अजीत भारती के नाम खुला पत्र

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अजीत भारती जी,

आपका पोस्ट पढ़कर लगा कि आपकी पीड़ा गहरी है—न सिर्फ UGC के मुद्दे पर, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी। माँ के निधन के समय मिले आक्षेप किसी भी इंसान को तोड़ सकते हैं। यह दुखद है कि सोशल मीडिया पर बहस अक्सर तर्क से हटकर व्यक्तिगत हमलों में बदल जाती है। आपने जो लिखा, वह स्पष्ट है: आप UGC नियमों को एकतरफा और खतरनाक मानते हैं, जो सामान्य वर्ग के युवाओं के साथ अन्याय कर सकता है। जहां तक मैं समझ पाया हूं, आपका स्टैंड स्पष्ट है—जहाँ हिंदू समाज की एकता, मेरिट का सम्मान और समरसता सर्वोपरि हैं।

UGC के ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ पर आपकी चिंता जायज है। नियमों का उद्देश्य SC/ST/OBC छात्रों की सुरक्षा था—सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों (जैसे Abeda Salim Tadvi केस) से प्रेरित। लेकिन परिभाषाएँ एकतरफा थीं: जातिगत भेदभाव सिर्फ SC/ST/OBC के खिलाफ माना गया, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ पूर्वाग्रह या फर्जी शिकायतों पर कोई संतुलित प्रावधान नहीं। ‘Equity Committees/Squads’ जैसी व्यवस्था, फर्जी आरोपों पर कोई सजा न होना—यह सब कैंपस में डर और अविश्वास पैदा कर सकता था। ‘सवर्ण नरसंहार’ जैसे शब्द भले भावुक लगें, लेकिन लाखों युवा इसे मेरिट की हत्या और सामाजिक विभाजन के रूप में देख रहे थे। विरोध ऑर्गेनिक था—गाँव-गाँव तक फैला, बिना किसी फंडिंग के।

हिंदुत्व का मूल ‘समरसता’ है—जाति से ऊपर उठकर सबको साथ ले जाना। आरएसएस ने भी हमेशा यही संदेश दिया है। लेकिन जब कोई नीति अनजाने में विभाजन बढ़ाती दिखे, तो उस पर सवाल उठाना राष्ट्रहित में है। इतिहास बताता है कि आलोचना से ही सुधार आए हैं—चाहे मंडल आयोग के समय की बहस हो, या हाल के CAA-NRC पर संवाद। UGC पर सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को स्टे दे दिया—नियमों को ‘vague’, ‘capable of misuse’ और समाज को विभाजित करने वाला बताया। 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे, जब तक नए नहीं बनते। यह विरोध और तर्कपूर्ण चर्चा का ही नतीजा है।

आप कहते हैं कि कुछ लोग नीचता पर उतर आए—माँ को लेकर हमले, फंडिंग के झूठे आरोप, पार्टी-एजेंट बताना। यह गलत है। ऐसे तत्व विचारधारा के नहीं, नफरत के हैं। इनकी निंदा होनी चाहिए। आपने विषय को पार्टी या व्यक्ति से ऊपर रखा—अच्छा करेंगे तो अच्छा लिखेंगे, बुरा करेंगे तो बुरा। यही सच्ची राष्ट्रभक्ति है।

अब UGC स्टे पर है, मार्च में सुनवाई है। समय है कि चर्चा तथ्यों पर केंद्रित हो—कानूनी प्रावधानों पर, संतुलित समाधान पर। गाली-गलौज से विषय दब जाता है, जबकि संयमित आवाज़ सुधार लाती है।

संवाद जारी रहना चाहिए। आलोचकों से ही सुधार का रास्ता मिलता है। आपको क्या चाहिए? एक मजबूत, एकजुट हिंदू समाज, मेरिट-आधारित भारत। आपकी आवाज़ महत्वपूर्ण है। व्यक्तिगत हमले बंद हों, तर्क बोलें। सरकार के पाले में गेंद है—लेकिन हमारी जिम्मेदारी भी है कि विरोध सकारात्मक रहे।

सादर

आशीष कुमार अंशु
दिल्ली।

भाजपा को नष्ट करने पर तुले भाजपा के अंधभक्त

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बक्सर (बिहार) : सवाल पूछना एक स्वस्थ लोकतंत्र की जीवनरेखा है, जो जवाबदेही, पारदर्शिता और नागरिक भागीदारी के लिए एक मूलभूत तंत्र का काम करता है। यह सुनिश्चित करता है कि चुने हुए प्रतिनिधि जवाबदेह रहें, सत्ता के केंद्रीकरण को रोकता है और जागरूक नागरिकों को बढ़ावा देता है। स्वतंत्र मीडिया द्वारा समर्थित सवाल पूछने वाली जनता सामूहिक लाभ को बढ़ावा देती है और लोकतांत्रिक लचीलेपन को मजबूत करती है।

भेदभावपूर्ण यूजीसी विनियमन 2026 के बाद से, भाजपा और उसके कट्टर समर्थक (“अंधभक्त”) सवाल उठाने पर रोक लगा रहे हैं, बहस बंद कर रहे हैं और चुप्पी की संस्कृति को सामान्य बना रहे हैं। “अंधभक्तों” की यह छवि सोशल मीडिया पर चल रही तीखी बहसों में साफ झलकती है, जहां ये अंधभक्त भाजपा और मोदी जी के खिलाफ हर जायज सवाल का विरोध कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि भाजपा के आई.टी. सेल ने उनके दिमाग पर कब्जा कर लिया है। राजनीतिक चर्चा सीमित हो गई है, खासकर बेरोजगारी, विकास या सामाजिक सद्भाव जैसे मुद्दों पर पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाने पर, विशेष रूप से भेदभावपूर्ण यूजीसी विनियमन 2026 के बाद से। जाहिर है, भाजपा के ये अंधभक्त इतना जहर घोल रहे हैं कि समय के साथ भाजपा की राजनीति का पतन निश्चित हो जाएगा।
प्रमोशन में आरक्षण — भाजपा
बैकलॉग आरक्षण — भाजपा
मिनिमम मार्क्स कंडीशन हटाई — भाजपा
#SC_ST एक्ट अध्यादेश — भाजपा
सैनिक स्कूल आरक्षण — भाजपा
फूले दम्पत्ति पर डाक टिकट — भाजपा
डॉ. अंबेडकर को भारत रत्न — भाजपा
अंबेडकर जयंती पर अवकाश — भाजपा
200-प्वाइंट रोस्टर — भाजपा
MP में 73% आरक्षण — भाजपा
NEET में 64.5% आरक्षण — भाजपा
पंचायत चुनाव में आरक्षण — भाजपा
पसमांदा आरक्षण — भाजपा
मनरेगा में आरक्षण — भाजपा
प्रधानमंत्री आवास में आरक्षण — भाजपा
बैंक लोन में आरक्षण — भाजपा
#UGC जैसा काला कानून — भाजपा
इतना सब कुछ होने के बाद भी अगर कोई कहे कि भाजपा हिन्दुवादी है तो वह निश्चित रूप से अंधा है।

भाजपा के मतदाता और राष्ट्रवादी हिंदू होने के नाते, मैं मोदी जी से उनके अंधभक्तों के माध्यम से निम्नलिखित प्रश्न पूछने का अधिकार लेता हूँ:-
1) यूजीसी क़ानून तथा “जातिगत आरक्षण” और “कठोर कानून” बनाकर देश के “उद्यमी” वर्ग अर्थात् सामान्य वर्ग को लगातार भय और उत्पीड़न के वातावरण में रहने के लिये आप लोगों ने क्यों बाध्य किया है? हमारी क्या गलती है? कृपया बताने का कष्ट करें ।

2) मोदी जी बड़े अनुभवी हैं आप देश की हित और अहित के मुद्दों को समझते हैं । कृपया प्रकाश डालें कि आप लोगों द्वारा थोपी गई वर्तमान व्यवस्था से क्या देश की शिक्षा व्यवस्था का पूरी तरह से पतन नहीं हो जायेगा? अतः इससे किसको लाभ मिलेगा? कृपया बतायें।

3) आप लोगों ने जिस प्रकार से मेडिकल की पढ़ाई में आरक्षण देकर पूरी चिकित्सा व्यवस्था को ही ख़त्म करने का निर्णय लिया है । जब आप लोगों को इलाज करना होता है तो सदैव श्रेष्ठ चिकित्सक को ही प्राथमिकता देते हैं पर देश के आम नागरिक के साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं?

4) हम सामान्य वर्ग के लोग देश के निचले पायदान पर खड़े अपने बंधु- बांधवों की चिंता करते हैं। आपसे लगातार माँग कर रहे हैं कि उनके किए पढ़ने में सुविधा दीजिए पर आप उन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बजाय आरक्षण जैसे भेद भाव पर आधारित व्यवस्था को हीं लागू करना चाहते हैं, ऐसा क्यों?

5) आपकी वर्तमान निर्णय ने गाँव और देश का वातावरण विषैला बना दिया है। यह साफ़-साफ़ दिख रहा है कि आप लोगों ने देश में डर/भय का वातावरण बनाया हुआ है। बड़े बड़े हिंदू मठाधीशों से लेकर नेतागण भी आप लोगों के अत्याचार के विरुद्ध बोलने की हिम्मत नहीं कर रहे हैं। क्या यह सच नहीं है? क्या ऐसी स्थिति स्व इन्दिरा गांधी द्वारा थोपी गई “आपात काल” में भी थी?

6) हमारा अनुभव कहता है कि केवल “लोभ और भय” हीं आप लोगों के नीति का अटूट हिस्सा है। शायद यहीं कारण है कि कोई विशिष्ट व्यक्ति/संस्थान आपके अत्याचार के ख़िलाफ़ नहीं उठ रहा है ।

7) मीडिया के माध्यम से यह भी ज्ञात हो रहा है कि बीजेपी ने गो-वध करने वाली कंपनियों से चंदा इकट्ठा किया है। अगर यह बात सत्य है तो हम लोगों ने भी आपको वोट देकर सनातन धर्म के विरुद्ध पाप किया है । आपसे अनुरोध है कि इस विषय पर आप अपना पक्ष अवश्य स्पष्ट करें।

8) अगर बीजेपी के अनुसार देश में सामान्य वर्ग की आबादी केवल 15% हैं तो किस अंक गणित के हिसाब से 85% आबादी वाले मुस्लिम, क्रिश्चियन, एससी/एसटी तथा ओबीसी आदि को लोग 15% वालों से असुरक्षित हो गए हैं? आपकी यह सोच देश के लिए घातक है ।

9) आपसे अनुरोध है कि सामान्य वर्ग के लोगों का आबादी के अनुसार उनकी जनसंख्या बतायें। हमारी अंक गणित कहती है कि सामान्य वर्ग के लोगों की संख्या कुल जनसंख्या का 40% के क़रीब है। आप इसे स्पष्ट करें अन्यथा वैकल्पिक जनगणना की योजना बनायी जाएगी ।

10) आपकी सवर्ण विरोधी मानसिकता सभी हदों को पार कर चुका है। क्या अभी तक किसी भी सवर्ण ने किसी जाति या राष्ट्र/धर्म के विरुद्ध कोई नारा दिया है ?

11) दलित, पिछड़े के जाति सूचक नाम लेने से आपको कष्ट होता है जबकि आप दूसरों को जाति सूचक शब्द के साथ अपमानित करवाते हैं , यह अधिकार आपको किसने दिया है???

12) आपने SC/ST एक्ट तथा UGC जैसे कानून इस देश और धर्म को बर्बाद करने के लिए ही बनाया है। हमारी शोध यह कहती है कि जिन वर्गों के लिए आपने यह कानून बनाया है वे भी इसे पसंद नहीं कर रहे हैं। आपको चुनौती दे रहा हूँ, आप अपनी मशीनरी से इसकी जाँच करा सकते हैं ।

13) आदरणीय मोदी जी का वह वक्तव्य याद आ रहा है, वे स्पष्ट कह रहे हैं कि कोई भी नीति हम लोग सोच समझकर और बहुत विचार करने के बाद ही लागू करते हैं। इसका अर्थ है कि भेदभावपूर्ण यूजीसी विनियमन 2026 सरकार द्वारा सुविचारित विनियमन है ।

महिमा मंडन, चरित्र हनन और विक्टिमहुड

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देवांशु झा

दिल्ली। जयपुर में कचौरी की हाई-फाई दूकान खोलने वाले वरिष्ठ पत्रकार अभी विक्टिमहुड के श्रेष्ठ उदाहरण बन गए हैं। जबकि वे स्वयं ऐसा कुछ नहीं कह रहे हैं। उन्हें जो करना था, वह कर चुके। वह जो भी कर रहे, सोच समझकर कर रहे हैं। ऊंची-ऊंची संस्थाओं के बड़े ऊंचे-ऊंचे पदों पर रहे हैं। पैंसठ की वय है। घोषित व्यवस्था विरोधी थे। खैर, वह एक भिन्न विषय है।

अभी जो लोग मोदी के समर्थन में हैं,वे आईटी सेल के चूतिया, चाटुकार,अंधभक्त हैं! यह आईटी सेल कहां है, कौन उसका नियंता है, मैं नहीं जानता। मैं बिलकुल नहीं जानता। बहुत सारे संघ समर्थक पत्रकारों को चेहरा चमकाते हुए देखता हूॅं। अलग अलग मंचों से लेकर चैनल तक जाते हैं। नेताओं की चिट्ठियां पाते हैं। उन्हें लगाते हैं। कुछ लोग चुपचाप इस विश्वास के साथ काम करते हैं कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा और हिन्दुत्व की राजनीति का पुरोधा आत्मघात कर सर्वनाश नहीं कर सकता। मैं भी उनमें से एक हूॅं। परन्तु जब इस तरह के निजी हमले झेलता हूॅं तो मन व्यथित हो जाता है।

ध्यान रहे! मैं संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में जाकर उनकी ही आलोचना कर देता हूॅं।‌ इसलिए संघ से जुड़े महानुभाव मुझे बुलाते हुए श्रोता के रूप में ही प्रतिष्ठित करते हैं। उनके महान साहित्यकारों और पत्रकारों की सूची में मेरा नाम नहीं आता। न ही आए तो ही अच्छा। मुझ में उनकी प्रशस्ति की कोई आकांक्षा नहीं है। रत्ती भर भी नहीं। मैं सर्वथा स्वतंत्र आत्मा, लगभग आवारा हूॅं। परन्तु मर्यादा नहीं भूलता। घोर आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी खखोर बटोर लेने का सपना नहीं देखता।

कहना आवश्यक नहीं कि आप मेरे जीवन संघर्ष के बारे में कुछ नहीं जानते। कुछ भी नहीं। इसलिए बकवास बंद कर दीजिए। मेरे जीवन का ताप आप अनुभव नहीं कर सकते। मैं तो किसी पार्षद को भी नहीं जानता। न जानने की इच्छा है। न पांच अकाउंट नंबर चमकाते हुए चंदा मांगता हूॅं। मुझे गले में चद्दर लपेट कर फोटो खिंचवाने की कोई चाह नहीं है ना ही मैं चैनल के चूचुहार में जाता हूॅं। न्योते बहुत आते रहे। मना कर दिया। अब कोई फोन नहीं करता।

मैं एक मुंहफट पत्रकार रहा हूॅं। अभद्र नहीं। मैं अपने प्रोफेशन से न्याय नहीं कर पाया। छोड़कर आ गया। मैं कभी किसी संस्थान, संपादक को दोषी नहीं ठहराता। दोषी मैं ही हूॅं।‌ किसी दिन मैं भी पकौड़ी की दूकान लगा सकता हूॅं। मैं क्या करूंगा, कोई नहीं जानता। न मेरी मां जानती हैं न मेरी पत्नी। मैं हिन्दू चेतना की बात करता हूॅं। हो सकता है, मैं आपकी तरह वर्तमान संकट को नहीं देख पा रहा। मेरी कमी है। परन्तु आप मुझे सरकार पोषित नहीं कह सकते। यह मेरे लिए मां की गाली है।‌

समय निर्णय करेगा, मैं सही था या गलत।‌ आप उसके निर्णायक न बनिए।‌ निर्णायक ईश्वर हैं। पत्रकारिता धर्म सिखाने का कष्ट उठाना भी व्यर्थ होगा। मैं खराब पत्रकार रहा हूॅं। एक लेखक के रूप में मेरी भ्रूण हत्या हो चुकी है!

(सोशल मीडिया से साभार)

युवाओं व नारी सशक्तीकरण को समर्पित है यूपी बजट

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लखनऊ: विगत कुछ माह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनसमुदाय को सरकार के निर्णयों से अवगत कराने के लिए पाती लिखने का अभिनव प्रयोग कर रहे हैं। इस बार बजट के बाद लिखी अपनी पाती में उन्होंने उत्तर प्रदेश के वित्त वर्ष 2026-27 के बजट की विशेषताओ पर प्रकाश डाला है। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि यह बजट युवाओं व नारी शक्ति के लिए एक ऐतिहासिक बजट है। उत्तर प्रदेश का यह बजट नवाचार का बजट है। नवनिर्माण के 9 वर्षों की यह यात्रा प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

मुख्यमत्री योगी पूर्व में भी कह चुके हैं कि विगत नौ वर्षों में यूपी असीमित क्षमताओं वाला प्रदेश बन चुका है।इस बजट में युवाओं को रोजगार उपलबध कराने के लिए एमएसएमई, स्टार्टअप, ओडीओपी और स्थानीय उद्यमों को विकसित करते हुए वृहद निवेश की नई योजनाओं को प्रारंभ करने का प्रावधान किया गया है। उभरती हुई नयी तकनीकीकी कई बड़ी घोषणाएं हुई हैं। प्रदेश में पहली बार स्टेट डेटा अथारिटी का गठन करने की ऐतिहासिक पहल की गई है। यह प्रदेश में वास्तविक समय पर आंकड़ों के संग्रह और इसके अनुश्रवण के साथ भविष्य की योजनाओं को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। उत्तर प्रदेश एआई मिशन, एआई डेटा लैब, एआई सेंटरऑफ एक्सीलेंस तथा डेटा सेंटर क्लस्टर प्रदेश को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी एआइ एवं डीप टेक के क्षेत्र में एक एक नए वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होंगे। बजट के अनुसार ”टेक युवा समर्थ युवा” योजना के अंतर्गत 25 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जायेगा।

बजट में एआई को प्राथमिकता दी गई है जिसके लिए 225 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत प्रदेश की 49 आईटीआई में एआइ लैब स्थापित की जाएगी। एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एआई ठेटा लैब की स्थापना के लिए 32.32 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। साइबर सुरक्षा को भी बजट में अहम स्थान मिला हे। प्रदेश में पहली बार स्टार्ट अप इन्क्यूबेटर हब बनने जा रहा है इस कार्य के लिए 30 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यू -हब का मुख्यालय लखनऊ और दूसरा इन्क्यूबेटर गौतमबुद्धनगर में बनाया जाएगा। यू -हब से ऐसे स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाएगा ।राजधानी के परिषदीय विद्यालयों को एआई से जोड़़ा जाएगा। स्मार्ट कक्षाओं में छात्रों को परंपरागत के साथ आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा मिलेगी।

युवाओ के लिए रोजगार के नए क्षेत्रो का सृजन किया जा रहा है। हथकरघा, पावरलूम और गारमेंटिंग सेक्टर में रोजगार सृजन पर विशेष बल दिया गया है। वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में 30 हजार रोजागर सृजन का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग योजना के अंतर्गत वर्ष 2026 -27 में 800 इकाइयों की स्थापना कर 16हजार लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य है। पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत उत्पादन के लिए 10 करोड़ और खजनी गोरखपुर स्थित कम्बल उत्पादन केंद्र के आधुनिकीकरण के लिए भी पर्याप्त धन की व्यवस्था की गई है।

युवाओ के लिए पर्यटन के माध्यम से भी रोजगार सृजन करने की व्यवस्था बजट में की गई है । इसके लिए युवा पर्यटन क्लब बनाए जाएंगे। युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। गोरखपुर में स्टेट इंस्टीटयूट ऑफ होटल मैनेजमेंट की स्थापना की जाएगी और फूड क्राफ्ट इंस्टिट्यूट अलीगढ़ को उच्चीकृत कर स्टेट इंस्टीटयूट ऑफ होटल मैनेजमेंट बनाया जाएगा। वहीं युवा पर्यटन क्लबॉन के लिए तीन करोड़ का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत निःशुल्क कोचिंग व्यवस्था तथा मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम से युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खुल रहे हैं। बजट मे एमएसएमई सेक्टर को पर्याप्त धन मिलने से लघु सूक्ष्म और मध्यम उद्यम को बढ़ावा मिलने से युवाओ के लिए रोजगार और नौकरी के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। युवाओ के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए मंडल मुख्यालय वाले प्रत्येक जनपद में खेल विद्यालय व मैदान बनाने की योजना है जिसके अंतर्गत 2030 के कामनवेल्थ गेम्स एवं 2036 के ओलंपिक के लिए प्रतिभाओं को निखारा जाएगा।

महिला एवं बाल विकास के लिए कुल 18,620 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के लिए महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना, महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना एवं जनपद स्तर पर श्रमजीवी महिला छात्रावास प्रस्तावित है। बजट मे मुख्यमंत्री महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना के लिए 100 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है जबकि महिला क्रेडिट कार्ड योजना के लिए 151.04 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। इसके तहत महिलाओं को ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। महिला सामर्थ्य योजना के अंतर्गत गोरखपुर, बरेली और रायबरेली में दुग्ध कंपनियों का गठन कर दुग्ध संग्रहण व विपणन का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। निराश्रित महिला पेंशन योजना में 3500 करोड़ रुपए, छात्रावासो के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास निर्माण योजना के लिए 35 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लिए 252 करोड़ रुपए और मुख्यमंत्री बाल आश्रय योजना के अतंर्गत भवन निर्माण के लिए 80 करेड रुपए का प्रावधान किया गया है।

बजट में इस बार धन का आवंटन इस प्रकार से किया गया है यदि सरकार आगे कोई बड़ी योजना घोषित करती है तो उसके लिए भी पर्याप्त धन उपलब्ध रहे जैसे किअभी बुजुर्ग और वृद्ध महिलाओ के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि करने से लेकर 60 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी महिलाओं के लिए सरकारी बसों में निःशुक्ल यात्रा की व्यवस्था प्रस्तावित है।नवरात्रि के अवसर पर विशेष अभियान चलाये जाते हैं जिनके लिए धन की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
प्रदेश सरकार के बजट को लेकर महिलाओं का कहना है कि इस बर के बजट से बेटियों की पढ़ाईसे लेकर विअव्ह तक की चिंता कम होरही है। यह बजट गरीब महिलाओं को व्यापक रूप से सहारा देने वाला है। इस बजट से कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढे़गी। स्वयं सहायता समूहो के लिए की गई घोषणाओं से महिला समूह के उत्पादों को बाजार दिलाने से गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी।

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