थी। मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से ये पीड़ा बहुत बड़ी थी। इस आतंकी हमले के बाद सारा राष्ट्र, हर नागरिक, हर समाज, हर वर्ग, हर राजनीतिक दल, एक स्वर में, आतंक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए उठ खड़ा हुआ। हमने आतंकवादियों को मिट्टी में मिलाने के लिए भारत की सेनाओं को पूरी छूट दे दी। और आज हर आतंकी, आतंक का हर संगठन जान चुका है कि हमारी बहनों-बेटियों के माथे से सिंदूर हटाने का अंजाम क्या होता है।

साथियों,
‘ऑपरेशन सिंदूर’ ये सिर्फ नाम नहीं है, ये देश के कोटि-कोटि लोगों की भावनाओं का प्रतिबिंब है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ न्याय की अखंड प्रतिज्ञा है। 6 मई की देर रात, 7 मई की सुबह, पूरी दुनिया ने इस प्रतिज्ञा को परिणाम में बदलते देखा है। भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान में आतंक के ठिकानों पर, उनके ट्रेनिंग सेंटर्स पर सटीक प्रहार किया। आतंकियों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि भारत इतना बड़ा फैसला ले सकता है। लेकिन जब देश एकजुट होता है, Nation First की भावना से भरा होता है, राष्ट्र सर्वोपरि होता है, तो फौलादी फैसले लिए जाते हैं, परिणाम लाकर दिखाए जाते हैं।

जब पाकिस्तान में आतंक के अड्डों पर भारत की मिसाइलों ने हमला बोला, भारत के ड्रोन्स ने हमला बोला, तो आतंकी संगठनों की इमारतें ही नहीं, बल्कि उनका हौसला भी थर्रा गया। बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकाने, एक प्रकार से ग्लोबल टैररिज्म की यूनिवर्सटीज रही हैं। दुनिया में कहीं पर भी जो बड़े आतंकी हमले हुए हैं, चाहे नाइन इलेवन हो, चाहे लंदन ट्यूब बॉम्बिंग्स हो, या फिर भारत में दशकों में जो बड़े-बड़े आतंकी हमले हुए हैं, उनके तार कहीं ना कहीं आतंक के इन्हीं ठिकानों से जुड़ते रहे हैं। आतंकियों ने हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा था, इसलिए भारत ने आतंक के ये हेडक्वार्ट्स उजाड़ दिए। भारत के इन हमलों में 100 से अधिक खूंखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा गया है। आतंक के बहुत सारे आका, बीते ढाई-तीन दशकों से खुलेआम पाकिस्तान में घूम रहे थे, जो भारत के खिलाफ साजिशें करते थे, उन्हें भारत ने एक झटके में खत्म कर दिया।

साथियों,
भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तान घोर निराशा में घिर गया था, हताशा में घिर गया था, बौखला गया था, और इसी बौखलाहट में उसने एक और दुस्साहस किया। आतंक पर भारत की कार्रवाई का साथ देने के बजाय पाकिस्तान ने भारत पर ही हमला करना शुरू कर दिया। पाकिस्तान ने हमारे स्कूलों-कॉलेजों को, गुरुद्वारों को, मंदिरों को, सामान्य नागरिकों के घरों को निशाना बनाया, पाकिस्तान ने हमारे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन इसमें भी पाकिस्तान खुद बेनकाब हो गया।

दुनिया ने देखा कि कैसे पाकिस्तान के ड्रोन्स और पाकिस्तान की मिसाइलें, भारत के सामने तिनके की तरह बिखर गईं। भारत के सशक्त एयर डिफेंस सिस्टम ने, उन्हें आसमान में ही नष्ट कर दिया। पाकिस्तान की तैयारी सीमा पर वार की थी, लेकिन भारत ने पाकिस्तान के सीने पर वार कर दिया। भारत के ड्रोन्स, भारत की मिसाइलों ने सटीकता के साथ हमला किया। पाकिस्तानी वायुसेना के उन एयरबेस को नुकसान पहुंचाया, जिस पर पाकिस्तान को बहुत घमंड था। भारत ने पहले तीन दिनों में ही पाकिस्तान को इतना तबाह कर दिया, जिसका उसे अंदाजा भी नहीं था।

इसलिए, भारत की आक्रामक कार्रवाई के बाद, पाकिस्तान बचने के रास्ते खोजने लगा। पाकिस्तान, दुनिया भर में तनाव कम करने की गुहार लगा रहा था। और बुरी तरह पिटने के बाद इसी मजबूरी में 10 मई की दोपहर को पाकिस्तानी सेना ने हमारे DGMO को संपर्क किया। तब तक हम आतंकवाद के इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर तबाह कर चुके थे, आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया था, पाकिस्तान के सीने में बसाए गए आतंक के अड्डों को हमने खंडहर बना दिया था, इसलिए, जब पाकिस्तान की तरफ से गुहार लगाई गई, पाकिस्तान की तरफ से जब ये कहा गया, कि उसकी ओर से आगे कोई आतंकी गतिविधि और सैन्य दुस्साहस नहीं दिखाया जाएगा। तो भारत ने भी उस पर विचार किया। और मैं फिर दोहरा रहा हूं, हमने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर अपनी जवाबी कार्रवाई को अभी सिर्फ स्थगित किया है। आने वाले दिनों में, हम पाकिस्तान के हर कदम को इस कसौटी पर मापेंगे, कि वो क्या रवैया अपनाता है।

साथियों,
भारत की तीनों सेनाएं, हमारी एयरफोर्स, हमारी आर्मी, और हमारी नेवी, हमारी बॉर्डर सेक्योरिटी फोर्स- BSF, भारत के अर्धसैनिक बल, लगातार अलर्ट पर हैं। सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद, अब ऑपरेशन सिंदूर आतंक के खिलाफ भारत की नीति है। ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में एक नई लकीर खींच दी है, एक नया पैमाना, न्यू नॉर्मल तय कर दिया है।

पहला- भारत पर आतंकी हमला हुआ तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हम अपने तरीके से, अपनी शर्तों पर जवाब देकर रहेंगे। हर उस जगह जाकर कठोर कार्यवाही करेंगे, जहां से आतंक की जड़ें निकलती हैं। दूसरा- कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत नहीं सहेगा। न्यूक्लियर ब्लैकमेल की आड़ में पनप रहे आतंकी ठिकानों पर भारत सटीक और निर्णायक प्रहार करेगा।

तीसरा- हम आतंक की सरपरस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, दुनिया ने, पाकिस्तान का वो घिनौना सच फिर देखा है, जब मारे गए आतंकियों को विदाई देने, पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े अफसर उमड़ पड़े। स्टेट स्पॉन्सरड टेरेरिज्म का ये बहुत बड़ा सबूत है। हम भारत और अपने नागरिकों को किसी भी खतरे से बचाने के लिए लगातार निर्णायक कदम उठाते रहेंगे।

साथियों,
युद्ध के मैदान पर हमने हर बार पाकिस्तान को धूल चटाई है। और इस बार ऑपरेशन सिंदूर ने नया आयाम जोड़ा है। हमने रेगिस्तानों और पहाड़ों में अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया, और साथ ही, न्यू एज वॉरफेयर में भी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। इस ऑपरेशन के दौरान, हमारे मेड इन इंडिया हथियारों की प्रमाणिकता सिद्ध हुई। आज दुनिया देख रही है, 21वीं सदी के वॉरफेयर में मेड इन इंडिया डिफेंस इक्विपमेंट्स, इसका समय आ चुका है।

साथियों,
हर प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ हम सभी का एकजुट रहना, हमारी एकता, हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। निश्चित तौर पर ये युग युद्ध का नहीं है, लेकिन ये युग आतंकवाद का भी नहीं है। टैररिज्म के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, ये एक बेहतर दुनिया की गारंटी है।

साथियों,
पाकिस्तानी फौज, पाकिस्तान की सरकार, जिस तरह आतंकवाद को खाद-पानी दे रहे है, वो एक दिन पाकिस्तान को ही समाप्त कर देगा। पाकिस्तान को अगर बचना है तो उसे अपने टैरर इंफ्रास्ट्रक्चर का सफाया करना ही होगा। इसके अलावा शांति का कोई रास्ता नहीं है। भारत का मत एकदम स्पष्ट है, टैरर और टॉक, एक साथ नहीं हो सकते, टैरर और ट्रेड, एक साथ नहीं चल सकते। और, पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकता।

मैं आज विश्व समुदाय को भी कहूंगा, हमारी घोषित नीति रही है, अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो टेरेरिज्म पर ही होगी, अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर, PoK उस पर ही होगी।

प्रिय देशवासियों,
आज बुद्ध पूर्णिमा है। भगवान बुद्ध ने हमें शांति का रास्ता दिखाया है। शांति का मार्ग भी शक्ति से होकर जाता है। मानवता, शांति और समृद्धि की तरफ बढ़े, हर भारतीय शांति से जी सके, विकसित भारत के सपने को पूरा कर सके, इसके लिए भारत का शक्तिशाली होना बहुत जरूरी है, और आवश्यकता पड़ने पर इस शक्ति का इस्तेमाल भी जरूरी है। और पिछले कुछ दिनों में, भारत ने यही किया है।

मैं एक बार फिर भारत की सेना और सशस्त्र बलों को सैल्यूट करता हूं। हम भारतवासी के हौसले, हर भारतवासी की एकजुटता का शपथ, संकल्प, मैं उसे नमन करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।
भारत माता की जय !!
भारत माता की जय !!!

भारत माता की जय !!!

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