एक सर्व सिद्ध संगठन है आरएसएस

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नरेन्द्र भदौरिया

भोपाल। आर एस एस का विरोध करने वाले भारत के कई संगठनों को अब आश्चर्य में आँखें फाड़कर संघ के लोगों को घूरते और अनर्गल बातें करते देखा जा रहा है। 
यह लोग अपनी  बुद्धि पर तरस खाते तो यह स्वीकारने में देर नहीं करते कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक  संघ 100 वर्षों से वास्तव में क्या कर रहा था । यह रहस्य जानने समझने  में उनसे भारी भूल हो हुई है।

  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वास्तव में एक हजार वर्षों से दबे कुचले  सनातनी हिन्दुओं के आत्मिक स्वाभिमान को जगाने में चुपचाप लगा रहा। इस अवधि में झूठे आरोप, मिथ्या प्रतिबन्ध और प्रताड़ना सहन करता रहा। 
  अपनी आंखों के सामने  दासियों लाख हिन्दुओं का प्रायोजित नर संहार  देखा। करोड़ों आस्थावान लोगों को भय , लोभ और प्रताड़ना के बल पर मतांतरित किये जाते देखा। मातृभूमि को बंटते , कटते देखा। असुरक्षित सीमाओं पर चीन और पाकिस्तान के हमले देखे । तो अपने विशाल देश को आतंक के सहारे उंगलियों पर नचाते भारत और सीमा पार के षड्यंत्रकारियों की मिलीभगत के दुष्परिणाम देखे। जम्मू कश्मीर जैसे राज्य से साढ़े पांच लाख हिन्दु परिवारों को हिंसा में पिसते देखा। इसी राज्य की गलियों में भारतीय सेना के जवानों को पत्थरों के हमले सहते, थप्पड़ खाते देखा।  देश के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सरेआम गोवंश की  का वध होते देखा।
   हिन्दुओं के परिवारों की लड़कियों को लूट कर ले जाते मुस्लिम गुंडों के झुण्ड  देखे। फिर लव जिहाद में हिन्दुओं की बेटियों को फंसते उनकी नीलामी होते देखा। 

   विदेशी षड्यंत्रों के माध्यम से अटल बिहारी वाजपेयी को सत्ता से बाहर होते देखा। सांसदों से लेकर वोटरों तक की खरीद बिक्री देखी। मुस्लिम और ईसाई वोट बैंको के सहारे बनी सरकारों द्वारा हिन्दुओं के ग्रन्थों को नष्ट करते देखा।, संतों को पीटकर मारते देखा। । मन्दिरों को ध्वस्त होते देखा। संविधान को मनचाहे ढंग से बदलते देखा। देश की सुरक्षा  के लिए रक्षा उपकरण बनाने वाले संस्थानों को सरकारों द्वारा नेताओं की दलाली के निमित्त स्वयं ठप करते देखा। फिर अरबों रुपए के रक्षा सौदे करके दलाली में लिप्त नेताओं अधिकारियों को बचते बचाते खुली छूट मिलते देखा। समाज को लड़ाने के अनेक  हथकण्डे देखे। बार बार हिंसक दंगे कराकर समाज को भ्रमित करते नेताओं को देखा।

   कभी भाषा के बहाने भारत को उत्तर दक्षिण में बांटा जाता रहा तो कभी राम के जन्मस्थान पर शौचालय बनवाने के अपमानित करने वाले वक्तव्यों पर मौन साधे रहने की विवशता झेली। अयोध्या का मन्दिर नहीं बने इसके लिए कैसे कई तरह के विरोधी परस्पर मिलकर आड़े आते रहे। राजनीति से उठे बवंडरों  में प्रशासन और न्यायपालिका को भ्रमित होते देखा ।यह सब तो बहुत थोड़ी झलक है।  और जाने क्या क्या देखते हुए संघ ने सौ वर्ष बिता दिये । इस अवधि में तीन बार मिथ्या प्रतिबंध  सहन किये ।  अपने संगठन के हजारों कार्यकर्ताओं को संघ ने असमय खोने की पीड़ा भी सहन की।  
 अब संघ अपनी स्थापना के एक सौ वर्ष बीतने पर सबकी सुनते हुए यह बताने को उत्सुक है कि   इतना सब कुछ सहन करते हुए यह संगठन  मौन क्यों रहा। संघ ने खुलकर बताया है कि वह नकारात्मक विमर्श करना उचित नहीं समझता। हमारा ध्येय सनातन संस्कृति से बंधा है। संघ सत्य के पक्ष में खड़े रहकर देश के नागरिकों को स्व की भावना से जोड़ने में लगा है। राष्ट्र के स्वाभिमान की टेक से संघ बंधा है। हमारी संस्कृति की पहचान  आखिर हम हैं कौन जैसे मूलभूत प्रश्न से जुड़ी है। स्व की यह भावना इस मुख्य तत्व को अच्छी तरह समझने , विश्वास करने , उसको जीने  से प्रकट होगी।         अपने स्वत्त्व को भुलाने से बडा दोष और कोई नहीं हो सकता। अपने स्व अर्थात पहचान को हृदयंगम करो। फिर उसके अनुरूप अपने को बदलो।

   संघ की राह कभी आसान नहीं थी। आज संघ के पास  विभिन्न संगठनों की परिधि में खड़े बीसियों करोड़ राष्ट्रभक्त कार्यकर्ताओं की बड़ी सेना खड़ी है। भविष्य के कुशल रचनाकार समर्पित उन्नायक , संगठक और लक्ष्य संधान को तत्पर करोड़ों हाथ एक साथ जुड़े हैं। वन्दे मातरम का मंत्र वाणी और मानस में गूंज रहा है। स्वार्थ रहित सेवा का ध्येय  संघ के कार्यकर्ताओं को समर्पण करना सिखाता आ रहा है। देखते रहो , बढ़ते रहो। जो साथ हैं वही नहीं जो छिटक कर दूर खड़े हैं वह भी अपने हैं । यह सोच सामान्य नहीं है। इसीलिए संघ के कार्यकर्ता निडर हैं। इनके हृदय में उतावलापन नहीं दिखेगा। यह संगठन एक दो या दस बीस वर्ष की बात नहीं करता। इसके लिए सहस्त्राब्दियों की कल्पना भी छोटी है। ऐसे सत अर्थात विशुद्ध राष्ट्र भक्त तथा संस्कृति के प्रति निष्ठा से जुड़े संगठन को  ध्येय निष्ठा  से बंधे कार्यकर्ताओं के कारण सिद्धियां प्राप्त हैं। यह कहने में सन्देह करने वाले बड़े अल्पज्ञ हैं। 

हैदराबाद में सिद्धार्थ बनर्जी की सिद्ध वीणा की शानदार प्रस्तुति

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री के सम्मान में सिद्ध वीणा के जनक पंडित सिद्धार्थ बनर्जी द्वारा हैदराबाद में सिद्ध वीणा की शानदार प्रस्तुति दी गई। यह आयोजन भारत और न्यूजीलैंड के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।

इस अवसर पर, पंडित सिद्धार्थ बनर्जी ने अपनी सिद्ध वीणा की अद्वितीय प्रस्तुति से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने भारतीय संगीत और न्यूजीलैंड के संगीत की समृद्धि और विविधता को प्रदर्शित किया।

इस आयोजन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन, विदेश मंत्री एस जय शंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल , न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रॉस टेलर इत्यादि महान विभूतियों ने पंडित सिद्धार्थ बनर्जी और उनकी “रिवायत” फ्यूजन बैंड की प्रस्तुति की प्रशंसा की और उनकी प्रतिभा को सराहा।

यह आयोजन भारत और न्यूजीलैंड के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था, और पंडित सिद्धार्थ बनर्जी की प्रस्तुति ने इस आयोजन को और भी यादगार बना दिया।

नागपुर में अफवाह फैलाने व हिंसा करने वाले जिहादियों के विरुद्ध हो कठोर कार्यवाही

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विनोद बंसल

औरंगजेब की कब्र के स्थान पर बने पूज्य धना जी, संता जी, छत्रपति राजाराम महाराज जी का स्मारक*

नई दिल्ली। मार्च 18, 2025। विश्व हिंदू परिषद ने मांग की है कि नागपुर में अफवाह फैलाकर, हिंसा व आगजनी करने वाले जिहादियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही हो तथा औरंगजेब की कब्र के स्थान पर पूज्य धनाजी जाधव, संताजी घोरपडे , छत्रपति राजाराम महाराज जी का स्मारक बने। विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री श्री मिलिंद परांडे ने घटना की तीव्र भर्त्सना करते हुए कहा है कि महाराष्ट्र के नागपुर में कल रात्रि को जो आगजनी और हमले की घटनाएं मुस्लिम समाज के एक वर्ग द्वारा जो की गईं वे पूर्णतः निंदनीय है। उन्होंने कहा कि हमारे युवा विभाग बजरंगदल के कार्यकर्ताओं के घरों पर हमले किए गए , उन्होंने हिंदू समाज के अनेक घरों को निशाना बनाया और महिलाओं को भी नहीं छोड़ा गया। विश्व हिंदू परिषद इस सब की घोर शब्दों में निंदा करता है। यह बेहद शर्मनाक है कि एक तो यह झूठ फैलाया गया कि हिंदू समाज ने आयतें जलाई हैं और दूसरी ओर हिंसा भड़काने का कुत्सित प्रयास हुआ। ऐसे सभी समाज कंटक जिहादी उत्पतियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए।

विहिप महामंत्री ने यह भी कहा कि छत्रपति संभाजी महाराज नगर में जो औरंगजेब की कब्र है उसका महिमा मंडन बंद कर उसमें कोई सुधार करने का विषय भी नहीं सोचना चाहिए। अपितु उसकी जगह पर वहां औरंगजेब को जिन्होंने पराजित किया, ऐसे श्री धनाजी जाधव और श्री संताजी घोरपडे तथा साथ में ही छत्रपति श्री राजारामजी महाराज का एक विजय स्मारक बनाना चाहिए। जहां मराठों के साम्राज्य में औरंगजेब को पराजित करने का एक विजय स्तंभ बने, वही मांग विश्व हिंदू परिषद कर रही है और इसलिए ऐसे हिंसा में लगे हुए लोगों के विरुद्ध तुरंत कार्यवाही करके कठोर से कठोर रीति से इनका दमन करना चाहिए।

मध्यप्रदेश सरकार का बजट : ‘मोदी-मंत्रों’ के साथ विकास की ऊँची उड़ान का संकल्प

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भोपाल: डाॅ मोहन यादव के नेतृत्व में काम कर रही मध्यप्रदेश सरकार का यह बजट बहुआयामी है। इसमें विकसित मध्यप्रदेश की रूपरेखा के साथ प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी के तीनों मंत्र की झलक है। मोदीजी के ये तीन मंत्र “विकास के साथ विरासत” “gyan का सम्मान” और “लोकल फाॅर वोकल” हैं । इस बजट आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के साथ विकसित भारत का संकल्प पूरा करने के प्रावधान भी हैं। बिना कोई नया कर लगाये 15% की वृद्धि इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता है।

वर्ष 2025-26 केलिये मध्यप्रदेश सरकार का बजट आ गया है। विशेषताओं, व्यापकताओं और नवाचारों से युक्त है। यह बजट बुधवार 12 मार्च को वित्तमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में प्रस्तुत किया। बजट में एक ओर मध्यप्रदेश की साँस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सहेजा गया है तो दूसरी ओर आधुनिक दुनियाँ की दौड़ में अग्रणी रहने केलिये औद्योगिकरण को गति देने का प्रयास किया गया है। ताकि मध्यप्रदेश भारत के विकसित प्रातों में अग्रणी बन सके। बजट परिवार का हो, या किसी स्वायत्तशासी संस्थान का। अथवा किसी प्रगतिशील राष्ट्र का। उसमें अतीत के अनुभव, आधारभूत आयामों का सशक्तिकरण, आयवृद्धि के उपाय और व्यय का नियमन होना चाहिए। इसके साथ एक गतिमान वातावरण भी होना चाहिए। मध्यप्रदेश सरकार का यह बजट इन आधारभूत आवश्यकताओं के अनुरूप है। यह अनेक विशेषताओं, व्यापकताओं और नवाचारों से युक्त है। बजट में किसी भी पुरानी योजना को बंद नहीं किया गया है । और न कोई नया टैक्स लगाया गया है। किसी पुराने टैक्स में वृद्धि भी नहीं की गई।

विरासत के साथ विकास

किसी भी परिवार, समाज और देश की अपनी विरासत होती है। उसमें विशेषताओं और वर्जनाओं दोनों की झलक होती है। विरासत और इतिहास वर्तमान पीढ़ी को अपनी विकास यात्रा में गतिमान बनाता है। विरासत में अनेक कथानक भी जुड़े होते हैं। इन कथानकों में उन्नति का संदेश और अवनति के प्रति सावधानी भी होती है। मध्यप्रदेश में ऐसे अनेक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और पुरातात्विक स्थल हैं जो गौरवशाली अतीत के प्रसंगों से जुड़े हैं। मध्यप्रदेश सरकार के इस बजट में उन सभी स्थानों के विकास को महत्व दिया गया है। जिससे पर्यटन बढ़ेगा और मध्यप्रदेश की विशिष्ठ पहचान संसार के सामने आ सकेगी। इससे एक तीसरा लाभ भी है जो प्रदेश की वर्तमान पीढ़ी में एक विशिष्ट आत्म विश्वास का संचार करेगा। वही पौधा विशाल वृक्ष बनकर आसमान की ऊँचाइयों को छूता है जिसकी जड़ें गहरी होतीं हैं। यदि जड़ें कमजोर हैं तो वृक्ष पहली बरसाती बाढ़ में ही बह जायेगा। इसलिये जड़ों का गहरा और मजबूत होना जरूरी है। यही सिद्धांत समाज और राष्ट्र के दीर्घजीवन पर भी लागू होता है। इसीलिए प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी ने विकसित भारत यात्रा को विरासत से जोड़ा है। जिसे मध्यप्रदेश सरकार ने भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रात है। यह संसार के प्राचीनतम भूभागों में से एक है। अरावली, सतपुड़ा और विन्ध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं से समृद्ध यह भूभाग तब भी था जब हिमालय नहीं था और यूरोप ने आकार भी नहीं लिया था। यहाँ करोड़ो वर्ष पुराने जीवाश्म और लाखों वर्ष पुराने शैलचित्र मिलते हैं। डायनासोर के जीवाश्म भी मध्यप्रदेश में मिले हैं। डाॅ मोहन सरकार के इस बजट में इन सभी विशिष्ट स्थलों को सहेजने का प्रावधान किया है। वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने संस्कृति पर्यटन और धर्मस्व विभाग में 1610 करोड़ का प्रावधान किया है। इसके अंतर्गत दो जीवाश्म पार्क विकसित करने किये जायेगें इनमें करोडों वर्ष पुराने डायनासोर के जीवाश्म सहित वे सभी “फाॅसिल्स” सहेजे जायेगें जो आज भी पूरे विश्व केलिये कौतुहल हैं। फाॅसिल्स पार्क विकसित हो जाने से संसार भर के शोधकर्ता मध्यप्रदेश आयेंगे। इससे प्रदेश की साख पूरे संसार में बढ़ेगी और स्थानीय नागरिकों को रोजगार के परोक्ष अवसर भी मिलेंगे। इसके साथ औकारेश्वर, महाकाल उज्जैन, मैहर जैसे धार्मिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित करने के प्रावधान किये गये हैं। बजट में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ के लिये दो हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष प्रयागराज महाकुंभ में श्रृद्धालुओं की संख्या को देखकर मध्यप्रदेश सरकार अभी से सावधान हुई है। बजट में महाकाल लोक की भाँति ओंकारेश्वर महालोक विकसित करने का प्रावधान है। औकारेश्वर आदि शंकराचार्य जी की तपोस्थली भी रही है। यहाँ आचार्य शंकर अद्वैत वेदान्त संस्थान स्थापना के साथ अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदान्त संस्थान की स्थापना की जा रही है। इसके लिये पाँच सौ करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम अपनी वनयात्रा में मध्यप्रदेश भी आये थे। चित्रकूट से लेकर अमरकंटक तक उनकी यात्रा के चिन्ह हैं। बजट में रामपथ गमन के विकास केलिये तीस करोड़ का प्रावधान किया गया है। वही॔ महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण की यात्रा चिन्हों को समेटने केलिये श्रीकृष्ण पाथेय योजना पर दस करोढ़ रुपये का प्रावधान है। इनके अतिरिक्त धार्मिक और सांस्कृतिक अन्य 14 स्मारकों को सहेजने केलिये बजट में 507 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश सरकार इन सभी स्थलों पर अधोसंरचना के विकास के साथ पर्यटन प्रोत्साहन की योजना पर काम कर रही है । इससे दो लाभ होंगे एक तो पर्यटन से स्थानीय नागरिकों को परोक्ष रोजगार मिलेगा और दूसरा मध्यप्रदेश की विरासत संसार के सामने आ सकेगी। इन सभी स्थलों पर धार्मिक ग्रंथों, साहित्य और वैज्ञानिक अनुसंधान एवं अध्ययन केन्द्र भी स्थापित किये। इस मद पर सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मध्यप्रदेश सरकार के इस बजट में यदि अपनी विरासत सहेजने का प्रावधान किया गया है तो आधुनिक विकास यात्रा केलिये औद्योगिकरण पर भी जोर दिया है । यह पूरा वर्ष उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जायेगा। बजट में 39 नये औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की घोषणा की गई है, उद्योगों केलिये भूमि आवंटन की अवधि 59 दिन से घटाकर 29 दिन कर दिया गया है। निवेश अनुदान के लंबित प्रकरण के निराकरण केलिये बजट प्रावधान भी बढ़ाया है। इन निर्णयों से मध्यप्रदेश के औद्योगीकरण की गति बढ़ेगी। विशेषकर उद्योग वर्ष मनाने की घोषणा से स्थानीय नागरिकों में उद्योग स्थापना के प्रति रुचि जाग्रत होगी। वे अपनी रुचि, प्रतिभा और क्षमता के अनुरुप अपना उद्योग व्यापार स्थापित करने की ओर प्रोत्साहित होंगे। मध्यप्रदेश सरकार की यह नीति आधुनिक दुनियाँ की प्रगति दौड़ में प्रदेश और देश को अग्रणी बनने केलिये महत्वपूर्ण है।

आज की दुनियाँ में विकास की दौड़ की बुनियाद औद्योगिकरण है। औद्योगिकरण की मानों एक स्पर्धा चल रही है। इसमें अग्रणी रहने केलिये औद्योगिकरण में नवाचार जरूरी है। इन नवाचारों केलिये ही पहले मध्यप्रदेश में क्षेत्रीय इन्वेस्टर्स समिट और बाद में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन हुये। बजट के इन प्रावधानों से इन नवाचारों को गति मिलेगी। इसीलिए मध्यप्रदेश सरकार ने अपने बजट में “विरासतों को सहेजने के साथ औद्योगिक विकास के भी प्रावधान किये हैं। विरासत सहेजने से आत्मविश्वास बढ़ेगा और औद्योगिक योजनाओं से आधुनिक विकास को गति मिलेगी।

लोकल फाॅर वोकल के साथ प्रगति की यात्रा

वित्तमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने प्रत्येक जिले के अपने विशिष्ट उत्पाद को प्रोत्साहित करने की घोषणा की है। इसके स्थापित किये जाने वाले लघु कुटीर और मध्यम उद्योगों को भूमि आवंटन, अनुदान और उत्पाद विक्रय को प्रोत्साहित करने की घोषणा भी की है। मध्यप्रदेश सरकार के इस बजट में सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत को सहेजने के साथ प्राकृतिक विशेषताओं को भी संसार के सामने लाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशेषता होती है इसे उस क्षेत्र के निवासियों के शिल्प कौशल उत्पाद, फसलों एवं फलों की विशिष्ठता से समझा जा सकता है । इस बजट में प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पाद को प्रोत्साहित करने की घोषणा की गई है। उस विशिष्ट उत्पाद से प्रत्येक जिले की विशेष पहचान वैश्विक होगी, वैश्विक मार्केट मिलेगा। मुद्रा के परिचालन से अर्थ व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी। इसके लिये परिवहन व्यवस्था का सक्षम होना आवश्यक है। बजट में इस मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति केलिये गांव और कस्बों के साथ मँझरे और टोलों को प्रमुख सड़क मार्गों से जोड़ने की घोषणा की गई है। गांव, कस्बों, मँझरे टोलों तक परिवहन सेवाएँ बढ़ने से स्थानीय उत्पाद को बाजार मिलने में सुविधा होगी और निवेशकों में आकर्षण बढ़ेगा। बजट में प्रत्येक जिले के विशेष के उत्पाद को पहचान बनाने की घोषणा की गई है। इतिहास में भारत को “सोने की चिड़िया” कहा गया है। भारत की यह समृद्धि स्थानीय उत्पाद की विशिष्टता के आधार पर ही मिली थी। मध्यप्रदेश सरकार के बजट की यह योजना बहुत दूरगामी परिणाम देने वाली है । आरंभ में भले ही जनरुचि जागरण की गति धीमी रहे, क्रियान्वयन भी धीमा हो सकता है लेकिन के मध्यप्रदेश रचना के लिये यह आवश्यक है। इसलिये वित्तमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने अपने बजट भाषण में और बाद में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपनी प्रतिक्रिया में वर्ष 2047 में मध्यप्रदेश के वित्तीय स्वरूप का भी संकेत दिया । वर्ष 2047 भारत की स्वतंत्रता का शताब्दी वर्ष है। प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी उस वर्ष तक भारत को विश्व का सबसे सशक्त राष्ट्र बनाने का संकल्प व्यक्त किया है। यह तभी पूरा होगा जब भारत का प्रत्येक प्रदेश विकास की दौड़ में अग्रणी होगा । मध्यप्रदेश सरकार के बजट में प्रत्येक जिले की पहचान उसके विशिष्ट उत्पाद की इस योजना से विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा और “लोकल फाॅर वोकल” सिद्धांत का क्रियान्वयन भी।

बजट में गरीब, महिला, किसान और युवाओं को सशक्त बनाने के प्रावधान

भारत की पहचान उसके कला-कौशल, प्रतिभा और श्रम साधना से रही है। समृद्धि का केन्द्र युवा महिलाएँ और किसान रहे हैं। भारत की महिलाएँ कृषि कार्य और शिल्प कौशल दोनों में बराबरी से सहभागी रहीं हैं। लेकिन मध्यकाल के दमन और शोषण से स्थिति विपरीत हो गई। इससे गरीबी के रूप में नया वर्ग सामने आया। समाज और राष्ट्र की विकास यात्रा में गरीबी सबसे बड़ी बाधक होती है। मध्यप्रदेश सरकार ने अपने बजट में इन दोनों दिशाओं में प्रावधान किये हैं। एक ओर गरीबी उन्मूलन केलिये अपना खजाना खोला है। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत 1.33 करोड़ परिवारों को निशुल्क राशन दिया जा रहा है। और दूसरी ओर युवा, महिला और किसानों के सशक्तिकरण की योजनाओं पर भी फोकस किया है। बजट में पंचायत और ग्रामीण विकास के लिए 19 हजार 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने धान खरीदी में किसानों को समर्थन मूल्य पर अनुदान बढ़ाया है। किसानों को अपनी आय बढ़ाने केलिये पशु पालन केलिये प्रोत्साहित किया है । पाँच किलो दुग्ध उत्पादन पर बोनस देने का प्रावधान किया गया है। सरकार की ग्रामीण विकास योजनाओं से एक ओर गांवों की आधारभूत समस्याओं का समाधान होगा वहीं धान खरीदी के अनुदान और पशुपालन को प्रोत्साहित करने से किसान की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। वित्तमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने अत्याचार अधिनियम के लिए 180 करोड़ का प्रावधान, अनुसूचित जाति विकास के लिए 32 करोड़ का प्रावधान, आहार अनुदान योजना में प्रत्येक महिला को 1500 रुपये देने, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत 1 करोड़ 33 लाख परिवार को निशुल्क राशन दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार बीमा समिति का गठन करके अपने सभी नागरिकों जोड़ेगी। आने वाला समय तकनीकि और कौशल विकास का होगा। जो युवा अपनी प्रतिभा को विकसित कर सकेगा वह प्रगति की दौड़ में अग्रणी होगा। भविष्य की इस गति का आकलन करके मध्यप्रदेश सरकार ने अपने बजट में 22 आईटीआई कॉलेज खोलने की घोषणा की है। स्वास्थ्य की चुनौतियों का सामना करने केलिये चिकित्सकों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है। इसके लिये बजट में एमबीबीएस की 400 और मेडिकल पीजी की 255 सीटें बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ 11 नए आयुर्वेदिक कॉलेज खोले जायेगे। मध्यप्रदेश सरकार प्रति वर्ष 50 जनजातीय विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजा जाएगा। युवाओं में शारीरिक और खेल क्षमताओं का विकास हो सके इसके लिये प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक खेल स्टेडियम खोला जायेगा।
वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने अपने बजट भाषण के समापन में कहा कि- आंकड़े नहीं, विश्वास लिखा है, हमने अब आकाश लिखा है” इस पंक्ति में मध्यप्रदेश के विकास और भविष्य की यात्रा संकल्प है। यह बजट कहने केलिये एक वर्ष का आय व्ययक है लेकिन इसमें विकसित प्राँतों में मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाने का प्रारूप भी है।

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