भारत सरकार के 2070 के लक्ष्य से पहले कार्बन न्यूट्रल का लक्ष्य हासिल करने की घोषणा की

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मीडिया स्कैन संवाददाता

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने कहा, “जलवायु परिवर्तन आज मानवता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है. एक तटीय राज्य होने के कारण, जलवायु परिवर्तन के संभावित दुष्प्रभावों का सामना करने के लिए तमिलनाडु क्लाइमेट चेंज मूवमेंट का योगदान महत्वपूर्ण होगा. मुझे यकीन है कि यह पहल हमारे पर्यावरण और हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवन की रक्षा के लिए समर्पित होकर कार्य करेगा.”

जलवायु अनुकूलन संबंधी कई अग्रणी पहल करने के लिए जाने जाना वाला तमिलनाडु भारत का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने देश को जी20 की अध्यक्षता मिलने के तुरंत बाद शुक्रवार 9 दिसंबर को तमिलनाडु जलवायु परिवर्तन मिशन शुरू किया.

इसके साथ तमिलनाडु भारतीय राज्यों में जलवायु परिवर्तन मिशन शुरू करने वाला पहला राज्य बनने के लिए भी तैयार है. इस मिशन के साथ-साथ राज्य ने इस साल सितंबर में ग्रीन तमिलनाडु मिशन और अगस्त में तमिलनाडु वेटलैंड्स मिशन भी प्रारंभ किया है. इस नवीनतम जलवायु परिवर्तन मिशन के तहत, समर्पित रूप से कार्य करने वाली एक विशेष प्रयोजन कंपनी – तमिलनाडु ग्रीन क्लाइमेट कंपनी (टीएनजीसीसी) राज्य जलवायु कार्य योजना का प्रभावी कार्यान्वयन करेगी.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने कहा, “जलवायु परिवर्तन आज मानवता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है. एक तटीय राज्य होने के कारण, जलवायु परिवर्तन के संभावित दुष्प्रभावों का सामना करने के लिए तमिलनाडु क्लाइमेट चेंज मूवमेंट का योगदान महत्वपूर्ण होगा. मुझे यकीन है कि यह पहल हमारे पर्यावरण और हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवन की रक्षा के लिए समर्पित होकर कार्य करेगा.”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “हमारी सरकार जलवायु परिवर्तन को एक प्रमुख मानवीय संकट के रूप में देखती है. सत्ता में आने के बाद से हमने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई उपाय किए हैं. उच्च कार्बन उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वार्मिंग की समस्या पैदा हुई है. कई वैज्ञानिकों ने कहा है कि दुनिया को 2050 तक कार्बन न्यूट्रल का लक्ष्य हासिल कर लेना चाहिए. पिछले साल कॉप-26 में भारत सरकार ने घोषणा की थी कि वह 2070 तक कार्बन न्यूट्रल का लक्ष्य हासिल कर लेगी. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि तमिलनाडु उससे पहले यह लक्ष्य हासिल कर लेगा.”

जलवायु परिवर्तन पर भारत के प्रयास में अग्रणी बना तमिलनाडु

स्टालिन ने कहा, “यह सिर्फ तमिलनाडु या भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक पहल है. जलवायु परिवर्तन हम सभी के लिए चिंता का विषय है और तमिलनाडु सरकार इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से लेती है. मैं आगे बढ़कर नेतृत्व करने में गौरवान्वित महसूस करता हूँ और इस मिशन को मैं अपने जीवन के मिशन के रूप में देखता हूं.”

एम के स्टालिन ने हाल ही में जी20 तैयारी बैठक में भाग लेते हुए भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया था. पिछले महीने बाली में जी20 सम्मेलन में वैश्विक नेताओं ने भू-मंडलीय तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सिमित रखने की कोशिशों को आगे बढ़ाने का फैसला किया और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता को भी स्वीकार किया.

इस जलवायु परिवर्तन मिशन के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल हैं: तमिलनाडु में ग्रीनहाउस गैस का समग्र उत्सर्जन कम करना, सार्वजनिक परिवहन उपयोग में वृद्धि, हरित ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से उत्सर्जन कम करने की कार्यनीति तैयार करना, तमिलनाडु में वन आच्छादन बढ़ाना, कचरे का प्रभावी ढंग से निपटारा करना, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के तरीकों का विकास, अनुकूलन के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना, शैक्षिक संस्थानों में जलवायु शिक्षा की शुरुआत, जलवायु कार्ययोजना में महिलाओं और बच्चों पर प्राथमिक रूप से ध्यान केंद्रित करना और जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समझने के लिए स्वास्थ्य संबंधी एक समग्र दृष्टिकोण, जिसमें मानव, पशु और पारिस्थितिक स्वास्थ्य शामिल है, अपनाना.

तमिलनाडु सरकार ने जलवायु परिवर्तन पर तमिलनाडु गवर्निंग काउंसिल की भी स्थापना की है. भारत में यह पहली बार है कि जलवायु परिषद की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे. परिषद तमिलनाडु जलवायु परिवर्तन मिशन के लिए नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करेगी, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव कम करने संबंधी सलाह देगी, तमिलनाडु राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना तैयार करेगी और इसके कार्यान्वयन के लिए उचित दिशानिर्देश प्रदान करेगी.

डॉ. सुप्रिया साहू (आईएएस – अपर मुख्य सचिव, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग, तमिलनाडु) ने कहा, “एक तटीय राज्य होने से तमिलनाडु लगातार सख्त मौसम की घटनाओं के कारण जलवायु परिवर्तन के प्रकोप का सामना कर रहा है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व में राज्य ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के तीन पहलुओं – न्यूनीकरण, अनुकूलन और इसका सामना करने में सक्षम बनने संबंधी कई अभिनव और अनूठे कार्यक्रम और अभियान शुरू किए हैं.

उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, हमारा प्रयास सभी हितधारकों और आम जनता को जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूक करना है. इस संबंध में व्यापक जलवायु साक्षरता कार्यक्रम शुरू करने की योजना पर काम चल रहा है जो आने वाले वर्षों में राज्य को जलवायु परिवर्तन के बारे में जानकार और जागरूक बना देगा.”

विभिन्न प्रमुख सरकारी विभागों के अनुभवी वरिष्ठ सचिवों के अलावा, जलवायु परिवर्तन से संबंधित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ पैनल में शामिल हैं. अर्थशास्त्री श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया, इंफोसिस के संस्थापक और अध्यक्ष श्री नंदन एम. नीलकेनी, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के छठे कार्यकारी निदेशक श्री एरिक. एस. सोलहेम, नेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट के संस्थापक और निदेशक श्री रमेश रामचंद्रन, पूवुलागिन नानबर्गल के समन्वयक श्री जी. सुंदरराजन, रामको सोशल सर्विसेज के प्रमुख श्री निर्मला राजा इस कार्यकारी परिषद के विशिष्ट सदस्य हैं.

गवर्निंग काउंसिल के सदस्य जी सुंदरराजन ने कहा, “ऐसे समय में जब भारत जलवायु परिवर्तन के गंभीर दुष्प्रभावों का सामना कर रहा है, यह मिशन स्थापित करने की तमिलनाडु सरकार की पहल स्वागत योग्य है. ऐसा करते हुए तमिलनाडु सरकार भारत के अन्य राज्यों के लिए मिसाल भी कायम कर रही है. मुझे आशा है कि यह मिशन जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को अनुकूल बनाने और कम करने में मदद करेगा.”

इसके अलावा, तमिलनाडु की नई सरकार ने सत्ता में आने के बाद पिछले डेढ़ साल के दौरान जलवायु परिवर्तन संबंधी कई पहल की हैं.

तमिलनाडु सरकार ने 10 समुद्र तटों को बेहतर बनाने और अगले 5 वर्षों में इंटरनेशनल ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन प्राप्त करने के लिए जिला-स्तरीय जलवायु मिशन, तमिलनाडु मुख्यमंत्री ग्रीन फेलोशिप कार्यक्रम, जलवायु परिवर्तन पर शोध के लिए जलवायु स्टूडियो निर्माण और ग्रीन स्कूल योजना की पहल भी की है.

इसके अतिरिक्त, तमिलनाडु सरकार पर्यावरण अनुकूल उपायों से तटीय क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के लिए तैयार करने हेतु उन्हें बेहतर बनाने, कचरे के कुशलतापूर्वक निपटारे और इसे पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी और खाद में बदलने के लिए कार्बन संवर्धन योजनाओं, ऊर्जा-बचत भवन रूपरेखा के लिए मानक विकसित करने हेतु स्थायी आवास कार्यक्रम और तमिलनाडु में इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए जलवायु साक्षरता अभियान जैसी परियोजनाओं को लागू करने की योजना बना रही है.

विशेषज्ञों के वक्तव्य:

“अपने प्राकृतिक संसाधनों, उर्जावान लोगों और प्रगतिशील नेतृत्व के साथ तमिलनाडु भारत और विश्व के पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन का नेतृत्व करने के लिए बेहतरीन स्थिति में है. राज्य की महत्वाकांक्षा सौर, पवन और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का बड़ा केंद्र बनने की है. यह अपने हरित आच्छादन को 23 से बढ़ाकर 33 करेगा. तमिलनाडु पर्यावरण अनुकूल कृषि, बिजली से चलने वाले वाहनों और ग्रीन फाइनेंस में अग्रणी बन सकता है. भारत के सबसे समृद्ध और सफल राज्यों में से एक के रूप में यह बेहतर पर्यावरण संरक्षण के जरिए पूरे देश को जलवायु संकट से सफलतापूर्वक निपटने में मदद कर सकता है तथा रोजगार और समृद्धि पैदा कर सकता है. मैं मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अध्यक्षता वाली तमिलनाडु क्लाइमेट गवर्निंग काउंसिल में शामिल होकर और राज्य के हरित नेतृत्व की राह का सहयात्री बनाकर उत्साहित हूं.

एरिक. एस. सोलहेम, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के छठे कार्यकारी निदेशक

“अगर हम अगले 10 वर्षों में प्रणालीगत बदलाव नहीं करते हैं, तो हमें बहुत कठिन भविष्य का सामना करना पड़ेगा. इस कारण हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए, हमें अभी से कार्य करना चाहिए और इसके लिए सभी स्तरों पर आमूलचूल और अहम परिवर्तन करने की आवश्यकता है. भूमिकाएँ स्पष्ट हैं; सरकार को कानून बनाना चाहिए, उद्योग को नए खोज करने के लिए कहा जाना चाहिए और नागरिक प्रशासन को इसे सुगम-सुलभ बनाना चाहिए. हमें मुद्दों का डटकर सामना करने की जरूरत है, किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या आत्म-प्रचार की कोई जगह नहीं है. हमें संबंधित क्षेत्र के विषयों में अत्याधुनिक ज्ञान रखने वालों की पहचान करनी चाहिए, उनके विचारों को अपनाना चाहिए और समाज को एक ऐसे भविष्य की ओर ले जाना चाहिए जो टिकाऊ और न्यायसंगत दोनों हो. समस्या हल करने के लिए साथ काम करना सबसे संतोषजनक होता है, इसलिए आइए हम सब खुशी से एक साथ आएं, नए दोस्त बनाएं और दुनिया के लिए जरुरी समाधान खोजने के लिए आवश्यक परिस्थितियों का निर्माण करें.”

निर्मला राजा, प्रमुख, रामको सोशल सर्विसेज

“भारत के जी20 के अध्यक्ष बनने के कारण, हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसी रणनीतियां और केस स्टडी उपलब्ध कराएं जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के हमारे उपायों को प्रस्तुत करें. भारत को पर्यावरण और वन मंत्रालय के अलावा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक अलग मंत्रालय बनाने की जरूरत है. एक ऐसे संस्थागत ढांचे की जरूरत है जो सीधे पीएमओ को रिपोर्ट करे. राज्य जलवायु परिवर्तन मिशन की शुरूआत कर तमिलनाडु द्वारा एक सराहनीय प्रयास किया गया है. जलवायु कार्रवाई संबंधी केंद्रीय रूपरेखा के अनुरूप राज्य अपने प्रयासों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. साथ ही तमिलनाडु यह उदहारण प्रस्तुत कर रहा है कि हम कैसे जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को अपनी विकास योजनाओं में शामिल कर सकते हैं, जो अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय है. यह मिशन न केवल तमिलनाडु बल्कि अन्य राज्यों में भी जलवायु कार्रवाई के लिए उदहारण बनेगा.

अंजल प्रकाश, अनुसंधान निदेशक और एसोसिएट प्रोफेसर, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस और आईपीसीसी के मुख्य लेखक

राष्ट्रीय चिंतन में लगे रहने वाले लोगों का मिलन : कलेस समागम

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जलज कुमार अनुपम

मुझे नीजी तौर पर मुख्यमंत्री, हरियाणा मनोहर लाल खट्टर की एक बात शानदार लगी कि वैचारिक युद्ध में शत्रु के प्रति कोई दयाभाव नही होनी चाहिए।

कलाप्रेमी लेखक संघ (कलेस) कहने को एक आम समूह है जिसमें राष्ट्रीय हित का चिंतन मनन करने वाले पत्रकार, स्तम्भकार, लेखक और कला समीक्षा से जुड़े लोग हैं। कोविड के बाद से एक मिलन की योजना बन रही थी जिसको मीडिया स्कैन के तत्वावधान में 26 नवंबर 2022 को धरातल पर उतारा गया। उतरा भी तो क्या गजब उतरा! जो आया कुछ न कुछ लेकर लौटा और जो न शामिल हुए उनके मन में एक मीठी आह उठी की मुझे भी आना था पर कोई बात नही अलगी बार!

लेखक पारितोष चकमा अपनी पुस्तक भेंट करते हुए

राष्ट्रवादी लोगों का सहृदय होना आम बात है लेकिन विचारधारा के आधार पर छोटे को थपथपाना, उनमें हौसला भरना, बड़ो द्वारा विचारधारा के वैश्विक विकास के लिए आबद्ध किये योजनाओं को धरातल पर उतारने में अपना सर्वस्व झोंक देना जैसी भावनाओं में पहले एक गैप दिखती थी जो अब मिटती नजर आ रही है। यह सुखद भविष्य के संकेत हैं।

अब लगता है कि सुदूर गाँव में अपने विचारधारा से जुड़े किसी भाई को दिल्ली से बैठे पुचकारना समान्य बात है।यह हौसला हर को नीज की चिंता छोड़ राष्ट्रीय चिंतन के लिए प्रेरित करेगा।

यह मिलन इसलिए भी अनोखा था कि इसमें सब बराबर थे! यहाँ जब मुख्यमन्त्री भी आये तो ऐसा लगा कि हमारे ही बीच से कोई हैं।

मुझे नीजी तौर पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल महोदय की एक बात शानदार लगी कि वैचारिक युद्ध से शत्रु के प्रति कोई दयाभाव नही होनी चाहिए।

कलेस के जुटान में थी सबकी बराबर की भागीदारी

मैं खुद भी यहीं मानते रहा हूँ कि मतभेद और मनभेद के ढोंग से बचना चाहिए। शत्रु के साथ कैसा समझौता! अधर्म का धर्म के साथ आखिर कैसा सबंध!

दुनिया में दो ही खेमे हैं! एक में आप धर्म के साथ हैं और दूसरे में अधर्म के साथ! कर्म और कुकर्म के आलावा किसी अन्य नये वर्गीकरण की कोइ जरुरत नही है।

कुछ वक्ताओं ने ऐसे भाव प्रकट किए कि जैसे वो मेरे ही हों! वहाँ पहुँचने के बाद मैं स्वत: आयोजक का भाव लिए खड़ा था! यह विचारधारा की ताकत है।यह भाव की राष्ट्रीय चिंतन से जुड़ा हर साथी हमारे लिए महत्वपूर्ण है ने इस कार्यक्रम को नये आयाम पर पहुँचा दिया!

हुकूम देव नारायण यादव,​ स्वामी विशालानंद और कलेस मंडली

कलेस के उन सारे साथियों तक बधाई और मंगलकामना पहुँचे जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाया! राष्ट्रहित आधारित सबके कर्म हो! राष्ट्रहित आधारित मनन हो!

जय हो! जय जय हो!

बदल रहा है स्वास्थ का परिदृश्य और हो रहा सुधार

आशीष कुमार ‘अंशु’

इस बात को प्रधानमंत्री के राजनीतिक विरोधी भी मानते हैं कि उन्होंने देश के अंतिम जन तक सरकारी सुविधा पहुंचाई है। अब यह सुविधाएं सिर्फ कागजों पर नहीं पहुंच रही। जमीन पर उतर रहीं हैं।

जन धन खाता का उद्देश्य यही था कि पैसों को बिचौलियों के माध्यम से ना पहुंचाया जाए। जिसका परिणाम हुआ कि जनऔषधि केंद्र के माध्यम से आम आदमी दवा पर अपना 13 हजार करोड़ बचाने में सफल रहा और  आयुष्मान योजना से 70 हजार करोड़ की बचत की। गरीबों के बीच ये दोनों योजनाएं वरदान साबित हुई हैं। 

सरकार मरीजों को आसानी से जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए देश भर में जनऔषधि केंद्र खोल रही है। जिसके लिए देशभर में मार्च 2024 तक 10,000 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों खोलने की योजना है। जन औषधि दवाइयां बाजार में मिलने वाली ब्रांडेड दवाईयों की तुलना में 50 से लेकर 90 फीसदी तक सस्ती हैं। इससे महंगी दवाइयों से लोगों को छुटकारा मिलता है नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में 18 फीसदी लोग अपने अस्पताल का खर्च नहीं उठा पाते। इसलिए उन्हें या तो कर्ज लेना पड़ता है या फिर अपनी अचल संपत्ति बेचनी पड़ती है। ऐसे में देश भर में यदि जनऔषधि केन्द्रों का प्रसार होता है तो यह स्वास्थ सेवा में किसी क्रांति से कम नहीं  है।

आयुष्मान भारत योजना भी देश के सबसे पीछड़े वर्ग की भलाई के लिए है। यह मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। इस योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाता है। इस स्वास्थ बीमा से गरीब परिवारों को बीमारी से लड़ने का ‘प्रतिरोधक हौसला’ मिला है। जब देश कोविड 19 की भयंकर चपेट में था। क्या गरीब और क्या अमीर, सभी कोविड 19 से पीड़ित थे। उसी दौरान सरकार ने इस योजना के अंतर्गत कोविड-19 का इलाज भी शामिल किया।

आयुष्मान भारत योजना के दायरे में आज भारत की लगभग आधी आबादी हैं। यह संख्या 50 करोड़ से भी अधिक लोगों की बैठती है। इस योजना के शुरू होने से लेकर अब तक तीन करोड़ से अधिक लोग इसका लाभ उठा चुके हैं। इस योजना के अन्तर्गत मरीजों को अस्पताल में मुफ्त इलाज मिला है। अगर ये योजना नहीं होती, गरीब परिवार से आने वाले लोगों को 70  हजार करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते। इन तीन करोड़ से अधिक लोगों के ईलाज पर आने वाला सारा खर्च भारत सरकार ने उठाया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 07 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जन औषधि केंद्र के मालिकों और योजना के लाभार्थियों से ‘जन औषधि-जन उपयोगी’ विषय पर बातचीत की। जेनेरिक दवाओं के उपयोग और जन औषधि परियोजना के लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए पूरे देश में जन औषधि सप्ताह मनाया गया। यूक्रेन से लौटे छात्रों से जब प्रधानमंत्री मिले तो देश में मेडिकल कॉलेज की कमी को लेकर कहा कि सरकार देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रही है ताकि छात्र देश में ही मेडिकल शिक्षा पा सकें। अगले दस सालों में केन्द्र सरकार ने हर एक जिले में एक अस्पताल खोलने का लक्ष्य रखा। निश्चित तौर इससे देश में चिकित्सा शिक्षा में सीटों की वृद्धी होगी। 

सरकार यदि चाहे तो यह भी हो सकता है कि जहां स्वास्थ व्यवस्था की बड़ी जिम्मेवारी बिना डिग्री वाले डॉक्टरों के कंधों पर है। वहां सरकार प्रशिक्षण देकर गांव और जनजातीय क्षेत्रों में ‘बिना डिग्री वाले डॉक्टरों’ को तैनात करती है तो इससे उन क्षेत्रों में स्वास्थ सुविधा पहुंच सकती है, जहां महंगी पढ़ाई करने वाले डॉक्टर जाने को तैयार नहीं होते। वैसे प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस बात का भरोसा दिया है कि देश में मेडिकल शिक्षा में सीट बढ़ेगी और शिक्षा सस्ती भी होगी। कुछ दिन पहले ही सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है जिसका बड़ा लाभ गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को मिलेगा। सरकार ने तय किया है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में आधी सीटों पर सरकारी मेडिकल कॉलेज के बराबर ही फीस लगेगी।

वैसे इन निर्णयों के फलीभूत होने में समय लगेगा। समय रहते यदि हम गांव और आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना चाहते हैं तो वहां पहले से काम कर रहे झोला छाप डाॅक्टरों के प्रशिक्षण की व्यवस्था पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। वे देश की प्राथमिक स्वास्थ व्यवस्था को सुदृढ़ करने में मजबूत स्तम्भ साबित हो सकते हैं।

चिकित्सा शिक्षा में होने वाले खर्च को जहां नियंत्रित करने के लिए सरकार प्रयासरत है, वहीं साथ—साथ वह चिकित्सा खर्च को कम करके स्वास्थ सुविधा को आम आदमी के लिए सुगम बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके लिए जन-औषधि केंद्र के विस्तार पर विचार किया जा रहा है। दवा का पर्चा हाथ में आने के बाद लोगों के मन में पहली आशंका यही होती थी कि, पता नहीं कितना पैसा दवा खरीदने में खर्च होगा? जन-औषधि केंद्र  ने वो चिंता कम की है। आज देश में साढ़े आठ हजार से ज्यादा जन-औषधि केंद्र खुले हैं। ये केंद्र अब केवल सरकारी स्टोर नहीं, बल्कि समाधान केंद्र बन रहे हैं। सरकार ने कैंसर, टीबी, डायबिटीज, हृदयरोग जैसी बीमारियों के इलाज के लिए जरूरी 800 से ज्यादा दवाइयों की कीमत को भी नियंत्रित किया है। सरकार ने ये भी सुनिश्चित किया है कि स्टंट लगाने और घुटना प्रत्यारोपण की कीमत भी नियंत्रित रहे। आज देश में 8500 से ज्यादा जन औषधि केंद्र खुले हैं। जब मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आई थी, देश में सिर्फ एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान हुआ करता था। आज देश में 22 ऐसे संस्थान हैं।

गांव की महिलाओं के लिए माहवारी के समय सेनेटरी नेपकीन की जरूरत को स्वच्छता और साफ सफाई के लिहाज से भी समझा जा सकता है। जहां परिवार में पहनने को कपड़ा पूरा ना पड़ता हो, ऐसे परिवारों में सेनेटरी नेपकीन के ना होने पर मिट्टी और राख का इस्तेमाल आज भी गांवों में आम बात है। ऐसे परिवारों के लिए  01 रुपए में केन्द्रों पर मिलने वाला सेनेटरी नेपकीन किसी वरदान से कम नहीं है। इन केन्द्रों के माध्यम से 21 करोड़ से ज्यादा सेनेटरी नेपकीन की बिक्री, दिखाती है कि कितनी बड़ी संख्या में महिलाओं का जीवन आसान हो रहा है।

इस वित्तीय वर्ष में जन औषधि केंद्रों के माध्यम से 800 करोड़ रुपए से ज्यादा की दवाएं बिकी हैं। इसी साल की बात करें तो जन औषधि केंद्रों की वहज से गरीब परिवारों और मध्यम वर्ग के परिवारों में करीब 5,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है। केन्द्र सरकार के जन औषधि केंद्रों के माध्यम से 13,000 करोड़ रुपए की बचत यहां आने वाले लोगों की हुई है।

नीति आयोग ने ‘भारत में वित्तपोषण के विभिन्न स्रोतों के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल की पुनर्कल्पना’ शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका मिलकर ब्रिक्स देश होते हैं। इन सभी देशों का तुलनात्मक अध्ययन जब आयोग ने किया तो पाया कि भारत का स्वास्थ्य देखभाल पर शेष देशों की तुलना में सबसे कम खर्च है

आम आदमी के लिये समान रूप से स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिये अस्पताल में बिस्तरों की संख्या में कम-से-कम 30 प्रतिशत वृद्धि किये जाने की जरूरत है। यह बात नीति आयोग की रिपोर्ट में आई है कि  सभी तक अस्पताल की स्वास्थ सुविधाएं पहुंचे इसके लिए बिस्तरों की संख्या मे कम से कम 30 फीसदी की वृद्धि किए जाने की जरूरत है।

बहरहाल सरकार आने वाले समय में इन जरूरतों को पूरा करे और स्वास्थ के पूरे परिदृश्य में सुधार लाने की पहल करे। यही समय की मांग है।

सम्पन्न हुआ संस्कार भारती का सदानीरा उत्सव -2022

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जलज अनुपम

इसके बाद भोजपुरी कथा पाठ का आयोजन ‘यायावरी वाया भोजपुरी’ की ओर से सुधीर कुमार मिश्र ने किया। जिसमें उन्होनें सर्वेश तिवारी श्रीमुख की कहानी ‘अंतिम प्रार्थना’ का पाठ किया। जिसका भोजपुरी अनुवाद अनुराग रंजन ने किया था। इस भावुक प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया और सारे लोग अपनी आंखें पोंछते दिखे

इसके बाद भोजपुरी कथा पाठ का आयोजन ‘यायावरी वाया भोजपुरी’ की ओर से सुधीर कुमार मिश्र ने किया। जिसमें उन्होनें सर्वेश तिवारी श्रीमुख की कहानी ‘अंतिम प्रार्थना’ का पाठ किया। जिसका भोजपुरी अनुवाद अनुराग रंजन ने किया था। इस भावुक प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया और सारे लोग अपनी आंखें पोंछते दिखे।

संस्कार भारती, बिहार द्वारा आयोजित सदानीरा उत्सव-2022, 26 मार्च को गोपालगंज के करवतही गाँव में सम्पन्न हो गया। ऐसा लग रहा था कि राष्ट्रीय हित का चिंतन और मनन करने वाले लोगों का यह समूह वेद वाक्य ‘उप सर्प मातरं भूमिम्।’ अर्थात जैसे भी हो मातृभूमि की सेवा कर का भाव रखकर कार्य करता है।

गोपालगंज, बिहार के जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर करवतही गाँव जहाँ दस वर्ष पहले तक गूँजती थी गोलियों की गड़गड़ाहट वहाँ पर सदानीरा उत्सव का सम्पन्न होना और उसमें लेखन के समक्ष चुनौतीयाँ और हिन्दू इकोसिस्टम के बहाने बदलती तस्वीर जैसे विषयों पर विमर्श का होना इसको विशिष्ट बनाता है। प्रो. अरुण भगत जैसे बुद्धिजीवी लोगों के साथ महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और बिहार के अनेक जिलों से युवा राष्ट्रवादी लेखकों के साथ साथ बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और प्रयागराज विश्वविद्यालय से शोधार्थी युवा बच्चों की आयी भीड़ यह बताने के लिए काफी थी कि हिन्दुस्तान गाँवों तक पहुँचने लगा है।

सदानीरा उत्सव -2022 के स्मारिका का लोकार्पण

इस मौके पर साहित्य अकादमी समेत देश के अनेक बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य प्रो अरुण कुमार भगत, गोपालगंज के विधान पार्षद श्री आदित्य नारायण पाण्डेय, पूर्व विधायक मिथिलेश तिवारी, पूर्व प्रमुख श्री रवि प्रकाश मणि त्रिपाठी, संस्कार भारती के संगठन मंत्री श्री वेद प्रकाश, प्रान्त मंत्री दिवाकर राय,अनिल कुमार मिश्रा, जिला पार्षद ओमप्रकाश सिंह और संस्कार भारती गोपालगंज ईकाई के अध्यक्ष सर्वेश तिवारी श्रीमुख उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। प्रो. अरुण कुमार ने बोलते हुए कहा कि साहित्य संवेदना के धरातल पर पुष्पित, पल्लवित और फलित होता है, हमें अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए सबसे पहले मानवीय संवेदना की रक्षा करनी होगी।” ऐसे आयोजन समाज को सशक्त और समृद्ध करने की दिशा में कदम‌ होते हैं। सर्वेश तिवारी श्रीमुख ने कहा कि हम सभी इसके लिए प्रयासरत हैं कि सिर्फ एक समूह और विचारधारा का कब्जा साहित्य और कला जगत में न हो! गाँव से गाँव लिखना ही सुखद है।कार्यक्रम का सन्चालन चंपारण के प्रसिद्ध युवा साहित्यकार जलज कुमार अनुपम ने किया।

उद्घाटन सत्र के बाद मंच से हिन्दी के उभरते युवा लेखक कृपा शंकर मिश्र की बेस्टसेलर हॉरर उपन्यास ‘मधुबाला’ के दूसरे संस्करण, सूर्यांश द्विवेदी ‘मिहिर’ के आने वाले उपन्यास “कैम्पस वाला प्यार” का आवरण पृष्ठ और उसके साथ सदानीरा उत्सव -2022 के स्मारिका का भी लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर पतरकी और बाला सेक्टर जैसे बेस्टसेलर उपन्यास के युवा लेखक आशीष त्रिपाठी को सदानीरा सम्मा‌न -2022 से सम्मानित किया गया!

साहित्य को शहरों के वातानुकूलित कमरों से निकाल कर खेतों की मेड़ तक ले जाने के उद्देश्य से प्रारम्भ हुए इस आयोजन में देश के अलग अलाग कोने से राष्ट्रवादी लेखक और कवि सम्मिलित हुए। कार्य्रकम के वैचारिक सत्र के दौरान ‘नए रचनाकारों के समक्ष चुनौतियाँ’ युवा साहित्यकार विकास कुमार, आशीष त्रिपाठी, अमृता प्रकाश ने अपने अपने विचार रखे इस सत्र में संचालक की भूमिका में सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’ रहे।

इसके बाद भोजपुरी कथा पाठ का आयोजन ‘यायावरी वाया भोजपुरी’ की ओर से सुधीर कुमार मिश्र ने किया। जिसमें उन्होनें सर्वेश तिवारी श्रीमुख की कहानी ‘अंतिम प्रार्थना’ का पाठ किया। जिसका भोजपुरी अनुवाद अनुराग रंजन ने किया था। इस भावुक प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया और सारे लोग अपनी आंखें पोंछते दिखे।

कार्यक्रम के अगले पड़ाव पर ‘हिन्दू इकोसिस्टम के बहाने हिन्दुस्तान की बदलती तस्वीर’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन हुआ जिसमें वक्ता के तौर पर जलज कुमार अनुपम और आनंद कुमार शामिल थे।

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें देर रात तक काव्यधारा बहती रही। मंच से कविताओं, गीतों का गायन होता रहा और मुग्ध श्रोता झूमते और वाह वाह करते रहे। कवि सम्मेलन का प्रारम्भ बस्ती, उत्तरप्रदेश की प्रसिद्ध कवयित्री शिवा त्रिपाठी सरस ने माता सरस्वती की वंदना “हे माँ विराजो कंठ में सूचि ज्ञान को विस्तार दो” से किया । उसके बाद प्रशान्त सौरभ ने संस्कृत में काव्यपाठ कर के मंच को ऊंचाई दी। प्रशांत ने संस्कृत और भोजपुरी मिला कर जो “नागेन्द्र हाराय त्रिलोचनाय…” का पाठ किया उसने लोगों को वाह वाह करने पर विवश कर दिया! उसके बाद अवध की धरती से आये वरिष्ठ कवि ज्ञान प्रकाश आकुल ने भगवान राम और भरत के भातृत्व पर छन्द पढ़कर कवि सम्मेलन को अगले स्तर पर पहुँचाया। गोरखपुर की धरती से आये संदीप सिंह श्रीनेत ने अपनी कविता “छोटा सा शहर हूँ मगर छोटा किरदार नही” पढ़कर खूब वाहवाही बटोरी। जिले के वरिष्ठ कवि संजय मिश्र संजय ने अपना प्रसिद्ध गजल ‘मैं समझता था कि वो किस्सा पुराना हो गया” पढ़ कर समा बांधा, तो बनारस से आये सुशांत शर्मा ने अपने खण्डकाव्य जटायु से “भक्त से नाता छूटे भगवान के, छूटे न भाई से भाई के नाता” सुना कर श्रोताओं को भाव विह्वल कर दिया। इनके अतिरिक्त छपरा के कवि निर्भय नीर, दिल्ली से आये नित्यानन्द नीरव, बलिया से आये अशोक तिवारी और आलोक पाण्डेय और जिले के कवि सत्यप्रकाश शुक्ल ने अपनी कविताओं से लोगों को झुमाया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता गोपालगंज जिले के वरिष्ठ कवि सुभाष संगीत ने की और इस सत्र का मंच संचालन संजय मिश्रा संजय ने किया।

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