चरैवेति चरैवेति…

113-6.jpg

साथी अजीत भारती के विदाई पर कुछ इस तरह याद किया अजीत झा ने

2021 की इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को एक पुरुष साथी अलग सफर पर निकला पड़ा तो मुझे सहसा ऐतरेय ब्राह्मण की याद आई। इसमें कहा गया है;

चरन् वै मधु विंदति चरन् स्वादुमुदंबरम

सूर्यस्य पश्य श्रेमाणं यो न तंद्रयते चरंश्चरैवेति

यानी, चलते हुए मधु प्राप्त होता है। चलते हुए फल का स्वाद मिलता है। सूर्य की श्रेष्ठता देखो, चलते हुए उसे तंद्रा नहीं आती। चलते रहो।

तो हमारे एक साथी ने एक और नए सफर पर चलते रहना का आज आधिकारिक तौर पर फैसला कर लिया। वह फैसला जिसके बारे में मैं काफी समय से जानता था। जिसको लेकर आपमें से कई ने फोन कर, कुछ ने संदेश भेज मुझसे पूछा था। और मैं हमेशा कहता कि मुझे जानकारी नहीं। वे आज भी मेरे संपादक हैं और मुझे निर्देश दे रहे हैं।

तो अब आधिकारिक खबर यह है कि अजीत भारती मेरे संपादक से पूर्व संपादक हो गए हैं। मुझे सहसा जून 2019 का महीना याद आ गया। मैं करीब एक महीने बाद दिल्ली लौटा था और एक दिन शाम के वक्त एक नंबर पर कॉल मिलाया। नंबर के उस पार अजीत भारती थे। मैंने कहा कि फलाने आदमी से आपका नंबर मिला। उन्होंने कहा- अरे महराज मार्च में मेरी उनसे बात हुई थी, आपको अब याद आई है। आप कल आकर मिलिए। उन्होंने पता बताया और समय। अगले दिन मैं नियत जगह पर पहुंचा। वे एक केबिन में ले गए। सोफे पर बिठाया और खुद से मेज पर रखा कॉफी का मग और अन्य कूड़ा साफ करने लगे। फिर इधर-उधर की कई बातें हुई। मैंने पूछा कि काम के सिलसिले में कुछ पूछना हो। वे बोले- आप इतने अनुभवी हैं। क्या पूछना। आप बताइए कब से शुरू करेंगे? इसके बाद 7 मार्च 2021 तक यह सफर साथ-साथ चलता रहा। 

यह बेहतरीन सफर रहा! ऐसा सफर जिसे आप पूरी जिंदगी याद रखना चाहेंगे!

अजीत जी की चर्चाओं के साथ कुछ सवाल भी हैं। व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना है कि राष्ट्रवादी पत्रकारिता को मजबूत करने की दिशा में अभी इतना काम करने की जरूरत है कि ढेर सारे वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध संस्थान खड़ा करना जरूरी है। इसलिए, अजीत जी के नए वेंचर से इस तरह की पत्रकारिता को कोई नुकसान नहीं होगा। यह और समृद्ध होगा। इससे ऑप इंडिया के विचारों को भी और विस्तार मिलेगा।

इसलिए, यह वक्त किंतु-परंतु का नहीं। दुख या अवसाद का नहीं। उल्लास का है! DO Politics को भी वैसा ही दुलार और सहयोग दें, जैसा आप ऑप इंडिया को देते रहे हैं। हां, रोजमर्रा की जीवन में डोंट डू पॉलिटिक्स!

चलते-चलते बाबा नागार्जुन याद आ रहे हैं। उन्होंने कहा था, 

पुरजन, परिजन के छोड़ि छाड़ि

पातिल पुरहर के फोड़ि फाड़ि

हम जा रहल छी आन ठाम

आन ठाम, यानी दूसरी जगह। लेकिन इससे फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि हम उस परंपरा के लोग हैं जो दूसरी जगह जाते वक्त भी पातिल पुरहर (पत्राच्छादित कलश) को नहीं फोड़ते।  

नई सफर की हृदय से शुभकामनाएं। मां उच्चैठ भगवती आपको और प्रखरता दें।

पहली बार हुई इस देश में ट्रांसजेंडर न्यूज एंकर की नियुक्ति

113-5.jpg

पहली बार बांग्लादेश में एक ट्रांसजेंडर को न्यूज एंकर के पद पर नियुक्त किया गया है। बांग्लादेश की आजादी के 50 साल पूरे होने पर ‘बोइशाखी टीवी’ चैनल ने ट्रांसजेंडर तश्नुवा आनन शिशिर को न्यूज एंकर के तौर पर नियुक्ति दी है।

मीडिया खबर के अनुसार, तश्नुवा एक मॉडल और एक्टर भी हैं और वह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानी आठ मार्च से न्यूज एंकर के रूप में अपनी पारी की शुरुआत करेंगी। तश्नुवा ने 2007 में थिएटर मंडली नटुआ के साथ अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। वह दो साल से अधिक समय तक थिएटर मंडली बोटटोला का हिस्सा रही हैं और कई प्रस्तुतियों में अहम भूमिका निभाई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ‘बोइशाखी टीवी’ चैनल के जनसंपर्क अधिकारी दुलाल खान का कहना है, ‘ हमने स्वतंत्रता स्वर्ण जयंती की पूर्व संध्या और महिला दिवस पर दो ट्रांसजेंडर महिलाओं को अपने चैनल की न्यूज और नाटक टीम में नियुक्त किया है। यह पहली बार है जब देश के लोग एक ट्रांसजेंडर को न्यूज एंकरिंग करते हुए देखेंगे। ऐसा स्वतंत्रता के 50 वर्षों में पहले कभी नहीं हुआ है।’

किसके सिर सजा e4m Influencer Of Year Award का ताज

114-4.jpg

‘एक्सचेंज4मीडिया इन्फ्लुएन्सर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड 2020 से‘इनमोबी और ग्लांस’ के फाउंडर और सीईओ नवीन तिवारी को सम्मानित किया गया है। शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में नवीन तिवारी को यह अवॉर्ड दिया गया। यह अवॉर्ड हर साल ऐसे व्यक्ति को दिया जाता है, जिसने अपने आयडिया अथवा कामों से इंडस्ट्री की दशा और दिशा को बदलने में महत्वपूर्ण काम किया है।

थोड़े से समय में ही उनके द्वारा किए गए अनुकरणीय कार्यों के लिए नवीन तिवारी को जाना जाता है। उन्होंने एक स्टार्ट-अप कंपनी को एक सफल ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी में परिवर्तित कर अपनी खास पहचान बनाई है।

नवीन तिवारी ने वर्ष 2008 में ‘इनमोबी’ की स्थापना कर एंटरप्रिन्योरशिप की दुनिया में ग्लोबल कंसल्टेंसी कंपनी ‘मैकिन्से’ में संक्षिप्त पारी के बाद कदम रखा था। उनके नेतृत्व में भारत की पहली यूनिकॉर्न कंपनियों में से एक ‘इनमोबी’ ने अब खुद को दुनिया के अग्रणी एडवर्टाइजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित कर लिया है। बता दें कि जब कोई कंपनी एक अरब डॉलर का वैल्यूएशन हासिल करती है, तो उसे यूनिकॉर्न कहा जाता है। तिवारी के दूसरे बिजनेस वेंचर ‘ग्लांस’ ने भी यूजर्स के बीच अपनी खास पहचान बना ली है। नवीन तिवारी ‘पेटीएम’ के बोर्ड मेंबर भी रह चुके हैं।

नवीन तिवारी ने यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड मिलने पर कहा, ‘मैं काफी शुक्रगुजार हूं और अपनी टीम की ओर से इस अवॉर्ड को स्वीकार करता हूं, जिसने अपनी मेहनत से यह सब कर दिखाया है। पिछला साल देखें तो एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि जीवन में बहुत सी बड़ी चीजें हैं, जिनकी हमने पहले कल्पना नहीं की थी। e4m एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है, जो लोगों के काम की पहचान कर उन्हें सम्मानित करता है। यह अवॉर्ड मिलने पर मैं काफी खुश हूं।’

कार्यक्रम के दौरान नवीन तिवारी और ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा के बीच सवाल-जवाब का दौर भी चला। इस दौरान यह पूछे जाने पर कि पिछले 12 महीने उनके लिए कैसे रहे हैं और इस समय से उन्हें क्या सीखने को मिला, तिवारी ने कहा कि दुनिया पिछले 12 महीनों में हुई हर चीज से प्रभावित हुई है। हालांकि शारीरिक व मानसिक तौर पर यह लोगों के लिए काफी मुश्किल समय रहा है, लेकिन कुछ चीजें विकसित भी हुई हैं। मैं अपने बिजनेस की बात करूं तो डिजिटल काफी तेजी से आगे बढ़ा है। व्यक्तिगत रूप से अपनी बात करूं तो इन महीनों में मेरी सोच में काफी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं और जीवन जीने के तरीकों में काफी बदलाव आया है। उम्मीद है कि आगे काफी अच्छा होगा।

मालूम हो कि ‘एक्सचेंज4मीडिया इन्फ्लुएन्सर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड 2016 में शुरू हुआ था। उस साल ‘वायकॉम 18’ के तत्कालीन सीओओ राज नायक को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2017 में इस अवॉर्ड से ‘डब्ल्यूपीपी इंडिया’ के कंट्री मैनेजर सीवीएल श्रीनिवास को सम्मानित किया गया था। वर्ष 2018 में यह अवॉर्ड ‘डेलीहंट’ के फाउंडर और सीईओ वीरेंद्र गुप्ता और इसके को-फाउंडर उमंग बेदी को दिया गया था, जबकि पिछले साल ‘गूगल इंडिया’ के कंट्री मैनेजर संजय गुप्ता को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

एकल ने अपने ध्येय वाक्य को साकार किया है : राम बहादुर राय

113-4.jpg

एकल ने शिक्षा-संस्कार के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इसके साथ ही समाज को स्वावलंबन का पाठ भी पढ़ाया है। कोरोना काल में जब पूरा विश्व महामारी से प्रभावित था, भारत में समाज की ताक़त ने इस बीमारी को हराया है। 40 करोड़ भारतवासियों तक एकल की पहुँच और महामारी से बचाव ने मानवता की मिसाल पेश की है। यह कहना था वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा का। वे एकल श्री हरि सत्संग समिति के रजत जयंती महोत्सव के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अभी जहाँ विकास की रोशनी ही नहीं पहुँच पाई वहाँ एकल ने शिक्षा के ज़रिए अलख जगायी है। 

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने कहा कि एकल ने अपने ध्येय वाक्य को साकार किया है। महात्मा गांधी के सपनों का भारत सही मायनों में एकल ने बनाया है। गांधीजी का स्वप्न एकल का सपना बना है। उन्होंने कहा कि 1 लाख एकल गाँव सत्ता के चार केंद्रों का प्रतिरूप हों। उन्होंने एकल अभियान को शुभकामनाएं देते हुए उसके उत्तरोत्तर प्रगति की कामना भी की।

 द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी ने एकल अभियान को अद्वितीय बताते हुए कहा कि एकल ने समाज को एकाकार कर असंभव को संभव किया है। उन्होंने एकल में नवाचारों को महत्व देने की बात करते हुए कहा कि अब आने वाली पीढ़ी को एकल से जोड़ना महत्वपूर्ण है और मुझे आशा है कि संगठन इस कार्य को पूर्ण करेगा। 

वरिष्ठ पत्रकार अंशुमान तिवारी ने एकल को समाज जीवन की गीता बताते हुए कहा कि शिक्षा पद्धति में विज्ञान और चरित्र का समावेश ही सही शिक्षा है। इसे शासन से दूर रखना चाहिए। सही मायने में शिक्षा समाज के हाथों में ही रहना चाहिए। 

कार्यक्रम में सिद्धार्थ शंकर गौतम द्वारा लिखित पुस्तक स्वराज का शंखनाद-एकल अभियान का विमोचन भी हुआ। बजरंग बागड़ा ने एकल श्री हरि सत्संग समिति की कार्य योजना पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में श्री हरि सत्संग समिति के कथाकारों की फ़िल्म का प्रदर्शन हुआ।

scroll to top