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रंग, रस और राग में डूबा होली मिलनः हल्द्वानी प्रेस क्लब के समारोह ने बाँधा समां
अतिथियों में मुख्य रूप से कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत तथा जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल, विधायक सुमित हृदयेश, दर्जा राज्य मंत्री नवीन वर्मा, दिनेश आर्या, श्रीमती रेनू अधिकारी, भाजपा प्रदेश महामंत्री तरूण बंसल, जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेयी, एसडीएम प्रमोद कुमार की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। अतिथियों ने रंगों के इस पर्व को सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताते हुए सभी को होली की शुभकामनाएँ दीं।
क्लब के अध्यक्ष संजय तलवाड़ तथा मुख्य संरक्षक कैलाश जोशी ने संयुक्त रूप से अतिथियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि मन के मैल को धोकर प्रेम, सद्भाव और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ते हैं और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाते हैं।

इस अवसर पर क्लब के संरक्षक तारा चन्द्र गुरूरानी, इस्लाम हुसैन, भगवान सिंह गंगोला, साकेत अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश जोशी, जिला सूचना अधिकारी गिरजाशंकर जोशी, पूर्व सूचना निदेशक योगेश मिश्रा, सिंथिया स्कूल के प्रबंधक प्रवीण रौतेला, कोषाध्यक्ष अजय चौहान, उपाध्यक्ष अरविंद मलिक, महिला उपाध्यक्ष नीरू भल्ला सहित अनुराग वर्मा, सुशील तलवाड़, मो. हसनैन, देवकृष्ण कोठारी, सुशील शर्मा, गिरीश जोशी, मनोज तलवाड़, सलीम खान, प्रवीन चोपड़ा, गिरीश गोस्वामी, गौरव गुप्ता, दीपक भंडारी, शाहबेज खान, मनोज पांडे, दलीप गड़िया, ओपी अग्निहोत्री, विशाल शर्मा, सरोज आनंद जोशी, कमल जोशी, फरहत रऊफ, आशुतोष कोकिला, गोपाल जोशी, संजय पाठक, मोहन काण्डपाल, चंदन बिष्ट, योगेश शर्मा, सर्वेश बिष्ट,बबलू सागर, सुशील भट्ट, बीपीएल शिक्षा प्रयास समिति की अध्यक्षा पार्वती किरौला, वूमेंन क्लब ऑफ उत्तराखण्ड की अध्यक्षा मोनिका शर्मा, भारती पंत, समाजसेवी चम्पा त्रिपाठी, मंजू शाह सहित गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सोशल मीडिया पर मिली अभूतपूर्व सफलता के बाद कांग्रेस का नेतृत्व संभाल सकते हैं राठी?

तो क्यों न पार्टी का सारा ढांचा उलट-पलट कर दिया जाए? राहुल गांधी को “लाइव फील्ड विजिट” के लिए भेजा जाए, और ध्रुव राठी को कमान सौंपी जाए। कल्पना कीजिए-अगला चुनावी घोषणा-पत्र यूट्यूब वीडियो में आएगा, जिसमें ध्रुव जी बैकग्राउंड में ग्राफिक्स के साथ “फैक्ट्स” दिखाएंगे: “दोस्तों, BJP ने जो झूठ बोला, वो देखिए…” और नीचे कमेंट्स में “Jai Hind” और “Modi Out” की बाढ़। प्रेस कॉन्फ्रेंस की जगह लाइव स्ट्रीम, जहां सवालों के जवाब देने की बजाय “लाइक और सब्सक्राइब” का नारा लगेगा। पार्टी का नया स्लोगन-“कांग्रेस: जहां हर मुद्दा एक्सप्लेनेशन वीडियो बनता है”।
फिर क्या होगा? युवा वोटर तो फंस जाएगा, क्योंकि ध्रुव जी की आवाज में ‘चीन की घुसपैठ’ सुनकर लगेगा कि अब असली लड़ाई शुरू हो गई। पुराने कांग्रेस कार्यकर्ता सोचेंगे-अब तो हमें भी एडिटिंग सीखनी पड़ेगी। और राहुल गांधी? वो शायद खुश होंगे, क्योंकि अब उन्हें सिर्फ ‘कमेंट पढ़कर जवाब देना’ होगा, स्पीच देने की जरूरत नहीं।
लेकिन एक छोटी-सी दिक्कत है-कांग्रेस को वोटर चाहिए, फॉलोअर्स नहीं। सोशल मीडिया पर लाखों लाइक्स मिल सकते हैं, लेकिन बूथ पर वोट डालने वाला आदमी अभी भी जमीन पर ही मिलता है। ध्रुव राठी को अध्यक्ष बनाने से पार्टी ‘वायरल’ तो हो जाएगी, लेकिन ‘विजयी’ होना थोड़ा मुश्किल लगता है। वैसे भी, इन्फ्लूएंसर राजनीति में उतरें तो मजा आएगा-क्योंकि तब कम से कम एक्सप्लेनेशन वीडियो में पार्टी की हार का कारण भी साफ-साफ बता देंगे: ‘दोस्तों, ये सब एडिटिंग की कमी से हुआ!’
तेहरान में सत्ता का संकट और अंतरिम व्यवस्था
दिल्ली। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त मिसाइल हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की शहादत हो गई। यह हमला न केवल ईरान के लिए, बल्कि पूरे इस्लामी दुनिया के लिए एक गहरा आघात है। खामेनेई की मौत के साथ उनके परिवार के कई सदस्य, शीर्ष सलाहकार अली शमखानी और आईआरजीसी कमांडर मोहम्मद पाकपुर भी शहीद हो गए। तेहरान में शोक की लहर है, जहां लोग सड़कों पर काले परिधान में इकट्ठा होकर अमेरिका-इज़राइल की निंदा कर रहे हैं। ईरान ने 40 दिनों का शोक घोषित किया है, और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इसे “मुस्लिमों के खिलाफ खुली जंग” करार दिया है।
संक्रमण काल की कमान अब अंतरिम नेतृत्व परिषद के हाथ में है। ईरान के संविधान के अनुसार, इस परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, मुख्य न्यायाधीश घोलाम-होसैन मोहसिनी-एजेई और गार्जियन काउंसिल के विधि विशेषज्ञ सदस्य अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी शामिल हैं। अयातुल्लाह अराफी को विशेष रूप से इस परिषद में शामिल किया गया है, जो नए सर्वोच्च नेता के चयन तक देश की कमान संभालेंगे। यह व्यवस्था ईरान की स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन युद्ध की स्थिति में अमेरिका-इज़राइल यदि परिषद के किसी सदस्य को निशाना बनाते हैं, तो स्थिति और जटिल हो सकती है। फिर भी, ईरान की क्रांतिकारी सेनाएं और जनता का संकल्प अटल है-खामेनेई की शहादत से ईरान कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत होगा।
भारत में शिया समुदाय का गहरा शोक और विरोध
भारत में, खासकर शिया समुदाय में, खामेनेई की शहादत पर गहरा दुख व्याप्त है। लखनऊ, जो शिया संस्कृति का केंद्र है, में सआदतगंज और अन्य इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। वे अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ नारे लगा रहे हैं, काले झंडे लहरा रहे हैं। प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने तीन दिनों का शोक घोषित किया है। उन्होंने अपील की है कि लोग काले कपड़े पहनें, घरों पर काले परचम लगाएं, और दुकानें बंद रखें। उन्होंने कहा, “खामेनेई को मारकर दुनिया सोचती है कि ईरान खत्म हो जाएगा, लेकिन अमेरिका-इज़राइल को करारा जवाब मिलेगा।” आज रात 8 बजे छोटे इमामबाड़े में शोक सभा और कैंडल मार्च निकाला जाएगा।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी इसी तरह का आह्वान किया है। मौलाना यासूब अब्बास ने इसे “सदी की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना” बताया और ईरान के मजबूत प्रतिकार की भविष्यवाणी की। श्रीनगर में भी लाल चौक पर शिया समुदाय ने प्रदर्शन किया, काले झंडे और कपड़ों में विरोध जताया।
एक नए संघर्ष की शुरुआत
यह विरोध भारत की विविधता और एकता का प्रतीक है। भारत ने हमेशा ईरान के साथ मजबूत संबंध बनाए रखे हैं-ऊर्जा, व्यापार और सांस्कृतिक स्तर पर। खामेनेई की शहादत पर भारत सरकार को सतर्क रहना होगा, ताकि घरेलू शांति बनी रहे। पिछले वर्ष लेबनान की घटनाओं की तरह, यहां भी शिया-सुन्नी मतभेद भुलाकर एकजुटता दिखी है।भारत की नजर में संदेश
खामेनेई की शहादत से साफ है कि अमेरिका-इज़राइल की आक्रामकता क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रही है। भारत, जो बहुपक्षीयता और शांति का समर्थक है, इस संकट में संतुलित रुख अपनाएगा। लेकिन भारतीय मुस्लिम समुदाय, खासकर शिया भाई-बहन, की भावनाएं स्पष्ट हैं-वे उत्पीड़न के खिलाफ खड़े हैं। ईरान मजबूत रहेगा, और भारत जैसे देशों की एकजुटता से इस्लामी दुनिया नई ताकत हासिल करेगी। यह शहादत अंत नहीं, बल्कि एक नए संघर्ष की शुरुआत है।






