डोनाल्ड ट्रम्प की कैसी होगी मुस्लिम दुनिया ?

4275640-ani-20250101111802.webp.jpeg.webp

आचार्य श्रीहरि

डोनाल्ड ट्रम्प की कैसी होगी मुस्लिम दुनिया? इस प्रश्न को लेकर मुस्लिम मीडिया, ईसाई मीडिया और यूरोपीय मीडिया में मंथन चल रहा है। क्या थोडा नरम पडेंगे या फिर और मर्म होंगे? थोडा डर भी है। मुस्लिम दुनिया भी डरी हुई है। हमास, तालिबान और अलकायदा से लेकर आतंक के संरक्षक मुस्लिम देश भी डरे हुए हैं। शपथग्रहण के पूर्व से ही डर का असर तो दिख रहा है। विरोधी अपनी दुकानें समेटने में लगे हुए हैं, विरोधी अपनी पिछली करतूतो को ढकने में लगे हुए हैं, विरोधी जो चतुर्य थे वे पहले ही रंग बदल लिये हैं, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि उनकी जय-जय कार करने में लगे हुए हैं। कुख्यात और कुचर्चित रिशर्च कंपनी हिंडनबर्ग अपनी दुर्गति कराने और अपने अपमान के भय से अपना बोरिया-विस्तर समेट लिया, ईरान ने हवा का रूख पहचाना और घोर तथा हिंसक, युद्धक इस्राइल विरोध की सोच को नरम कर लिया, बांग्लादेश सहित उन तमान मुस्लिम देशों में जहां पर अराजकता और मजहबी हिंसा अमानवीय हुई वहां पर भी बदलाव देखा जा रहा है, उनके आखों के सामने डोनाल्ड ट्रम्प की चौधरी वाली लाठी नांच रही है, तालिबान जैसी हिंसक और विध्वंशक शक्ति ने भी अपनी पाकिस्तान भक्ति छोडकर तटस्थता की सोच प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है। समर्थक तो उत्साह से भरे ही हैं, वे उछल-कूद भी कर रहे है। समर्थको ने डोनाल्ड ट्रम्प को फिर से राष्ट्रपति बनाने के लिए जेल की यात्राएं करने से भी नहीं डरे थे, हवाइट हाउस पर कब्जा करने से नहीं डरे थे, चुनाव प्रचारों के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प पर हुए हमले के बाद भी नहीं डरे समर्थक। समर्थकों का कहना है कि ईसाई राष्ट्रवाद को इस तरह से शक्तिशाली बनाओ और समृद्ध करों की अन्य राष्ट्रीयताएं खुद ही अपना अस्तित्व खो दे। डोनाल्ड ट्रम्प के शपथ ग्रहण के साथ ही साथ दुनिया की कूटनीति में परिवर्तन दिखेगा और खासकर मुस्लिम दुनिया के खिलाफ डोनाल्ड ट्रम्प की आक्रमकता धमाल मचायेगी।

                     समर्थक कौन हैं? उनकी प्राथमिकताएं क्या हैं? वे किस लक्ष्य के प्रति अति सक्रिय हैं? सबसे पहले यह जानना होगा कि डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थक ईसाई राष्ट्रवादी हैं, उनकी प्राथमिकताएं ईसाई अस्मिता का संरक्षण करना है और उनकी अति सक्रियता मुस्लिम हिंसक आबादी को अमेरिका से बाहर करने या फिर मुस्लिम आबादी की हिंसक आतंकवाद और जिहाद की मानसिकता को नियत्रित करना और मुस्लिम आबादी को अमेरिका में प्रवेश को प्रतिबंधित कराना है। डोनाल्ड ट्रम्प की पिछली हार एक आघात की तरह था और समर्थ्रक वर्ग उस हार को पचा नहीं पाये थे, स्वीकार ही नहीं कर पाये थे, वे गुस्से में हवाइट हाउस तक कब्जा करने की हिंसक कोशिश की थी। चार सालों तक समर्थक डोनाल्ड ट्रम्प के पीछे बहादुरी के साथ खडे रहे हैं, जनसमर्थन देते रहे और डेमोक्रेट पार्टी के राष्ट्रवाद के परिपेक्ष्य में उदारवाद के खिलाफ लडाई लडते रहे। यही कारण है कि डोनाल्ड ट्रम्प का हौसला बना रहा और अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं को गति प्रदान करते रहे। फिर से राष्ट्रपति का चुनाव जीत कर डोनाल्ड ट्रम्प ने इतिहास रच दिया। डोनाल्ड ट्रम्प की जीत को ईसाई राष्ट्रवाद की जीत मानी गयी और मुस्लिम राष्ट्रवाद की हार मानी गयी थी। यह कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रम्प अपने अंतिम काल में मुस्लिम अस्मिता का संहार जरूर करेंगे। इसके पीछे कारण भी हैं। राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मस्जिदों से सरेआम अंजान दिया जाता था कि डोनाल्ड ट्रम्प से इस्लाम को खतरा है, इसलिए डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ मतदान करना चाहिए, इसके साथ ही साथ दुनिया भर के मुस्लिम संगठन अपने-अपने तरीके से डोनाल्ड ट्रम्प की जीत को रोकने के लिए अभियान रत थे। फिर भी डोनाल्ड ट्रम्प की धमाकेदार जीत हुई।

                    डोनाल्ड ट्रम्प को मुस्लिम आबादी और मुस्लिम देशों से खुन्नश क्या है? कोई भी देश अपनी मूल सभ्यता और संस्कृति को खतरे में नहीं डालना चाहता है। अपनी संस्कृति और सभयता की समृद्धि को संरक्षित देखना चाहता है। इस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति सिर्फ अमेरिका में नहीं देखी जा रही है। इस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति भारत में स्थायी तौर पर भूमिका निभा रही है। नरेन्द्र मोदी खुद अपनी मूल संस्कृति की अस्मिता और समृद्धि के बल पर शासक बने हुए हैं और दो बार पूर्ण बहुमत हासिल करने का पराक्रम दिखा चुके हैं। यूरोप के कई देशों में मूल संस्कृति की भूमिका प्रबंल रहती है। अरब देश अपनी मुल संस्कृति के सामने अन्य संस्कृतियों का हिंसक संहार करते हैं, शिकार करते हैं। निश्चित तौर पर अमेरिका में ईसाई संस्कृति की समृद्धि रही है, ईसाइयों ने अमेरिका संवारा और समृद्ध किया, दुनिया पर शासन करने की शक्ति बनायी। लेकिन समस्या उत्पन्न तब हुई जब मुस्लिम आबादी दया और करूणा को भूल गयी, अपने संरक्षण कर्ता को भूल गयी। अमेरिका ने मानवाधिकार के नाम पर मुसलमानों को शरण दिया, मुसलमानों को सभ्य बनाने के लिए अपनी अर्थव्यवस्था झोकी और अपने देश की मूल आबादी के भविष्य को नजरअंदाज किया फिर भी मुस्लिम आबादी सभ्य नहीं बनीं, अपनी जिहाद की मानसिकता से मुक्त नहीं हो सकी, भस्मासुर बनने की भूमिका से अलग नहीं हो सकी। मुस्लिम आबादी की संहारक भूमिका का प्रमाण अमेेरिकी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले थे। उसके बाद अमेरिका के अंदर ईसाई और मुस्लिम राष्ट्रीयता एक दूसरे के खिलाफ खडी हो गयी। कई आतंकी घटनाओं में मुस्लिम आबादी की सक्रियता, मस्जिदो की बढती संख्या और अजान के शोर से अमेरिका के अंदर विखंडन की आवाज सुनाई पडने लगी। डोनाल्ड ट्रम्प इन्ही मुस्लिम विखंडन की आवाज के खिलाफ सशक्त हस्ती बन कर सामने खडे हो गये। अपने पहले कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया के हिंसक और आतंकी देशों के मुस्लिम आबादी पर अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था और आतंरिक स्तर पर भी मुस्लिम आबादी की आतंकी मानसिकता को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाये थे। इस कारण उनकी छबि मुस्लिम आबादी विरोधी बन गयी थी।

                   मुस्लिम गोलबंदी को डोनाल्ड ट्रम्प चुनौती जरूर देंगे, सिर्फ चुनौती ही नही देंगे बल्कि मुस्लिम गोलबंदी का शिकार भी करेंगे, उन्हे अमेरिकी चौधराहट का पाठ भी पढायेंगे। राष्ट्रपति का चुनाव जीतते के साथ ही साथ उन्होंने मुस्लिम दुनिया को शख्त संदेश दे दिया था कि हिंसा और आतंक से अमेरिकी हितो का नुकसान नहीं होने दिया जायेगा। इस्राइल के साथ अमेरिकी हित जुडे है, अमेरिका का दोस्त इस्राइल है। इस्राइल के पीछे मुस्लिम गोलबंदी किस तरह पीछे पडी रहती है, यह भी जगजाहिर है। इस्राइल के खिलाफ हमास का हमला कितना भयानक और विभत्स था, यह भी बताने की जरूरत नहीं है। जो बाइडन थोडा नरम था, इस्राइल के हाथ बांधकर रखना चाहते थे। डोनाल्ड ट्रम्प ने इस्राइल को खुली छूट दी और हमास का संहार के लिए तैयार रहने के लिए कह दिया। इसका नतीजा भी सामने आ गया। हमास की हेकडी टूट गयी। उसे पता चल गया कि ईरान उसकी सहायता नहीं कर पायेगा। ईरान भी डोनाल्ड ट्रम्प की शख्त नीति का भुक्तभोगी है, इसलिए ईरान ने भी हमास प्रकरण पर टांग अडाने का कोई प्रयास नहीं किया। इसका सुखद परिणाम यह निकला कि हमास ने इस्राइली बंधकों को रिहा करने के लिए तैयार हो गया। इधर सीरिया में भी डोनाल्ड ट्रम्प की नीति का डंका बजने वाला है। सीरिया में भी वही होगा जो डोनाल्ड ट्रम्प की इच्छा होगी।

                       मुस्लिम दुनिया के दो स्वयं भू नेता है। एक ईरान है और दूसरा सउदी अरब है। सउदी अरब तो अमेरिका का मित्र है। पर ईरान अपने आप को अमेरिका विरोधी बताता है। परमाणु प्रसार के प्रश्न पर ईरान अकड कर चलता है। ईरान की समस्या यह है कि वह एक शिया देश है, सुन्नी देश ईरान के पक्षधर नहीं है। ईरान के परमाणु घरों पर हमले हुए हैं, कई परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याएं हुई हैं। हत्या करने वाले कौन थे, उसे ईरान खोज ही नहीं पाता है। ईरान के परमाणु और बिजली घरों के साथ ही साथ सैनिक अड्डे भी इस्राइल के निशाने पर है। अगर ईरान थोडा सा भी इधर-उधर करने की कोशिश की जो फिर डोनाल्ड ट्रम्प ईरान की सैनिक शक्ति का तहस-नहस करा सकते है। तालिबान सहित जितने भी हिंसक और आतंकी सगठन हैं उन पर भी डोनाल्ड ट्रम्प की संहारक नीति चलेगी। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों पर लोकतंत्र और अल्पसंख्यक संहार पर डोनाल्ड ट्रम्प की नीति संहारक हो सकती है। दुनिया की शांति के लिए मुस्लिम दुनिया की अराजक, हिंसक और संहारक सक्रियता व गोलबंदी को रोकना जरूरी है और यह काम विश्व में सिर्फ और सिर्फ डोनाल्ड ट्रम्प ही कर सकते हैं।

नेपाली मीडिया लीडर मनोज को अमेरिका से सामुदायिक मीडिया पुरस्कार मिला

1-10.jpeg

न्यूयॉर्क-अन्नपूर्णा मीडिया नेटवर्क के महाप्रबंधक मनोज बसनेत को संयुक्त राज्य अमेरिका से ‘कम्युनिटी मीडिया अवार्ड 2025’ से सम्मानित किया गया है। अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित त्रिवेणी टाइम्स ने अपनी पहली वर्षगांठ के अवसर पर बस्नेत सहित सात मीडिया पेशेवरों को प्रथम सामुदायिक मीडिया पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया है। त्रिवेणी टाइम्स के अनुसार, उन्हें न्यूयॉर्क में आयोजित एक विशेष समारोह में मीडिया को समुदाय से जोड़ने में उनकी अद्वितीय भूमिका के लिए सम्मानित किया गया। पुरस्कार के साथ, न्यूयॉर्क राज्य विधानसभा सदस्य जेनिफर राजकुमार के कार्यालय ने सम्मान प्रमाण पत्र भी प्रदान किया।

नेपाल से सामुदायिक मीडिया पुरस्कार 2025 के विजेता हैं अन्नपूर्णा मीडिया नेटवर्क के महाप्रबंधक मनोज बसनेत, दुनिया इंटरनेशनल और ग्लोबल टीवी अमेरिका के मंजूर हुसैन, मेनस्ट्रीम मीडिया अमेरिका के हरप्रीत सिंह टोर, हैलो अमेरिका के सम्राट कार्की, लोब्लू अंसार बांग्लादेश पार्टी, युई जी चाइना प्रेस, और जीएमए नेटवर्क अमेरिका के डेव लवानेश। हाँ।

 

त्रिवेणी टाइम्स के निदेशक नवराज केसी ने पुरस्कार समारोह में कहा, “नेपाली मीडिया उद्योग का नेतृत्व कर रहे बसनेत मीडिया और समुदाय को जोड़ने का एक उदाहरण हैं।” “वे मीडिया और समुदाय को जोड़ने का अद्भुत काम कर रहे हैं नेपाल के विश्वसनीय मीडिया हाउस अन्नपूर्णा मीडिया नेटवर्क के माध्यम से।” साथ ही, वे अन्नपूर्णा मीडिया नेटवर्क को एक अंतर्राष्ट्रीय मीडिया हाउस के रूप में विकसित कर रहे हैं तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने वाले नेपाली-अमेरिकी समुदाय को इससे जोड़ रहे हैं। जो अपने आप में सराहनीय है। उन्होंने कहा कि मीडिया और समुदाय को जोड़ने में उनके काम की सराहना करते हुए बस्नेत को ‘सामुदायिक मीडिया पुरस्कार 2025’ के लिए चुना गया था।

Nepal’s First Skydiving Event Led by Nepali Instructors Takes Off in Pokhara with Simrik Air

1-1-4.jpeg

Pokhara, Nepal : In a historic milestone for aerial sports in Nepal,Simrik air in association with local instructors with over a decade of experience in skydiving and thousands of successful jumps are hosting the country’s first skydiving event led entirely by Nepali professionals. The event marks a significant shift in Nepal’s adventure tourism landscape, showcasing the potential of its homegrown talent. Simrik Air having history of conducting multitude of helicopter tours and activities has associated the team of local experts working in different countries to host this event to mark this event.

Turning Dreams into Reality
“This has been my dream for years,” says Alish.
Alish Thapa is a seasoned instructor with 18 years of experience with more than 4000 jumps recorded and aerial sports enthusiast.

“Thanks to Simrik Air, CAAN, and the Ministry of Tourism, we are finally taking steps to establish Nepal as a skydiving hub for adventure enthusiasts. With government support for dedicated airspace, skydiving could provide opportunities for youth and year-round economic benefits.”

The Team Behind the Leap
Alish is joined by a team of highly skilled instructors, including Subash Thapa, Manish Hirachan, Aashish Thapa, and Nepal’s first female skydiver and USPA-certified coach, Yeshoda KC Thapa. Together with Simrik Air, they aim to leverage Nepal’s natural beauty and towering peaks to attract adventure seekers from around the world.

Nepal has some of the most breathtaking landscapes for skydiving, We see immense potential, but proper policies and dedicated airspace are essential to fully capitalize on it. The majestic mountains beneath the diver and a reluctant fall is what excites an adventurous heart says Murali Dhar Joshi General manager of Simrik Air.

After successful dive from 13000 feet Capt Rameshwar Thapa , celebrated entrepreneur of Nepal narrates ‘It was an unforgettable and lifetime moment to dive into open sky. I found this adventure,The best and efficient of all to enhance energy and strengthen will to come-over internal fear. And also invites all of you to embrace and conquer the ultimate leap from 13000 feet and witness majestic mountains and mother nature.

Renowned business man and Marketing Director of Simrik air speaks to media post jump saying that ski diving unveiled energy and confidence out of me. Its not about the age that blocks to leap into open sky its the enthusiasm that comes from inner core for the adventure.


Anyone above age of 16 can take a dive, until they are medically and mentally fit.

“Interested clients often leave because of the long wait times for approvals,” explains Subash Thapa. “Pokhara needs a dedicated airspace for aerial sports like skydiving, paragliding, paramotor, hot air balloons, and ultra-light flights. This would not only streamline operations but also enhance Nepal’s reputation as an adventure tourism destination.”

A Vision for the Future
The team believes that with proper policies, infrastructure, and government support, Nepal could emerge as a global hub for skydiving and other aerial sports. The natural beauty of Pokhara, combined with its proximity to the Himalayas, offers an unparalleled experience for adventure enthusiasts.

“This is not just about skydiving,” says Alish. “It’s about creating opportunities for Nepal’s youth and unlocking the economic potential of adventure tourism.”
The event has started from 10th of Jan to 21st of Jan 2025 intially and with further demand of diver is being extended for next 15 days to end by 5th February 2025. The enthusiasts willing to jump can contact Simrik air or Insky skidive team pokhara to secure their seats. Currently there are two package VIP package and deluxe package under the event and package starts from NRS 95000.

The success of this event will likely set the stage for further developments in aerial sports, as Nepal takes a bold leap toward becoming an international destination for thrill-seekers.

जैसे कर्म वैसा फल, बंद हो गई हिंडनबर्ग

1200-675-23333814-thumbnail-16x9-nathan-anderson.jpg

अमेरिका में भारत समर्थक नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के पूर्व ही अमेरिका से भारत हित के दो महत्वपूर्ण समाचार प्राप्त हुए हैं, जिनके कारण जहां एक और भारतीय शेयर बाजार में आनंदोत्सव मनाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक हलकों में निराशा व दुख का वातवरण है। जिस कंपनी की रिपोर्ट को आधार मानकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में संपूर्ण विपक्ष हर चुनाव में अंबानी -अडाणी,अंबानी -अडाणी की रट लगा रहा था अब वह कंपनी ही बंद हो गई है। अमेरिका से दूसरा समाचार यह है कि अमेरिका ने भारत पर लगे परमाणु प्रतिबंधो को समाप्त कर दिया है।

लोकसभा, उसके बाद हुए विधान सभा चुनावों के बाद संसद के विगत शीतकालीन सत्र में भी विपक्ष ने अडाणी का मुद्दा उठाकर सदन की कार्यवाही तक नहीं चलने दी। राहुल गांधी ने एक पोस्टर जारी किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और गौतम अडाणी का चित्र बना था तथा लिखा था “एक हैं तो सेफ हैं।“विपक्ष हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट तक चला गया था यद्यपि वहां उसे मात खानी पड़ी थी। विपक्ष हिंडनबर्ग की तथाकथित रिपोर्ट के मुद्दे जाँच संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग कर तथा किन्तु उनका परम हितैषी हिंडनबर्ग अमेरिका में अपनी जांच प्रारंभ होने से पहले ही दुकान बंद करके भाग खड़ा हुआ।

अमेरिका की इंवेस्टमेंट रिसर्च फर्म और शॉर्ट सेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग के संस्थापक नाथन एंडरसन ने कंपनी बंद करने की घोषणा की, यह घोषणा उस समय की गई है जब हिंडनबर्ग रिसर्च कंपनी न्याय विभाग और यूएस एसईसी द्वारा जांच के दायरे में आ गई। कंपनी को नियमों के उल्लंधन के लिए भारतीय नियामक सेबी द्वारा जांच और कारण बताओ नोटिस भी जारी किया चुका है। कई अन्य नियामकों ने भी हिंडनबर्ग पर चारों ओर से शिकंजा कसा । इस कंपनी ने अभी तक सेबी के नोटिस का जवाब तक नहीं दिया है।

जब से हिडनबर्ग के बंद होने की घोषणा हुई है, तब से सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म्स इसको लेकर हलचल है, एक यूजर ने लिखा,“ कितने गाजी आए और कितने गाजी गए“। सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि हिंडनबर्ग सुपारी लेकर भारत की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने और निजी मुनाफा कमाने के लिए काम कर रहा थी। कुछ यूजर्स का कहना है कि हिंडनबर्ग रिसर्च के बंद होने का फैसला हैरान करने वाला है।यह फैसला उस समय लिया गया जब अमेरिकी न्याय विभाग हिंडनबर्ग की जांच करने की योजना बना रहा था। यह फैसला उस समय लिया गया जब ट्रंप सत्ता में आने जा रहे हैं।इस बात की भी गहराई से जांच होनी चाहिए कि राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर कैसे भरोसा कर लिया था? इसी रिपोर्ट के आधार पर राहुल गांधी ने अपने मित्रों के साथ प्रेस वार्ता कर संसद की कार्यवाही बाधित की थी।

हिंडनबर्ग ने अपने सात वर्ष के कार्यकाल में सात बड़े शिकार किए और शेयर बाजार में उन्हें लहूलुहान कर डाला, इसी क्रम में कंपनी ने अदाणी समूह को भी लगातार निशाना बनाया। कंपनी 2023 में कम्पनी रिपोर्ट प्रकाशित करके अदाणी समूह पर कारपोरेट धोखाधड़ी का आरोप लगाती रही जिससे अदाणी समूह को वित्तीय मोर्चे पर दबाव का सामना करना पडा। हिंडनबर्ग ने सेबी प्रमुख माधवी पुरी और उनके पति धवल बुच पर हितों के टकराव का आरोप लगाया। कंपनी ने दावा किया था कि उनकी विदेश स्थित ऐसी कंपनियों में हिस्सेदारी है जो गौतम अदाणी के लिए पैसों की हेराफेरी करती हैं। 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने आय और राजस्व की रिपोर्टिंग को लेकर इकान एंटरप्राइजेज एलपी की आलोचना की थी। हिंडनबर्ग 2020 में इलेक्ट्रिक ट्रक बनाने वाली कंपनी निकोला के पीछे पड़ गया था कहा गया कि निकेला ने अपनी तकनीक को लेकर निवेशकों से झूठ बोला है । इस मामले मे एक यूएस ज्यूरी ने 2022 में निकोला के संस्थापक ट्रेवर मिल्टन को धोखाधड़ी का दोषी करार दिया था। इसी प्रकार हिंडनबर्ग कंपनी ने पेमेंट कंपनी ब्लाक इंक में शॉर्ट पोजिशन मामले में आरोप लगाया कि कंपनी ने यूजर्स की संख्या को बढ़ा चढ़ाकर और लागत को कम करके दिखाया है। इसी प्रकार हिंडनबर्ग ने 2022 में टिवटर इंक पर चढ़ाई कर दी थी। 2022 में ही जेएंडजे परचेजिंग के खिलाफ जांच प्रारम्भ कर दी थी। इसके लिए हिंडनबर्ग ने किसी प्रकार से कंपनी के निगरानी वाले फुटेज तक प्राप्त कर लिये थे। फुटेज से पता चला कि जेएंड जे की मार्केंटिंग टीम के लोग लोगों को धोखाधड़ी वाली निवेश स्कीम में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे।

भारत में प्रवेश करते ही हिंडनबर्ग के सपने ऐसे चकनाचूर हुए कि वह अपनी दुकान बंद करके भाग निकली। भारत में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस नेता राहुल गांधी व संपूर्ण विपक्ष ने अदाणी समूह पर लगातार दोहरा रवैया अपना रखा है। एक ओर यह लोग अपनी सरकार वाले राज्यों में अदाणी समूह को निवेश के लिए बुलाते हैं और दूसरी और उनके नाम पर संसद ठप करते हैं । बीच में आए और सत्य सिद्ध हुए समाचार कि हिंडनबर्ग का मालिक नैट एंडरसन का भारत विरोधी जार्ज सोरोस से सीधा संपर्क रहा है। हिंडनबर्ग कंपनी अपना नया खुलासा करने से एक दिन पूर्व ही एक रहस्यमय ई मेल संदेश जारी कर देती थी और उसके बाद का काम राहुल गाँधी करते थे जिससे राजनैतिक गलियारों में गहमागहमी बढ़ जाती थी और शेयर बाजार हिल जाते थे फिर इसी आधार पर संसद तथा राज्य विधानमंडलों में अराजकता फैलाई जाती थी। इसीलिए कहा जा रहा है कि हिंडनबर्ग के बंद हो जाने के बाद जहां कुछ लोग आनंदोत्सव मना रहे हैं वहीं कुछ लोग दर्द से कराह उठे हैं।

जिन राजनैतिक तत्वों ने अपने स्वार्थ साधने की दृष्टि से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा व संघ की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया तथा विदेशों में जाकर भारत विरोधी बयान दिए क्या अब वह लोग अपने कुकर्मो के लिए माफी मागेंगे? इन स्वार्थी तत्वों से फिलहाल ऐसी आस लगाना बेकार ही है क्यांकि अब यह लोग अपनी बात को सही साबित करने के लिए कोई नया रास्ता ढूंढ रहे होंगे । इस पूरे प्रकरण में यह तथ्य भी जांचने योग्य हो गया है कि हिंडनबर्ग के सभी खुलासे संसद सत्र आरम्भ होने के पूर्व ही क्यों होते थे?

ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद अमेरिकी धरती पर भारत विरोधी हरकतें करने वालों का एजेंडा संभवतः नही चलेगा और न ही इसमें व्हाइट हाउस का सहयेग मिल सकेगा । यह भी कहा जा रहा है कि हिंडनबर्ग भारत विरोधी डी पस्टेट का ही एक अहम हिस्सा था और ट्रंप के आगमन के साथ ही जब उसे लगा कि उसकी जांच होकर ही रहेगी और दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा तो डर कर हिंडनबर्ग का मालिक एंडरसन कंपनी बंद कर भाग खड़ा हुआ है।अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद हिंडनबर्ग की कड़ी जांच और उसे अमेरिकी कानूनों के तहत कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रह हैं और यह भी मांग कर रहे है कि हिंडनबर्ग से जुड़ी सभी फाइलों व कागजो को सुरक्षित रखा जाये क्योकि अमेरिकी कानूनों के तहत जब वहां पर सत्ता परिवतन होता है तब जज भी बदल जाते हैं।

scroll to top