बदलते हरियाणा की तस्वीर

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 मुकेश वशिष्ठ

आज प्रदेश के 10 जिलों यानि पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, यमुनानगर, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सिरसा, फतेहाबाद व रेवाड़ी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ 5387 गांव में 24 घंटे बिजली आपूर्ति होती है


आज मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में चल रही हरियाणा सरकार को सात साल पूरे हो रहे हैं। इन सात सालों में हरियाणा सरकार ने अनेक उपलब्धियां हासिल की, जिसकी चर्चा दूसरे प्रदेशों में हो रही है। सरकार ने खिलाडी, किसान, महिला, विद्याथी, कर्मचारी सहित हर वर्ग को अपनी योजनाओं से लांभावित किया है। जिससे आम आदमी के आत्मविश्वास को पंख लगे और उसने हिम्मत से आगे बढकर हरियाणा को नया परिचय दिया है। अगर हम हर पहलू पर गौर करें तो पाएंगे कि सात साल में हम आज काफी आगे निकल चुके हैं।

हर क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव आया है। क्षेत्रवाद, जातिवाद और पक्ष-विपक्ष की दलगत राजनीति हम काफी पीछे छोड़ चुके हैं।कोई गुजरे हुए कल को चाहे जिस रूप में देखे और बीते सात साल का लेखा-जोखा चाहे जैसे करें, वह यह अनदेखी नहीं कर सकता कि वर्तमान हरियाणा सरकार ने तमाम ऐसे उदाहरण उपलब्ध कराए हैं, जो दिखाते हैं कि ईमानदार व सामूहिक प्रयास से प्रदेश की तस्वीर बदली जा सकती है। पढ़े-लिखे युवाओं के हाथ में ग्राम पंचायतों की बागडोर आज किसी मिशाल से कम नहीं है। जिसके कारण पहली बार 1245 बेटियों को “छोटी सरकार” चलाने का मौका मिला।

प्रदेश की ईपीडीएस सिस्टम को आधार मानकर देश एक राष्ट्र-एक राशनकार्ड की नीति पर आगे बढ रहा है। प्रदेश की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी का दूसरे प्रदेश अपना रहे है।बदलते हरियाणा की नई तस्वीर में हमें दिखाई देता है कि बीते सात साल में सरकार ने सरकारी नौकरियों को अपनी राजनीति की चौखट पर बांधने की बजाए मिशन मेरिट पर अपनाया। जिससे प्रदेश के युवाओं का विश्वास बहाल हुआ। इसलिए वह कहता है कि मनोहर राज में उसे भी पर्ची-खर्ची बिना सरकारी नौकरियां मिल सकती है। इसी बदलाव ने युवाओं की एक बड़ी फौज को राजनेताओं के पीछे-पीछे और उनकी रैलियों में जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे लगाने की बजाए कोचिंग सेंटर में भेजा है। सात सालों में हुई 85 हजार से ज्यादा सरकारी भर्तियों से उम्मीद पक्की हुई कि अब पर्ची (सिफारिश) और खर्ची (रिश्वत) का खेल बंद हो गया है।

यकिनन सरकार ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनाने में सफल रही जहां क्षेत्रवाद, जातिवाद व वर्गवाद की कोई गुंजाइश नहीं है।बीते सात साल में प्रदेश के युवाओं का पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी जोश बढ़ा है। वर्तमान हरियाणा सरकार लगातार शहर से लेकर गांवों में खेलों के लिए विशेष सुविधाएं बढ़ा रही हैं। इसलिए सरकार ने खेल विभाग का बजट, जो वर्ष 2014-15 में 151.22 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2021-22 में 394.09 करोड़ रुपये कर दिया है। इसीतरह अर्जुन, द्रोणाचार्य तथा ध्यानचंद अवार्डी के मानदेय को 5000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये मासिक किया गया। उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित रोजगार सुनिश्चित करने के लिए नई खेल नीति के तहत 85खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां दी गई। साथ ही अब खिलाड़ियों को क्लास वन से क्लास फोर तक के पदों की सीधी भर्ती में आरक्षण का प्रावधान किया है। बीते सात सालों में खिलाड़ियों को 386 करोड़ रुपये नकद ईनाम राशि दी गई।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर

इन सफल नीतियों का परिणाम है कि ओलंपिक और पैरालिंपिक खेलों में हरियाणा का डंका बजा। गर्व की बात है कि टोक्यो ओलंपिक-पैरालिंपिक में पदक जीतने वालों में पचास फीसदी खिलाड़ी हरियाणा से हैं। इन विजेता खिलाड़ियों को ईनाम राशि के साथ-साथ सरकारी नौकरी व किफायती दरों पर प्लाट दिए गए हैं। गर्व की बात है कि ‘खेलो इंडिया’ का आयोजन फरवरी 2022 में हरियाणा में होगा।किसान के खेत से लेकर मंडी में उसकी फसल का उचित मूल्य दिलाने जैसी कई बड़ी उपलब्धियां सरकार की झोली में हैं। किसानों की फसल खरीदने व उसके भुगतान करने में वर्तमान हरियाणा सरकार सबसे आगे है। प्रदेश सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 11 फसलों की खरीद करती है और उसका भुगतान 72 घंटों में किया जाता है। यदि किसी कारणवश भुगतान में देरी होती है तो किसानों को ब्याज के साथ उसका भुगतान करने की पहल सरकार ने की है।

केवल वर्ष 2020-21 में रबी व खरीफ की फसलों की खरीद पर 29 हजार करोड़ रूपये की राशि का भुगतान किसानों को किया गया है। देश में गन्ने लगातार सबसे ज्यादा भाव यानि 362 रुपये प्रति क्विंटल हरियाणा के किसानों को मिलता है। किसानों के हित को देखते हुए बाजरे को भांवातर भरपाई योजना में शामिल किया गया है। किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ सरकार दे रही है। 21 फसलों को सरकार ने भांवातर भरपाई योजना में शामिल किया है। सरकार की प्रतिबद्धता को यह भी प्रमाणित करता है कि प्रदेश का अधिकांश किसान फसल बीमा योजना में हिस्सा लेता है। फलस्वरूप रबी 2019-20 में 8 लाख 90 हजार 453 किसानों को 343.39 करोड़ रुपये क्लेम देय हुआ। इसीतरह खरीफ 2020 में 8.67 लाख किसानों को उनकी फसलों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए 958.25 करोड़ रुपये क्लेम देय हुआ। जबकि फसल बीमा  से वंचित किसानों को 12 हजार रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिया जाना अपने आप में एक रिकार्ड है। आज प्रदेश में किसानों को सस्ती दरों पर बिजली आपूर्ति की जा रही है। वर्ष 2020-21 में बिजली सब्सिडी के लिए 6649.33 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। बाकायदा ‘सरचार्ज माफी योजना’ के तहत प्रदेश के 1,12,300 किसानों के बिजली बिलों की 23 करोड़ 93 लाख रुपये की जुर्माना राशि माफ की गई।प्रदेश के ‘हर खेत को पानी’ के सपने को साकार करने में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व वाली सरकार निरंतर परिश्रम के साथ पूरा कर रही है। टेल तक पानी पहुचांना एक चुनौती थी, जिसे सरकार ने प्राथमिकता में लिया। नांगल चौधरी की टेल तक पानी लेकर जाकर और मसानी बांध में पानी डालकर सरकार ने अपनी इच्छा शक्ति को जताया। साहबी नदी में पानी डालकर खेतों को जीवनदान इसी सरकार ने दिया है। किसान के खेत को पानी उपलब्ध कराना, कम पानी की खेती सिखाना, पुराने संसाधनों का नवीनीकरण करना, पानी को टेल तक पहुंचाना जैसी चुनौतियों से मनोहर सरकार ने खूब पार पाया है। बेहतर जल प्रबंधन के माध्यम से सरकार ने उपलब्ध पानी का न्यायोचित बंटवारा भी किया और पानी के संकट को भी निपटाया।

बीते साल सात से मनोहर सरकार इस दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। ‘मेरा फसल-मेरी विरासत’, माइक्रो इरिगेशन, भूमिगत माइनर से पानी की उपलब्धता, सोलर पंप व सब्सिडी से किसानों को पानी उपलब्ध कराना जैसी अनेक योजनाओं से आमजन को ज्यादा से ज्यादा पानी देने की कवायद शुरू हुई है। महिला सशक्तिकरण के नारे को सरकार ने बीते सात साल में न सिर्फ घरातल पर उतारा, बल्कि विभिन्न कानून बनाकर महिलाओं को सुरक्षा का आभास भी कराया। जहां पुलिस बल में बेटियों की संख्या में बढ़ोतरी की जा रही है। वहीं, प्रदेश में दुर्गा शक्ति अभियान चलाकर महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है। अब तक प्रदेश में 33 महिला पुलिस स्टेशन स्थापित किए जा चुके है, जहां महिलाएं अपनी शिकायतें बेझिझक दर्ज करा सकती है। पीएनडी एक्ट में बदलाव किए बिना हरियाणा सरकार ने हजारों बेटियों को गर्भ में मरने से बचाया। फलस्वरूप तीन दशक बाद प्रदेश का लिंगानुपात 931 तक पहुंचा है। दुर्गा शक्ति अभियान की शुरूआत कर सरकार ने प्रदेश की।बहन-बेटियों को पर्याप्त सुरक्षा देने की पहल की। साथ ही मासूम बच्चियों से बलात्कार करने वाले अपराधियों को फांसी की सजा मिले। इसके लिए सरकार ने हरियाणा क्रिमिनल लाॅ बिल 2018 लाई, ताकि अपराधियों को जल्दी से जल्दी सजा मिल सकें। शिक्षा क्षेत्र में हुए व्यापक परिवर्तन भी मनोहर सरकार की बड़ी उपलब्धि है। पिछले सात साल में 67 नए सरकारी काॅलेज खोलकर हर युवा को उच्च शिक्षा की तहलीज तक सरकार ने पहुंचाया है। विशेषतौर पर बेटियों के लिए 30 महिला काॅलेज खोलना, सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। पढ़ी-लिखी पंचायत का सपने को क्रियान्वित कर सरकार ने अपने दृढ़ संकल्प को दृशाया है। सरकार अब पंचायती राज में महिला व पिछड़े वर्ग को विशेष आरक्षण देने की पक्ष पर काम कर रही है। यह सुधार स्वच्छ, शिक्षित और सामाजिक दृष्टिकोण रखने वाले राजनैतिक नेतृत्व के एक नये युग का सूत्रपात है। जिसका व्यापक असर अब दिखाई देने लगा है।

हरियाणा सरकार की दूरगामी सोच के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने कानून की सराहना की और कहा कि दूसरे राज्य भी इसका अनुसरण करें। आज प्रदेश के गांव में अनपढ़ व्यक्ति पंचायत का संचालन नहीं करता। बल्कि बीए, बीएड, एमए पास नौजवान पंचायत की अगुवाई करता है। जिसके कारण विकास कार्यों ने तेजी पकड़ी है। पुरानी सरकारों में गरीबों के राशन वितरण में धांधलेबाजी अक्सर सुनाई देती है। इस कुव्यवस्था को बीते सालों में पूरी तरह बदल दिया गया है। सरकार ने ईपीडीएस सिस्टम को अपनाया और गरीब के अधिकार को सुनिश्चित किया। व्यवस्था परिवर्तन के साथ बीते सात साल में सरकार ने नई व्यवस्थाएं खड़ी की है। सीएम विंडो की स्थापना कर सरकार ने आम आदमी को सीएम ऑफिस पहुंचने का हक दिया। बिना किसी खर्चें के 8,27,018 लोगों की शिकायतों का समाधान हुआ। आम लोगों को सभी सरकारी योजनाओं को लाभ सुनिश्चित हो, इसके लिए प्रदेश में 18,552 अटल सेवा केंद्रों और अंत्योदय सरल केंद्रों के माध्यम से 41 विभागों की 550 सेवाओं और योजनाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है।हरियाणा कोयला और पानी जैसे संसाधनों से महरूम प्रदेश है। बावजूद इसके आज प्रदेश के 10 जिलों यानि पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, यमुनानगर, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सिरसा, फतेहाबाद व रेवाड़ी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ 5387 गांव में 24 घंटे बिजली आपूर्ति होती है। इससे प्रदेश के 77 प्रतिशत गांव पूरी तरह जगमग हो गए हैं। बीते सात सालों में बिजली नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 6772 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वर्ष 2021-22 के कार्यकाल में सरकार ने 10,253 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। आपातकाल पीडित, हिन्दी आंदोलकारियों और पत्रकारों को 10 हजार रुपए मासिक पेंशन व कैशलेस मेडिक्लेम सरकार की अद्वितीय सोच का नतीजा है। यकीनन बीते सात साल से आमजन के लिए सरकार के काम के कारण देश में हरियाणा की अलग पहचान बनी है। यही पहचान में बदलते हरियाणा की नई तस्वीर है। 

कोविड-19 को लेकर ‘चिंता से चिंतन तक, स्वस्थ्य समाज का निर्माण’ पर संवाद सत्र आयोजित

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बृजेश श्रीवास्तव

इंद्रेश जी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हमें स्वयं के बारे में चिंतन करना चाहिए कि हमारे गुण और दोष क्या हैं? हम अपने मूल्यों और संस्कारों से कैसे भटक रहे हैं? हम अपने पारम्परिक ज्ञान का अनुसरण क्यों नहीं कर रहें है? इन सभी प्रश्नों के जब हमें उत्तर मिलेगें तो हम स्वयं ही समस्या के समाधान बन जाएगें

समाजिक संस्था दैन्यम् आराध्यम् और मेडिवेज हेल्थ फाउंडेशन की तरफ से कोविड 19 को लेकर एक संवाद सत्र का आयोजन किया गया । नई दिल्ली के रफी मार्ग पर स्थित कॉस्टीट्यूशन क्लब में ‘चिंता से चिंतन तक…स्वस्थ्य समाज का निर्माण’ विषय पर आयोजित इस संवाद सत्र में देश भर से कई गणमान्य बुद्धिजीवियों ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का संयोजन दूरदर्शन समाचार के वरिष्ठ पत्रकार मनीष बाजपेई ने किया । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रुप में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री इंद्रेश जी भी मौजूद रहे। श्री इंद्रेश जी ने कोविड-19 समस्या पर अपने विचार रखते हुए कहा कि हमें समस्या के मूल में जाने की जरुरत है, आखिर समस्या पैदा कैसे हुई? 

संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्रीमान इंद्रेश जी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हमें स्वयं के बारे में चिंतन करना चाहिए कि हमारे गुण और दोष क्या हैं? हम अपने मूल्यों और संस्कारों से कैसे भटक रहे हैं? हम अपने पारम्परिक ज्ञान का अनुसरण क्यों नहीं कर रहें है? इन सभी प्रश्नों के जब हमें उत्तर मिलेगें तो हम स्वयं ही समस्या के समाधान बन जाएगें। कोरोना महामारी को लेकर श्री इंद्रेश जी ने अपने विचारों के माध्यम से एक व्यापक चित्र खींचते हुए वैक्सीनेशन को लेकर कहा कि देश एक विशाल लक्ष्य को प्राप्त कर चुका है और यात्रा अभी चल रही है। सरकार को इसके लिए धन्यवाद लेकिन पूर्ण रुप से टीकाकरण के लिए समाज को भी इसमें अपनी जागरुकता दिखानी होगी । अपने संबोधन के अंत में उन्होनें दैन्यम् आराध्यम् संस्था और मेडिवेज हेल्थ फाउंडेशन को इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए अपनी शुभकामना दी और भविष्य में ऐसे प्रयासों की पुनरावृत्ति करने की सलाह भी दी ।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि कोविड टीकाकरण को लेकर जिस तरह से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने एक विशाल लक्ष्य को तय किया है, वो निश्चित रुप से सरकार की समाज के प्रति जवाबदेही को दर्शाती है लेकिन यात्रा चल रही है और इस पर पूर्ण रुप से विजय पाने के लिए समाज के एक एक व्यक्ति को इसमें अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता ने कार्यक्रम में बोलते हुए देश और दुनिया के सामने उपस्थिति इस अभूतपूर्व समस्या को देश के विकासक्रम से जोड़ा। गांव, किसान और ग्रामीण जीवन की अच्छी समझ रखने वाले कैप्टन विकास गुप्ता ने कोरोना महामारी के दौरान हुए अनुभवों से कार्यक्रम में उपस्थित महानुभावों को परिचित करवाया। कार्यक्रम में हेल्थ पार्टनर के रुप में उपस्थित हुए नियो हॉस्पिटल नोएडा के निदेशक डॉ. गुलाब गुप्ता ने जहां एक तरफ कोरोना महामारी के रोकथाम के लिए सरकार के प्रयासों को सकारात्मक बताया वहीं दूसरी तरफ समाज की जवाबदेही को भी तय करने के लिए कहा। समाज के प्रत्येक व्यक्ति के सम्पूर्ण रुप से टीकाकृत होने में समाज का व्यक्ति लापरवाही कर रहा है । कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लेने में कई लोग जागरुकता नहीं दिखा रहे हैं । अगर ये तस्वीर हमारे सामने दिख रही है तो फिर ऐसे लोगों के विरुद्ध सरकार को कड़ी कारवाई करनी चाहिए। प्रसिद्ध समाज सेवी डॉ. गुलाब गुप्ता ने कहा कि ये जंग सम्पूर्ण रुप से तब ही जीती जा सकती है जब समाज का एक एक व्यक्ति जुड़ेगा। बरेली के खुशलोक हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. विनोद पागरानी ने भी कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रुप में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई और कार्यक्रम संयोजन के लिए दैन्यम् आराध्यम् और मेडिवेज़ हेल्थ फाउंडेशन संस्था का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया । 

मंच पर आयोजक और सभी सम्मानित वक्तागण

हिन्दुस्तान समाचार पत्र के कार्यकारी संपादक श्री प्रताप सोमवंशी ने कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थिति रह कर अपने विचार व्यक्त किए। पत्रकारिता जगत के अपने अनुभव और स्वंय के कुछ द्रष्टान्तों को सामने रखते हुए श्री सोमवंशी ने कोरोना महामारी को लेकर समाज में किए जा रहे प्रयासों को एक तरफ जहां सराहा वहीं कुछ त्रुटियों की तरफ ध्यान भी देने की जरुरत पर बल दिया। श्री सोमवंशी ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए दैन्यम् आराध्यम् संस्था और मेडिवेज हेल्थ फाउंडेशन को धन्यवाद भी दिया ।संवाद सत्र में एक बात जो मुख्य रुप से सामने निकल कर आई कि सरकार के साथ और स्वास्थ्य जगत के साथ मिलकर व्यवसायिक जगत ने इस आपदा में तिहरी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने स्वास्थ्य जगत की मदद से अधिकतम मानवसंसाधन को सुरक्षित तो रखा ही। साथ ही सरकार की अपील पर हर कदम पर मदद के लिए मोर्चे पर मौजूद रहा। हालात संभलते ही देश की अर्थव्यवस्था को एक बार फिर से तेज रफ्तार पर डाल दिया है। सरकार, व्यवसायिक जगत और स्वास्थ्य जगत के अटूट बंधन ने देश को एक नई दिशा दिखाई है कि कैसे कंधे से कंधा मिलाकर संकट से उबरा जा सकता है। देश में कोरोना की दोनों लहर में दुखद जनहानि हुई, लेकिन राहत की बात ये रही कि महामारी ने हमें सरकार, समाज और स्वास्थ्य जगत के मानवीय चेहरे से रुबरु कराया। 

मेडिवेज हेल्थ फाउंडेशन की तरफ से अनुराग श्रीवास्तव, बृजेश श्रीवास्तव और विकास पालीवाल ने अतिथियों का स्वागत किया गया।मीडिया पार्टनर के तौर पर न्यूज इँडिया 24*7 चैनल के एडीटर इन चीफ सरफराज सैफी ने पुष्प गुच्छ देकर श्रीमान इंद्रेश जी को सम्मानित किया।संवाद सत्र के अंत में कार्यक्रम संयोजक मनीष बाजपेई ने सभी अतिथियों के साथ इफको संस्था का हार्दिक धन्यवाद दिया जिनके सहयोग से ये कार्यक्रम संपन्न हुआ। संवाद सत्र में सामाजिक कार्यकर्ता और व्यवसायी रुमान मलिक ने भी अपना सक्रिय सहयोग दिया और मुख्य वक्ता श्रीमान इंद्रेश जी का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन एंकर सुश्री अंजु सिंह ने किया । कार्यक्रम का समापन सुश्री सुवर्ण पद्मा के राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने दैन्यम् आराध्यम् और मेडिवेज हेल्थ फाउंडेशन को कार्यक्रम आयोजन के लिए धन्यवाद दिया और भावी कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं व्यक्त की ।

उत्तरी दिल्ली निगम शिक्षको को वेतन नहीं मिलने पर हड़ताल पर जाने को मजबूर

नगर निगम शिक्षक संघ ने वेतन समस्या के संदर्भ में संघ की कार्यकारिणी की बैठक में यह कठोर निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ा । संघ के महासचिव रामनिवास सोलंकी के अनुसार लाखों निगम कर्मी एवम पेंशनर परिवार दिल्ली सरकार और निगम शासित सरकार को चेतावनी देते हैं कि हमारे वेतन पर आप दोनों दल राजनीति बंद करें।

लाखों परिवार आप दोनो के इस खेल से बहुत परेशान हो चुके हैं। अब दोनो दल आपसी समन्वय सहमति बनाकर हमे हमारा डीए, एचआरए का बढ़ा हुआ वेतन,पेंशन और दीपावली बोनस जल्द से जल्द भुगतान करें। अन्यथा अब बर्दाश्त नहीं करेंगे और धरना प्रदर्शन एवम् हड़ताल करने पर मजबूर होंगे एवम आगामी नगर निगम चुनाव में सभी निगम कर्मी एवम पेंशनर नोटा का इस्तेमाल करने पर मजबूर होंगे। जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी आप दोनो दलों की होगी ।

इस बैठक में महिपाल मावी, विभा सिंह, जगदीश यादव, मुरारीलाल शर्मा, आशु शर्मा जी बलवान सिंह,ललित यादव,प्रदीप सोलंकी,विवेक भारद्वाज श्री राम सैनी आदि शामिल थे ।

सुनीता नागेंद्र सेवा संस्थान, बाँट रहे बेसहारा बुजुर्गों के जीवन में मुस्कान

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सिन्हा परिवार ने खुद को संभाला और अपने परिवार के दो सबसे मज़बूत सदस्यों को खोने के बाद परिवार ने दोनों की स्मृति में आदारञ्जली स्वरूप ‘सुनीता नागेंद्र सेवा संस्थान’ की नींव रखी

हीरेंद्र झा

‘एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जायेंगे प्यारे तेरे बोल…’ गीतकार शैलेन्द्र का लिखा यह गीत किन रूपों में आज भी लोगों को प्रेरित कर रहा है इसकी मिसाल हाल ही में करुणेश्वर  ओल्ड एज केयर हाउस, महाराष्ट्र में देखने को मिली। दरअसल नागेंद्र कुमार सिन्हा अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन त्याग और सेवा की जो भावना वे अपने बच्चों को सिखा गए हैं वह कई बेसहारा जनों के जीवन में रंग और उम्मीद बनकर आई है।  

एक साल पहले 20 अक्टूबर 2020 को 88 साल की उम्र में नागेंद्र कुमार सिन्हा जी का स्वर्गवास हो गया। अपने पीछे वह  एक भरा पूरा परिवार छोड़ कर गये। लेकिन इनके जाने के जब ठीक 6 महीने के अंदर, कोविड के कारण जब इस परिवार की बड़ी बहू सुनीता सिन्हा का भी निधन हो गया तो पूरा परिवार इस आकस्मिक आघात से हिल गया।  सिन्हा परिवार ने खुद को संभाला और अपने परिवार के दो सबसे मज़बूत सदस्यों को खोने के बाद परिवार ने दोनों की स्मृति में आदारञ्जली स्वरूप ‘सुनीता नागेंद्र सेवा संस्थान’ की नींव रखी। यह एक ऐसा सेवा संस्थान है जो बेसहारा और सच्चे अर्थों में जरुरतमन्द लोगों की मदद के लिए शुरू किया गया है। इसी सिलसिले में 19 अक्टूबर को इस संस्थान के बैनर तले सिन्हा परिवार के कई सदस्य महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के करुणेश्वर ओल्ड एज केयर हाउस पहुंचे।

इस दौरान बुजुर्गों की आवश्यकता के अनुसार उन्हें सामग्री सेवाएं उपलब्ध कराई गईं जैसे कि उनके बीच दो महीने की सभी दवायें, राशन की सभी सामग्री, मिठाई, फल, व्हील चेयर, वैक्यूम क्लीनर इत्यादि का वितरण किया गया।

बता दें कि इस ओल्ड एज केयर हाउस में वैसे बुजुर्ग रहते हैं जिन्हें आश्रय देने वाला कोई नहीं था और जो शारीरिक रूप से असहाय हैं और दूसरों पर निर्भर हैं। ओल्ड एज केयर हाउस के संचालक ईश्वर इन सभी का पूरे जतन से ध्यान रखते हैं। बहरहाल, कार्यक्रम के दिन,

सुनीता नागेंद्र सेवा संस्थान के कई सदस्य दिनभर इन बुजुर्गों के साथ रहे और सबने मिलकर इन बुजुर्गों के लिये अपने हाथों से भोजन बनाने और खिलाने में भी मदद की। स्वर्गीय नागेंद्र कुमार सिन्हा की पत्नी श्रीमती इंदु सिन्हा समेत परिवार के छोटे छोटे बच्चे तक इस नेक काम में पूरे मन से जुटे रहे।

उसके बाद देर तक पुराने सदाबहार फिल्मी गीतों और भजन का सिलसिला चलता रहा।  कई बुज़ुर्गों ने गीत गाये, ताल से ताल मिलाकर खूब तालियाँ  बजाईं। जो न देख सकते थे न बिस्तर से उठ सकते थे, संगीत की धुन पर उनकी उंगलियों को हिलते देखने वाला पल बेहद करुणामयी था। अपनों सा प्यार पाकर सभी बुजुर्ग भावुक हो गये। केयर हाउस के सभी सदस्यों के लिए यह एक यादगार दिन बन गया।

सेवा संस्थान से आयोजक संस्था में मनोज सिन्हा, अनूप कुमार,आलोक कुमार, अमित कुमार, श्रीमती इन्दु सिन्हा, रीना, निमिषा, अर्चना, स्वेता इत्यादि शामिल हैं। इस मौके पर सिन्हा परिवार ने कहा है कि वो आगे भी इस तरह के आयोजन करते रहेंगे जिनसे सच्चे अर्थों में वे उन लोगों तक पहुँच सकें जिन्हें मदद की जरूरत है। यही परम पूज्य पिता जी के लिए हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 20 अक्टूबर को स्वर्गीय नागेंद्र कुमार सिन्हा की पहली पुण्यतिथि भी है। यूँ तो ये काम सिर्फ पैसों से भी हो सकता था जहाँ ज़रूरत के सामानों को खरीद कर इस वृद्धाश्रम पहुंचा दिया जाता। परंतु इन बुज़ुर्गों के लिए सबसे ज़रूरी और सबसे महँगा है आपका समय। शोक के इस पल में सिन्हा परिवार ने इन्हें इनकी ज़रूरत का सामान और वो कीमती समय दिन भर इनके साथ बिता कर जो सेवा भावना दिखाई है, यह औरों के लिए भी एक मिसाल है।

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