Globally 27 journalists killed since 1 January 2026

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Geneva : Since 1 January, 27 journalists have been killed worldwide, disclosed the Press Emblem Campaign (PEC) on the eve of World Press Freedom Day observed on 3 May. The global media safety and rights body lamented that the Israeli government alone was responsible for nearly two-thirds of the victims (16 out of 27). ‘We must note the lack of progress in protecting journalists and combating impunity,’ stated Blaise Lempen, president of PEC (pressemblem.ch).

The serious tensions in the Middle East largely explain why the death toll remains high, following record numbers in 2023, 2024, and 2025. Of the 27 victims recorded in the four months since the start of the year, 17 are linked to the conflict in the Middle East, and 16 were killed by Israeli military forces. Specifically, 9 journalists were killed in Lebanon, 6 in the Gaza Strip, 1 each in Iran and Syria. Outside the Middle East, the PEC recorded 2 victims each in Mexico and Venezuela, 1 each in Guatemala (5 in Latin America), Somalia, Uganda, India, Bangladesh and the Philippines.

“It is deeply regrettable that a single government – that of the State of Israel, which is in principle a democracy – is responsible for nearly two-thirds of the victims. This demonstrates an unacceptable lack of respect on the part of Israeli forces for civilian lives and media independence, with in some cases a deliberate intent to target journalists, which constitutes a war crime,” added Lempen.

The pretexts put forward by Israel – namely that the targeted journalists, though clearly identified as members of the press, were affiliated with Hamas or Hezbollah – do not justify their killing if these journalists were not acting as combatants. The PEC regrets that there are no investigations and prosecutions against the perpetrators of these war crimes, a situation of impunity that encourages further violations. The PEC also denounces the continued unacceptable restrictions on international media access to the Gaza Strip.

PEC deplores the international community’s lack of response – beyond mere lip service – even though States have adopted numerous resolutions in recent years on the safety of journalists aimed at better combating impunity. It is disheartening to note that there is currently no political will on the part of States to strengthen the protection of journalists in war zones and to better enforce international humanitarian law.

Finally the PEC hopes that the 2026 World Press Freedom Day Conference titled ‘Shaping a Future in Peace’, organized by UNESCO on 4 and 5 May in Lusaka of Zambia, will reaffirm the need to effectively combat the erosion of freedom of expression. The key would be to restore the conditions for global peace and dialogue, concluded the PEC statement.

PEC demands fair probe and justice to Indian scribe Jaganmohan Reddy

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Geneva: Press Emblem Campaign (PEC), the global media safety and rights body, expresses concern over the murder of Indian scribe V Jaganmohan Reddy, who was hacked to death on Tuesday as the Telugu scribe went for a morning walk at Venkatagiri Kotain area under Chittoor district of Andhra Pradesh. Local media reported that Jaganmohan (40) was targeted by a group of miscreants with lethal weapons and he died on the spot. The ABN Andhra Jyothy newspaper scribe was later sent to Palamaneru government hospital for an autopsy.

Various journo-bodies organized protest demonstrations at Tirupati Press Club, where Indian Journalists Union (IJU) claimed that Jaganmohan was attacked just a few days after he reported on sandalwood smugglers in the locality. The national journo-body also demanded to formulate a strict policy to safeguard the working journalists and the press freedom in general.

“PEC condemns the murder of Telugu daily journalist on 28 April and urges the State government to thoroughly investigate the motive behind the killing,” said Blaise Lempen, president of PEC (https://www.pressemblem.ch/pec-news), adding that the authorities must nab the culprits to punish them under the law. He also stated that Jaganmohan Reddy became the first media victim in India this year and 26th across the world.

PEC’s south and southeast Asia representative Nava Thakuria informed that Chittoor is the home district of AP chief minister N Chandrababu Naidu, where Jaganmohan was murdered. The victim scribe left behind his wife and two children. Mentionable is that, India lost six journalists to assailants last year where the victims include Mukesh Chandrakar, Raghavendra Vajpayee, Sahadev Dey, Dharmendra Singh Chauhan, Naresh Kumar and Rajeev Pratap Singh.

पीसीआई को चेयरमैन मिला, पत्रकारों के कोटे की सीटें अब भी खाली

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नव ठाकुरीया

गुवाहाटी । महीनों की अनिश्चितता के बाद Press Council of India (प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया) को अपना चेयरमैन मिल गया है, क्योंकि Justice Ranjana Prakash Desai (जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई) ने 24 अप्रैल 2026 को पदभार ग्रहण कर लिया। भारत के सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जिन्हें तीन वर्ष की दूसरी अवधि के लिए नामित किया गया था, 17 जून 2022 से 16 दिसंबर 2025 तक भी पीसीआई की चेयरमैन रह चुकी हैं।

हालांकि, कार्यरत पत्रकारों के लिए निर्धारित कोटे की सीटें अब भी खाली हैं, क्योंकि 15वीं काउंसिल को पूर्ण करने के लिए सात सदस्य (जो पेशेवर पत्रकारों—संपादकों के अतिरिक्त—का प्रतिनिधित्व करेंगे) और छह सदस्य (जो संपादक-पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करेंगे) का चयन अभी शेष है।
यह उल्लेखनीय है कि दो महीने पहले राज्यसभा सदस्य Sasmit Patra (सस्मित पात्रा) ने नई दिल्ली में केंद्र सरकार से लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा और मीडिया की जवाबदेही को सुदृढ़ करने के लिए मौजूदा प्रेस काउंसिल को पूर्ण करने का आग्रह किया था। 10 फरवरी को संसद के उच्च सदन में बोलते हुए बीजू जनता दल के नेता ने जोर देकर कहा कि 5 अक्टूबर 2024 को 14वीं काउंसिल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और उत्तरदायी प्रेस के लिए पूर्ण काउंसिल का गठन आवश्यक था। पात्रा ने विशेष रूप से नए चेयरमैन की नियुक्ति पर बल दिया, क्योंकि पीसीआई 17 दिसंबर 2025 से बिना प्रमुख के कार्य कर रही थी, ताकि इस वैधानिक, अर्ध-न्यायिक और स्वायत्त संस्था के पूर्ण गठन का मार्ग प्रशस्त हो सके।
वर्तमान में पीसीआई में कार्यरत सदस्यों में सुधांशु त्रिवेदी, बृज लाल, संबित पात्रा, नरेश म्हस्के और काली चरण मुंडा (लोकसभा सदस्य), अश्विनी के मोहपात्रा (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग), मनन कुमार मिश्रा (बार काउंसिल ऑफ इंडिया), के. श्रीनिवासराव (साहित्य अकादमी), सुधीर कुमार पांडा, एम.वी. श्रेयम्स कुमार, गुरिंदर सिंह, अरुण कुमार त्रिपाठी, ब्रज मोहन शर्मा और आरती त्रिपाठी शामिल हैं, जो विभिन्न श्रेणियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। शेष 14 सीटों को भरने के प्रयास जारी हैं, हालांकि हाल के दिनों में विभिन्न बाधाएँ सामने आई हैं।

29 सदस्यीय यह मीडिया निगरानी संस्था, जिसे प्रारंभ में 1965 के अधिनियम के तहत स्थापित किया गया और 1978 में पुनर्गठित किया गया, देश में समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानकों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कार्य करती है। इसमें 13 पेशेवर पत्रकारों का प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है—जिनमें 6 संपादक और 7 कार्यरत पत्रकार शामिल होते हैं—लेकिन वर्तमान में ये सीटें रिक्त हैं। कुछ समय पहले कई मीडिया संगठनों ने पीसीआई को अधिक अधिकार देकर उसे पुनः सक्रिय करने की मांग भी की थी।

यह संकट तब उत्पन्न हुआ जब कई राष्ट्रीय पत्रकार संगठनों ने पीसीआई के नियमों में प्रस्तावित बदलाव का विरोध किया, जिसके तहत सदस्यों का चयन ‘वर्किंग जर्नलिस्ट्स की राष्ट्रीय यूनियन’ के बजाय विभिन्न ‘प्रेस क्लबों’ से किया जाना था। विरोध करने वाले संगठनों का तर्क है कि प्रेस क्लब मूलतः स्थानीय दायरे तक सीमित होते हैं और उनमें गैर-पत्रकार सदस्य भी शामिल हो सकते हैं, जिससे पेशेवर पत्रकारों के हितों का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं हो पाता। अक्सर प्रेस क्लब अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए शिक्षाविदों, लेखकों, फिल्म जगत से जुड़े लोगों और राजनयिकों को भी सदस्यता दे देते हैं, जिससे कई महत्वपूर्ण अवसरों पर पेशेवर पत्रकारों के साथ न्याय नहीं हो पाता।

दूसरी ओर, मान्यता प्राप्त पत्रकार यूनियन देशभर के पत्रकारों का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती हैं। कुछ संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर न्यायालय का रुख भी किया, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई।

चूँकि पीसीआई कई महीनों तक बिना किसी प्रमुख के कार्य करती रही—जो इसके इतिहास में अभूतपूर्व स्थिति थी—इसने यह प्रश्न खड़ा किया कि देश के विशाल प्रिंट मीडिया जगत, जिसमें एक लाख से अधिक पंजीकृत प्रकाशन शामिल हैं, की निगरानी किस प्रकार हो रही है। पीसीआई के पास शिकायतों की सुनवाई का अधिकार है, लेकिन वह नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई करने में सीमित है और संबंधित संस्थानों या व्यक्तियों पर जुर्माना नहीं लगा सकती।

अखबारों के अलावा, देश में लगभग 400 समाचार चैनल और लाखों डिजिटल मंच सक्रिय हैं, लेकिन ये अभी तक पीसीआई के दायरे में नहीं आते। तकनीक आधारित इन आधुनिक माध्यमों को परिषद के अधिकार क्षेत्र में लाने और उसे अधिक सशक्त बनाने की मांग लगातार उठती रही है।
(लेखक पूर्वी भारत के वरिष्ठ पत्रकार)

आदि पत्रकार -देवर्षि नारद

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लखनऊ । सृष्टिकर्ता प्रजापति ब्रहमा के मानस पुत्र नारद। महान तपस्वी, तेजस्वी, सम्पूर्ण वेदान्त, शास्त्र के ज्ञाता तथा समस्त विद्याओं में पारंगत नारद। ब्रहमतेज से संपन्न नारद। नारद जी के महान कृतित्व व व्यक्तित्व पर जितनी भी उपमाएं लिखी जाएं कम हैं। देवर्षि नारद ने अपने धर्मबल से परमात्मा का ज्ञान प्राप्त किया । वे प्राणिमात्र के कल्याण के लिए सदा उपस्थित रहे। वे देवता, दानव और मानव समाज के हित के लिये सर्वत्र विचरण, चिंतन व विचार मग्न रहते थे। देवर्षि नारद की वीणा से निरंतर नारायण की ध्वनि निकलती रहती थी।भगवदभक्ति की स्थापना तथा प्रचार के लिए ही नारद का अवतार हुआ। नारद चिरंजीवी हैं। नारद जी का संसार में अमिट प्रभाव है। देव, दानव, मानव सबके सत्कार्यों में देवर्षि नारद सहायक सिद्ध होते हैं। नारद जी का जीवन जनकल्याण व मंगलमय जीवन के लिये ही है। नारद जी पर नारायण की विशेष कृपा है। वे शत्रु तथा मित्र दोनों में ही लोकप्रिय थे।
देवर्षि नारद त्रिकालदर्शी व पृथ्वी सहित सभी ग्रह नक्षत्रों में घट रही घटनाओें के ज्ञाता तो थे ही उनके मन में कठिन से कठिन समस्याओं के समाधान भी चलायमान रहते थे। देवर्षि नारद व्यास, वाल्मीकि, शुकदेव जी के गुरु रहे। नारद ने ही प्रह्लाद, ध्रुव, राजा अम्बरीष आदि को भक्तिमार्ग पर प्रवृत्त किया। नारद ब्रहमा, शंकर, सनतकुमार, महर्षि कपिल, मनु आदि बारह आचार्यो में अन्यतम हैं। प्रचलित कथा के अनुसार देवर्षि नारद अज्ञातकुल शील होने पर भी देवर्षि पद तक पहुंच गये थे। बाल्यकाल में भी उनके मन में चंचलता नहीं थी, वे मुनिजनों की आज्ञा का पालन किया करते थे। उनकी अनुमति प्राप्त करके वे बरतनों में लगी हुई जूठन दिन में एक बार खा लिया करते थे। इससे उनके जन्म के सारे पाप धुल गये। नारद की सेवा से प्रभावित होकर मुनिगण उन पर अपनी कृपा रखने लगे।

संतों की सेवा करते – करते उनका हृदय शुद्ध रहने लगा। भजन – पूजन में उनकी रुचि बढ़ती गयी। उनके हृदय में भक्ति का प्रादुर्भाव हो गया। वे अपनी माता के साथ ब्राहमण नगरी में रहते थे। माता के कारण वे भी कहीं अन्यत्र नहीं जा सके। कुछ दिनों बाद एक दिन उनकी माता को सर्प ने काट लिया जिससे उनकी मृत्यु हो गयी नारद जी ने उसे विधि का विधान माना और गृह का त्याग करके उत्तर दिशा की ओर चल दिये। इसके बाद उन्होनें अपनी सतत साधना और तपस्या के बल पर देवर्षि का पद प्राप्त किया। किसी – किसी पुराण में देवर्षि नारद को उनके पूर्वजन्म में सारस्वत नामक एक ब्राहमण बताया गया है। जिन्होनें “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र के जाप से भगवान नारायण का साक्षात्कार किया।

कालान्तर में पुनः ब्रहमा जी के दस मानसपुत्रों के रूप में जन्म लिया। नारद शुद्धात्मा, शांत, मृदु तथा सरल स्वभाव के हैं। मुक्ति की इच्छा रखने वाले सभी लोगों के लिए नारद जी स्वयं ही प्रयत्नशील रहते हैं।नारद जी को ईश्वर के प्रत्यक्ष दर्शन होते थे। उन्हें ईश्वर का मन कहा गया है। वे परम हितैषी हैं उनका अपना कोई स्वार्थ नहीं हैं। वे प्रभु की प्रेरणा से निरंतर कार्य करते रहते हैं। नारद जी ने दक्ष प्रजापति के हयाश्व- शबलाक्ष नामक सहस्र पुत्रों को अध्यात्म तत्व का पाठ पढ़ाया। देवर्षि नारद ने सभी के लिये भगवदभक्ति का द्वार खोल रखा था। वे जीवमात्र के कल्याण के लिये भगवान नाम कीर्तन की प्रेरणा देते रहते हैं।

देवर्षि नारद का वर्ण गौर सिर पर सुंदर शिखा सुशोभित है। उनके शरीर में एक विशेष प्रकार की उज्वल ज्योति निकलती रहती थी। वे देवराज इंद्र द्वारा प्राप्त श्वेत दिव्य वस्त्रों को धारण किये रहते हैं। वे अनुषांगिक धर्मों के ज्ञाता थे। नारद लोप, आगम, धर्म तथा वृत्ति संक्रमण के द्वारा प्रयोग में आये हुये एक- एक शब्द की अनेक अर्थो में विवेचना करने में सक्षम थे। कृष्ण युग में गोपियों का वर्चस्व स्थापित किया। प्रथम पूज्य देव गणेश जी को नारद जी का ही मार्ग दर्शन प्राप्त हुआ था।

देवर्षि नारद स्वभावतः धर्म निपुण तथा नाना धर्मो के विशेषज्ञ हैं।वे चारों वेदों के ज्ञाता हैं। उन्होंने विभिन्न वैदिक धर्मों की मर्यादाएं स्थापित की हैं। वे अर्थ की व्याख्या के समय सदा संशयों का उच्छेद करते हैं। नारद जी के द्वारा रचित अनेक ग्रंथों का उल्लेख मिलता है – जिसमें प्रमुख हैं नारद पंचरात्र,नारद महापुराण,वृहदरदीय उपपुराण, नारद स्मृति, नारद भक्ति सूत्र, नारद परिवाज्रकोपनिषद आदि। इसके अतिरिक्त नगरीय शिक्षा शास्त्र के साथ ही अनेक स्तोत्र भी नारद जी के द्वारा रचित बताये जाते है।

भगवद भक्ति की स्थापना तथा प्रचार के लिये नारद जी का आविर्भाव हुआ। देवर्षि नारद धर्म के प्रचार तथा लोक कल्याण हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते थे। इस कारण सभी युगों में सभी लोकों में समस्त विद्याओं में समाज के सभी वर्गो में नारद जी का सदा से प्रवेश रहा है। मात्र देवताओं ने ही नहीं वरन दानवों ने भी उन्हें सदैव आदर किया है। समय -समय सभी ने उनसे परामर्श लिया है। नारद जी भागवत संवाददाता भी थे, संदेश वाहक भी थे और ब्रह्माण्ड के प्रथम पत्रकार भी माने गये।

नारद जी के विभिन्न उपनाम भी हैं। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में उन्हें संचारक अर्थात सूचना देने वाला पत्रकार कहा गया है।इसके अतिरिक्त संस्कृत के शब्दकोष में उनका एक नाम ”पिशुन“ आया है जिसका अर्थ है सूचना देने वाला संचारक, सूचना पहुंचाने वाला ,सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान तक देनेवाला है। आचार्य पिशुन से स्पष्ट है कि देवर्षि नारद तीनों लोकों में सूचना अथवा समाचार के प्रेषक के रूप में परम लोकप्रिय थे।

वे रामायण युग में भी थे तो महाभारत काल में पांडवों के सबसे बड़े हित साधक भी थे। जनमानस के कल्याणार्थ नारद मुनि ने सत्यनारायण भगवान की कथा, व्रत महात्मय आदि की श्रेष्ठता समाज में स्थापित की। जिज्ञासा प्रकट करने के बाद ही भगवान श्रीहरि ने नारद जी को समस्त पूजा एवं हवन का विस्तार से वर्णन किया और अंत में आश्वस्त करते हुए उनसे कहा कि श्रद्धा पूर्वक किया गया भगवान सत्य नारायण का व्रत सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है। महाभारत युग में भी पाण्डवों का हित साधन नारद जी ने ही किया था। महारानी द्रौपदी को पांच पांडवों के साथ रहने का नियम भी नारद जी ने ही बनवाया था जिससे पतिव्रता द्रौपदी और पांचों पांडवों के बीच सामंजस्य का वातवरण बना रहे।

नारद जी के व्यक्तित्व व कृतित्व को लेकर भांति – भांति की कथायें प्रचलित हैं। सभी पुराणों में महर्षि नारद एक मुख्य व अनिवार्य भूमिका में उपस्थित हैं। परमात्मा के विषय में संपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने वाले दार्शनिक को नारद कहा गया है।पुराणों में नारद को भागवत संवाददाता भी कहा गया है। यह भी सर्वमान्य है कि नारद की ही प्रेरणा से महर्षि वाल्मीकि ने रामायण जैसे महाकाव्य और व्यास ने महाभारत जैसे काव्य की रचना की थी।

नारद सदैव ही सामूहिक कल्याण की भावना को सर्वोपरि रखते थे। नारद में अपार संचार योग्यता व क्षमता थी।आदि पत्रकार नारद जी की पत्रकारिता सज्जन रक्षक व एवं दुष्ट विनाशक की थी। वे सकारात्मक पत्रकार की भूमिका में रहा करते थे। पत्रकार के रूप में काशी, प्रयाग,मथुरा ,गया ,बद्रिकाश्रम, केदारनाथ, रामेश्वरम सहित सभी तीर्थों की सीमा तथा महत्व का वर्णन नारद पुराण में मिलता हैं। देवर्षि नारद जी की पत्रकारिता समाज के लिए हितकारी व दुष्टों का संहार करने वाली थी। नारद जी की पत्रकारिता अध्यात्म पर आधारित थी। उन्होंने स्वार्थ , लोभ, एवं माया के स्थान पर परमार्थ को श्रेष्ठ माना। महान विपत्तियों से मानवता की रक्षा का काम किया।

वर्तमान समय में पत्रकारिता को नारदीय आदर्श अपनाने की आवश्यकता है।

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