कृति सनोन हैं बॉलीवुड की चमकती सितारा

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कृति सनोन ने बॉलीवुड में अपनी मेहनत और प्रतिभा से एक अलग पहचान बनाई है। 2014 में टॉलीवुड फिल्म 1: Nenokkadine और बॉलीवुड की Heropanti से अपने करियर की शुरुआत करने वाली कृति ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की। Heropanti के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। इसके बाद Dilwale(2015), Bareilly Ki Barfi (2017), और Luka Chuppi(2019) जैसी फिल्मों ने उनकी अभिनय क्षमता को साबित किया। 2021 में Mimi में एक सरोगेट माँ की भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार दिलाया, जिसने उनके करियर को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।

कृति की खासियत उनकी बहुमुखी प्रतिभा है। वह रोमांटिक कॉमेडी से लेकर थ्रिलर और ड्रामा तक हर жанр में सहजता से ढल जाती हैं। 2024 में Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya और Crew जैसी व्यावसायिक सफलताओं और Do Patti में दोहरी भूमिका ने उनकी अभिनय की गहराई को दर्शाया। उनकी आगामी फिल्में जैसे Tere Ishk Mein और Cocktail 2 उनके करियर को और मजबूती देने की संभावना रखती हैं।

कृति ने अभिनय के साथ-साथ प्रोडक्शन में भी कदम रखा है। उनकी प्रोडक्शन कंपनी Blue Butterfly Films और स्किनकेयर ब्रांड Hyphen (400 करोड़ की कमाई) उनकी उद्यमशीलता को दर्शाते हैं। वह सामाजिक मुद्दों पर सक्रियता और सोशल मीडिया पर मजबूत उपस्थिति के साथ युवाओं को प्रेरित करती हैं।

भविष्य में कृति की बढ़ती लोकप्रियता, विविध भूमिकाएँ, और व्यावसायिक समझ उन्हें बॉलीवुड की अग्रणी अभिनेत्रियों में स्थापित कर सकती है। उनकी मेहनत और समर्पण के साथ, वह न केवल अभिनय बल्कि प्रोडक्शन और बिजनेस में भी नई ऊँचाइयाँ छूने को तैयार हैं।

अफवाहों का मेला: मोदी, शाह, जोशी और अन्नामलाई की कुर्सी की सैर!

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दिल्ली । भारत की सियासी गलियारों में इन दिनों एक ऐसी अफवाह उड़ रही है, मानो कोई बॉलीवुड मसाला फिल्म का ट्रेलर लॉन्च हुआ हो! सुनने में आया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब राष्ट्रपति भवन की शोभा बढ़ाएंगे, गृह मंत्री अमित शाह किसी राज्य के राजभवन में राज्यपाल की कुर्सी संभालेंगे, और संजय जोशी, जो कभी बीजेपी के गुमनाम योद्धा थे, अचानक प्रधानमंत्री की गद्दी पर विराजमान होंगे। इतना ही नहीं, तमिलनाडु के फायरब्रांड नेता के. अन्नामलाई को पार्टी का नया अध्यक्ष बनाने की भी खुसर-पुसर है। ये अफवाहें कहां से जन्मीं? शायद किसी चाय की टपरी पर, या फिर सोशल मीडिया के उस अंधेरे कोने में, जहां सत्य और कल्पना का मिलन होता है।

इस तमाशे की सच्चाई ढूंढने की कोशिश की, तो पता चला कि ऐसी कोई ठोस जानकारी नहीं है। ना कोई आधिकारिक बयान, ना ही विश्वसनीय स्रोत। बस, कुछ लोग हैं, जो सियासी गपशप को हवा देने में माहिर हैं। शायद ये अफवाहें बीजेपी के आंतरिक समीकरणों पर कटाक्ष हैं, या फिर विपक्ष की शरारत। जोशी और मोदी के पुराने मतभेद तो जगजाहिर हैं, लेकिन क्या इतना ड्रामा संभव है? और अन्नामलाई? वो तो अभी तमिलनाडु में अपनी जड़ें जमाने में व्यस्त हैं!

तो जनता से निवेदन है, इन अफवाहों को मसाला समझकर हंसी में उड़ाएं। सियासत का असली खेल तो संसद और चुनावी रैलियों में होता है, ना कि व्हाट्सएप फॉरवर्ड में। और हां, अगली बार कोई ऐसी खबर सुनें, तो पहले चाय की चुस्की लें, फिर सोचें—क्या ये सच है, या बस एक और सियासी चटखारा?

प्रज्वल रेवन्ना बलात्कार मामले में दोषी, कोर्ट में रो पड़ा पूर्व सांसद

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बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार, 1 अगस्त 2025 को जनता दल (सेकुलर) के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार के एक मामले में दोषी ठहराया। यह फैसला कर्नाटक के हासन जिले में उनके खिलाफ दर्ज चार बलात्कार मामलों में से पहला है। 34 वर्षीय रेवन्ना को अपनी पारिवारिक फार्महाउस पर एक पूर्व घरेलू सहायिका के साथ बलात्कार करने का दोषी पाया गया। सजा की अवधि का ऐलान 2 अगस्त को होगा।

मामला पिछले साल मई में तब सुर्खियों में आया जब रेवन्ना द्वारा कथित तौर पर रिकॉर्ड किए गए यौन उत्पीड़न के वीडियो सार्वजनिक हुए। पीड़िता ने 8 मई 2024 को शिकायत दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि रेवन्ना ने उसका यौन शोषण किया और वीडियो बनाया। कर्नाटक पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने 1,632 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 113 गवाहों के बयान और फॉरेंसिक साक्ष्य शामिल थे। एक साड़ी, जिस पर स्पर्म के निशान मिले, को निर्णायक सबूत के रूप में पेश किया गया।

रेवन्ना को 31 मई 2024 को जर्मनी से लौटने पर गिरफ्तार किया गया था, जहां वह वीडियो लीक होने के बाद भाग गए थे। ट्रायल 31 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ और सात महीनों में पूरा हुआ। कोर्ट ने 23 गवाहों की गवाही, वीडियो क्लिप्स की फॉरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल की जांच रिपोर्ट की समीक्षा की। फैसला सुनाए जाने के बाद रेवन्ना कोर्ट में फूट-फूटकर रो पड़े।

रेवन्ना पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत बलात्कार, यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के आरोप थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में हासन से जेडी(एस) उम्मीदवार रहे रेवन्ना चुनाव हार गए थे। अन्य तीन मामलों की जांच और सुनवाई अभी जारी है। यह मामला कर्नाटक की राजनीति में हलचल मचा सकता है।

क्या राहुल का षड्यंत्र सच में नाकाम हो गया?

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दिल्ली। प्रदीप सिंह ने एक यूट्यूब वीडियो में दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक कथित “बड़ा षड्यंत्र” नाकाम हो गया है। यह वीडियो, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना, देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की कथित रणनीतियों को उजागर करने का प्रयास करता है। प्रदीप सिंह का दावा है कि राहुल गांधी की रणनीति सरकार पर दबाव बनाने और जनता के बीच अविश्वास फैलाने की थी, लेकिन यह पूरी तरह विफल रही।
राहुल गांधी पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वे केंद्र सरकार को अस्थिर करने के लिए विवादास्पद बयानबाजी और विदेशी मंचों पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश करते हैं। प्रदीप सिंह के वीडियो में इस बात पर जोर दिया गया कि राहुल की ये रणनीतियाँ अब जनता के बीच प्रभाव खो रही हैं। उनका कहना है कि जनता और सोशल मीडिया की सक्रियता ने इन प्रयासों को नाकाम कर दिया। साथ ही, सरकार की नीतियों और उपलब्धियों ने विपक्ष के दावों को कमजोर किया है।
हालांकि, इस दावे की सत्यता पर सवाल उठते हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस समर्थक इसे महज राजनीतिक प्रचार मानते हैं। उनका तर्क है कि विपक्ष का काम सरकार की कमियों को उजागर करना है, न कि षड्यंत्र रचना। प्रदीप सिंह का वीडियो एक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता प्रतीत होता है, जिसमें भावनात्मक अपील पर जोर है। दूसरी ओर, यह भी सच है कि राहुल गांधी के कुछ बयानों ने विवाद को जन्म दिया, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
अंततः, यह कहना मुश्किल है कि राहुल का कथित षड्यंत्र पूरी तरह नाकाम हुआ या नहीं। भारतीय राजनीति में ध्रुवीकरण और प्रचार के इस दौर में, दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को सही ठहराने में जुटे हैं।
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