कॉलेज से लेकर कॉर्पोरेट जिहाद तक: जिम्मेदार कौन कौन ?

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डॉ शिवानी कटारा

TCS केस की पीड़िता ने जब अपने हिन्दू HR (पुरुष) को अपनी व्यथा सुनाई तो उसने कहा,
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महिलाओं को कैसे रहना चाहिए इस पर खूब उपदेश दिए जाते हैं, पर यह सवाल कम उठता है कि पुरुषों की क्या जिम्मेदारी है। TCS जैसी जगहों पर भी पुरुष सहकर्मी मौजूद होते हैं—तो क्या उनका कर्तव्य सिर्फ मूक दर्शक बने रहना है? सारा दोष संस्कारों और परिवारों पर डाल देने से समस्या हल नहीं होगी। आज फेमिनिस्ट पुरुषों की भी आवश्यकता है, जो अपने घर की स्त्रियों के साथ-साथ बाहर हर कार्यक्षेत्र, कॉलेज और समाज में किसी भी महिला के सम्मान और सुरक्षा के लिए खड़े हों। हर जगह ‘बजरंग दल संगठन’ नहीं होगा, ऐसे में क्या वहाँ के पुरुष अपने सहपाठियों और सहकर्मियों का साथ नहीं देंगे?

अगर कोई महिला अपने सम्मान के लिए आवाज़ उठाती है या किसी गलत व्यवहार की शिकायत अपने आसपास के लोगों—खासकर हिंदू पुरुषों—से करती है, तो अक्सर देखा गया है कि कई लोग ऐसे कन्नी काट लेते हैं जैसे यह उनकी जिम्मेदारी ही न हो; जैसे यह सिर्फ “उसकी निजी समस्या” हो, न कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी। यही चुप्पी और दूरी अन्याय को और बढ़ावा देती है, जबकि असल में ज़रूरत है कि ऐसे समय पर लोग साथ खड़े हों, सुनें और समाधान करें ।

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