सम्राट को सुशासन का हस्तांतरण 

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मृत्युंजय दीक्षित
दिल्ली । लम्बे संघर्ष और राजनैतिक उतार -चढ़ाव के बाद भारतीय जनता पार्टी को बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल गया है। यह अवसर राजग गठबंधन के माध्यम से आया है । अभी तक बिहार में भाजपा जद (यू) के साथ छोटे भाई की भूमिका मे थी अब बड़े भाई की भूमिका में आ गई है। जब बिहार से विधायक नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए तभी से बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की रणनीति पर काम चल रहा था। बिहार के निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना मन बनाया और राज्यसभा जाने के लिए तैयार हो गए। नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने से लेकर सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण तक सारी प्रक्रिया बहुत ही सधी हुई रही जिससे न तो विरोधी दलों को कोई अवसर मिला और न ही पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थक नाराज होकर कोई गठबंधन विरोधी कार्य कर सके। बिहार में नीतीश कुमार के युग का नयी पीढ़ी के सम्राट को हस्तांतरण हो गया है। यह निश्चित है कि बिहार में केवल मुख्यमंत्री का केवल चेहरा बदला है सरकार नीतीश कुमार जी के निर्देशन व उनके किए गए कार्यों के आधार पर ही चलने वाली है।
सम्राट चौधरी के साथ जदयू के दो नेताओं विजय चौधरी और विजेंद्र यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। मंत्रिमंडल विस्तार बाद में किया जाएगा। अभी तक भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में गठबंधन की राजनीति में ऐसा सत्ता परिवर्तन किसी भी राज्य में कहीं भी नहीं देखा गया है। यह नेतृत्व परिवर्तन भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास लिख रहा है। मुख्यमंत्री के पद पर सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण के बाद भाजपा नेताओं ने दावा किया कि जैसे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने बिहार की जनता की 18 वर्षों से भी अधिक समय तक सेवा की वैसे ही अब सम्राट चौधरी भी 20 वर्षों तक बिहार की सेवा करने वाले हैं।
कौन हैं सम्राट चौधरी – सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने हैं और राजनीतिक दृष्टिकोण से युवा हैं। सम्राट चौधरी ओबीसी के कोइरी समुदाय से आते हैं। सम्राट चौधरी को बिहार के सवर्ण समाज मे भी पसंद किया जाता है। सवर्णों के मुद्दों पर भी वह मुखर रहे हैं। सम्राट की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1990 में हुई और वे लालू यादव की राजद से वर्ष 2000 में परबत्ता विधानसभा सीट से विधायक और लालू यादव की सरकार में मंत्री बने। 2014 में वो नीतीश कुमार जी के साथ आ गए किन्तु जदयू के साथ उनकी मित्रता अधिक दिनों तक नहीं चली और वह 2017 में बीजेपी में शामिल हुए। वर्ष 2023 में बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाए गये। जनवरी 2024 में वह नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री बने और कई महत्वपूर्ण विभागों वित्त, स्वास्थ्य, शहरी विकास, पंचायती राज को संभाला। मात्र आठ से नौ वर्षों मे ही उनकी भाजपा मे तेज तरक्की पार्टी की ओबीसी राजनीति और रणनीति का अहम हिस्सा है। भाजपा ने सम्राट चौधरी का चयन काफी सोच समझ कर किया है ताकि पिछड़ों – दलितों -महादलितों की सियासत में कोई नया खालीपन न पैदा हो।

सम्राट चौधरी को भले ही भाजपा में बाहर से आया नेता बताया जा रहा हो किंतु वह काफी दमदार हैं और उनकी शैली आक्रामक है। वह लालू यादव के समीकरण को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं क्योकि उनकी राजनीति का सफर लालू यादव की राजद से ही प्रारंभ हुआ था और फिर वह नीतीश की पार्टी में भी गए और उसके बाद जीतनराम मांझी के साथ रहे। सम्राट के माध्यम से भाजपा ने पश्चिम बंगाल के ओबीसी समाज को एक बहुत बड़ा राजनैतिक संदेश भेजा है। बंगाल में ओबीसी समाज का मतदता बड़ी संख्या में है । वर्ष 2027 की शुरूआत मे ही उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में विधानसभा चुनाव होंगे उसको भी ध्यान में रखा गया है । राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि जातीय जनगण्ना की उथल पुथल के बीच बीजेपी को एक कद्दावर ओबीसी नेता की तलाश थी जो सम्राट चौधरी पूरी कर रहे हैं।

विचार करने वाली बात है कि क्या भारत में रूपयों के पेड़ लग गये है?

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सुखबीर सिंह डडवाल

रायपुर । देश मे कहीं भी चले जाइए,किसी भी सड़क पर, सभी जगह काम चल रहा है। पुरानी सड़क चौड़ी हो रही है, नई सड़क बन रही है, 2 Lane वाली 4 lane हो रही है।
नए Expressway बनाये जा रहे हैं।
शहरों में flyover बन रहे हैं ।

शायद ही कोई रेलवे स्टेशन ऐसा होगा जहां काम न लगा हो।
नई रेलवे लाइनें बिछ रही हैं।जो single Track थे उनको Double और Electrify किया जा रहा है। देश मे 4 तो नए DFC बोले तो Dedicated Freight Corridor बोले तो वो नई रेल लाइन बनाई जा रही हैं जिन पर सिर्फ मालगाड़ियां दौड़ेंगी।

देश की जितनी भी Unmanned Railway Crossing बोले तो मानव रहित रेलवे फाटक थे उनके नीचे से अंडरपास बनाये जा रहे हैं।

सन 2026 तक पूरे देश मे हर घर में नल से पानी ( कम से कम 55 लीटर पानी , प्रतिव्यक्ति , प्रतिदिन )देने की जोरदार तैयारियां चल रही है।
कई गीगावाट सोलर पॉवर की तैयारी है। भविष्य में फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी के लिए हाइड्रोजन को एक डॉलर प्रति किलो से नीचे बेचने की तैयारी चल रही है ।
सेना को आधुनिक बनाने के लिए हर हफ्ते नई मिसाइल का परीक्षण , एक से बढ़कर एक आधुनिक हथियारों की खरीदारी और आगे उनको देश में ही बनाने का जुनून भी सर पर हावी है ।100 से ज़्यादा शहरों में तो स्मार्ट सिटी का ही निर्माण कार्य चल रहा है।

नमामि गंगे में ही गंगा और उनकी सभी सहायक नदियों के किनारे बसे शहरों में बड़े बड़े गहरे सीवर पाइप लाइन बिछा के Sewage Treatment Plant बनाये जा रहे हैं। बनारस का Sewage Treatment Plant बनारस से 30 Km दूर 30 एकड़ जमीन पर बनाया जा रहा है।

पूरे बनारस शहर का Sewage वहां पाइप लाइन से जाएगा और ट्रीट हो के उस पानी को कृषि कार्यों में उपयोग होगा, ये सैकड़ों करोड़ का प्रोजेक्ट है और ऐसे ही Sewage Treatment Plants लगभग हर शहर कस्बे में बन रहे हैं।
भारत माला, सागर माला , चार धाम आल वेदर रोड , पूरे चीन बॉर्डर पर आल वेदर रोड्स , बिल्कुल नया दिल्ली – मुम्बई एक्सप्रेस वे जैसे वृहद प्रोजेक्ट्स पर कार्य चल रहा है।

Bullet Train प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। देश मे 100 से ज़्यादा Airports और हवाई पट्टी अपग्रेड की जा रही हैं।

देश मे 13 करोड़ शौचालय और 3 करोड़ मकान बन गए प्रधान मंत्री आवास योजना में, ये जो मैंने काम गिनाए ये देश मे समानांतर चल रहे कुल विकास / निर्माण कार्यों का 1% भी नही है।

गांव गिरांव में आ के देखिये, एक जेसीबी खाली नही है। सब किसी न किसी हाईवे निर्माण में लगी है।अब मुझे यह समझ में नही आ रहा कि ये जो देश भर में इतना निर्माण कार्य चल रहा है इसे बना कौन रहा है ? ये सब काम कर कौन रहा है ?

अलादीन का चिराग और उसका जिन्न हाथ आ गया है क्या ?

विपक्ष और प्रेस्टीट्यूट मीडिया कहता है कि सरकार रोज़गार देने में विफल रही…

आखिर ये सब निर्माण कार्य करने वाले कामगार जापान से आये हैं या सिंगापुर से ?

सड़क पर काम मे लगी जेसीबी कौन चला रहा है ? अडानी या अम्बानी ?

रोज़गार कहते किसे हैं ?
क्या सिर्फ सरकारी नौकरी को ?

(प्रस्तुति : कल्पेश पटेल)

क्या लैपटॉप को टेलीप्रॉम्प्टर (Teleprompter) की तरह किया जा सकता है इस्तेमाल

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भोपाल । हाँ, बिल्कुल! लैपटॉप को टेलीप्रॉम्प्टर (Teleprompter) की तरह आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। ये वीडियो बनाने वालों (YouTubers, content creators) के लिए बहुत आम और सस्ता तरीका है। आपको महँगा hardware खरीदने की जरूरत नहीं – सिर्फ सॉफ्टवेयर या ब्राउज़र से काम हो जाता है।
आपका स्क्रिप्ट स्क्रीन पर बड़े अक्षरों में स्क्रॉल होता रहेगा, और आप कैमरे की तरफ देखते हुए नेचुरली बोल सकेंगे। इससे आँखें कैमरे में ही रहेंगी, वीडियो प्रोफेशनल लगेगा और री-टेक्स की संख्या कम हो जाएगी।
1. सबसे आसान और फ्री तरीके (कोई इंस्टॉल नहीं)
• Teleprompter.com (ब्राउज़र में चलता है):
वेबसाइट खोलें → https://app.teleprompter.com
अपना स्क्रिप्ट पेस्ट करें → फॉन्ट साइज़, स्पीड, कलर एडजस्ट करें → Full Screen कर लें।
Voice recognition से ऑटो स्क्रॉल भी हो जाता है (आप बोलते जाओ, वो खुद आगे बढ़ता है)।
वीडियो रिकॉर्डिंग का ऑप्शन भी है।
• CuePrompter या NanoPrompter (100% फ्री ब्राउज़र टूल):
बस स्क्रिप्ट पेस्ट करके शुरू करें। कोई अकाउंट नहीं चाहिए।
ये दोनों लैपटॉप, विंडोज/मैक किसी पर भी काम करते हैं।
2. बेहतर कंट्रोल के लिए फ्री सॉफ्टवेयर (रेकमेंडेड)
QPrompt – ये बेस्ट फ्री ओपन-सोर्स ऐप है (2026 में भी पॉपुलर)।
• Windows, Mac, Linux सब पर चलता है।
• डाउनलोड: qprompt.app या GitHub से (बहुत हल्का और स्मूथ)।
• फीचर्स: स्पीड कंट्रोल, मिरर मोड, कीबोर्ड शॉर्टकट, रिमोट कंट्रोल सपोर्ट।
• एक बार इंस्टॉल करके हमेशा इस्तेमाल कर सकते हैं।
3. बिना किसी एक्स्ट्रा सॉफ्टवेयर के (पुराना लेकिन काम का तरीका)
• Microsoft Word या Google Docs में स्क्रिप्ट लिखें।
• बड़े फॉन्ट (48-72 size), छोटी-छोटी लाइनें।
• Full Screen मोड → माउस व्हील से स्क्रॉल करें (या Word में Auto Scroll फीचर ऐड करें)।
• PowerPoint में भी स्लाइडशो मोड में इस्तेमाल कर सकते हैं।
लैपटॉप को सेटअप कैसे करें (प्रैक्टिकल टिप्स)
1. पोजीशन: लैपटॉप को कैमरे के ठीक नीचे या बगल में रखें (किताबों के स्टैक या लैपटॉप स्टैंड पर)। जितना करीब कैमरा लेंस के पास होगा, उतना बेहतर आँखों का कॉन्टैक्ट बनेगा।
2. कैमरा:
• लैपटॉप की वेबकैम यूज कर रहे हैं तो स्क्रिप्ट स्क्रीन के ऊपरी हिस्से में रखें।
• बेहतर है → एक्सटर्नल कैमरा/फोन + ट्राइपॉड यूज करें, लैपटॉप को प्रॉम्प्टर के रूप में नीचे रखें।
3. रिकॉर्डिंग: OBS Studio, Riverside.fm या Zoom में रिकॉर्ड करें (ये सब टेलीप्रॉम्प्टर के साथ काम करते हैं)।
4. स्क्रिप्ट टिप: छोटी-छोटी लाइनें लिखें, बोलने जैसी भाषा रखें। स्पीड 100-140 WPM के आसपास रखें।
अतिरिक्त फायदे
• Riverside.fm या Vimeo जैसे टूल्स में बिल्ट-इन टेलीप्रॉम्प्टर है – स्क्रिप्ट + रिकॉर्डिंग एक जगह।

कॉलेज से लेकर कॉर्पोरेट जिहाद तक: जिम्मेदार कौन कौन ?

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डॉ शिवानी कटारा

TCS केस की पीड़िता ने जब अपने हिन्दू HR (पुरुष) को अपनी व्यथा सुनाई तो उसने कहा,
आप Highlight क्यूं होना चाहती हैं

महिलाओं को कैसे रहना चाहिए इस पर खूब उपदेश दिए जाते हैं, पर यह सवाल कम उठता है कि पुरुषों की क्या जिम्मेदारी है। TCS जैसी जगहों पर भी पुरुष सहकर्मी मौजूद होते हैं—तो क्या उनका कर्तव्य सिर्फ मूक दर्शक बने रहना है? सारा दोष संस्कारों और परिवारों पर डाल देने से समस्या हल नहीं होगी। आज फेमिनिस्ट पुरुषों की भी आवश्यकता है, जो अपने घर की स्त्रियों के साथ-साथ बाहर हर कार्यक्षेत्र, कॉलेज और समाज में किसी भी महिला के सम्मान और सुरक्षा के लिए खड़े हों। हर जगह ‘बजरंग दल संगठन’ नहीं होगा, ऐसे में क्या वहाँ के पुरुष अपने सहपाठियों और सहकर्मियों का साथ नहीं देंगे?

अगर कोई महिला अपने सम्मान के लिए आवाज़ उठाती है या किसी गलत व्यवहार की शिकायत अपने आसपास के लोगों—खासकर हिंदू पुरुषों—से करती है, तो अक्सर देखा गया है कि कई लोग ऐसे कन्नी काट लेते हैं जैसे यह उनकी जिम्मेदारी ही न हो; जैसे यह सिर्फ “उसकी निजी समस्या” हो, न कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी। यही चुप्पी और दूरी अन्याय को और बढ़ावा देती है, जबकि असल में ज़रूरत है कि ऐसे समय पर लोग साथ खड़े हों, सुनें और समाधान करें ।

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