-डॉ. मयंक चतुर्वेदी
दिल्ली । भारत के इतिहास में 11 मई 1998 का दिन वैज्ञानिक आत्मविश्वास और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनकर सामने आया था। राजस्थान के पोखरण में ‘ऑपरेशन शक्ति’ के तहत भारत ने पाँच सफल परमाणु परीक्षण कर दुनिया को यह संदेश दिया कि अब भारत परमाणु शक्ति संपन्न और तकनीकी रूप से सक्षम देश है। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में हर वर्ष 11 मई को “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” हम सभी मनाते हैं।
इस दिवस की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी, ताकि देश के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों के योगदान को सम्मान दिया जा सके। आज, 27 वर्षों बाद भारत की तकनीकी यात्रा पोखरण की रेत से निकलकर चंद्रमा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, 5G नेटवर्क और डिजिटल भुगतान तक पहुँच चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा भी है कि “यह दिन वैज्ञानिकों के प्रति गर्व और आभार व्यक्त करने का अवसर है तथा आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम की याद दिलाता है।”
चंद्रयान-3 : चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर भारत का परचम
भारत की तकनीकी क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण 23 अगस्त 2023 को देखने को मिला, जब Indian Space Research Organisation के चंद्रयान-3 मिशन ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग की। ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना। करीब ₹615-700 करोड़ की लागत वाले इस मिशन ने साबित किया कि भारतीय वैज्ञानिक सीमित संसाधनों में भी विश्वस्तरीय उपलब्धियाँ हासिल कर सकते हैं। इसके साथ भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद चंद्रमा पर सफल लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया। इस चंद्रयान-3 ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में नई पहचान दिलाई।
डिजिटल इंडिया और 5G
पिछले एक दशक में भारत ने डिजिटल क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, 2014 में देश में लगभग 25 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन थे, जबकि आज यह संख्या 100 करोड़ से अधिक हो चुकी है। देश के लगभग सभी जिलों में 5G नेटवर्क पहुँच चुका है और पांच लाख से अधिक 5G बेस स्टेशन कार्यरत हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े डेटा उपभोक्ता देशों में शामिल हो चुका है।
यही कारण है कि भारत में डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा प्रभाव गाँवों और छोटे शहरों में दिखाई देता है। किसान मोबाइल पर मौसम और फसल के दाम देख रहे हैं, विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं और छोटे व्यापारी डिजिटल माध्यम से कारोबार कर रहे हैं। तकनीक अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आम नागरिक के जीवन का हिस्सा बन चुकी है।
UPI और डिजिटल भुगतान से हर हाथ में डिजिटल ताकत पहुंची
भारत की डिजिटल सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण Unified Payments Interface यानी UPI है। आज देश में प्रतिदिन करोड़ों डिजिटल लेनदेन हो रहे हैं। गाँव के छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारियों तक, हर कोई UPI के जरिए भुगतान कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “UPI आज आसान उपयोग की वजह से दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया है।” भारत का यह डिजिटल भुगतान मॉडल अब कई देशों के लिए उदाहरण बन चुका है।
UPI ने न सिर्फ लेनदेन को आसान बनाया है, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी नई गति दी है। यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI भारत की नई तकनीकी शक्ति बनकर उभर रही है। अनुमान है कि जल्द ही भारत का AI उद्योग लगभग 28.8 बिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा। स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और प्रशासन में AI आधारित तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
इसके साथ ही भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इको-सिस्टम बन चुका है। 2014 में जहाँ देश में करीब 100 स्टार्टअप थे, वहीं आज उनकी संख्या 2026 में देखें तो दो लाख से अधिक हो चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह “भारत में नवाचार की नई क्रांति” है। फिनटेक, हेल्थटेक और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर नए समाधान विकसित कर रहे हैं। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
नवाचार और अनुसंधान में बढ़ता भारत
भारत आज वैश्विक नवाचार सूचकांक में लगातार आगे बढ़ रहा है। पेटेंट आवेदन के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो चुका है। जहाँ पहले सालाना लगभग 4,000 पेटेंट दर्ज होते थे, वहीं अब यह संख्या 30,000 से अधिक हो गई है। हालाँकि अनुसंधान एवं विकास यानी R&D पर भारत का खर्च अभी GDP का केवल 0.64 प्रतिशत है, जो विकसित देशों की तुलना में कम है। फिर भी सरकार लगातार इस क्षेत्र में निवेश बढ़ा रही है। यही निवेश भारत को भविष्य में क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में मजबूत बनाएगा।
इस तरह से अनेक क्षेत्रों में आज का भारत तेजी से आगे बढ़ता हुआ दिखता है। भारत के नागरिकों के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस कहना चाहिए कि भारत की आत्मनिर्भरता, नवाचार और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है। 1998 के पोखरण परीक्षणों ने दुनिया को भारत की शक्ति दिखाई थी, जबकि आज का भारत अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, AI और स्टार्टअप्स के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।
यह यात्रा उन लाखों वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और युवाओं की मेहनत का परिणाम है, जो देश को विकसित भारत बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। हर साल आनेवाली यह दिनांक 11 मई हमें यह याद दिलाती है कि विज्ञान और तकनीक मानव जीवन में प्रगति लेकर तो आती ही है, साथ में एक राष्ट्र को विश्व समुदाय एवं अन्य राष्ट्रों के सामने शक्ति के रूप में भी स्थापित करती है। ऐसे में कहना यही है कि वर्तमान समय में जिसके पास जितनी उन्नत तकनीकि है, वह उतना ही शक्तिशाली देश है। इस संदर्भ में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस आज वर्तमान भारत के विकास की गाथा कह रहा है।



