Police complaints filed against Congress president Mallikarjun Kharge at Dispur and Silchar over hate speech

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Nava Thakuria 

Guwahati: Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS), through its Uttar Asom and Dakshin Asom Prants formally lodged police complaints at Dispur police station in Guwahati and Silchar police station in Barak valley on 7 April 2026 seeking legal action over alleged derogatory, provocative, and communally sensitive statements made during a recent election rally in south Assam.

According to the complaints, Indian National Congress president Mallikarjun Kharge made controversial remarks during an election rally at Nilambazar under the Karimganj south assembly constituency under Sribhumi district. In his speech, Kharge allegedly compared the ideology of RSS and Bharatiya Janata Party (BJP) to a poisonous snake and suggested its elimination.

As cited in the complaint, Kharge stated “If a poisonous snake is moving in front of you while you are offering Namaz, you must stop the prayer and rush to kill the poisonous snake first — that is what the Quran prescribes you to do. I tell you that the RSS and BJP are similar to such a poisonous snake; if you do not eliminate it, you may not survive.”

The RSS has expressed serious concern that such remarks are inflammatory in nature and capable of inciting hostility, intimidation, and violence against workers and supporters of RSS and BJP, while invoking religious sentiments during an election campaign ahead of State legislative assembly polls scheduled for 9 April.

The complaints asserted that the statement constitutes a corrupt electoral practice under Section 83 of the Representation of the People Act, 1951, and further allege that the remarks criminally intimidated the public and promoted enmity between supporters of different political and social groups. The complainants have argued that describing the ideology of RSS and BJP as poisonous and allegedly calling for their elimination could be interpreted as encouraging bodily harm against members and supporters of these organizations.

The FIR, endorsed by Khagen Saikia, Karyavah of Uttar Asom Prant, and Jyotsnamoy Chakraborty, Dakshin Asom Prant Sanghchalak, further stated that the remarks attempt to promote communal division between Hindu and Muslim communities, potentially disturbing public peace & harmony in Assam and influencing the electoral environment.

The complaints warn that such statements may lead to communal tensions or clashes if not addressed promptly by the authorities. The RSS emphasized that democratic discourse must remain within constitutional and legal boundaries and that electoral campaigning should not resort to language capable of endangering social cohesion or public peace.

सुपवा के छात्रों की क्रिएटिविटी की हिसार में रही गूंज

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हिसार / रोहतक। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के छात्र-छात्राओं की क्रिएटिविटी को तीन दिवसीय साहित्योत्सव ‘अक्षरम’ में जमकर सराहना मिली। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू), हिसार में आयोजित किए गए ‘अक्षरम’ की क्रिएटिविटी पार्टनर डीएलसीसुपवा रही। इस दौरान सुपवा के छात्र-छात्राओं ने फैशन शो, बैंड, डांस आदि प्रस्तुत किए, जबकि पेंटिंग, स्कल्पचर, पॉटरी आदि कलाओं का लाइव प्रदर्शन किया।

डीएलसीसुपवा को जीजेयू, हिसार ने ‘अक्षरम’ के लिए रचनात्मक साझीदार बनाया था। इसमें शिरकत करने के लिए कुलगुरु डॉ अमित आर्य की अगुवाई में सुपवा से 140 छात्र-छात्राएं, फैकेल्टी सदस्य व अन्य स्टाफ हिसार गया। डॉ आर्य ‘अक्षरम’ के उद्घाटन सत्र में विशिष्ठ अतिथि के तौर पर मौजूद रहे, जबकि ‘हरियाणा का साहित्य और पत्रकारिता में योगदान’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी का भी हिस्सा रहे। ‘अक्षरम’ के दौरान डीएलसीसुपवा के छात्रों को अपनी प्रतिभाएं दिखाने के लिए अलग-अलग मंच व स्थान अलॉट किए गए। कहीं फिल्म एंड टेलीविजन के छात्रों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया तो कहीं शारीरिक गति के मनोभाव का प्रदर्शन किया। लॉन एरिया में विजुअल आर्ट्स के छात्रों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा से ‘अक्षरम’ में पहुंचे अतिथियों व हिसारवासियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लाइव पेंटिंग, स्कल्पचर मेकिंग, पॉटरी आदि देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती रही। लोग बार-बार छात्रों से उनकी प्रतिभा के बारे में जानकारी लेते नजर आए। पेंटिंग कोर्स की द्वितीय वर्ष छात्रा लक्षिता जांगड़ा ने विद्या की देवी मां सरस्वती की पेंटिंग बनाई, जो हिसार के एक परिवार को बेहद पसंद आई और उन्होंने इसकी खरीदारी की।

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अनु मलिक ने की आर्ट एग्जीबिशन की शुरुआत

‘अक्षरम’ में आने वाले लोगों को अपने कार्य-कलाप बताने के लिए डीएलसीसुपवा की ओर से आर्ट एग्जीबिशन लगाई गई। इसमें डिजाइन, विजुअल आर्ट्स आर्किटेक्चर व फिल्म एवं टेलीविजन फैकेल्टी में होने वाली गतिविधियों की जानकारी दी गई। इसमें छात्र-छात्राओं द्वारा किए गए कार्य, मॉडल आदि प्रदर्शित किए गए। आर्ट एग्जीबिशन की शुरुआत प्रख्यात गायक व संगीतकार अनु मलिक रिबन काटकर किया। उन्होंने आर्ट एग्जीबिशन का दौरा करते हुए सुपवा की गतिविधियों की सराहना की। अनु मलिक ने कहा कि हरियाणा में इस विधा का विश्वविद्यालय होना फिल्म इंडस्ट्री व देश के लिए गौरव की बात है।

तालियों की गड़गड़ाहट के बीच दिखा फैशन का जलवा

जीजेयू के मेन ऑडिटोरियम का मंच सुपवा के छात्र-छात्राओं के फैशन शो के दौरान रैंप ऑडिटोरियम में बदलता हुआ महसूस हुआ। यहां छात्रों ने प्रोफेशनल मॉडल की भांति वॉक करते हुए पारंपरिक व आधुनिक भारतीय परिधान पेश किए। इस दौरान सभागार लगातार तालियां से गूंजता रहा। सुपवा के छात्र-छात्राओं को फैशन शो करने के लिए डेढ़ घंटे का समय अलॉट किया गया। इस दौरान रंग-बिरंगी रोशनी व अलग-अलग म्यूजिक की बीट्स पर सधे हुए कदमों के साथ छात्र-छात्राओं ने कैटवॉक की। फैशन शो के दौरान मॉडल की तरह छात्रों ने विशेष तौर पर डिजाइन किए गए कपड़ों व अन्य उत्पाद के साथ आत्मविश्वास, सीधी पीठ व लयबद्ध कदमों के साथ वॉक की। इस दौरान उनके आई कॉन्टैक्ट, चेहरे के एक्सप्रेशन और शालीनता भरी वॉक पर तालियों की गड़गड़ाहट चलती रही।

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एफटीवी के छात्रों की प्रस्तुति से बंधा समां

जेजीयू के मुख्य ऑडिटोरियम के रिसेप्शन एरिया में सुपवा के फिल्म एंड टेलीविजन फैकेल्टी के छात्रों ने शारीरिक गति के मनोभाव का प्रदर्शन किया। छात्र प्रिंस, पुष्कर व सीनियर भारती की मूक अभिव्यक्ति व अदाकारी पर लगातार तालियां बजती रही। रवि मदीना व भारती के युगल डांस ने जमकर तालियां बटोरी, जबकि सपना के ‘बोल तेरे मीठे-मीठे’ गाने पर डांस को जमकर सराहना मिली। यश के डांस के अलावा भारती के सोलो डांस के साथ जीजेयू के छात्र भी झूमते नजर आए। शाम के समय खुले परिसर में एफटीवी के 15 छात्रों ने नशा मुक्ति पर नुक्कड़ नाटक किया। इस दौरान नशे के शरीर पर आने वाले दुष्प्रभावों के साथ ही नशे से समाज को हो रहे नुकसान के बारे में भी बताया गया। एफटीवी के छात्रों ने ऑपरेशन सिंदूर को नृत्य नाटिका के जरिए रोंगटे खड़े करने वाले, लेकिन शानदार अंदाज में पेश किया।

आर्ट एग्जीबिशन में प्रदर्शित कार्यों ने किया मंत्रमुग्ध

जीजेयू के मुख्य ऑडिटोरियम के क्रश हॉल में डीएलसीसुपवा के फैकेल्टी ऑफ डिजाइन, फैकेल्टी ऑफ विजुअल आर्ट्स, फैकेल्टी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन व फैकेल्टी ऑफ आर्किटेक्चर के अंतर्गत चल रहे विभागों की ओर से कराए जा रहे कार्यों को दर्शाया गया। जिसमें स्कल्पचर, चित्रकला, आर्किटेक्चर मॉडल, प्रॉडक्ट डिजाइन में बनाए गए फर्नीचर, लाइफ स्टाइल असेसरीज में बनाए गए डिजाइन व जूते शामिल रहे। यहीं पर एफटीवी के छात्रों की नेशनल व इंटरनेशनल अवार्ड वीनिंग फिल्मों के बारे में पोस्टर्स से जानकारी दी गई। एनिमेशन डिपार्टमेंट में बनाए गए चित्रों को प्रदर्शित किया गया। जबकि, एडवरटाइजिंग से संबंधित विभिन्न सामाजिक विषयों ‘बेटी बचाओ’, ‘पर्यावरण संरक्षण’ आदि पर बनाए पोस्टर प्रदर्शित किए गए। टेराकोटा और सिरेमिक से बने आर्टिस्टिक वर्क को भी एग्जीबिशन में शोकेस किया गया।

सुपवा बैंड की धुनों पर थिरकी जीजेयू

‘अक्षरम’ के पहले दिन रात 9:30 बजे से 11:30 बजे तक ओपन थियेटर में सुपवा बैंड ने करीब 2 घंटे की रंगारंग प्रस्तुति दी। बैंड ने ‘शिव शिव शंकरा’ से भगवान शिव को प्रणाम करते हुए अपनी प्रस्तुतियों की शुरुआत की। इसके बाद शुरू हुआ प्रस्तुतियों का सिलसिला करीब 2 घंटे तक निर्बाध चलता रहा। हजारों छात्रों की मौजूदगी व लगातार मिले साथ व तालियों ने सुपवा बैंड का जमकर उत्साहवर्धन किया। इस दौरान नए-पुराने फिल्मी गीतों के अलावा रैप सॉन्ग भी अपने अंदाज में पेश किए। जीजेयू के छात्रों की भारी मौजूदगी व उनकी पुरजोर मांग के कारण यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने रात 11:30 बजे तक सुपवा बैंड की प्रस्तुति जारी रखने की इजाजत दी। इस दौरान सुपवा बैंड की जमकर सराहना हुई।

अब नहीं पनपेंगे माओवादी : जरा याद इन्हें भी कर लो

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कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

रायपुर : देश से सशस्त्र माओवादी आतंक का खात्मा हो गया है। लेकिन अर्बन नक्सलियों का माड्यूल अभी भी सक्रिय है। नक्सलवाद-माओवाद के ख़ूनी पंजों ने चारो ओर कैसे दहशत फैला रखी थी? उसकी गवाह हर वो तारीख़े हैं जब-जब हमारे वीर जवानों ने माओवादियों से लोहा लिया। छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में, बस्तर में सुख-शांति के लिए अपना बलिदान दे दिया। ऐसी ही इतिहास की एक तारीख़ है 6 अप्रैल 2010।
ये तारीख़ याद कर लीजिए। ये वो तारीख़ थी
जब दंतेवाड़ा में CRPF की 62 वीं बटालियन पर घात लगाकर माओवादी आतंकियों ने हमला किया था। सुकमा (तत्कालीन दंतेवाड़ा) के चिंतागुफा, ताड़मेटला के पास माओवादियों ने क्रूरता की अति कर दी थी। लेकिन जवानों का हौसला कम नहीं था। माओवादियों के साथ हुए संघर्ष में 76 जवानों ने अपना बलिदान दे दिया था। CRPF ने वीर बलिदानियों को याद करते हुए लिखा —“हमारे 75 श्रेष्ठ जवानों ने 6 घंटे तक चले भीषण संघर्ष में 7 माओवादियों को ढेर किया और 8 को घायल किया, इसके बाद उन्होंने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। 500 से अधिक भारी हथियारों से लैस माओवादियों और सैकड़ों IEDs से घिरे होने के बावजूद—जो लगभग हर उस स्थान पर लगाए गए थे। जहाँ हमारे जवान शरण लेकर जवाबी कार्रवाई कर सकते थे। उनका साहस अद्वितीय और अविस्मरणीय था।हमारे कुछ वीरों ने अपने साथियों की रक्षा करने और दुश्मन को निष्क्रिय करने के लिए ग्रेनेड पर लेटकर सर्वोच्च बलिदान दिया। अंतिम क्षणों में भी वीर सैनिकों ने अपने हथियार अपने नीचे छिपा लिए। ”

इस क्रूर हमले का मास्टरमाइंड माडवी हिड़मा था। इसके बाद जेएनयू में अर्बन नक्सलियों ने जश्न मनाया था। क्योंकि अर्बन नक्सलियों के लिए माओवादियों के द्वारा जवानों की हत्या—जीत थी।‌ ये ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि अर्बन नक्सलियों और सशस्त्र माओवादियों में कोई विशेष अंतर नहीं है। ये दोनों न तो देश के संविधान को मानते हैं। न ही इनमें राष्ट्र के प्रति कोई निष्ठा है। इनका हमेशा से एक ही उद्देश्य रहा है कि – कैसे भारत में रक्तपात किया जाए। ‘जल-जंगल, जमीन’ के नाम पर हिंसा की जाए। ये दोनों जनजातीय समाज के, वनवासियों के घोर शत्रु हैं।अर्बन नक्सलियों और सशस्त्र माओवादियों के रक्तपात के चलते ही— सुदूर वनांचल क्षेत्र विकास से बहुत पीछे रह गए।

लेकिन हमारे जवानों ने सुरक्षा के लिए जिस अदम्य साहस का परिचय दिया है। वर्षों तक माओवादियों की मांद में घुसकर उन्हें नेस्तनाबूद किया है।आज उन वीर बलिदानियों के कारण ही छत्तीसगढ़ ख़ूनी आतंक से बाहर आया है। सशस्त्र माओवादी आतंक का सफाया हो चुका है। अर्बन नक्सली हमेशा से हथियारबंद माओवादियों की ढाल बनकर खड़े रहते थे। अभी भी ये सिलसिला रुका नहीं है। अर्बन नक्सली —
नक्सलवाद के समर्थन में साहित्य लिखते, इंटरव्यू करते, एडिटोरियल लिखते, नाट्य मंचन करते, ढफली बजाते, रैली करते और चिंघाड़ते हुए अर्बन नक्सली नज़र आते थे।‌ ये मानवाधिकार
के नाम पर माओवादी हिंसा को जायज़ ठहराते थे। लेकिन माओवादी आतंकी जिन निर्दोषों की हत्या करते थे। उनके मानवाधिकार पर ये चुप्पी ओढ़ लेते थे। वो माओवादी जो बस्तर के जनजातीय समाज का दमन करते थे। स्थानीय लोगों के जवान बच्चों और महिलाओं को अर्बन नक्सलियों के कॉन्सेप्ट पर उठा ले जाते थे। फिर उनके हाथों में हथियार थमा देते थे। रक्तपात कराते थे। बस्तर के वो बच्चे जिन्हें हाथों में किताबें थामनी थी। अर्बन नक्सलियों, माओवादियों ने – उन्हें बंदूक पकड़ने के लिए मजबूर किया। उनका बचपन, घर-परिवार और समाज सबकुछ छीन लिया। बारूदी गंध की ज़िंदगी जीने को विवश किया। भोले-भाले, सरल हृदय जनजातीय समाज को अपने ही समाज का दुश्मन बना दिया। माओवादियों ने उन्हें रक्तपात करने का हथियार बनाने का जघन्य अपराध किया। क्या इनसे किसी भी प्रकार की सहानुभूति की दिखाई जा सकती है ?

आज जिस माडवी हिड़मा को अर्बन नक्सली हीरो बना रहे हैं। अर्बन नक्सली जिस हिड़मा के लिए नारे लगा रहे हैं। मत भूलिए कि वो आतंकी इन 76 जवानों की हत्या का असल मास्टरमाइंड था। माडवी हिड़मा वो खूंखार आतंकी था जिसने न जाने कितने घर-परिवार उजाड़ दिए। न जाने कितने निर्दोषों को गोली से भून दिया।‌ नृशंसता के साथ सिलसिलेवार ढंग से हत्याओं को अंज़ाम दिया। अब, उस हिड़मा को महान बलिदानी भगवान बिरसा मुंडा से जोड़ने का अपराध , अर्बन नक्सली कर रहे हैं। बिरसा मुंडा जिन्होंने राष्ट्रीय अस्मिता के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। ईसाई मिशनरियों, अंग्रेज़ों की नाक में दम कर दिया। स्वतंत्रता, जनजातीय अस्मिता, भारत की संस्कृति और कन्वर्जन के ख़िलाफ़ जिन्होंने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। अगर कोई भी भगवान बिरसा मुंडा से हिड़मा जैसे माओवादी क्रूर हत्यारे को जोड़ता है तो ये सबसे बड़ा अपराध है। यह हमारे आदर्शों, हमारी संस्कृति, जनजातीय समाज का घोर अपमान है। ये किसी भी क़ीमत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अब भी जो लोग माओवाद के समर्थन में लोगों को बरगलाते दिखाई दें। जो हिड़मा जैसे माओवादी आतंकी को ग्लोरीफाई करते दिखें। जो ये विमर्श करते दिखें कि— अजी ! जल-जंगल जमीन के लिए नक्सलवाद फिर से वापस आ सकता है। ऐसे में ये तय मानिए कि या तो ये अर्बन नक्सली हैं। याकि ये अर्बन नक्सलियों के नैरेटिव के ट्रैप में फंस गए हैं। याकि ये किसी पॉलिटिकल लाइन को एड्रेस कर रहे हैं। देश समेत छत्तीसगढ़ से माओवादी आतंक का सफ़ाया ये बता रहा है कि – अगर दृढ़ इच्छाशक्ति हो। संकल्प हो। समाज के लिए बेहतरी की चिंता हो तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं हो सकता है। हमारे सुरक्षाबल, हमारे गौरव है। उनके असंख्य बलिदानों के प्रति ये राष्ट्र और समाज अपनी कृतज्ञता प्रकट करता है। हमारा छत्तीसगढ़, हमारे बस्तर की माटी और उसकी संतानें अब सृजन का नया विहान रच रही हैं। अब बस्तर में बारूद की गंध कभी नहीं लौटेगी। हमारा पूरा समाज-एक साथ खड़ा है। बस्तर के युवाओं के कंधों पर अब वहां की शिक्षा-रक्षा, स्वास्थ्य-रोजगार, विकास की कमान है। जो अभावग्रस्त हैं। उन तक अब सारे संसाधन तेजी से पहुंचेंगी। वीर गुंडाधुर, भगवान बिरसा मुंडा, दंतेश्वरी माई की संतानें अब मूल को पहचानकर सृजन के गीत गा रही हैं। प्रकृति की लय ताल के साथ एकाकार होकर शांत और सुरम्य तस्वीरें रच रही हैं।

अपने पैरों तले विपक्ष को रौंदते राहुल और राष्ट्रीय स्तर पर उभरती भाजपा

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दिल्ली । आज से एक महीने बाद देश के पाँच राज्यों में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरलम में होने वाले चुनावों के नतीजे चार मई की शाम तक सामने आ जाएँगे और जिस भी दल का बहुमत होगा वो सरकार बनाने का दावा करेगा।

इन विधानसभा चुनावों में दो बातें ऐसी हो रही हैं जो भारतीय राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल कर रख देंगी। *पहली यदि भाजपा पश्चिम बंगाल जीत जाती है तो ना केवल वह भारत के पूर्वी राज्यों में अपनी स्थाई पहचान बना लेगी अपितु वहाँ विपक्ष विहीन राजनीतिक परिदृश्य बन जाएगा।* इसका कारण है कि उड़ीसा और असम में विपक्ष पूरी तरह साफ़ हो गया है। असम में तो कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़ छोड़ कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं और माहौल यह है कि भाजपा एक तरफा जीत हासिल कर रही है , जबकि उड़ीसा में कांग्रेस का कोई नाम लेवा नहीं बचा और बीजू जनता दल भी अपने आपको बचाए रखने की कोशिश में लगा हुआ है। *भारत के मजबूत राजनीतिक क्षत्रपो में से एक ममता बनर्जी पिछले 15 सालों से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज हैं लेकिन इस बार उनके सारे पासे उल्टे पड़ रहे हैं। उनकी बैचेनी यह बता रही है कि उनके हाथ से बंगाल की डोर छूट रही है।*

उधर *तमिलनाडु में यदि भाजपा और उसके सहयोगी दल डीएमके की सरकार को हरा देते हैं तो दक्षिण भारत के दिल में भाजपा का प्रवेश हो जाएगा। हालांकि कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनती रही है और आंध्र प्रदेश में वो तेलगुदेशम के साथ सत्ता में भागीदार है लेकिन बिना तमिलनाडू के भाजपा आधार अधूरा ही रहेगा।* तो भाजपा की दृष्टि से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडू के विधानसभा चुनाव परिणाम युगांतरकारी साबित होंगे। तमिलनाडू जीतने के बाद केरलम और पुडुचेरी में भाजपा की पहुंच बहुत आसान हो जाएगी। *इस जीत के साथ भाजपा पर लगा उत्तर भारतीय राजनीतिक दल का ठप्पा भी हट जाएगा और वो वास्तविक रूप से पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला राजनीतिक दल बन जाएगा।*

अब इन चुनावों का दूसरा पहलू और भी ज़्यादा रोचक है। *भारत का मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस कहीं पर भी अपने आपको स्थापित करने की कोशिश करते हुए भी नहीं दिखती।* केरल में वो छोटे छोटे दलों के अलावा मुस्लिम लीग को लेकर यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ़्रंट के नाम से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ़्रंट से टक्कर ले रही है। मतलब केरलम जैसे छोटे राज्य में भी कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है जबकि तमिलनाडू और पुडुचेरी में वो डीएमके की कृपा पर निर्भर है। यहाँ पर डीएमके सत्ता में होने के साथ कांग्रेस का मार्गदर्शक भी है। बिना डीएमके के कांग्रेस वहाँ एक कदम भी नहीं चल सकती। यह एक स्थापित सत्य बन गया है। *पश्चिम बंगाल में तो कांग्रेस ने कमाल की हिम्मत दिखाई है। उसने सभी विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि एक दल के रूप में कांग्रेस का यह फ़ैसला आकर्षक हो सकता है लेकिन राजनीतिक रूप से कांग्रेस का यह फ़ैसला बड़ी राजनीतिक मूर्खता को ही दर्शाता है।* कांग्रेस को पता है कि 1977 के बाद से वो पश्चिम बंगाल के राजनीतिक पटल से बाहर होती गई और इस चुनाव में उसकी वापसी की दूर दूर तक कोई संभावना नहीं है। इसके बावजूद सभी सीटों पर अपना उम्मीदवार उतार कर उसने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में वापसी की संभावनाओं पर गहरी चोट कर दी है। *जहाँ कांग्रेस असद्दुद्दीन ओवैसी को भाजपा की बी टीम बताते हुए नहीं थकती थी, आज मुस्लिम वोटों के लालच में वो भी वही काम कर रही है।*

छह माह पूर्व कांग्रेस के लिए थोड़ी बहुत संभावना असम में बनती लग रही थी, पर कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की उपेक्षा और तरुण गोगोई को आगे रखने की जिद में कांग्रेस ने ख़ुद अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। *कांग्रेस के नेता राहुल गांधी द्वारा रोकने के बाद भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा के साथ जा रहे हैं। यह कहा जा सकता है कि असम में कांग्रेस ने आत्मसमर्पण कर दिया है।*

हालाँकि चुनाव परिणामों की आधिकारिक घोषणा चार मई को होगी लेकिन *इतना तय है कि इन चुनावों के बाद कांग्रेस में राहुल गांधी को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा जिसने कांग्रेस के साथ साथ इंडी अलायंस को भी समाप्त कर दिया। यही चुनाव उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के किसी भी दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर भी ताला लगा देंगे।*

(लेखक सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च एंड डेवलपमेंट से संबद्ध हैं)

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