एआई सम्मेलन – भारत की अभूतपूर्व सफलता और व्यथित कांग्रेस

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में आए विश्व के बड़े बड़े नेता इस पहल से अचंभित थे और भारत की प्रगति की प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे। बड़ी बड़ी एआई कंपनियां व निवेशक भारत के साथ समझौते कर रही थीं। जन सामान्य गर्वित हो रहा था क्योंकि यहाँ भारत की युवा प्रतिभाओं की सराहना हो रही थी। सदा से ही राष्ट्र विमुख रही कांग्रेस पार्टी से ये देखा नहीं गया और उनके कुछ चुनिंदा कार्यकर्ता वहां अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने पहुँच गए। वास्तव में अब कांग्रेस पार्टी अब प्रधानमंत्री मोदी व भाजपा का विरोध करते -करते पूरी तरह भारत विरोधी हो गई है।

कांग्रेस का यह विरोध ऐसा ही था जैसे जब प्राचीन काल में जब ऋषि गण अपने आश्रमो मे किसी अच्छे कार्य के लिए यज्ञादि करते थे तो कुछ राक्षस उस यज्ञ को अपवित्र करने के लिए यज्ञकुंड में हड्डियां डालकर उसे अपवित्र करने का प्रयास करते थे। कांग्रेस ने जो कृत्य विदेशी मेहमानों के समक्ष किया है उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस घोर अराजकतावादी बन चुकी है जिसकी अब सारी उम्मीदें समाप्त होती जा रही हैं।

एआई समिट कांग्रेस द्वारा की गई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से भारत का जेन- जी भी नाराज़ है जिसको भड़काकर कांग्रेस सड़क पर लाना चाहत है। भाजपा कांग्रेस द्वारा दिए गए इस अवसर को गंवाना नहीं चाहती । पार्टी की तरफ से संपूर्ण भारत में कांग्रेस कर्यालयों के बाहर धरना -प्रदर्शन आयोजित हो रहे हैं। मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी भी कांग्रेस पर हमलावर हुए ओैर कहा कि कांग्रेस ने एआई समिट को अपनी नग्न राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि देश तो जानता ही है कि आप पहले से ही नंगे हो फिर कपड़े उतारने की जरूरत क्यों पड़ी? यह दिखाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस अब वैचारिक रूप से कितनी दिवालिया और दरिद्र हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि जब मैं कांग्रेस की आलोचना करता हूं तो ऐसी सुर्खियां न चलाएं कि मोदी ने विपक्ष पर हमला बोला। कांग्रेस को बचाने की ये चालाकियां बंद करें।

इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस को सपा बसपा सहित कई अन्य छोटे क्षेत्रीय दलो का समर्थन नहीं मिला है जिनको कांग्रेस इंडी ब्लॉक की पार्टियाँ कहती है। कांग्रेस के इस कृत्य का लालू यादव की पार्टी राजद ने भी कड़ा विरोध किया है। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी विरोध किया है। कांग्रेस ने इस तरह का प्रदर्शन करके सहयोगी दलों के बीच भी अपनी फजीहत करवा ली है। आगामी समय में यह दल कांग्रेस से दूरी बनाने पर विचार भी कर सकते हैं यही कारण हे कि इन सभी दलों की प्रधानमंत्री मोदी ने सराहना की है।

कांग्रेस के नेता और प्रवक्ता जिस प्रकार टी वी चैनलों व सोशल मीडिया पर इस हरकत को सही ठहरा रहे हैं उससे स्पष्ट है कि यह कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ही योजना थी। उनका कहना है कि लोकतंत्र मे अपनी बात कहने और सरकार का विरोध करने का अधिकार सबको है, उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग किया है। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की इस हरकत से पुराने परंपरागत कांग्रेसी से भी खुश नहीं हैं और अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे है। पुराने कांग्रेस नेताओं को इस घटना से कोई हैरानी नहीं है अपितु उनका कहना है कि यह बदली हुई कांग्रेस की बदलती हुई संस्कृति की निशानी है। कांग्रेस नेता शशि थरूर भी एआई समिट को अत्यंत सफल आयोजन बता रहे हैं और कांग्रेस के अर्धनग्न प्रदर्शन की निंदा कर रहे हैं। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने के चक्कर में कांग्रेस ने भारत की छवि व भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाया और इस तरह होली के स्वागत में अपने मुंह पर ही कालिख मल ली।

कांग्रेस के नेताओं की दिली इच्छा रही है कि किसी न किसी प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारत की छवि को पूरी दुनिया में खराब किया जाए और भारत में बांग्लादेश व नेपाल जैसी अराजकता का वातावरण पैदा कर अपना स्वार्थ सिद्ध किया जाए किंतु उसका यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा है और यही कारण है कि कांग्रेस हताश होकर नंगी राजनीति पर उतर आई है।

एक साधारण तस्वीर, एक बड़ा विवाद

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दिल्ली। आजकल सोशल मीडिया और राजनीति का मेल इतना गहरा हो गया है कि एक मामूली सी फोटो भी किसी की छवि को धूमिल करने का हथियार बन जाती है। हाल ही में प्रयागराज के एडिशनल पुलिस कमिश्नर आईपीएस अजय पाल शर्मा की एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें वे हवाई चप्पल पहने, प्लास्टिक के सादे स्टूल पर रखे छोटे से केक को काटते नजर आ रहे हैं। उनके इर्द-गिर्द कुछ लोग खड़े हैं, माहौल बिल्कुल सामान्य-सा उत्सव वाला लगता है-शायद किसी जन्मदिन या छोटे समारोह का। लेकिन इसी तस्वीर को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया के सामने पेश कर गंभीर आरोप लगा दिए। उनका कहना है कि यह फोटो साबित करती है कि अजय पाल शर्मा शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी से मिले हुए हैं, और उनके खिलाफ चल रही जांच (जिसमें यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं) निष्पक्ष नहीं हो सकती।

तस्वीर देखकर सच में लगता है—क्या इतना ही काफी है किसी को अपराधी साबित करने के लिए? एक पुलिस अधिकारी का किसी के साथ केक काटना, वो भी अनौपचारिक माहौल में, क्या इसे सीधे मिलीभगत या साजिश का सबूत मान लिया जाए? यह फोटो किसी बड़े भ्रष्टाचार, रिश्वत या गैरकानूनी काम की नहीं है-बस एक सामान्य उत्सव की है। फिर भी इसे हथियार बनाकर अफसर की ईमानदारी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शंकराचार्य ने इसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाकर कहा कि ”हिस्ट्रीशीटर के साथ पुलिस अफसर बर्थडे मना रहा है, तो जांच कैसे निष्पक्ष होगी?” 

यह घटना आज की राजनीति की कड़वी सच्चाई दर्शाती है। जहां असहमति या विरोध को व्यक्त करने के बजाय, चरित्र हनन और बदनामी का रास्ता अपनाया जा रहा है। “देखो, किसके साथ खड़ा है” या “इसके साथ फोटो है”—बस इतना ही काफी हो जाता है किसी को बदनाम करने के लिए। कोई सबूत की गहराई नहीं देखता, कोई संदर्भ नहीं तलाशता। बस एक क्लिक, एक शेयर, और विवाद तैयार।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी पहले से ही राजनीतिक बयानबाजी और सक्रियता के लिए चर्चित हैं। वे दिन-रात राजनीति करते दिखते हैं-कभी सत्ता पर सवाल, कभी जांच पर आरोप। अगर राजनीति में इतना रुचि है, तो खुलकर मैदान में क्यों नहीं आते? योगी आदित्यनाथ की तरह कोई पार्टी जॉइन कर लें, चुनाव लड़ें, सत्ता में आएं और सिस्टम को अपने तरीके से सुधारें। लेकिन बाहर रहना और दूसरों की छवि खराब करना आसान रास्ता है। यह न तो आध्यात्मिक गरिमा के अनुरूप है, न ही लोकतंत्र की।

समाज में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जहां बिना ठोस आधार के लोगों को बदनाम किया जाता है। पुलिस, न्यायपालिका या प्रशासन पर विश्वास कम हो रहा है, क्योंकि हर मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। आईपीएस अजय पाल शर्मा एक अधिकारी हैं-उनकी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाना एक बात है, लेकिन एक साधारण तस्वीर से उन्हें ‘मिला हुआ’ घोषित करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
अगर हम ऐसी राजनीति को बढ़ावा देते रहे, तो कल कोई भी तस्वीर-चाहे कितनी भी इनोसेंट हो-किसी की जिंदगी बर्बाद कर सकती है। समय है कि हम तथ्यों पर ध्यान दें, संदर्भ समझें और बदनामी की इस गंदी राजनीति को रोकें। अन्यथा, सम्मान और सत्य दोनों खतरे में पड़ जाएंगे।

‘द केरला स्टोरी 2- गोज़ बियॉन्ड’ की रिलीज से पहले दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस में 55 पीड़ितों और 33 परिवारों ने साझा की अपनी आपबीती

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दिल्ली : द केरला स्टोरी 2- गोज़ बियॉन्ड’ की रिलीज से पहले, मेकर्स ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी, जिसमें देशभर से आए पीड़ितों और उनके परिवारों को एक साथ लाया गया। यहाँ उन्होंने उन असल कहानियों को पेश किया, जो इस आने वाली फिल्म का आधार बताई जा रही हैं।

​इस इवेंट में बंगाल, बिहार, भीलवाड़ा, गंगापुर, राजकोट, उदयपुर, जम्मू, महाराष्ट्र, भोपाल, झारखंड, फरीदाबाद, मेरठ, दिल्ली, नोएडा, गुड़गांव और इंदौर के लोग शामिल हुए।

आयोजकों के मुताबिक, कुल 55 लड़कियों और 33 परिवार वालों ने सामने आकर अपने अनुभव शेयर किए हैं।

स्टेज पर 49 पीड़ित और उनके परिवार के सदस्य मौजूद थे, जबकि कई अन्य लोग दर्शकों के बीच बैठे थे। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म की टीम भी शामिल थी, जिसमें प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह, डायरेक्टर कामाख्या नारायण सिंह, को-प्रोड्यूसर आशिन ए. शाह के साथ फिल्म की लीड कास्ट उल्का गुप्ता, ऐश्वर्या ओझा और अदिति भाटिया नजर आईं। कुल मिलाकर, पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ मेकर्स और कास्ट के छह सदस्य वहां मौजूद थे।

​इस सभा को सर्वाइवर्स और उन लड़कियों के परिवारों का एक मिला-जुला समूह बताया गया, जिनकी कथित तौर पर मृत्यु हो चुकी है। कई लोगों ने मीडिया से बात की, अपनी आपबीती सुनाई और लोगों से इस बारे में जागरूक होने की अपील की।

कामाख्या नारायण सिंह द्वारा निर्देशित यह फिल्म, जिसे कन्नड़ और तेलुगु भाषाओं में भी रिलीज किया जाएगा, तीन हिंदू लड़कियों उल्का गुप्ता, अदिति भाटिया और ऐश्वर्या ओझा की झकझोर देने वाली कहानी को सामने लाती है। उनकी जिंदगी तब एक खौफनाक मोड़ ले लेती है जब उन्हें तीन मुस्लिम लड़कों से प्यार हो जाता है, और ये रिश्ते धीरे-धीरे धर्म परिवर्तन के एक सोचे-समझे एजेंडे का खुलासा करते हैं। ‘द केरला स्टोरी 2- गोज़ बियॉन्ड’ का निर्माण विपुल अमृतलाल शाह ने सनशाइन पिक्चर्स के बैनर तले किया है। यह फिल्म 27 फरवरी, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

यूजीसी प्रकरण पर बीजेपी को सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर अजीत भारती के कुछ सुझाव

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01. धर्मेंद्र प्रधान बिना किसी स्पष्टीकरण के हटाए जाएँ।

02. यूजीसी वाली संसदीय कमिटी में जो भी सदस्य भाजपा के थे, उनमें से जो भी वामपंथियों के साथ कॉम्प्रोमाइज्ड हैं, उन्हें निकाला जाए।

03. अतिमहत्वपूर्ण: सामान्य वर्ग के निर्धन छात्र-छात्राओं को अनुसूचित जाति के स्तर की निःशुल्क/सब्सिडी की सुविधा- निःशुल्क कोचिंग, परीक्षा के फॉर्म, हॉस्टल की फीस, कोर्स की फीस आदि SC के समकक्ष। ऐसा करने से किसी को कोई समस्या नहीं होगी।

04. UGC-AICTE को समाप्त करने वाले बिल को बजट सत्र में ही ला कर यह कहें कि पूर्व के जो भी नियम हैं, उन्हें वर्तमान परिस्थितियों के आलोक में समीक्षा के उपरांत ही लागू किया जाएगा एवम् समाज के हर वर्ग का उचित ध्यान रखा जाएगा। कैम्पस को पुलिस थाना नहीं बनने देंगे।

05. हर नेता की भाषा में ‘दलित-वंचित-पीड़ित’ जैसी शब्दावली का लोप और ‘हर वर्ग के लिए समर्पित’ जैसे वाक्यांशों का प्रयोग। टोन में यह बदलाव काफी सहायक सिद्ध होगा।

05. पार्टी के लिए ‘नैरेटिव बनाने वाली’ हर कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द करें, ऑडिट हो कि इन्होंने कौन सा सर्वे सही किया, किस विषय पर कितना नैरेटिव बनाया, पार्टी के लिए कौन से बीस अकाउंट बनाए जो प्रभावशाली कहे जा सकते हैं। जो कसौटी पर खड़ा उतरे उसे रखें।

06. अम्बेडकर को बाप मानना बंद करें। जितना कर दिए, वही जितनी घृणा उत्पन्न कर रहा है, वह आपसे हैंडल नहीं हो सकेगा।

08. आइटी सेल (के नाम से चलने वाले, या माने जाने वाले) हैंडलों को पार्टी-विरोधी गतिविधि करने से रोकें। उन्हें समझाएँ कि किसी को पर्सनल गाली दे कर पार्टी को सामूहिक क्षति पहुँचाना किस स्तर की मूर्खता है। ऐसे लोगों को बताएँ कि उनकी डिफेंस पार्टी पर कितनी भारी पड़ रही है।

09. वैसी कोई योजना न बनाएँ जिसमें SC/ST/OBC का तुष्टिकरण स्पष्ट दिखे। जिन चीजों को माँगा न जाए, वो दे कर पागल न करें।

10. कैम्पस और सोशल मीडिया में ब्राह्मण-घृणा फैलाने वाले लोगों पर पुलिसिया कार्रवाई, हैंडलों पर भारत में प्रतिबंध। इस बात की स्वीकार्यता हो कि ऐसी कोई बात हो रही है देश में जो नारेबाजी से आरंभ हो कर अब एक ब्राह्मण छात्र को बाथरूम में बंद कर, अग्निशामक से शुष्क कार्बन डाई ऑक्साइड चला कर मारने तक पहुँच चुका है। विक्टिम कार्ड नहीं, उचित कार्रवाई का आश्वासन और एक्शन।

11. हर राज्य में कुकुरमुत्ते की तरह पास होते सामान्य वर्ग के हिन्दुओं को अपराधी बनाने वाले कानून (BC एट्रोसिटी एक्ट) पर आपकी पार्टी के वकील उसका प्रतिकार कोर्ट में करें। या, आप उसे सर्वसमावेशी बनाने पर बल दें कि जातिवादी घृणा का शिकार किसी भी जाति का व्यक्ति हो सकता है।

१2. किसी बड़े नेता द्वारा किसी पॉडकास्ट आदि पर यह स्वीकार कराएँ कि पार्टी की चुप्पी ने बहुत क्षति पहुँचाई, दोनों ही तरफ के लोग अपने हैं, उनके कन्सर्न्स उचित हैं। यह भी कि यह नियमावली वर्तमान परिस्थितियों को देखने की जगह वामपंथी प्रायोजित विमर्श को सत्य मान कर बनाई गई, जो अनुचित है।

१3. कोर्ट यदि ऐसे मामलों में कोई निर्णय दे, तो उसे पलट कर राजीव गाँधी न बनें।

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