सहकारिता ने जहां लोगों के लिए भारी अवसर पैदा किया है वहीं इसमें जमकर घोटाले हुए हैं। इन पर पुस्तक में समग्रता से चर्चा की गई है। पुस्तक ने कई तथ्यों के हवाले से याद दिलाया है कि इसके लेखक आलोक कुमार की असली पहचान खोजी पत्रकार की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नये सहकारिता मंत्री अमित शाह का सहकारिता से पुराना रिश्ता है। सहकारिता को राजनीति में चुनावी टूल के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है। कहीं नये मंत्रालय के गठन का बड़ा मकसद सहकारी आंदोलन में भारतीय जनता पार्टी की पैठ कराना तो नहीं?
सहकारिता अपने ध्येय को कैसे साधता है ? इसपर बाजार में आयी पुस्तक “सहकारिता से समृद्धि” में तसल्ली से प्रकाश डाला गया है।सहकारिता समाजवादी व्यवस्था की तरक्की का औजार है। यह साम्यवाद औऱ पूंजीवाद से सर्वथा अलग है और दोनों के ही दबाव से समाज को बचाता है। यह आंदोलन है, जो सामूहिक उद्यमिता से जिंदगी को बदलने की राह बनाता है। बेरोजगारी बड़ी समस्या है। रोजगार देने के वायदे को पूरा करना सरकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती रही है। सहकारिता में असीमित रोजगार देने का अवसर मौजूद है। इसे तराशने की जरुरत है। उन्नीसवीं सदी की औद्योगिक क्रांति में मशीनों ने इंसान के हाथ से काम छीन लिया,तो जवाब में उद्योगपति रॉबर्ट ओवेन खड़े हुए। फैक्टरी में काम करने वाले गरीबों की बदहाली को बदलने का संकल्प पाला और ब्रिटेन में सहकारिता की नींव रख दी। मजदूरों की दबी कुचली आबादी वाले बस्तियों के हालात बदल गये। बाद में रोशडेल शहर के 28 पॉयनियर्स ने इक्ट्ठा होकर कारोबार शुरु किया और कमाल कर दिया। “टाइम शॉपर्स” खोलकर साबित कर दिया कि जो अपनी मदद करना जानते हैं, उनकी मदद के लिए भगवान भी उतर आते हैं।
भारतीय समाज में सहकारिता का इतिहास इन सबसे पुराना है। ब्रिटिश शासकों ने 1905 में बैंकिंग कारोबार के जरिए भारत में सहकारिता की वैधानिक नींव रखी। आजाद भारत के उत्थान में सहकारिता का अतुल्य योगदान है। कृषि और बैंकिंग के जरिए इसकी पहुंच देश के शत प्रतिशत गांवों तक है। हरित क्रांति और श्वेत क्रांति की सफलता सहकारिता से ही संभव हो पाया है। नयी सदी के दो दशक बीतने के बाद केंद्र सरकार ने सहकारिता के लिए नए मंय का गठन किया है। इससे अतीत की व्यवस्था कही जाने लगी सहकारिता में नयी जान फूंकने की उम्मीद बढ़ी है। यह किताब किंडल, अमेजन, प्ले स्टोर, गुगल बुक्स और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ईबुक्स के प्लेटफॉर्म पर सहजता से उपलब्ध है।
वशिष्ठ ने कहा कि तिब्बत की मुक्ति साधना में शोध व विकास प्रभाग का प्रथम कार्य विश्व समुदाय को तिब्बत की आजादी के लिए शत्रु –संघर्ष में अपना मुखर योगदान देने के लिए पूर्ण जन जागरण करना होगा ताकि चीन तिब्बत छोड़ के भाग जाये
भारत तिब्बत समन्वयक संघ ने प्रान्त संयोजक (शोध व विकास प्रभाग), हिमाचल प्रान्त, उत्तर क्षेत्र, का दायित्व ज्योतिर्विद मुनीष कुमार वशिष्ठ को प्रदान किया | पहले इस दायित्व का निर्वहन डा. सचिन कुमार श्रीवास्तव, सहायक आचार्य, गणित विभाग, हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला कर रहे थे | उनको राष्ट्रीय सह संयोजक (शोध व विकास प्रभाग) भारत तिब्बत समन्वयक संघ का नवीन दायित्व प्रदान हुआ है |
ज्योतिर्विद मुनीष कुमार वशिष्ठ
श्री वशिष्ठ हिमाचल प्रदेश के जिला काँगड़ा के गांव हरिपुर के मूल निवासी हैं और ज्योतिर्विज्ञान, समाजशास्त्र और मानव संसाधन विषय के ज्ञाता है, वर्तमान में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर शोध कार्य कर रहे हैं | श्री वशिष्ठ भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद, चेन्नई के आजीवन सदस्य है और भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के धर्मशाला चैप्टर के समन्वयक है | श्री वशिष्ठ सरकारी और कारपोरेट सेक्टर का 30 वर्षों का लम्बा अनुभव रखते है | वर्तमान में हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय में अनुभाग अधिकारी के पद पर कार्यरत है |
इसके साथ भारत तिब्बत समन्वयक संघ ने डा. संजय कुमार, पोस्ट डॉक्टरल फैलो, शिक्षा विभाग , हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय को सह – संयोजक, ( शोध व विकास प्रभाग) हिमाचल प्रान्त, उत्तर क्षेत्र का दायित्व प्राप्त हुआ है | डॉ संजय कुमार जिला बिलासपुर हिमाचल प्रदेश के मूल निवासी है और शिक्षा शास्त्र के विद्वान है और पिछले कई वर्षों से स्थानीय परम्पराओं व मामलो के क्षेत्र में शोध कार्य कर रहे है |इस संबंध में डा. सचिन कुमार श्रीवास्तव, राष्ट्रीय सह संयोजक (शोध व विकास प्रभाग), भारत तिब्बत समन्वयक संघ ने बताया कि श्री मुनीष कुमार वशिष्ठ की तिब्बती मामलो की सक्रियता और सूझ बूझ के साथ काम करने की उनकी सहयोगात्मक शैली से अवश्य ही भारत तिब्बत के सन्दर्भ में शोध और विकास प्रभाग, हिमाचल प्रान्त में नवीन कार्य और अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे | उन्होंने कहा कि डॉ संजय कुमार का शोध के क्षेत्र में लम्बा अनुभव अवश्य ही शोध व विकास प्रभाग, भारत तिब्बत समन्वयक संघ को एक नई दिशा प्रदान करेगा |
इस अवसर पर श्री वशिष्ठ ने कहा कि तिब्बत की मुक्ति साधना में शोध व विकास प्रभाग का प्रथम कार्य विश्व समुदाय को तिब्बत की आजादी के लिए शत्रु –संघर्ष में अपना मुखर योगदान देने के लिए पूर्ण जन जागरण करना होगा ताकि चीन तिब्बत छोड़ के भाग जाये| उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शक्ति के केन्द्र भारत के लिए तिब्बत की आजादी बहुत ही महतवपूर्ण है| बाबा भोलेनाथ और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को आत्मसात कर शत्रु शमन कर विश्व शांति स्थापित करने का जो संकल्प भारत तिब्बत समन्वयक संघ का है उसे हम सफल बनायेंगे | तिब्बत मुक्ति –यज्ञ को परिणाम तक पंहुचने के लिए शोध व विकास प्रभाग इस क्षेत्र में नयी संभावनाये तलाशने का कार्य करेगा |
मीडिया स्कैन के लिए आप लेख, अपनी टिप्पणी, रिपोर्ट mediascandelhi@gmail.com पर भेज सकते हैं। प्रकाशित सामग्री पर आपकी असहमति का भी स्वागत है।
आपको जान कर हैरानी होगी कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाने वाली मीडिया संस्थानों में पर्यावरण को लेकर कोई डेस्क नहीं है, जहां पर्यावरण जैसे गंभीर मसले पर रिपोर्टिंग करने वाले विषय की समझ रखने वाले पत्रकारों की तैनाती हो
एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल तकरीबन 12 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण होती है। जिसकी वजह से देश की जीडीपी में 03 फीसदी का नुकसान होता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसके पीछे खेतों की पराली, गाड़ी से निकलने वाले धुआं, फॉसिल फ्यूल और इंडस्ट्री से निकलने वाले धुएं को बढ़ते प्रदूषण का जिम्मेदार माना है। यही कारण है कि प्रदूषण ना सिर्फ दिल्ली के लिए बल्कि समूचे विश्व के लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है।
उज्ज्वल मिश्रा अर्नव
प्रदूषण दिल्ली, पंजाब, हरियाणा के साथ-साथ पूरे उत्तर भारत के लिए भी मुसीबत बन चुका है। यह दिल्ली के आलावा उत्तर प्रदेश , बिहार , झारखंड और पश्चिम बंगाल को भी सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। केंद्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 में वाराणसी को देश के सबसे प्रदूषित शहरों की श्रेणी में रखा गया था। हालांकि दिल्ली अक्सर केंद्र में होती है। कारण है दिल्ली में मीडिया का केंद्र होना जिसके वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही दिल्ली को ही ज्यादातर केंद्रित किया जाता है। परन्तु एक सच्चाई यह भी है कि जब प्रदुषण का स्तर बेहद ही खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है तब सरकार को या फिर मीडिया को इस विषय को उठाने का मौका मिलता है उससे पहले ना ही मीडिया पर्यावरण को लेकर कभी सजग रही है ना ही सरकारें।
आंकड़े – आपको बता दें कि “IQAir” की 2020 “वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट” में 106 देशों के प्रदूषण स्तर की जांच की गई जिसमें दुनिया के 50 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 35 भारत में पाए गए। जिसमें दिल्ली को 10 वें सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर और दुनिया की सबसे ज्यादा प्रदूषित राजधानी बताया गया है। लिहाजा यह एक बेहद ही चिंताजनक स्थिति है। कुछ रिपोर्ट्स तो यह कहती हैं कि दिल्ली में रहने वाले लोगों की आयु वहां की प्रदूषित हवा के कारण 10 वर्ष कम हो रही है। लोगों के फेफड़े वक्त से पहले खराब होने लगते हैं वहीं उन्हें आगे चलकर अस्थमा जैसी समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। हालाँकि, दिल्ली की वायु गुणवत्ता में वर्ष 2019 से वर्ष 2020 के बीच लगभग 15% का सुधार दर्ज किया गया है।
राजधानी दिल्ली में जब कभी प्रदूषण का स्तर अधिक हो जाता है तो यहां सरकार द्वारा एक (GRADED RESPONSE ACTION PLAN) को लागू कर दिया जाता है। जिसके अंर्तगत प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली में फैक्ट्रियां , कंस्ट्रक्शन वर्क के साथ साथ स्कूलों को बंद कर दिया जाता है , साथ ही ऑड-इवेन जैसे फार्मूले लागू कर दिए जाते हैं। जिससे प्रदूषण को कम करने में बहुत कम ही सही पर मदद मिलती है।
प्रमुख कारण – दिल्ली में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण शहर की लैंडलॉक भौगोलिक स्थिति के साथ साथ पड़ोसी राज्यों (पंजाब, हरियाणा और राजस्थान) में पराली जलाने की घटनाएँ , वाहन उत्सर्जन , औद्योगिक प्रदूषण , बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियाँ मुख्य रूप से शामिल हैं। मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंसेज के अंर्तगत आने वाली एक एजेंसी “SAFAR” अर्थात (सिस्टम ऑफ एयर क्वॉलिटी & वेदर फॉरकेस्टिंग) ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के पीछे 46 % ज़िम्मेदार “पराली” को माना है। आपको बता दें कि यह एजेंसी वायु गुणवक्ता की जांच कर उस पर रिसर्च करती है , और प्रदूषण के पीछे की मुख्य वजह का पता लगा कर अपना रिपोर्ट्स तैयार करती है। पड़ोसी राज्य जैसे पंजाब और हरियाणा में अक्सर किसान अपने समय और पैसे बचाने के लिए खेतों की पराली जला देते हैं। जिससे की पराली का धुंआ सीधे दिल्ली की तरफ आने लगता है और उसके कारण दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। पिछले साल नवंबर में जब पराली (Stubble) जलाए गए उस पूरे समय में दिल्ली में PM 2.5 का औसत स्तर 144 माइक्रोग्राम्स प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया था। जबकि, दिसंबर में यह 157 माइक्रोग्राम्स प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा शहर के 15 स्थानों पर “एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन” का निर्माण किया गया है। यह तकनीक शहर के प्रदूषित वातावरण में धूल के कणों का पता लगाती है। साथ ही इसकी मदद से पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली जहरीली गैसों का भी पता लगाया जा सकता है। कुछ रिपोर्ट्स की मुताबिक ये उपकरण पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले छह हानिकारक कारकों को भांप कर समय से पर्यावरण प्रदूषण पर लगाम लगाने में कारगर साबित हो रहे हैं।
फिलहाल वाराणसी के पंद्रह जगहों पर एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन बनाए गए हैं जिसमें “तरना, पंचक्रोशी मार्ग, पड़ाव, कैंट स्टेशन, अर्दली बाजार, बौलिया, कंदवा, BHU, आदमपुर, भेलूपुर, मलदहिया, चितरंजन पार्क, मंडुवाडीह, शास्त्री चौक और सारनाथ ” शामिल है। यहां की हवा को साफ बनाए रखने के लिए इसकी निगरानी “रियल टाइम एम्बिएंट एयर क्वालिटी मानिटरिंग स्टेशन” से की जाती है और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की सूचना हर दस मिनट पर कंट्रोल रूम में भेजी जाती है। इस तकनीक में छह तरह के अत्याधुनिक सेंसर लगे हुए हैं जो कि शहर की वायु में प्रदूषणों के मानकों की रियल टाइम सूचना कंट्रोल रूम को देते हैं। लिहाजा मुझे लगता है कि इस तरह के उपाय अन्य राज्य सरकारों को भी करना चाहिए जिससे कि बढ़ते प्रदूषण पर रोक लगाया जा सके।
आपको जान कर हैरानी होगी कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाने वाली मीडिया संस्थानों में पर्यावरण को लेकर कोई डेस्क नहीं है, जहां पर्यावरण जैसे गंभीर मसले पर रिपोर्टिंग करने वाले विषय की समझ रखने वाले पत्रकारों की तैनाती हो। यहां तक की सरकारों की भी नींद तभी खुलती है जब स्थिति भयावह हो जाती है। कारण हमारा चुनाव करना भी है। जब तक आप और हम जैसे लोग पर्यावरण जैसे विषय की गंभीरत को नहीं समझेंगे और निरर्थक मुद्दों पर सरकार चुनते रहेंगे, तब तक ऐसा ही होता रहेगा। हमें कहीं न कहीं गंभीर और महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार का चुनाव करना होगा जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य , रोजगार, गरीबी और पर्यावरण शामिल हों। साथ ही पर्यावरण के प्रति हमें भी सजग होना होगा। जितना हो सकें यातायात के साधनों का प्रयोग करें , बदलते वक्त के साथ साथ पेट्रोल डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करें अपने आस पास ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाएं ताकि हम अपने आने वाले भविष्य को एक बेहतर पर्यावरण दे सकें।
mishraarnav89@gmail.com
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विश्व बंधुत्व दिवस पर एनडीटीएफ डीयू ने आयोजित किया विशेष कार्यक्रम
आलोक कुमार, प्रो. केजी सुरेश व अनंत विजय ने रखे अपने विचार
बिजेंद्र कुमार
विश्व शांति व बंधुत्व के लिए हिंदुत्व का मार्ग ही श्रेष्ठ है। हजारों सालों से हिंदुत्व की विचारधारा ने साबित किया है कि विश्व को जोड़ने और आपसी प्रेम के साथ सभी के विचारों, धार्मिक आस्थाओं व आचार व्यवहार को स्वीकार कर आगे बढ़ने का अवसर हिन्दुत्व प्रदान करता है। विश्व में जहां इस्लाम और अन्य धर्म के प्रचारकों व शासकों ने धर्म परिवर्तन का मार्ग अपनाया वहीं हिंदुत्व ने सभी को उसी रूप में उन मान्यताओं के साथ अपनाया जो कि अनुयायी को स्वीकार है। हिंदुत्व वह भाव है जो सभी को उनके वास्तविक स्वरूप के साथ स्वीकार करता है वो चाहे किसी भी विचार और मान्यता के पक्षधर क्यों न हो। आयुर्वेद व प्रणायाम आदि पर किसी धर्म विशेष का एकाधिकार व पेटेंट नहीं है। यही हिंदुत्व का भाव है जो हजारों सालों से विश्व शांति और बंधुत्व के भाव को लेकर निरंतर आगे बढ़ रहा है। स्वामी विवेकानंद ने हिंदुत्व के इसी स्वरूप को शिकागो में व्यक्त कर समूचे विश्व को हिंदुत्व से अवगत कराया था। ये विचार विश्व हिंदू परिषद् के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) की ओर से ‘हिंदुत्व: विश्व शांति का सशक्त मार्ग’ विषय पर आयोजित ऑनलाइन वेबिनार में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस आयोजन में अतिथि वक्ता के रूप में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के जी सुरेश व वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय ने भी संबोधित किया।
विश्व हिंदू परिषद् के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार
एनडीटीएफ के बौद्धिक प्रकोष्ठ की ओर से स्वामी विवेकानंद के शिकागों में दिए गए ऐतिहासिक भाषण के 128 वर्ष होने के उपलक्ष में इस वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता आलोक कुमार ने अमेरिका में हिंदुत्व के विरुद्ध होने सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें एक खास उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हिंदुत्व के खिलाफ दुष्प्रचार करने का प्रयास किया जा रहा है जोकि प्रामाणिकता से एकदम परे है। उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व के विचार में सभी की स्वीकार्यता है। हिन्दुत्व विश्व समाज को जोड़ता है जबकि अन्य धर्मों में अलगाव का भाव सर्वविदित है। इतिहास गवाह है कि हिन्दुत्व ने हर किसी को उसके मौलिक रूप और विचार के साथ ही स्वीकार किया है, फिर वो चाहे यहूदी हो, पारसी हो या फिर बौध धर्म को मानने वाले हो। उन्होंने कहा कि विश्व ने हिन्दुत्व का विचार देखा, समझा और अपनाया है और विश्वशांति व बंधुत्व के भाव का प्रचार किया हैं। हिन्दुत्व ने सदैव से जगतगुरू का दायित्व निभाया है और आगे भी निभाता रहेगा। आयोजन में शामिल अतिथि वक्ता प्रो. के जी सुरेश ने कहा कि आज समय आ गया है कि विमर्श का जवाब विमर्श के साथ दिया जाए। अगर हिंदुत्व के खिलाफ कोई नरैटिव स्थापित करने की दिशा में प्रयास करता है तो हमें भी उसके जवाब में नरैटिव प्रस्तुत करना होगा। प्रो के जी सुरेश ने अमेरिका में हिंदुत्व के खिलाफ जारी एक सम्मेलन विशेष का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके पीछे जो ताकतें सक्रिय हैं वह चाहती हैं कि विश्व में स्थापित इस्लामिक आंतकवाद के समानंतर हिन्दुत्व को स्थापित किया जाए। ये ताकतें नहीं चाहती हैं कि अफगानिस्तान के माध्यम से समूचे विश्व के समक्ष आ रहा इस्लाम के महिला विरोधी, विकास विरोधी व बंधुत्व विरोधी रूप स्थापित हो सके और इसके लिए हिंदुत्व पर प्रहार किया जा रहा है और उसके खिलाफ विश्व में प्रचार प्रसार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय है कि हम नारे से आगे बढ़कर विरोधियों को उनकी ही भाषा में जवाब दें। इसमें किताब का जवाब किताब से, शोध का जवाब शोध से, विमर्श का जवाब विमर्श से देना होगा। अवश्य ही एनडीटीएफ का यह प्रयास ऐसी हिंदुत्व विरोधी कोशिशों को नाकाम करने में मददगार होगा।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के जी सुरेश
वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि यशोपनिषद का उपदेश हिंदु धर्म को ना मानने वालों की शंकाओं का भी निदान करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि जिस तरह के प्रयास हिंदुत्व के विरूद्ध में जारी है उनमें वस्तुनिष्ठता का अभाव है। यह हिन्दु धर्म ही है जो कि भगवान से भी प्रश्नों का सामना करने का अवसर प्रदान करता है। यही वो धर्म है जो संवाद का अवसर प्रदान करता है, इसमें सकारात्मकता है। हिन्दुत्व सिखाता है कि समाज विज्ञान ही धर्म विज्ञान है। हम सुकरात का उल्लेख करते हैं, प्लूटो की बात करते हैं तो यहां स्पष्ट कर दिया जाए कि वो भी हिंदू धर्म की तरह धर्म को ज्ञान का अभिन्न अंग मानते थे।
वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय
कार्यक्रम में एनडीटीएफ के अध्यक्ष डॉ. ए के भागी ने कहा कि हम किसी के झूठे प्रयास का जवाब देने के लिए सामने नहीं आए है बल्कि हम तो हिन्दू धर्म के आधार संवाद को सामने लेकर आए हैं। यकीनन हमारा यह प्रयास हिन्दुत्व की विचारधारा को नुकसान पहुंचाने वालों के विरूद्ध विचार प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि अवश्य ही हमारे कार्यक्रम के सहभागी इस विचार को हजारों, लाखों लोगों के बीच लेकर जायेंगें। डॉ. भागी ने कहा कि कोई भी ऐसी कोशिश जो हिन्दुत्व के विचार को नुकसान पहुंचाना चाहती है वो कभी सफल नहीं हो पाएगी। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सलोनी गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। आयोजन में पूर्व अध्यक्ष व मार्गदर्शक एन के कक्कड़, इंद्र मोहन कपाही, महासचिव डॉ. वीएस नेगी, डॉ. सलोनी गुप्ता, डॉ. मनोज कैन सहित भारी संख्या में शिक्षक शामिल हुए।