श्री देवरस जी अस्पृश्यता प्रथा के घोर विरोधी थे

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परम पूज्य श्री मधुकर दत्तात्रेय देवरस जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक थे। आपका जन्म 11 दिसम्बर 1915 को श्री दत्तात्रेय कृष्णराव देवरस जी और श्रीमती पार्वती बाई जी के परिवार में हुआ था। आपने वर्ष 1938 में नागपुर के मॉरिस कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के उपरांत कॉलेज आफ लॉ, नागपुर विश्व विद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉक्टर हेडगेवार जी द्वारा की गई थी एवं आप वर्ष 1927 में अपनी 12 वर्ष की अल्पायु में ही संघ के स्वयंसेवक बन गए थे एवं नागपुर में संघ की एक शाखा में नियमित रूप से जाने लगे तथा इस प्रकार अपना सम्पूर्ण जीवन ही मां भारती की सेवा हेतु संघ को समर्पित कर दिया था। आप अपने बाल्यकाल में कई बार दलित स्वयंसेवकों को अपने घर ले जाते थे और अपनी माता से उनका परिचय कराते हुए उन्हें अपने घर की रसोई में अपने साथ भोजन कराते थे। आपकी माता भी उनके इस कार्य में उनका उत्साह वर्धन करती थीं। कुशाग्र बुद्धि के कारण आपने शाखा की कार्य प्रणाली को बहुत शीघ्रता से आत्मसात कर लिया था।

अल्पायु में ही आप क्रमशः गटनायक, गणशिक्षक, शाखा के मुख्य शिक्षक एवं कार्यवाह आदि के अनुभव प्राप्त करते गए। नागपुर की इतवारी शाखा उन दिनों सबसे कमजोर शाखा मानी जाती थी, किंतु जैसे ही आप उक्त शाखा के कार्यवाह बने, आपने एक वर्ष के अपने कार्यकाल में ही उक्त शाखा को नागपुर की सबसे अग्रणी शाखाओं में शामिल कर लिया था। शाखा में आप स्वयंसेवकों के बीच अनुशासन का पालन बहुत कड़ाई से करवाते थे। दण्ड योग अथवा संचलन में किसी स्वयंसेवक से थोड़ी सी भी गलती होने जाने पर उसे तुरंत पैरों में चपाटा लगता था। परंतु, साथ ही, आपका स्वभाव उतना ही स्नेहमयी भी था, जिसके कारण कोई भी स्वयंसेवक आपसे कभी भी रूष्ट नहीं होता था।

श्री देवरस जी द्वारा वसंत व्याख्यानमाला में दिए गए एक उद्भोधन को उनके सबसे प्रभावशाली उद्बोधनों में से एक माना जाता है, मई 1974 में पुणे में दिए गए इस उद्बोधन में आपने अस्पृश्यता प्रथा की घोर निंदा की थी और संघ के स्वयंसेवकों से इस प्रथा को समाप्त करने की अपील भी की थी। संघ ने हिंदू समाज के साथ मिलकर अनुसूचित जाति के सदस्यों के उत्थान के लिए समर्पित संगठन “सेवा भारती” के माध्यम से कई कार्य किए। इस सम्बंध में संघ के स्वयंसेवकों ने स्कूल भी प्रारम्भ किए जिनमें झुग्गीवासियों, दलितों, समाज के छोटे तबके के नागरिकों एवं गरीब वर्ग को हिंदू धर्म के गुण सिखाते हुए व्यावसायिक पाठ्यक्रम चलाए जाते रहे। आपने 9 नवम्बर 1985 को अपने एक उदबोधन में कहा था कि संघ का मुख्य उद्देश्य हिंदू एकता है और संगठन का मानना है कि भारत के सभी नागरिकों में हिंदू संस्कृति होनी चाहिए। श्री देवरस जी ने इस संदर्भ में श्री सावरकर जी की बात को दोहराते हुए कहा था कि हम एक संस्कृति और एक राष्ट्र (हिंदू राष्ट्र) में विश्वास करते हैं लेकिन हिंदू की हमारी परिभाषा किसी विशेष प्रकार के विश्वास तक सीमित नहीं है। हिंदू की हमारी परिभाषा में वे लोग शामिल हैं जो एक संस्कृति में विश्वास करते हैं और इस देश को एक राष्ट्र के रूप में देखते हैं। इस प्रकार, वे समस्त हिंदू इस महान राष्ट्र का हिस्सा माने जाने चाहिए। इसलिए, हिंदू से हमारा आशय किसी विशेष प्रकार की आस्था से नहीं है। हम हिंदू शब्द का उपयोग व्यापक अर्थ में करते हैं।

वर्ष 1973 में श्री देवरस जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक बने। आपने अपने कार्यकाल के दौरान संघ को समाज के साथ जोड़ने में विशेष रूचि दिखाई थी और इसमें सफलता भी प्राप्त की थी। आपने श्री जयप्रकाश नारायण जी के साथ मिलकर भारत में लगाए गए आपातकाल एवं देश से भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए चलाए गए आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल के दौरान देश के कई राजनैतिक नेताओं के साथ ही संघ के कई स्वयंसेवकों को भी तत्कालीन केंद्र सरकार ने जेल में डाल दिया था। श्री देवरस जी को भी पुणे की जेल में डाला गया था। लम्बे समय तक चले संघर्ष के बाद, जब श्री देवरस जी को जेल से छोड़ा गया तो आपका पूरे देश में अभूतपूर्व स्वागत हुआ था। आपातकाल के दौरान अपने ऊपर एवं अन्य विभिन्न नेताओं पर हुए अन्याय एवं अत्याचार को लेकर देश के नागरिकों एवं स्वयंसेवकों के बीच किसी भी प्रकार की कटुता नहीं फैले इस दृष्टि से आपने उस समय पर समस्त स्वयंसेवकों को आग्रह किया था कि हमें इस सम्बंध में सब कुछ भूल जाना चाहिए और भूल करने वालों को क्षमा कर देना चाहिए। आपातकाल के दौरान संघ कार्य के सम्बंध में लिखते हुए द इंडियन रिव्यू पत्रिका के सम्पादक श्री एम सी सुब्रमण्यम ने लिखा है कि “आपातकाल के विरोध में जिन्होंने संघर्ष किया, उनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख है। इस बात का उल्लेख करना आवश्यक है कि सत्याग्रह की योजना बनाना, सम्पूर्ण भारत में सम्पर्क बनाए रखना, चुपचाप आंदोलन के लिए धन एकत्रित करना, व्यवस्थित रीति से आदोलन के पत्रक सब दूर पहुंचाना, और बिना दलीय या धार्मिक भेदभाव के कारागृह में बंद लोगों के परिवारों की आर्थिक मदद करना, इस सम्बंध में संघ ने स्वामी विवेकानंद के उदगार सत्य कर दिखाए। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि देश में सामाजिक और राजनैतिक कार्य करने के लिए सर्वसंग परित्यागि सन्यासियों की आवश्यकता होती है।” आपातकाल के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं के साथ कार्य करने वाले विभिन्न दलों के सहयोगियों ने ही नहीं बल्कि संघ से शत्रुता रखने वाले नेताओं ने भी संघ के स्वयंसेवकों के प्रति गौरव और आदर के उद्गार व्यक्त किए हैं।

भारत को राजनैतिक स्वतंत्रता वर्ष 1947 में प्राप्त हो गई थी, परंतु, दादरा नगर हवेली एवं गोवा आदि कुछ हिस्से अभी भी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे थे क्योंकि यहां पुर्तगालियों का शासन यथावत बना रहा। ऐसे समय में कुछ संगठनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दायित्ववान स्वयंसेवकों से मुलाकात की और भारत के उक्त क्षेत्रों को भी स्वतंत्र कराने की योजना बनाई गई। संघ के हजारों स्वयंसेवक सिलवासा पहुंच गए एवं दादरा नगर हवेली को आजाद करा लिया। संघ के स्वयंसेवकों ने 1955 से गोवा मुक्ति संग्राम में भाग लेना शुरू कर दिया था।इसके बाद गोवा को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से कर्नाटक से 3000 से अधिक संघ के स्वयंसेवक गोवा पहुंच गए, इनमें कई महिलाएं भी शामिल थीं। गोवा सरकार के खिलाफ आंदोलन प्रारम्भ हो गया। सरकार ने इन सत्याग्रहियों को गिरफ़्तार कर लिया गया एवं 10 साल की कठोर सजा सुनाई गई। इसके बाद तो इन स्वयंसेवकों की रिहाई कराने एवं गोवा को स्वतंत्र कराने की मांग पूरे देश में ही उठने लगी। देश की जनता के दबाव में भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय चलाया। 18 दिसम्बर, 1961 को इस महत्वपूर्ण अभियान को प्रारम्भ किया गया, इस अभियान में भारतीय सेना के तीनों अंग शामिल हुए थे। यह अभियान 36 घंटे चला और इसके सफल होते ही गोवा को 450 वर्ष के पुर्तगाली शासन से आजादी प्राप्त हो गई। इस प्रकार संघ के स्वयंसेवकों के प्रारंभिक उद्घोष, सक्रियता, समर्पण, जज्बे और सेना के पराक्रम से अंतत: गोवा भारतीय गणराज्य का अंग बन गया। कुल मिलाकर गोवा को स्वतंत्र कराने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में संघ की ओर से श्री देवरस जी की भी महती भूमिका रही है।

श्री देवरस जी ने कई पुस्तकें भी लिखी थीं, जिनमें कुछ पुस्तकें बहुत लोकप्रिय हुईं हैं, जैसे वर्ष 1974 में “सामाजिक समानता और हिंदू सुदृढ़ीकरण” विषय पर लिखी गई पुस्तक; वर्ष 1984 में लिखित पुस्तक “पंजाब समस्या और उसका समाधान”; वर्ष 1997 में लिखित पुस्तक “हिंदू संगठन और सत्तावादी राजनीति” एवं वर्ष 1975 में अंग्रेजी भाषा में लिखी गई पुस्तक “राउज़: द पॉवर आफ गुड” ने भी बहुत ख्याति अर्जित की है।

श्री देवरस जी 17 जून 1996 को इस स्थूल काया का परित्याग कर प्रभु परमात्मा में लीन हो गए थे। आपकी इच्छा अनुसार आपका अंतिम संस्कार रेशमबाग के बजाय नागपुर के सामान्य नागरिकों के श्मशान घाट में किया गया था।

मकवाना की मध्यप्रदेश पुलिस की उज्जवल छबि गढ़ने की राह नहीं आसान

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मध्यप्रदेश के नये डीजीपी कैलाश मकवाना अपना पदभार संभालते ही न केवल एक्शन मोड में आ गये हैं बल्कि अपने शुरुआती तेवरों से ही उन्होंने यह संदेश भी दे दिया है कि राज्य के डीजीपी के रूप में वे मध्यप्रदेश पुलिस की एक नयी छवि गढ़ने के लिए कृत संकल्प हैं। उनके इरादों को समझना कठिन नहीं है।। वे केवल यह चाहते हैं कि मध्यप्रदेश पुलिस “देश भक्ति जनसेवा” की कसौटी पर खरी उतरकर सारे देश के सामने सर्वोत्कृष्ट उदाहरण पेश करे। नये डीजीपी ने मध्य प्रदेश पुलिस के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किया है उसे अर्जित करने की दिशा में उन्होंने प्राथमिकताएं भी तय कर दी हैं।

कैलाश मकवाना के शुरुआती तेवरों से निश्चित रूप से प्रदेश की जनता के मन में भी नयी उम्मीदें जाग उठी हैं । नये डीजीपी ने एक ओर तो जहां पुलिस को यह निर्देश दे दिए हैं कि वह आम जनता से जुड़े अपने कार्य क्षेत्र पर सबसे पहले ध्यान केंद्रित करे वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को चुस्त और दुरुस्त बनाने रखने की पुलिस की जिम्मेदारी के निष्ठापूर्वक निर्वहन में वे किसी भी स्तर पर कोई कोताही बर्दाश्त नहीं करेंगे। जो लोग नये डीजीपी की इच्छा शक्ति , समर्पण ,कर्मठता और विशिष्ट कार्यशैली से परिचित हैं वे यह जानते हैं कि कैलाश मकवाना अपने मजबूत इरादों के प्रति किसी के भी मन में शक की जरा सी भी गुंजाइश कभी नहीं छोड़ते । उनके व्यक्तित्व की इन्हीं विशेषताओं ने उन्हें मध्यप्रदेश पुलिस के सर्वोच्च पद पर नियुक्ति का अधिकारी बनाया है। गौरतलब है कि कैलाश मकवाना मध्यप्रदेश के डीजीपी पद पर नियुक्ति के पूर्व मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के चेयरमैन पद पर कार्यरत थे। अभियांत्रिकी में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कैलाश मकवाना को उत्कृष्ट कार्य हेतु 2005 में राष्ट्रपति द्वारा सराहनीय सेवा मैडल और 2014 में विशिष्ट सेवा मैडल से सम्मानित किया गया था। जीवट व्यक्तित्व के धनी मकवाना के खाते में अनेकों उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज है ।

मध्यप्रदेश के नये डीजीपी ने अपना पदभार ग्रहण करते ही पुलिस महकमे के लिए जो प्राथमिकताएं गिनाई हैं उनके माध्यम से उन्होंने यह संदेश दे दिया है कि वे मध्यप्रदेश पुलिस को आम जनता की तकलीफों के प्रति संवेदनशील, कर्त्तव्य पारायण और जवाबदेह बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे। एक ओर वे यह चाहते हैं कि पुलिस को हमेशा अनुशासन के दायरे में रहकर काम करना चाहिए तो वहीं दूसरी ओर पुलिस महकमे से उनकी यह अपेक्षा है कि वह पुलिस की छवि को प्रभावित करने वाली गतिविधियों से दूर रहें। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीजीपी का पदभार ग्रहण करने के बाद कैलाश मकवाना से मुलाकात करने और उनसे गुजारिश करने वालों की बढ़ती भीड़ पर उन्होंने अपनी नाराज़गी व्यक्त की है। डीजीपी ने इसे अत्यंत आपत्तिजनक बताया कि विगत दिनों विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों ने उनसे मुलाकात कर उन्हें अपनी समस्याओं के संबंध जो आवेदन दिए हैं उनमें किसी भी आवेदन पत्र पर संबंधित विशेष पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अथवा इकाई प्रमुख की अनुशंसा नहीं थी और ना ही डीजीपी से मुलाकात के लिए अनुमति ली गई थी।

डीजीपी ने देश में बढ़ते डिजिटलीकरण और आन लाइन लेन देन बढ़ने के साथ ही बढ़ते सायबर अपराधों पर सख्ती से अंकुश लगाने की आवश्यकता जताई है। प्रदेश में ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए जनता को और जागरूक बनाने की आवश्यकता व्यक्त करते हुए डीजीपी ने कहा है कि मानव संसाधनों और बेहतर तकनीक के जरिए दृष्टि से पुलिस को और सक्षम बनाया जावेगा। कैलाश मकवाना ने सायबर अपराधों को रोकने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस के प्रयासों की सराहना की है। डीजीपी ने आम जनता की तकलीफों और शिकायतों के जल्द निराकरण के लिए हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई अब पुलिस थानों में करने के निर्देश दिए हैं । डीजीपी की यह पहल निश्चित रूप से जनसमस्याओं के निराकरण में न केवल तेजी लाएगी बल्कि लोगों को अपनी समस्याओं को लेकर आला अधिकारियों के दफ्तर तक जाने की परेशानी से निजात भी दिलाएगी। नये डीजीपी ने बढ़ती सड़क दुघर्टनाओं को रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने की जो पहले की है उसकी व्यापक सराहना की जा रही है। इसके लिए डीजीपी ने इंजीनियरिंग डिजाइनों और अन्य विभागों के साथ समन्वय को महत्व पूर्ण बताया है। कैलाश मकवाना मानते हैं कि 2028 में महाकाल की नगरी उज्जैन में होने जा रहे सिंहस्थ कुंभ में व्यवस्थाओं को चाक चौबंद रखना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है और महाकाल लोक के निर्माण के बाद वहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। विश्व प्रसिद्ध इस आयोजन को सुरक्षित , सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने में पुलिस की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हुए डीजीपी ने पुलिस महकमे को अभी से अपनी जिम्मेदारी के प्रति सजग रहने के निर्देश दिए हैं।

(लेखक पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने डॉ. अवस्थी को फर्टिलाइजर मैन ऑफ इंडिया’ सम्मान प्रदान किया

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नई दिल्ली : प्रसंस्कृत उर्वरक क्षेत्र की विश्व की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इफको के प्रबंध निदेशक, डॉ. उदय शंकर अवस्थी को सहकार भारती द्वारा “फर्टिलाइजर मैन ऑफ इंडिया” की उपाधि से सम्मानित किया गया है। अमृतसर में आयोजित सहकार भारती के 8वें राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह (महासचिव) श्री दत्तात्रेय होसबोले, सहकार भारती के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. उदय जोशी और पंजाब के राज्यपाल सह चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया ।

सहकार भारती एक राष्ट्रीय संगठन है जो देश भर में सहकारी समितियों और सहकारी आंदोलन को मजबूत करने के लिए वर्ष 1978 से काम कर रहा है। डॉ. अवस्थी को यह उपाधि उर्वरक और कृषि के क्षेत्र में उनके आजीवन उल्लेखनीय योगदान के लिए दी गई है। नैनो उर्वरकों के बारे में उनकी अभिनव सोच से देश के साथ-साथ वैश्विक कृषि और उर्वरक क्षेत्र का कायाकल्प हो सकता है। स्वदेशी तकनीक से विकसित नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और अब नैनो एनपीके के उत्पादन से भविष्य में कृषि के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन आएगा क्योंकि इन उर्वरकों के प्रयोग से न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि मिट्टी की सेहत और गुणवत्ता में भी वृद्धि होगी। डॉ. अवस्थी ने मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि हेतु कोरडेट द्वारा किसानों को हरी जैविक खाद के प्रयोग संबंधी प्रशिक्षण दिलाने के साथ-साथ देश भर में ‘मृदा बचाओ अभियान’ की शुरुआत की। उर्वरक उद्योग के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र और ताम्र पत्र (कांस्य पट्टिका) से सम्मानित किया गया । इफको की उल्लेखनीय प्रगति और सहकार से समृद्धि के दृष्टिकोण को वैश्विक स्तर पर ले जाते हुए भारतीय सहकारी आंदोलन के सशक्तिकरण में उनके अमूल्य योगदान के लिए डॉ. अवस्थी को हाल ही में रोशडेल पायनियर्स पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

डॉ. अवस्थी ने कहा कि मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि “सहकारिता जगत ने किसानों और सहकारी समितियों के विकास के लिए किए गए मेरे काम को पहचाना है। मैं इस प्रतिष्ठित सम्मान और उपाधि के लिए सहकार भारती को हृदय से धन्यवाद देता हूं।”उन्होंने आगे कहा कि भारत में हमें उर्वरकों के मामले में वास्तव में आत्मनिर्भर बनना होगा और नवीन नैनो प्रौद्योगिकी आधारित उर्वरकों को अपनाकर उर्वरकों के कच्चे माल के आयात पर निर्भरता कम करके “मेक इन इंडिया” को अपनाना होगा। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और साथ ही रॉक फॉस्फेट, पोटाश और प्राकृतिक गैस की खपत भी कम होगी ।

डॉ. अवस्थी ने सहकार भारती टीम से आग्रह किया कि वे दूरदराज के गांवों में छोटी सहकारी समितियों को सहायता प्रदान करके सहकारी समितियों के बीच सहकारिता को सक्रिय रूप से बढ़ावा दें तथा उन्हें स्थायी व्यवसाय मॉडल के रूप में मजबूत करें। उन्होंने यह भी अपील की कि सहकार भारती को आगे आकर देश भर के किसानों को नैनो उर्वरकों के लाभों के बारे में बताना चाहिए तथा भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की इसकी क्षमता पर जोर देना चाहिए।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ सिविल सोसाइटी ऑफ़ दिल्ली द्वारा दिल्ली के सभी जिलों में प्रदर्शन कर जिलाधिकारियों को दिया गया ज्ञापन

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नई दिल्ली – बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए सिविल सोसाइटी ऑफ़ दिल्ली द्वारा सोमवार 9 दिसंबर 2024 को दिल्ली के सभी जिलों में प्रदर्शन किया गया तथा बाद में जिलाधिकारियों को एक ज्ञापन भी सौंपा गया।

बांग्लादेश में हिन्दुओं एवं अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार एवं मानवाधिकार हनन के विरोध में सभी जिलों में आज आयोजित प्रदर्शन के बाद सिविल सोसाइटी ऑफ़ दिल्ली तथा 200 से अधिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों द्वारा मंगलवार 10 दिसंबर 2024 को बांग्लादेश दूतावास पर एक बड़े विरोध मार्च का आयोजन किया जा रहा है।

इन विरोध प्रदर्शनों का उद्देश्य हिंदू समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा और उत्पीड़न की ओर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करना है।

विभिन्न जिलाधिकारियों को सौंपे गए ज्ञापन में यह मांग किया गया कि:
1. अल्पसंख्यकों की सुरक्षा: अंतरराष्ट्रीय संधियों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप मानवाधिकारों को लागू करना।
2. नरसंहार का अंत: हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ लक्षित हिंसा को तुरंत रोकना।
3. धार्मिक नेताओं की रिहाई: इस्कॉन संन्यासी पूज्य श्री चिन्मय कृष्ण दास को अन्यायपूर्ण कैद से रिहा करना।
4. वैश्विक एकजुटता: अपराधियों को जवाबदेह ठहराने और पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना।
5. धार्मिक सहिष्णुता का प्रचार: बांग्लादेश में सभी धार्मिक समुदायों के बीच सौहार्द और सह-अस्तित्व की वकालत करना।

सिविल सोसाइटी ऑफ़ दिल्ली द्वारा डीएम शाहदरा एवं डीएम नार्थ ईस्ट दोनों को बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हों रहे अत्याचार व नरसंहार के विरुद्ध एक ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन में संत समाज, मोहल्ला सुधार समिति, मंदिर समिति, जाति बिरादरी प्रमुख, एन जी ओ, इस्कॉन व अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया । इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बहनों ने भी भाग लिया।

सिविल सोसाइटी ऑफ़ दिल्ली के तत्वधान में SDM रामपुरा श्री योगेश यादव जी को बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में ज्ञापन दिया गया। इसमें अलग-अलग स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। SDM साहब के माध्यम से इस विषय पर भारत सरकार का ध्यान आकर्षित करवाया गया तथा बांग्लादेश में हो रही हिंसा का तुरंत समाधान के लिए भारत सरकार की तुरंत प्रतिक्रिया हेतु ज्ञापन दिया।

नरेला ज़िला के निवासी एंव सिविल सोसाइटी ऑफ़ दिल्ली के कार्यकर्ताओं ने अलीपुर स्थित जिलाधिकारी कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया और विरोध प्रदर्शन के पश्चात एक ज्ञापन जिलाधिकारी श्री यश चौधरी जी को सौंपा।

सिविल सोसाइटी ऑफ दिल्ली के सैकड़ों कार्यकर्ता ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में प्रदर्शन करते हुए सरकार से इसे रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई करने की मांग करते हुए एक ज्ञापन दक्षिण पश्चिम जिला के जिलाधिकारी को कापसहेड़ा स्थित कार्यालय में जाकर सौंपा। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में समाज के विभिन्न वर्गों के कार्यकर्ता, महिला और पुरुष सम्मिलित हुए।

सिविल सोसाइटी ऑफ दिल्ली के तत्वावधान में 9 सामजिक संस्थानों के पदाधिकारियों के द्वारा मध्य जिला के जिलाधिकारी को बांग्लादेश में हिन्दुओ पर अत्याचार के विरुद्ध ज्ञापन दिया गया।

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