यू ट्यूबर महिला के तीखे सवालों का कब जवाब देंगे अजीत अंजुम

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एमएस डेस्क

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर यू ट्यूब चैनल The Alternate Media की खूब चर्चा हुई। चर्चा के केन्द्र में इंडि गंठबंधन की तरफ रूझान रखने वाले वरिष्ठ यू ट्यूबर अजीत अंजुम थे। उनके ऊपर एक युवा पत्रकार श्रीकांत ने कुछ गंभीर आरोप लगाए। जिस पर विस्तार से एक वीडियो बनाकर ना सिर्फ अजीत ने सफाई दी बल्कि पत्रकार और साक्षात्कारकर्ता को कोर्ट की कार्रवाई की धमकी देकर माफी मांगने के लिए कहा। श्रीकांत को अपनी गलती का एहसास हुआ। बकौल श्रीकांत उन्हें अजीत अंजुम के एक करीबी ने ही सारी जानकारी दी थी। जो गलत साबित हुई। उन्हें लगता है कि अजीत के खिलाफ उनका इस्तेमाल हो गया।

एक सवाल जो सोशल मीडिया की दुनिया से बाहर निकल कर जमीन पर इन दिनों तैर रहा है कि श्रीकांत तो इस्तेमाल हुए लेकिन इसका फायदा सबसे अधिक अजीत अंजुम को हुआ। श्रीकांत से हुई भूल ने अजीत अंजुम को चर्चा में आने का अवसर दे दिया। उन्होंने का मौके का फायदा उठाकर एक के बदले तीन वीडियो बनाए।

इस पूरे मामले पर The Alternate Media की प्रतिक्रिया यू ट्यूब पर आ गई है। चैनल के अनुसार— अजीत अंजुम को क्या देश की जुडिशियरी पर विश्वास नही है। पहला वीडियो उन्होंने बनाया। वह ठीक था। ऐसे गंभीर आरोप के बाद कोई भी ऐसा करेगा लेकिन न्यायालय की शरण में जाने के बाद तीन—तीन वीडियो एक ही मामले पर बनाने का क्या मतलब है? अजीत अंजुम को इस प्रश्न का जवाब देना चाहिए।

The Alternate Media ने अजीत की रिसर्च टीम पर भी सवाल उठाए हैं। अजीत अपने वीडियो में रिसर्च टीम का जिक्र करते हैं लेकिन चैनल के अनुसार, उनका काम ठीक नहीं है। दूसरे और तीसरे वीडियो में तथ्यों की गलतियां थी। चैनल के अनुसार अजीत अंजुम ने दावा किया कि उनके नोटिस के बाद वीडियो का थम नेल बदला गया। चैनल के अनुसार — वीडियो 12 अप्रैल को अपलोड हुआा। थमनेल 14 अप्रैल को बदला। लीगल नोटिस आया 17 अप्रैल को। थमनेल को बदलने और लीगल नोटिस मिलने के बीच 72 घंटे का अंतर था।

चैनल के अनुसार — लीगल नोटिस में चैनल का नाम तक गलत लिखा गया था। अजीत अंजुम ने यू ट्यूब चैनल के मॉडरेटर के इंटेंट पर सवाल उठाया। इसके जवाब में मॉडरेटर गायत्री देवी ने कहा— वे दस साल से विदेश में रहती हैं। वे कभी अजीत अंजुम से मिली नहीं। फिर इंटेंट की बात क्यों की गई, जो समझ आने वाली नहीं है।

अजीत अंजुम ने वीडियो में बताया की गायत्री पत्रकार हैं। गायत्री का कहना है कि वे पत्रकार नहीं हैं। अजीत अंजुम की रिसर्च टीम ने गायत्री के तीन नाम तलाशने का दावा किया। ऐसी रिसर्च टीम तो अजीतजी के भी तीन नाम तलाश कर ला सकती है। पहला अजीत कुमार, दूसरा अजीत अंजुम और पिता के सिंह सरनेम वाला तीसरा अजीत सिंह। अजीतजी घुम घुम कर देश भर में दूसरों की जाति पता लगा कर लाते हैं लेकिन अपनी जाति नहीं बताते।

The Alternate Media ने अजीत अंजुम से श्रीकांत के सवालों के जवाब पर भी एक प्रश्न किया है। चैनल के अनुसार, जवाब देने में वे सेलेक्टिव क्यों थे? वे जब जवाब दे रहे थे तो सभी सवालों के जवाब देते। वे जवाब के साथ कोई प्रमाण नहीं दे रहे थे। जिससे उनके यू ट्यूब चैनल की विश्वसनीयता दर्शकों के सामने बनी रहे। क्या इसका अर्थ उनका दर्शक यह लगा सकता है कि जिन प्रश्नों के जवाब अजीत अंजुम ने नहीं दिए, श्रीकांत के वे सारे सवाल वाजिब हैं।

भाजपा के मनीष कश्यप और विहिप के रमन गुप्ता के बीच तू—तड़ाक

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एमएस डेस्क

बेतिया (बिहार) से निर्दलीय चुनाव लड़ने का मन बना चुके यू ट्यूबर मनीष कश्यप 25 अप्रैल को भाजपा नेता मनोज तिवारी सहित कई वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। वे दिल्ली में पार्टी में शामिल हो रहे थे, उसी दौरान एक आडियो बेतिया में तेजी से वायरल किया जा रहा था।


कथित तौर पर इस आडियो टेप में मनीष कश्यप की बात बेतिया के हिन्दूवादी नेता रमन गुप्ता से हो रही है। रमन बेतिया में विश्व हिन्दू परिषद के जिला मंत्री हैं। उनकी मां बेतिया की उप मेयर हैं। इस आडियो में रमन दावा कर रहे हैं कि उन्होंने मनीष की जान बचाई है। जबकि मनीष कह रहे हैं कि तुम अपने चुनाव में कई बार मुझे फोन कर रहे थे। इस आडियो में नगर निगम में भ्रष्टाचार से गौ तस्करी तक का आरोप मनीष, रमन गुप्ता पर लगाते हैं। मनीष इस आडियो में सांसद डॉ संजय जायसवाल को फोन करने की बात भी करते हैं। जबकि रमन दो करोड़ के लेन देन का आरोप लगाते हैं। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह दो करोड़ रुपए का लेन देन किन दो लोगों के बीच हुआ है और किस मामले में यह दो करोड़ मनीष को दिए जाने का आरोप रमन लगा रहे हैं।

यह समाचार लिखे जाने तक रमन गुप्ता और मनीष कश्यप का पक्ष सामने नहीं आया है। उनका पक्ष प्राप्त होते ही, उसे भी सम्मानपूर्वक यहां स्थान दिया जाएगा। जब तक उनकी सफाई नहीं आती, तब तक बेतिया में फैल रहा यह आडियो कई तरह के सवाल तो खड़े कर ही रहा है।

कहां है congress working committee में अस्सी फीसदी वालों की भागीदारी

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एमएस स्टाफ

इन दिनों राहुल गांधी को जाति की चिंता सबसे अधिक है। उन्होंने अपने घोषणा पत्र में भी जाति में हिंदू समाज को बांटने का जिक्र किया है। यदि उनकी पार्टी जाति के विकास को लेकर इतनी ईमानदार होती तो घोषणापत्र-2024 के कवर पर एक ऐसे आदमी की तस्वीर को कभी प्रकाशित नहीं करती जो दत्तात्रेय गोत्र का ब्राम्हण होने का दावा करता है और पार्टी में ना अध्यक्ष है और ना सचिव।

प्रश्न है कि घोषणा पत्र पर राहुल की तस्वीर क्यों लगी है? जब वे मीडिया चैनल से सवाल पूछते हैं, उन्हेंं सामने से आकर खुद भी तो जवाब देना चाहिए कि उनकी तस्वीर क्यों लगी होनी चाहिए कांग्रेस के घोषणा पत्र पर? सिर्फ इसलिए क्योंकि आप एक खास ‘परिवार’ से ताल्लूक रखते हैं? जब तक राहुल अपनी दावेदारी नहीं छोड़ेंगे और दलित, आदिवासी युवाओं को पार्टी के अंदर आगे नहीं बढ़ाएंगे, तब तक कोई कैसे उनके कहे पर विश्वास करेगा?
उनके यहां प्रवक्ता से लेकर कांग्रेस आईटी सेल तक में कौन से लोग भरे हुए हैं? इस बार जब आप टिकट बांट रहे थे, क्यों नहीं इस बात का ख्याल रखा कि दलित, पिछड़े और आदिवासी वर्ग को उनकी जनसंख्या के अनुपात में कांग्रेस टिकट दे।

सवाल हर बार वहीं आकर ठहर जाता है कि अपनी दादी की तरफ से पंडित नेहरू के परिवार का होने के अलावा कौन सा ऐसा गुण है राहुल में जो इस देश की नब्बे फीसदी दलित, वंचित और आदिवासी आबादी में नहीं है। फिर कांग्रेस का युवराज दत्तात्रेय गोत्र का ब्राम्हण ही क्यों होगा? छत्तीसगढ़ का कोई गोंड यह गद्दी क्यों नहीं संभाल सकता? राहुलजी को यदि वंचितों को हक देना है तो शुरूआत अपनी पार्टी से क्यों नहीं करते? एंटोनी, माकन, शर्मा, सिंघवी की जगह सीडब्ल्यूसी में पिछड़े, दलित और आदिवासियों को राहुल अस्सी फीसदी जगह क्यों नहीं दिलवाते? तीन लोगों की जगह तो राहुल गांधी ने, राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी ने और राहुल गांधी की बहन प्रियंका वाड्रा ने ले रखी है। ऐसे मेें कैसे होगा न्याय? न्याय की लड़ाई पहले घर के अंदर लड़ी जानी चाहिए। जिसे राहुल घर से निकल कर चौक—चौराहे पर लड़ रहे हैं।

जब तक राहुल गांधी सुधार पार्टी के अंदर लेकर नहीं आते, बाहर यह लड़ाई हमेशा कमजोर ही रहेगी। पहले अंदर जीतन होगा। फिर बाहर का रास्ता आसान होगा।

10 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला: मोदी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान 26 अप्रैल को होने हैं। ऐसे में बीजेपी-कांग्रेस सहित कई राजनीतिक पार्टियों के दिग्गज नेताओं का लगातार छत्तीसगढ़ दौरा हो रहा है।  प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने 60 सालों तक देश में गरीबी हटाओं का नारा दिया और अपने नेताओं की तिरोरी भरने का काम किया। मोदी ने 10 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में छत्तीसगढ़ की जनता का आभार जताते हुए कहा कि कुछ महीने पहले मैं विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए आपसे आशीर्वाद मांगने आया था। भाजपा के हर साथी को आप सब ने बहुत आशीर्वाद दिया, हमारे सेवा भाव को बहुत मान दिया। इसके लिए मैं आप सबका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग हम पर तंज करते थे, हर चुनाव में हमसे पूछा जाता था कि मंदिर कब बनेगा? हमने उन्हें तारीख भी बताई, समय भी बताया, निमंत्रण भी भेजा, लेकिन उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का निमंत्रण ठुकरा दिया। कांग्रेस खुद को भगवान राम से भी बड़ा मानती है।

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