विदेशी जीएम लॉबी के चंगुल में भारत की खाद्य संप्रभुता? ‘जीएम-मुक्त भारत गठबंधन’ ने केंद्र सरकार को दी चेतावनी

20250504079L.jpg

नई दिल्ली: ‘जीएम-मुक्त भारत गठबंधन’ (Coalition for a GM-Free India) ने केंद्र सरकार को एक विस्तृत पत्र लिखकर अमेरिका की उन कुटिल रणनीतियों का पर्दाफाश किया है, जिसके माध्यम से भारत के बाजारों में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) मक्का और सोयाबीन को पिछले दरवाजे से घुसाने की कोशिश की जा रही है। गठबंधन ने कृषि, वाणिज्य, पर्यावरण और स्वास्थ्य मंत्रियों से आग्रह किया है कि वे अमेरिकी दबाव के आगे न झुकें और देश की जैव-विविधता व जन-स्वास्थ्य की रक्षा करें।

प्रमुख खुलासे: व्यापार की आड़ में संप्रभुता पर हमला:
गठबंधन ने साक्ष्यों के साथ बताया है कि कैसे अमेरिकी संस्थाएं भारत की नियामक व्यवस्थाओं को प्रभावित कर रही हैं:

आयोवा ‘पायलट प्रोजेक्ट’ का षड्यंत्र: अमेरिकी राज्य आयोवा और भारतीय औद्योगिक समूहों के बीच हुए समझौतों (MoUs) के माध्यम से महाराष्ट्र जैसे राज्यों को जीएम मक्का और इथेनॉल के आयात के लिए ‘प्रवेश द्वार’ बनाया जा रहा है।
वैज्ञानिक धोखा: अमेरिकी एजेंसियां दावा कर रही हैं कि जीएम सोयाबीन तेल और DDGS में आनुवंशिक सामग्री नहीं होती, जबकि स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षणों ने इन प्रसंस्कृत उत्पादों में भी जीएम अंशों की उपस्थिति की पुष्टि की है।

अवैध खेती और निर्यात पर खतरा: भारत में अवैध जीएम फसलों की मौजूदगी न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों (जैसे चावल) की साख को भी खत्म कर रही है।

हमारी मुख्य मांगें:

1. जीएम आयात पर रोक: अमेरिका से आने वाले जीएम बिनौला तेल, सोयाबीन तेल और DDGS के आयात को तुरंत रोका जाए।
2. लॉबी समूहों का निष्कासन: भारत सरकार के नीतिगत निर्णयों में हस्तक्षेप करने वाले विदेशी वित्तपोषित संस्थानों (SABP, BCIL, AFSI) की भागीदारी समाप्त की जाए।
3. संस्थागत जांच: ‘सोया एक्सीलेंस सेंटर’ और USGC के कार्यालयों को बंद किया जाए जो भारतीय किसानों के हितों के विरुद्ध काम कर रहे हैं।

यह केवल व्यापार का मामला नहीं है, बल्कि भारत की खाद्य संप्रभुता पर हमला है। हम अपने देश को विदेशी प्रयोगशालाओं का डंपिंग ग्राउंड नहीं बनने देंगे।”

Share this post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

scroll to top