प्रदेश के नव निर्माण के नौ वर्ष

up_cm_yogi_adityanath_profile_hindustan_shikhar_samagam_2020_1582013539.jpg.webp

लखनऊ : वर्ष 2017 में विधानसभा चुनावों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी भाजपा गठबंधन की सरकार ने नौ वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इन नौ वर्षों में सरकार ने कानून व्यवस्था, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा विकास के अनेक प्रतिमान गढ़े हैं। अपनी उपलब्धियों को जन जन तक पहुँचाने के लिए सरकार ने, “नवनिर्माण के नौ वर्ष “ नामक पुस्तक का प्रकाशन भी किया है।

वर्ष 2017 के पूर्व उत्तर प्रदेश अराजकता के जाल में फंसा हुआ था । छोटी -छोटी बातों पर फसाद हो जाते थे। कानून और व्यवस्था की बुरी स्थिति के कारण निवेशक यहां आने से डरते थे। मुस्लिम तुष्टिकरण चरम पर था। लोग उल्टा प्रदेश कहकर प्रदेश का उपहास करते थे। 2017 में योगी जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद से इस स्थिति में व्यापक परिवर्तन हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि अब प्रदेश की पहचान का संकट समाप्त हो चुका है, सुरक्षा निवेश व विकास प्रदेश की नई पहचान बन चुके हैं। प्रदेश में सभी पर्व शांति, सौहार्द के साथ मनाए जा रहे हैं। कहीं कोई तनाव,कर्फ्यू व दंगा नही है। ऐसे माफियाओं का अंत हुआ है जिनके सामने सपा, बसपा व कांग्रेस की पुरानी सरकारें नतमस्तक हो जाया करती थीं।
शासन व्यवस्था में सुधार व मजबूत कानून व्यवस्था के कारण आज प्रदेश का चहुंमुखी विकास हो रहा है। व्यापक स्तर पर सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो रहा है। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अयोध्या में दिव्य व भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है जहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अयोध्या को अपना एयरपोर्ट, आधुनिकीकृत रेलवे स्टेशन, मेडिकल कालेज मिला, सम्पूर्ण अयोध्या नगरी का नवीनतम और पुरातन संस्कृति के सामंजस्य व समन्वय के साथ व्यापक स्तर पर विकास हो रहा है।

इसी प्रकार काशी का विश्वनाथ धाम कॉरिडोर निर्माण से काशी का स्वरूप भी निखरकर सामने आ रहा है। प्रयागराज में महाकुंभ में 66 करोड़ श्रद्धालुओें ने पुण्य की डुबकी लगाकर इतिहास रच दिया। इसी प्रकार मां विन्ध्यवासिनी कॉरिडोर के निर्माण से मां विन्ध्यवासिनी जाने वाले सभी श्रद्धालुओं को एक विशेष अनुभूति व आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति हो रही है। योगी सरकार आने के बाद प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के साथ साथ अन्य पर्यटन गतिविधियों का विकास होने के कारण इस क्षेत्र में युवाओ के लिए रोजगार के नए अवसर खुल रहे हैं। प्रदेश की आस्था ,संस्कृति व परंपराओं को सम्मान देते हुए उन्हें नई पहचान दिलाने का प्रयास लगातार जारी है। प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई अहम प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके अंतर्गत 96 लाख एमएमएमई इकाइयां संचालित की जा रही हैं । लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निर्माण किया गया है।

एक जिला -एक उत्पाद योजना, एक जिला एक व्यंजन योजना के साथ ही प्रदेश के हर जिले में कम से कम एक पर्यटन स्थल का विकास किया जा रहा है। विगत नौ वर्षों के कार्यकाल में सरकार ने सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश ,रोजगार, किसानों के कल्याण, महिलाओं के सशक्तीकरण और गरीबों के उत्थान के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए हैं। अनेकानेक कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से दलितों, वंचितों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी लाभ पहुंच रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सेवा क्षेत्रों में सुधार करते हुए सुशासन की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
प्रदेश में हिंदू समाज के मतांतरण को रोकने के लिए एक कड़ा कानून लाया गया और साथ ही लव जिहाद जैसी घटनाओं को रोकने के लिए भी प्रदेश सरकार कनून लेकर आई। बेटियों की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया गया। महिला सुरक्षा एवं सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम सरकार द्वारा समय -समय पर उठाए जाते रहे हैं। नारी सुरक्षा ,सम्मान और स्वावलंबन को समर्पित मिशन शक्ति अभियान प्रदेशभर में चलाया जा रहा है । मुख्यमंत्री सुमंगला योजना से बेटियां सशक्त हो रही हैं। प्रदेश की पीएसी को जीवन्त करते हुए प्रदेश में पहली बार पीएसी मे महिलाओं के लिए तीन नई बटालियन की शुरुआत की गई। गरीब बेटियों के लिए विवाह के समय दी जाने वाली सरकारी सहायता भी बढ़ा दी गई है। मेधावी बेटियों के लिए स्कूटी योजना आई है।

प्रदेश का विकास परिवर्तनकारी है आज प्रदेश में सात एक्सप्रेस वे संचालित हैं, 15 का विकास कार्य प्रगति पर है। प्रदेश में 16 एयरपोर्ट संचालित हो रहे हैं और 8 निर्माणाधीन हैं। बहु प्रतीक्षित जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन आगामी 28 मार्च, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी करेंगे। सात प्रमुख शहरों में मेट्रो सेवा चल रही है। नई सड़क परियोजनाएं राज्य के विकास के लिए पहचान बन चुकी हैं। वाराणसी से प्रयागराज और बलिया से अयोध्या तक वाटर-वे की सुविया बढ़ाई जा रही है।

उत्तर प्रदेश तीव्र गति से विकसित प्रदेश बनने की राह पर अग्रसर है। खाद्यान्न ,गन्ना, आम एवं दुग्ध उत्पादन सहित अनेक क्षेत्रों में यूपी देश के पहले पायदान पर पहुंच चुका है। प्रदेश के किसानों को पूरी ईमानदारी से, समय पर भुगतान तो हो रहा है। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए व्यापक योजनाएं चलाई जा रही हैं। किसानों तक केंद्र व राज्य सरकार की समस्त योजनाओं का लाभ पहुँचाया जा रहा है।

प्रदेश में भरपूर निवेश लाने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री योगी ने जापान और सिंगापुर का सफल दौरा किया जबकि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जर्मनी का सफल दौरा किया । प्रदेश के नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिल चुकी हैं। युवाओं के लिए सरकार ने कई कदम उठाए तथा ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं जिनके अंतर्गत अब प्रदेश सरकार युवाओं को एआई जैसे नये क्षेत्रों में भी प्रशिक्षित करने जा रही है। सरकार ने युवाओं के लिए अभ्युदय कोचिंग चलाई जिससे हजारों छात्र सफल होकर नौकरी प्राप्त कर चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व वाली सरकार में हिंदुओं के आस्था केंद्रों का सम्मान हुआ है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर क्षण जनसमस्याओं के समाधान के प्रति कार्यरत रहते हैं। उन्होंने जनता दरबार के साथ साथ, जनता से सीधे जुड़े रहने के लिए योगी की पाती लिखनी आरम्भ की है। मुख्यंमत्री ने “नवनिर्माण के नौ वर्ष “ पुस्तक विमोचन के अवसर पर सनतान का संदेश दिया और भविष्य की दृष्टि भी स्पष्ट की।

पुंसारी (गुजरात): गांव जैसा गांव जहां शहर जैसी हैं सुविधाएं

dfccc87f-8c03-4e8f-a981-2619e427299b.jpeg

गुजरात के साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर तालुका में बसा पुंसारी गांव आज भारत के ग्रामीण विकास का एक जीवंत प्रतीक बन चुका है। अहमदाबाद से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव 15-20 वर्ष पहले किसी अन्य सामान्य गांव की तरह ही था – पानी की कमी, बिजली कटौती, शिक्षा में कमी, अस्वच्छता और रोजगार की तंगी जैसी समस्याएं आम थीं। लेकिन 2006 में जब हिमांशु पटेल सरपंच चुने गए, तब गांव की किस्मत बदल गई। मात्र 23 वर्ष की उम्र में सरपंच बने हिमांशु ने गांव को शहर जैसी सुविधाओं से लैस कर दिया, जबकि उसकी ग्रामीण आत्मा को बनाए रखा। आज पुंसारी को गुजरात की सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत का दर्जा मिल चुका है और यह राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार प्राप्त कर चुका है। यह गांव साबित करता है कि सही नेतृत्व, इच्छाशक्ति और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग से ग्रामीण भारत को नई ऊंचाइयां दी जा सकती हैं।

दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक
हिमांशु पटेल की कहानी प्रेरणादायक है। गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातक हिमांशु ने 2006 में ग्राम पंचायत चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने कहा था कि चरनोई (गांव की सामान्य भूमि) बेचकर मिले पैसों से व्यक्तिगत संपत्ति बनाने के बजाय गांव के विकास पर खर्च करेंगे। यही प्रण उन्होंने निभाई। अपने 10 वर्ष के कार्यकाल (2006-2016) में उन्होंने लगभग 16 करोड़ रुपये के बजट का उपयोग कर गांव को बदल दिया। उन्होंने सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से अपनाया – चाहे वह केंद्र की योजनाएं हों या राज्य की। हिमांशु ने कहा, “सरकारी योजनाओं को सही से अपनाया जाए तो गांवों की तस्वीर बदल सकती है। बस, इच्छाशक्ति होनी चाहिए।”

आज हिमांशु पटेल सरपंच नेटवर्क बनाने में जुटे हैं, जहां एक ऐप के माध्यम से देश भर के सरपंच जुड़ेंगे। वे एक-दूसरे की सफलताओं से सीखेंगे और बेहतर गांवों के माध्यम से सशक्त भारत की दिशा में योगदान देंगे। पुंसारी का मॉडल राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के सैकड़ों गांवों में दोहराया जा रहा है।

100% साक्षरता और जीरो ड्रॉपआउट
पुंसारी में शिक्षा क्रांति का सबसे बड़ा उदाहरण है। गांव में पांच प्राथमिक स्कूल हैं, जहां 100% साक्षरता दर हासिल की गई है। ड्रॉपआउट रेट शून्य है। स्कूल एयर-कंडीशन्ड हैं, जिससे बच्चे गर्मी में भी आराम से पढ़ाई कर सकें। स्कूलों और गांव भर में दो दर्जन से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जो सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। गांव वाई-फाई से जुड़ा है, जिससे डिजिटल शिक्षा संभव हुई। बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्र भी आधुनिक बुनियादी ढांचे से युक्त हैं। बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली से शिक्षकों और छात्रों की नियमितता सुनिश्चित होती है। यह सब मिलकर पुंसारी को शिक्षा के क्षेत्र में मॉडल बनाता है।

आधारभूत सुविधाओं का मजबूत ढांचा

पानी की समस्या गांव की सबसे बड़ी चुनौती थी। 2010 में रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) प्लांट लगाया गया, जिससे पूरे गांव को शुद्ध मिनरल वाटर 24 घंटे उपलब्ध है। पंचायत ने 120 वाटर-प्रूफ स्पीकर लगवाए, जिन पर गांव की घोषणाएं, संस्कृत श्लोक और भजन प्रसारित होते हैं। ड्रेनेज और सेनिटेशन सिस्टम पूरी तरह अंडरग्राउंड है, जिससे गांव कूड़ा-मुक्त और स्वच्छ है।
बिजली में कभी कटौती नहीं होती, क्योंकि गांव में अपना 66 केवी सब-स्टेशन है। सोलर स्ट्रीट लाइट्स से रातें रोशन रहती हैं। बायोगैस प्लांट से नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग होता है। ये सुविधाएं शहरों को टक्कर देती हैं।

सुरक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आधुनिक सुविधाएं

गांव में एटीएम, सीसीटीवी निगरानी (पूरे गांव पर नजर), अस्पताल और क्लोज-सर्किट कैमरे हैं। सुरक्षा के लिए दो दर्जन कैमरे लगे हैं। अस्पताल में स्थानीय स्तर पर इलाज संभव है। चलित लाइब्रेरी (ऑटो में किताबें लेकर अलग-अलग जगह पहुंचना) पढ़ने के शौकीनों के लिए वरदान है। गांव में बैंक शाखा और सीएसपी (कस्टमर सर्विस पॉइंट) से वित्तीय सेवाएं आसान हैं।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता

पुंसारी को गुजरात सरकार से सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत का पुरस्कार मिला। राष्ट्रीय स्तर पर राजीव गांधी सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत अवॉर्ड (2012) सहित कई सम्मान प्राप्त हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों को पुंसारी का मॉडल अध्ययन करने भेजा। 300 से अधिक सरपंच और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि यहां आए। राजस्थान के जयपुर, उदयपुर जैसे जिलों में 500+ सरपंचों ने इसे देखा और अपनाया। संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों ने भी इसकी सराहना की।

भविष्य की दिशा
पुंसारी बताता है कि ग्रामीण भारत में बदलाव संभव है – यदि नेतृत्व दूरदर्शी हो, समुदाय एकजुट हो और योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो। पुंसारी सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि भारत के ग्रामीण विकास का ब्लूप्रिंट है। यदि देश भर के गांव इस मॉडल को अपनाएं, तो सशक्त ग्रामीण भारत का सपना साकार हो सकता है। पुंसारी – जहां शहर की सुविधाएं हैं, लेकिन गांव की आत्मा बरकरार है।

संघ और रॉ पर प्रतिबंध की मांग: भारत विरोधी डीप स्टेट की नई साजिश

Rss.avif

लखनऊ: युद्ध के वैश्विक वातावरण के मध्य अमेरिका में भारत विरोधी डीप स्टेट की गतिविधियां भी चल रही हैं। विभिन्न अवरोधों व वैश्विक उथल- पुथल के बाद भी भारत तीव्रता के आगे बढ़ रहा है। विश्व भर के निवेशकों की दृष्टि भारत पर है और यह बात भारत विरोधी शक्तियों को पसंद नहीं आ रही है। अमेरिका के अंतररष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में अमेरिकी प्रशासन से, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारत की खुफिया एजेंसी रॉ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। अमेरिकी आयोग की यह रिपोर्ट भारत के खिलाफ गहरी सुनियोजित साजिश के अंतर्गत तैयार की गई रिपोर्ट है जो भारत की सम्प्रुभता पर तीखा परोक्ष हमला है । भारत के मुख्य विरोधी दल कांग्रेस ने अपनी परंपरा के अनुरूप विदेशी आयोग की इस भारत विरोधी मांग का समर्थन किया है।

अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में संघ और रॉ के कामकाज पर सवाल खड़े करते हुए ट्रम्प प्रशासन से इन दोनों पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। आयोग का कहना है कि संघ लोगों की धार्मिक आजादी के लिए खतरनाक है। ये धर्म के आधर पर भेदभाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट में संघ पर तुरंत प्रतिबंध लगाने, संपत्ति को जब्त करने और संघ के लोगों के अमेरिका मे प्रवेश को प्रतिबंधित करने की मांग की गई है। कांग्रेस ने अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट से आगे जाकर कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने संघ को भारत में प्रतिबंधित किया। संघ मनुस्मृति से देश को चलाने की वकालत करता है, संघ संविधान विरोधी है, देश की एकता और भाईचारे के लिए जहर है।

अमेरिका का धार्मिक स्वतंत्रता आयोग वर्ष 1998 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा बनाया गया एक स्वतंत्र आयोग है। यह विश्व भर में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करता है और अमेरिकी सरकार को केवल सुझाव देता है। अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट और कांग्रेस द्वारा उसका समर्थन करने पर किसी भी राष्ट्रभक्त नागरिक को हैरानी नहीं हुई है क्योकि कांग्रेस पार्टी लम्बे समय से भारत विरोधी टूलकिट क्रियान्वित कर रही है। कांग्रेस का वर्तमान नेतृत्व गुलामी की मानसिकता से ग्रस्त है। कांग्रेस का दिल पाकिस्तान के लिए ही धड़कता है। कांग्रेस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे कुख्यात आतंकी संगठन से कर चुकी है। कांग्रेस को पता होना चाहिए कि जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हर विपरीत परिस्थिति में राष्ट्र व समाज की सेवा करता है वैसे ही भारत की खुफिया एजेंसी रॉ भारत की सेवा करते हुए भारत को अनेकानेक आंतरिक और वाह्य खतरों से बचाती है।

आश्चर्य की बात है कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं का निर्मम नरसंहार हो रहा था, हिंदू महिलाओं पर बर्बर अत्याचार, बलात्कार व हत्याएं हो रही थीं, 700 से अधिक मंदिरों का विध्वंस कर दिया गया तब इस तथाकथित धार्मिक आयोग की घिग्घी बंध गई थी । तब भारत व संपूर्ण विश्व में हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए किसी ने आवाज उठाई थी तो वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या उससे जुड़े समवैचारिक संगठन ही थे। आज पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान के हिंदू “गायब“ हो चुके है अर्थात अल्पसंख्यक से भी बहुत कम हो गए हैं, यह आयोग इन देशों में हिन्दुओं के धार्मिक अधिकारों के लिए क्यों नहीं बोलता?

भारत ने अमेरिकी धार्मिक अयोग की रिपोर्ट सिरे से खारिज करते हुए कहा कि, अमेरिकी आयोग के लिए यह बेहतर होगा कि वह अमेरिका में हिंदू मंदिरो पर तोड़फोड़ और हमलों की परेशान करने वाली घटनाओं, भारत को निशाना बनाने, वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रति बढ़ती असिहष्णुता और उन्हें डराने- धमकाने के मामलो पर विचार करें। अमेरिकी आयोग पूर्वाग्रह से ग्रसित है और यह उसका एक सुनियोजित एजेंडा है। अमेरिका तथा वहां के तथाकथित आयोग को यह बात अच्छी तरह से पता होनी चाहिए कि भारत की 140 करोड़ से अधिक की आबादी में हर धर्म के अनुयायी रहते हैं। भारत सह अस्तित्व मे भरोसा करता है।

भारत के कांग्रेस व वामपंथी दलों की राजनीतिक दुकान विदेशी आयोगों की झूठ पर आधारित रिपोर्टों के सहारे ही चलती है। राहुल गांधी ऐसे नेता प्रतिपक्ष हैं जो विदेशों में जाकर भारत के संविधान, संसद व न्यायपालिका तक की आलोचना करते हैं । भारत जब पाकिस्तान पर स्ट्राइक करता है तो वे सेना व सरकार से सबूत मांगने निकल पड़ते हैं। आज वो एक विदेशी आयोग की झूठी रिपोर्ट के समर्थन में खड़े हैं। ऑपरेशन सिंदूर के समय भी कांग्रेस ने संसद में सरकार का साथ नहीं दिया। राहुल कांग्रेस ने अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट का समर्थन करके अपनी मंशा को स्पष्ट कर दिया है कि वह भारत को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एकमात्र संगठन है जो विश्व भर में हिन्दुओं के साथ होने वाली अप्रिय घटनाओं पर आवाज उठाता है। संघ ही है जो हिंदू समाज की सेवा कर रहा है। आज मजहबी ताकतें धन -बल और पशु -बल द्वारा भारी संख्या में हिन्दुओं का मतांतरण करा रही हैं अगर उसकी कोई रोकथाम कर रहा है तो वह संघ ही है। यही कारण है कि संघ पर प्रतिबंध की मांग फिर से उठाई गई है। संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ ने करोड़ों घरों में संपर्क किया और एक नई हिन्दू चेतना का संचार हुआ। भारी संख्या में जेन -जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व समवैचारिक संगठनों के साथ जुड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के साथ लोग जुड़ नहीं रहे अपितु दूर भाग रहे हैं। संभवतः संघ से ईर्ष्या के वशीभूत होकर भी कांग्रेस ने अमेरिकी आयोग की भारत विरोधी रिपोर्ट का समर्थन किया हो।

अमेरिकी आयोग को संघ व भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के विषय में अनर्गल टिप्पणियां करने से पूर्व अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग में भारत विरोधी व पाक परस्त लोगों का प्रभुत्व है राहुल गांधी इनकी प्रोपेगंडा मशीनरी का हिस्सा बन गए हैं।
भारत के विपक्षी दलों को समझना चाहिए कि वे सरकार के प्रतिपक्षी हैं न कि भारत देश के।

युद्धकाल का संकट, राजनीति और नागरिक कर्तव्य

lpg_medium_1005_23.webp

दिल्ली । अमेरिका -इजराइयल और ईरान युद्ध को प्रारंभ हुए 15 दिन का समय व्यतीत हो चुका है और अभी भी युद्ध का दायरा बढ़ ही रहा है। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध और आक्रामकता के कारण संपूर्ण विश्व में तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। अन्य आवश्यक उत्पादों के जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। विश्व के तमाम देशों की सरकारें एवं विपक्षी दल कदम से कडम मिलाकर तेल, गैस व ऊर्जा संकट, आर्थिक अनिश्चितता तथा कार्यालयों के पलायन के कारण उत्पन्न हो रहे संकट का सामना कर रहे हैं। सभी देशों में सत्तापक्ष व विपक्ष मिलजुल कर कर रहे हैं वहीं भारत में विपक्ष इस संकट का उपयोग अपने ही देश को नीचा दिखाने के लिए कर रहा है।

भारत में इस युद्ध तथा उससे उपजे वैश्विक संकट पर अलग ही राजनीति हो रही है। जब से युद्ध आरम्भ हुआ है भारत में लखनऊ से लेकर श्रीनगर और जम्मू कश्मीर के बडगाम जिले तक अमेरिका -इजराइल के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करने के लिए आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन कर रहे इन लोगों ने पहले कभी भारत में होने वाले आतंकवादी हमलों निंदा तक नहीं की है। विपक्ष में बैठे राजनीतिक दल तथा उनके नेता इन प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की श्रीमती सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे आदि सरकार की विदेश नीति के खिलाफ अनवरत लेख लिख रहे हैं और किसी न किसी बहाने प्रधानमंत्री मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं।

युद्धकाल के कारण पूरी दुनिया में आपूर्ति व्यवस्था बाधित हो जाने के कारण तेल, गैस व अन्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हो रही है। चीन, जापान, कोरिया जैसे समृद्ध देश और पाकिस्तान ,बांग्लादेश व श्रीलंका जैसे हमारे पड़ोसी देश पेट्रोल व डीजल की कीमतों में 10 प्रतिशत से लेकर 60 प्रतिशत तक की वृद्धि कर चुके हैं। कई देशों में महंगाई चरम सीमा पर पहुंच रही है पड़ोसी पाकिस्तान में तो लाकडाउन जैसे हालात पैदा हो गए हैं जबकि भारत मे पेट्रोल व डीजल के दाम काफी स्थिर हैं। भारत में केवल घरेलू रसोई गैस के दामों में ही 60 रुपए की वृद्धि की गई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युद्ध से पैदा हुए संकट पर स्वयं नजर रख रहे हैं। भारत के विदेश मंत्री तथा प्रधानमंत्री मोदी दुनियाभर के नेताओं के साथ संपर्क में हैं तथा आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए नए मार्ग ढूंढ रहे हैं। अभी तक भारत केवल 27 देशों से ही तेल व गैस की खरीदता था किंतु अब 40 देशों के साथ क्रय सम्बन्ध बनाए जा रहे हैं।

विडंबना है कि विपक्ष इस संकट का उपयोग राजनीति के लिए कर रहा है। विपक्षी दल के नेता, आईटी सेल तथा कार्यकर्ता अपने आकाओं की शह पाकर अफवाह बाज बनकर सड़क पर आ गए हैं। बड़े नेता ऊपर संसद ठप कर रहे हैं और छोटे -बड़े जमाखोरों के साथ मिलकर आम जनमानस का पैनिक बटन दबाकर गैस सिलेंडर के लिए लंबी -लंबी कतारें लगवा रहे हैं। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं जबकि प्रधानमंत्री मोदी व उनकी सरकार की पहल का ही परिणाम है कि ईरान -अमेरिका- ईजरायल जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट से दो भारतीय जहाज शिवालिक और नंदादेवी 927000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत आ रहे हैं। भारत सरकार व अधिकारियों के प्रयास से ही फारस की खाड़ी में सभी भारतीय सुरक्षित हैं ।भारत के 253 नाविक अब तक सुरक्षित वापस आ चुके हैं। भारत सरकार ऊर्जा आपूर्ति और नागरिक सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान दे रही है।प्रधानमंत्री मोदी कैबिनेट की बैठक में अपने मंत्रियों से स्पष्ट कर चुके हैं कि युद्ध का असर आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए।

युद्धकाल में जो लोग भारत की विदेश नीति को फेल बताने वालों को स्मरण रखना चाहिए कि कि जब संघर्ष के कारण उड़ानें प्रभावित होने पर कई ईरानी नागरिक भारत में फंस गए थे भारत ने ही उन्हें ईरान की सहायता से उनके देश पहुँचाया । वहीं युद्ध के बीच 1.72लाख भरतीय सकुशल भारत वापस आए हैं।

भारत सरकार युद्धकाल में जनता को कोई समस्या न हो इसके लिए लगातार कार्य कर रही है किंतु क्या हम सभी नागरिक अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं? परिस्थितियां इसका उत्तर नहीं में दे रही हैं। यदि नागरिक भी कर्त्तव्य बोध से बंधे होते तो आज देश में गैस सिलेंडर को लेकर जो पैनिक मचा हुआ है वह न होता। ऊर्जा संकट की आहट मात्र से अफवाह बाज सक्रिय हो गए और ऐसी अफवाहें उड़ाई गई कि जमाखोरी और कालाबाजारी शुरू हो गई है। जिन घरों मे एक या दो भरे हुए एलपीजी सिलिंडर मौजूद हैं वो भी हल्ला मचा रहे हैं । प्रतिदिन होने वाली सिलिंडर बुकिंग 55 लाख से बढ़कर 75 लाख हो गई। देशभर मे अजीब नजारे देखने को मिल रहे हैं। जो परिवार 853 रुपए का गैस सिलेंडर खरीदने में भार का अनुभव करते थे अब वही लोग चोर बाजार से 3500 तक का सिलेंडर खरीदने की हैसियत दिखा रहे हैं।

समाज मे नैतिकता व सदाचार की कमी के कारण ही जमाखोरी व कालाबाजारी एक सामाजिक बुराई का रूप ले चुकी है । युद्धकाल में देशवासियों का एक बहुत बड़ा वर्ग कर्तव्य से विमुख होकर अपने लिए मुनाफे का अवसर खोज रहा है। अभी भारत का युद्ध से कोई सबंध नहीं है और यह युद्ध भारत से बहुत दूर हो रहा है तब भी जिस प्रकार का पैनिक भारत में हुआ है वह कुछ भारतीयों की ही विकृत मानसिकता को प्रदर्शित कर रहा है। संकट है किंतु अगर कुछ भी कर्त्तव्य बोध होता तो हालात बिल्कुल सामान्य ही रहते। अंततः अब सरकार ने जमाखोरों और कालाबाजारियों पर कार्यवाई आरम्भ कर दी है और उसके नतीजे भी सामने आने लगे हैं।

ईरान -अमेरिका इजरायल युद्ध अभी काफी लंबा चलने की आशंका है तथा हालात अभी और भी खराब ही हो सकते हैं किन्तु भारत ही एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जिसके लिए होमुर्ज स्ट्रेट का रास्ता खोला गया है। सरकार अपना काम कर रही है किंतु अब समय आ गया है कि भारतीय नागरिक भी अपने कर्तव्य का पालन करें और पैनिक न हों।

scroll to top