100 कारों की भव्य रैली और 1,200 से अधिक सारथियों की सहभागिता से भारत टैक्सी लॉन्च कार्यक्रम बना ऐतिहासिक

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दिल्ली । केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में भारत की पहली सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ का औपचारिक शुभांरभ किया। इस अवसर पर केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर एवं श्री मुरलीधर मोहोल और सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम मेंदेश के विभिन्न राज्यों से आए 1,200 से अधिक “सारथियों” (ड्राइवर पार्टनर्स) ने भाग लिया, जो भारत टैक्सी के चालकसशक्तिकरण और सहकारी स्वामित्व आधारित मॉडल के प्रतिव्यापक समर्थन को दर्शाता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए मालिकाना हक का एक मॉडल तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि तीन साल के अंदर कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामख्या तक सहकार टैक्सी हमारे टैक्सी सार्थियों के कल्याण का एक बहुत बड़ा माध्यम बन जाएगी। श्री शाह ने कहा कि जब पहली बार उन्होंने संसद के सामने सहकार टैक्सी का विषय रखा तो बहुत सारे लोगों, खासकर टैक्सी परिचालन से जुड़ी कंपनियों, ने सवाल उठाया कि सरकार टैक्सी के क्षेत्र में क्यों प्रवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को ‘सहकार’ और ‘सरकार’ के बीच का भेद नहीं मालूम है। श्री शाह ने कहा कि सरकार टैक्सी के क्षेत्र में प्रवेश नहीं रही, बल्कि सहकार (Cooperation) टैक्सी के क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि शायद पूरी दुनिया में पहली बार ऐसी अनूठी कंपनी अस्तित्व में आ रही है, जिसका असली मालिक कोई व्यक्ति या बाहरी कंपनी नहीं, बल्कि टैक्सी चलाने वाला सारथी ही है। सहकार टैक्सी से जुड़े हर एक सारथी भाई-बहन ही इस सहकारी टैक्सी समिति के सच्चे मालिक हैं। उन्होंने कहा कि यह संकल्पना सहकार टैक्सी से जुड़ने वाले सारथियों के जीवन, आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिति में आमूल-चूल परिवर्तन लाने वाली है। श्री शाह ने यह भी कहा कि हमारे देश में पहले ऐसे कई मॉडल सफल हो चुके हैं। सिर्फ 11 दूध उत्पादकों ने अमूल की शुरुआत की थी। आज गुजरात में 36 लाख से अधिक पशुपालक महिलाओं का विशाल वटवृक्ष खड़ा हो चुका है। यह पशुपालक महिलाएं सवा लाख करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार करती हैं। उन्होंने कहा कि यह मॉडल दर्शाता है कि जब आम लोग स्वयं मालिक बनते हैं, तो छोटी शुरुआत भी बहुत बड़े परिणाम दे सकती है। उन्होंने कहा कि पशुपालक बहनें आज दूध बेचकर एक करोड़ रुपए तक की सालाना कमाई कर रही हैं, जो सहकारी मॉडल का कमाल है।

श्री अमित शाह ने टैक्सी सारथियों से अपील की कि वे अभी भी टैक्सी चलाते हैं, सहकार टैक्सी से जुड़ने के बाद भी टैक्सी चलाएँगे, लेकिन दोनों में एक बड़ा फर्क होगा। उन्होंने कहा कि अभी टैक्सी का पहिया किसी और की जेब में पैसे डालता है, लेकिन अब सारथियों की टैक्सी के पहिये की कमाई सारथियों की जेब में ही जाएगी। उन्होंने कहा कि यह विचार सहकारिता की भावना से ही जन्म लेता है। सहकारिता का असली अर्थ यही है कि जब ढेर सारे छोटे-छोटे पूंजी वाले लोग अपनी ताकत को एकत्रित कर लेते हैं, तो वे मिलकर बहुत बड़े-बड़े काम कर पाते हैं। जिनके पास बहुत बड़ी पूंजी होती है, वे अकेले बड़ा काम करते हैं और मुनाफा भी कुछ ही लोगों तक सीमित रहता है। श्री शाह ने कहा कि आज जिस सहकारिता मॉडल की बात की जा रही है, वही आज के समय में सबसे नई और सबसे सफल शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अब टैक्सी का पहिया किसी और की कमाई के लिए नहीं, बल्कि टैक्सी सारथियों की समृद्धि और खुशहाली के लिए घूमेगा।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि भारत में कई विश्व-स्तरीय सहकारी मॉडल खड़े हो चुके हैं, जिनमें अमूल, इफको, कृभको जैसी संस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से किसी भी सहकारी संस्था में शुरूआती पूंजी बहुत बड़ी नहीं थी। इसी तरह सहकार टैक्सी में सबसे बड़ी शेयर पूंजी सिर्फ 500 रुपये है और वही 500 रुपये सारथियों को असली मालिक का दर्जा दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह छोटी सी राशि टैक्सी सारथियों की मेहनत, आत्मसम्मान और उनकी आर्थिक आजादी की नींव बनने जा रही है।

श्री अमित शाह ने कहा कि हर पाँच साल पर होने वाले चुनाव के बाद टैक्सी सारथियों द्वारा चुने गए दो प्रतिनिधि बोर्ड में बैठेंगे। वे ही उनके हितों की देखभाल करेंगे और उनके लिए फैसले करेंगे। यही सहकारिता की आत्मा और सच्चे मालिकाना हक की भावना है। उन्होंने कहा कि सहकार टैक्सी कुल मुनाफे में सिर्फ 20 फीसदी पैसे ही अपने पास रखेगी, यानि 100 रुपए में से 20 रुपए ही सहकार टैक्सी अपने पास रखेगी, जिसके मालिक सारथी ही हैं। श्री शाह ने कहा कि सारा मुनाफा भारत टैक्सी से जुड़े सारथी के अकाउंट में ही जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी के पूंजी खाते में पड़े 20 रुपए के मालिक भी सारथी ही होंगे।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत टैक्सी की कल्पना मौजूदा तीनों प्रकार के टैक्सी वाहनों को एक साथ जोड़कर की गई है जिसमें चार पहिया टैक्सी, तीन पहिया और दो पहिया वाहन शामिल हैं। उन्होंने देश की मातृ शक्ति को संदेश दिया कि भारत टैक्सी उनकी सुरक्षा को सर्वोपरि रखेगी। उन्होंने कहा कि हमने सारथी दीदी की एक खास संकल्पना तैयार की है जिसके तहत आने वाले समय में ऐप में ‘सारथी दीदी’ के लिए एक अलग विंडो होगी, जिसके जरिए रजिस्ट्रेशन कराने वाली किसी भी महिला को केवल ‘सारथी दीदी’ ही पिक करने आएंगी। श्री शाह ने कहा ‘सारथी दीदी’ दो पहिया वाहन लेकर आएंगी और बहुत कम किराए में सुरक्षित रूप से गंतव्य तक पहुंचाएंगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा महिलाओं के लिए बहुत बड़ी और व्यावहारिक राहत साबित होगी। आने वाले दिनों में सारथी दीदी के माध्यम से देश की मातृ शक्ति को एक सुरक्षित, किफायती और सम्मानजनक यात्रा का विकल्प उपलब्ध होगा। यह सिर्फ एक सेवा नहीं बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल निगम, एयरपोर्ट अथॉरिटी, इफको टोक्यो इंश्योरेंस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित कुल नौ प्रमुख संस्थाओं के साथ भारत टैक्सी ने समझौता (एमओयू) किया है। इन समझौतों के जरिए भारत टैक्सी के ग्राहकों को कई अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी और साथ ही इन सभी संस्थाओं को भारत टैक्सी की सेवाएँ आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएँ अब सहकार टैक्सी की सफलता में हिस्सेदार बन चुकी हैं। यह स्वामित्व मॉडल पर आधारित नया टैक्सी कॉन्सेप्ट आज पहली बार भारत में लॉन्च किया गया है, जो न केवल सारथियों के लिए मालिकाना हक की भावना लाता है, बल्कि यात्रियों और विभिन्न संस्थाओं के लिए भी एक भरोसेमंद और सुविधाजनक विकल्प प्रस्तुत करता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत टैक्सी द्वारा तय किया गया फिक्स्ड चार्ज सारथियों के अकाउंट से अलग रहेगा। इसके अलावा, भारत टैक्सी सारथियों की पसीने की कमाई से एक प्रतिशत भी कमीशन नहीं काटेगी, जिससे उनकी समृद्धि तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी का उद्देश्य कंपनी की पूंजी को बढ़ाना नहीं, बल्कि भारत टैक्सी के असली मालिक, सारथी भाइयों और सारथी दीदियों, का मुनाफा और आय बढ़ाना है। श्री शाह ने कहा कि ग्राहक द्वारा किया गया भुगतान सीधे सारथी के अकाउंट में तत्काल ऑटोमैटिकली ट्रांसफर हो जाएगा। इसके लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। किसी भी सारथी का अकाउंट बिना उचित सुनवाई के बंद नहीं किया जाएगा। हालांकि, सारथियों का भी दायित्व है कि वे ग्राहकों के साथ अच्छा व्यवहार करें, अपनी टैक्सी की गुडविल बनाए रखें और सेवा की गुणवत्ता पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि शिकायतों की सुनवाई के लिए पूरी व्यवस्था की गई है और निष्पक्ष सुनवाई के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि अब तक बुकिंग फीस, प्लेटफॉर्म फीस और भारी कमीशन जैसी बातें कंपनी की बैलेंस शीट को मोटा करती थीं और सारथी की कमाई को घटाती थीं। भारत टैक्सी में ऐसी कोई फीस या कमीशन की व्यवस्था ही नहीं है और सारथी ही मालिक होंगे। यह विचार पश्चिमी सोच वाले लोगों को शायद समझ न आए, लेकिन यही सहकारिता की असली ताकत है।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत टैक्सी की शुरुआत सहकारिता क्षेत्र के लिए नए आयाम खोलने की भी शुरुआत है। पिछले 125 वर्षों से भारत में सहकारिता आंदोलन चल रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि सहकारी मॉडल को नए-नए क्षेत्रों में ले जाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए मालिकाना हक वाला मॉडल तैयार कर रहा है। आने वाले समय में हम तीन-चार ऐसे क्षेत्रों में इस मॉडल को आगे बढ़ाएंगे, जहां मेहनत करने वाले व्यक्ति के पसीने और परिश्रम का फल उसी के पास रहेगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत टैक्सी के चार मूल मंत्र हैं—स्वामित्व (ownership), सुरक्षा कवच (security), सम्मान (dignity) और सबका पहिया, सबकी प्रगति, यानी सभी के लिए लाभांश का उचित वितरण। इन्हीं चार उद्देश्यों के साथ भारत टैक्सी की शुरुआत हुई है और आने वाले समय में यह एक बहुत सफल प्रयोग साबित होगा। उन्होंने कहा कि 6 जून 2025 को इसकी स्थापना हुई और आज से यह कमर्शियली लॉन्च हो रही है। महज 8 महीनों के भीतर दिल्ली और गुजरात में किसी भी अन्य टैक्सी कंपनी से ज्यादा सारथी और ग्राहक भारत टैक्सी से जुड़ चुके हैं। इतने कम समय में इतने बड़े पैमाने पर रजिस्ट्रेशन किसी अन्य कंपनी ने नहीं कराए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हमारे सारथी भाइयों-बहनों को इंश्योरेंस, सरकारी रोजगार योजनाओं, लोन, सब्सिडी और गिग वर्कर से जुड़ी सभी सरकारी योजनाओं का लाभ स्वतः मिल सकेगा। हम इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं ताकि हर सारथी को पूरा सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक मजबूती मिल सके।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2020-21 में Gig Workers के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की थी। अब 2025-26 के बजट में भारत सरकार देश भर के सवा करोड़ से अधिक Gig Workers के लिए ढेर सारी योजनाएं और सुविधाएं लेकर आई हैं। पहले ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन का अधिकार केवल उन लोगों को था जिनकी पेंशन कटती थी या जो औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त श्रमिक के रूप में पंजीकृत थे। अब इस सीमा को हटाकर देश के सवा करोड़ Gig Workers ई-श्रम पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी से जुड़े सभी सारथी अब आसानी से ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पांच लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज अपने और अपने परिवार के लिए स्वतः उपलब्ध हो जाएगा। भारत टैक्सी से जुड़ते ही सारथियों को यह मुफ्त चिकित्सा सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। इसके अलावा ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों के लिए उपलब्ध अन्य कई सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी आपके लिए अपने आप सक्रिय हो जाएंगी।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत टैक्सी का मॉडल न केवल सारथियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि उनके सम्मान, सुरक्षा और स्वामित्व को भी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी के ऐप में SoS अलर्ट की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है, जिसके माध्यम से आपातकालीन स्थिति में तुरंत सुरक्षा और सहायता प्राप्त की जा सकती है। अभी दिल्ली-एनसीआर में आठ हेल्पलाइन और सहायता केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं और आने वाले समय में देशभर में ऐसे केन्द्रों का एक व्यापक जाल बिछाया जाएगा। शिकायत निवारण की पूरी प्रक्रिया तीन स्तरों पर संचालित होगी—ऐप के माध्यम से, वेबसाइट पर और टोल-फ्री नंबर के जरिए। इसके साथ ही हमारे प्रतिनिधि नियमित रूप से सारथियों के साथ बैठकें करेंगे ताकि हर समस्या का समय पर समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि आज से सारथी hidden charges से पूरी तरह मुक्त हैं। hidden charge लेना सारथी के साथ एक तरह का छल है। टोल, पार्किंग और अन्य सभी तरह के अतिरिक्त शुल्क से भी मुक्ति मिलेगी। साथ ही 24 घंटे, सातों दिन हेल्पलाइन सारथियों के लिए हमेशा उपलब्ध रहेगी। फिलहाल इसकी शुरुआत गुजरात के कुछ शहरों, दिल्ली और एनसीआर में हो रही है। लेकिन अगले तीन साल से भी कम समय में हम देश के हर राज्य और हर बड़े शहर तक पहुंच जाएंगे।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आने वाले दिनों में हम भारत टैक्सी में बहुत सारी नई सेवाओं को शामिल करेंगे और इसे लगातार विस्तार देंगे। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर के सभी ग्राहकों और सारथियों को संदेश दिया कि आज से भारत टैक्सी उनकी सेवा में पूरी तरह शुरू हो रही है। यह सिर्फ एक टैक्सी सेवा नहीं है, बल्कि हमारे देश के करोड़ों सारथियों की समृद्धि, आत्मसम्मान और आर्थिक मजबूती बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक दिल्ली-एनसीआर में 2.5 लाख से ज्यादा ड्राइवर भारत टैक्सी के साथ जुड़ चुके हैं, 8.5 लाख से अधिक यात्री इस परिवार का हिस्सा बन चुके हैं और कई बड़ी कंपनियों के साथ हमारे समझौते भी अंतिम चरण में हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत टैक्सी का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।

कार्यक्रम से पूर्व दिन में, भारत टैक्सी के शुभारंभ को प्रतीकात्मकरूप से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विज्ञान भवन तकनिकाली गई 100 कारों की भव्य रैली के माध्यम से चिह्नित कियागया। इस रैली ने देश के टैक्सी समुदाय की एकता, आत्मगौरवऔर सामूहिक शक्ति का सशक्त प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष पांच सारथियोंको उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया, जिससे सहकारी मॉडल के अंतर्गत चालक स्वामित्व और भागीदारीको प्रोत्साहन मिले। प्रत्येक सम्मानित सारथी को व्यक्तिगतदुर्घटना बीमा प्रमाणपत्र तथा ₹5 लाख की पारिवारिक स्वास्थ्यबीमा कवरेज प्रदान की गई, जो चालक कल्याण और सामाजिकसुरक्षा के प्रति भारत टैक्सी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कार्यक्रम के दौरान माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री कीउपस्थिति में अग्रणी सार्वजनिक एवं निजी भागीदारों के साथ नौसमझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी किया गया, जिनका उद्देश्य परिचालन एकीकरण, डिजिटल सक्षमता तथा सेवागुणवत्ता को सुदृढ़ करना है।

दिल्ली यातायात पुलिस और सहकार टैक्सी कोऑपरेटिवलिमिटेड के मध्य किये गए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहतभारत टैक्सी को दिल्ली में 21 स्थानों पर स्थित 34 प्री-पेड टैक्सीबूथों के डिजिटल संचालन की अनुमति मिलेगी, जिससे यात्रीसुरक्षा, पारदर्शिता, चालक आय और सेवा गुणवत्ता में वृद्धि होगी।दिल्ली यातायात पुलिस के सहयोग से भारत टैक्सी ने एक संयुक्तकमांड एवं कंट्रोल सेंटर भी स्थापित किया है, जिसमें रीयल-टाइमराइड मॉनिटरिंग, SOS अलर्ट और त्वरित आपातकालीनप्रतिक्रिया तंत्र शामिल हैं, जो सड़क सुरक्षा, नियामक अनुपालनऔर यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ावा देंगे।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD), MeitY के साथ गए समझौताज्ञापन के तहत डिजिटल इंडिया ढांचे के अंतर्गत भारत टैक्सी कोपरामर्श एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी, जिससेDigiLocker, UMANG और API Setu के साथ एकीकरणसंभव होगा। इससे सारथियों को पेपरलेस ऑनबोर्डिंग, सरकारीसेवाओं तक एकीकृत पहुंच, सुरक्षित इंटरऑपरेबल संचालन, कैशलेस भुगतान और बेहतर परिचालन दक्षता का लाभ मिलेगा।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के साथ साझेदारी के तहत10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर बाइक टैक्सी, ई-ऑटो/सीएनजी ऑटोऔर कैब के माध्यम से अंतिम-मील कनेक्टिविटी उपलब्ध कराईजाएगी, जिससे यात्री एक ही प्लेटफॉर्म पर पूरे सफर की योजनाऔर भुगतान कर सकेंगे, साथ ही चालकों को अधिक ट्रिप्स औरकम निष्क्रिय समय का लाभ मिलेगा।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के साथ किया गया MoU देशभर के AAI हवाई अड्डों पर भारत टैक्सी के संचालन कोनियंत्रित करेगा, जिसमें पिक-अप ज़ोन, साइनज की अनुमति तथाकड़े सुरक्षा एवं सेवा मानक निर्धारित किए गए हैं, जिससे पूरेभारत में विनियमित हवाई अड्डा संचालन संभव होगा।

दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम / दिल्ली एयरपोर्टपार्किंग सर्विसेज (DAPS – GMR समर्थित) के साथ हुएसमझौते के तहत IGI एयरपोर्ट टर्मिनलों पर कई पार्किंग स्थानोंपर भारत टैक्सी की व्हाइट कैब सेवाओं को अनुमति दी गई है।DAPS पहले वर्ष के लिए प्रति ट्रिप ₹245 के पिक-अप शुल्कपर 20% की छूट प्रदान करेगा, जो भारत टैक्सी की काली-पीलीसेवाओं का पूरक बनेगा तथा एयरपोर्ट राइड्स की संख्या औरराजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा।

IFFCO Tokio को भारत टैक्सी के बीमा भागीदार के रूप मेंजोड़ा गया है, जो नाममात्र दरों पर चालकों को ₹5 लाख काव्यक्तिगत दुर्घटना बीमा प्रदान करेगा, साथ ही दीर्घकालिकचालक कल्याण एवं बीमा समाधानों पर परामर्श सहयोग भी देगा।

पेटीएम (Paytm) के साथ MoU के तहत डिजिटल भुगतान, को-ब्रांडेड ऑफरिंग्स तथा फिनटेक सक्षमता को सक्षम करेगा, जिसमें पेमेंट गेटवे एकीकरण और पेटीएम के पार्टनर इकोसिस्टमतक पहुंच शामिल है। पेटीएम पारिवारिक कवरेज सहित चालकसमूह स्वास्थ्य बीमा में भी सहयोग कर रहा है।

GMR के साथ साझेदारी एयरपोर्ट मोबिलिटी संचालन को औरसुदृढ़ करते हुए IGI एयरपोर्ट टर्मिनलों पर भारत टैक्सी कीविनियमित पहुंच और सेवा विस्तार को मजबूती प्रदान करेगी।

SBI के साथ हुए MoU पर हस्ताक्षर के तहत प्रधानमंत्री मुद्रायोजना जैसी योजनाओं के अंतर्गत वाणिज्यिक यात्री वाहनों केलिए प्राथमिकता वित्तपोषण उपलब्ध कराया जाएगा। सहकारटैक्सी पात्र चालक-मालिकों की पहचान और सहायता करेगा, जबकि SBI अपनी प्रचलित दिशानिर्देशों के अनुरूप शीघ्र विचारसुनिश्चित करेगा।

डायमंड क्रॉसिंग पर भारत: बहुध्रुवीय दुनिया में संतुलन की कला

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दिल्ली । भारत की विदेश नीति आज एक ऐसे डायमंड क्रॉसिंग पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहाँ रास्ते एक ही दिशा में नहीं जाते, बल्कि कई ओर खुलते हैं। यहाँ रिश्ते जकड़े हुए नहीं हैं, लचीले हैं, और फैसले विचारधारा से ज़्यादा कौमी हितों पर आधारित हैं। बदलती और बेचैन दुनिया में भारत ने किसी एक खेमे में बँधने के बजाय अपने लिए खुली राह चुनी है।

जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के बाद यह रणनीति और ज़्यादा अहम हो गई। उनका अनिश्चित अंदाज़, तीखी ज़बान, टैरिफ की धमकियाँ और बहुपक्षीय संस्थाओं से दूरी ने दुनिया की बेचैनी बढ़ा दी। पुराने भरोसे दरकने लगे, पारंपरिक गठबंधन कमजोर हुए और मुल्क अपने फायदे को सबसे ऊपर रखने लगे।

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल ने बहुध्रुवीय दुनिया की वापसी को तेज़ कर दिया। “अमेरिका फर्स्ट” की नीति के चलते व्यापार युद्ध फिर उभरे और जलवायु समझौतों से दूरी बनी। यूरोप ने अपनी सुरक्षा खुद मज़बूत करने की कोशिशें तेज़ कीं, क्योंकि अब वॉशिंगटन पर पहले जैसा एतबार नहीं रहा। दक्षिण पूर्व एशिया के देश अमेरिका और चीन दोनों से तालमेल बैठाने में लगे हैं। अफ्रीकी मुल्क, अपनी आबादी और संसाधनों के दम पर, अब जलवायु फंडिंग में इंसाफ़ की मांग ज़ोर से करने लगे हैं। पश्चिम एशिया में सऊदी अरब जैसे देश भी अमेरिका से आगे सोचते हुए भारत जैसे साझेदारों के साथ नए रास्ते तलाश रहे हैं।

इन हालात में यह साफ़ हो गया है कि एकध्रुवीय दुनिया का दौर खत्म हो चुका है। नाटो जैसे संगठनों के भीतर खींचतान है और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएँ कई बार बीते ज़माने की लगती हैं। ताक़त अब कई हाथों में बँटी हुई है।

भारत इस नई हकीकत में सहज दिखता है। वह दुश्मनों और दोस्तों, दोनों से बात करता है। इज़राइल–फिलिस्तीन के मसले पर भारत इज़राइल की सुरक्षा का समर्थन तो करता है, लेकिन साथ ही फ़िलिस्तीनी राज्य के हक़ में भी खड़ा हुआ है। 2025 में ग़ज़ा संकट के दौरान भारत ने संतुलित रवैया अपनाया। कुछ प्रस्तावों पर तटस्थ रहा, लेकिन फ़िलिस्तीन को इंसानी मदद देता रहा। इससे अरब दुनिया से रिश्ते भी बचे रहे और इज़राइल के साथ रक्षा सहयोग भी कायम रहा।

रूस–यूक्रेन जंग में भी भारत की यही व्यावहारिक सोच दिखी। भारत ने संप्रभुता और बातचीत की बात की, लेकिन रूस से तेल आयात बंद नहीं किया। सस्ते रूसी तेल ने वैश्विक महँगाई के दौर में भारत की अर्थव्यवस्था को राहत दी। साथ ही भारत शांति प्रयासों में शामिल रहा, बिना किसी एक पक्ष के दबाव में आए।

अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते भी अब परिपक्व हो चुके हैं। तकनीक, रक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग मज़बूत है, लेकिन व्यापार में जब अमेरिकी नीतियाँ भारत को नुकसान पहुँचाती हैं, तो दिल्ली अपनी बात साफ़ कहती है। स्टील पर टैरिफ के बावजूद भारत–अमेरिका व्यापार 200 अरब डॉलर के पार पहुँचा।

चीन के साथ रिश्ता और भी पेचीदा है। सीमा पर तनाव के बावजूद व्यापार बढ़ता रहा। भारत ज़रूरी सामान चीन से लेता है, लेकिन साथ ही आत्मनिर्भर बनने की कोशिश भी कर रहा है। कूटनीतिक बातचीत जारी है, पर भरोसा सीमित है। संतुलन बनाना यहाँ भी भारत की प्राथमिकता है।

ब्रिक्स जैसे मंचों पर भारत की स्वतंत्र सोच दिखती है। 2026 में अध्यक्षता करते हुए भारत ने राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दिया। यूरोप के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत भी चलती रही। अफ़ग़ानिस्तान में कठिन हालात के बावजूद भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। फ्रांस के साथ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस में साझेदारी को रणनीतिक दिशा दी गई। दक्षिण एशिया में भी तनाव के बावजूद पड़ोसी देशों के साथ संपर्क और ढाँचा निर्माण पर ज़ोर बना रहा।

कुल मिलाकर भारत स्थायी गुटों के बजाय मुद्दा आधारित साझेदारी को तरजीह देता है। 2025 के जी20 शिखर सम्मेलन में उसने ग्लोबल साउथ की आवाज़ बुलंद की और कर्ज़ राहत की माँग उठाई। शीत युद्ध के दौर जैसी कठोर सोच से वह दूर रहा।

यह रास्ता आसान नहीं है। अमेरिका और चीन की बढ़ती प्रतिद्वंद्विता भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता की परीक्षा लेती रहेगी। घरेलू आर्थिक दबाव भी विदेश नीति को प्रभावित करते हैं। फिर भी भारत का संतुलित रवैया उसे न सिर्फ़ टिकाए हुए है, बल्कि उसकी हैसियत भी बढ़ा रहा है।

टूटी-बिखरी दुनिया में भारत का यह डायमंड क्रॉसिंग एक सबक देता है। लचीलापन, सब्र और अपने हितों की साफ़ समझ, शायद आज नारेबाज़ी और पक्के खेमों से ज़्यादा ज़रूरी हैं। बहुध्रुवीय दुनिया में भारत का यह रास्ता एक ज़्यादा इंसाफ़पसंद और हकीकतपरस्त वैश्विक व्यवस्था की तरफ़ इशारा कर रहा है, जहाँ विचारधाराओं से ऊपर मुल्कों के हित होते हैं।

इल्लूमिनाती ( डीप स्टेट), वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, फ्री मेसान और एपिस्टीन नेटवर्क एक दूसरे के पूरक

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अनुज अग्रवाल

दिल्ली । दुनिया को नियंत्रित करने वाली इल्लूमिनाती सेंट्रल कमांड है जिस पर यहूदी बैंकर समूहों का नियंत्रण है। कई अरब शेख भी अब इस नेटवर्क का हिस्सा हैं । इन दिनों बराक ओबामा और बिल गेड्स इसके प्रमुख कमांडर माने जाते हैं और अब ट्रंप इसको अपने क़ब्ज़े में लेने की कोशिश में हैं । दुनिया के हर देश में वही राजनीतिक दल काम कर सकता है जिसको यह कमांड परमिशन देती है । परमिशन मतलब इल्लूमिनाती नेटवर्क के “ मार्केट इकॉनमी “ एजेंडे का हिस्सा बनकर काम करना ।

“वर्ल्ड इकॉनमी फोरम” ,इल्लूमिनाती के मेन एजेंडे यानि दुनिया पर उनके नियंत्रण बनाए रखने की नीतियाँ तैयार करने और उनको अपने नेटवर्क वाले दुनिया के राजनीतिक दलों और कारपोरेट घरानों के सिंडिकेट को ट्रेंड करने वाली संस्था है । हर देश के एलीट क्लास यानि सत्ता , धर्म, मीडिया,उद्योग व्यापार फ़िल्म उद्योग आदि से जुड़े लोगों को “फ्री मेसान” क्लब से जोड़ा जाता है । भारत में इस क्लब से जुड़े लोगों की संख्या लगभग तीस लाख से अधिक है । यह नेटवर्क वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की नीतियों को अपने अपने देश में लागू करने के हिडन एजेंडे पर काम करता रहता है और इसके एवज में उसे अकूत धन और अय्याशी के सामान उपलब्ध कराए जाते हैं जिनका माध्यम “एपिस्टीन नेटवर्क” होता है , जहाँ जुड़े हुए लोगों के हर काम पर नज़र भी रखी जाती है और रिकार्ड भी रखा जाता है ताकि वे ग़द्दारी ना कर सकें । यह नेटवर्क समय समय पर “सेफ़्टी वॉल्व थ्योरी “ के तहत अपने पुराने कुकर्मों का भंडाफोड़ करता रहता है । पहले विकिलीक्स फाइल्स और अब एपिस्टीन फाइल के खुलासे इसी खेल का हिस्सा हैं । इस गैंग को पता है कि कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ या उखाड़ पाएगा । चीन , रूस और ईरान तक में भी यह नेटवर्क बहुत प्रभावी हो चुका है ।

राहुल गांधी की पिच पर लुढ़कते नरेंद्र मोदी और उन की भाजपा

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दयानंद पांडेय

लखनऊ : पता नहीं क्यों कुछ लोग राहुल गांधी को पप्पू और नासमझ आदि-इत्यादि बताते रहते हैं। मेरा मानना है कि राहुल गांधी में समझ तो है l बिना समझ के तो हर बार संसद का अपहरण कर लेना आसान नहीं है l पट्ठा समूची भाजपा को नचा देता है l शीर्षासन करवा देता है। सारे योग प्राणायाम भी। फिर भी कुछ परिणाम हासिल नहीं होता। चिल्लाते रहिए संसदीय नियम , यह-वह। पर वह अपनी अराजकता के दम पर सही , समूची भाजपा को सिर के बल खड़ा कर देता है l लोकसभा में ऐन स्पीकर के सामने पूरी हेकड़ी से खड़े हो कर चाय की चुस्कियां लेते रहने का आत्मविश्वास और अभद्रता भी सोची समझी बात है। नासमझी नहीं। अभी तक किसी नेता प्रतिपक्ष को ऐसा करते देखा या सुना नहीं गया। यह मोदी की कायरता से उपजी हुई हनक है।

राहुल का चुनाव न जितवा पाना , कांग्रेस की हार का रिकार्ड बनाना , कांग्रेस को निरंतर दीमक बन कर ख़त्म करते जाना , अपनी अराजक , सामंती और नशेड़ी छवि बना लेना आदि-इत्यादि यह सब अलग विषय है।

जब तक देश की जनता राहुल गांधी को प्रधान मंत्री नहीं बनवा देती तब तक उसे यह सब देखने और बर्दाश्त कर लेने की क्षमता विकसित कर लेनी चाहिए। क्यों कि दुनिया एक बार ट्रंप को शायद समझ ले , राहुल गांधी को समझना नामुमकिन है। क्यों कि वह बहुत समझदार आदमी है। पहले के समय में लोग कहते थे कि भाजपा और मोदी की पिच पर राहुल गांधी खेलता है। लोग जाने क्या – क्या कहते थे।

अब का मंज़र यह है कि मोदी समेत समूची भाजपा राहुल गांधी की पिच पर पस्त है। हर बार मोदी को राहुल लोकसभा में घेर कर गिरा देता है। चुनाव जीतना भले मोदी को आता हो। दुनिया भर की डिप्लोमेसी आती हो। ट्रंप को झुकाना भी आता हो , पाकिस्तान की चटनी बनाना भी आता हो पर लोक सभा में राहुल से लड़ना नहीं आता। हार-हार जाता है मोदी , राहुल के आगे।

तो सिर्फ़ इस लिए कि राहुल समझदार बहुत है। यह राहुल का ही डर है कि ओ बी सी को ख़ुश करने के लिए जातीय जनगणना और यू जी सी एक्ट लाना पड़ता है मोदी को। यह राहुल गांधी की पिच है। आप होंगे 370 हटाने के उस्ताद , तीन तलाक़ को ख़त्म करने के मास्टर। सी ए ए के शौक़ीन। मुफ़्त अनाज , शौचालय , गैस जैसी लोकल्याणकारी बातें करने के बाजीगर होंगे आप। देते रहिए देश को इंफ्रास्ट्रक्चर। पर जो आत्मविश्वास राहुल गांधी के चेहरे पर मोदी को अपनी अराजकता में चित्त करने के बाद दीखता है , मोदी के चेहरे पर यह आत्मविश्वास कभी किसी ने देखा हो तो बताए भी।

इस लिए भी कि राहुल गांधी अपने कोर वोटर की पीठ में कभी मोदी की तरह छुरा नहीं घोंपता। मोदी को इस में महारत है। महारत तो ममता बनर्जी की भी देखने लायक़ है कि दिल्ली आ कर जिस तरह चुनाव आयोग में अपनी बात चुनाव आयुक्त को सुना कर बिना उस को सुने उठ गई। कपिल सिब्बल , सिंघवी जैसे वकीलों की फ़ौज को साथ ले कर सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील ख़ुद को उपस्थित किया , शेरनी की तरह गरज कर मोदी के चेहरे का रंग उड़ा दिया है। तो ममता बनर्जी भी यह सारी नौटंकी अपने कोर वोटर कहिए , घुसपैठिया वोटर कहिए , के लिए कर रही है। दहाड़ती हुई घूम रही है।

पर मोदी ?

अपने वोटर का दुःख-दर्द नहीं जानता। अपने वोटर को चूस कर सिर्फ़ सत्ता का शहद जानता है। अपने वोटर को इमोशनली ब्लैकमेल करता रहता है। टेकेन फॉर ग्रांटेड लिए रहता है। अपने वोटरों को जातियों के खाने में बांट कर आपस में लड़ा देता है। आरक्षण अस्सी से पचासी प्रतिशत करने के मंसूबे पाले हुए है ताकि 2029 में फिर सत्ता का शहद चखे। इसी लिए कभी राहुल गांधी तो कभी ममता बनर्जी अपनी ही पिच पर ला कर मोदी को लुढ़का देती है। अब आप ही बताइए कि नासमझ कौन है ?

राहुल गांधी कि नरेंद्र मोदी ?

दिग्विजय सिंह की अमृता राय के साथ की अंतरंग फ़ोटो कंप्यूटर पर हैक करवा कर दिग्विजय सिंह की थू-थू करवा दी। संजय जोशी की अंतरंग वीडियो निकलवा ली। सार्वजनिक जीवन ख़त्म हो गया संजय जोशी का। प्रणव पांड्या पागल बने घूम रहे। गोविंदाचार्य पता नहीं कहां धूल फांक रहे हैं। एक से एक सूरमा सांस नहीं ले पा रहे। हार्दिक पटेल की अय्याशी भी दिखा दी सब को। सब जानते हैं राहुल गांधी भी अय्याश है। विदेश यात्राओं के लिए बदनामी इसी लिए है राहुल की। पर एक फ़ोटो भी नहीं निकाल पाए ? वीडियो तो बहुत दूर की बात है। राहुल तो ललकार रहा है कि एप्स्टीन फ़ाइल के कारण मोदी ट्रंप से कंप्रोमाइज कर गए। अभी बहुत माल है उस के पास।

यह भी राहुल की पिच है जहां वह मोदी को लुढ़का रहा है। कौन सा खेत चर रहे हैं भाजपा के चाणक्य लोग ? क्यों भैंस बन गए हैं। और यह भैंस भी किस पानी में थाह ले रही है। नक्सली देश से ख़त्म करने की गर्जना करने वाले लोग इस अराजक की चिकित्सा करने में अक्षम क्यों हैं भला !

सोचिए कि जो एक समझदार राहुल गांधी का इलाज नहीं कर पा रहा , वह देश का , देश की समस्याओं का क्या इलाज करेगा ? फिर तमन्ना ग्लोबल लीडर बनने की है।

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