जाति, धर्म और VIP संस्कृति का काला साया!”

images-7.jpeg

दिल्ली । क्या अंग्रेजों ने भारत को जल्दबाज़ी में आज़ादी देकर गलती की? क्या गांधी जी की असमय मृत्यु ने लोकतंत्र की नींव को डगमगाया? क्या कांग्रेस को स्वतंत्रता के बाद भंग कर देना चाहिए था? क्या भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने से चीज़ें बेहतर हो जातीं? और सबसे बड़ा सवाल — क्या भारत लोकतंत्र का हकदार है?

ऐसे तीखे प्रश्न अक्सर तब उठते हैं जब लोग व्यवस्था से निराश, हताश और क्रुद्ध होते हैं। जब नेताओं और अफसरों की VIP संस्कृति लोकतांत्रिक मूल्यों का खुला मज़ाक उड़ाती है, तब कई उदारवादी मानने लगते हैं कि भारत लोकतंत्र से नहीं, बल्कि तांत्रिक व्यवस्था से चल रहा है — यानी राम भरोसे।

समाजवादी चिंतक PN चौधरी के मुताबिक, “हम आज भी जाति, धर्म और भाषा के आधार पर लड़ रहे हैं, जबकि कई देशों ने इस अंधकार से निकल कर प्रगति की राह पकड़ ली है। जब सामाजिक सोच और व्यवस्थाएं बीमार हों, तो चंद नेता कब तक इंजन बनकर गाड़ी को मंज़िल तक खींच सकते हैं?क्या कहीं लिखा है कि संसदीय लोकतंत्र ही सबसे श्रेष्ठ प्रणाली है? भारत में लोकतंत्र की सफलता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। क्या बार-बार चुनाव कराना ही लोकतंत्र की मजबूती है? या फिर समाज और व्यवस्थाओं का वास्तविक लोकतांत्रिकरण भी उतना ही ज़रूरी है?”

आज हमारा लोकतंत्र केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित होकर रह गया है। लोकतंत्र की आत्मा तब जीवित होती है जब सोच समावेशी हो, मानसिकता संकीर्णताओं से ऊपर उठी हो और संस्थाएं पारदर्शिता तथा जवाबदेही का पालन करें, कहते हैं राजनैतिक विश्लेषक वेंकट सुब्रमनियन।

लेकिन भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी कमजोरी है — सामंती मानसिकता और VIP संस्कृति, जो हर स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों का मखौल उड़ाती है।

मथुरा रोड की एक घटना इसका जीता-जागता उदाहरण है। पिछले सप्ताह, एक CNG पंप पर लोग कतार में खड़े थे, तभी एक पुलिस अफसर की गाड़ी आई और सारे नियम-कानून दरकिनार कर दिए गए। पंप मैनेजर, जो नियमों की दुहाई दे रहा था, अचानक “जी हुक़्म” कहते हुए अफसर की गाड़ी में गैस भरने लगा।

यह एक पंप की कहानी नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतिबिंब है जिसमें ताक़तवरों के लिए नियम अलग हो जाते हैं। आम आदमी की आवाज़ दबा दी जाती है, और रसूख को प्राथमिकता दी जाती है। टैक्सी ड्राइवर की बात याद आती है — “समरथ को नहीं दोष गोसाईं!”

रिटायर्ड सीनियर ब्यूरोक्रेट बी पांडे दर्द भरे सुर में कहते हैं, “लोकतंत्र केवल मतपेटी तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह एक संस्कृति है — समानता, जवाबदेही और पारदर्शिता की संस्कृति। लेकिन आज भी हमारे समाज में जाति, धर्म, क्षेत्र और वर्ग के आधार पर वोट डाले जाते हैं। मतदाता “हमारा आदमी” देखकर वोट देता है, न कि नीति और विकास देखकर। यही मानसिकता लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करती है।”

आज नौकरशाही बेलगाम है, सांसद जवाबदेही भूल जाते हैं, और आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं होती। कहीं राशन कार्ड बनवाने के लिए “जुगाड़” चाहिए, तो कहीं अस्पताल में बेड के लिए “ऊपर से फोन” लगाना पड़ता है। यह सिफारिशी संस्कृति लोकतंत्र को दीमक की तरह खा रही है।

एक शिक्षक को ट्रांसफर रुकवाने के लिए विधायक की सिफारिश लेनी पड़ी, जबकि एक किसान बैंक से कर्ज़ पाने के लिए महीनों चक्कर काटता रहा — और वहीं पार्टी कार्यकर्ता को एक फोन पर लोन मिल गया। क्या यह लोकतंत्र है या पक्षपात का तंत्र?

सबसे बड़ा संकट है — जाति और धर्म की राजनीति। चुनाव आते ही नेता समाज को बांटने में लग जाते हैं — कोई “हिंदू खतरे में है” चिल्लाता है, तो कोई “अल्पसंख्यक कार्ड” खेलता है। “बांटो और राज करो” की ये नई परंपरा लोकतंत्र की आत्मा को कुचल रही है।

स्कूल टीचर मीरा कहती हैं, “हम अधिकारों की बात तो खूब करते हैं, लेकिन क्या अपने कर्तव्यों के प्रति सजग हैं? ट्रैफिक नियम तोड़ना, टैक्स चोरी करना, भ्रष्टाचार में चुपचाप हिस्सेदार बनना — और फिर सिस्टम को कोसना, ये कैसा दोहरापन है?”

लोकतंत्र केवल संविधान की जिम्मेदारी नहीं, हमारी भी साझी जवाबदेही है। अगर हम सच में लोकतंत्र को मजबूत देखना चाहते हैं, तो हमें जातिगत ज़हर, धार्मिक उन्माद और VIP संस्कृति से मुक्ति पानी होगी। अब वक्त है कि हम केवल तमाशबीन न बनें, बल्कि इस प्रणाली के जिम्मेदार साझेदार बनें।

अजीत अंजुम, तेजस्वी के लिए सूत्र हैं या मूत्र

3-7.jpeg

बिहार की सियासी गलियों में इन दिनों एक नया तमाशा जोर पकड़ रहा है। तेजस्वी यादव, बिहार के ‘युवराज’ और राजद के चिराग, ने पत्रकारों के सूत्र को ‘मूत्र’ कहकर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया। और इस तंज के केंद्र में मीडिया स्कैन ले आया है, हमारे अपने यू ट्यूबर अजीत अंजुम को। जिनकी बेचैनी अब बिहार की हवा में तैर रही है।

सवाल ये है कि अजीत जी, आप तेजस्वी के लिए सूत्र हैं या मूत्र? तेजस्वी ने तो साफ नहीं किया, लेकिन बिहार की जनता को चेतावनी दे दी कि ऐसे ‘मूत्रों’ से सावधान रहें। अब ये मूत्र है क्या बला? और अजीत जी इसमें कहां फिट बैठते हैं?

अजीत अंजुम, पत्रकारिता के वो ‘शहंशाह’ जिनके यूट्यूब चैनल पर बिहार से लेकर बेरूत तक की खबरें तैरती हैं, इन दिनों तेजस्वी उन्हें लेकर चिंतित हैं। अजीत पर बेगुसराय में एक अल्पसंख्यक मोहम्मद अंसारूलहक ने एफआईआर किया है। कांग्रेस भी इस बात पर चिंतित है कि अजीत को कुछ ना हो जाए। जबकि अजीत अंजुम भूमिहार है। एक भूमिहार को कांग्रेस और राजद सपोर्ट कर रही है, ऐसी स्थिति में जब एफआईआर करने वाला एक अल्पसंख्यक हैं। चुनावी साल में एक ‘वफादार सूत्र’ के लिए राजद और कांग्रेस कितना बड़ा खतरा मोल ले रही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि पार्टी के ‘सूत्र’ भर नहीं हैं। तेजस्वी के लिए वे उससे आगे हैं।

तेजस्वी की नजर में क्या अजीत जी वो ‘सूत्र’ हैं, जो सियासी गलियारों से खबरें लाते हैं, या फिर वो ‘मूत्र’, जो उनकी छवि को धोने, पोछने और चमकाने की कोशिश में बिहार आए हैं। बेचारे अजीत जी! एक तरफ पत्रकारिता की मर्यादा, दूसरी तरफ तेजस्वी का तंज। अब वो बेचैनी जाहिर करें तो करें कैसे?

बिहार में एफआईआर की खबरें हों या कांग्रेस-राजद की सियासी हलचल, अजीत जी की ‘सूत्र-शक्ति’ हर जगह चर्चा में है। मगर तेजस्वी को लगता है कि ये सूत्र नहीं, कुछ और ही है। सोशल मीडिया पर कांग्रेस आईटी सेल और उससे जुड़े पत्रकारों की बेचैनी देखिए। लगता है जैसे कोई बड़ा राज खुलने वाला हो। अजीत जी, आप तो बिहार की जनता को सच दिखाने की बात करते हैं, लेकिन तेजस्वी कहते हैं, ”सावधान! ये मूत्र है!”

अब जनता कन्फ्यूज है कि वो आपकी खबरों को सूंघे या संभाले। बिहार की सियासत में ये नया ‘मूत्र-युद्ध’ छिड़ गया है, और अजीत जी, आप इसके बीचों-बीच खड़े हैं। तो अजीत जी, अब समय है साफ करने का—आप सूत्र हैं या मूत्र? अगर सूत्र, तो बिहार की जनता को सच दिखाइए। और अगर मूत्र, तो तेजस्वी की सलाह मानिए, थोड़ा सावधान रहिए! बिहार की हवा में ये गंध अब ज्यादा देर नहीं टिकेगी।

Resolution by the Cabinet welcoming Return of Group Captain Shubhanshu Shukla from International Space Station.

images-2-1.jpeg

Delhi : On 15th July 2025, Group Captain Shubhanshu Shukla has landed back safely on earth from his space journey, representing infinite aspirations of India. This is a moment of pride, glory and joy for the entire nation.

The Cabinet joins the nation in celebrating the return of Group Captain Shubhanshu Shukla to Earth, following thesuccessful completion of his historic 18-day mission aboard the International Space Station.

Launched on 25th June 2025, with Group Captain Shubhanshu Shukla as Mission Pilot, this mission marked a watershed moment – the first time an Indian astronaut travelled to the International Space Station. It heralds a new chapter in India’s space programme and gives a golden glimpse of our future space programme.

The Cabinet commends the Indian Space Research Organisation and the entire community of our scientists and engineers whose relentless efforts have made this achievement possible.

During his time aboard the International Space Station, Group Captain Shukla worked seamlessly with fellow members of the Axiom-4 Crew and Expedition 73, embodying India’s growing leadership ininternational space cooperation.

He conducted pioneering experiments in microgravity on subjects such as muscle regeneration, algal and microbial growth, crop viability, microbial survivability, cognitive performance in space, and the behaviour of cyanobacteria. These studies will deepen global understanding of human spaceflight and microgravity science, and provide criticalinputs for India’s future missions.

This successful mission significantly elevates India’s global standing in space exploration. It is a vital stepping stone towards India’s own human spaceflight ambition, including the Gaganyaan and the Bharatiya Antariksha Station. It reaffirms India’s resolve to be at the forefront ofhuman space exploration.

The Cabinet applauds the visionary and decisive leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi, whose strategic foresight, unwavering belief in India’s space potential, and consistent guidance have enabled the country to chart new frontiers and emerge as a leader among spacefaring nations.

The Cabinet also recalls with pride India’s recent landmark achievements, including the historic landing of Chandrayaan-3 near the South Pole of the Moon on 23rd August 2023, a day etched in history as India’s National Space Day. Likewise, India’s Aditya-L1 Mission launched in 2023 has significantly enhanced humanity’s understanding of solar activity. These feats reflect the spirit of scientific excellence and national self-reliance.

Through sustained reforms in the space sector, the Government has unlocked unprecedented growth in India’s space economy. The emergence of around 300new start-ups in this sector has not only led to job creation at a large scale, but also nurtured a vibrant ecosystem of innovation, entrepreneurship and technology-driven development.

Group Captain Shubhanshu Shukla’s mission is not just a personal triumph – it is a beacon of inspiration for a new generation of young Indians. It will ignite the scientific temper, fuel curiosity, and inspire countless youth to pursue careers in science and embrace innovation.

The Cabinet reaffirms its firm conviction that this mission will energise the national resolve to build Viksit Bharat—a Developed India—by 2047, as envisioned by the PrimeMinister.

उदयपुर के महाराजकुमार साहिब डॉ. लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ ने किया ‘भारतमाता’ कॉफ़ीटेबल बुक का विमोचन

3-6.jpeg

उदयपुर। ‘‘भारतमाता आदिशक्ति जगदम्बा का मूर्त्तिमान स्वरूप है। भारतमाता एक देवी के रूप में भारत का राष्ट्रीय व्यक्तित्व है। मेवाड़ राजवंश की कुलदेवी राजराजेश्वरी बाण माता जी को उसी रूप में कवर पेज पर स्थान दिया है। भारतमाता ही वह दिव्य प्रेरणा और शक्ति है जो अनन्त काल से हमारे देशवासियों को जाति, धर्म और प्रांत की सीमाओं से परे उठाकर एकजुटता के सूत्र में बाँधे रखा है तथा युगों-युगों तक बाँधे रखेगी। सम्पूर्ण मानवता को परमेश्वर के समीप ले जाने का सर्वोत्तम मार्ग भारतमाता की गहन भक्ति से प्राप्त हो सकता है।’’ ये बातें महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन के न्यासी तथा उदयपुर के महाराजकुमार डॉ. लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ ने वरिष्ठ पत्रकार, इतिहासविद् और लेखक गुंजन अग्रवाल द्वारा सम्पादित ‘भारतमाता : चित्रकला, स्थापत्य एवं साहित्य में अभिव्यक्त भारतीय राष्ट्रवाद’ शीर्षक कॉफ़ीटेबल बुक के विमोचन के अवसर पर कहींl उन्होंने कहा कि मेवाड़ के शासक बाणमाताजी के अनन्य उपासक थे, उन्होंने शिल्पकला, वास्तुकला, संगीतकला, स्थापत्यादि भारतीय कला विद्याओं को फलने-फूलने के सम्पूर्ण सुअवसर प्रदान किये।

इस अवसर पर महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मयंक गुप्ता ने बताया कि गुंजन अग्रवाल द्वारा सम्पादित यह पुस्तक भारतमाता के प्रति श्रद्धा और इसके संरक्षण में अपना सर्वस्व न्यौछावर की भावना को बलवती करती है। यह पुस्तक नयी पीढ़ी को राष्ट्रवाद की भावना से लाभान्वित करेगी।

इस अवसर पर कॉफ़ीटेबल बुक के सम्पादक और लेखक गुंजन अग्रवाल ने कहा कि भारतमाता हमारे देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक है जो सदियों से भारतीय चित्रकला, मूर्तिकला और साहित्य में अभिव्यक्त की जाती रही है।

उल्लेखनीय है कि तीन सौ छत्तीस पृष्ठों के इस बृहदाकार कॉफीटेबल बुक में सन् 1885 से 2020 ई. के मध्य अनेक ज्ञात-अज्ञात चित्रकारों द्वारा निर्मित भारतमाता के करीब ढाई सौ चित्रों, जिनमें पेण्टिंग्स, प्रिण्ट्स और पोस्टर्स शामिल हैं, संकलित किया गया है। इसी के साथ इस ग्रन्थ में भारतमाता विषयक प्राचीन निबन्धों, गीतों, कविताओं व उद्धरणों तथा देश के अनेक स्थानों पर विद्यमान भारतमाता-मन्दिरों के विषय में भी सचित्र और प्रामाणिक जानकारी दी गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परम पूजनीय डॉ. मोहनराव भागवत ने इस कॉफ़ीटेबल बुक की प्रस्तावना लिखी है। ग्रंथ का प्रकाशन महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के सहयोग से वैदिक पब्लिशर्स ने किया है।

scroll to top